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GST में कटौती से प्रिंट मीडिया और एजेंसीज में लौटी उम्मीदों की नई लहर
सरकार ने हाल में GST में कटौती की घोषणा की है, जिसके चलते ये माना जा रहा है कि त्योहारों के समय विज्ञापन बाजार में फिर से तेजी देखने को मिलेेगी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 months ago
चहनीत कौर, सीनियर कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ।।
सरकार ने हाल में GST में कटौती की घोषणा की है, जिसके चलते ये माना जा रहा है कि त्योहारों के समय विज्ञापन बाजार में फिर से तेजी देखने को मिलेेगी। टैक्स का बोझ कम होने और मार्जिन सुधरने से विज्ञापनदाताओं का आत्मविश्वास लौटेगा। वैसे भी प्रिंट पब्लिशर्स कई सालों में सबसे अच्छे त्योहारी सीजन की तैयारी कर रहे हैं।
उपभोक्ता पक्ष के आंकड़े भी इस उम्मीद को मजबूत कर रहे हैं। जियोस्टार फेस्टिव सेंटिमेंट सर्वे के मुताबिक, 92 फीसदी भारतीय इस साल त्योहारी खर्च को बनाए रखने या बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। प्रति व्यक्ति औसत खर्च करीब 16,500 रुपये रहने का अनुमान है। यह आंकड़े विज्ञापनदाताओं को निवेश बढ़ाने की नींव देते हैं, खासकर भरोसेमंद माध्यम जैसे प्रिंट में।
इस बीच TAM AdEx डेटा दिखाता है कि प्रिंट विज्ञापनों में दीवाली का सबसे ज्यादा दबदबा है, जो 28 फीसदी हिस्सेदारी रखती है। इसके बाद नवरात्रि/दुर्गापूजा 21 फीसदी और क्रिसमस/नए साल के विज्ञापन 15 फीसदी पर हैं।
विज्ञापनदाताओं का मनोबल बढ़ा
प्रचार कम्युनिकेशंस के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश जैन ने कहा कि GST सुधारों से विज्ञापनदाताओं का मनोबल काफी बढ़ा है। उन्होंने कहा, “पहले हालात अच्छे नहीं थे क्योंकि उपभोक्तावाद कमजोर पड़ रहा था, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर दिख रहा था। लेकिन हाल की GST कटौतियों ने नई उम्मीद जगाई है और मुझे भरोसा है कि इससे कारोबार में मजबूती आएगी।” उन्होंने आगे कहा कि उनकी एजेंसी का कारोबार इस साल पिछले साल से “100 फीसदी बेहतर” रहने की उम्मीद है।
जगरण प्रकाशन के वाइस प्रेजिडेंट और दैनिक जगरण-इननेक्स्ट के नेशनल सेल्स मार्केटिंग हेड अनिर्बन बागची ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि विज्ञापन गतिविधियां पहले से ही नजर आने लगी हैं। “हमें उम्मीद है कि GST 2.0 सुधारों के बाद उपभोक्ता भावनाएं तेजी से सुधरेंगी और विज्ञापनदाता बजट को असरदार तरीके से तय करेंगे। इस बार त्योहारी विज्ञापन में डबल-डिजिट ग्रोथ की संभावना है। विज्ञापनदाताओं का उत्साह समय से पहले बुकिंग और ज्यादा विज्ञापन आवृत्ति में साफ दिखाई दे रहा है।”
हालांकि सभी पूरी तरह आशावादी नहीं हैं। नेक्सस एलायंस ऐडवर्टाइजिंग एंड मार्केटिंग के संस्थापक जोगेश भूटानी ने कहा, “प्रिंट सेक्टर के लिए हालात मिले-जुले रहेंगे। अगर GST में बदलाव नहीं हुए होते तो तस्वीर काफी निराशाजनक होती। ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी जैसे सेक्टर दबाव में हैं और रिटेल, परिधान, खाद्य व किराना सेक्टर भी बहुत सक्रिय नहीं रहे। लेकिन GST कटौती से क्लाइंट्स खर्च करने को और तैयार होंगे, जो हौसला बढ़ाने वाला है।”
प्रिंट बना भरोसेमंद माध्यम
जैसे-जैसे ब्रैंड त्योहारी बजट बढ़ा रहे हैं, प्रिंट एक भरोसेमंद और बड़े पैमाने पर पहुंच बनाने वाले माध्यम के रूप में फिर से अपनी जगह बना रहा है, खासकर क्षेत्रीय बाजारों में।
जगरण प्रकाशन उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में अपनी मजबूत मौजूदगी के साथ रिटेल, ऑटो, ज्वेलरी, एफएमसीजी, रियल एस्टेट, मोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे कैटेगरी पर ध्यान दे रहा है। बागची ने कहा, “इस त्योहारी सीजन में प्रिंट ही मुख्य माध्यम रहेगा।”
एजेंसीज के लिए प्रिंट अभी भी ट्रेड-ड्रिवेन सेगमेंट में खास बढ़त रखता है। जैन ने कहा, “प्रिंट मीडिया ट्रेड और खासकर पुरुष उपभोक्ताओं के लिए बहुत असरदार है, इसलिए जब हम पुरुष-केंद्रित उत्पादों पर काम करते हैं तो हमेशा इसे रणनीति में शामिल करते हैं। जब लक्ष्य ट्रेड को बढ़ाना हो, तो प्रिंट सबसे सही विकल्प है।”
