इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) से अपील की है कि FAST और ALTD सेवाओं को लाइसेंसिंग व्यवस्था के दायरे में न लाया जाए।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश में इंटरनेट के जरिए मिलने वाली टीवी सेवाओं के लिए नए नियमों पर विचार चल रहा है। इसी बीच इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) से अपील की है कि FAST (Free Ad-Supported Streaming Television) और ALTD (Application-Based Linear Television Distribution) सेवाओं को लाइसेंसिंग व्यवस्था के दायरे में न लाया जाए।
TRAI के परामर्श पत्र 'ALTD सेवाओं (FAST सेवाओं सहित) के लिए नियामक ढांचा तैयार करने' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए IAMAI ने कहा कि FAST और ALTD पूरी तरह इंटरनेट आधारित एप्लिकेशन सेवाएं हैं। इसलिए इन्हें केबल टीवी या DTH जैसी पारंपरिक टीवी वितरण सेवाओं की तरह विनियमित करना उचित नहीं होगा।
IAMAI का कहना है कि इंटरनेट आधारित टीवी सेवाओं पर पुराने प्रसारण नियम लागू करने से भारत के मौजूदा डिजिटल कानूनों से टकराव पैदा होगा। साथ ही कंपनियों पर अतिरिक्त नियामकीय बोझ और अनुपालन (Compliance) की लागत बढ़ जाएगी, जबकि उपभोक्ताओं को इसका कोई खास फायदा नहीं मिलेगा।
एसोसिएशन ने कहा कि कई FAST सेवा प्रदाता पहले से ही कई देशों में एक ही तकनीकी प्लेटफॉर्म और कंटेंट सिस्टम के जरिए सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में केवल भारत के लिए अलग लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू करने से अनावश्यक जटिलताएं बढ़ेंगी।
IAMAI के मुताबिक, इससे निवेश प्रभावित हो सकता है, नई तकनीकों के विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और उपभोक्ताओं को मिलने वाले डिजिटल कंटेंट के विकल्प भी सीमित हो सकते हैं।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि FAST और ALTD सेवाएं पारंपरिक डिस्ट्रिब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर (DPO) जैसे केबल टीवी और DTH कंपनियों से पूरी तरह अलग हैं। ये कंपनियां न तो अंतिम स्तर (Last-Mile) का नेटवर्क चलाती हैं और न ही कंटेंट वितरण के लिए स्पेक्ट्रम जैसे सीमित सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल करती हैं।
IAMAI के अनुसार, ये सेवाएं उपभोक्ताओं के मौजूदा इंटरनेट कनेक्शन पर एप्लिकेशन के जरिए चलती हैं। इसलिए इन पर प्रसारण क्षेत्र जैसी लाइसेंसिंग लागू करने का कोई आधार नहीं बनता।
एसोसिएशन ने टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 का भी हवाला दिया। IAMAI का कहना है कि संसद ने इस कानून के दायरे से ओवर-द-टॉप (OTT) सेवाओं को जानबूझकर बाहर रखा है। साथ ही उस समय के केंद्रीय संचार मंत्री ने भी स्पष्ट किया था कि OTT प्लेटफॉर्म आईटी एक्ट, 2000 के तहत ही संचालित होंगे, न कि दूरसंचार कानून के तहत।
IAMAI ने यह भी कहा कि डिजिटल कंटेंट पहले से ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के तहत विनियमित है। इन नियमों की निगरानी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) करते हैं।
एसोसिएशन का सुझाव है कि सरकार को नए इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर पुराने प्रसारण नियम लागू करने के बजाय पारंपरिक प्रसारण और वितरण सेवाओं पर लागू पुराने लाइसेंसिंग और टैरिफ नियमों को आसान बनाने पर विचार करना चाहिए।
गौरतलब है कि TRAI इस समय यह समीक्षा कर रहा है कि भारत में तेजी से बढ़ रही FAST चैनलों और ऐप आधारित लीनियर टीवी सेवाओं के लिए अलग नियामक ढांचे की जरूरत है या नहीं। इस पर होने वाला अंतिम फैसला आने वाले समय में यह तय करेगा कि इंटरनेट के जरिए मिलने वाली टीवी सेवाओं का संचालन और नियमन किस तरह किया जाएगा।
आईएफएफ ने सर्वोच्च न्यायालय के अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी इंटरनेट प्रतिबंध का आदेश सार्वजनिक होना चाहिए।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के मध्य दिल्ली क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने की कड़ी आलोचना की है। यह प्रतिबंध उस समय लगाया गया, जब 'चलो संसद' मार्च के लिए बड़ी संख्या में छात्र और युवा एकत्र हुए थे।
प्रशासन ने मार्च की अनुमति नहीं दी थी और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर संसद जाने वाले मार्गों को बंद कर दिया था। साथ ही पटेल चौक, राजीव चौक और जनपथ जैसे कई मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग की खबरों के बीच एहतियात के तौर पर मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गईं।
आईएफएफ का कहना है कि इंटरनेट बंद करने के संबंध में गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, दिल्ली सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है। संगठन का आरोप है कि बिना सार्वजनिक आदेश के इंटरनेट बंद करना पारदर्शिता और न्यायिक समीक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ है। यदि नेटवर्क जैमर का इस्तेमाल किया गया है, तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इसके लिए कानूनी आधार क्या था।
