'प्राइम टाइम' से 'पॉडकास्ट टाइम' तक: भारत में मीडिया की बदलती ताकत

जनवरी 2025 की एक सुबह। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुई। न कोई टीवी चैनल, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस- बस एक कैमरा, एक माइक्रोफोन, और दो आदमी आमने-सामने बैठे।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 23 May, 2026
Last Modified:
Saturday, 23 May, 2026
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जनवरी 2025 की एक सुबह। यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड हुई। न कोई टीवी चैनल, न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस- बस एक कैमरा, एक माइक्रोफोन, और दो आदमी आमने-सामने बैठे। Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामत के पॉडकास्ट 'People by WTF' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठे थे और यह उनका पहला पॉडकास्ट अपीयरेंस था। फिर मार्च 2025 में मोदी अमेरिकी पॉडकास्टर Lex Fridman के साथ करीब तीन घंटे बात करते दिखे। क्लिप्स वायरल हुईं, न्यूज चैनलों ने उन्हें चलाया, सोशल मीडिया पर बहस हुई। यह महज एक इंटरव्यू नहीं था। यह एक संकेत था, भारत में मीडिया की शक्ति का केंद्र बदल रहा है।

टीवी का दरबार खाली होने लगा

कुछ साल पहले तक प्राइम टाइम टीवी डिबेट ही वह जगह थी जहां जनमत बनता था। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है।

FICCI-EY की 2026 मीडिया एंड एंटरटेनमेंट रिपोर्ट (मार्च 2026, 2025 के आंकड़े) के अनुसार, भारत में लीनियर टीवी विज्ञापन राजस्व में लगभग 10% (10.3%) की गिरावट आई, और ब्रैंड्स की संख्या भी 3% घटी जो TV पर विज्ञापन दे रहे थे। इसी साल डिजिटल विज्ञापन 26% बढ़कर ₹947 अरब पर पहुंच गया, जो कुल विज्ञापन राजस्व का 63% हो गया, पहली बार डिजिटल ने TV को पीछे छोड़ा।

Kantar की मीडिया कम्पास रिपोर्ट (Q3 2025) बताती है कि लीनियर TV की पहुंच Q1 2025 के 70.5 करोड़ से घटकर Q3 2025 में 68.9 करोड़ रह गई। इसके विपरीत, डिजिटल-ओनली दर्शक, यानी जो लोग बिना TV देखे केवल इंटरनेट पर कंटेंट देखते हैं, 2024 की तुलना में 30% बढ़कर 31.3 करोड़ हो गए, जो भारत की 15+ आबादी का 26% है।

IPL 2026 का आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है। BARC India और TAM Sports के data के मुताबिक TV रेटिंग्स 4.57 (IPL 2025) से गिरकर 3.71 (IPL 2026) पर आ गईं, 18.8% की गिरावट। औसत viewership 26% गिरकर 1.06 करोड़ से 78.4 लाख रह गई। जबकि JioStar ने पहले वीकेंड पर डिजिटल में 51.5 करोड़ की रीच और 32.6 अरब मिनट का वाच टाइम दर्ज किया।

यह सिर्फ कंटेंट का बदलाव नहीं है। यह ऑडियंस के भरोसे का पलायन है, TV स्टूडियो से माइक्रोफोन की तरफ।

पॉडकास्ट का विस्फोट: नंबर बोलते हैं

भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पॉडकास्ट बाजार है, अमेरिका और चीन के बाद।

Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पॉडकास्ट श्रोता 2024 के करीब 10 करोड़ से बढ़कर 2025 में 20 करोड़ हो गए। Astute Analytica के अनुसार भारत का पॉडकास्ट बाजार 2024 में $56 करोड़ (USD 560 million) का था और 2033 तक $424.8 करोड़ (USD 4.24 billion) तक पहुंचने का अनुमान है, 25.5% CAGR के साथ।

भारत में करीब 2.5 करोड़ लोग रोजाना कम से कम एक पॉडकास्ट सुनते हैं। और वे सुनते कब हैं? ऑफिस जाते समय, जिम में, खाना बनाते हुए। यह "बैकग्राउंड कंजप्शन" का नया युग है।

वैश्विक तस्वीर भी उतनी ही तेज है। Deloitte TMT Predictions 2026 का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक पॉडकास्ट और वीडियो पॉडकास्ट (vodcast) का कुल विज्ञापन राजस्व $5 अरब (USD 5 billion) तक पहुंचेगा, पिछले साल की तुलना में करीब 20% की वृद्धि। IAB/PwC की 2025 Internet ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू रिपोर्ट के अनुसार 2025 में पॉडकास्ट ad revenue 17.6% बढ़कर $2.9 अरब (USD 2.9 billion) पर पहुंचा। इसी दौरान अमेरिका में TV ऐडवर्टाइजिंग 13.4% गिरा।

नेता अब TV स्टूडियो नहीं, माइक्रोफोन ढूंढते हैं

राजनेताओं का पॉडकास्ट की तरफ झुकाव इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी गवाही है।

जनवरी 2025 में PM मोदी ने निखिल कामत के साथ करीब दो घंटे की बातचीत की, यह उनका पहला पॉडकास्ट था। मार्च 2025 में Lex Fridman के साथ लगभग तीन घंटे की चर्चा हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प ने Joe Rogan के पॉडकास्ट पर तीन घंटे बिताए, जो उस चुनाव के सबसे चर्चित मीडिया मूमेंट्स में से एक बना।

सवाल यह है कि नेता TV से पॉडकास्ट की तरफ क्यों जा रहे हैं?

