होम / सोशल मीडिया / बच्चों की परेशानियों को नजरअंदाज ना करें: मीनाक्षी जोशी
बच्चों की परेशानियों को नजरअंदाज ना करें: मीनाक्षी जोशी
इमोशनल बैटल को लड़ते हुए भी उनकी भावुकता कम नहीं होनी चाहिए। यह काम परिवार और टीचर ही कर सकते हैं। मैं जयपुर में नौ साल की बच्ची की मौत की खबर को भी पहले दिन से ट्रैक कर रही हूँ।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 months ago
दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले 16 साल के स्टूडेंट ने मंगलवार को सुसाइड कर लिया। वो अशोक पैलेस इलाके के सेंट कोलंबिया स्कूल में पढ़ता था। छात्र ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है जिसमें उसने लिखा कि उसके अंग दान कर दिए जाएं और उसके जैसी पीड़ा किसी भी बच्चों को नहीं मिलनी चाहिए। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार मीनाक्षी जोशी ने भी एक्स हैंडल पर एक पोस्ट कर अपनी पीड़ा व्यक्त की।
उन्होंने लिखा, उस बच्चे पर परफ़ॉर्मेंस का प्रेशर था। टीचर बच्चों की परेशानियों का हल उनके लेवल पर आकर सुलझाने की कोशिश नहीं कर रहे थे, वह शौर्य पर मानसिक दबाव बना रहे थे। बच्चों का मन बहुत कोमल होता है। यह मन अपशब्दों को सहन नहीं कर पाता है। परिवार और टीचर दोनों की भूमिका होती है की बच्चों की परेशानियों को मामूली समझकर नज़रअंदाज़ ना करें।
बच्चों से बात करें, समस्या का हल ढूँढे। इमोशनल बैटल को लड़ते हुए भी उनकी भावुकता कम नहीं होनी चाहिए। यह काम परिवार और टीचर ही कर सकते हैं। मैं जयपुर में नौ साल की बच्ची की मौत की खबर को भी पहले दिन से ट्रैक कर रही हूँ। मेरे जो-जो डर थे वह सब सही साबित होते जा रहे हैं।
जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में 9 साल की छात्रा की मौत की सीबीएसई की जाँच में सुरक्षा, बाल संरक्षण और स्कूल की प्रतिक्रिया में गंभीर खामियाँ पाई गईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चौथी मंजिल से कूदने के बाद मरने वाली चौथी कक्षा की छात्रा को लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था, जिसमें यौन संदर्भों के साथ मौखिक दुर्व्यवहार भी शामिल था, और घटना वाले दिन अपनी शिक्षिका से दो बार संपर्क करने के बावजूद, उसे कभी भी काउंसलर के पास नहीं भेजा गया।
बच्ची परेशान थी माँ बाप ने उस से बात क्यों नहीं की? टीचर जानती थी तो बच्ची की काउंसलिंग क्यों नहीं कराई? स्कूल सिर्फ़ सर्विस प्रोवाइडर नहीं होना चाहिए। टीचर का 40-45 छात्रों के साथ इमोशनल कनेक्ट बनाना मुश्किल हो सकता है, लेकिन बच्चा परेशान है फिर भी टीचर आँख बंद कर ले ऐसे टीचर स्कूल में कभी भी नहीं होने चाहिए।
मैं #शौर्य की खबर पढ़ रही हूँ । दसवी के बच्चे ने मेट्रो स्टेशन से कूद कर आत्महत्या कर ली ।
— Meenakshi Joshi (@IMinakshiJoshi) November 21, 2025
उस बच्चे पर परफ़ॉर्मेंस का प्रेशर था । टीचर बच्चों की परेशानियों का हल उनके लेवल पर आकर सुलझाने की कोशिश नहीं कर रहे थे, वह शौर्य पर मानसिक दबाव बना रहे थे ।
बच्चों का मन बहुत कोमल होता…
टैग्स