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अभिनेत्री श्रिया सरन ने बताया- कब और किस तरह मिलती है दिव्यांग लोगों को मीडिया कवरेज
अभिनेत्री श्रिया सरन ने बताया- कब और किस तरह मिलती है दिव्यांग लोगों को मीडिया कवरेज
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय मीडिया दिव्यांग व्यक्तियों (disabled persons) के लिए आयोजित कार्यक्रमों को प्रमुखता के साथ तब तक
समाचार4मीडिया ब्यूरो
9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय मीडिया दिव्यांग व्यक्तियों (disabled persons) के लिए आयोजित कार्यक्रमों को प्रमुखता के साथ तब तक कवर नहीं करता है, जब तक कि उस कार्यक्रम के साथ कोई सेलिब्रिटी नहीं जुड़ा हुआ है। यह कहना है दक्षिण भारत की मशहूर अभिनेत्री श्रिया सरन का।
सार्थक एजूकेशनल ट्रस्ट ( SARTHAK EDUCATIONAL TRUST) की ओर से
डिसएबिलिटी 2016 (Disability 2016) पर दिल्ली के इंडियन इस्लामिक कल्चरल सेंटर (Indian Islamic Cultural Center ) में हुई तीसरी नेशनल कॉन्फ्रेंस में श्रिया ने बताया कि वह दृष्टिबाधित लोगों के फुटबाल मैचों के लिए बनी एसोसिएशन की एंबेसडर हैं।
‘दृश्यम’ मूवी की अभिनेत्री श्रिया ने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजकों को सिर्फ मेरे चेहरे की वजह से ही मीडिया कवरेज मिलती है, नहीं तो मीडिया इस तरह के कार्यक्रमों को बिल्कुल भी तवज्जो नहीं देता है। श्रिया ने बताया, ‘जब मैंने गेम के आयोजकों से पूछा कि इस गेम में इतने अच्छे खिलाडि़यों के बीच मेरी क्या जरूरत थी तो उनका कहना था कि यदि आप नहीं होंगी तो उन्हें मीडिया कवरेज भी नहीं मिलेगी।’ इस अवसर पर आयोजित पैनल डिस्कशन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि समय पर और पर्याप्त चिकित्सीय सुविधाएं न मिलना और जागरूकता की कमी भी डिसएबिलिटी का एक बड़ा कारण है।
कार्यक्रम में सार्थक एडवाइजरी बोर्ड के सीईओ सुप्रियो गुप्ता ने कहा, ‘कई बार इस पर फिल्में बनी हैं और इसमें दिव्यांगों को दयनीय, हिंसक अथवा सुपर शक्ति वाला दिखाया जाता था।’ उन्होंने कहा कि एक बार जब कोई व्यक्ति डिसएबल हो जाता है तो उसके सामने शिक्षा, रोजगार के अवसर समेत कई चीजों का एक साथ संकट उत्पन्न हो जाता है। इसके बाद समाज भी धीरे-धीरे उसे स्वीकार करना बंद कर देता है।
कार्यक्रम में शामिल ‘एनडीटीवी’ के सीनियर न्यूज एडिटर मधुसुदन श्रीनिवास ने कहा, ‘हम हमेशा मीडिया पर आरोप लगाते रहते हैं कि वह ऐसे लोगों के लिए पर्याप्त काम नहीं कर रही है। क्या अभी हमने अपनी जिम्मेदारियों को समझनी की कोशिश की है।’ उनका कहना था कि ऐसे लोगों के लिए मीडिया को और संवेदनशील होना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘हमें किसी की इस तरह की कमियों की ओर न देखकर सभी लोगों सम्मान देना चाहिए। इस तरह की सोच ही बदलाव ला सकती है।’
एक्सचेंज4मीडिया के असिस्टेंट एडिटर अभिषेक मेहरोत्रा ने कहा कि ऐसा नहीं है, पिछले कुछ सालों से मीडिया दिव्यांग लोगों को लेकर काफी सेंसेटिव हुआ है। पैराऑलिंपिक्स की कवरेज इसका उदाहरण है। हालांकि अभी इस क्षेत्र में मीडिया को और सक्रिय होना पड़ेगा।
‘बिजनेस टुडे’ की प्रिंसिपल करेसपॉन्डेंट सोनल क्षेत्रपाल ने बताया जब उन्होंने इस तरह के लोगों पर स्टोरी की थी, उसके बाद से कुछ कंपनियों ने किस तरह इस मामले को उठाया था। सोनल ने कहा, ‘मेरी उस स्टोरी के बाद कई कंपनियां मेरे पास आईं और कहा कि वे डिसएबिलिटी पर काफी अच्छी स्टोरी कर रही हैं, कृपया उसमें हमारा भी जिक्र कर दें कि हम भी उनके लिए काम कर रहे हैं।’ सोनल ने कहा, ‘डिसएबल लोगों के लिए काम करने का मतलब यह नहीं है कि आप उनके लिए अपने ऑफिस में एक व्हीलचेयर डाल दो। इसका मतलब है कि वहां पर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। आपको ऐसे लोगों को एक बेहतर माहौल देना होगा।’ पैनल ने डिसएबल लोगों के लिए शिक्षा, रोजगार आदि क्षेत्रों में काम करने पर जोर दिया।
इस सेमिनार में बिजनेस स्टैंडर्ड के अरनब दत्ता, स्टारपोस्ट मीडिया की विजुअल कंटेंट एडिटर श्रुति पुशकर्ना, स्पीकिंगट्रीडॉटइन की पूर्व एडिटर राधिका रवि संजन ने भी विचार-विमर्श में बतौर पेनालिस्ट हिस्सा लिया। अंत में सार्थक के सीईओ डॉ. जितेंद्र अग्रवाल ने सबका आभार व्यक्त किया।
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