आईएफएफ ने सर्वोच्च न्यायालय के 'अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020)' फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी इंटरनेट प्रतिबंध का आदेश सार्वजनिक होना चाहिए, उसके कारण लिखित रूप में दर्ज होने चाहिए और यह कदम न्यूनतम आवश्यक सीमा तक ही सीमित होना चाहिए। साथ ही दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार (अस्थायी सेवा निलंबन) नियम, 2024 के तहत भी इंटरनेट बंद करने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसका पालन इस मामले में नहीं हुआ।
संगठन का कहना है कि इंटरनेट बंद होने से पत्रकारों, छोटे व्यापारियों, ऑनलाइन भुगतान पर निर्भर दुकानदारों, गिग वर्कर्स और आम नागरिकों को भारी परेशानी होती है। आईएफएफ ने तत्काल इंटरनेट सेवाएं बहाल करने, निलंबन आदेश सार्वजनिक करने, समीक्षा समिति की रिपोर्ट जारी करने और भविष्य में ऐसे मामलों में अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
जागरण न्यू मीडिया (Jagran New Media) की मैनेजिंग एडिटर (Managing Editor) हेल्थ एंड लाइफस्टाइल मेघा ममगईं(Megha Mamgain) ने नौ साल बाद संस्थान छोड़ दिया है।
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जागरण न्यू मीडिया (Jagran New Media) की मैनेजिंग एडिटर – हेल्थ एंड लाइफस्टाइल (Managing Editor – Health & Lifestyle) मेघा ममगईं (Megha Mamgain) ने करीब नौ वर्षों के लंबे कार्यकाल के बाद संस्थान से इस्तीफा दे दिया है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी के प्रमुख डिजिटल ब्रांड्स हरजिंदगी (HerZindagi) और ओनलीमायहेल्थ (OnlyMyHealth) की संपादकीय टीमों का नेतृत्व किया।
मेघा ममगईं (Megha Mamgain) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी विदाई की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि नौ वर्षों का यह सफर केवल ब्रांड्स बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस दौरान उन्होंने कार्य संस्कृति, विश्वास, दृढ़ता और लोगों के साथ मजबूत रिश्ते भी बनाए। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने हरजिंदगी और ओनलीमायहेल्थ की अपनी टीमों को अलविदा कहा।
उन्होंने अपने अगले कदम के संकेत देते हुए लिखा कि अब समय कुछ नया और किसी नई जगह पर बनाने का है। उनके मुताबिक, शुरुआत से कुछ नया खड़ा करने का उत्साह आज भी उन्हें रोमांचित करता है।
जागरण न्यू मीडिया (Jagran New Media) से जुड़ने से पहले मेघा ममगईं (Megha Mamgain) लगभग 12 वर्षों तक सीएनएन-आईबीएन (CNN-IBN) के साथ कार्यरत रहीं। अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने एनडीटीवी (NDTV) और मिडीटेक (Miditech) में भी विभिन्न संपादकीय भूमिकाएं निभाईं।
फिलहाल मेघा ममगईं (Megha Mamgain) ने अपने अगले पेशेवर कदम की औपचारिक घोषणा नहीं की है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही एक नई शुरुआत करने जा रही हैं।
ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने 28 प्रतिशत जीएसटी और पुराने टैक्स नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है।
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ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने 28 प्रतिशत जीएसटी और पुराने टैक्स नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। मी कंपनियों ने अदालत से हाल ही में दिए गए उस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है, जिसमें ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी को संवैधानिक रूप से सही ठहराया गया था और 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पुराने टैक्स नोटिसों को भी वैध माना गया था।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को अपने फैसले में सरकार के उस निर्णय को सही ठहराया था, जिसके तहत ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर लगाए गए दांव (बेट) की पूरी राशि पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। अदालत ने टैक्स विभाग द्वारा जारी पुराने टैक्स नोटिसों को भी चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
इस फैसले के बाद टैक्स विभाग के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पुरानी टैक्स वसूली का रास्ता साफ हो गया था। इसे ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका माना गया था।
अब ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने समीक्षा याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस मामले के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर दोबारा विचार करे। कंपनियों का कहना है कि 28 प्रतिशत जीएसटी और पुराने टैक्स दावों का भारी बोझ इस उद्योग की कई कंपनियों के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर सकता है।
माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में इन समीक्षा याचिकाओं पर आने वाला फैसला भारत के ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के भविष्य के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।
केंद्र सरकार इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े विज्ञापनों के मामले में Meta के जवाब की जांच कर रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
केंद्र सरकार इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े विज्ञापनों के मामले में Meta के जवाब की जांच कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कहा है कि जवाब की समीक्षा पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को कहा कि Meta ने सरकार के नोटिस का जवाब भेज दिया है। यह जवाब शनिवार को मिला था और फिलहाल मंत्रालय इसकी जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, MeitY ने Meta को नोटिस जारी कर इंस्टाग्राम से ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट तुरंत हटाने का निर्देश दिया था, जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने या उसकी पहुंच उपलब्ध कराने का आरोप है। साथ ही कंपनी से सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब भी मांगा गया था।
यह मामला 3 जुलाई को प्रकाशित BBC Eye की एक जांच रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चलाए जा रहे थे, जिनमें आपत्तिजनक सर्च शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने पर यूजर्स को कथित तौर पर Telegram के उन चैनलों पर भेजा जाता था, जहां ऐसी अवैध सामग्री 99 रुपये जैसी कम कीमत पर बेची जा रही थी।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि इनमें से कुछ विज्ञापनों को इंस्टाग्राम की ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम ने मंजूरी दी थी।
इन आरोपों पर Meta ने कहा कि कंपनी की बाल यौन शोषण सामग्री के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति है। कंपनी का कहना है कि वह ऐसे कंटेंट की पहचान और उसे हटाने के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल करती है। हालांकि, Meta ने यह भी स्वीकार किया कि अपराधी लगातार उसके सुरक्षा तंत्र को चकमा देने की कोशिश करते रहते हैं।
कंपनी के अनुसार, वह अपनी मॉडरेशन तकनीक को लगातार मजबूत कर रही है, आपत्तिजनक वेबसाइटों के लिंक ब्लॉक कर रही है और अन्य टेक कंपनियों के साथ भी जानकारी साझा कर ऑनलाइन शोषण रोकने की दिशा में काम कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, MeitY ने Meta से यह भी पूछा है कि ऐसे विज्ञापनों को मंजूरी कैसे मिली, उन्हें रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, कंपनी की मॉडरेशन प्रणाली कितनी प्रभावी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
BBC की जांच में यह भी दावा किया गया कि उसने भारत में एक टेस्ट अकाउंट बनाकर इंस्टाग्राम के विज्ञापन और रिकमेंडेशन सिस्टम की जांच की थी। कुछ ही दिनों में उस अकाउंट पर कथित तौर पर ऐसे विज्ञापन दिखाई देने लगे, जो Telegram चैनलों तक ले जा रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, जब ऐसे एक विज्ञापन की शिकायत की गई, तो शुरुआत में इंस्टाग्राम ने उसे अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं माना। हालांकि, BBC की ओर से सवाल पूछे जाने के बाद Meta ने कई विज्ञापन हटाए, संबंधित अकाउंट निलंबित किए और उनसे जुड़े लिंक भी ब्लॉक कर दिए।
इस पूरे मामले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की विज्ञापन मॉडरेशन प्रणाली और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर तब जब पेड विज्ञापनों की मंजूरी में ऑटोमेटेड सिस्टम की भूमिका होती है।
इसी बीच केंद्र सरकार ने Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp, Telegram और Signal को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से उनके यूजरनेम आधारित फीचर और धोखाधड़ी, फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी है। इससे साफ है कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है।
यह मामला मई में आए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने गूगल (Google) को 'HINDWARE' और उससे मिलते-जुलते शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में ब्लॉक करने का निर्देश दिया था।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल इंडिया (Google India) को ट्रेडमार्क उल्लंघन (Trademark Infringement) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) से अंतरिम राहत नहीं मिली है। अदालत ने उस फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें गूगल (Google) को अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म गूगल ऐड्स (Google Ads) पर सैनिटरीवेयर (Sanitaryware) निर्माता हिंदवेयर (Hindware) के पंजीकृत ट्रेडमार्क का विज्ञापन कीवर्ड (Advertising Keyword) के रूप में उपयोग करने की अनुमति देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।