जवाब सीधा है: नैरेटिव कंट्रोल।

टीवी डिबेट्स में अक्सर शोर-शराबा, टोका-टाकी और बहस के बीच बात अधूरी रह जाती है। वहीं पॉडकास्ट एक शांत और कंट्रोल माहौल देते हैं, जहां लोग खुलकर और लंबी बातचीत कर पाते हैं। यहां सिर्फ छोटे ‘साउंड बाइट’ नहीं, बल्कि पूरी कहानी सुनने को मिलती है। यही वजह है कि पॉडकास्ट के छोटे-छोटे क्लिप्स सोशल मीडिया पर कई दिनों तक वायरल होते रहते हैं।

लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। सवाल उठ रहा है कि क्या पॉडकास्ट अब कठिन पत्रकारिता से बचने का जरिया बनते जा रहे हैं? जब नेता अपने पसंदीदा होस्ट के साथ बैठते हैं, तो अक्सर मुश्किल सवाल कम पूछे जाते हैं और जवाबदेही भी कम नजर आती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निखिल कामत के पॉडकास्ट पर आने के बाद कांग्रेस ने भी यही सवाल उठाए थे। पॉडकास्ट की ‘ऑथेंटिसिटी’ और अपनी कहानी को कंट्रोल करने की कोशिश, इन दोनों के बीच का यही टकराव अब मीडिया की बड़ी बहस बनता जा रहा है।

युवा भरोसा क्यों करते हैं, TV की बजाय?

यह सिर्फ मीडिया के एक नए फॉर्मेट का मामला नहीं है, बल्कि लोगों के भरोसे के बदलने की कहानी है।

Grand View Research की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2024 में News & Politics सबसे ज्यादा कमाई करने वाला पॉडकास्ट कैटेगरी रहा, जिसकी हिस्सेदारी 35.5% थी। इसका मतलब साफ है, लोग अब पॉडकास्ट पर सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि खबर, राय और विश्लेषण के लिए भी जा रहे हैं। यह काम पहले ज्यादातर टीवी करता था।

टीवी को लंबे समय से एक “authority-based medium” माना जाता रहा है, जहां एंकर दर्शकों को बताता है कि क्या सही है और क्या गलत। लेकिन पॉडकास्ट एक “personality-based medium” बनकर उभरा है, जहां रणवीर अलहाबादिया, निखिल कामत और राज समानी जैसे होस्ट अपनी सामान्य और असली आवाज में बात करते हैं। वे अपनी गलतियां भी मानते हैं, सवाल भी उठाते हैं और बातचीत को ज्यादा नेचुरल रखते हैं।

Deloitte की TMT 2026 रिपोर्ट भी इसी ट्रेंड की तरफ इशारा करती है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिजनेस, एजुकेशन, हेल्थ और फाइनेंस जैसे खास विषयों पर काम करने वाले क्रिएटर्स आने वाले समय में ज्यादा तेजी से बढ़ेंगे, क्योंकि उनकी ऑडियंस उनसे ज्यादा जुड़ी हुई और भरोसा करने वाली होती है।

ऑडियो-वीडियो हाइब्रिड: पॉडकास्ट सिर्फ "सुनने की चीज" नहीं रहा

पॉडकास्ट अब सिर्फ ऑडियो तक सीमित नहीं रहे। धीरे-धीरे यह एक पूरा वीडियो फॉर्मेट बनते जा रहे हैं।

Deloitte की TMT Predictions 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, एक बड़ा पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म अब अपने 60% से ज्यादा टॉप शोज में वीडियो भी दे रहा है। यानी लोग अब सिर्फ सुन नहीं रहे, बल्कि पॉडकास्ट देख भी रहे हैं। Deloitte के 2025 Digital Media Trends सर्वे में यह भी सामने आया कि 27% लोग हर हफ्ते वीडियो पॉडकास्ट देखते हैं, और इसमें Gen Z और मिलेनियल्स सबसे आगे हैं।

वीडियो पॉडकास्ट के बढ़ने से “क्लिप्स इकॉनमी” भी तेजी से बढ़ी है। अब एक पॉडकास्ट सिर्फ एक वीडियो नहीं रहता, बल्कि उससे कई तरह का कंटेंट बनता है। उदाहरण के लिए, 2 घंटे के एक पॉडकास्ट से 20-30 छोटे क्लिप्स निकल जाते हैं, जो Reels, Shorts और X जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लाखों व्यूज़ और इम्प्रेशंस लाते हैं।

Interactive Advertising Bureau और PwC की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में डिजिटल वीडियो रेवेन्यू 25.4% बढ़कर 78 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह सबसे तेजी से बढ़ने वाला फॉर्मेट रहा। इसका सीधा फायदा वीडियो पॉडकास्ट्स को मिल रहा है, क्योंकि अब advertisers ऑडियो और वीडियो, दोनों को साथ में खरीद रहे हैं।

विज्ञापन का पैसा: TV से माइक्रोफोन की तरफ

मीडिया की असली ताकत अक्सर इस बात से समझी जाती है कि विज्ञापन का पैसा कहां जा रहा है। और इस समय पॉडकास्ट तेजी से विज्ञापनदाताओं को अपनी तरफ खींच रहे हैं।

Grand View Research के Horizon Databook के मुताबिक, भारत का पॉडकास्ट विज्ञापन बाजार 2024 में करीब 275.7 मिलियन डॉलर का था, जो 2030 तक बढ़कर 586.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। यानी यह बाजार तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 77% से ज्यादा हिस्सा होस्ट-रीड विज्ञापनों का है।

