अखबारों के फ्रंट पेज की सुर्खियां रहीं आज ये खबरें

जैकेट विज्ञापन के कारण आज हिन्दुस्तान में तीसरा पेज फ्रंट पेज है, जबकि नवभारत टाइम्स में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं

नीरज नैयर by
Published - Tuesday, 07 January, 2020
Last Modified:
Tuesday, 07 January, 2020
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दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इस घोषणा के साथ ही जेएनयू हिंसा से जुड़ी खबर आज के अखबारों की सुर्खियां हैं। सबसे पहले बात करते हैं दैनिक जागरण की। लीड दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा है, जिसे काफी अच्छे से प्रस्तुत किया गया है। जेएनयू हिंसा पर सियासी घमासान और पीएम की उद्योगपतियों से मुलाकात को भी प्रमुखता मिली है। सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में आयोग के माध्यम से होगी नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अखबार ने फ्रंट पेज पर जगह दी है। इसके अलावा, एंकर में अमित शाह का राहुल और केजरीवाल पर हमला है। ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमला करने वाले मुख्य आरोपित की पाक में गिरफ्तारी की खबर को सिंगल कॉलम में रखा गया है।

अमर उजाला के फ्रंट पेज पर आज काफी विज्ञापन है। लीड दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा है, दूसरी बड़ी खबर जेएनयू हिंसा के विरोध में देश भर में हुए प्रदर्शन हैं। ईरान-अमेरिकी विवाद के साइड इफेक्ट, ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमले के मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी और पहाड़ों पर बर्फबारी भी पेज पर है। मोटर व्हीकल एक्ट पर केंद्र की राज्यों को चेतावनी को अखबार ने प्रमुखता के साथ फ्रंट पेज पर लगाया है। केंद्र का कहना है कि यदि राज्य सरकारें नया कानून लागू नहीं करती हैं तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

अब बात करते हैं हिन्दुस्तान की। जैकेट विज्ञापन के कारण तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। इस फ्रंट पेज पर भी आधा पेज विज्ञापन है, लिहाजा ज्यादा खबरें पेज पर नहीं आ सकी हैं। लीड दिल्ली चुनाव की घोषणा है, सेकंड लीड का दर्जा जेएनयू हिंसा के खिलाफ हुए प्रदर्शन को मिला है। ईरान-अमेरिकी विवाद के साइड इफेक्ट दो कॉलम में हैं, जबकि पहाड़ों पर हुई बर्फबारी सहित दो खबरों को सिंगल में जगह मिली है।

वहीं, दैनिक भास्कर को देखें तो लीड दिल्ली के सियासी रण की घोषणा है। जिसे ‘इलेक्शन 20-20’ शीर्षक के साथ विस्तार से सजाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी की 11 उद्योगपतियों से मुलाकात की खबर को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा, जेएनयू हिंसा पर पुलिस की कार्रवाई और मौसम से जुड़ी खबर को भी जगह मिली है। मौसम विभाग का कहना है कि 2019 भारत के लिए 119 साल में सातवां सबसे गर्म साल रहा। एंकर में फिनलैंड की प्रधानमंत्री का प्रस्ताव है, जिसमें उन्होंने हफ्ते में चार दिन रोजाना 6 घंटे काम करने की बात कही है। फिनलैंड की सना मारिन दुनिया की सबसे युवा प्रधानमंत्री हैं। अमेरिका-ईरान विवाद के साइड इफेक्ट को अखबार ने संक्षिप्त में रखा है।

आज राजस्थान पत्रिका का फ्रंट पेज आज काफी अलग दिखाई दे रहा है। अखबार ने लेआउट में बदलाव करने का प्रयास किया है। लीड सबसे अलग ईरान-अमेरिकी विवाद के साइड इफेक्ट हैं। हालांकि, दिल्ली के लिहाज से चुनाव की घोषणा की खबर को फिर अंडरप्ले किया गया है। यह समाचार टॉप पर महज दो कॉलम में है। आईटी रिटर्न फॉर्म में बदलाव को अपेक्षाकृत बड़ी जगह मिली है। वैसे इससे जुड़ी खबर कल ही कुछ अखबार छाप चुके हैं। जेएनयू हिंसा के फॉलोअप को भी प्रमुखता मिली है। वहीं, एंकर में साम्प्रदायिक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का असम और केंद्र सरकार से किया गया सवाल-जवाब है। इसके अलावा पेज पर कुछ अन्य समाचार भी हैं।

