YouTube ने अमेरिका में अपने सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमतें बढ़ा दी हैं। Premium और Music प्लान महंगे हुए हैं, जबकि Lite प्लान भी नए रेट पर उपलब्ध होगा। यह कदम बढ़ती लागत के बीच उठाया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
YouTube ने अमेरिका में अपने सब्सक्रिप्शन प्लान की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी के अनुसार, नए रेट अगले बिलिंग साइकिल से लागू होंगे और कुछ प्लान्स में $4 तक की बढ़ोतरी की गई है। अब YouTube Premium का व्यक्तिगत प्लान $13.99 से बढ़कर $15.99 प्रति माह हो गया है, जबकि फैमिली प्लान की कीमत $4 बढ़कर $26.99 प्रति माह कर दी गई है। वहीं YouTube Music Premium की कीमत में $1 की बढ़ोतरी करते हुए इसे $11.99 प्रति माह कर दिया गया है।
YouTube Lite, जो कम कीमत वाला विकल्प है और अधिकांश वीडियो बिना विज्ञापन के देखने की सुविधा देता है, अब $8.99 प्रति माह में उपलब्ध होगा। हालांकि इस प्लान में Shorts और म्यूजिक कंटेंट पर विज्ञापन जारी रहेंगे। कंपनी ने बताया कि यह बढ़ोतरी पिछले तीन वर्षों में पहली बार की गई है। YouTube Premium को 2018 में लॉन्च किया गया था, जो पहले YouTube Red के नाम से जाना जाता था।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब Netflix, Disney+ और Spotify जैसे अन्य स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स भी अपनी कीमतें बढ़ा चुके हैं। YouTube के अनुसार, बढ़ी हुई कीमतों से वह यूजर्स को बेहतर सुविधाएं जैसे विज्ञापन-रहित वीडियो, बैकग्राउंड प्ले और बड़े म्यूजिक लाइब्रेरी का अनुभव जारी रख सकेगा।
मेटा (Meta) ने Facebook, Instagram और WhatsApp के लिए नए कंज्यूमर सब्सक्रिप्शन प्लान्स लॉन्च करने की घोषणा की है। इन प्लान्स में यूजर्स को कई एक्स्ट्रा और प्रीमियम फीचर्स मिलने वाले हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अगर आप Facebook, Instagram और WhatsApp पर आम यूजर्स से अलग एक्स्ट्रा फीचर्स चाहते हैं, तो Meta आपके लिए नया सब्सक्रिप्शन प्लान लेकर आ रहा है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने प्रमुख एप्स के लिए नए कंज्यूमर सब्सक्रिप्शन प्लान्स को ग्लोबली रोलआउट करेगी।
Meta की प्रोडक्ट हेड नाओमी ग्लाइट (Naomi Gleit) ने बताया कि कुछ डॉलर प्रति महीने की कीमत पर यूजर्स को कई नए और मजेदार फीचर्स मिलेंगे। उन्होंने साफ किया कि ये प्लान Meta Verified यानी ब्लू टिक सेवा से अलग होंगे। Meta Verified पहले की तरह वेरिफिकेशन, सुरक्षा और एक्स्ट्रा सपोर्ट के लिए काम करता रहेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Instagram Plus और Facebook Plus की कीमत 3.99 डॉलर प्रति माह हो सकती है। वहीं WhatsApp Plus के लिए यूजर्स को हर महीने 2.99 डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं।
WhatsApp Plus में यूजर्स को कस्टम थीम, अलग रिंगटोन, प्रीमियम स्टिकर्स और ज्यादा चैट्स पिन करने जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। वहीं Instagram और Facebook Plus में एडवांस टूल्स और अतिरिक्त कंट्रोल दिए जाने की तैयारी है। हालांकि ये फीचर्स फिलहाल भारतीय यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं हुए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि कंपनी जल्द इन्हें भारत में भी लॉन्च कर सकती है।
इसके अलावा Meta, AI और क्रिएटर फोकस्ड “Meta One” प्लान भी लाने की तैयारी में है। इसके Plus प्लान की कीमत 7.99 डॉलर और Premium प्लान की कीमत 19.99 डॉलर प्रति माह बताई जा रही है।
Google ने अपने AI Search अनुभव में नए अपडेट पेश किए हैं। कंपनी अब Preferred Sources और नए लिंक कैरोसेल फीचर्स के जरिए भरोसेमंद और ओरिजिनल कंटेंट को ज्यादा महत्व देगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने अपने AI Search अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई नए अपडेट पेश किए हैं। इन नए फीचर्स का उद्देश्य यूजर्स को उनके पसंदीदा और भरोसेमंद सोर्स से कंटेंट दिखाना, ओरिजिनल रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना और अलग-अलग नजरिए आसानी से उपलब्ध कराना है।