होस्ट-रीड विज्ञापन इसलिए खास माने जाते हैं क्योंकि ये टीवी विज्ञापनों से बिल्कुल अलग होते हैं। टीवी पर विज्ञापन अक्सर लोगों को बीच में रोकते हैं, इसलिए कई बार दर्शक चैनल बदल देते हैं या उठकर दूसरे काम में लग जाते हैं। लेकिन पॉडकास्ट में जब खुद होस्ट किसी प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में बात करता है, तो वह एक सिफारिश जैसा लगता है। लोग उसे ज्यादा भरोसे के साथ सुनते हैं।

इसी वजह से D2C ब्रांड्स, फिनटेक कंपनियां और एडटेक प्लेटफॉर्म्स अब पॉडकास्ट स्पॉन्सरशिप पर ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं, क्योंकि वहां उन्हें ज्यादा फोकस्ड और इंगेज्ड ऑडियंस मिलती है। EY और Big Bang Social की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री, जिसमें पॉडकास्ट क्रिएटर्स भी शामिल हैं, 2026 तक 3,375 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

खतरे भी हैं: जब माइक बेलगाम हो जाए

इस पूरी तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

टीवी में चाहे कितना भी शोर-शराबा हो, लेकिन वहां एक संपादकीय व्यवस्था होती है। एक एडिटर होता है, लीगल टीम होती है और ब्रॉडकास्टिंग के नियम भी होते हैं। लेकिन पॉडकास्ट की दुनिया में ऐसी निगरानी अभी बहुत कम है।

सबसे बड़ा खतरा गलत जानकारी फैलने का है। जब लाखों-करोड़ों लोग किसी होस्ट पर भरोसा करने लगते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। लेकिन अभी पॉडकास्ट की दुनिया में जवाबदेही तय करने का सिस्टम उतना मजबूत नहीं है।

दूसरी चिंता “पर्सनैलिटी कल्ट” की है। यानी जब किसी क्रिएटर की हर बात को बिना सवाल किए सच मान लिया जाए। टीवी पर नेताओं को अक्सर एंकर के कठिन सवालों का सामना करना पड़ता है, लेकिन पॉडकास्ट में माहौल ज्यादा दोस्ताना होता है। ऐसे में बिना जांचे दावे, भरोसेमंद आवाज और बड़ी पहुंच, ये मिलकर एक तरह के “सॉफ्ट प्रोपेगेंडा” का जरिया भी बन सकते हैं।

तीसरा बड़ा सवाल क्षेत्रीय भाषाओं का है। भारत की बड़ी आबादी हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में सोचती और समझती है। Deloitte की रिपोर्ट भी कहती है कि बिजनेस, एजुकेशन और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में क्षेत्रीय भाषाओं के पॉडकास्ट तेजी से बढ़ेंगे। Kuku FM और Hubhopper जैसे प्लेटफॉर्म इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन यह बाजार अभी शुरुआती दौर में ही है।

अब आगे क्या?

FICCI-EY, Deloitte और Grand View Research, इन तीनों की रिपोर्ट एक बात साफ कहती हैं: आने वाले पांच सालों में भारत का मीडिया जगत जितना बदलेगा, उतना शायद पिछले बीस सालों में भी नहीं बदला।

भारत का पॉडकास्ट बाजार तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी तरफ टीवी विज्ञापनों की रफ्तार धीमी पड़ रही है, जबकि डिजिटल-ओनली दर्शकों की संख्या 31 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। और सबसे बड़ा संकेत यह है कि देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi भी अब पॉडकास्ट पर नजर आ रहे हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि टीवी खत्म हो जाएगा। FICCI-EY की रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी आज भी करीब 74.5 करोड़ साप्ताहिक दर्शकों वाला बड़ा माध्यम है। इतना बड़ा प्लेटफॉर्म अचानक खत्म नहीं होता। लेकिन अब वह अकेला भी नहीं है।

जो ताकत कभी सिर्फ टीवी के पास थी, लोगों की राय बनाने की और मुद्दे तय करने की, वह अब धीरे-धीरे उन लोगों की तरफ जा रही है, जिनके पास एक अच्छा माइक्रोफोन, एक कैमरा और अपनी बात कहने का भरोसा है।

हो सकता है कि भारत के अगले बड़े opinion leaders किसी बड़े टीवी स्टूडियो में नहीं, बल्कि घर के एक छोटे से कमरे में, हेडफोन लगाकर माइक्रोफोन के सामने बैठे हों।

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e4m Connected TV Conference: AI, डेटा व CTV के जरिए मीडिया ग्रोथ पर मंथन

e4m Connected TV Conference के एक खास फायरसाइड चैट में Publicis Media South Asia के सीईओ लालतेंदु दास और 'एक्सचेंज4मीडिया' के को-फाउंडर नवल आहूजा के बीच बातचीत होगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 10 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 10 June, 2026
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e4m Connected TV Conference का चौथा संस्करण 11 जून को मुंबई में आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन में विज्ञापन और मार्केटिंग जगत के कई प्रमुख इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, मार्केटर्स और बिजनेस लीडर्स एक मंच पर जुटेंगे। इस बार के e4m Connected TV Conference में एक खास फायरसाइड चैट होगी, जिसमें Publicis Media South Asia के सीईओ लालतेंदु दास और 'एक्सचेंज4मीडिया' के को-फाउंडर नवल आहूजा के बीच बातचीत होगी।

