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रुबिका लियाकत ने बताया रमजान में अनुशासन का महत्व
अल्हम्दुलिल्लाह इस सफर के लिए, इस बदलाव के लिए और इस सब्र के लिए। दुआ है कि यह अनुशासन रमज़ान के बाद भी हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बना रहे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 hours ago
रमज़ान सिर्फ रोज़ा रखने का महीना नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन स्थापित करने का प्रशिक्षण है। सुबह से शाम तक भूख-प्यास पर नियंत्रण रखना हमें आत्म-संयम सिखाता है। यह समय की पाबंदी, इबादत में नियमितता, खान-पान में संतुलन और व्यवहार में धैर्य का अभ्यास कराता है। इस बीच वरिष्ठ पत्रकार और एंकर रुबिका लियाकत ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर अपना निजी अनुभव शेयर किया।
उन्होंने लिखा, घर में सचमुच कुछ बदल गया है। वही बच्चे जो कभी इफ्तार तक हर मिनट गिनते थे- “अम्मी, अभी कितना वक्त है?” “अम्मी, भूख लगी है…”, “क्या थोड़ा पानी पी सकता/सकती हूँ?”आज शांत, स्थिर और संयमित नज़र आते हैं। फ़िल्ज़ा 11 साल की है और ओज़िल 9 साल का है। यह उनका तीसरा रमज़ान है।
उनका पहला रोज़ा आज भी याद है, एक छोटा सा रोज़ा जो उन्हें पहाड़ चढ़ने जैसा लगा था। ढेर सारे सवाल, बेचैनी और मगरिब से पहले थोड़ा ड्रामा। लेकिन आज वे पूरे आत्मविश्वास के साथ रोज़ा रख रहे हैं। कम चिड़चिड़ापन, ज़्यादा सब्र, कम शिकायत, ज़्यादा समझ। कम “मुझे चाहिए”, ज़्यादा “कोई बात नहीं।”
इस तेज़ डिजिटल दुनिया में, जहाँ सब कुछ तुरंत चाहिए और बड़े भी अनुशासन निभाने में संघर्ष करते हैं, वहाँ बच्चों को सब्र सीखते देखना एक सुकून है। रोज़ा सिर्फ भूख का नाम नहीं, यह आत्म-संयम, संवेदनशीलता और आत्मा को भीतर से मज़बूत करने की ख़ामोश साधना है। अल्हम्दुलिल्लाह इस सफर के लिए, इस बदलाव के लिए और इस सब्र के लिए। दुआ है कि यह अनुशासन रमज़ान के बाद भी हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बना रहे।
Ramazan – Day 6 ?
— Rubika Liyaquat (@RubikaLiyaquat) February 24, 2026
Something has changed in the house.
The same children who once counted every minute to iftaari…
“Ammi, how much longer?”
“Ammi, I’m hungry…”
“Can I just drink water?”
Are now quiet. Steady. Composed.
Filza is 11. Ozil is 9.
This is their third Ramazan.
I… pic.twitter.com/qXfeF9vGJB
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