यह मामला मई में आए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने गूगल (Google) को 'HINDWARE' और उससे मिलते-जुलते शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। साथ ही कंपनी पर 30 लाख रुपये का हर्जाना (Damages) और कानूनी खर्च (Legal Costs) भी लगाया गया था।
इस फैसले को चुनौती देते हुए गूगल (Google) ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में अपील दायर की। कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi) ने दलील दी कि मामले में अंतरिम संरक्षण (Interim Protection) दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में उपभोक्ताओं के भ्रमित होने (Consumer Confusion), अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practices) या उपभोक्ता संरक्षण (Consumer Protection) जैसे मुद्दे शामिल नहीं हैं।
हालांकि, न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव (Justice V. Kameswar Rao) और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा (Justice Manmeet Pritam Singh Arora) की खंडपीठ (Division Bench) ने गूगल (Google) की अपील पर नोटिस जारी कर दिया, लेकिन हर्जाने और पहले लगाए गए प्रतिबंधों पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। इस दौरान अदालत गूगल (Google) की अपील पर विस्तार से विचार करेगी।
यह मामला डिजिटल विज्ञापन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर Google Ads जैसे ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर ट्रेडमार्क वाले कीवर्ड्स (Trademark Keywords) के उपयोग और उनकी जिम्मेदारी तय करने पर पड़ सकता है।
भारत के बड़े शहरों में अब डिजिटल होर्डिंग सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि हालात के हिसाब से खुद को बदल भी रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
DOOH का ग्लोबल मार्केट 2026 में लगभग $20 से $22.5 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है। Fortune Business Insights के अनुसार 2025 में यह मार्केट $20.17 अरब डॉलर था और 2026 में $22.51 अरब डॉलर तक पहुंचेगा, 2034 तक $56.1 अरब डॉलर होने का अनुमान है, 12.09% CAGR के साथ। Mordor Intelligence (जनवरी 2026) के मुताबिक 2026 में वैश्विक DOOH मार्केट $20.22 अरब डॉलर है और 2031 तक $32.98 अरब तक पहुंचेगा।
यह अंतर इसलिए है क्योंकि अलग-अलग रिसर्च कंपनियां अलग-अलग तरीके से आंकड़े तैयार करती हैं। लेकिन सभी की राय एक जैसी है कि यह मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।
भारत की तस्वीर: MarkNtel Advisors के अनुसार भारत का DOOH मार्केट 2024 में लगभग $284 मिलियन (करीब ₹2,350 करोड़) था और 2030 तक $620 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, लगभग 14% CAGR पर। PwC की Global Entertainment & Media Outlook 2025–29 रिपोर्ट बताती है कि भारत का कुल OOH राजस्व 2024 में $568 मिलियन था, जो 13.4% की दर से बढ़ा और 2029 तक $798 मिलियन तक पहुंचेगा। Adonmo के इंडस्ट्री आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल OOH मार्केट (डिजिटल और पारंपरिक दोनों) 2025 में ₹6,500 करोड़ से ऊपर था।
प्रोग्रामेटिक DOOH: जब होर्डिंग बोलने लगे एल्गोरिद्म की भाषा
DOOH की इस क्रांति के केंद्र में है प्रोग्रामेटिक DOOH, यानी ऑटोमेटेड, डेटा-संचालित तरीके से विज्ञापन खरीदना और चलाना। पहले एक बिलबोर्ड बुक करने में 5-7 दिन लगते थे, मैनेजर को फोन, कॉन्ट्रैक्ट साइनिंग, इंतजार। अब प्रोग्रामेटिक DOOH के जरिए उसी जगह पर 24 घंटे से भी कम समय में कैंपेन लाइव हो सकती है।
VIOOH के द्वारा 2026 में किए अध्ययन (1,050 विज्ञापनदाताओं पर) के अनुसार हाल के प्रोग्रामेटिक DOOH खरीदारों में से, पिछले 18 महीनों में औसतन 34% कैंपेन में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा था और यह अगले 18 महीनों में 48% तक पहुंचने का अनुमान है। Google DV360 और The Trade Desk जैसे प्रमुख DSP प्लेटफॉर्म अब OOH इन्वेंटरी को डिजिटल चैनलों के साथ एक ही मीडिया प्लान में खरीदने की सुविधा दे रहे हैं।
भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग है। PwC की रिपोर्ट और एक्सचेंज4मीडिया के इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार भारत में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा OOH खर्च का महज 1-2% है। PwC इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, कॉस्ट-शेयरिंग की चिंताएं और ऐडवर्टाइजिंग Agencies Association of India (AAAI) की formal स्वीकृति का न मिलना बताता है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में यह आंकड़ा 3-5% तक पहुंच सकता है और 2028 तक 15-20%।
मौसम, ट्रैफिक और वक्त के हिसाब से बदलते विज्ञापन
स्मार्ट DOOH की सबसे रोचक बात यह है कि ये स्क्रीनें आसपास के माहौल को 'पढ़' सकती हैं। इसके कई तरीके हैं:
