Netflix India में आदित्य हूरिया की एंट्री : संभालेंगे 'Films & Series Marketing'

आदित्य हूरिया Netflix India में Marketing Manager के रूप में जुड़ने जा रहे हैं। वह Films और Series के लिए culture-first कैंपेन पर काम करेंगे और ऑडियंस एंगेजमेंट को मजबूत करेंगे।

Last Modified:
Wednesday, 29 April, 2026
adityahuriya


सूत्रों के मुताबिक, आदित्य हूरिया Netflix India में Marketing Manager के रूप में जुड़ने जा रहे हैं। वह Films और Series Marketing टीम का हिस्सा होंगे और culture-first कैंपेन के जरिए कंटेंट को दर्शकों से जोड़ने पर फोकस करेंगे।

इससे पहले आदित्य हूरिया YouTube में Digital Marketing Lead – YouTube Creators India के रूप में कार्यरत थे। उनके पास मीडिया और टेक इंडस्ट्री में एक दशक से अधिक का अनुभव है। अपने करियर में उन्होंने YouTube, Bumble, MTV, Times Network और Foxymoron जैसी कंपनियों के साथ काम किया है, जहां उन्होंने डिजिटल कैंपेन और ब्रांड एंगेजमेंट को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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दक्षिण भारत में GTPL का बड़ा कदम : ACT की 7 केबल कंपनियां खरीदीं

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अधिग्रहित सातों कंपनियों का संयुक्त कारोबार 1,640 मिलियन रुपये से अधिक रहा। इनमें ए.सी.एन केबल और ACT Digital Home Entertainment का योगदान सबसे अधिक रहा।

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
hathway

केबल टीवी वितरण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी जीटीपीएल हैथवे (GTPL Hathway) ने दक्षिण भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए एसीटी (ACT) समूह की सात कंपनियों के केबल टेलीविजन कारोबार का अधिग्रहण करने की घोषणा की है। कंपनी ने इस सौदे के लिए 36.23 करोड़ रुपये नकद भुगतान करने पर सहमति जताई है।

जीटीपीएल ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि उसने एसीटी समूह की सात कंपनियों के साथ बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट (BTA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत ए.सी.एन केबल प्राइवेट लिमिटेड, ACT Digital Home Entertainment, Atria Broadband Services, Kable First India, Sri Venkateshwara Digital Home Entertainment, Mandapeta Digital Entertainment और I.B. Communications Network के केबल टीवी कारोबार का अधिग्रहण किया जाएगा।

इन कंपनियों के पास आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और कर्नाटक के विभिन्न शहरों में लगभग 6 लाख केबल टीवी ग्राहक हैं। इस अधिग्रहण से जीटीपीएल को दक्षिण भारत के प्रमुख बाजारों में अपनी पहुंच और ग्राहक आधार बढ़ाने का अवसर मिलेगा। कंपनी के अनुसार यह सौदा 15 सितंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है और इसके लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती डीटीएच और ओटीटी प्रतिस्पर्धा के बीच यह अधिग्रहण जीटीपीएल की केबल टीवी रणनीति को मजबूत करेगा। साथ ही कंपनी को उन क्षेत्रों में तत्काल विस्तार मिलेगा, जहां एसीटी समूह पहले से मजबूत वितरण नेटवर्क और ग्राहक संबंध स्थापित कर चुका है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अधिग्रहित सातों कंपनियों का संयुक्त कारोबार 1,640 मिलियन रुपये (करीब 164 करोड़ रुपये) से अधिक रहा। इनमें ए.सी.एन केबल और ACT Digital Home Entertainment का योगदान सबसे अधिक रहा। हालांकि कुछ कंपनियों के राजस्व में पिछले वर्षों में गिरावट देखी गई है, लेकिन उनका मजबूत ग्राहक आधार और स्थानीय वितरण नेटवर्क उन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

जीटीपीएल ने स्पष्ट किया है कि यह किसी संबंधित पक्ष (Related Party) का लेनदेन नहीं है और कंपनी के प्रमोटरों या समूह की किसी इकाई का एसीटी समूह की इन कंपनियों में कोई हित नहीं है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार यह सौदा केबल वितरण क्षेत्र में जारी समेकन (Consolidation) की प्रक्रिया को और गति देगा तथा जीटीपीएल की बाजार स्थिति को मजबूत करेगा।

