अखबारों के फ्रंट पेज की सुर्खियां रहीं आज ये खबरें

जैकेट विज्ञापन के कारण आज हिन्दुस्तान में तीसरा पेज फ्रंट पेज है, जबकि नवभारत टाइम्स में आज दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं

नीरज नैयर by
Published - Tuesday, 07 January, 2020
Last Modified:
Tuesday, 07 January, 2020
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दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इस घोषणा के साथ ही जेएनयू हिंसा से जुड़ी खबर आज के अखबारों की सुर्खियां हैं। सबसे पहले बात करते हैं दैनिक जागरण की। लीड दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा है, जिसे काफी अच्छे से प्रस्तुत किया गया है। जेएनयू हिंसा पर सियासी घमासान और पीएम की उद्योगपतियों से मुलाकात को भी प्रमुखता मिली है। सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में आयोग के माध्यम से होगी नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अखबार ने फ्रंट पेज पर जगह दी है। इसके अलावा, एंकर में अमित शाह का राहुल और केजरीवाल पर हमला है। ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमला करने वाले मुख्य आरोपित की पाक में गिरफ्तारी की खबर को सिंगल कॉलम में रखा गया है।

अमर उजाला के फ्रंट पेज पर आज काफी विज्ञापन है। लीड दिल्ली विधानसभा चुनाव की घोषणा है, दूसरी बड़ी खबर जेएनयू हिंसा के विरोध में देश भर में हुए प्रदर्शन हैं। ईरान-अमेरिकी विवाद के साइड इफेक्ट, ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर हमले के मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी और पहाड़ों पर बर्फबारी भी पेज पर है। मोटर व्हीकल एक्ट पर केंद्र की राज्यों को चेतावनी को अखबार ने प्रमुखता के साथ फ्रंट पेज पर लगाया है। केंद्र का कहना है कि यदि राज्य सरकारें नया कानून लागू नहीं करती हैं तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

अब बात करते हैं हिन्दुस्तान की। जैकेट विज्ञापन के कारण तीसरे पेज को फ्रंट पेज बनाया गया है। इस फ्रंट पेज पर भी आधा पेज विज्ञापन है, लिहाजा ज्यादा खबरें पेज पर नहीं आ सकी हैं। लीड दिल्ली चुनाव की घोषणा है, सेकंड लीड का दर्जा जेएनयू हिंसा के खिलाफ हुए प्रदर्शन को मिला है। ईरान-अमेरिकी विवाद के साइड इफेक्ट दो कॉलम में हैं, जबकि पहाड़ों पर हुई बर्फबारी सहित दो खबरों को सिंगल में जगह मिली है।

वहीं, दैनिक भास्कर को देखें तो लीड दिल्ली के सियासी रण की घोषणा है। जिसे ‘इलेक्शन 20-20’ शीर्षक के साथ विस्तार से सजाया गया है। प्रधानमंत्री मोदी की 11 उद्योगपतियों से मुलाकात की खबर को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा, जेएनयू हिंसा पर पुलिस की कार्रवाई और मौसम से जुड़ी खबर को भी जगह मिली है। मौसम विभाग का कहना है कि 2019 भारत के लिए 119 साल में सातवां सबसे गर्म साल रहा। एंकर में फिनलैंड की प्रधानमंत्री का प्रस्ताव है, जिसमें उन्होंने हफ्ते में चार दिन रोजाना 6 घंटे काम करने की बात कही है। फिनलैंड की सना मारिन दुनिया की सबसे युवा प्रधानमंत्री हैं। अमेरिका-ईरान विवाद के साइड इफेक्ट को अखबार ने संक्षिप्त में रखा है।

आज राजस्थान पत्रिका का फ्रंट पेज आज काफी अलग दिखाई दे रहा है। अखबार ने लेआउट में बदलाव करने का प्रयास किया है। लीड सबसे अलग ईरान-अमेरिकी विवाद के साइड इफेक्ट हैं। हालांकि, दिल्ली के लिहाज से चुनाव की घोषणा की खबर को फिर अंडरप्ले किया गया है। यह समाचार टॉप पर महज दो कॉलम में है। आईटी रिटर्न फॉर्म में बदलाव को अपेक्षाकृत बड़ी जगह मिली है। वैसे इससे जुड़ी खबर कल ही कुछ अखबार छाप चुके हैं। जेएनयू हिंसा के फॉलोअप को भी प्रमुखता मिली है। वहीं, एंकर में साम्प्रदायिक टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का असम और केंद्र सरकार से किया गया सवाल-जवाब है। इसके अलावा पेज पर कुछ अन्य समाचार भी हैं।

सबसे आखिर में आज रुख करते हैं नवभारत टाइम्स का, जहां विज्ञापनों के चलते दो फ्रंट पेज बनाए गए हैं। पहले फ्रंट पेज की लीड जेएनयू हिंसा का फॉलोअप है। हिंसा के विरोध में देश के तमाम कॉलेजों सहित विदेशों में भी प्रदर्शन हुए। पुलिस का कहना है कि उसके हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं। इस खबर का शीर्षक ‘जेएनयू में हिंसा पर देश का दिल टुकड़े-टुकड़े’ काफी कुछ बयां करता है। दूसरे फ्रंट पेज की सबसे बड़ी खबर है दिल्ली चुनाव की घोषणा, राजधानी में 8 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। वहीं, नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दिल्ली के सीलमपुर में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने सात लोगों को पकड़ा है, जिनमें दो विदेशी भी हैं। इस खबर को प्रमुखता के साथ पेज पर रखा गया है।