यह चर्चा ‘AI, Data & CTV: Building the Next Generation of Media Growth’ विषय पर केंद्रित होगी। Connected TV (CTV) की बढ़ती लोकप्रियता के बीच यह सत्र इस बात पर प्रकाश डालेगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा आधारित रणनीतियां किस तरह मीडिया इंडस्ट्री को बदल रही हैं। इस बातचीत से यह समझने का अवसर मिलेगा कि तकनीक की बदलती भूमिका किस तरह बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद कर रही है।

e4m Connected TV Conference में CTV के अगले दौर पर होगी गहन चर्चा

लालतेंदु दास इस सत्र में अपने अनुभव और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करेंगे। वह बताएंगे कि ब्रांड्स किस तरह AI और डेटा का इस्तेमाल करके Connected TV प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं को अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी अनुभव दे सकते हैं।

इस चर्चा में यह भी सामने आएगा कि AI, डेटा और Connected TV का मेल किस तरह इनोवेशन, ऑडियंस एंगेजमेंट और विज्ञापन की प्रभावशीलता के नए अवसर पैदा कर रहा है। साथ ही यह सत्र इंडस्ट्री के सामने उभर रहे नए अवसरों, दर्शकों के बदलते व्यवहार, भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा करेगा।

इंडस्ट्री जगत के सीनियर लीडर्स, मार्केटर्स, मीडिया प्रोफेशनल्स और एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में होने वाली यह फायरसाइड चैट मीडिया ग्रोथ के भविष्य को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होगी। इसमें शामिल होने वाले लोगों को Connected TV, AI और डेटा आधारित मीडिया रणनीतियों के भविष्य से जुड़ी कई अहम जानकारियां और उपयोगी इनसाइट्स मिलने की उम्मीद है।

 

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MIB ने BARC को दिए निर्देश, TRP पर रोक के दौरान न्यूज चैनलों से न वसूला जाए शुल्क

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का मानना है कि जब न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को रेटिंग डेटा ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो उनसे उस सेवा के लिए शुल्क लेना उचित नहीं होगा।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 08 June, 2026
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Monday, 08 June, 2026
BARC India

न्यूज चैनलों की TRP पर जारी रोक के बीच केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को निर्देश दिया है कि जब तक न्यूज चैनलों की टेलीविजन रेटिंग (TRP) जारी नहीं की जा रही है, तब तक उनसे ऑडियंस मेजरमेंट सर्विस के लिए कोई सब्सक्रिप्शन शुल्क न लिया जाए।

मामले से जुड़े इंडस्ट्री जगत के अधिकारियों के अनुसार, मंत्रालय का मानना है कि जब न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को रेटिंग डेटा ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो उनसे उस सेवा के लिए शुल्क लेना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर BARC को निर्देश दिया गया है कि TRP सस्पेंशन या तथाकथित ‘डार्क पीरियड’ के दौरान न्यूज चैनलों से फीस न वसूली जाए।

हालांकि, इस फैसले के बाद BARC की स्वायत्तता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञों का कहना है कि BARC एक इंडस्ट्री-नेतृत्व वाली संस्था है और सदस्यता शुल्क जैसे मामलों में निर्णय आमतौर पर संस्था के भीतर ही लिए जाते रहे हैं। ऐसे में मंत्रालय का सीधे हस्तक्षेप करना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खबर लिखे जाने तक BARC की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।

TRP बंदी से पहले ही जूझ रही है इंडस्ट्री

टीवी न्यूज इंडस्ट्री लंबे समय से साप्ताहिक TRP डेटा के बिना काम कर रही है। TRP को विज्ञापन सौदों, मीडिया प्लानिंग और कार्यक्रमों की स्ट्रैटेजी तय करने का प्रमुख आधार माना जाता है। ऐसे में रेटिंग्स के अभाव ने न्यूज चैनलों और विज्ञापनदाताओं दोनों के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

BARC अपनी आय का एक हिस्सा ब्रॉडकास्टर्स और अन्य हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) से मिलने वाले सब्सक्रिप्शन शुल्क से प्राप्त करता है। TRP डेटा बंद होने के बाद इंडस्ट्री में यह बहस चल रही थी कि जब सेवा उपलब्ध नहीं है तो क्या चैनलों को इसके लिए भुगतान करना चाहिए। मंत्रालय के ताजा निर्देश के बाद फिलहाल यह विवाद समाप्त होता नजर आ रहा है।

चार सप्ताह और बढ़ाई गई TRP सस्पेंशन अवधि

यह निर्देश ऐसे समय आया है जब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज चैनलों की टीवी रेटिंग्स पर लगी रोक को चार सप्ताह और बढ़ा दिया है। BARC ने हाल ही में अपने सब्सक्राइबर्स को सूचित किया था कि मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार न्यूज चैनलों की ऑडियंस रेटिंग्स को फिलहाल और जारी नहीं किया जाएगा।

इस साल मार्च में मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी टीवी न्यूज कवरेज में कथित सनसनीखेज और अटकलों पर आधारित रिपोर्टिंग की चिंताओं का हवाला देते हुए न्यूज रेटिंग्स पर रोक लगाई थी। सरकार का तर्क था कि TRP आधारित प्रतिस्पर्धा गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग को बढ़ावा दे सकती है। इसके बाद इस रोक को कई बार बढ़ाया जा चुका है।

नई TRP नीति पर भी जारी है विवाद

TRP सस्पेंशन के समानांतर सरकार ने हाल ही में टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 लागू की है, जिसने 2014 के पुराने दिशानिर्देशों की जगह ली है। नई नीति में कई संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य दर्शक मापन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है।

