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'पंजाब केसरी' ने लगाए मीडिया को डराने के आरोप, मान सरकार ने किया इनकार

पंजाब केसरी समूह ने अपनी वेबसाइट पर बयान जारी कर पंजाब की भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago

पंजाब केसरी समूह ने अपनी वेबसाइट पर बयान जारी कर पंजाब की भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समूह का कहना है कि राज्य सरकार ने एक बार फिर मीडिया पर हमला किया है और पिछले कुछ दिनों से पंजाब केसरी की आवाज दबाने के लिए उसकी प्रेस और दूसरी संस्थाओं पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

पंजाब केसरी के अनुसार, इसी कड़ी में बठिंडा स्थित उसकी प्रिंटिंग प्रेस पर रेड डाली गई। इस दौरान पुलिस ने कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लिया और कुछ के साथ मारपीट की गई, जिससे वे घायल हो गए। घायल कर्मचारियों को सिविल अस्पताल बठिंडा में भर्ती कराया गया है।

इसके अलावा जालंधर के सूरानुसी स्थित प्रिंटिंग प्रेस में भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी पुलिस बल के साथ जबरन अंदर घुसे। आरोप है कि अधिकारियों और पुलिस ने कर्मचारियों के साथ मारपीट की, गेट का ताला तोड़ा, जबरन सैंपल भरे और एक कर्मचारी को हिरासत में ले लिया। पंजाब केसरी का कहना है कि ये सभी अधिकारी बिना किसी नोटिस और पूर्व सूचना के आए थे और सिर्फ इतना कहा गया कि “ऊपर से आदेश है”।

पंजाब केसरी प्रबंधन ने इन सभी घटनाओं की जानकारी लिखित रूप में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान को भेजी है। पत्र में कहा गया है कि सरकार योजनाबद्ध तरीके से पंजाब केसरी समूह और उससे जुड़े संस्थानों को निशाना बना रही है, ताकि प्रेस को डराया जाए और दबाव में लिया जा सके।

अखबार प्रबंधन का कहना है कि यह पूरा मामला 31 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित एक खबर से शुरू हुआ था। यह खबर सत्तारूढ़ पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक से जुड़े विरोधी गुट के आरोपों पर आधारित एक संतुलित और निष्पक्ष रिपोर्ट थी। इसके बाद 2 नवंबर 2025 से पंजाब सरकार ने पंजाब केसरी समूह को मिलने वाले सभी सरकारी विज्ञापन बंद कर दिए। समूह का कहना है कि आर्थिक दबाव के बावजूद उसने स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता जारी रखी, लेकिन अब उसके खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

पंजाब केसरी ने अपने बयान में हाल के दिनों की सभी कार्रवाइयों की पूरी सूची भी दी है। समूह के मुताबिक-

10 जनवरी 2026 को जालंधर के पार्क प्लाजा होटल पर FSSAI की रेड हुई।

12 जनवरी 2026 को उसी होटल पर GST विभाग और आबकारी विभाग की रेड पड़ी।

12 जनवरी को लुधियाना के फोकल पॉइंट स्थित प्रेस जगत विजे प्रिंटर्स और जालंधर सिविल लाइंस स्थित पंजाब केसरी प्रिंटिंग प्रेस पर फैक्ट्री विभाग और लेबर विभाग की संयुक्त रेड हुई।

13 जनवरी को जालंधर स्थित चोपड़ा होटल पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रेड हुई।

13 जनवरी को होटल का लाइसेंस रद्द करने के लिए नोटिस जारी किया गया और 14 जनवरी को लाइसेंस रद्द कर दिया गया।

14 जनवरी को होटल की बिजली सप्लाई काट दी गई।

15 जनवरी को होटल का जनरेटर सील कर दिया गया और बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई।

15 जनवरी को लुधियाना, बठिंडा और जालंधर की प्रिंटिंग प्रेसों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रेड और कार्रवाई की गई।

पंजाब केसरी का कहना है कि इन कार्रवाइयों की वजह से 15 जनवरी 2026 से जालंधर, लुधियाना और बठिंडा की कई प्रिंटिंग प्रेसों का कामकाज प्रभावित हो गया है या पूरी तरह बंद होने की स्थिति में पहुंच गया है। सूरानुसी (जालंधर), फोकल पॉइंट (लुधियाना) और आईजीसी बठिंडा स्थित प्रेस परिसरों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

अपने बयान में पंजाब केसरी ने अपने इतिहास का भी जिक्र किया। समूह ने कहा कि स्वर्गीय लाला जगत नारायण ने 1949 में हिंद समाचार की स्थापना की थी और 1965 में पंजाब केसरी का प्रकाशन शुरू हुआ था। प्रेस की स्वतंत्रता के लिए उनकी प्रतिबद्धता जगजाहिर है। आतंकवाद के दौर में 60 से ज्यादा कर्मचारी, एजेंट, हॉकर और पत्रकार निडर पत्रकारिता के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं और कई घायल हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद अखबार ने कभी दबाव के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया।

अंत में पंजाब केसरी ने कहा कि अलग-अलग विभागों द्वारा पूर्व नियोजित इरादे से की जा रही ये कार्रवाइयां साफ तौर पर डराने और दबाव बनाने की कोशिश हैं, लेकिन इसके बावजूद समूह स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता जारी रखेगा और किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