कंपनी अब अपने “Preferred Sources” फीचर को AI Overviews और AI Mode तक विस्तारित कर रही है। इसके जरिए यूजर्स उन वेबसाइट्स को चुन सकेंगे, जिन्हें वे भरोसेमंद मानते हैं। चुने गए सोर्स AI-जनरेटेड जवाबों में साफ तौर पर दिखाई देंगे, जिससे उनकी पहचान आसान होगी।
Google के मुताबिक Preferred Sources सेट करने के लिए यूजर्स को Search Personalisation सेटिंग्स में जाकर अपनी पसंदीदा वेबसाइट्स चुननी होंगी। कंपनी ने बताया कि अब तक यूजर्स 3.45 लाख से ज्यादा यूनिक सोर्स चुन चुके हैं। Google का दावा है कि Preferred Source चुनने के बाद यूजर्स उसके लिंक पर दोगुना ज्यादा क्लिक करते हैं।
इसके अलावा कंपनी AI Search में नए लिंक कैरोसेल फॉर्मेट भी ला रही है। यह खासतौर पर तेजी से विकसित हो रहे विषयों पर अलग-अलग रिपोर्ट्स और संदर्भ दिखाएगा, ताकि यूजर्स कई दृष्टिकोण देख सकें। Google सोशल मीडिया और फोरम चर्चाओं से जुड़े perspectives वाले कैरोसेल भी शुरू करेगी, जिससे कम्युनिटी आधारित राय और अनुभव सामने आ सकें।
Meta ने Forum नाम का नया स्टैंडअलोन ऐप लॉन्च किया है, जो Facebook Groups और कम्युनिटी डिस्कशन पर आधारित है। फिलहाल यह ऐप अमेरिका में iPhone यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मेटा (Meta) ने चुपचाप Forum नाम का नया स्टैंडअलोन ऐप लॉन्च किया है। यह ऐप Facebook Groups और कम्युनिटी आधारित चर्चाओं पर फोकस करता है। कंपनी इसे “गहरी चर्चाओं, सही जवाबों और पसंदीदा कम्युनिटीज के लिए समर्पित प्लेटफॉर्म” बता रही है।
फिलहाल Forum केवल अमेरिका में iPhone यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है। यह लॉन्च Meta के नए इमेज-शेयरिंग ऐप Instants के कुछ ही दिनों बाद हुआ है, जिसकी तुलना Snapchat और BeReal जैसे प्लेटफॉर्म्स से की जा रही थी।
यूजर्स अपने Facebook अकाउंट के जरिए Forum में लॉग-इन कर सकते हैं। लॉग-इन के बाद ऐप Facebook Groups की पोस्ट्स को डिस्कशन-आधारित फीड में दिखाता है। यहां यूजर्स बातचीत पढ़ सकते हैं, नए ग्रुप्स खोज सकते हैं और सीधे कम्युनिटीज में पोस्ट भी कर सकते हैं।
Meta के मुताबिक यह ऐप ट्रेंडिंग कंटेंट के बजाय सलाह, चर्चा और जानकारी साझा करने पर ज्यादा जोर देगा। यूजर्स इसमें निकनेम का इस्तेमाल कर पोस्ट कर सकेंगे, हालांकि उनकी गतिविधियां उनके Facebook अकाउंट से जुड़ी रहेंगी। Forum में शेयर किया गया कंटेंट संबंधित Facebook Groups पर भी दिखाई देगा।
एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने वायरल वीडियो और मीम्स की चोरी रोकने के लिए नया नियम लागू किया है। अब कंटेंट से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा असली क्रिएटर को मिलेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एलन मस्क (Elon Musk) के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X ने वायरल वीडियो और मीम्स की चोरी रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने नया नियम लागू करते हुए कहा है कि अब वायरल कंटेंट से मिलने वाले व्यूज और कमाई का अधिकांश हिस्सा असली क्रिएटर को दिया जाएगा। दरअसल X पर लंबे समय से यह शिकायत रही है कि बड़े अकाउंट्स छोटे क्रिएटर्स के वीडियो और मीम्स डाउनलोड कर अपने पेज पर अपलोड कर देते हैं।
ज्यादा फॉलोअर्स होने की वजह से ऐसे अकाउंट्स को भारी व्यूज और मोनेटाइजेशन का फायदा मिलता था, जबकि असली क्रिएटर पीछे रह जाते थे। सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड को “कॉपीकैट इकॉनमी” कहा जाने लगा था, जहां मेहनत किसी और की होती थी और कमाई कोई दूसरा करता था। अब X ने अपने एल्गोरिदम में बड़ा बदलाव किया है।
