एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकारी दखल को लेकर बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकारी दखल को लेकर बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। कंपनी अब ऐसे सरकारी अनुरोधों को यूजर्स के लिए ज्यादा स्पष्ट और दिखाई देने वाला बनाने की तैयारी कर रही है, जिनके तहत किसी पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट पर रोक लगाने की मांग की जाती है।
नई व्यवस्था के तहत अगर कोई सरकारी अथॉरिटी किसी खास पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट को प्रतिबंधित करने का अनुरोध करती है, तो X यूजर्स को इसकी जानकारी देगा। प्लेटफॉर्म यह भी बताने की योजना बना रहा है कि किस सरकारी एजेंसी ने कार्रवाई की मांग की है और इसके लिए किस कानूनी आधार या वजह का हवाला दिया गया है।
Any censorship required by governments is now clearly visible https://t.co/eQMdoYlhkA
— Elon Musk (@elonmusk) August 15, 2026
सरकारी आदेश और X की अपनी मॉडरेशन में फर्क दिखेगा
इस बदलाव का मकसद सरकारी आदेशों के कारण होने वाली कंटेंट पाबंदियों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना है। X लंबे समय से खुद को फ्री स्पीच पर जोर देने वाले प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश करता रहा है, लेकिन अलग-अलग देशों की सरकारों और नियामक एजेंसियों की ओर से मिलने वाले कंटेंट हटाने के अनुरोधों का भी उसे पालन करना पड़ता है।
नई व्यवस्था लागू होने पर यूजर्स के लिए यह समझना आसान होगा कि किसी पोस्ट या अकाउंट पर कार्रवाई X की अपनी कंटेंट पॉलिसी के तहत हुई है या किसी सरकार के अनुरोध पर।
यानी अगर किसी पोस्ट पर सरकारी आदेश के कारण कार्रवाई होती है, तो यह जानकारी यूजर से छिपी नहीं रहेगी और उसे बताया जा सकता है कि कार्रवाई के पीछे किस सरकारी एजेंसी का अनुरोध था।
अलग-अलग देशों में अलग कानून
X को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सरकारों और नियामक संस्थाओं से आधिकारिक अनुरोध मिलते हैं। अलग-अलग देशों में इंटरनेट और सोशल मीडिया को लेकर अलग कानून और नियम हैं। इनमें यूरोपीय संघ, भारत और तुर्की जैसे बाजार भी शामिल हैं।
ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सामने दोहरी चुनौती रहती है। एक तरफ सरकारें अपने देश के कानूनों को लागू करवाने के लिए कंटेंट हटाने या अकाउंट पर कार्रवाई की मांग करती हैं, वहीं दूसरी तरफ यूजर्स ऑनलाइन अभिव्यक्ति की आजादी और पारदर्शिता की मांग करते हैं।
X का नया सिस्टम इसी टकराव के बीच सरकारी हस्तक्षेप को ज्यादा स्पष्ट तरीके से सामने लाने की कोशिश माना जा रहा है।
Musk के दौर में सरकारी अनुरोधों पर ज्यादा कार्रवाई?
रिपोर्ट में Crypto Briefing के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि एलन मस्क के स्वामित्व में आने के बाद अलग-अलग रिपोर्टिंग अवधि में X ने सरकारों की ओर से किए गए 83% से 98.8% तक के कंटेंट हटाने के अनुरोधों का पालन किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह अनुपात X के पिछले प्रबंधन के दौरान दर्ज आंकड़ों से ज्यादा है।
हालांकि, अब X सरकारी अनुरोधों को ज्यादा स्पष्ट रूप से यूजर्स के सामने लाने की दिशा में बढ़ रहा है। इससे यूजर्स को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी कंटेंट पर लगी रोक प्लेटफॉर्म के अपने फैसले का नतीजा है या किसी सरकारी आदेश का।
फ्री स्पीच और सरकारी नियमों के बीच संतुलन की कोशिश
X का यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियों पर सरकारी नियमों का पालन करने और यूजर्स की अभिव्यक्ति की आजादी के बीच संतुलन बनाने का दबाव बढ़ रहा है।
अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो किसी पोस्ट को हटाए जाने या अकाउंट पर प्रतिबंध लगाए जाने की स्थिति में यूजर्स को उसके पीछे की सरकारी भूमिका के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकेगी। इससे X पर होने वाली कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा पारदर्शी नजर आ सकती है।
इंस्टाग्राम (Instagram) ने करीब 10 साल बाद अपने वर्डमार्क (Wordmark) को नया रूप दिया है। हालांकि, ऐप का मशहूर रंगीन कैमरा आइकन पहले जैसा ही रहेगा।