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मेटा' ने बिजनेस खरीदा या भारतीयों का डेटा? चर्चा में अर्नब मित्रा की पोस्ट

'मेटा' द्वारा 'क्रेड' के अधिग्रहण और कुणाल शाह को 'व्हाट्सऐप' का वैश्विक सीईओ बनाए जाने के बाद उद्यमी अर्नब मित्रा की एक लिंक्डइन पोस्ट ने डेटा संप्रभुता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
credmetadeal

मेटा' (Meta) द्वारा 'क्रेड' (CRED) के कथित 4.5 अरब डॉलर के अधिग्रहण और कुणाल शाह (Kunal Shah) को 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) का वैश्विक सीईओ नियुक्त किए जाने के एक दिन बाद डेटा संप्रभुता और डिजिटल गोपनीयता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इस बहस की शुरुआत मुंबई स्थित उद्यमी अर्नब मित्रा (Arnab Mitra) की एक तीखी 'लिंक्डइन' (LinkedIn) पोस्ट से हुई है।

'एलआईक्यूवीडी एशिया' (LIQVD ASIA) के प्रबंध निदेशक और 'डिजीबॉक्स' (DigiBoxx) के निदेशक अर्नब मित्रा (Arnab Mitra) ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि इस सौदे में वास्तव में 'मेटा' (Meta) ने खरीदा क्या है। उन्होंने लिखा कि 'क्रेड' (CRED) ने वर्षों में एक अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई और भारी घाटा दर्ज किया, लेकिन इसके बावजूद कंपनी का सबसे बड़ा मूल्य उसके बिजनेस मॉडल से अधिक उसके पास मौजूद यूजर डेटा में हो सकता है।

मित्रा का दावा है कि 'क्रेड' (CRED) के पास करोड़ों सत्यापित और क्रेडिट योग्य भारतीय उपभोक्ताओं की प्रोफाइल मौजूद हैं। उनके अनुसार यह सौदा केवल एक फिनटेक प्लेटफॉर्म का अधिग्रहण नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर डेटा तक पहुंच हासिल करने का मामला भी हो सकता है।

उन्होंने 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023' (Digital Personal Data Protection Act, 2023) का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि क्या उपयोगकर्ताओं से उनके वित्तीय डेटा के किसी विदेशी कंपनी को हस्तांतरण के लिए स्पष्ट सहमति ली गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो नियामकीय निगरानी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

हालांकि अर्नब मित्रा (Arnab Mitra) ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी कुणाल शाह (Kunal Shah) से नहीं है। उन्होंने लिखा कि एक उद्यमी के तौर पर शाह ने उपलब्ध अवसरों का सफलतापूर्वक उपयोग किया, लेकिन उनका सवाल उन नियमों और नीतियों से है जो इस तरह के सौदों को नियंत्रित करते हैं।

मित्रा की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया और स्टार्टअप जगत में चर्चा का केंद्र स्टार्टअप वैल्यूएशन और संस्थापकों की सफलता से हटकर डेटा ओनरशिप, सीमा-पार डेटा ट्रांसफर और भारत में नागरिकों के डेटा को रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखने की आवश्यकता पर आ गया है।

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'टेलीग्राम' पर अस्थायी रोक हटी : यूजर्स फिर कर सकेंगे ऐप का इस्तेमाल

NEET-UG री-एग्जाम के दौरान सुरक्षा कारणों से लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के बाद 'टेलीग्राम' की सेवाएं भारत में फिर से शुरू हो गई हैं। मैसेज और पोस्ट एडिट करने की सुविधा 30 जून तक बंद रहेगी।

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
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भारत में लाखों यूजर्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'टेलीग्राम' (Telegram) की सेवाएं फिर से बहाल कर दी गई हैं। NEET-UG री-एग्जाम के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को हटाने के बाद अब यूजर्स दोबारा सामान्य रूप से ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पिछले कई दिनों से कुछ यूजर्स को 'टेलीग्राम' (Telegram) का उपयोग करने, ऐप डाउनलोड करने और अपडेट प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। कुछ मामलों में यह 'गूगल प्ले स्टोर' (Google Play Store) और 'एप्पल ऐप स्टोर' (Apple App Store) पर भी दिखाई नहीं दे रहा था। अब प्रतिबंध हटने के बाद यूजर्स दोनों प्लेटफॉर्म्स से ऐप को फिर से डाउनलोड और इंस्टॉल कर सकते हैं।

