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गीत प्रेस को गांधी पुरस्कार, शुरू हुई सियासत! ब्रजेश कुमार सिंह का यूं फूटा गुस्सा
धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन करने वाली गीता प्रेस, गोरखपुर को 'गांधी शांति पुरस्कार' देने के फैसले पर कांग्रेस भड़क गई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 2 years ago
गोरखपुर स्थित प्रसिद्ध गीता प्रेस को साल 2021 का गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने के ऐलान के साथ ही अब इस पर सियासत शुरू हो गई है। धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन करने वाली गीता प्रेस, गोरखपुर को 'गांधी शांति पुरस्कार' देने के फैसले पर कांग्रेस भड़क गई है।
पार्टी का कहना है कि यह 'सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश कुमार सिंह ने इस सियासत पर घोर आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार दिये जाने का विरोध करने वाले सनातन मूल्यों के खिलाफ अपने पूर्वाग्रह को ही साबित करने में लगे हैं।
हिंदुस्तान की जनता ये सबकुछ चुपचाप देख रही है, समय आने पर अपना फैसला भी सुनाएगी। गीता प्रेस भारतीय संस्कृति की ध्वजवाहक संस्था है। शर्मनाक है विरोध।
आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सरकार के फैसले का विरोध किया है। साथ ही उन्होंने कहा, 'शताब्दी वर्ष मना रही गोरखपुर स्थित गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार 2021 देने का फैसला किया गया है।' उन्होंने कहा कि अक्षय मुकुल की 2015 में लिखी गई एक बहुत अच्छी जीवनी है, जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी के साथ बनते बिगड़ते रिश्तों की बात कही है।
रमेश ने लिखा, 'यह वाकई उपहास है और सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है।' वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश कुमार सिंह के इस ट्वीट को आप यहां देख सकते हैं-
गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार दिये जाने का विरोध करने वाले सनातन मूल्यों के खिलाफ अपने पूर्वाग्रह को ही साबित करने में लगे हैं। हिंदुस्तान की जनता ये सबकुछ चुपचाप देख रही है, समय आने पर अपना फैसला भी सुनाएगी। गीता प्रेस भारतीय संस्कृति की ध्वजवाहक संस्था है। शर्मनाक है विरोध
— Brajesh Kumar Singh (@brajeshksingh) June 19, 2023
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