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इंस्टाग्राम (Instagram) ने अपनी विजुअल पहचान में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने करीब एक दशक बाद अपने वर्डमार्क (Wordmark) यानी लिखे हुए ‘Instagram’ नाम का नया डिजाइन पेश किया है। हालांकि, ऐप का मशहूर गुलाबी, नारंगी और बैंगनी रंग वाला कैमरा आइकन फिलहाल पहले जैसा ही रखा गया है।
नए वर्डमार्क में 2016 में पेश किए गए पुराने स्क्रिप्ट स्टाइल को बदलकर सामान्य टाइपफेस और कर्सिव (Cursive) डिजाइन का मिश्रण इस्तेमाल किया गया है। नए डिजाइन में ‘s’, ‘r’ और ‘g’ अक्षरों की घुमावदार शैली को खास तौर पर उभारा गया है, ताकि इंस्टाग्राम की पुरानी विजुअल पहचान की झलक भी बनी रहे।
इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी (Adam Mosseri) ने गुरुवार को नए डिजाइन को पेश किया। उन्होंने इसे पहले के मुकाबले ज्यादा साफ और आधुनिक बताया, जबकि कंपनी की पुरानी पहचान से जुड़े कुछ तत्वों को भी इसमें बनाए रखा गया है।
कहां दिखेगा नया डिजाइन?
नया वर्डमार्क ऐप के अंदर लिखे हुए ‘Instagram’ नाम में दिखाई देगा। इसके अलावा मार्केटिंग और दूसरे ब्रांड मटेरियल में भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, फोन की होम स्क्रीन पर दिखाई देने वाला इंस्टाग्राम का रंगीन कैमरा आइकन नहीं बदला गया है। मेटा (Meta) की ओर से अभी यह नहीं बताया गया है कि भविष्य में ऐप के कैमरा आइकन को भी बदला जाएगा या नहीं।
करीब 10 साल बाद हुआ बदलाव
इंस्टाग्राम ने इससे पहले 2016 में अपनी विजुअल पहचान में बड़ा बदलाव किया था। उस समय कंपनी ने पुराने कैमरा डिजाइन वाले आइकन को हटाकर गुलाबी, नारंगी और बैंगनी रंग वाले ग्रेडिएंट कैमरा आइकन को पेश किया था। यह आइकन बाद में दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले ऐप आइकन में शामिल हो गया।
नए वर्डमार्क को लेकर यूजर्स की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। कुछ लोगों ने सामान्य और कर्सिव अक्षरों के मिश्रण की आलोचना करते हुए कहा कि इससे ‘Instagram’ नाम को पढ़ना पहले की तुलना में थोड़ा मुश्किल लग रहा है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब इंस्टाग्राम खुद भी पिछले कुछ वर्षों में काफी बदल चुका है। फोटो शेयरिंग ऐप के तौर पर शुरू हुआ प्लेटफॉर्म अब शॉर्ट वीडियो, एल्गोरिदम आधारित सुझाव, मैसेजिंग और ऑनलाइन खरीदारी जैसे क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। फिलहाल कंपनी ने अपनी पहचान के सिर्फ कम प्रमुख हिस्से यानी वर्डमार्क को बदला है, जबकि 2016 से पहचान बन चुके रंगीन कैमरा आइकन को बरकरार रखा गया है।
पारश्मोनी देओरी (Parashmoni Deori) ने GSK इंडिया (GSK India) में कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस मैनेजर (Corporate Communications Manager) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
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पारश्मोनी देओरी (Parashmoni Deori) ने GSK इंडिया (GSK India) में कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस मैनेजर (Corporate Communications Manager) के तौर पर नई पारी शुरू की है। वह कंपनी की कम्युनिकेशंस एंड गवर्नमेंट अफेयर्स (Communications & Government Affairs) टीम का हिस्सा बनी हैं।
पारश्मोनी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर कुछ नया करने की दिशा में एक और कदम है। करीब दो साल पहले भी उन्होंने अपने करियर में इसी तरह का बदलाव किया था।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग इंडस्ट्री में काम करने के बावजूद स्टोरीटेलिंग (Storytelling) उनके काम को जोड़ने वाली सबसे अहम कड़ी रही है। नई इंडस्ट्री उनके लिए भले ही नई है, लेकिन लोगों और ब्रांड्स से जुड़ी कहानियों को सामने लाने का उनका अनुभव यहां भी काम आएगा।
पारश्मोनी के पास कम्युनिकेशंस, ब्रांड बिल्डिंग, सोशल मीडिया और गो-टू-मार्केट स्ट्रैटेजी (Go-to-Market Strategy) में आठ साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर के दौरान अलग-अलग इंडस्ट्री में काम किया है।