मौसम आधारित विज्ञापन: जैसे ही तापमान एक तय सीमा से ऊपर जाता है, कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम का विज्ञापन चल पड़ता है। बारिश होते ही छाते या रेनकोट की ब्रैंड दिखने लगती है। Aperol ने एक कैंपेन में यह तय किया कि उनका विज्ञापन केवल तभी दिखे जब तापमान 19°C से ऊपर हो, और वह भी गुरुवार से रविवार, दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे के बीच। Rain-X ने कनाडा में बर्फ, बारिश और ओले के लिए अलग-अलग क्रिएटिव तैयार किए जो मौसम के हिसाब से अपने आप बदल जाते थे। Dulux पेंट ने मौसम-ट्रिगर कैंपेन के जरिए अपने स्टोर में 130% अधिक ट्रैफिक दर्ज किया।
ट्रैफिक और समय आधारित विज्ञापन: सुबह की भीड़ में कॉफी का विज्ञापन, दोपहर में फास्ट फूड स्पेशल, शाम को मनोरंजन। हाईवे पर ट्रैफिक जाम में प्रीमियम ब्रैंड विज्ञापन, मेट्रो स्टेशनों पर सुबह की सवारी में फिनटेक ऐप। EMARKETER के AI in OOH FAQ (मई 2026) के अनुसार AI अब स्पोर्ट्स स्कोर्स, लोकल इवेंट्स और ट्रैफिक कंडिशंस के आधार पर contextual creative selection करता है।
लोकेशन और इवेंट आधारित विज्ञापन: मैच वाले दिन स्टेडियम के आसपास लगी स्क्रीन पर स्पोर्ट्स ड्रिंक के विज्ञापन दिखने लगते हैं। वहीं मॉल के अंदर लगे डिजिटल कियोस्क लोगों को उसी समय चल रहे ऑफर्स और डील्स दिखाते हैं। Amazon जैसे ब्रांड भी अब रियल-टाइम ऑफर्स दिखाकर ग्राहकों को तुरंत खरीदारी के लिए आकर्षित कर रहे हैं।
Blindspot के मुताबिक, मौसम के हिसाब से बदलने वाले DOOH विज्ञापनों को लोग ज्यादा याद रखते हैं। कंपनी का दावा है कि ऐसे विज्ञापनों में ब्रैंड रिकॉल करीब 90% तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य स्थिर विज्ञापनों में यह करीब 65% रहता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करीब 80% लोग उन विज्ञापनों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जो उनके आसपास की स्थिति या माहौल से जुड़े होते हैं।
फेस डिटेक्शन और ऑडियंस एनालिटिक्स: होर्डिंग जो 'देखती' है
DOOH में अब AI आधारित ऑडियंस डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इसके जरिए डिजिटल स्क्रीन के आसपास मौजूद लोगों की अनुमानित उम्र, जेंडर या भीड़ के प्रकार को समझकर विज्ञापन बदले जाते हैं। इस तकनीक में आमतौर पर कैमरों और सेंसर की मदद ली जाती है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि इसका मकसद किसी व्यक्ति की पहचान करना नहीं, बल्कि ऑडियंस पैटर्न को समझना होता है।
यह तकनीक फेशियल डिटेक्शन कहलाती है, जो फेशियल रिकग्निशन से अलग मानी जाती है। फेशियल रिकग्निशन किसी व्यक्ति की पहचान करने और डेटा सेव करने से जुड़ी होती है, जबकि फेशियल डिटेक्शन केवल सामने मौजूद लोगों की अनुमानित जनसांख्यिकीय जानकारी समझने की कोशिश करती है।
उदाहरण के तौर पर, कुछ कंपनियां टैबलेट स्क्रीन और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए यह समझने की कोशिश करती हैं कि सामने किस तरह की ऑडियंस मौजूद है, ताकि उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकें।
इसके अलावा Affectiva और Hume AI जैसी कंपनियां अब इमोशन AI तकनीक पर भी काम कर रही हैं। यह तकनीक चेहरे के हावभाव के आधार पर लोगों की प्रतिक्रिया समझने में मदद करती है, ताकि विज्ञापनों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।
MarketsandMarkets की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक इमोशन डिटेक्शन और रिकग्निशन मार्केट के 2026 तक 37.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। वहीं Fortune Business Insights के मुताबिक यह मार्केट 2025 में 42.83 अरब डॉलर का था और आने वाले वर्षों में इसके और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
क्या DOOH अब डिजिटल जैसा Measurable हो गया?
DOOH की सबसे बड़ी कमजोरी हमेशा यह रही है कि इसे मापना मुश्किल था। ऑनलाइन विज्ञापन में क्लिक, इंप्रेशन, कन्वर्जन, सब कुछ सटीक आंका जा सकता है। होर्डिंग के साथ यह सुविधा नहीं थी।
IAB ने जुलाई 2025 में DOOH Measurement Guide जारी की थी, जिसका मकसद डिजिटल आउट-ऑफ-होम विज्ञापनों के लिए एक जैसे मापन मानक तय करना है। हालांकि, इसका इस्तेमाल अभी शुरुआती स्तर पर ही है।
Broadsign के एक सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर विज्ञापनदाता उन DOOH प्लेटफॉर्म्स में ज्यादा निवेश करना चाहते हैं, जहां डायनेमिक और कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से विज्ञापन दिखाने की सुविधा हो।
भारत में भी OOH इंडस्ट्री तेजी से तकनीक अपना रही है। Indian Outdoor Advertising Association (IOAA) ने 2024 में GPS आधारित ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर में OOH विज्ञापनों की पहुंच और दर्शकों को बेहतर तरीके से मापना है।
हालांकि, इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी एक समान मापन प्रणाली की कमी है। अलग-अलग कंपनियां विज्ञापनों की पहुंच और प्रभाव को अलग-अलग तरीके से मापती हैं, जिससे पूरे बाजार के लिए एक कॉमन स्टैंडर्ड बनाना मुश्किल हो रहा है।
प्राइवेसी की चिंता: क्या 'स्मार्ट' होर्डिंग हमें देख रहे हैं?