सरकार ने NEET-UG री-एग्जाम के दौरान संभावित गलत गतिविधियों को रोकने के लिए 22 जून तक 'टेलीग्राम' (Telegram) पर अस्थायी रोक लगाई थी। हालांकि प्लेटफॉर्म पर मैसेज और पोस्ट एडिट करने की सुविधा अभी भी बंद रहेगी और यह प्रतिबंध 30 जून तक लागू रहेगा।

जानकारी के अनुसार, NEET परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले की जांच के दौरान एजेंसियों ने कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखी थी। इसी क्रम में 'टेलीग्राम' (Telegram) के कुछ चैनल और ग्रुप भी जांच के दायरे में आए थे। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि कुछ चैनलों का उपयोग परीक्षा से जुड़ी भ्रामक और अपुष्ट जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा था।

बताया गया है कि 3 जून को 'इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय' (MeitY) के अधिकारियों ने 'टेलीग्राम' (Telegram) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने एहतियातन ऐप, वेब लिंक और वेब वर्जन तक की पहुंच को अस्थायी रूप से सीमित करने का फैसला लिया था।

इस बीच 21 जून को NEET री-एग्जाम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया और अब तक किसी बड़े पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्र या अन्य धोखाधड़ी की घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में 'टेलीग्राम' (Telegram) की सेवाएं बहाल होने से छात्रों, कंटेंट क्रिएटर्स और बिजनेस यूजर्स को राहत मिली है।

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सिलिकॉन वैली छोड़ भारत लौटे श्यामल अनदकट: AI इकोसिस्टम पर जताया भरोसा

'ओपनएआई' की टीम का नेतृत्व कर चुके श्यामल अनदकट भारत लौट आए हैं। उनका मानना है कि अब वैश्विक स्तर की एआई कंपनियां दुनिया के किसी भी हिस्से से बनाई जा सकती हैं।

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
Shyaml Anadkat

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की अग्रणी कंपनी 'ओपनएआई' (OpenAI) में करीब चार वर्षों तक काम कर चुके श्यामल अनदकट (Shyaml Anadkat) भारत लौट आए हैं। सैन फ्रांसिस्को के बे एरिया (Bay Area) में स्थित 'ओपनएआई' (OpenAI) कार्यालय से एप्लाइड इवैल्स (Applied Evals) टीम का नेतृत्व करने वाले अनदकट अब भारत में रहकर एआई के भविष्य को आकार देने की तैयारी कर रहे हैं।

श्यामल अनदकट (Shyaml Anadkat) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी वापसी की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि 'ओपनएआई' (OpenAI) में लगभग चार साल बिताने के बाद वह इस वर्ष की शुरुआत में भारत लौट आए। उन्होंने लिखा कि उनका अब भी यह दृढ़ विश्वास है कि सुपरइंटेलिजेंस (Superintelligence) विज्ञान और तकनीक को तेजी से आगे बढ़ाएगी और इसका लाभ पूरी मानवता को मिलेगा।

उन्होंने बताया कि भारत लौटने का एक प्रमुख कारण यहां के इकोसिस्टम से उनका गहरा जुड़ाव है। भारत में पले-बढ़े होने के कारण वह हमेशा यहां की प्रतिभा और संभावनाओं से जुड़े रहे हैं। वापसी के बाद उन्होंने भारत और एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र के कई शोधकर्ताओं और इंजीनियरों से बातचीत की, जिससे उन्हें महसूस हुआ कि यहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं जो यहीं रहकर वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाली तकनीक विकसित करना चाहते हैं।

अनदकट का मानना है कि भारत में प्रतिभा और अवसरों की कोई कमी नहीं है। उनके अनुसार सबसे बड़ी जरूरत इस विश्वास की है कि दुनिया बदलने वाली कंपनियां केवल सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) में ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी हिस्से से बनाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का यह एक दुर्लभ अवसर है, जो कई पीढ़ियों में एक बार मिलता है।

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Telegram क्यों बना भारत में बहस का केंद्र? पेपर लीक, प्राइवेसी व पायरेसी के बीच फंसा ऐप

भारत में Telegram इन दिनों सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि एक बड़े सार्वजनिक और नीतिगत विमर्श का विषय बन गया है।