GSK इंडिया में अपनी नई भूमिका में वह कम्युनिकेशंस एंड गवर्नमेंट अफेयर्स टीम के साथ काम करेंगी। इस जिम्मेदारी में वह ब्रांड कम्युनिकेशंस (Brand Communications) और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस (Strategic Communications) से जुड़े अपने अनुभव का इस्तेमाल करेंगी।
यूट्यूब (YouTube) ने पार्टनर प्रोग्राम (Partner Program) के लिए कमाई की शर्तें बढ़ाने का ऐलान किया है। नए क्रिएटर्स को अब ज्यादा व्यूज जुटाने होंगे।
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यूट्यूब (YouTube) से कमाई करने की तैयारी कर रहे नए कंटेंट क्रिएटर्स (Content Creators) के लिए आने वाले समय में मुश्किल बढ़ सकती है। कंपनी ने अपने यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम (YouTube Partner Program) के मोनेटाइजेशन नियमों में बदलाव का ऐलान किया है। नए नियम 1 फरवरी से लागू होंगे।
नए नियमों के मुताबिक, पार्टनर प्रोग्राम में शामिल होने के लिए क्रिएटर्स के पास कम से कम 1,000 सब्सक्राइबर (Subscribers) होने चाहिए। इसके साथ पिछले 12 महीनों में 8,000 योग्य वॉच ऑवर्स (Qualified Watch Hours) या पिछले 90 दिनों में 2 करोड़ योग्य शॉर्ट्स व्यूज (Qualified Shorts Views) में से कोई एक शर्त पूरी करनी होगी।
फिलहाल यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम के लिए 1,000 सब्सक्राइबर के साथ पिछले एक साल में 4,000 वॉच ऑवर्स या 90 दिनों में 1 करोड़ शॉर्ट्स व्यूज की जरूरत होती है। यानी नए नियमों में वॉच ऑवर्स और शॉर्ट्स व्यूज की सीमा दोगुनी की जा रही है।
शॉर्ट्स क्रिएटर्स (Shorts Creators) के लिए भी कमाई जारी रखने की शर्त रखी गई है। उन्हें हर 90 दिनों में 1 करोड़ व्यूज हासिल करने होंगे। अगर किसी क्रिएटर के व्यूज इस सीमा से नीचे चले जाते हैं तो उसे पार्टनर प्रोग्राम से पूरी तरह बाहर नहीं किया जाएगा, लेकिन उस 90 दिन की अवधि के लिए उसकी कमाई बंद हो जाएगी।
मौजूदा पार्टनर प्रोग्राम सदस्यों के लिए भी अगले साल से नए नियम लागू होंगे। उन्हें हर साल कम से कम 1,000 वॉच ऑवर्स या 10 लाख शॉर्ट्स व्यूज हासिल करने होंगे। हालांकि, नियमित रूप से कंटेंट अपलोड करने वाले क्रिएटर्स के लिए एक दूसरा रास्ता भी रखा गया है।
अगर कोई क्रिएटर हर 90 दिनों में कम से कम दो लंबे वीडियो या पांच शॉर्ट्स अपलोड करता है तो वह इन व्यूज और वॉच ऑवर्स वाली शर्त से बच सकता है और प्रोग्राम में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है। इसके अलावा, अगर किसी क्रिएटर ने लगातार छह महीने या उससे ज्यादा समय तक कोई नया कंटेंट अपलोड नहीं किया, तो यूट्यूब उसे पार्टनर प्रोग्राम से हटा सकता है।
MeitY के साथ हुई बैठक में मेटा (Meta) ने कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी चूकों पर खेद जताया। सरकार ने एल्गोरिदम आधारित कंटेंट चयन पर सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया।
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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) और मेटा (Meta) की वैश्विक नेतृत्व टीम के बीच हुई दो दिवसीय बैठक में कंटेंट मॉडरेशन (Content Moderation), बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM), डीपफेक (Deepfake) और भारतीय कानूनों के पालन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) की ओर से कंपनी ने कंटेंट मॉडरेशन में हुई चूकों पर खेद व्यक्त किया।
सूत्रों के मुताबिक, मेटा ने स्वीकार किया कि उसके प्लेटफॉर्म पर हानिकारक कंटेंट के प्रबंधन में कुछ कमियां रही हैं। साथ ही कंपनी ने यह भी माना कि कुछ विशेष प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी राशि खर्च की गई थी और इस फैसले पर भी खेद जताया।