सबसे आखिर में आज रुख करते हैं नवभारत टाइम्स का, जहां विज्ञापनों के चलते दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं। पहले फ्रंट पेज की लीड जेएनयू हिंसा का फॉलोअप है। हिंसा के विरोध में देश के तमाम कॉलेजों सहित विदेशों में भी प्रदर्शन हुए। पुलिस का कहना है कि उसके हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं। इस खबर का शीर्षक ‘जेएनयू में हिंसा पर देश का दिल टुकड़े-टुकड़े’ काफी कुछ बयां करता है। दूसरे फ्रंट पेज की सबसे बड़ी खबर है दिल्ली चुनाव की घोषणा, राजधानी में 8 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। वहीं, नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दिल्ली के सीलमपुर में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने सात लोगों को पकड़ा है, जिनमें दो विदेशी भी हैं। इस खबर को प्रमुखता के साथ पेज पर रखा गया है।

इसके अलावा, अमेरिका-ईरान विवाद के साइड इफेक्ट और यातायात नियमों पर केंद्र की राज्यों को धमकी भी पेज पर है। खाड़ी संकट के चलते सोना और तेल महंगा हो गया है, जबकि सेंसेक्स ने गोता लगाया है। वहीं, केंद्र ने राज्यों को चेतावनी दी है कि यदि नए मोटर व्हीकल एक्ट का पालन नहीं किया गया तो राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा। अखबार में पहले पेज पर आधा पेज विज्ञापन होने के कारण यहां सिर्फ खबरों वाला हिस्सा ही शो हो रहा है, जबकि दूसरा फ्रंट पेज पूरा शो हो रहा है।

आज का किंग कौन?

1: लेआउट के मामले में आज दैनिक जागरण सहित सभी अखबार अच्छे नजर आ रहे हैं। हालांकि, ये कहना गलत नहीं होगा कि राजस्थान पत्रिका ने फ्रंट पेज में काफी बदलाव किया है, लेकिन फिर भी एंकर वाला हिस्सा टाइप्ड हो रहा है। इस बारे में भी अखबार को कुछ करने की जरूरत है।

2: खबरों की प्रस्तुति में आज सभी फ्रंट पेज आकर्षक दिख रहे हैं, लेकिन दिल्ली चुनाव की घोषणा को सबसे बेहतर ढंग से हिन्दुस्तान और दैनिक भास्कर ने प्रस्तुत किया है।

3: कलात्मक शीर्षक आज नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर में देखने को मिले हैं। नवभारत टाइम्स ने जहां जेएनयू हिंसा से आहत देश की पीड़ा को बयां करता शीर्षक ‘जेएनयू में हिंसा पर देश का दिल टुकड़े-टुकड़े’ लगाया है। वहीं दैनिक भास्कर ने दिल्ली चुनाव की खबर के शीर्षक में प्रयोग किया है।

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मुंबई में इस तारीख से फिर शुरू हो सकती है अखबारों की डोर टू डोर डिलीवरी

सरकार ने कहा है कि कोविड-19 के खतरे को देखते हुए सुरक्षा के तौर पर डिलीवरी ब्वॉय को हैंड सैनिटाइजर्स और मास्क उपलब्ध कराए जाएंगे

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2020
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मुंबई में सात जून से अखबारों की घर-घर जाकर (डोर टू डोर) डिलीवरी फिर से शुरू हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस तरह के संकेत दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने कहा है कि कोविड-19 के खतरे को देखते हुए सुरक्षा के तौर पर डिलीवरी ब्वॉय को हैंड सैनिटाइजर्स और मास्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

बता दें कि कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए वेंडर्स द्वारा घर-घर जाकर अखबार बांटने से इनकार करने के बाद तमाम अखबार मालिकों ने 23 मार्च को मुंबई में अखबार के पब्लिकेशन और डिस्ट्रीब्यूशन का काम बंद कर दिया था। लोकल ट्रेन सेवाएं रद्द होने से समाचार पत्रों के सर्कुलेशन का काम और अधिक कठिन हो गया था।