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
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भारत में Telegram इन दिनों सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि एक बड़े सार्वजनिक और नीतिगत विमर्श का विषय बन गया है। कभी प्राइवेसी, बड़े ग्रुप्स और तेज सूचना प्रसार के लिए लोकप्रिय रहा यह प्लेटफॉर्म अब परीक्षा सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन, पायरेसी, फर्जी सूचनाओं और डिजिटल रेगुलेशन से जुड़े सवालों के केंद्र में है।

हालिया विवाद तब और गहरा गया जब NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और लीक सामग्री के प्रसार को लेकर भारत सरकार ने Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया। इस कदम ने एक बार फिर उस बहस को तेज कर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्राइवेसी और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। 

भारत में Telegram की बढ़ती ताकत

Telegram की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। कंपनी के संस्थापक पावेल ड्यूरोव के अनुसार भारत Telegram का सबसे बड़ा बाजार है और यहां 15 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। भारत सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध की आलोचना करते हुए ड्यूरोव ने कहा कि इस फैसले का असर 150 मिलियन से ज्यादा भारतीय यूजर्स पर पड़ा।

वैश्विक स्तर पर Telegram ने 1 अरब से अधिक मंथली एक्टिव यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। भारत में इसकी लोकप्रियता की प्रमुख वजहें बड़े चैनल, 2 लाख तक सदस्यों वाले ग्रुप, क्लाउड स्टोरेज, बड़ी फाइल शेयरिंग क्षमता और अपेक्षाकृत मजबूत प्राइवेसी फीचर्स हैं।

आज Telegram का उपयोग केवल निजी बातचीत तक सीमित नहीं है। मीडिया संस्थान, कोचिंग संस्थान, निवेशक समुदाय, कंटेंट क्रिएटर्स, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक समूह भी बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

NEET विवाद और Telegram

Telegram को लेकर हालिया विवाद का सबसे बड़ा कारण NEET-UG 2026 परीक्षा रहा। भारत सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) का कहना है कि कुछ संगठित गिरोह Telegram का इस्तेमाल कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी भ्रामक या लीक सामग्री बेचने और प्रसारित करने के लिए कर रहे थे। इसी चिंता के चलते सरकार ने परीक्षा के पुनः आयोजन से पहले Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया।

सरकार का आरोप था कि Telegram के कुछ फीचर्स, विशेष रूप से संदेश संपादन (Message Editing), का दुरुपयोग कर ऐसे संदेश तैयार किए गए जिनसे यह आभास हो कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले उपलब्ध था। इस वजह से जांच एजेंसियों ने प्लेटफॉर्म की भूमिका की जांच शुरू की।

हालांकि Telegram का कहना है कि किसी भी प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कुछ लोग कर सकते हैं और इसके लिए पूरे प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कंपनी का तर्क है कि समस्या पेपर लीक करने वालों की है, न कि उस माध्यम की जहां जानकारी साझा की गई।

अदालत तक पहुंचा मामला

Telegram ने भारत सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा सूचना तक पहुंच के अधिकार पर असर डालने वाला कदम बताया। लेकिन बाद में अदालत ने सरकार के अस्थायी प्रतिबंध को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि परीक्षा की निष्पक्षता और सार्वजनिक हित को देखते हुए सरकार के कदम को तत्काल परिस्थितियों में उचित माना जा सकता है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सरकारी हस्तक्षेप की सीमा को लेकर नई कानूनी बहसें जन्म ले सकती हैं।

वहीं, फ्री स्पीच और डिजिटल राइट्स से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला एक ऐसा खतरनाक उदाहरण बन सकता है, जिससे सरकार किसी भी मैसेजिंग ऐप को जरूरत पड़ने पर रोक सकती है।

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब देश में मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षा के नतीजे पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिए गए। आरोप है कि परीक्षा से जुड़ी जानकारी और पेपर लीक टेलीग्राम चैनलों के जरिए फैलाया जा रहा था। इसके बाद सरकार ने ऐप पर कार्रवाई करते हुए 16 जून से अस्थायी रूप से इसे ब्लॉक कर दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस तेजस करिया ने कहा कि सरकार को यह अधिकार है कि वह जरूरत पड़ने पर पब्लिक एक्सेस रोकने के निर्देश दे सकती है। कोर्ट के इस फैसले के बाद बहस और तेज हो गई है। 

