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OTT प्लेटफॉर्म्स ने कसनी शुरू की कंटेंट बजट की लगाम, अब मुनाफे व स्केलिंग पर फोकस

एक समय था जब भारत के ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर हाई-स्टेक्स वेबसीरीज और करोड़ों रुपये की लागत वाली कहानियों की होड़ मची थी, लेकिन अब इस इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 months ago

एक समय था जब भारत के ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर हाई-स्टेक्स वेबसीरीज और करोड़ों रुपये की लागत वाली कहानियों की होड़ मची थी, लेकिन अब इस इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। कभी प्रति एपिसोड ₹1-2 करोड़ तक खर्च करने वाले स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म अब अपने बजट को घटाकर ₹30 लाख से ₹1 करोड़ तक ले आए हैं, ये रकम प्रोड्यूसर और स्टार कास्ट के आधार पर तय हो रही है।

वेबसीरीज का बजट अब टीवी एपिसोड के बराबर

इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश प्रोजेक्ट्स में 20 से 50 प्रतिशत तक की कटौती की गई है। इसका मतलब यह है कि एक घंटे की औसत वेबसीरीज के एपिसोड की लागत अब हिंदी टेलीविजन के 30 मिनट के एपिसोड (₹25-30 लाख) के आसपास आ गई है। कई स्टूडियो हेड्स ने exchange4media को बताया कि कुछ प्रस्तावित शो या तो पूरी तरह से कम स्केल पर लाए गए हैं या उनकी शर्तों पर फिर से बातचीत हुई है।

'हर बॉक्स टिक होना चाहिए तभी हरी झंडी'

एक ओटीटी कार्यकारी ने बताया, "स्पष्ट रूप से बाजार में सुस्ती आई है। अब प्लेटफॉर्म्स बड़े बजट के शोज को तभी हरी झंडी दे रहे हैं जब वे कास्ट, जॉनर, लागत और फ्रैंचाइज वैल्यू जैसे सभी मानकों पर खरे उतरते हैं।"

2019 से 2022 के बीच ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने सब्सक्राइबर बेस बढ़ाने की होड़ में प्रीमियम कंटेंट पर खूब खर्च किया। बड़े फिल्मी नाम, महंगे सेटअप और डिज़ाइनर स्क्रिप्ट्स पर दांव लगाया गया। लेकिन e4m की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में जहां कुल बजट ₹5500 करोड़ था, वहीं 2024 तक यह घटकर ₹2500 करोड़ रह गया है।

'कटौती नहीं, समझदारी है'- विक्रम मल्होत्रा

हालांकि कुछ निर्माता इसे कटौती नहीं बल्कि ‘बजट का पुनर्मूल्यांकन’ मानते हैं। Abundantia Entertainment के फाउंडर और सीईओ विक्रम मल्होत्रा ने कहा, “असल में कंटेंट बजट कम नहीं हुए हैं, बल्कि यह तय किया जा रहा है कि पैसा कहां और कैसे खर्च किया जाए। पहले बड़ी रकम थोड़े शोज पर लगाई जाती थी, अब वही पैसा ज्यादा संख्या में शोज पर खर्च हो रहा है, लेकिन प्रति यूनिट लागत कम रखी जा रही है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जैसे-जैसे ओटीटी बाजार क्षेत्रीय शहरों और छोटे कस्बों तक फैल रहा है, प्लेटफॉर्म्स अब वॉल्यूम, निरंतरता और विविधता पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।

'मुनाफे का दबाव और थ्रिलर की थकावट'

इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। एक तो यह कि अधिकांश भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म अभी भी घाटे में चल रहे हैं और निवेशक अब लाभ की स्पष्ट तस्वीर देखना चाहते हैं। दूसरा यह कि हाल के वर्षों में थ्रिलर और क्राइम ड्रामा जैसे फॉर्मूलों का अति प्रयोग हो चुका है, जिससे व्यूअरशिप में गिरावट आई है।

इसके अलावा दर्शक अब क्षेत्रीय कंटेंट, शॉर्ट फॉर्म वीडियो और ट्रू-क्राइम या डॉक्यूमेंट्री फॉर्मेट की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिनकी लागत अपेक्षाकृत कम होती है।

टीवी जैसे लंबे फॉर्मेट की वापसी

इस बजट रीस्ट्रक्चरिंग के साथ अब ओटीटी पर टीवी-स्टाइल कंटेंट की वापसी देखी जा रही है। यानी छोटी-सीजन वाली फिल्मों जैसी वेबसीरीज के बजाय अब निर्माता पारंपरिक पारिवारिक ड्रामा, कॉमेडी और लंबे आर्क वाले शोज की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन बेहतर प्रोडक्शन वैल्यू के साथ।

ओटीटी प्लेटफॉर्म से जुड़े एक एग्जिक्यूटिव ने साफ कहा, "अब हम सिर्फ पैसा जलाने के लिए कंटेंट नहीं बना रहे। हमारा फोकस अब सस्ते, लेकिन चिपकाऊ और लंबे समय तक चलने वाले आईपी (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) बनाने पर है।”

बालाजी टेलीफिल्म्स के नितिन बर्मन का फॉर्मूला

बालाजी टेलीफिल्म्स के ग्रुप चीफ रेवेन्यू ऑफिसर नितिन बर्मन ने बताया कि ज्यादातर ओटीटी प्लेटफॉर्म दो किस्म की कंटेंट स्ट्रैटेजी अपना रहे हैं- पहली, बड़े स्टार्स और उच्च गुणवत्ता वाले कंटेंट वाली महंगी वेबसीरीज और दूसरी, कम बजट वाले मोबाइल/यूट्यूब दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई गई स्टोरी-ड्रिवन वेब सीरीज।

वे बताते हैं कि अब 50 से 70 एपिसोड वाले 'टीवी-प्लस-ओटीटी' हाइब्रिड फॉर्मेट लोकप्रिय हो रहे हैं, जो दर्शकों को प्लेटफॉर्म से जोड़े रखते हैं और लागत को भी संतुलित करते हैं।

अगले दौर की सफलता किस पर टिकी होगी?

जैसे-जैसे ओटीटी इंडस्ट्री कम खर्च वाली रणनीति की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे उसका भविष्य कुछ निर्णायक बातों पर निर्भर करता है- जैसे कि मजबूत आईपी, स्केलेबिलिटी, और लंबे समय तक दर्शकों से जुड़ाव बनाए रखना।

अब जरूरत इस बात की होगी कि प्लेटफॉर्म समझें कि कौन सी कहानी वाकई में बड़े निवेश के लायक है और कौन-सी कंटेंट सीमित संसाधनों में भी प्रभावशाली तरीके से कही जा सकती है।


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