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13 भाषाओं में मैगजीन पब्लिश करेगी मोदी सरकार, ये है बड़ी वजह

पहले इस मैगजीन की शुरुआत एक जून से की जानी थी, लेकिन कोविड-19 की वजह से नहीं हो पाई, नई तारीख की अभी नहीं की गई है घोषणा

Last Modified:
Tuesday, 02 June, 2020
Magazine

अपनी योजनाओं और उपलब्धियों पर प्रकाश डालने और उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। ‘द प्रिंट’ (The Print) में छपी एक खबर के मुताबिक मोदी सरकार इसके लिए जल्द ही ‘न्यू इंडिया समाचार’ (New India Samachar) के नाम से एक मैगजीन पब्लिश करने जा रही है।

यह पाक्षिक (fortnightly) मैगजीन हिंदी-अंग्रेजी समेत 13 भाषाओं में पब्लिश की जाएगी और उसे सूचना प्रसारण मंत्रालय की मीडिया यूनिट ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच कम्युनिकेशन’ (Bureau of Outreach Communication) के द्वारा पब्लिश किया जाएगा। मैगजीन के पब्लिकेशन के लिए प्रिंटर का चयन खुली निविदाओं (open bids) के आधार पर किया जाएगा।

‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मैगजीन का एडिटोरियल कंटेंट ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ (Press Information Bureau) द्वारा उपलब्ध कराए जाने की संभावना है। बताया जाता है कि ‘रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया’ (RNI) ने इसके टाइटल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है।

बताया जाता है कि पहले इस मैगजीन का पहला इश्यू एक जून को आना था, लेकिन कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण इसमें देरी हो गई। हालांकि, अभी नई तारीख की घोषणा नहीं की गई है। शुरू में इसकी करीब एक लाख प्रतियां पब्लिश की जाएंगी, जिन्हें बाद में बढ़ाया जा सकता है। इस मैगजीन को देश भर की तमाम पंचायतों के साथ ही स्कूल-कॉलेजों में भेजे जाने की योजना भी बनाई जा रही है।

 

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जानें, हर साल क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस

हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में 30 मई का खास महत्व है। यही कारण है कि 30 मई को हर साल हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

Last Modified:
Saturday, 30 May, 2020
Journalism Day

हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में 30 मई का खास महत्व है। यही कारण है कि 30 मई को हर साल हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। दरअसल, इसी दिन वर्ष 1826 को पंडित युगल किशोर शुक्ल ने पहले हिंदी अखबार ‘उदंड मार्तण्ड’ का प्रकाशन किया था। उस दौरान अंग्रेजी, फारसी और बांग्ला में तो अनेक पत्र निकल रहे थे, लेकिन हिंदी में एक भी पत्र नहीं निकलता था। इसलिए 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन शुरू किया गया। मूल रूप से कानपुर के रहने वाले पंडित युगल किशोर शुक्ल ने इसे कलकत्ता (अब कोलकाता) से एक साप्ताहिक अखबार के तौर पर शुरू किया था। इसके प्रकाशक और संपादक भी वह खुद थे। यह अखबार हर हफ्ते मंगलवार को पाठकों तक पहुंचता था।

'उदन्त मार्तण्ड' के पहले अंक की 500 प्रतियां छपी। हिंदी भाषी पाठकों की कमी की वजह से उसे ज्यादा पाठक नहीं मिल सके। इसके अलावा हिंदी भाषी राज्यों से दूर होने के कारण उन्हें समाचार पत्र डाक द्वारा भेजना पड़ता था। डाक दरें बहुत ज्यादा होने की वजह से इसे हिंदी भाषी राज्यों में भेजना भी आर्थिक रूप से महंगा सौदा हो गया था। पैसों की तंगी की वजह से 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन बहुत दिनों तक नहीं हो सका और आखिरकार 4 दिसम्बर 1826 को इसका प्रकाशन बंद कर दिया गया।