डिजिटल राइट्स संगठन इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह इंटरनेट की आजादी के लिए एक गलत संकेत है और इससे आगे चलकर और भी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने का रास्ता खुल सकता है।

वहीं, सरकार का तर्क है कि टेलीग्राम पर बैन इसलिए लगाया गया क्योंकि इसमें चैनल्स को आसानी से फिर से बनाया जा सकता है और यूजर्स अपनी पहचान छिपाकर भी एक्टिव रह सकते हैं, जिससे निगरानी और कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।

टेलीग्राम के फाउंडर पावेल डुरोव ने भी इस बैन की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे असल में उन यूजर्स को नुकसान होता है जो प्लेटफॉर्म का सही इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि गलत कंटेंट किसी और जगह भी फैल सकता है।

प्राइवेसी: Telegram की ताकत या चुनौती?

Telegram की पहचान लंबे समय से एक प्राइवेसी-केंद्रित प्लेटफॉर्म के रूप में रही है। कंपनी खुद को उन प्लेटफॉर्म्स से अलग बताती है जो यूजर्स का व्यापक डेटा एकत्र करते हैं।

यही वजह है कि पत्रकार, एक्टिविस्ट, कारोबारी और संवेदनशील विषयों पर चर्चा करने वाले समुदाय Telegram को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यही विशेषताएं कई बार जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन जाती हैं।

सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का तर्क है कि जब बड़े निजी समूह और चैनल पर्याप्त निगरानी के दायरे से बाहर रहते हैं, तो उनका इस्तेमाल गलत सूचना, धोखाधड़ी या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

कंटेंट मॉडरेशन पर बढ़ते सवाल

Telegram पर सबसे बड़ा सवाल कंटेंट मॉडरेशन को लेकर उठता है।

Meta, YouTube और अन्य बड़े प्लेटफॉर्म्स की तुलना में Telegram का मॉडल अलग है। कंपनी अपेक्षाकृत कम हस्तक्षेप वाले दृष्टिकोण का समर्थन करती रही है। लेकिन जैसे-जैसे प्लेटफॉर्म का आकार बढ़ा है, वैसे-वैसे उस पर जिम्मेदारी बढ़ाने की मांग भी तेज हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को केवल तकनीकी मंच नहीं माना जा सकता। जब करोड़ों लोग उनका उपयोग करते हैं, तो उन पर गलत सूचना, फर्जी निवेश योजनाओं, घोटालों और अवैध कंटेंट को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।

पायरेसी का बड़ा अड्डा बनने के आरोप

Telegram पर सबसे गंभीर आरोपों में से एक पायरेसी से जुड़ा है। हाल में प्रकाशित एक शोध अध्ययन के अनुसार Telegram पर संचालित 1,057 से अधिक पब्लिक चैनलों के विश्लेषण में 19,000 से ज्यादा कॉपीराइटेड वीडियो टाइटल्स के अवैध वितरण के प्रमाण मिले। शोधकर्ताओं के अनुसार इन चैनलों ने अरबों व्यूज हासिल किए और इससे कंटेंट मालिकों को अरबों डॉलर का संभावित नुकसान हुआ।

फिल्म, वेब सीरीज, लाइव स्पोर्ट्स और प्रीमियम वीडियो कंटेंट की अवैध शेयरिंग को लेकर मनोरंजन उद्योग लंबे समय से Telegram पर सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है। हालांकि Telegram का कहना है कि वह रिपोर्ट मिलने पर कॉपीराइट उल्लंघन से जुड़े कंटेंट को हटाता है और लगातार अपनी मॉडरेशन प्रक्रियाओं में सुधार कर रहा है।

फेक न्यूज और गलत सूचना की चुनौती

Telegram केवल पायरेसी ही नहीं, बल्कि गलत सूचना के प्रसार को लेकर भी चर्चा में रहा है।

विभिन्न देशों में हुए शोध बताते हैं कि सार्वजनिक चैनलों और बड़े समुदायों के जरिए राजनीतिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक जानकारी तेजी से फैल सकती है। ब्राजील सहित कई देशों में Telegram चैनलों पर वैक्सीन से जुड़ी गलत सूचनाओं के प्रसार का अध्ययन किया गया है।

हालांकि यह समस्या केवल Telegram तक सीमित नहीं है। WhatsApp, Facebook, X और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी इसी चुनौती से जूझ रहे हैं।

