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भारत को समझने का नया नजरिया देती रोहित सरन की किताब का विमोचन
वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरन की नई पुस्तक ‘100 Ways to See India: Stats, Stories, and Surprises’ का विमोचन 17 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 14 hours ago
वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरन की नई पुस्तक ‘100 Ways to See India: Stats, Stories, and Surprises’ का विमोचन 17 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित एक कार्यक्रम में किया गया। इस अवसर पर मीडिया, राजनीति, अर्थशास्त्र और प्रशासन से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पुस्तक विमोचन समारोह में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश, नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत तथा सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग विशेष रूप से मौजूद रहे। चर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखिका कावेरी बामज़ई ने किया।
रोहित सरन लंबे समय से विभिन्न प्रमुख समाचारपत्रों में डेटा आधारित पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। हार्परकोलिन्स इंडिया की ओर से प्रकाशित इस पुस्तक में सरकारी आंकड़ों, सर्वेक्षणों और सार्वजनिक सूचनाओं को आसान चार्ट, ग्राफ और संक्षिप्त विवरणों के जरिए समझाने की कोशिश की गई है। किताब का उद्देश्य यह दिखाना है कि भारत एक जैसी कहानी नहीं बल्कि कई समानांतर वास्तविकताओं का देश है — जहां विकास, परंपरा, असमानता और बदलाव एक साथ मौजूद हैं।
विमोचन के दौरान जयराम रमेश ने कहा कि देश में आंकड़ों की कमी नहीं है, बल्कि कमी उनकी सही व्याख्या में है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई सामाजिक मान्यताएं वास्तविक आंकड़ों से अलग तस्वीर पेश करती हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि अब बड़ी संख्या में भारतीय शेयर बाजार से जुड़े हैं, जिससे आर्थिक व्यवहार में बदलाव साफ दिखाई देता है। साथ ही भारत की तटरेखा जैसे विषयों पर भी आम धारणाओं से अलग तथ्य सामने आते हैं।
वहीं अमिताभ कांत ने कहा कि जब नीति निर्माण में प्रमाण आधारित जानकारी का इस्तेमाल होता है तो सरकारों को फैसले लेने में आसानी होती है और विकास की रफ्तार बढ़ती है।
सौरभ गर्ग ने बताया कि सरकारी आंकड़ों को अधिक उपयोगी बनाने के लिए उन्हें डिजिटल और समयबद्ध स्वरूप में तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में सर्वेक्षण प्रक्रिया में एआई आधारित मदद भी शामिल होगी, जिससे डेटा संग्रह तेज और अधिक सटीक होगा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने माना कि यह पुस्तक केवल सांख्यिकीय जानकारी नहीं देती, बल्कि पाठक को रोजमर्रा की धारणाओं से आगे जाकर देश को समझने का नया तरीका सुझाती है।
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