सरकारी अधिकारियों ने बैठक में स्पष्ट किया कि मेटा के एल्गोरिदम (Algorithms) सक्रिय रूप से यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा। ऐसे में कंपनी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act-IT Act) के तहत इंटरमीडियरी (Intermediary) को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकती। अधिकारियों का कहना था कि एल्गोरिदम आधारित कंटेंट चयन कंपनी को एक निष्क्रिय मध्यस्थ की श्रेणी से अलग करता है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से जुड़े किसी वीडियो को हटाए जाने का मुद्दा नहीं उठाया गया। चर्चा का मुख्य फोकस प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट गवर्नेंस, हानिकारक सामग्री पर नियंत्रण और भारतीय कानूनों के अनुपालन को मजबूत बनाने पर रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का वीडियो Facebook से हटने के मामले में संसदीय समिति ने Meta को तीन दिन का समय दिया है। समिति ने सेफ हार्बर क्लॉज हटाने की भी चेतावनी दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का वीडियो फेसबुक (Facebook) से हटाए जाने के मामले में दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति (Parliamentary Standing Committee on Communications and Information Technology) ने कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समिति ने मेटा (Meta) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) को तीन दिन के भीतर जवाब देने और माफी मांगने का समय दिया है।
समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाया जाना लोकतंत्र पर हमला है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि Meta इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तो कंपनी से 'सेफ हार्बर क्लॉज' (Safe Harbour Clause) का संरक्षण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि माफी नहीं मांगने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई और मामला दर्ज करने पर भी विचार किया जाएगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, संसदीय समिति ने सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (Child Sexual Exploitative and Abuse Material-CSAM) और महिलाओं से संबंधित आपत्तिजनक यौन सामग्री तीन दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
यह निर्देश गूगल (Google), यूट्यूब (YouTube), एक्स (X), फेसबुक (Facebook), व्हाट्सऐप (WhatsApp), इंस्टाग्राम (Instagram) और स्नैपचैट (Snapchat) सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा।
ओमनीकॉम मीडिया (Omnicom Media) में कार्तिक शर्मा (Kartik Sharma) ने छह वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर उन्होंने सहयोगियों, क्लाइंट्स और बिजनेस पार्टनर्स का आभार व्यक्त किया।
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कार्तिक शर्मा (Kartik Sharma) ने ओमनीकॉम मीडिया (Omnicom Media) में अपने छह वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा करते हुए अपने सहयोगियों, क्लाइंट्स और बिजनेस पार्टनर्स के प्रति आभार व्यक्त किया।
अपने संदेश में कार्तिक शर्मा ने कहा कि ओमनीकॉम मीडिया में बीते छह वर्ष उनके लिए यादगार और सीख से भरपूर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहयोगियों, ग्राहकों और साझेदारों के विश्वास, सहयोग और समर्थन ने इस यात्रा को सफल और प्रेरणादायक बनाया।
उन्होंने लिखा कि हर अनुभव, बातचीत और चुनौती ने उन्हें कुछ नया सिखाया और उनके व्यक्तिगत तथा पेशेवर विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अनुसार, प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम करने का अवसर उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में बेहद अहम साबित हुआ।
भविष्य को लेकर कार्तिक शर्मा ने कहा कि वह आगे भी सीखने, बेहतर प्रदर्शन करने और अपनी टीम तथा साझेदारों के साथ मिलकर सार्थक योगदान देने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भी यह सफर नई उपलब्धियों और अनुभवों से भरपूर रहेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के Facebook वीडियो पर लगी अस्थायी रोक के बाद Meta की वैश्विक टीम 5-6 अगस्त को MeitY अधिकारियों से कंटेंट मॉडरेशन और AI सुरक्षा उपायों पर चर्चा करेगी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के फेसबुक (Facebook) वीडियो पर अस्थायी रोक लगने के विवाद के बाद मेटा (Meta) की वैश्विक टीम 5 और 6 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात करेगी। बैठक में इस घटना के साथ-साथ कंटेंट मॉडरेशन (Content Moderation), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) से तैयार सामग्री और डिजिटल सुरक्षा उपायों पर चर्चा होने की संभावना है।