जैसे-जैसे DOOH स्मार्ट होती जा रही है, सवाल उठ रहे हैं, क्या यह हमारी निजता का उल्लंघन है? यह चिंता पूरी तरह निराधार नहीं है, और दुनिया भर की सरकारें इस पर कड़े नियम बना रही हैं।
चीन ने अप्रैल 2026 में Personal Information Protection Law के तहत सख्त नियमों का नया रोडमैप जारी किया। इसके तहत Cyberspace Administration of China (CAC), Ministry of Industry and Information Technology (MIIT) और Ministry of Public Security (MPS) ने मिलकर कई अभियान शुरू किए हैं। इनमें इंटरनेट विज्ञापनों और यूजर डेटा के इस्तेमाल पर खास फोकस किया गया है।
नए नियमों में यूजर्स को पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन बंद करने का आसान विकल्प देना और बिना फोन नंबर दिए बेसिक सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी किया गया है। इससे डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
अमेरिका में Illinois का Biometric Information Privacy Act (BIPA) सबसे सख्त कानूनों में माना जाता है। इसके उल्लंघन के मामलों में Facebook पर 650 मिलियन डॉलर और Google पर 100 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं Connecticut में 2026 में एक नया बिल पास हुआ, जिसमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और लोकेशन डेटा शेयरिंग पर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं।
हालांकि, DOOH इंडस्ट्री में ज्यादातर तकनीक फेशियल डिटेक्शन पर आधारित होती है, न कि फेशियल रिकग्निशन पर। कंपनियों का कहना है कि इसमें किसी व्यक्ति की पहचान या डेटा स्टोर नहीं किया जाता।
अब Edge Computing जैसी तकनीक भी तेजी से इस्तेमाल हो रही है। इसमें डेटा को क्लाउड पर भेजने के बजाय उसी डिवाइस पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रहती है।
भारत में DOOH: महानगरों से टियर-2 शहरों तक की यात्रा
भारत में DOOH अभी मुख्यतः शीर्ष 12 मेट्रो शहरों में केंद्रित है। Adonmo के अनुसार 2024 तक देश में करीब 1.5 लाख डिजिटल स्क्रीनें थीं, जिनमें से 75% इन्हीं 12 शहरों में थीं। Adonmo के इंडस्ट्री डेटा के अनुसार भारत में DOOH कुल OOH मार्केट का महज 12% है, जबकि अमेरिका में 40% और चीन में 90%।
Mordor Intelligence के अनुसार भारत के OOH इंडस्ट्री में static OOH का 2024 में 68% हिस्सा था, जबकि DOOH सालाना 7.2% की दर से बढ़ रहा है, जो कुल OOH मार्केट वृद्धि से दोगुना है। PwC के अनुसार DOOH भारत में 16.5% CAGR से बढ़ेगा, पारंपरिक OOH के 2% CAGR से आठ गुना तेज, और 2029 तक OOH का 44.1% हिस्सा होगा, जो 2024 में 28.8% था।
बदलाव आ रहा है:
भारत में DOOH की मार्केट साइज को लेकर इंडस्ट्री विशेषज्ञों में मतभेद हैं। Adgully की जनवरी 2026 की in-depth रिपोर्ट के अनुसार DOOH 2024 में कुल OOH खर्च का 28-30% था और 2026 तक 35% से अधिक होने का अनुमान है।
छोटे शहरों तक पहुंचने की चुनौती: एक DOOH face की स्थापना लागत $10,000 से $50,000 के बीच है और बिजली खर्च ऑपरेटिंग कॉस्ट का 20% तक हो सकता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बिजली की अनिश्चितता और connectivity की कमी बड़ी बाधा है। फिर भी LED panel की गिरती कीमतें और 5G का विस्तार इस रास्ते को धीरे-धीरे खोल रहे हैं।
AI Creatives: जब मशीन खुद बनाती है विज्ञापन
DOOH का अगला मोर्चा है, AI-generated creatives। अब विज्ञापन डिजाइन करने के लिए हफ्तों की जरूरत नहीं। AI प्लेटफॉर्म रिलय टाइम डेटा (मौसम, ट्रैफिक, स्पोर्ट्स स्कोर्स) के आधार पर खुद-ब-खुद अलग-अलग creative तैयार करते हैं।
डायनेमिक क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन (DCO) की मदद से अब एक ही कैंपेन के कई अलग-अलग विज्ञापन तैयार किए जा रहे हैं। यानी अलग ऑडियंस, अलग जगह और अलग समय के हिसाब से विज्ञापन अपने आप बदल सकते हैं। JCDecaux ने फरवरी 2026 में एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसकी मदद से 80 देशों में प्रोग्रामेटिक DOOH विज्ञापनों को एक ही सिस्टम से मैनेज किया जा सकता है। इसमें रियल-टाइम बिडिंग, बदलते विज्ञापन और कार्बन रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
वहीं Clear Channel Outdoor के EVP और CMO Dan Levi ने EMARKETER की जनवरी 2026 की रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे एजेंसियां अपने प्लानिंग टूल्स में एआई को शामिल कर रही हैं, वैसे-वैसे उन्हें तेजी से बेहतर और काम की जानकारियां मिल रही हैं।
OOH और डिजिटल का संगम: Omnichannel का नया युग
2026 में DOOH का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब यह अकेले काम नहीं करता। अब एक उपभोक्ता सुबह सड़क पर किसी ब्रैंड का होर्डिंग देखता है, फिर दोपहर में उसी ब्रैंड का विज्ञापन उसके मोबाइल पर दिखाई देता है और रात में वही संदेश किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी नजर आता है। यानी अब विज्ञापन हर प्लेटफॉर्म पर आपस में जुड़े हुए तरीके से दिखाए जा रहे हैं।
OAAA और Harris Poll की 2024 की एक स्टडी के मुताबिक, 73% लोगों ने कहा कि उन्हें DOOH विज्ञापन पसंद आते हैं। वहीं टीवी विज्ञापनों को पसंद करने वालों की संख्या 50% और ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए सिर्फ 37% रही। इसी स्टडी में 76% लोगों ने माना कि OOH विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने किसी न किसी तरह की प्रतिक्रिया दी।
चुनौतियां अभी भी बाकी हैं
स्मार्ट DOOH तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं।