इसके अलावा, अमेरिका-ईरान विवाद के साइड इफेक्ट और यातायात नियमों पर केंद्र की राज्यों को धमकी भी पेज पर है। खाड़ी संकट के चलते सोना और तेल महंगा हो गया है, जबकि सेंसेक्स ने गोता लगाया है। वहीं, केंद्र ने राज्यों को चेतावनी दी है कि यदि नए मोटर व्हीकल एक्ट का पालन नहीं किया गया तो राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा। अखबार में पहले पेज पर आधा पेज विज्ञापन होने के कारण यहां सिर्फ खबरों वाला हिस्सा ही शो हो रहा है, जबकि दूसरा फ्रंट पेज पूरा शो हो रहा है।

आज का किंग कौन?

1: लेआउट के मामले में आज दैनिक जागरण सहित सभी अखबार अच्छे नजर आ रहे हैं। हालांकि, ये कहना गलत नहीं होगा कि राजस्थान पत्रिका ने फ्रंट पेज में काफी बदलाव किया है, लेकिन फिर भी एंकर वाला हिस्सा टाइप्ड हो रहा है। इस बारे में भी अखबार को कुछ करने की जरूरत है।

2: खबरों की प्रस्तुति में आज सभी फ्रंट पेज आकर्षक दिख रहे हैं, लेकिन दिल्ली चुनाव की घोषणा को सबसे बेहतर ढंग से हिन्दुस्तान और दैनिक भास्कर ने प्रस्तुत किया है।

3: कलात्मक शीर्षक आज नवभारत टाइम्स और दैनिक भास्कर में देखने को मिले हैं। नवभारत टाइम्स ने जहां जेएनयू हिंसा से आहत देश की पीड़ा को बयां करता शीर्षक ‘जेएनयू में हिंसा पर देश का दिल टुकड़े-टुकड़े’ लगाया है। वहीं दैनिक भास्कर ने दिल्ली चुनाव की खबर के शीर्षक में प्रयोग किया है।

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छंटने लगे प्रिंट इंडस्ट्री पर छाये 'काले बादल', सामने आई ये रिपोर्ट

तमाम सेक्टर्स की तरह पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रिंट मीडिया को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब स्थिति में धीरे-धीरे मगर लगातार सुधार देखा जा रहा है

Last Modified:
Thursday, 30 July, 2020
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तमाम सेक्टर्स की तरह पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रिंट मीडिया को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब स्थिति में धीरे-धीरे मगर लगातार सुधार देखा जा रहा है और एडवर्टाइजर्स वापस लौटने लगे हैं। कोविड-19 ने मीडिया में प्रिंट की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित किया है। अपनी विश्वसनीयता के कारण पिछले एक महीने में प्रिंट पर धीरे-धीरे ही सही, विज्ञापनदाताओं की वापसी होने लगी है।

‘टैम एडेक्स’ (Tam AdEx) के डाटा के अनुसार, प्रिंट पर जो एडवर्टाइजर्स वापस लौट रहे हैं, उनमें 75 प्रतिशत हिंदी और अंग्रेजी भाषा के हैं। खास बात यह है कि कुछ बड़े प्लेयर्स के लिए नॉन मेट्रो शहरों से ज्यादा डिमांड आ रही है।  

एडवर्टाइजर्स की वापसी

इस बारे में ‘डीबी कॉर्प’ (DB Corp) के चीफ कॉरपोरेट सेल्स और मार्केटिंग ऑफिसर सत्यजीत सेन गुप्ता का कहना है, ‘मार्केट में रिकवरी के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। जैसी कि उम्मीद थी, मेट्रो सिटीज के मुकाबले टियर-दो और तीन शहरों में रिकवरी की रफ्तार अधिक है। ऑटोमोबाइल कैटेगरी हमारी सबसे बड़ी कैटेगरी है, जिसमें सबसे पहले रिकवरी देखी जा रही है। अधिकांश वाहनों की सेल्स में मजबूती देखी जा रही है। उन्होंने सबसे पहले मई के अंत में विज्ञापन देना शुरू कर दिया था। अन्य कैटेगरीज जैसे-एफएमसीजी, हेल्थकेयर, एजुकेशन और होम अप्लाइंसेज आदि ने जून से विज्ञापनों की फिर शुरुआत कर दी थी और अब उनके विज्ञापनों में तेजी आ गई है। लाइफस्टाइल, पर्सनल एसेसरीज और ज्वेलरी आदि कैटेगरीज ने भी जुलाई में विज्ञापन देने शुरू कर दिए हैं और अपना एड वॉल्यूम बढ़ा रहे हैं।’

एड वॉल्यूम में स्टेटवाइज शेयर की बात करें तो इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश 17 प्रतिशत शेयर के साथ टॉप पर है। दूसरे नंबर पर 10 प्रतिशत शेयर के साथ महाराष्ट्र है। इसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु का नंबर है। इस बारे में ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम का कहना है कि तमाम रिसर्च से पता चला है कि यह समय ब्रैंड्स के लिए चुप रहने का नहीं है। टैम डाटा के अनुसार, अप्रैल से जून के दौरान 189 कैटेगरीज में 28000 से ज्यादा एडवर्टाइजर्स और 31300 से ज्यादा ब्रैंड्स ने  खासतौर पर प्रिंट में विज्ञापन दिया है।

