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चित्रा त्रिपाठी पर लगे जातिवाद के आरोप: क्या एंकर की भी जाति होती है?
दरअसल, चित्रा त्रिपाठी एक मीडिया संस्थान में एंकर और पत्रकार है। इस समय बिहार चुनाव में सबसे अधिक चर्चा जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की हो रही है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago
आनंद पाराशर।।
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का जनाधार बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर अपनी बिहार बदलाव यात्रा के तहत लगातार अलग-अलग जिलों और प्रखंडों में लोगों से संवाद कर रहे हैं। अभी हाल ही में हिंदी न्यूज़ चैनल 'एबीपी न्यूज़' की वरिष्ठ पत्रकार और एंकर चित्रा त्रिपाठी ने प्रशांत किशोर का इंटरव्यू किया जो कि बेहद वायरल भी हुआ लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स उनकी जाति को लेकर उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
दरअसल 'क्रांति कुमार' नाम के एक्स हैंडल से एक पोस्ट की गई जिसमें कहा गया कि प्रशांत किशोर पांडेय की जाति के लोग मैनस्ट्रीम न्यूज़ मीडिया में पत्रकार, न्यूज़ एंकर और एडिटर हैं इसलिए उनके मीडिया कवरेज मिल रहा है। इसमें चित्रा त्रिपाठी का भी नाम लिया गया है। दरअसल, चित्रा त्रिपाठी एक मीडिया संस्थान में एंकर और पत्रकार है तो इस नाते आने वाले बिहार चुनाव की कवरेज करना उनका पहला कर्तव्य है।
वही इस समय बिहार चुनाव में सबसे अधिक चर्चा जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की हो रही है। उनके वीडियो और भाषणों को करोड़ों लोगों के द्वारा देखा जा रहा है। अगर इंटरव्यू की बात करें तो प्रशांत किशोर पिछले एक महीने में कई बड़े पत्रकारों को इंटरव्यू दे चुके है इसलिए सिर्फ चित्रा त्रिपाठी का नाम लेकर उन्हें जातिवादी कहना उचित नहीं है।
चित्रा त्रिपाठी ने हाल ही में तेज प्रताप यादव का इंटरव्यू भी किया जिसे लोगों ने बेहद पसंद किया। यही नहीं, उन्हें जब ‘बिहार गौरव अस्मिता अवॉर्ड’ दिया गया तो मंच पर चिराग पासवान जैसे दलित नेता मौजूद थे। उस दिन बिहार के सबसे बड़े दलित नेता स्वर्गीय रामविलास पासवान की जयंती थी। चित्रा त्रिपाठी ने अपने करियर में न जाने कितने चुनाव कवर किये है और अनेक नेताओं के इंटरव्यू किये है।
इसलिए 'जाति ना पूछो पत्रकार की, पूछ लीजिये ज्ञान', एक पत्रकार सिर्फ जनता के सरोकार से जुड़े मुद्दे उन तक पहुंचाने के लिए पत्रकार होता है, उसकी जाति नहीं होती।
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)
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