कंपनी से जुड़े निकिता बियर (Nikita Bier) के मुताबिक प्लेटफॉर्म ने ऐसे अकाउंट्स की पहचान कर ली है, जो ऑटोमैटिक टूल्स और सॉफ्टवेयर के जरिए दूसरे क्रिएटर्स का कंटेंट चोरी कर रहे थे। नए सिस्टम के तहत अगर कोई अकाउंट किसी दूसरे का वीडियो कॉपी कर पोस्ट करेगा, तो प्लेटफॉर्म उस कंटेंट की पहचान कर लेगा। इसके बाद वीडियो से मिलने वाले अधिकांश इंप्रेशन और कमाई सीधे असली क्रिएटर को ट्रांसफर कर दी जाएगी। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन अकाउंट्स पर पड़ेगा, जो केवल दूसरों का कंटेंट रीपोस्ट कर कमाई कर रहे थे।
गूगल (Google) ने नया AI वीडियो जनरेशन मॉडल Gemini Omni लॉन्च किया है। यह टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो और वीडियो इनपुट के जरिए स्मार्ट वीडियो बनाने और एडिट करने की क्षमता रखता है।
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गूगल (Google) ने अपने Gemini AI परिवार में नया वीडियो जनरेशन टूल “Gemini Omni” लॉन्च किया है। कंपनी के मुताबिक यह ऐसा AI मॉडल है जो किसी भी इनपुट से क्रिएटिव कंटेंट तैयार कर सकता है। फिलहाल इसकी शुरुआत वीडियो जेनरेशन फीचर के साथ की गई है। इस नए परिवार का पहला मॉडल Gemini Omni Flash है, जिसे Gemini ऐप, Google Flow और YouTube Shorts पर उपलब्ध कराया गया है। यूजर्स इसमें टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो या वीडियो को इनपुट के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
गूगल (Google) का कहना है कि Gemini Omni सिर्फ वीडियो बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह यह भी समझेगा कि किसी सीन में आगे क्या होना चाहिए। कंपनी ने इसमें Gemini की तर्क और समझने की क्षमता को क्रिएटिव AI फीचर्स के साथ जोड़ा है। Gemini Omni Flash की सबसे बड़ी खासियत इसका कन्वर्सेशनल वीडियो एडिटिंग फीचर है। यूजर्स सामान्य भाषा में कमांड देकर वीडियो एडिट कर सकेंगे। इसमें बैकग्राउंड बदलना, नए कैरेक्टर जोड़ना, ऑब्जेक्ट हटाना, कैमरा एंगल बदलना और वीडियो स्टाइल में बदलाव जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
कंपनी के अनुसार मॉडल हर नए निर्देश को पिछले निर्देश से जोड़कर काम करेगा, जिससे वीडियो की कहानी और कैरेक्टर की निरंतरता बनी रहेगी। गूगल ने दावा किया कि Gemini Omni सिर्फ फोटोरियलिस्टिक वीडियो ही नहीं बनाएगा, बल्कि इतिहास, विज्ञान, संस्कृति और फिजिक्स जैसी वास्तविक दुनिया की जानकारी का भी इस्तेमाल करेगा, ताकि वीडियो ज्यादा तार्किक और वास्तविक लगें।
एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो एमोदेई ने चेतावनी दी है कि AI के तेजी से विकास के कारण आने वाले वर्षों में एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियां बड़े पैमाने पर खत्म हो सकती हैं।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो एमोदेई (Dario Amodei) ने एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में AI की वजह से कई एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियां हमेशा के लिए खत्म हो सकती हैं।
एक इंटरव्यू में डारियो एमोदेई (Dario Amodei) ने कहा कि पिछले दो वर्षों में AI तकनीक बेहद तेजी से विकसित हुई है। उनके मुताबिक, “दो साल पहले तक AI एक होशियार हाई स्कूल स्टूडेंट जैसा था, लेकिन अब यह एक स्मार्ट कॉलेज स्टूडेंट के स्तर तक पहुंच चुका है और लगातार आगे बढ़ रहा है।”
उन्होंने कहा कि AI मेडिसिन और एनर्जी जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, लेकिन डेटा, एनालिसिस और एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़ी नौकरियों के लिए बड़ा खतरा भी बन सकता है। खास तौर पर फाइनेंस, कंसल्टिंग और टेक सेक्टर की शुरुआती स्तर की नौकरियां सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