सुंदरम के अनुसार, ‘इन्वेंट्री में भी महीना दर महीना काफी इजाफा हो रहा है। आज यदि आप हमारे अखबार देखें तो विज्ञापन वापस आ रहे हैं। जैकेट विज्ञापनों की भी वापसी हुई है और हमने कई स्पेशल फीचर्स और सप्लीमेंट्स पब्लिश किए हैं। यानी रिकवरी का रास्ता पूरी तरह तैयार है। अखबारों के पेजों की बढ़ती संख्या भी सुधरती अर्थव्यवस्था का प्रतीक है और उसका उपभोक्ता की मानसिकता पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।’

पब्लिशर्स को भी जगी आस

त्योहारी मौसम को देखते हुए पब्लिशर्स को भी बेहतरी की उम्मीद है। इस बारे में ‘मलयाला मनोरमा’ (Malayala Manorama) के वाइस प्रेजिडेंट (मार्केटिंग, एडवर्टाइजिंग सेल्स) वर्गीस चांडी का कहना है, ‘कोविड के बाद महीना दर महीना बिजनेस बढ़ रहा है। हालांकि अभी यह उतना नहीं है, जितना कोविड से पहले था। ब्रैंड्स एक्टिव हैं और यदि हम खासतौर पर केरल को देखें तो ओणम निकट होने से यह क्लाइंट्स को एक्टिव होने के लिए प्रेरित करता है।’

दक्षिण के मार्केट में एडवर्टाइजर कैटेगरी में नई एंट्रीज भी हुई हैं, जिसकी इंडस्ट्री को बहुत जरूरत है। इस बारे में ‘मातृभूमि’ (Mathrubhumi) के मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी श्रेयम्स कुमार का कहना है, ‘क्लीनिंग/वॉशिंग और हाईजीन ब्रैंड्स जो पहले प्रिंट में सक्रिय नहीं थे, वे भी अब रेगुलर एडवर्टाइजर्स बन गए हैं।’  

ब्रैंड्स को क्या चाहिए

सुंदरम का मानना है कि एडवर्टाइजर्स शुरुआती तौर पर दो चीजें देख रहे हैं। सुंदरम के अनुसार, ‘सबसे पहले तो वह एक विश्वसनीय वातावरण देख रहे हैं, जहां पर उनके ब्रैंड्स को सही परिप्रेक्ष्य में और सकारात्मकता की भावना के साथ प्रदर्शित किया जा सकता है, जो अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता का विश्वास बढ़ाता है।’

इसके अलावा एडवर्टाइजर्स डिस्काउंट की ओर भी देख रहे हैं। सूत्रों के अनुसार एडवर्टाइजर्स ने लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में 50-60 प्रतिशत डिस्काउंट की मांग की है। हालांकि, अखबार अब क्लाइंट्स के लिए रियायती विज्ञापन दरों को प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं। हालांकि अधिकांश ने डिस्काउंट की संख्या में कमी की है, लेकिन कुछ इसे पूरी तरह समाप्त करने की ओर हैं। इस बारे में सेन गुप्ता का कहना है, ‘एडवर्टाइजर्स को उनके कंज्यूमर्स तक फिर से पहुंचाने और बिक्री बढ़ाने में मदद के लिए हमने जुलाई तक कुछ स्कीम भी पेश की हैं। हालांकि, अगस्त से हम इन स्कीम को खत्म कर रहे हैं।’

सुंदरम का कहना है, ‘वर्तमान समय में अधिकांश समाचार पत्रों का प्राथमिक ध्यान पाठक की रुचि और आपसी संबंध को बढ़ाना है। कोविड ने लोगों की अखबार से अपेक्षाओं को बदल दिया है। यह तथ्यों का सबसे भरोसेमंद स्रोत बन गया है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हम उपयोगिता और पढ़ने के आनंद का संतुलन बनाए रखें।’

वहीं, सेन गुप्ता का कहना है, ‘हमारे सभी प्रयास एडवर्टाइजर्स को अपने कंज्यूमर्स तक पहुंचने में मदद के लिए हैं।’ हालांकि, एडवर्टाइजर्स की प्रिंट पर वापसी हो रही है, विशेषज्ञों को इस बात में संदेह है कि क्या यह सीजन पिछले साल के बिजनेस से मेल खा पाएगा।

इस बारे में पब्लिशेस ग्रुप के स्वामित्व वाली मीडिया एजेंसी ‘जेनिथ’ (Zenith) के सीओओ जय लाला का कहना है, ‘लॉकडाउन के दौरान, प्रिंट को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा । हालांकि उनका ई-पेपर दर्शकों का ध्यान खींच रहा था, लेकिन उनके कुल राजस्व में भारी गिरावट देखी गई। अब चीजें धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं, जिससे लगता है कि त्योहारी सीजन से प्रिंट उद्योग में थोड़ी वृद्धि देखने में मदद मिल सकती है। लेकिन अभी तक हम यह अनुमान नहीं लगा सकते हैं कि जुलाई 2020 के दौरान बिजनेस पिछले साल यानी जुलाई 2019 के बराबर पहुंच पाएगा अथवा नहीं, क्योंकि इस उद्योग पर कोविड-19 का प्रभाव पिछले कुछ महीनों में सबसे ज्यादा रहा है।