यह अखबार ऐसे समय में प्रकाशित हुआ था, जब हिंदी भाषियों को अपनी भाषा के पत्र की आवश्यकता महसूस हो रही थी। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर ‘उदन्त मार्तण्ड‘ का प्रकाशन किया गया था। वह ऐसा दौर था जब भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करने का बीड़ा पत्रकारिता ने अपने कंधों पर उठाया था। देश की आजादी से लेकर, साधारण आदमी के अधि‍कारों की लड़ाई तक, हिंदी भाषा की कलम से इंसाफ की लड़ाई लड़ी गई। वक्त बदलता रहा और पत्रकारिता के मायने और उद्देश्य भी बदलते रहे, लेकिन हिंदी भाषा से जुड़ी पत्रकारिता में लोगों की दिलचस्पी कम नहीं हुई, क्योंकि इसकी एक खासियत यह भी रही है कि इस क्षेत्र में हिंदी के बड़े लेखक, कवि और विचारक भी आए। हिंदी के बड़े लेखकों ने संपादक के रूप में अखबारों की भाषा का मानकीकरण किया और उसे सरल-सहज रूप देते हुए कभी उसकी जड़ों से कटने नहीं दिया।

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न्यूजपेपर इंडस्ट्री के लिए माकपा सांसद ने पीएम मोदी से की ये अपील

कोरोना महामारी के चलते देशभर में लॉकडाउन जारी है। ऐसे में कई इंडस्ट्री को नुकसान उठाना पड़ा है, जिनमें  न्यूजपेपर इंडस्ट्री भी शामिल है, जिसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
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कोरोना महामारी के चलते देशभर में लॉकडाउन जारी है। ऐसे में कई इंडस्ट्री को नुकसान उठाना पड़ा है, जिनमें  न्यूजपेपर इंडस्ट्री भी शामिल है, जिसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अब माकपा की ओर से कोयम्बटूर लोकसभा के सदस्य पी.आर. नटराजन इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद करने की अपील की है।

पी.आर. नटराजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्यूजपेपर इंडस्ट्री को राहत मुहैया कराने के लिए जरूरी  कदम उठाने की मांग की है। माकपा के सांसद ने मोदी को हाल ही में एक पत्र लिखकर उन्हें इंडस्ट्री की चुनौतियों से अवगत कराया और कहा कि कई अखबारों ने पहले ही पेजों की संख्या कम कर दी है। यहां तक कि कई एडिशन भी बंद करने पड़ गए हैं।

उन्होंने कहा कि जिस इंडस्ट्री ने लाखों रोजगार को दिया, आज वह लॉकडाउन के प्रभावों की वजह से दम तोड़ रही है, क्योंकि इसकी वजह से उसका ऐड रेवन्यू प्रभावित हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजपेपर इंडस्ट्री की यह स्थिति लंबे समय तक बने रहने की उम्मीद है।

नटराजन ने कहा कि पार्टी के सांसदों ने न्यूजपेपर के संगठनों द्वारा जारी किए उन प्रस्तावों का समर्थन किया है, जिसमें न्यूजप्रिंट पर सीमा शुल्क माफ करने, अखबारों के लिए दो साल तक टैक्स छोड़ने, अखबारों को सरकारी विज्ञापन के बकाये के भुगतान के लिए कदम उठाने और ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन (बीओसी) की विज्ञापन दरों में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का आग्रह किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस तरह के मदद की अपील की थी। उन्होंने मोदी को लिखे एक पत्र में कहा था, ‘विज्ञापन राजस्व में कमी और कोविड-19 महामारी के चलते सर्कुलेशन प्रभावित हुआ है और वे खर्च भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।’ उन्होंने कहा था, ‘न्यूजप्रिंट और आयात होने वाले अन्य कच्चे सामान पर लगने वाले सीमा शुल्क को वर्ष के बाकी समय के लिए माफ कर दिया जाए।’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्यूजपेपर इंडस्ट्री को राहत मुहैया कराने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।   

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प्रिंट प्रकाशन बंद करने के तीने महीने बाद ‘प्लेब्वॉय’ ने लिया ये बड़ा फैसला

महामारी बन चुके कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अफरा-तफरी मचा दी है। हाल ये है कि ग्लोबल स्तर पर प्रिंट मीडिया भी इसके खौफ से अछूता नहीं रहा है