विवाद तब शुरू हुआ था, जब 23 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा फेसबुक पर साझा किया गया एक वीडियो भारत में कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं रहा। बाद में Meta ने वीडियो को बहाल करते हुए कहा कि यह उसके कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में हुई तकनीकी त्रुटि के कारण हुआ था।
इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने Meta से स्पष्टीकरण मांगा और विशेष रूप से वेरिफाइड (Verified) तथा हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। इसी सिलसिले में MeitY ने Meta की वैश्विक टीम को विस्तृत चर्चा के लिए बुलाया है।
बैठक में AI-जनित भ्रामक सामग्री (AI-generated Misinformation), चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (Child Sexual Abuse Material-CSAM) की पहचान और उसे प्लेटफॉर्म से हटाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा Meta के कंटेंट गवर्नेंस सिस्टम और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की भी समीक्षा की जाएगी।
लिंक्डइन (LinkedIn) ने AI-Generated और Low-Quality कंटेंट पर रोक लगाने के लिए नए मॉडरेशन टूल्स पेश किए हैं। यूजर्स अब संदिग्ध AI पोस्ट और कमेंट्स की रिपोर्ट भी कर सकेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) से तैयार किए गए कम गुणवत्ता वाले कंटेंट (Low-Quality Content) पर लगाम लगाने के लिए नए मॉडरेशन टूल्स (Moderation Tools) लॉन्च किए हैं। कंपनी का उद्देश्य प्लेटफॉर्म पर मौलिक विचारों, पेशेवर अनुभव और वास्तविक विशेषज्ञता को बढ़ावा देना है।
नए अपडेट के तहत यूजर्स अब ऐसे पोस्ट और कमेंट्स की रिपोर्ट कर सकेंगे, जो अत्यधिक AI पर आधारित या गैर-प्रामाणिक (Inauthentic) प्रतीत होते हैं। लिंक्डइन के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर (Chief Product Officer) हरी श्रीनिवासन (Hari Srinivasan) ने कहा कि यूजर्स से मिलने वाला फीडबैक कंपनी को AI-Generated और कम गुणवत्ता वाले कंटेंट की पहचान करने वाली प्रणालियों को और बेहतर बनाने में मदद करेगा।
कंपनी ने AI क्लासिफायर्स (AI Classifiers) भी अपडेट किए हैं, जो मशीन से तैयार या निम्न गुणवत्ता वाले पोस्ट की पहचान करेंगे। ऐसे पोस्ट यूजर्स की फीड और रिकमेंडेशन (Recommendations) में कम दिखाई देंगे, खासकर उन पोस्ट में जो उनके नेटवर्क से बाहर के होंगे।
LinkedIn ने स्पष्ट किया है कि AI का इस्तेमाल केवल लेखन सुधारने, व्याकरण (Grammar) ठीक करने या भाषा को बेहतर बनाने के लिए किया गया हो और पोस्ट में लेखक के अपने विचार मौजूद हों, तो ऐसे कंटेंट की पहुंच कम नहीं की जाएगी।
इसके अलावा, प्लेटफॉर्म अब हर दिन लाखों ऑटोमेटेड कमेंट्स (Automated Comments) को ब्लॉक कर रहा है और हाल के महीनों में अरबों संदिग्ध ऑटोमेटेड गतिविधियों (Automated Activities) पर रोक लगा चुका है। कंपनी प्रोफाइल और पेज वेरिफिकेशन (Profile & Page Verification) फीचर्स का भी विस्तार कर रही है, ताकि प्लेटफॉर्म पर भरोसेमंद और प्रामाणिक प्रोफेशनल नेटवर्क तैयार किया जा सके।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB) ने 'Gems of India Challenge' के पायलट चरण की शुरुआत की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB) ने 'जेम्स ऑफ इंडिया चैलेंज' (Gems of India Challenge) के पायलट चरण की शुरुआत की है। इस राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य देशभर के डिजिटल क्रिएटर्स (Digital Creators) को अपने-अपने जिलों की संस्कृति, विरासत, इतिहास और विशिष्ट पहचान को शॉर्ट वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर पर ₹5 लाख तक का पुरस्कार दिया जाएगा।
यह प्रतियोगिता वेव्स ओटीटी (WAVES OTT) के अंतर्गत मायवेव्स (MyWAVES) प्लेटफॉर्म पर आयोजित की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, यह पहल स्थानीय स्तर के कंटेंट क्रिएटर्स को पहचान दिलाने और हाइपरलोकल स्टोरीटेलिंग (Hyperlocal Storytelling) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियां 1 अगस्त से 31 अगस्त तक स्वीकार की जाएंगी। पायलट चरण की सफलता के बाद इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।
