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क्या हम विदेशी चीज़ों को ज़्यादा महत्व देते हैं: राहुल शिवशंकर
इन कंपनियों का कहना है कि यह उनकी ग्लोबल पॉलिसी के खिलाफ है और तमाम कंपनियां इस फैसल के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने पर भी विचार कर रही हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 2 months ago
संचार साथी ऐप को स्मार्टफोन्स में प्री इंस्टॉल करने के दूरसंचार विभाग के आदेश पर विवाद बढ़ने के बाद मंगलवार को केंद्र सरकार ने स्थिति साफ की है। इसे लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि यह एक ऑप्शनल ऐप होगी। इस बीच वरिष्ठ पत्रकार राहुल शिवशंकर ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट कर अपनी राय व्यक्त की।
उन्होंने लिखा, हम विदेशी (चीन, अमेरिका) ऐप्स तो झट से इंस्टॉल कर लेते हैं, लेकिन जब कोई देसी ऐप (आरोग्य सेतु, डिजिलॉकर, संचार साथी) हमें सुरक्षित रखने की कोशिश करता है, तो हम नाराज़ हो जाते हैं। ‘RAW DISPATCH FROM MY DESK’ में मैं यही पूछ रहा हूँ—क्या हमारा गुस्सा चुनिंदा होता है? क्या हम विदेशी चीज़ों को ज़्यादा महत्व देते हैं और देसी को कम? क्या हम डिजिटल नस्लवादी बनते जा रहे हैं?
आपको बता दें, तमाम स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियां जैसे कि ऐपल आदि सरकार के 'संचार साथी' ऐप को फोन में प्री-इंस्टॉल देने के फैसले को लेकर खुश नहीं हैं। इन कंपनियों का कहना है कि यह उनकी ग्लोबल पॉलिसी के खिलाफ है और तमाम कंपनियां इस फैसल के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने पर भी विचार कर रही हैं।
We install foreign (Chinese, U.S.) apps in a flash but explode in outrage when a desi app (Aarogya Setu, digilocker, Sanchar Saathi) tries to protect us. In "RAW DISPATCH FROM MY DESK" I ask is our outrage selective? Do we exalt the foreign over the desi? Are we digital racists? pic.twitter.com/ImLEAQxZhM
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) December 2, 2025
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