Last Modified:
Friday, 29 May, 2020
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महामारी बन चुके कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में अफरा-तफरी मचा दी है। हाल ये है कि ग्लोबल स्तर पर प्रिंट मीडिया भी इसके खौफ से अछूता नहीं रहा है। ऐसे में प्रसिद्ध अमेरिकी मैगजीन ‘प्लेब्वॉय’ (Playboy) से एक बड़ी खबर सामने आई है। ‘प्लेब्वॉय’ ने प्रिंट प्रकाशन बंद करने के करीब तीने महीने बाद ही अब अपने एडिटोरियल स्टाफ के एक बड़े हिस्से को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वैसे बताया जा रहा है कि  मैगजीन ने अब अपने 25 एम्प्लॉयीज की छंटनी कर दी है।   

हालांकि ‘प्लेब्वॉय’ के एक प्रवक्ता ने कहा कि  66 साल बाद मार्च में प्रिंट पत्रिका बंद की गई थी और इस समय किसी भी तरह से छंटनी की कोई भी योजना नहीं बनाई गई थी। लेकिन मीडिया आउटलेट को इसमें बदलाव के लिए बहुत ज्यादा समय की जरूरत नहीं थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 25 एडिटोरियल स्टाफ की नौकरी गई है और ये उसके डिजिटल ऑपरेशन से जुड़े हुए थे। वैसे ये प्लेब्वॉय के संपादकीय कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि यह पहले से ही फ्रीलॉन्स जर्नलिस्ट के साथ काम करता है। पिछले कुछ सालों में इसने अपने एडिटोरियल स्टाफ को कम कर दिया है।

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Hindustan Times ने 27% एम्प्लॉयीज को दिखाया बाहर का रास्ता: सोर्स

सूत्रों का कहना है कि कुछ हफ्ते पहले सैलरी में कटौती की घोषणा के बाद ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) ने अब 130 एम्प्लॉयीज को बाहर का रास्ता दिखा दिया है

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2020
HT

कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण रोकथाम के लिए पूरा लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा है, जिसका सीधा असर तमाम इंडस्ट्री पर देखने को मिल रहा है। देश में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में मीडिया इंडस्ट्री भी इस संकट से अछूती नहीं है। सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कुछ हफ्ते पहले सैलरी में कटौती की घोषणा के बाद ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) ने अब 130 एम्प्लॉयीज को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। बता दें कि निकाले गए एम्प्लॉयीज उसके सभी एडिशंस के एडिटोरियल, मार्केटिंग और सेल्स डिपार्टमेंट में शामिल हैं।

एक करीबी सूत्र ने बताया कि एचटी (HT) ने यह फैसला मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म McKinsey की सलाह पर लिया है, जिसके मुताबिक उसे कुल स्टाफ से 27 फीसदी कम करना है। ये 27 फीसदी एम्प्लॉयीज ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) और उसके बिजनेस न्यूजपेपर ‘मिंट’ (Mint) के हैं।

हालांकि हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media.com) ने जब इसकी पुष्टि के लिए HT के मैनेजमेंट से संपर्क साधा तो उन्होंने कर्मचारियों की छंटनी की खबरों का खंडन किया है।

 

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पाठकों को पढ़ने को नहीं मिलेंगे अब ये दो बड़े अखबार

एक अखबार ने अपना कामकाज बंद कर दिया है, जबकि दूसरा अखबार एक जून को बंद हो जाएगा

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2020
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‘सकाल मीडिया ग्रुप’ (Sakal Media Group) अपने अखबार ‘सकाल टाइम्स’ (Sakal Times)  और ‘गोमांतक टाइम्स’ (Gomantak Times) को बंद करने जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुणे से निकलने वाले अंग्रेजी अखबार ‘सकाल टाइम्स’ का आखिरी एडिशन 27 मई को निकाला गया जबकि गोवा से निकलने वाले ‘गोमांतक टाइम्स’ का आखिरी एडिशन एक जून को पब्लिश होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कंपनी के पास इन दोनों अखबारों के डिजिटल एडिशन जारी रखने की भी कोई योजना नहीं है। बताया जाता है कि लॉकडाउन के बाद से दोनों अखबारों के एंप्लाईज की सैलरी में भी कटौती कर दी गई थी। एडिटोरियल डिपार्टमेंट में कई पत्रकारों की नौकरी जाने के साथ ही मराठी डिवीजन के सहयोग से यहां का कामकाज चलाया जा रहा था।  