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HT Media के लिए कैसी रही इस साल की पहली तिमाही, जानें नतीजे

‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ (HT Media Ltd) ने इस साल जून में समाप्त हुई पहली तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं।

Last Modified:
Wednesday, 29 July, 2020
HT Media

‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ (HT Media Ltd) ने इस साल जून में समाप्त हुई पहली तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। इन नतीजों के अनुसार इस मीडिया कंपनी ने इस साल जून में समाप्त हुई तिमाही में 51.95 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 142.48 करोड़ रुपये था।

साल दर साल (YoY) इसके कुल रेवेन्यू में 59 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले साल जून में समाप्त हुई तिमाही में इसका कुल रेवेन्यू 588.27 करोड़ रुपये था, जो इस साल इसी अवधि में 239.84 करोड़ रुपये रह गया है। इस मीडिया कंपनी का कहना है कि कारोबार में गिरावट मुख्य रूप से इसके वॉल्यूम में कमी (volume drops) के कारण देखी गई है।

‘एचटी मीडिया’ का कहना है कि जून 2020 में समाप्त हुई तिमाही में पिछले वर्ष की तिमाही की तुलना में प्रिंट बिजनेस के ऐड रेवेन्यू (ad revenues) में 77 प्रतिशत और सर्कुलेशन रेवेन्यू (circulation revenues) में 37 प्रतिशत की कमी हुई है।  

इन वित्तीय नतीजों के अनुसार, कॉमर्शियल और सरकारी विज्ञापनों के रेवेन्यू दोनों में कमी आई है और अखबार के डिस्ट्रीब्यूशन पर प्रभाव पड़ने से इसका सर्कुलेशन रेवेन्यू प्रभावित हुआ है। हालांकि मई-जून के बाद यह धीरे-धीरे बेहतर हुआ है।   

‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ और ‘हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स’ की चेयरपर्सन और एडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतिया का इस बारे में कहना है, ‘कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किए देशव्यापी लॉकडाउन के बीच इस तिमाही की शुरुआत हुई थी, जिसने विभिन्न सेक्टर्स के बिजनेस को प्रभावित किया है। इसके कारण विज्ञापन खर्च में काफी कमी देखी गई, जिसका नतीजा हमारे प्रिंट और रेडियो बिजनेस के रेवेन्यू पर पड़ा। इस तिमाही के शुरुआती दौर में यह प्रभाव ज्यादा था, इसके बाद मई और जून में धीरे-धीरे रिकवरी हुई।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘हालांकि, हमने तुरंत ऐहतियाती कदम उठाए, लेकिन ये रेवेन्यू में तेजी से आई गिरावट का पूरी तरह सामना नहीं कर सके। फिलहाल यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कब तक इसकी भरपाई होगी, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि कोविड-19 का अर्थव्यवस्था पर किस तरह का प्रभाव रहेगा। हालांकि, कंपनी के पास अभी भी पर्याप्त तरलता है जो परिचालन के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने में सक्षम है। हमारा पहला उद्देश्य अपने कस्टमर्स और कंज्यूमर्स को क्वलिटी प्रॉडक्ट उपलब्ध कराना है। हमें उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में वित्तीय नतीजों में सुधार आएगा।’

कंपनी के अंग्रेजी के प्रिंट वर्टिकल (हिन्दुस्तान टाइम्स और मिंट आदि)  के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में 82 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1’21) में एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू 36 करोड़ रुपये रहा जो पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (Q1’20) में 198 करोड़ रुपये था। वहीं, सर्कुलेन रेवेन्यू जो पिछले साल की पहली तिमाही में 15 करोड़ रुपये था, इस तिमाही में 85 प्रतिशत घटकर करीब दो करोड़ रुपये रह गया। मीडिया कंपनी का कहना है कि ऐड रेवेन्यू की ग्रोथ में यह कमी कोविड-19 के कारण कम वॉल्यूम की वजह से आई। सभी श्रेणियों के विज्ञापन जैसे-एजुकेशन, ऑटोमोबाइल्स, रियल एस्टेट, एंटरटेनमेंट और रिटेल में नरमी देखी गई।

हालांकि, अंग्रेजी प्रिंट वर्टिकल के मुकाबले हिंदी प्रिंट वर्टिकल पर इसका प्रभाव कम पड़ा। इस तिमाही में इन वर्टिकल के ऐड रेवेन्यू में पिछले साल की इसी तिमाही में 164 करोड़ रुपये के मुकाबले 70 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो 49 करोड़ रुपये थी। सर्कुलेशन रेवेन्यू में 23 प्रतिशत की कमी आई। पिछले साल पहली तिमाही (Q1’20) की तुलना में इस साल की पहली तिमाही (Q1’21) में इसका रेवेन्यू 50 करोड़ रुपये से घटकर 39 करोड़ रुपये रह गया।  ‘एचटी मीडिया’ के रेडियो बिजनेस के ऑपरेटिंग रेवेन्यू में भी कमी देखी गई है। वित्तीय वर्ष 2021 की पहली तिमाही (Q1’21) में यह आठ करोड़ रहा, जबकि वित्तीय वर्ष 2020 की पहली तिमाही (Q1’20) में यह 64 करोड़ रुपए था। यानी इसमें करीब 88 प्रतिशत की कमी देखने को मिली।