नई नीति का सबसे चर्चित प्रावधान ‘लैंडिंग पेज’ व्यूअरशिप को अंतिम रेटिंग गणना से बाहर करना है। लैंडिंग पेज वह चैनल होता है जो टीवी ऑन करते ही डिफॉल्ट रूप से दिखाई देता है। कई न्यूज चैनल लंबे समय से इस व्यवस्था को रेटिंग्स को कृत्रिम रूप से बढ़ाने वाला मानते रहे हैं।

हालांकि, इस प्रावधान का केबल डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) ने विरोध किया। मामला बाद में केरल हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने मई में इस प्रावधान पर अंतरिम रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मंत्रालय ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर यह फैसला लिया है।

विज्ञापन बाजार पर भी असर

इंडस्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि TRP डेटा की अनुपलब्धता से विज्ञापनदाताओं के लिए विभिन्न न्यूज चैनलों के बीच निवेश का आकलन करना कठिन हो गया है। TRP विज्ञापन दरें तय करने, प्रायोजन समझौतों और कंटेंट रणनीति बनाने का प्रमुख आधार होती है।

फिलहाल कई चैनल पुराने प्रदर्शन, ब्रांड वैल्यू और विज्ञापनदाताओं के साथ सीधे संबंधों के आधार पर कारोबार चला रहे हैं। हालांकि, लंबे समय तक TRP डेटा उपलब्ध न रहने से टीवी विज्ञापन बाजार में पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

मंत्रालय के ताजा निर्देश से न्यूज चैनलों को आर्थिक राहत जरूर मिली है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि नियमित TRP सेवाएं कब से दोबारा शुरू होंगी। ऐसे में भारतीय टीवी न्यूज इंडस्ट्री अब भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। 

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टाइम्स नाउ नवभारत पर न्यूज की पाठशाला के लिए आ रही हैं ‘मैडम’!

प्रोमो जारी होने के बाद मीडिया इंडस्ट्री में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, शो के साथ रुबिका लियाकत की एंट्री की चर्चा है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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Published - Monday, 08 June, 2026
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Monday, 08 June, 2026
News Ki Pathshala Show

देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शुमार ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ (Times Now Navbharat) के एक नए प्रोमो ने हिंदी न्यूज इंडस्ट्री में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। चैनल की ओर से जारी किए गए इस टीजर में कहा गया है, ‘खबरें तो सब बताएंगे, लेकिन उन्हें समझाएगा कौन? इसीलिए... मैडम आ रही हैं! क्लास मिस मत कीजिएगा, यहां आपकी अटेंडेंस जरूरी है! ‘न्यूज की पाठशाला’ सिर्फ TIMES NOW नवभारत पर।’

प्रोमो में ‘मैडम’ और ‘न्यूज की पाठशाला’ का जिक्र सामने आते ही मीडिया गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ‘न्यूज की पाठशाला’ वही शो है, जिसे लंबे समय तक वरिष्ठ पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर सुशांत सिन्हा होस्ट करते रहे थे। हाल ही में सुशांत सिन्हा ने टाइम्स नाउ नवभारत से विदाई लेकर ‘न्यूज18 इंडिया’ के साथ नई पारी शुरू की है।

ऐसे में अब चर्चा इस बात को लेकर तेज हो गई है कि आखिर चैनल इस लोकप्रिय शो की कमान किसे सौंपने जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो इस प्रोमो को रुबिका लियाकत की संभावित एंट्री से जोड़कर देखा जा रहा है। मीडिया इंडस्ट्री में पहले से ही उनके टाइम्स नाउ नवभारत के साथ जुड़ने की चर्चाएं चल रही हैं और अब इस नए प्रोमो ने इन अटकलों को और बल दे दिया है।

हालांकि, चैनल की ओर से अभी तक इस बारे में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। न तो ‘मैडम’ की पहचान का खुलासा किया गया है और न ही शो के नए होस्ट को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने आई है। ऐसे में फिलहाल दर्शकों और मीडिया जगत की निगाहें टाइम्स नाउ नवभारत की अगली घोषणा पर टिकी हैं।

बता दें कि सुशांत सिन्हा के जाने के बाद से ही यह सवाल उठ रहा था कि ‘न्यूज़ की पाठशाला’ को आगे कौन संभालेगा। अब चैनल के इस नए प्रोमो ने उस चर्चा को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल सभी की निगाहें चैनल की अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जो ‘मैडम’ की पहचान और ‘न्यूज की पाठशाला’ के नए चेहरे से पर्दा उठा सकती है।

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फंड जुटाने की तैयारी में ZEEL, 10 जून को बोर्ड बैठक में होगा बड़ा फैसला

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव कंपनी अधिनियम, 2013, सेबी (इश्यू ऑफ कैपिटल एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2018 और अन्य लागू कानूनों के तहत आवश्यक मंजूरियों के अधीन होगा।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 08 June, 2026
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Monday, 08 June, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) फंड जुटाने की योजना पर विचार कर रही है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में बताया है कि उसके निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) की बैठक 10 जून 2026, बुधवार को आयोजित की जाएगी, जिसमें फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।

कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भेजी सूचना में कहा है कि बोर्ड बैठक में इक्विटी शेयरों या इक्विटी शेयरों में परिवर्तित होने वाली अन्य प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) के जरिए पूंजी जुटाने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की जाएगी।

ZEEL के अनुसार, कंपनी एक या एक से अधिक चरणों (ट्रांच) में फंड जुटा सकती है। इसके लिए प्राइवेट प्लेसमेंट, प्रेफरेंशियल इश्यू या कानून के तहत उपलब्ध किसी अन्य वैध माध्यम अथवा उनके संयोजन का इस्तेमाल किया जा सकता है। फंड जुटाने की शर्तें और तरीका बोर्ड अपने विवेक के अनुसार तय करेगा।

