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BHU की तरह AMU में दलितों व अन्य पिछड़ा वर्गों को आरक्षण क्यों नहीं: राजीव सचान
भारत सरकार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बहुसंख्यकों और अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के नियम अलग- अलग कैसे बना सकती है?
समाचार4मीडिया ब्यूरो 1 year ago
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र की मोदी सरकार ने देश में CAA कानून लागू कर दिया है जिसके बाद से विरोधी दलों के नेता लगातार बीजेपी सरकार पर लगातार हमलावर हैं। कोई CAA लागू होने से देश की सुरक्षा का हवाला दे रहा है तो कोई चुनावी खेल करार दे रहा है।
इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान ने अपने 'एक्स' हैंडल से एक पोस्ट की और बड़ा सवाल पूछा है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, जिस देश का शिक्षा अधिकार कानून बहुसंख्यकों और अल्पसंख्यकों के शिक्षा संस्थानों में खुला भेद करता है और जहां इन दोनों वर्गों के धार्मिक स्थलों के नियमन का कानून घोर विभेदकारी है, वहां यह पूछा जा रहा है कि आखिर भारत सरकार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बहुसंख्यकों और अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के नियम अलग- अलग कैसे बना सकती है?
तीन पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों को नागरिकता देने के नियम एक जैसे बनाने की मांग करने वाले क्या एएमयू को वैसे ही संचालित करने की मांग करेंगे, जैसे बीएचयू संचालित होता है? यदि बीएचयू में दलितों और अन्य पिछड़ा वर्गों को आरक्षण दिया जा सकता है तो एएमयू में क्यों नहीं दिया जा सकता?
आपको बता दे, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू होने के एक दिन बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि सीएए का विरोध कांग्रेस तुष्टिकरण और वोट-बैंक की राजनीति के चलते कर रही है।
तीन पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों को नागरिकता देने के नियम #CAARules एक जैसे बनाने की मांग करने वाले क्या एएमयू को वैसे ही संचालित करने की मांग करेंगे, जैसे बीएचयू संचालित होता है? यदि बीएचयू में दलितों और अन्य पिछड़ा वर्गों को आरक्षण दिया जा सकता है तो एएमयू में… https://t.co/piSWtPPZ5P
— Rajeev Sachan (@RajeevKSachan) March 13, 2024
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