सबसे बड़ी समस्या मापन की है। अभी तक इंडस्ट्री में ऐसा कोई एक समान सिस्टम नहीं है, जिससे सभी कंपनियां विज्ञापनों का असर एक ही तरीके से माप सकें। भारत में यह समस्या और बड़ी है, क्योंकि यहां प्रोग्रामेटिक DOOH अभी शुरुआती दौर में है।
दूसरी चुनौती यह है कि अभी भी ज्यादातर आउटडोर विज्ञापन पारंपरिक होर्डिंग्स पर ही आधारित हैं। OAAA के मुताबिक, OOH बाजार का बड़ा हिस्सा अब भी स्टैटिक बिलबोर्ड्स का है। यानी एआई और स्मार्ट तकनीक का फायदा फिलहाल सिर्फ डिजिटल स्क्रीन तक सीमित है।
डेटा प्राइवेसी और नियम-कानून भी बड़ी चुनौती बन रहे हैं। चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त नियम बनाए जा रहे हैं, जिसका असर एआई आधारित विज्ञापनों पर पड़ सकता है।
भारत में एक और दिक्कत यह है कि OOH इंडस्ट्री काफी बंटी हुई है। यहां हजारों छोटे-छोटे वेंडर्स हैं, अलग-अलग शहरों के अलग नियम हैं और कोई एक केंद्रीय मानक नहीं है। इसी वजह से पूरे देश में एक जैसी तकनीक लागू करना आसान नहीं है।
अब होर्डिंग सिर्फ तस्वीर नहीं रहे
2026 तक आते-आते DOOH ने यह साफ कर दिया है कि अब होर्डिंग सिर्फ दीवार पर लगी तस्वीर नहीं रह गए हैं। अब वे मौसम, ट्रैफिक और आसपास के माहौल के हिसाब से विज्ञापन बदल सकते हैं और सही समय पर सही संदेश दिखा सकते हैं।
भारत जैसे देश में, जहां स्मार्ट सिटी, मेट्रो और हाईवे तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां स्मार्ट DOOH का बाजार भी तेजी से फैल रहा है। हालांकि प्राइवेसी, मापन और तकनीकी ढांचे जैसी चुनौतियां अभी बाकी हैं, लेकिन इंडस्ट्री जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाले समय में आउटडोर विज्ञापन पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और डेटा आधारित होने वाले हैं।
पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी (Technology) और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन (Business Transformation) के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जेनपैक्ट (Genpact) ने पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) को हैदराबाद (Hyderabad) में वाइस प्रेसिडेंट – एआई एंड डेटा एडवाइजरी (Vice President – AI & Data Advisory) नियुक्त किया है। उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के माध्यम से साझा की।
नई भूमिका में पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) कंपनियों के बोर्ड (Board) और शीर्ष प्रबंधन (Executive Teams) के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) रणनीतियां तैयार करने, निवेश प्राथमिकताओं (Investment Priorities) को निर्धारित करने और व्यावसायिक लक्ष्यों (Business Goals) के अनुरूप रोडमैप विकसित करने का कार्य करेंगी।
पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी (Technology) और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन (Business Transformation) के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
जेनपैक्ट (Genpact) से पहले वह प्रोविडेंस इंडिया (Providence India) में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर – एआई एंड डेटा, एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन (Executive Director – AI & Data, Enterprise Transformation) के पद पर कार्यरत थीं। इस भूमिका में उन्होंने एंटरप्राइज स्तर पर AI और डेटा आधारित परिवर्तन पहलों का नेतृत्व किया।
अपने करियर के दौरान पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) नोवार्टिस (Novartis), फ्रैंकलिन टेम्पलटन (Franklin Templeton) और पिटनी बोव्स (Pitney Bowes) जैसी वैश्विक कंपनियों में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुकी हैं।
जेनपैक्ट (Genpact) को उम्मीद है कि AI, डेटा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में उनका व्यापक अनुभव ग्राहकों को भविष्य की तकनीकी रणनीतियां तैयार करने और व्यवसायिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
तबूला ने ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) के साथ अपनी साझेदारी का विस्तार करते हुए भारत और थाईलैंड में लाखों अतिरिक्त स्मार्टफोन यूजर्स तक टैबूला न्यूज़ (Taboola News) पहुंचाने की घोषणा की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंटेंट रिकमेंडेशन प्लेटफॉर्म तबूला (Taboola) ने स्मार्टफोन निर्माता ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार किया है। इस विस्तार के तहत तबूला न्यूज़ (Taboola News) अब भारत और थाईलैंड में लाखों अतिरिक्त स्मार्टफोन डिवाइसेज पर उपलब्ध होगी।
तबूला (Taboola), ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) वर्ष 2023 से साथ काम कर रहे हैं। अब तक यह सेवा यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom), फिलीपींस (Philippines), सिंगापुर (Singapore) और अर्जेंटीना (Argentina) जैसे बाजारों में उपलब्ध थी। नई साझेदारी के साथ भारत और थाईलैंड भी इस सूची में शामिल हो गए हैं।
समझौते के तहत ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) अपने स्मार्टफोन्स की लॉक स्क्रीन (Lock Screen) पर तबूला (Taboola) के कंटेंट रिकमेंडेशन को इंटीग्रेट करना जारी रखेंगे। यह सेवा उपयोगकर्ताओं को उनकी रुचि के अनुसार तबूला (Taboola) के पब्लिशर नेटवर्क से व्यक्तिगत (Personalised) समाचार और अन्य कंटेंट उपलब्ध कराएगी।