प्रतिभागियों को MyWAVES सेक्शन के माध्यम से 1 से 3 मिनट की अवधि का वीडियो अपलोड करना होगा, जिसमें उनके जिले की विशेष पहचान, सांस्कृतिक धरोहर, परंपराएं, पर्यटन स्थल या अन्य विशिष्ट पहलुओं को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया हो।
फिलहाल पायलट चरण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar Islands), अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh), चंडीगढ़ (Chandigarh), दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव (Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu), गोवा (Goa) और लद्दाख (Ladakh) को शामिल किया गया है।
मंत्रालय ने तीन-स्तरीय पुरस्कार प्रणाली की घोषणा की है। प्रत्येक जिले से चुने गए अधिकतम 20 क्रिएटर्स को ₹50,000-₹50,000 का पुरस्कार मिलेगा। इसके बाद राज्य स्तर पर विजेताओं को ₹2 लाख दिए जाएंगे। वहीं, देशभर में योजना लागू होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ क्रिएटर्स को ₹5 लाख तक का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने वकीलों, कानून के छात्रों और इंटर्न के लिए नए दिशा-निर्देशों को तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने वकीलों, कानून के छात्रों और इंटर्न के लिए नए दिशा-निर्देशों को तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं। BCI ने सभी राज्य बार काउंसिलों और देश के लॉ कॉलेजों व विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
17 जुलाई 2026 को जारी निर्देश में BCI ने साफ कहा कि इस सर्कुलर को सामान्य सलाह नहीं माना जाए। सभी संस्थानों की जिम्मेदारी होगी कि वे हर वकील, छात्र और अन्य संबंधित लोगों तक इन नियमों की जानकारी प्रभावी तरीके से पहुंचाएं।
BCI के नए दिशा-निर्देश सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, डिजिटल नैतिकता, अदालत की गरिमा, गोपनीयता और पेशेवर आचरण से जुड़े हैं। इनमें कोर्ट परिसर के गलत इस्तेमाल, अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग की क्लिप साझा करने, भ्रामक कानूनी जानकारी फैलाने, मुवक्किल से जुड़ी गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने, वकील की पहचान का दुरुपयोग करने और एआई से तैयार किए गए फर्जी वीडियो, डीपफेक, वॉयस क्लोन तथा अन्य छेड़छाड़ किए गए कंटेंट के इस्तेमाल जैसे मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बार काउंसिल ने सभी लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे इन नियमों की जानकारी शिक्षकों, छात्रों, इंटर्न और कर्मचारियों तक पहुंचाएं। इसके लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, छात्रों से दाखिले के समय और इंटर्नशिप शुरू करने से पहले लिखित सहमति ली जाए तथा नियमों के पालन की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
BCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल सर्कुलर को वेबसाइट पर डाल देना या व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग ग्रुप में भेज देना पर्याप्त नहीं होगा। संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी संबंधित लोग इन नियमों को समझें और उनका पालन करें।
राज्य बार काउंसिलों को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां पंजीकृत सभी वकीलों और मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशनों तक यह सर्कुलर पहुंचाएं। साथ ही बार एसोसिएशनों से कहा गया है कि वे इसे प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करें, शिकायतें प्राप्त करने की व्यवस्था बनाएं, डिजिटल एथिक्स कमेटी या नोडल अधिकारी नियुक्त करें और नियमों के पालन की रिपोर्ट भी जमा करें।
BCI ने कहा है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और भविष्य में होने वाली गलतियों को रोकना है। इनका पालन एडवोकेट्स एक्ट, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप किया जाएगा।
साथ ही BCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन नियमों का इस्तेमाल किसी से व्यक्तिगत बदला लेने, वैध आलोचना को दबाने या बिना जांचे-परखे आरोपों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी संबंधित संस्थानों से इन निर्देशों को तत्काल और पूरी तरह लागू करने की अपेक्षा जताई है।