सरकारों की बढ़ती चिंता

भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में Telegram को लेकर नियामकीय चिंताएं बढ़ी हैं।

सरकारों की मुख्य चिंताएं हैं:

  • एन्क्रिप्टेड संचार
  • बड़े निजी समूह और चैनल
  • फर्जी सूचनाओं का प्रसार
  • पायरेसी
  • साइबर अपराध नेटवर्क्स
  • चुनावी और राजनीतिक प्रभाव

फ्रांस सहित कई देशों में Telegram और उसके संस्थापक पावेल ड्यूरोव को लेकर कानूनी जांच और नियामकीय कार्रवाई चर्चा का विषय रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दुनिया भर में सरकारें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से अधिक जवाबदेही की अपेक्षा कर रही हैं।

क्या प्रतिबंध ही समाधान है?

यहीं से सबसे महत्वपूर्ण बहस शुरू होती है।

सरकारों का कहना है कि जब राष्ट्रीय परीक्षाओं, सुरक्षा या कानून व्यवस्था का प्रश्न हो, तब अस्थायी प्रतिबंध आवश्यक कदम हो सकता है।

दूसरी ओर डिजिटल अधिकार समूहों का तर्क है कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना अक्सर अनुपातहीन प्रतिक्रिया साबित हो सकता है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार Telegram के प्रतिबंध के बाद VPN डाउनलोड्स में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह संकेत मिला कि कई यूजर्स ने वैकल्पिक रास्ते खोज लिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान बेहतर जांच, डिजिटल साक्षरता, मजबूत कंटेंट मॉडरेशन और प्लेटफॉर्म्स के साथ सहयोग में छिपा है, न कि केवल प्रतिबंधों में।

आगे की राह

Telegram को लेकर मौजूदा विवाद केवल एक ऐप की कहानी नहीं है। यह उस व्यापक चुनौती का प्रतीक है जिसका सामना दुनिया भर की सरकारें और टेक कंपनियां कर रही हैं।

एक तरफ यूजर्स की प्राइवेसी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षित संवाद का अधिकार है। दूसरी तरफ परीक्षा सुरक्षा, साइबर अपराध, फर्जी सूचनाएं और कॉपीराइट उल्लंघन जैसी वास्तविक चुनौतियां हैं।

भारत में Telegram पर चल रही बहस संभवतः आने वाले वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म रेगुलेशन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सवाल केवल यह नहीं है कि Telegram क्या कर रहा है, बल्कि यह भी है कि तेजी से डिजिटल होती दुनिया में सरकारें, टेक कंपनियां और नागरिक मिलकर किस तरह एक संतुलित और जवाबदेह डिजिटल इकोसिस्टम बना सकते हैं।

 

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2031 तक भारत में 110 करोड़ से ज्यादा होंगे 5G यूजर्स

एरिक्सन (Ericsson) की नई मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक 2031 तक भारत में 5G सब्सक्रिप्शन 1.1 अरब के पार पहुंच जाएगा। साथ ही प्रति स्मार्टफोन मासिक डेटा खपत 37GB से बढ़कर 70GB होने का अनुमान है।

Last Modified:
Monday, 22 June, 2026
5G users

भारत में 5G तकनीक का विस्तार तेजी से हो रहा है और आने वाले वर्षों में यह देश के डिजिटल परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है। एरिक्सन (Ericsson) की नवीनतम मोबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2031 तक भारत में 5G सब्सक्रिप्शन 1.1 अरब यानी 110 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगा। उस समय देश में कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा 5G नेटवर्क पर होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक 2025 के अंत तक भारत, नेपाल और भूटान क्षेत्र में 43 करोड़ 5G सब्सक्रिप्शन दर्ज किए गए थे, जो कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का 35 प्रतिशत हिस्सा थे। हालांकि 2025 में 4G की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक रही, लेकिन 2031 तक 4G यूजर्स की संख्या 57 करोड़ से घटकर करीब 16 करोड़ रह जाने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 5G स्मार्टफोन की बढ़ती उपलब्धता, सस्ती कीमतें और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) सेवाओं के विस्तार से यह बदलाव और तेज होगा। भारत पहले ही दुनिया में प्रति स्मार्टफोन सबसे अधिक मोबाइल डेटा खपत करने वाला देश बन चुका है। वर्तमान में भारतीय यूजर्स औसतन 37GB डेटा प्रति माह इस्तेमाल कर रहे हैं। एरिक्सन का अनुमान है कि 2031 तक यह आंकड़ा बढ़कर 70GB प्रति माह तक पहुंच जाएगा।

वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया, क्लाउड सेवाओं और AI आधारित एप्लिकेशंस की बढ़ती लोकप्रियता डेटा खपत को लगातार बढ़ा रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 5G भविष्य में केवल तेज इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्मार्ट सिटी, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, कनेक्टेड डिवाइसेज और एंटरप्राइज सेवाओं की नींव बनेगा।

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सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को चित्रा त्रिपाठी ने बताया फर्जी

'एबीपी न्यूज़' की सीनियर एंकर और पत्रकार चित्रा त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर को फर्जी और AI जनरेटेड बताया है। उन्होंने लिखा, वायरल तस्वीर फर्जी है।

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
chitratripathi

'एबीपी न्यूज़' (ABP News) की सीनियर एंकर और पत्रकार चित्रा त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर को लेकर सफाई दी है। उन्होंने अपने आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट कर दावा किया कि वायरल तस्वीर फर्जी है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया गया था कि बुलेट मोटरसाइकिल पर एक व्यक्ति के साथ नजर आ रही महिला चित्रा त्रिपाठी हैं। पोस्ट में दोनों के बीच कथित व्यक्तिगत संबंधों को लेकर भी कई दावे किए गए थे। हालांकि चित्रा त्रिपाठी ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया।

अपने X पोस्ट में चित्रा त्रिपाठी ने लिखा, "ये फेक फोटो है। बुलेट की ये तस्वीर बिहार की है। AI की मदद से फोटो तैयार की गई है। मैं इस व्यक्ति को जानती भी नहीं हूँ।" उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग फर्जी सोशल मीडिया आईडी बनाकर उनके फोटो का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने लिखा, "लड़कियों का नाम रखकर फेक ID से मेरे फोटो का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इतनी मेहनत अपने करियर को बनाने में करते तो आज ये लोग जीवन में कुछ अच्छा कर रहे होते।" चित्रा त्रिपाठी की इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर AI जनरेटेड कंटेंट और डीपफेक तस्वीरों को लेकर बहस तेज हो गई है।

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IPL2027 के लिए नई तारीखों पर विचार, बदलेगा टूर्नामेंट का शेड्यूल

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) IPL 2027 के लिए टूर्नामेंट विंडो में बदलाव पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार लीग 10 मार्च से शुरू होकर 15 मई तक समाप्त हो सकती है।

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
ipl2027

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2027 के शेड्यूल में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। बोर्ड टूर्नामेंट को मौजूदा समय से पहले शुरू करने पर विचार कर रहा है, ताकि प्लेऑफ और फाइनल मुकाबलों पर अत्यधिक गर्मी और प्री-मानसून बारिश का असर न पड़े।

BCCI सचिव देवजीत सैकिया (Devajit Saikia) ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि बोर्ड IPL 2027 को 10 मार्च के आसपास शुरू करने और 15 मई तक समाप्त करने की संभावना पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य टूर्नामेंट के अंतिम चरण को प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से बचाना है।

आमतौर पर IPL मार्च के आखिरी सप्ताह में शुरू होकर मई के अंत या जून की शुरुआत तक चलता है। IPL 2026 का आयोजन 28 मार्च से 31 मई तक हुआ था। हालांकि हाल के वर्षों में टूर्नामेंट के अंतिम मुकाबले भीषण गर्मी और कई स्थानों पर प्री-मानसून बारिश की आशंका के बीच खेले गए हैं।

सैकिया ने कहा कि 15 मई के बाद कई राज्यों में बारिश की शुरुआत होने लगती है, जबकि तेज गर्मी खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए चुनौती बन जाती है। इसी कारण बोर्ड नए शेड्यूल पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

प्रस्तावित विंडो से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर के साथ तालमेल बैठाने में भी मदद मिल सकती है। यह भारत-ऑस्ट्रेलिया बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (Border-Gavaskar Trophy) के बाद का समय होगा, जिससे विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता भी बेहतर हो सकती है।

हालांकि BCCI ने फिलहाल IPL को 74 मैचों से बढ़ाकर 94 मैच करने की अटकलों को खारिज कर दिया है। बोर्ड का कहना है कि व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को देखते हुए मौजूदा फॉर्मेट ही जारी रहेगा। अंतिम फैसला प्रसारकों, फ्रेंचाइजियों और अन्य हितधारकों से चर्चा के बाद लिया जाएगा।