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प्रिंट मीडिया में सरकारी विज्ञापनों के लिए MIB ने जारी कीं ये गाइडलाइंस

सूचना प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) ने प्रिंट मीडिया एडवर्टाइजमेंट पॉलिसी पेश की है। ये एक अगस्त से प्रभावी होगी।

Last Modified:
Tuesday, 28 July, 2020
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सूचना प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) ने प्रिंट मीडिया एडवर्टाइजमेंट पॉलिसी पेश की है। ये एक अगस्त से प्रभावी होगी। इस बारे में जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि सरकार के सभी मंत्रालय या विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्वायत्त निकाय और सोसायटीज, केंद्रीय विश्वविद्यालय और भारत सरकार के सभी शैक्षणिक संस्थान अपने डिस्पले विज्ञापनों को  ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ के माध्यम से देंगे।

हालांकि, वे क्लासीफाइड विज्ञापन जैसे(टेंडर नोटिस, नीलामी सूचना, भर्ती विज्ञापन आदि) बीओसी से सूचीबद्ध (empanelled) पब्लिकेशंस को बीओसी की दरों पर जारी कर सकते हैं और भर्ती संबंधी अपने विज्ञापन सीधे रोजगार समाचार (Employment News) में बीओसी की दरों पर पब्लिश करा सकते हैं।  

इसमें आगे कहा गया है कि सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के इच्छुक पब्लिकेशंस के आवेदनों पर विचार करने के लिए एक पैनल सलाहकार समिति (PAC) होगी। इन गाइडलाइंस में पब्लिकेशंस के लिए सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के लिए कुछ मापदंड भी तय किए गए हैं।

इनके अनुसार, पब्लिकेशन को कम से कम 36  महीने तक बिना रुकावट के नियमित रूप से पब्लिश होना चाहिए। हालांकि, 36 महीनों के अनिवार्य निर्बाध और नियमित प्रकाशन की अवधि के मामले में कुछ श्रेणियों के लिए 6 महीने तक छूट दी जा सकती है।

यही नहीं, पब्लिकेशन को यथोचित मानक का पालन करने की भी जरूरत है। बीओसी में संबद्धता के लिए नए आवेदन साल में दो बार (फरवरी और अगस्त) किए जा सकते हैं। इन आवेदनों पर पैनल सलाहकार समिति (PAC) द्वारा विचार किया जाएगा, जिनकी बैठक वर्ष में दो बार होगी। बीओसी द्वारा जारी किए जाने वाले विज्ञापनों की दरें रेट स्ट्रक्चर कमेटी (Rate Structure Committee) की सिफारिशों के आधार पर तय की जाएंगी। ये दरें पब्लिकेशन के प्रमाणिक सर्कुलेशन से संबंधित होंगी।

महारत्न और नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSUs) के लिए विज्ञापन की दरें बीओसी की सामान्य दरों से डेढ़ गुना होंगी। दरों में संशोधन के बाद से यह तीन साल के लिए वैध होंगी।  

गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि जिन समाचार पत्रों का सर्कुलेशन ABC (ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन)/ RNI (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) से सत्यापित होता है और जो जारी विज्ञापनों में पारदर्शिता व जवाबदेही लाते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए बीओसी कुछ तय मानदंडों के आधार पर एक मार्किंग सिस्टम का सहारा लेगी। इसके बाद अखबार द्वारा प्राप्त किए गए मार्क्स के आधार पर मध्यम और बड़ी कैटेगरी के लिए विज्ञापन जारी करेगी।

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प्रिंट मीडिया के लिए काफी राहत भरी है TAM AdEx की ये रिपोर्ट

आठ प्रतिशत शेयर के साथ कार कैटेगरी इस लिस्ट में टॉप पर है, जबकि इसके बाद कोचिंग और एग्जाम सेंटर्स का नंबर है।

Last Modified:
Monday, 27 July, 2020
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कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लगाए गए लॉकडाउन के कारण तमाम उद्योग धंधों के साथ मीडिया इंडस्ट्री पर काफी प्रभाव पड़ा। इस दौरान अखबारों को दिए जाने वाले विज्ञापनों में भी काफी कमी आई। हालांकि, अब अखबार के विज्ञापनों के लिए लंबे समय से चला आ रहा यह ‘सूखा’ खत्म होना शुरू हो गया है। ‘टैम एडेक्स’ (TAM AdEx) के नए आंकड़ों के अनुसार, लॉकडाउन की वजह से मार्च और अप्रैल में स्थिति ज्यादा खराब रही, लेकिन मई में औसत विज्ञापन की मात्रा (average ad volume) में प्रतिदिन 0.47 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ और जून में यह 3.2 गुना हो गया है।

