होम / प्रिंट / 'पंजाब केसरी' पर कार्रवाई के आरोपों से बढ़ा सियासी घमासान, मान सरकार पर विपक्ष का हमला
'पंजाब केसरी' पर कार्रवाई के आरोपों से बढ़ा सियासी घमासान, मान सरकार पर विपक्ष का हमला
पंजाब केसरी अखबार समूह के साथ हुई हालिया घटनाओं को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है और विपक्षी दल लगातार आम आदमी पार्टी सरकार पर हमलावर हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
पंजाब केसरी अखबार समूह के साथ हुई हालिया घटनाओं को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है और विपक्षी दल लगातार आम आदमी पार्टी सरकार पर हमलावर हैं। मामला तब शुरू हुआ जब पंजाब केसरी समूह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया कि उसके और उससे जुड़े संस्थानों पर अलग-अलग सरकारी एजेंसियों द्वारा लगातार छापे मारे जा रहे हैं। अखबार समूह का कहना है कि यह सब उस वक्त शुरू हुआ जब उसने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को लेकर विपक्ष के आरोपों पर एक संतुलित और निष्पक्ष खबर प्रकाशित की।
पंजाब केसरी का आरोप है कि इसके बाद GST, एक्साइज जैसी एजेंसियों के छापे पड़े, प्रिंटिंग प्रेस में कार्रवाई हुई, बिजली सप्लाई काटी गई और पुलिस की घेराबंदी तक की गई। समूह ने इसे प्रेस को डराने और दबाव बनाने की कोशिश बताया। हालांकि पंजाब सरकार ने देर शाम एक आधिकारिक बयान जारी कर इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
इस पूरे मामले पर भाजपा ने सबसे पहले कड़ा रुख अपनाया। भाजपा ने कहा कि पंजाब की भगवंत मान सरकार मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि आम आदमी पार्टी सुनियोजित तरीके से लोकतंत्र का दमन कर रही है और यह सब आपातकाल के दौर की याद दिलाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 11 से 15 जनवरी के बीच पंजाब केसरी समूह को जानबूझकर निशाना बनाया गया, बिना सूचना छापे मारे गए, कर्मचारियों के साथ बदसलूकी हुई और यह सब अरविंद केजरीवाल के इशारों पर किया गया।
भाजपा की पंजाब इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी कहा कि मान सरकार स्वतंत्र मीडिया को दबाना चाहती है और पंजाब को पुलिस राज्य की तरह चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल 17 जनवरी को पंजाब के राज्यपाल से मिलकर इस मुद्दे को उठाएगा।
कांग्रेस भी इस मामले में खुलकर मैदान में आ गई है। कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी की कोई अपनी विचारधारा नहीं है और अगर उसे नरेंद्र मोदी की राजनीति ही करनी है तो उसे बीजेपी में विलय कर लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह मोदी सरकार के दौर में देशभर में मीडिया पर दबाव बनाया गया, वही मॉडल पंजाब में लागू किया जा रहा है।
पवन खेड़ा ने कहा कि पंजाब केसरी आजादी की लड़ाई से जुड़ा हुआ एक प्रतिष्ठित अखबार है, इसके बावजूद उस पर छापे मारे गए, बिजली काटी गई और दफ्तरों में कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी आंदोलन से निकली थी लेकिन अब वही काम कर रही है जिसकी वह पहले आलोचना करती थी।
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने भी सोशल मीडिया पर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब में अभिव्यक्ति की आजादी सरकार की मर्जी पर चल रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो अखबार ज्यादा सच लिखता है, उसके यहां कभी छापा पड़ता है, कभी लाइसेंस रद्द होता है और कभी बिजली काट दी जाती है। उन्होंने इसे मीडिया को लाइन में रहने की चेतावनी बताया।
इस बीच हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी पंजाब सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और अगर मीडिया को कमजोर किया जाएगा तो लोकतंत्र भी कमजोर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार बार-बार बिजली काटने, लाइसेंस रद्द करने और पुलिस घेराबंदी जैसे हथकंडे अपनाकर मीडिया को डराना चाहती है, जो पूरी तरह गलत है।
कुल मिलाकर पंजाब केसरी के साथ हुई कार्रवाइयों को लेकर विपक्षी दल इसे प्रेस की आजादी पर हमला बता रहे हैं, जबकि राज्य सरकार सभी आरोपों से इनकार कर रही है। यह मामला अब सिर्फ एक अखबार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पंजाब में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर एक बड़ी सियासी बहस का रूप ले चुका है।
टैग्स