बता दें कि ‘सकाल टाइम्स’ की शुरुआत मई 2008 में हुई थी, जबकि  ‘गोमांतक टाइम्स’ वर्ष 1986 में गोवा में शुरू हुआ था और इसे वर्ष 2000 में सकाल पेपर्स ने टेकओवर कर लिया था।

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HT की नेशनल एडिटर पद्मा राव ने संस्थान को कहा अलविदा, बताई ये वजह

अंग्रेजी अखबार ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) की नेशनल एडिटर पद्मा राव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी घोषणा की है।

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
Padma Rao

अंग्रेजी अखबार ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) की नेशनल एडिटर पद्मा राव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी घोषणा की है। इस पोस्ट में पद्मा राव ने स्पष्ट किया है कि उन्हें कंपनी द्वारा हटाया नहीं गया है।

सोशल मीडिया पर की गई अपनी पोस्ट में राव ने बताया है कि वह एक ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन के साथ दिल्ली में एक इंटरनेशनल एडिटोरियल असाइनमेंट संभालने जा रही हैं।

पद्मा राव की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के अनुसार, ‘एचटी ने कल कथित तौर पर कई लोगों को हटा दिया है (यदि यह सही है तो यह काफी बुरा है, लेकिन इस बारे में सिर्फ वॉट्सऐप पर उड़ती हुई खबरें आ रही है और मुझे इस बारे में कहीं से कोई पुष्टि नहीं हुई है)। हालांकि, मैं आपको बता दूं कि मुझे हटाया नहीं गया है। मैंने पिछले हफ्ते खुद ही एचटी से इस्तीफा दे दिया था और एक जून से मैं नई पारी शुरू करने जा रही हूं। मैं एक ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन के साथ दिल्ली में एक इंटरनेशनल एडिटोरियल असाइनमेंट संभालने जा रही हूं। यह नौकरी एक महीने पहले ही फाइनल हो गई थी और मैं अपना इस्तीफा सौंपने से पहले सभी औपचारिकताएं पूरी होने का इंतजार कर रही थी। मैं एचटी को बहुत भारी मन से छोड़ रही हूं। मुझे अपनी नई नौकरी को काफी चुनौतीपूर्ण और रोमांचक होने की उम्मीद है। आपको इस बारे में जल्द ही और जानकारी मिल जाएगी।’

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कोरोना ने छीन ली ‘नईदुनिया’ अखबार के प्रबंध संपादक राजेन्द्र तिवारी की जिंदगी

हिंदी दैनिक अखबार ‘नईदुनिया’ से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि इस महामारी की चपेट में आकर अखबार के प्रबंध संपादक राजेन्द्र तिवारी का निधन हो गया है

Last Modified:
Wednesday, 27 May, 2020
rajendra-tiwari

कोरोना की कवरेज में अहम भूमिका निभा रहे हिंदी दैनिक अखबार ‘नईदुनिया’ से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर ये है कि इस महामारी की चपेट में आकर वरिष्ठ पत्रकार व अखबार के प्रबंध संपादक राजेन्द्र तिवारी का निधन हो गया है। वे 82 वर्ष के थे। मिली जानकारी के मुताबिक, राजेन्द्र तिवारी भोपाल के चिरायु मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे। कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे पिछले 4 दिनों से वेंटिलेटर पर थे।

बताया जा रहा है कि उनकी किडनी और लंग्स ने काम करना बंद कर दिया था, जिसके बाद आज (बुधवार) सुबह 8 बजे अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

बता दें कि ‘नईदुनिया’ इंदौर से बंटवारे के तहत भोपाल में दैनिक ‘नईदुनिया’ का मालिकाना हक नरेन्द्र तिवारी जी के बेटे राजेन्द्र तिवारी को मिला था। 1994 से वे लगातार भोपाल में दैनिक ‘नईदुनिया’ का प्रकाशन व संपादन कर रहे थे। वे अपने पीछे पुत्र अपूर्व तिवारी को छोड़ गए हैं। बुधवार दोपहर 12:30 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया।