तबूला (Taboola) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) एडम सिंगोल्डा (Adam Singolda) ने कहा, "ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) हमेशा अपने ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने पर केंद्रित रहे हैं और तबूला न्यूज़ (Taboola News) उसी प्रयास का हिस्सा है।
हमारी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के दौरान हमने उनके नवाचार के प्रति समर्पण को देखा है। हमें खुशी है कि तबूला न्यूज़ (Taboola News) अब दुनिया भर में लाखों अतिरिक्त स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं तक प्रासंगिक कंटेंट पहुंचाने में योगदान दे रही है।"
ओप्पो (OPPO) ओवरसीज बिजनेस (Overseas Business) के निदेशक टैंक ज़ेंग (Tank Zeng) ने कहा, "हमारा फोकस हमेशा उपयोगकर्ताओं को मूल्यवान अनुभव प्रदान करने पर रहा है। तबूला न्यूज़ (Taboola News) के माध्यम से हमें दुनिया भर के भरोसेमंद पब्लिशर्स का कंटेंट उपलब्ध कराने का लाभ मिला है। इस विस्तारित साझेदारी के जरिए हम अपने उपयोगकर्ताओं तक और बेहतर अनुभव पहुंचाने के लिए उत्साहित हैं।"
तबूला न्यूज़ (Taboola News) पब्लिशर्स को मोबाइल डिवाइसेज के जरिए अपने कंटेंट का वितरण करने में मदद करती है। वहीं, स्मार्टफोन निर्माता अपने डिवाइसेज में व्यक्तिगत समाचार फीड (Personalised News Feed) को आसानी से इंटीग्रेट कर उपयोगकर्ताओं की सहभागिता बढ़ा सकते हैं।
मीडिया कंपनी HT Media Limited नई पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 11 जुलाई को होगी, जिसमें फंड जुटाने से जुड़े विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया कंपनी HT Media Limited नई पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 11 जुलाई 2026 (शनिवार) को होगी, जिसमें फंड जुटाने से जुड़े विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
कंपनी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बीएसई (BSE) को भेजी गई सूचना में कहा है कि बोर्ड बैठक में इक्विटी शेयर, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, बॉन्ड या डिबेंचर जारी करने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। इसके लिए प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue), राइट्स इश्यू (Rights Issue) या किसी अन्य उपयुक्त माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी जरूरत पड़ने पर इन विकल्पों के संयोजन पर भी विचार करेगी।
HT Media ने कहा कि फंड जुटाने का कोई भी फैसला संबंधित नियामकीय और वैधानिक मंजूरियों के अधीन होगा। यदि आवश्यक हुआ, तो इसके लिए कंपनी अपने शेयरधारकों की मंजूरी भी लेगी।
कंपनी ने यह भी बताया कि SEBI के इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों और कंपनी की आचार संहिता के तहत ट्रेडिंग विंडो पहले की तरह बंद रहेगी। यह प्रतिबंध कंपनी के सभी नामित कर्मचारियों, निदेशकों और उनके करीबी रिश्तेदारों पर लागू रहेगा।
ट्रेडिंग विंडो 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे (स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड) घोषित होने के 48 घंटे बाद तक बंद रहेगी।
फिलहाल कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह कितनी राशि जुटाने की योजना बना रही है। इस बारे में अंतिम फैसला 11 जुलाई को होने वाली बोर्ड बैठक में लिया जा सकता है।
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'डीएनए हिंदी' (DNA Hindi) में टीम को लीड कर रहीं चीफ सब एडिटर कुसुम लता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड (Diligent Media Corporation Limited) के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'डीएनए हिंदी' (DNA Hindi) में टीम को लीड कर रहीं चीफ सब एडिटर कुसुम लता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
कंपनी के मुताबिक, कुसुम लता ने अपने करियर में नए अवसरों को एक नई दिशा देने के मद्देनजर यह फैसला लिया है। उनका इस्तीफा 5 जून 2026 को कार्यदिवस समाप्त होने के बाद से प्रभावी हो गया। हालांकि कंपनी ने कुसुम लता के इस्तीफे की जानकारी स्टॉक मार्केट को 8 जुलाई को दी है।
कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि इस्तीफे की सूचना स्टॉक एक्सचेंज को देने में देरी हुई। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यह देरी अनजाने में हुई प्रशासनिक चूक की वजह से हुई और इसके पीछे किसी तरह की दुर्भावना या जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने की मंशा नहीं थी। कंपनी ने कहा कि वह आगे भी सेबी के सभी प्रकटीकरण संबंधी नियमों का समय पर पालन करती रहेगी।
कुसुम लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और उन्हें करीब 15 वर्षों का अनुभव है। डीएनए हिंदी से जुड़ने से पहले वह The Lallantop, Network18, NDTV और DB Digital जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं। डीएनए हिंदी में उन्होंने एडिटोरियल लीड और चीफ सब एडिटर- टीम लीड के रूप में जिम्मेदारी निभाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने न्यूज़ डेस्क का संचालन, टीम मैनेजमेंट और शिफ्ट लीड करने जैसी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा एक्सप्लेनर और लॉन्ग-फॉर्म लेखन में भी उनकी अच्छी पकड़ रही है। जेंडर, राष्ट्रीय मुद्दों, हाइपरलोकल खबरों और पर्सनल फाइनेंस जैसे विषयों पर उन्होंने लगातार लेखन किया है। वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग की भी उन्हें अच्छी समझ है।