इस रिपोर्ट को देखने से पता चलता है कि अप्रैल से जून के बीच 75 प्रतिशत विज्ञापन हिंदी और अंग्रेजी भाषा के थे, जबकि अन्य 11 भाषाओं के विज्ञापनों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी।  इस अवधि के दौरान भाषाई रूप से विज्ञापनों के शेयर के मामले में लगभग सभी का शेयर पांच प्रतिशत रहा है और कन्नड़, मराठी व तमिल तीसरे, चौथे और पांचवे नंबर पर रहे हैं। यदि टॉप10 कैटेगरीज को देखें तो इनका ऐड वॉल्यूम शेयर जनवरी-मार्च और अप्रैल-जून में लगभग एक जैसा रहा है। विज्ञापन श्रेणी की बात करें तो आठ प्रतिशत शेयर के साथ कारों की कैटेगरी इस लिस्ट में टॉप पर है जबकि कोचिंग और एग्जाम सेंटर्स का नंबर इसके बाद है। 10 कैटेगरीज में चार एजुकेशन सेक्टर से थीं और इनका कुल शेयर 16 प्रतिशत था। मल्टीपल कोर्सेज की कैटेगरी पांच प्रतिशत शेयर के साथ तीसरे नंबर पर जबकि हॉस्पिटल्स/क्लिनिक्स चार प्रतिशत शेयर के साथ चौथे स्थान पर रही। इस लिस्ट में पांचवे नंबर पर ओटीसी प्रॉडक्ट्स थे।

अप्रैल-जून के बीच टॉप 10 एडवर्टाइजर्स का ऐड वॉल्यूम 22 प्रतिशत रहा है, जबकि जनवरी-मार्च के बीच यह 16 प्रतिशत था। टॉप 10 एडवर्टाइजर्स में से प्रत्येक तीन ऑटो और एजुकेशन सेक्टर से थे और इनका प्रतिशत क्रमश: छह और पांच प्रतिशत था। टॉप-10 एडवर्टाइजर्स की बात करें तो अप्रैल से जून के बीच प्रिंट एडवर्टाइजिंग की लिस्ट में छह प्रतिशत शेयर के साथ ‘एसबीएस बायोटेक लिमिटेड’ (SBS Biotech) शीर्ष पर है। इस लिस्ट में ‘मारुति सुजुकी इंडिया’ (Maruti Suzuki India) दूसरे नंबर पर जबकि ‘फिट्जी’ (Fiitjee) तीसरे नंबर पर है।  टॉप-10 एडवर्टाइजर्स की लिस्ट में जनवरी-मार्च की तुलना में अप्रैल-जून के बीच सात नए एडवर्टाइजर्स ने अपनी जगह बनाई है।  

‘मारुति सुजुकी इंडिया’ जनवरी से मार्च के बीच चौथे स्थान पर थी, जो अप्रैल से जून के बीच दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। ‘फिट्जी’ ने भी जनवरी से मार्च की तुलना में 95 स्थान की छलांग लगाते हुए अप्रैल से जून के बीच तीसरा स्थान हासिल किया है। ‘प्रॉक्टर एंड गैंबल’ (Procter & Gamble) होम प्रॉडक्ट्स जनवरी से मार्च की तुलना में 1350 स्थान की छलांग लगाते हुए अप्रैल से जून के बीच पांचवे स्थान पर पहुंच गया। वहीं, ‘रिलायंस इंडस्ट्रीज’ (Reliance Industries) 108 स्थान ऊपर खिसककर सातवें नंबर पर पहुंच गया है।  

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34 साल बाद इस मैगजीन का प्रकाशन होगा बंद, 28 जुलाई को आएगा आखिरी अंक

कभी ब्रिटिश म्यूजिक प्रेस की आधारशिला रखने वाली मैगजीन ‘क्यू’ (Q) का प्रकाशन 34 साल बाद अब बंद होने जा रहा है

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Monday, 27 July, 2020
magazine

कभी ब्रिटिश म्यूजिक प्रेस की आधारशिला रखने वाली मैगजीन ‘क्यू’ (Q) का प्रकाशन 34 साल बाद अब बंद होने जा रहा है। इस मैगजीन का 28 जुलाई को प्रकाशित होने वाला अंक अंतिम अंक होगा।

मैगजीन के एडिटर टेड केसलर ने एक ट्वीट में कहा, ‘Q मैगजीन के बारे में कुछ बुरी खबर है। 28 जुलाई को आने वाला अंक आखिरी होगा। 'महामारी ने हमारे साथ जो बुरा किया, इससे ज्यादा उसके पास कुछ और करने के लिए नहीं था। मैंने हमारा फाइनल कवर और कॉन्टेक्स्ट के लिए संपादक के पत्र को संलग्न किया है।

अपने अंतिम अंक में संपादक के पत्र में उन्होंने लिखा, कोविड-19 ने इन पर पानी फेर दिया। मैं अपनी विफलता के लिए माफी मांगता हूं, कृपया आप लोग आगे बढ़ना जारी रखें। वहीं इस मैगजीन के बंद होने से कई लोग दुखी हैैं।

बता दें कि मैगजीन का सर्कुलेशन, जोकि 2001 में 200,000 प्रति माह था। यह अपने पीक से घटकर 28,000 प्रति माह रह गया था। ‘स्मैश हिट्स’ (Smash Hits) के लेखक मार्क एलेन और डेविड हेपवर्थ ने 1986 में इस मैगजीन को शुरू किया था।

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मैगजीन के प्रेजिडेंट को भारी पड़ गया अखबार में छपा इस तरह का लेख, देना पड़ा इस्तीफा

अमेरिका की ‘हर्स्ट मैगजीन’ से बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है कि मैगजीन के प्रेजिडेंट ट्रॉय यंग ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया

Last Modified:
Friday, 24 July, 2020
Troy-Young

अमेरिका की ‘हर्स्ट मैगजीन’ से बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है कि मैगजीन के प्रेजिडेंट ट्रॉय यंग ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दरअसल, मैगजीन में काम कर रहीं कई एम्प्लॉयीज ने उन पर भद्दी और अश्लील टिप्पणी करने का आरोप लगाया है।