राजेन्द्र तिवारी के निधन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पहले नईदुनिया इंदौर और बाद में वर्ष 1991 से भोपाल से दैनिक नईदुनिया के प्रकाशन में श्री राजेन्द्र तिवारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मध्यप्रदेश की हिंदी पत्रकारिता में श्री राजेन्द्र तिवारी द्वारा दी गई सेवाएं स्मरणीय रहेंगी। वहीं मुख्यमंत्री ने स्व. राजेंद्र तिवारी की आत्मा की शांति और शोकाकुल तिवारी परिवार को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

 

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इस अखबार के फ्रंट पेज पर न तो कोई खबर, न तस्वीर और न ही विज्ञापन, फिर भी आया चर्चाओं में

पूरी दुनिया में अपना कहर बरपा रहा कोरोना वायरस से संक्रमित होने के सबसे ज्यादा मामले अमेरिका से हैं, जहां अभी तक करीब 16 लाख लोग इस वायरस की चपेट में चुके हैं

Last Modified:
Monday, 25 May, 2020
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पूरी दुनिया में अपना कहर बरपा रहा कोरोना वायरस से संक्रमित होने के सबसे ज्यादा मामले अमेरिका से हैं, जहां अभी तक करीब 16 लाख लोग इस वायरस की चपेट में चुके हैं, जबकि मरने वालों की संख्या करीब एक लाख तक पहुंच गई है। इस महामारी की गंभीरता को समझाने और जागरूक करने के लिए एक अखबार की अनूठी पहले दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है।

दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स के फ्रंट पेज पर न तो कोई खबर छपी है, न तस्वीर और न विज्ञापन। अखबार का फ्रंट पेज पूरी तरह से इस महामारी से जान गवाने वाले अमेरिकियों को समर्पित कर दिया गया है। पृष्ठ पर कोरोना से मरने वाले लोगों के नाम छापे गए हैं, लिहाजा यह देखकर हर कोई हैरान रह गया।

अखबार ने फ्रंट पेज पर एक लाख मृतकों के नाम छापते हुए सिर्फ एक लाइन का संदेश लिखा है, करीब एक लाख मौतें, बेहिसाब क्षति। इसके बाद नीचे उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा गया है सूची में वो सिर्फ नाम नहीं थे, वो हम थे। 

अखबार ने फ्रंट पेज पर मृतकों के नाम क्यों प्रकाशित किए, इसपर उसने 'टाइम्स इनसाइडर' में एक लेख भी प्रकाशित किया है। दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स के संपादकों ने इस भयावह स्थिति को दर्शाने का फैसला किया। ग्राफिक्स डेस्क की असिस्टेंट एडिटर सिमोन लैंडन संख्याओं को इस रूप में रखना चाहती थीं जो यह तो दिखाए ही कि कितनी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और यह भी किस वर्ग के लोगों की मौत हुई है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के सभी विभाग के पत्रकार इस महामारी को कवर कर रहे हैं। सिमोन लैंडन कहती हैं, हमें पता था कि हम माइल स्टोन खड़ा करने जा रहे हैं। हमें पता था कि उन संख्याओं को रखने का कुछ तरीका होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक लाख डॉट या स्टिक फिगर पेज पर लगाने से आपको कुछ पता नहीं चलता कि वे कौन लोग थे और वे हमारे लिए क्या मायने रखते थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अखबार के पहले पन्ने पर जिन एक हजार लोगों के नाम छापे गए हैं, वे कुल मौतों का सिर्फ एक फीसदी हैं। अखबार का कहना है कि मृतकों की लिस्ट इतनी लंबी है कि यदि इसे छापा जाए तो अखबार के 12वें पेज तक सिर्फ मृतकों के नाम ही लिखे जा सकते हैं। अखबार ने इन लोगों का नाम, उम्र और पता लिखने के बाद उनके बारे में एक लाइन लिखकर उन्हें याद किया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि इस वायरस से मरने वालों की संख्या के आधार पर अमेरिका पर इसके असर को नहीं समझा जा सकता। इस वायरस की अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

अखबार ने शनिवार की देर रात जैसे ही अपने फ्रंट पेज का स्क्रीनशॉट जारी किया, वह दुनिया भर में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। फेसबुक और ट्विटर पर काफी संख्या में लोगों ने इसे शेयर किया। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने मृतकों को याद करने के लिए इस अनूठे अंदाज पर अखबार को धन्यवाद ज्ञापित किया।  

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