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव कंपनी अधिनियम, 2013, सेबी (इश्यू ऑफ कैपिटल एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2018 और अन्य लागू कानूनों के तहत आवश्यक मंजूरियों के अधीन होगा। इसके लिए कंपनी के शेयरधारकों और संबंधित नियामकीय एवं वैधानिक प्राधिकरणों की मंजूरी भी आवश्यक होगी।

इस बीच, सेबी के इनसाइडर ट्रेडिंग निषेध नियम, 2015 और कंपनी की आचार संहिता के तहत ZEEL के शेयरों में कारोबार के लिए ट्रेडिंग विंडो तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई है। यह प्रतिबंध बोर्ड बैठक समाप्त होने के 48 घंटे बाद तक जारी रहेगा। 

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'Sony Pictures Networks India' ने हासिल किए इंडिया ए ट्राई-नेशन सीरीज के अधिकार

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Pictures Networks India) ने भारत A, श्रीलंका A और अफगानिस्तान A के बीच होने वाली त्रिकोणीय सीरीज के टीवी और डिजिटल प्रसारण अधिकार हासिल कर लिए हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 06 June, 2026
Last Modified:
Saturday, 06 June, 2026
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‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Pictures Networks India) ने भारत A, श्रीलंका A और अफगानिस्तान A के बीच होने वाली त्रिकोणीय क्रिकेट सीरीज के टेलीविज़न और डिजिटल प्रसारण अधिकार हासिल कर लिए हैं।

यह टूर्नामेंट 9 जून से 21 जून तक श्रीलंका में खेला जाएगा। भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव और श्रीलंका में दर्शक मुकाबलों का सीधा प्रसारण ‘सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क’ (Sony Sports Network) और ‘सोनी LIV’ (Sony LIV) पर देख सकेंगे। सभी मैच भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे से अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ कमेंट्री के साथ प्रसारित किए जाएंगे।

इस प्रतियोगिता में कई उभरते क्रिकेटरों पर नजर रहेगी। इनमें वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) सबसे चर्चित नाम हैं, जिन्हें पहली बार भारत A की एकदिवसीय टीम में जगह मिली है। इसके अलावा प्रियांश आर्य (Priyansh Arya), आयुष बडोनी (Ayush Badoni) और सूर्यांश शेडगे (Suryansh Shedge) भी टीम का हिस्सा हैं।

भारत A टीम की कप्तानी तिलक वर्मा (Tilak Varma) करेंगे, जबकि रुतुराज गायकवाड़ (Ruturaj Gaikwad) उपकप्तान की भूमिका निभाएंगे। टीम में निशांत सिंधु, प्रभसिमरन सिंह, कुमार कुशाग्र, विप्रज निगम, यश ठाकुर, युधवीर सिंह, अंशुल कंबोज, अरशद खान और अनुकूल रॉय जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं।

‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Pictures Networks India) के स्पोर्ट्स बिजनेस प्रमुख और वितरण व अंतरराष्ट्रीय कारोबार के मुख्य राजस्व अधिकारी राजेश कौल (Rajesh Kaul) ने कहा कि यह सीरीज क्षेत्र के उभरते क्रिकेटरों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होगी। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट का नया आकर्षण बताया।

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जल्द 'न्यूज18 इंडिया' की स्क्रीन पर नजर आएंगे सुशांत सिन्हा, प्रोमो किया शेयर

‘टाइम्स नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में कंसल्टिंग एडिटर व न्यूज एंकर की भूमिका निभा रहे सुशांत सिन्हा अब 'न्यूज18 इंडिया' पर नजर आएंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 05 June, 2026
Last Modified:
Friday, 05 June, 2026
sushant sinha

देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शामिल ‘टाइम्स नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में कंसल्टिंग एडिटर और लोकप्रिय न्यूज एंकर की भूमिका निभा रहे सुशांत सिन्हा अब 'न्यूज18 इंडिया' पर नजर आएंगे। उन्होंने 'नेटवर्क18' समूह जॉइन कर लिया है।

दरअसल, 'समाचार4मीडिया' ने ही विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से सबसे पहले खबर दी थी कि ‘टाइम्स नेटवर्क’ से विदाई तय मानी जा रही है, क्योंकि सुशांत सिन्हा का इस चैनल के साथ कॉन्ट्रैक्ट 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा है और नेटवर्क रिन्यू करने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों ने तो यहां तक कह दिया था कि वह जल्द ही ‘नेटवर्क18’ के साथ नई पारी शुरू करने जा रहे हैं और अब इस पर आधिकारिक मुहर लग गई है। सुशांत सिन्हा ने एक प्रोमो जारी किया है।

इस खबर से 'समाचार4मीडिया' ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाठकों का भरोसा उस पर क्यों है। दरअसल, यहां ये बताना जरूरी हो जाता है कि 'समाचार4मीडिया' की ही खबरों को कई वेबसाइट अपने प्लेटफॉर्म पर पब्लिश करती हैं।  

यहां पढ़ें पुरानी खबर- टाइम्स नेटवर्क से सुशांत सिन्हा की विदाई तय, Network18 जाने की तैयारी!