दरअसल, यहां के अंग्रेजी दैनिक ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में छपे एक लेख के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। लेख में ‘हर्स्ट मैगजीन’ की ही महिलाकर्मियों ने उन पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने काम का एक जहरीले माहौल तैयार किया है, उन्होंने कर्मचारियों को धमकाया और कामुक टिप्पणी की हैं। साथ ही उन पर  नस्लीय भेदभाव का माहौल तैयार करने का भी आरोप लगा है।

यंग 2013 में ‘हर्स्ट’ के साथ जुड़े थे। तब उन्हें कंपनी के डिजिटल मीडिया का हेड नियुक्त किया गया था। कंपनी का कॉरपोरेट स्ट्रक्चर बदलने के बाद 2018 में उन्हें प्रेजिडेंट के पद पर प्रमोट कर दिया गया।

‘हर्स्ट’ के एम्प्लॉयीज ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि यंग को तब भी प्रमोट किया गया था जब करीब चार कर्मचारियों ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें मानव संसाधन विभाग (HR डिपार्टमेंट) द्वारा परेशान किया जा रहा है।

गुरुवार को सभी एम्प्लॉयीज को लिखे एक ईमेल में हर्स्ट के सीईओ स्टीवन स्वार्ट्ज ने कहा कि वह और यंग सहमत थे कि उन्हें तुरंत ही इस्तीफा दे देना चाहिए, जोकि हम सभी के हित में है।

वहीं यंग ने बुधवार को एक बयान में कहा कि उनके ऊपर लगाए गए इस तरह के आरोप गलत और बहुत ही अतिशयोक्तिपूर्ण बताया है।

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कोरोना: जागरूकता बढ़ाने के लिए अखबार ने की यह अनूठी पहल

महामारी के संक्रमण की चपेट में आने से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और मास्क का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2020
Newspaper

देश-दुनिया में कोरोनावायरस (कोविड-19) का प्रकोप जारी है। इस महामारी के संक्रमण की चपेट में आने से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने और मास्क का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। लोगों को मास्क का इस्तेमाल करने के प्रति जागरूक करने के लिए जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से निकलने वाले स्थानीय उर्दू अखबार ‘रोशनी’ (Roshni) ने एक नई पहल की है। इसके तहत अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर पाठकों के लिए एक मास्क अटैच किया है और उसे पहनने की अपील की है।  

पेज पर दायीं तरफ उर्दू में लिखा गया है, 'मास्क का इस्तेमाल जरूरी है।' इस संदेश के साथ एक ऐरो (Arrow) बनाया गया है, जो बायीं तरफ पेज पर प्लास्टिक के अंदर लगाए गए मास्क की ओर इशारा कर रहा है। इस बारे में रोशनी की एडिटर जहूर शोरा (Zahoor Shora) का कहना है, ‘हमने सोचा कि इस समय लोगों को यह संदेश देना महत्वपूर्ण है और उन्हें मास्क पहनने का महत्व समझाने का यह एक अच्छा तरीका था।’ अखबार की इस पहल की सोशल मीडिया पर तमाम लोगों ने सराहना की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अखबार की कीमत करीब दो रुपए है और अगर पब्लिशर इसके साथ मुफ्त मास्क दे रहा है तो सिर्फ इसलिए कि वह चाहते हैं कि लोग इसके महत्व के बारे में जागरूक हों। हमें इसकी सराहना करनी चाहिए। भले ही कुछ लोग घर पर इस अखबार को पढ़ते हैं, लेकिन अखबार का यह कदम एक बड़ा संदेश देता है।

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MRUC ने IRS 2020 के सर्वे का काम किया स्थगित: रिपोर्ट्स

'मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल' ने इंडियन रीडरशिप सर्वे 2020 के प्रॉडक्शन और पब्लिकेशन का काम स्थगित कर दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 22 July, 2020
MRUC

'मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल' (MRUC) ने इंडियन रीडरशिप सर्वे 2020 (IRS 2020) के प्रॉडक्शन और पब्लिकेशन का काम स्थगित कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, काउंसिल ने कथित रूप से कहा है कि वह सर्वे के लिए किए गए उनके भुगतान को वापस कर देगी। बताया जाता है कि काउंसिल ने सर्वे के लिए अक्टूबर-नवंबर में भुगतान लिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोविड-19 महामारी के कारण काउंसिल ने यह निर्णय लिया है, क्योंकि इस दौर में रिसर्च के लिए जरूरी फील्डवर्क संभव नहीं है। एमआरयूसी ने कथित तौर पर रिसर्च के लिए एक नई एजेंजी नियुक्त करने के लिए एक प्रस्ताव जारी किया था, क्योंकि ‘नील्सन’ (Nilsen) के साथ उसका कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो गया है।

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इस अखबार में होगी छंटनी, एम्प्लॉयीज के लिए जारी नोटिस में बताया ये कारण

‘मिड-डे’ (Mid- Day) अखबार ने एंप्लॉयीज की छंटनी करने का निर्णय लिया है। इस बारे में अखबार की ओर से एम्प्लॉयीज के लिए एक नोटिस भी जारी किया गया है।