एमोदेई के अनुसार AI अब लंबे डॉक्यूमेंट्स की समरी तैयार करने, नए आइडियाज पर ब्रेनस्टॉर्मिंग करने और जटिल फाइनेंशियल रिपोर्ट बनाने जैसे काम तेजी से कर सकता है। फिलहाल यह इंसानों की मदद करेगा, लेकिन भविष्य में कई जगह उनकी भूमिका पूरी तरह खत्म भी कर सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगले 1 से 5 वर्षों में नौकरी बाजार पर इसके गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में लोगों को AI टूल्स का प्रभावी इस्तेमाल सीखना होगा ताकि वे बदलती तकनीक के साथ खुद को तैयार रख सकें।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) ने यूजर्स के लिए पोस्ट, रिप्लाई, DM और फॉलो करने की नई लिमिट्स तय की हैं। कंपनी का कहना है कि इससे प्लेटफॉर्म की स्थिरता और स्पैम कंट्रोल बेहतर होगा।
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) ने अपने यूजर्स के लिए नई एक्शन लिमिट्स और सख्त नियम लागू किए हैं। अब कंपनी ने यह तय कर दिया है कि एक यूजर दिनभर में कितने पोस्ट, रिप्लाई, डायरेक्ट मैसेज (DM) और नए अकाउंट फॉलो कर सकता है। कंपनी के अनुसार इन लिमिट्स का मकसद स्पैम गतिविधियों को रोकना और प्लेटफॉर्म को स्मूथ तरीके से चलाना है, ताकि सर्वर पर ज्यादा दबाव न पड़े और एप क्रैश जैसी समस्याएं कम हों।
एक्स (X) ने स्पष्ट किया है कि ये लिमिट्स पूरे अकाउंट पर लागू होंगी। यानी चाहे यूजर मोबाइल एप, वेब ब्राउजर या किसी थर्ड पार्टी टूल से प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करे, सभी गतिविधियों को एक साथ गिना जाएगा। नई व्यवस्था के तहत कोई भी यूजर एक दिन में अधिकतम 400 नए अकाउंट्स को ही फॉलो कर सकेगा। वहीं अगर किसी अकाउंट ने पहले से 5 हजार लोगों को फॉलो कर रखा है, तो उसके बाद फॉलो लिमिट अकाउंट के फॉलोअर्स और एंगेजमेंट के आधार पर तय होगी।
पोस्ट और रिप्लाई को लेकर भी सीमा तय की गई है। बिना ब्लू टिक वाले यूजर्स एक दिन में करीब 50 नई पोस्ट और 200 रिप्लाई कर सकेंगे। हालांकि पूरे प्लेटफॉर्म के लिए कुल पोस्ट लिमिट 2400 प्रतिदिन रखी गई है, जिसे छोटे-छोटे टाइम स्लॉट में बांटा गया है। अगर कोई यूजर तय सीमा पार करता है तो एक्स (X) तुरंत एरर मैसेज दिखाकर जानकारी देगा कि कौन सी लिमिट क्रॉस हुई है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड की ASML ने भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए साझेदारी की है। धोलेरा में बनने वाली भारत की पहली 300 मिमी चिप फैब यूनिट में ASML तकनीक उपलब्ध कराएगी।
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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) और नीदरलैंड की सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट निर्माता कंपनी एएसएमएल (ASML) ने भारत में चिप निर्माण को लेकर रणनीतिक साझेदारी की है। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की नीदरलैंड यात्रा के दौरान की गई।
इस साझेदारी के तहत एएसएमएल (ASML), गुजरात के धोलेरा में बन रही टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) की 300 मिमी सेमीकंडक्टर फैब यूनिट की स्थापना और संचालन में तकनीकी सहयोग देगी। यह भारत की पहली कमर्शियल सेमीकंडक्टर वेफर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट होगी।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) इस प्रोजेक्ट में करीब 91,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। समझौते के तहत फैब यूनिट में एएसएमएल (ASML) की अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनों और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये मशीनें एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं।
दोनों कंपनियां लोकल टैलेंट ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर भी काम करेंगी। इसके साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा ताकि लंबे समय तक फैब यूनिट का सफल संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) के CEO और MD रणधीर ठाकुर (Randhir Thakur) ने कहा कि एएसएमएल (ASML) की लिथोग्राफी एक्सपर्टाइज भारत में मजबूत और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन तैयार करने में मदद करेगी।