केरल में त्योहारी कैलेंडर ओणम से शुरू होता है और इस बार का सीजन विज्ञापन मांग की मजबूती को पहले ही साबित कर चुका है। मलयाला मनोरमा के वर्गीस चैंडी ने कहा, “ओणम यहां का सबसे बड़ा त्योहार है और पूरे उद्योग की नजरें इस पर रहती हैं। हर ब्रैंड सक्रिय है और सफलता की कहानी का इंतजार कर रहा है।” उन्होंने बताया कि प्रीमियम स्पेस पहले ही बुक हो गए थे। “ओणम के लिए हमारे जैकेट विज्ञापन साल की शुरुआत में ही पूरे भर गए थे। त्योहारों में इन्वेंटरी की समस्या रहती है।”
विज्ञापन दरों पर मतभेद
त्योहारी बजट बढ़ने के बावजूद प्रिंट विज्ञापन दरों में इजाफे पर राय बंटी हुई है।
चैंडी का कहना है कि दाम बढ़ाने की गुंजाइश नहीं है। “त्योहारी सीजन में प्रिंट विज्ञापनों की दरें कभी नहीं बढ़तीं। अब दाम तय करने में सप्लाई-डिमांड का समीकरण काम नहीं करता।”
दूसरी ओर, जगरण के बागची का मानना है कि प्रीमियम स्पॉट्स पर बढ़ोतरी संभव है। “जैसे-जैसे इन्वेंटरी भरती जाएगी, हम हाई-इम्पैक्ट पोजिशन और इनोवेशन की दरों में इजाफा देख सकते हैं।”
एजेंसियां हालांकि सतर्क हैं। जैन ने कहा, “मुझे विज्ञापन दरों में किसी बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। वॉल्यूम पिछले साल जैसा या उससे बेहतर रहेगा, लेकिन दाम बढ़ने की संभावना नहीं है।”
भूटानी भी सहमत दिखे और कहा, “जैकेट और कवर जैसे प्रीमियम स्पॉट भी बेचना मुश्किल हो सकता है। मुझे प्रिंट विज्ञापन दरों में बढ़ोतरी नहीं दिख रही। बड़े प्रकाशनों के लिए भी इन स्पेस को बेचना चुनौतीपूर्ण रहेगा। बाजार कठिन है और दाम बढ़ाने की संभावना नहीं है।”
पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि प्रिंट को कितनी जमीन फिर से हासिल करनी है। TAM AdEx डेटा दिखाता है कि 2024 के त्योहारी सीजन में प्रिंट विज्ञापन वॉल्यूम पिछले साल से 4 फीसदी कम थे, हालांकि नवरात्रि में 2 फीसदी की बढ़त दिखी थी। प्रिंट का इस्तेमाल करने वाले विज्ञापनदाता और कैटेगरी भी क्रमशः 5 फीसदी और 7 फीसदी घट गए थे।
रणनीति और आगे की तस्वीर
प्रकाशक और एजेंसियां GST सुधारों से बने सकारात्मक माहौल के अनुरूप अपनी रणनीतियां बना रही हैं।
मलयाला मनोरमा ने पहले से योजना बनाने और क्लाइंट-फर्स्ट इन्वेंटरी मैनेजमेंट पर जोर दिया है। चैंडी ने कहा, “रणनीतियों में इन्वेंटरी को इस तरह मैनेज करना शामिल है कि क्लाइंट्स संतुष्ट रहें, पहले से तैयारी हो और कई कस्टमाइज्ड एक्टिवेशन ऑफर किए जाएं।”
जगरण एकीकृत त्योहारी पैकेज ला रहा है, जिसमें प्रिंट के साथ डिजिटल और हाइपर-लोकल एक्टिवेशन जोड़े जा रहे हैं, ताकि विज्ञापनदाताओं की समग्र कैंपेन की मांग पूरी हो सके। अनिर्बन ने कहा, “हम ऐसे कई खास त्योहारी पैकेज पेश कर रहे हैं जो विज्ञापनदाताओं की समग्र सोच से मेल खाते हैं।”
एजेंसियां GST से सुधरे ट्रेड माहौल का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं। जैन ने कहा, “हमारी रणनीति GST सुधारों को ट्रेड बढ़ाने में इस्तेमाल करने की है। ट्रेड ऑडियंस तक पहुंचने के लिए प्रिंट सबसे सही माध्यम है।”
भूटानी ने हालांकि कहा कि तरीक़ा लगभग पारंपरिक ही रहेगा। “प्रिंट विज्ञापन अभी भी काफी हद तक एक कॉमोडिटी की तरह है। फोकस बेहतर दाम पर असरदार पैकेज तैयार करने पर होगा। इनोवेशन रुक गया है और मुझे इस साल कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता।”
GST राहत से विज्ञापनदाताओं का भरोसा बढ़ा है और प्रिंट पब्लिशर्स एक अच्छे मौके पर खड़े हैं। ओणम ने मजबूत शुरुआत दी है, दिवाली की बुकिंग्स रफ्तार पकड़ रही हैं और ऑटो से लेकर ज्वेलरी तक सभी कैटेगरी खर्च बढ़ाने को तैयार हैं।
भले ही विज्ञापन दरों पर दबाव बना रहे, लेकिन नीतिगत समर्थन, क्षेत्रीय मजबूती और उपभोक्ता उत्साह का मेल यह संकेत दे रहा है कि 2025 का त्योहारी क्वार्टर प्रिंट विज्ञापन के लिए हाल के वर्षों में सबसे मजबूत साबित हो सकता है।
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