वहीं, पंजाब सरकार ने कहा- 

पंजाब सरकार ने गुरुवार को पंजाब केसरी समूह की ओर से लगाए गए “निशाने पर लेकर कार्रवाई” के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि ये आरोप असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं, क्योंकि जांच और निरीक्षण के दौरान एक्साइज, पर्यावरण और श्रम कानूनों के गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं। सरकार ने साफ कहा है कि अलग-अलग नियामक एजेंसियों ने अपने अधिकार क्षेत्र में जांच की और नियमों के उल्लंघन दर्ज किए, ऐसे मामलों में कार्रवाई करना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी है।

सरकार का कहना है कि पंजाब केसरी समूह केवल यह गिना रहा है कि कहां-कहां निरीक्षण और कार्रवाई हुई, लेकिन जानबूझकर यह नहीं बता रहा कि इन कार्रवाइयों की वजह क्या थी, जांच में क्या निकला और उसका नतीजा क्या रहा। सरकार के मुताबिक ये सारी बातें आधिकारिक जांच रिपोर्ट, नोटिस और आदेशों में साफ-साफ दर्ज हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले का पत्रकारिता, विज्ञापन या संपादकीय विचारों से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि कार्रवाई ठोस सबूतों के आधार पर की गई है।

जालंधर के पार्क प्लाजा होटल में हुई एक्साइज कार्रवाई को लेकर सरकार ने कहा कि यह कोई सामान्य जांच नहीं थी, बल्कि एक औपचारिक जांच का नतीजा थी। जांच के दौरान होटल के अनधिकृत स्थानों से 800 से ज्यादा शराब की बोतलें बरामद की गईं। कई बोतलों पर जरूरी एक्साइज होलोग्राम और QR कोड नहीं थे। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि एक्सपायर हो चुकी ड्राफ्ट बीयर, जो पीने लायक नहीं थी, उसे कई दिनों तक ग्राहकों को परोसा गया। सरकार ने कहा कि ये सभी बातें लिखित एक्साइज आदेश में दर्ज हैं, जो शो-कॉज नोटिस देने, व्यक्तिगत सुनवाई करने, रिकॉर्ड देखने और लाइसेंसधारी की स्वीकारोक्ति के बाद पारित किया गया।

जांच में पाया गया कि पहली मंजिल पर 815 बोतलें और ग्राउंड फ्लोर पर 140 बोतलें अनधिकृत जगहों पर रखी गई थीं। यह पंजाब लिकर लाइसेंस नियम 1956 के नियम 37(2) का सीधा उल्लंघन है। बिना लेबल, होलोग्राम और QR कोड वाली शराब रखना और बेचना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में “अनजान होने” का बहाना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता, सरकार ने कहा।

पंजाब सरकार ने यह भी साफ किया कि कार्रवाई सिर्फ एक्साइज उल्लंघन तक सीमित नहीं रही। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में होटल में पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर उल्लंघन सामने आए। लॉन्ड्री में इस्तेमाल होने वाले केमिकल बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे जमीन और सीवर में छोड़े जा रहे थे, जिससे भूजल को खतरा था। होटल का जरूरी “कंसेंट टू ऑपरेट” खत्म हो चुका था, इसके बावजूद होटल बिना वैध अनुमति के चल रहा था। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट काम नहीं कर रहे थे और बिना साफ किया गया गंदा पानी सीधे नगर निगम के सीवर में छोड़ा जा रहा था।

इसके अलावा खतरनाक कचरा प्रबंधन नियम और ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के उल्लंघन भी पाए गए। इसमें रिकॉर्ड न रखना, सुरक्षित भंडारण की कमी और गलत तरीके से कचरा निपटान शामिल है। सरकार ने कहा कि ये छोटी तकनीकी गलतियां नहीं हैं, बल्कि ऐसे गंभीर उल्लंघन हैं जो सीधे तौर पर लोगों की सेहत, भूजल और पर्यावरण के लिए खतरा हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि श्रम और फैक्ट्री विभाग की जांच में पंजाब केसरी समूह से जुड़ी प्रिंटिंग यूनिट्स में कई श्रम कानूनों और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सामने आया। जालंधर और लुधियाना की यूनिट्स में फायर एग्जिट बंद मिले, मशीनें असुरक्षित हालत में थीं, अग्निशमन उपकरणों की वैधता खत्म हो चुकी थी, रिकॉर्ड सही तरीके से नहीं रखे गए थे और काम करने की स्थितियां असुरक्षित पाई गईं।

अंत में पंजाब सरकार ने दोहराया कि प्रेस की आज़ादी के नाम पर एक्साइज, पर्यावरण और श्रम कानूनों के पालन को नहीं रोका जा सकता। सरकार ने कहा कि आज के पंजाब में कानून सबके लिए बराबर है। संपादकीय स्वतंत्रता की पूरी सुरक्षा की जाएगी, लेकिन जो उल्लंघन जनता की सेहत, कर्मचारियों की सुरक्षा या पर्यावरण को खतरे में डालते हैं, उन्हें किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।


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