गौरतलब है कि सुशांत सिन्हा हिंदी न्यूज इंडस्ट्री का एक जाना-माना चेहरा हैं। टाइम्स नाउ नवभारत पर ‘पाठशाला’ और ‘राष्ट्रगर्व’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने खास पहचान बनाई। करीब दो दशक के करियर में वह इंडिया टीवी, एनडीटीवी इंडिया, न्यूज24 और इंडिया न्यूज जैसे संस्थानों में भी काम कर चुके हैं। 

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NDTV हिंदी व रीजनल बिजनेस को मिलेगी नई रफ्तार, गौरव मेहरा को सौंपी ये बड़ी जिम्मेदारी

गौरव मीडिया, ब्रैंडेड कंटेंट, सेल्स, ग्रोथ स्ट्रैटेजी और कस्टम मार्केटिंग के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 05 June, 2026
Last Modified:
Friday, 05 June, 2026
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'एनडीटीवी' (NDTV) ने गौरव मेहरा को एनडीटीवी हिंदी व रीजनल चैनल्स के ब्रैंड स्टूडियो का रेवेन्यू हेड नियुक्त किया है। गौरव मीडिया, ब्रैंडेड कंटेंट, सेल्स, ग्रोथ स्ट्रैटेजी और कस्टम मार्केटिंग के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं।

गौरव मेहरा NDTV में TV9 नेटवर्क से जुड़े हैं, जहां वे नेशनल हेड व वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे। इस भूमिका में उन्होंने ब्रॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट आधारित ग्रोथ को नेतृत्व दिया। इससे पहले वे नेटवर्क18 ग्रुप, जी एंटरटेनमेंट, रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क, CNBC-TV18, Idea Cellular और Vodafone India जैसी प्रमुख कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।

अमृतसर के DAV कॉलेज और Faculty of Management Studies (FMS) के पूर्व छात्र गौरव मेहरा ने अपने करियर के दौरान कई सफल ब्रैंडेड कंटेंट बिजनेस तैयार किए और उन्हें बड़े स्तर तक पहुंचाया। उन्होंने इंटीग्रेटेड कैंपेन, उद्देश्यपूर्ण स्टोरीटेलिंग, एडिटोरियल इंटीग्रेशन, डिजिटल, इन्फ्लुएंसर और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशंस के जरिए मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ हासिल की है।

उनके प्रमुख कैंपेंस में Castrol Super Mechanic Contest, Mahindra Unlimit Bharat, Sensodyne Oral Health Awareness, Samsung Campaigns, Castrol Pragati Ki Paathshaala और Ultratech Baat Ghar Ki जैसे चर्चित प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इस नियुक्ति पर NDTV के CEO और Editor-in-Chief Rahul Kanwal ने कहा, “गौरव के पास ब्रैंड्स, बाजार और कंटेंट आधारित रेवेन्यू मॉडल की गहरी समझ है। NDTV अपने हिंदी और क्षेत्रीय नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और ऐसे समय में स्केलेबल ब्रैंड सॉल्यूशंस और मजबूत साझेदारियां बनाने का उनका अनुभव हमारी ग्रोथ जर्नी को नई ताकत देगा।”

NDTV के Chief Experiences Officer Rahul Shaw ने कहा, “गौरव की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि हम ऐसे रेवेन्यू लीडर्स को टीम में शामिल कर रहे हैं जो बाजार की समझ के साथ सहयोग, रचनात्मकता और बेहतरीन निष्पादन की क्षमता रखते हैं। हम उनका स्वागत करते हैं और Brand Studio बिजनेस में उनके योगदान को लेकर उत्साहित हैं।”

अपनी नई जिम्मेदारी पर Gaurav Mehrraa ने कहा, “NDTV भारत के सबसे सम्मानित और विश्वसनीय मीडिया ब्रैंड्स में से एक है, जिसकी मजबूत मौजूदगी कई भाषाओं और प्लेटफॉर्म्स पर है। मैं टीम से जुड़कर बेहद उत्साहित हूं और ऐसे ब्रैंड सॉल्यूशंस विकसित करना चाहता हूं जो भरोसे, प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग और मापने योग्य परिणामों का बेहतरीन संयोजन पेश करें।”

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राज टेलीविजन के शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव पर कंपनी ने कही ये बात

राज टेलीविजन नेटवर्क (Raj Television Network Ltd) के शेयरों में हाल में आई तेज कीमतों की हलचल को लेकर स्टॉक एक्सचेंज ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 05 June, 2026
Last Modified:
Friday, 05 June, 2026
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राज टेलीविजन नेटवर्क (Raj Television Network Ltd) के शेयरों में हाल में आई तेज कीमतों की हलचल को लेकर स्टॉक एक्सचेंज ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था। निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार को ताजा व प्रासंगिक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक्सचेंज ने 3 जून 2026 को कंपनी को यह नोटिस भेजा था।

इस संबंध में कंपनी ने 4 जून 2026 को BSE और NSE को अपना जवाब भेज दिया है।

कंपनी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि उसके शेयरों में जो भी कीमतों का उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, वह पूरी तरह से बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की गतिविधियों पर आधारित है। कंपनी प्रबंधन का इस मूल्य परिवर्तन पर कोई नियंत्रण नहीं है और न ही उसे शेयर कीमतों में आई इस महत्वपूर्ण तेजी या गिरावट के पीछे किसी विशेष कारण की जानकारी है।

Raj Television Network ने यह भी स्पष्ट किया कि वह SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 और स्टॉक एक्सचेंजों के साथ हुए समझौतों के तहत सभी जरूरी जानकारियों का समय-समय पर खुलासा करती रही है और आगे भी करती रहेगी। 

 

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टीवी रेटिंग पर रोक फिर बढ़ी : ‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) का फैसला