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भारत में डिजिटल धोखाधड़ी का खतरा बढ़ा: वैश्विक औसत से दोगुना निकला फ्रॉड रेट

'ट्रांसयूनियन' की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में संदिग्ध डिजिटल धोखाधड़ी का स्तर वैश्विक औसत से लगभग दोगुना है। वहीं टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ते साइबर जोखिमों पर चिंता जताई गई है।

Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
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भारत में डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। 'ट्रांसयूनियन' (TransUnion) की 16 जून को जारी H1 2026 Top Fraud Trends Report के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत के 7.1 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन संदिग्ध धोखाधड़ी की श्रेणी में पाए गए। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 3.8 प्रतिशत की तुलना में लगभग दोगुना है, जो देश में बढ़ते साइबर खतरों की ओर संकेत करता है।

रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराधी अब केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पहचान आधारित हमलों (Identity-Based Attacks) पर भी तेजी से ध्यान दे रहे हैं। वैश्विक स्तर पर जहां अकाउंट क्रिएशन (Account Creation) सबसे जोखिम भरा चरण माना जाता है, वहीं भारत में सबसे ज्यादा खतरा अकाउंट लॉगिन (Account Login) प्रक्रिया के दौरान देखा गया है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में 3.9 प्रतिशत अकाउंट लॉगिन प्रयास संदिग्ध पाए गए। वहीं अकाउंट क्रिएशन के दौरान यह दर 3.1 प्रतिशत और वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) में 1.2 प्रतिशत रही। इससे संकेत मिलता है कि साइबर अपराधी चोरी किए गए या समझौता किए गए लॉगिन क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर मौजूदा खातों को निशाना बना रहे हैं।

उद्योगवार विश्लेषण में लॉजिस्टिक्स (Logistics) क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां संदिग्ध डिजिटल धोखाधड़ी की दर 16.3 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद टेलीकॉम (Telecom) क्षेत्र 14.7 प्रतिशत और बीमा (Insurance) क्षेत्र 11.5 प्रतिशत के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2024 से 2025 के बीच टेलीकॉम सेक्टर में धोखाधड़ी के मामलों में 308 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई। वहीं बीमा क्षेत्र में 145 प्रतिशत और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

'ट्रांसयूनियन इंडिया डेटा एनालिटिक्स सॉल्यूशंस' (TransUnion India Data Analytics Solutions-INDAS) के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ते साइबर खतरों से निपटने के लिए कंपनियों को उन्नत पहचान सत्यापन, मल्टी-लेयर फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम और AI आधारित सुरक्षा उपायों को अपनाना होगा।

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टेक कंपनियों के दबाव के बावजूद बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करेगा ब्रिटेन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर प्रतिबंध लगाने की योजना का ऐलान किया है। बच्चों को डिजिटल लत से बचाने के लिए ये कदम उठाया गया है।

Last Modified:
Tuesday, 16 June, 2026
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर (Keir Starmer) ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर प्रतिबंध लगाने की योजना का ऐलान किया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते नकारात्मक प्रभाव को कम करना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल माहौल उपलब्ध कराना है।

कीर स्टारमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक पोस्ट के जरिए इस प्रस्तावित फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई अभिभावकों ने उन्हें बताया है कि उनके बच्चे स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के आदी हो चुके हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, आज के समय में तकनीक बच्चों के जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित कर रही है और अब इस स्थिति को बदलने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने का फैसला आसान नहीं है, क्योंकि कई बड़ी टेक कंपनियां इस कदम का विरोध कर रही हैं। इसके बावजूद सरकार बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

ब्रिटेन सरकार हाल के महीनों में टेक कंपनियों पर लगातार दबाव बना रही है। सरकार ने कंपनियों से उम्र सत्यापन (Age Verification) प्रणाली लागू करने, एल्गोरिद्म (Algorithm) में बदलाव करने और बच्चों को अश्लील एवं हानिकारक कंटेंट से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा है।

इसके अलावा सरकार ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) और वीडियो स्ट्रीमिंग (Video Streaming) प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) गतिविधियों को भी बच्चों के लिए सीमित या प्रतिबंधित करने पर विचार कर रही है।

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