होम / सोशल मीडिया / WhatsApp–Meta पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, ₹213 करोड़ के CCI जुर्माने को लेकर दी चुनौती
WhatsApp–Meta पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, ₹213 करोड़ के CCI जुर्माने को लेकर दी चुनौती
फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) और वॉट्सऐप (WhatsApp) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दोनों कंपनियों ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस फैसले को चुनौती दी है
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
फेसबुक की पेरेंट कंपनी मेटा (Meta) और वॉट्सऐप (WhatsApp) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दोनों कंपनियों ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें Competition Commission of India (CCI) द्वारा लगाया गया ₹213.14 करोड़ का जुर्माना बरकरार रखा गया था। यह मामला वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है, जिसे लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब 2021 में वॉट्सऐप ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी बदली और यूजर्स से कहा गया कि अगर उन्हें ऐप इस्तेमाल करना है तो उन्हें मेटा ग्रुप की दूसरी कंपनियों के साथ डेटा शेयर करने की मंजूरी देनी होगी। CCI ने नवंबर 2024 में इसे Competition Act, 2002 का उल्लंघन बताया और कहा कि यह “लेना है तो लो, नहीं तो छोड़ दो” जैसी शर्त है, जिसमें यूजर्स के पास कोई असली विकल्प नहीं बचता।
CCI ने जुर्माने के साथ वॉट्सऐप को कुछ निर्देश भी दिए थे। इनमें कहा गया था कि भारत में वॉट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए डेटा शेयर करना जरूरी नहीं होगा, यूजर्स को साफ तौर पर opt-in और opt-out का विकल्प देना होगा और यह भी बताया जाएगा कि डेटा किस मकसद से और कहां-कहां शेयर किया जा रहा है।
मेटा और वॉट्सऐप इसके खिलाफ NCLAT पहुंचे थे। जनवरी 2025 में ट्रिब्यूनल ने अंतरिम राहत देते हुए जुर्माने और पांच साल की डेटा-शेयरिंग पाबंदी पर रोक लगा दी थी। NCLAT का कहना था कि पूरी तरह रोक लगाने से वॉट्सऐप का फ्री बिजनेस मॉडल प्रभावित हो सकता है। हालांकि, नवंबर 2025 के अंतिम फैसले में NCLAT ने ₹213.14 करोड़ का जुर्माना बरकरार रखा, लेकिन CCI के उस आरोप को हटा दिया कि मेटा ने वॉट्सऐप की ताकत का इस्तेमाल डिजिटल विज्ञापन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए किया।
बाद में CCI की अपील पर NCLAT ने यूजर्स को विकल्प देने वाले निर्देश फिर से लागू कर दिए और वॉट्सऐप को इन्हें मानने के लिए तीन महीने का समय दिया। अब मेटा और वॉट्सऐप सुप्रीम कोर्ट से जुर्माने और इन नियमों से राहत की मांग कर रहे हैं। इस मामले पर सबकी नजर है, क्योंकि इसका असर भारत में काम कर रही बड़ी टेक कंपनियों के डेटा शेयरिंग नियमों और बाजार की ताकत पर पड़ सकता है।
टैग्स