वहीं एएसएमएल (ASML) के CEO क्रिस्टोफ फुके (Christophe Fouquet) ने कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता सेमीकंडक्टर सेक्टर वैश्विक स्तर पर बड़ी संभावनाएं रखता है और कंपनी भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है।
यूट्यूब (YouTube) ने एक नया AI टूल सभी वयस्क यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया है। यह फीचर Deepfake और AI-जनरेटेड चेहरे वाले फर्जी वीडियो पहचानने में मदद करेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंटरनेट पर तेजी से बढ़ रहे डीपफेक (Deepfake) और फर्जी वीडियो के खतरे के बीच यूट्यूब (YouTube) ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपने “Likeness Detection Program” का दायरा बढ़ाते हुए इसे अब 18 साल से अधिक उम्र के सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध कर दिया है। इस नए फीचर की मदद से यूजर्स यह पता लगा सकेंगे कि कहीं उनकी अनुमति के बिना किसी वीडियो में उनका AI-जनरेटेड चेहरा या हमशक्ल तो इस्तेमाल नहीं किया गया है।
अगर ऐसा पाया जाता है, तो यूजर उस कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी कर सकेंगे। यूट्यूब (YouTube) का यह सिस्टम काफी हद तक उसके लोकप्रिय Content ID टूल की तरह काम करता है। फर्क सिर्फ इतना है कि जहां Content ID कॉपीराइट ऑडियो और वीडियो की पहचान करता है, वहीं नया टूल किसी व्यक्ति के चेहरे और उसकी “लाइकनेस” की पहचान करेगा।
अब तक यह सुविधा केवल बड़े क्रिएटर्स, पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों, राजनेताओं और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों तक सीमित थी। लेकिन अब कंपनी ने इसे आम यूजर्स के लिए भी रोलआउट कर दिया है। यूट्यूब (YouTube) के प्रवक्ता जैक मैलोन (Jack Malone) के अनुसार, कंपनी चाहती है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद हर यूजर और क्रिएटर को समान सुरक्षा मिले।
हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह टूल उन वीडियो को भी पहचान सकता है जिनमें किसी व्यक्ति का असली चेहरा हो, लेकिन वे AI-जनरेटेड न हों। ऐसे मामलों में वीडियो को Privacy Policy के तहत हटाना जरूरी नहीं होगा।
ऋषा मागू ने Meta छोड़कर Google जॉइन किया है। वह Google में Director, Communications & Public Affairs की जिम्मेदारी संभालेंगी। उन्हें 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ऋषा मागू (Risha Magu) ने टेक दिग्गज Google के साथ अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने कंपनी में Director, Communications & Public Affairs के पद पर जॉइन किया है। इससे पहले वह करीब चार वर्षों तक Meta में Director Communications - Policy & Innovation (India) के तौर पर कार्यरत थीं। ऋषा ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए इस नई शुरुआत की जानकारी साझा की। उन्होंने Meta में अपने अनुभव को “bold iteration” यानी लगातार नए प्रयोगों और बदलावों से भरा सफर बताया।
उन्होंने लिखा कि 2020 में महामारी के दौरान Facebook (अब Meta) से जुड़ने के बाद उन्होंने करीब से देखा कि Instagram क्रिएटर्स के बिजनेस और कम्युनिटीज बनाने का माध्यम बना, WhatsApp ने छोटे कारोबारियों को ग्राहकों से जोड़ने का तरीका बदला और Ray-Ban Meta Glasses जैसे इनोवेशन ने टेक्नोलॉजी को नई दिशा दी।
ऋषा ने अपने सहयोगियों, मेंटर्स और दोस्तों का आभार जताते हुए कहा कि Meta का अनुभव उनके करियर का अहम हिस्सा रहेगा। Google जॉइन करने पर उन्होंने कहा कि आज टेक्नोलॉजी जिस तेजी से लोगों की जिंदगी बदल रही है, उसमें Google जैसी कंपनियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने नई चुनौतियों और अवसरों को लेकर उत्साह भी जताया।
ऋषा मागू को कंज्यूमर टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। Meta से पहले वह HMD Global, Microsoft India और Nokia India जैसी कंपनियों में भी काम कर चुकी हैं।