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मोहन भागवत के इस बयान पर बोले राजदीप : घरेलू राजनीति पर चुप्पी क्यों?
गौरवशाली चारधाम परियोजना को भी उत्तराखंड के पर्यावरण को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाने वाला माना जा रहा है। क्या भागवत जी उन सभी चल रही परियोजनाओं की जांच की मांग करेंगे?
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 4 months ago
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की 100वीं वर्षगांठ और विजयदशमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिमालय की सुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि पिछले 3-4 वर्षों में भूस्खलन और लगातार बारिश जैसी घटनाओं में वृद्धि हुई है। उनके इस बयान पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट कर अपनी राय दी।
उन्होंने लिखा, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने अपनी विजयादशमी की भाषण में हिमालयी इलाके को हो रहे भारी पर्यावरणीय नुकसान को सही तरीके से सामने लाया। लेकिन 'दुनिया भर के विकास मॉडल' को जिम्मेदार ठहराने के बजाय, उन्होंने देश की अपनी राजनीतिक संस्कृति की आलोचना करनी चाहिए थी, जो पर्यावरण के सारे नियम तोड़ते हुए बेतहाशा निर्माण की इजाजत दे रही है।
यहां तक कि गौरवशाली चारधाम परियोजना को भी उत्तराखंड के पर्यावरण को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाने वाला माना जा रहा है। क्या भागवत जी उन सभी चल रही परियोजनाओं की जांच की मांग करेंगे, जो बड़े स्तर पर जंगलों की कटाई कर रही हैं? या इससे तो सत्ता के अंदरूनी लोगों की पोल खुल जाएगी, जो इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने वाले हैं?
आपको बता दें, भागवत ने संघ की शाखाओं और उनके नियमित आयोजनों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शाखाओं के माध्यम से स्वयंसेवकों में भक्ति, राष्ट्र निर्माण की भावना और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास होता है।
Story that caught the eye: RSS sarsanghchalak Mohan Bhagwat ji rightly chose to highlight the massive ecological damage to the Himalayan region in his Vijayadashmi address. BUT instead of blaming ‘global development models’, he should have called out the desi political culture…
— Rajdeep Sardesai (@sardesairajdeep) October 3, 2025
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