Last Modified:
Tuesday, 21 July, 2020
PINK SLIP

‘मिड-डे’ (Mid- Day) अखबार ने एम्प्लॉयीज की छंटनी करने का निर्णय लिया है। इस बारे में अखबार की ओर से एम्प्लॉयीज के लिए एक नोटिस भी जारी किया गया है। अखबार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है, ‘जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से गलाकाट प्रतियोगिता और पाठकों की संख्या में कमी से जूझ रहे हैं। इससे हमें काफी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा हम अपने एंप्लॉयीज को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सैलरी दे रहे हैं। ऐसे में मार्केट में बने रहना हमारे लिए काफी मुश्किल हो रहा है।’

अखबार की ओर से यह भी कहा गया है, ‘मार्च 2020 से कोविड-19 महामारी ने देश-दुनिया को काफी प्रभावित किया है और तमाम बिजनेस इसकी वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। मार्च में किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण हमारी आर्थिक स्थिति भी काफी प्रभावित हुई है।’

‘लॉकडाउन के बाद से अखबार का प्रॉडक्शन काफी घट गया है, क्योंकि विज्ञापन और पाठक काफी कम हो गए हैं। कोरोनावायरस के खौफ के कारण तमाम पाठक घरों पर अखबार नहीं मंगा रहे हैं। पाठकों को घरों तक अखबार पहुंचाने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स और न्यूजपेपर सप्लाई करने वालों की भी कमी बनी हुई है।’   

मिड-डे के अनुसार, ‘आप सभी एम्प्लॉयीज इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि रीडर्स/कस्टमर्स की ओर से मांग में काफी कमी आने के कारण कंपनी की कमाई में काफी कमी आई है। अपने एंप्लॉयीज के वेतन-भत्तों का भुगतान करने के लिए कंपनी के पास कोई संसाधन नहीं हैं और इसलिए कंपनी ने छंटनी करने का निर्णय लिया है। इस बारे में ठाणे के डिप्टी लेबर कमिश्नर को भी आवश्यक सूचना भेज दी गई है।’

अखबार की ओर से जारी किए गए नोटिस को आप यहां देख सकते हैं

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अमेरिकी अखबार ने किया दावा, इस सच को छिपा रहा है भारत

‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा कि भारत सरकार का कहना है कि वो बाकी देशों की तुलना में कोरोना से बेहतर तरीके से लड़ रहा है।

Last Modified:
Monday, 20 July, 2020
Newspaper

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 10 लाख  को भी पार कर गई है, जिसके चलते भारत दूसरे नंबर पर पहुंचने वाला है। लेकिन फिर भी भारत पर आरोप लग रहे हैं कि वह कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा छिपा रहा है। यह दावा अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने किया है।

अखबार के मुताबिक, भारत कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा छुपा रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि जब भारत के चार बड़े शहरों से मार्च और जून के बीच हुई मौतों का आंकड़ा मांगा गया, तो सिर्फ मुंबई ने ही सही आंकड़ा उपलब्ध करवाया, जबकि कोलकाता ने तो कोई आंकड़ा दिया ही नहीं।  

‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा कि भारत सरकार का कहना है कि वो बाकी देशों की तुलना में कोरोना से बेहतर तरीके से लड़ रहा है। लेकिन भारत की एक बड़ी जनसंख्या गांवों और छोटे शहरों में रहती है। इन स्थानों पर स्वास्थ्य सुविधाएं बड़े शहरों की तुलना में ज्यादा अच्छी नहीं है।

अमेरिकी अखबार ने अपने दावे में कहा कि अमेरिका और ब्राजील में जब कोरोना के कुल मामले 10 लाख थे तो मौत की संख्या करीब 50 हजार हो चुकी थी, लेकिन कुल 10 लाख मामलों पर भारत में कोरोना से मौत का आंकड़ा 25 हजार रहा है।

‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा कि भारत में कई मौतें रिपोर्ट ही नहीं की जाती है। इसके अलावा भारत ने कहा है कि देश में कोरोना से कम मौत होने का कारण टीबी वैक्सीन और भारतीय लोगों में मौजूद इम्यूनिटी है, जबकि अमेरिकी एक्सपर्ट का मानना है कि इस थ्योरी का कोई प्रमाण अभी तक नहीं मिला है।

अखबार ने कहा है कि विकसित देशों में भी कोरोना से हुई मौतों के सही आंकड़ें नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में भारत में सही आंकड़ें मिलना वाकई में एक 'रहस्य' जैसे दिखाई पड़ रहा है। अखबार ने लिखा है कि जब तक किसी भी देश में सही आंकड़े न मिले, तब तक कोरोना से लड़ना आसान नहीं हो पाएगा।

मुंबई में हुई मौतें अखबार ने लिखा कि मुंबई में पिछले साल मई में 6832 लोगों की मौत हुई थी। वहीं इस साल मई में 12,963 मौतें हुई। अखबार ने लिखा कि इस साल मुंबई में 6131 अतिरिक्त लोगों की मौतें हुई। जबकि सिर्फ 2269 मौतों को कोरोना से हुई मौतों की लिस्ट में जोड़ा गया है। सामान्य दिनों में मौतें नहीं होती रिपोर्ट पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट के. श्रीनाथ रेड्डी ने कहा है कि भारत में नॉर्मल दिनों में 20 प्रतिशत मौतों को रिपोर्ट नहीं किया जाता है। ऐसे में माना जा सकता है कि कोरोना से हुई मौतें ऑफिशियल आंकड़ों से अधिक ही होंगी।

 

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