नई रोक 4 जून 2026 को जारी होने वाले डाटा रिलीज से लागू होगी। यह टेलीविज़न मेज़रमेंट कैलेंडर के Week 21 से जुड़ा डेटा था, जो 23 मई से 29 मई 2026 की अवधि को कवर करता है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 03 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 03 June, 2026
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‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने न्यूज चैनलों की टेलीविज़न ऑडियंस रेटिंग्स पर लगी रोक को चार हफ्तों के लिए और बढ़ा दिया है। इस फैसले से ब्रॉडकास्टर्स, एडवर्टाइजर्स और मीडिया प्लानर्स के बीच अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि पूरा सेक्टर वीकली व्यूअरशिप डेटा पर काफी हद तक निर्भर करता है।

‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया’ (BARC India) ने सोमवार को अपने सब्सक्राइबर्स को भेजे गए कम्युनिकेशन में इस फैसले की जानकारी दी।

BARC India के मुताबिक उसे मंत्रालय की ओर से नया निर्देश मिला है, जिसमें कहा गया है कि TV न्यूज चैनलों की रेटिंग्स रिपोर्टिंग को अगले चार हफ्तों तक या अगले आदेश तक रोके रखा जाए। नई रोक 4 जून 2026 को जारी होने वाले data release से लागू होगी। यह टेलीविज़न मेज़रमेंट कैलेंडर के Week 21 से जुड़ा डेटा था, जो 23 मई से 29 मई 2026 की अवधि को कवर करता है।

इससे पहले मई में भी मंत्रालय ने रेटिंग्स रिपोर्टिंग पर रोक लगाने का आदेश दिया था। अब नई अवधि बढ़ने के बाद न्यूज ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में ratings दोबारा शुरू होने को लेकर इंतजार और लंबा हो गया है।

TV न्यूज रेटिंग्स एडवर्टाइजर्स और मीडिया एजेंसीज़ के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर एडवर्टाइजिंग स्पेंड्स और कैंपेन प्लानिंग तय की जाती है।

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'रिपब्लिक टीवी' व 'भारत एक्सप्रेस' समेत 10 चैनलों को DD Free Dish पर मिली जगह

प्रसार भारती ने अपनी फ्री-टू-एयर डीटीएच सेवा 'डीडी फ्री डिश' (DD Free Dish) पर खाली पड़े MPEG-4 कैरिज स्लॉट्स के लिए आयोजित 99वीं ई-नीलामी (e-auction) के नतीजों की घोषणा कर दी है।

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Published - Wednesday, 03 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 03 June, 2026
DD Free Dish

प्रसार भारती ने अपनी फ्री-टू-एयर डीटीएच सेवा 'डीडी फ्री डिश' (DD Free Dish) पर खाली पड़े MPEG-4 कैरिज स्लॉट्स के लिए आयोजित 99वीं ई-नीलामी (e-auction) के नतीजों की घोषणा कर दी है। इस नीलामी में 10 टीवी चैनलों को स्लॉट आवंटित किए गए हैं।

सफल बोली लगाने वाले चैनलों में Republic TV, Bharat Express, Vistaar News, Nation 27, News India 24X7, R. Bangla, Living India News, Prag News, Rengoni और NE News शामिल हैं।

प्रसार भारती के अनुसार, इन नए स्लॉट्स का संचालन 5 जून 2026 से शुरू होगा और ये 31 मार्च 2027 तक वैध रहेंगे।

यह मध्य-वर्षीय (Mid-Year) ई-नीलामी, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले आयोजित 97वीं ई-नीलामी के बाद की गई है। उस नीलामी में पूरे साल के लिए 39 स्लॉट्स आवंटित किए गए थे। अप्रैल के बाद कुछ स्लॉट खाली हो जाने के कारण इन रिक्तियों को भरने के लिए 99वीं ई-नीलामी आयोजित की गई।

प्रसार भारती ने इस नीलामी के लिए 19 मई से 26 मई 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए थे।

ई-नीलामी में उपलब्ध स्लॉट्स को विभिन्न कंटेंट श्रेणियों और क्षेत्रीय भाषा वर्गों में बांटा गया था, ताकि 'डीडी फ्री डिश' पर अलग-अलग भाषाओं और कंटेंट का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

इसके तहत G1 बकेट को न्यूज व करंट अफेयर्स (News & Current Affairs) वाले चैनलों के लिए रखा गया था, जिसकी आरक्षित कीमत 61.65 लाख रुपये तय की गई थी। वहीं G2 बकेट नॉन-न्यूज (Non-News) चैनलों के लिए था, जिसकी आरक्षित कीमत 60 लाख रुपये रखी गई थी।

क्षेत्रीय भाषा चैनलों के लिए भी अलग-अलग कैटेगरीज बनाई गई थीं। R1, R2 और R3 नाम के इन बकेट्स में दक्षिण भारतीय, पश्चिमी, पूर्वी और संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों को शामिल किया गया था।

इन क्षेत्रीय स्लॉट्स की आरक्षित कीमत 4.94 लाख रुपये से लेकर 34.83 लाख रुपये तक तय की गई थी।

प्रसार भारती का कहना है कि अलग-अलग स्तर की यह मूल्य निर्धारण व्यवस्था दर्शकों की मांग और विभिन्न क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय चैनलों की कमाई की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। 'डीडी फ्री डिश' देश का सबसे बड़ा फ्री-टू-एयर टेलीविजन वितरण प्लेटफॉर्म माना जाता है और यहां स्लॉट हासिल करना प्रसारकों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

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