तानसेन की विरासत पर आधारित 'तानसेन का ताना-बाना' पुस्तक का विमोचन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर ने बताया की तानसेन का संगीत के क्षेत्र में योगदान अतुलनीय है जिसकी तुलना भी नहीं की जा सकती।

Last Modified:
Friday, 13 June, 2025
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वरिष्ठ पत्रकार श्री राकेश शुक्ला द्वारा लिखित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की पुस्तक 'तानसेन का ताना-बाना' का भव्य लोकार्पण नई दिल्ली केशव कुंज स्थित विचार विनिमय न्यास सभागार में सम्पन्न हुआ। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा, अगर भारत को विश्वगुरु बनना है तो हमें अपने इतिहास, साहित्य और संस्कृति को स्मरण कर उसे समृद्ध करना होगा। हमारा इतिहास, हमारी संस्कृति, हमारी विरासत हमारे लिए महत्वपूर्ण बाते हैं जो भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक है। हमें अपनी कमियां दूर करते हुए अपने भूतकाल के इतिहास को लिखते रहना चाहिए ताकि नई पीढ़ी को वह बता सकें और दिखा सकें।

ऐसी पुस्तकें नई पीढ़ी को उपहार में दी जानी चाहिए, ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़ सकें। उन्होंने सुरुचि प्रकाशन को विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि ऐसे प्रकाशकों का कार्य सराहनीय है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख श्री सुनील आंबेकर ने बताया, तानसेन का संगीत के क्षेत्र में योगदान अतुलनीय है जिसकी तुलना भी नहीं की जा सकती। तानसेन ने अपने काल में संगीत परम्परा को आगे बढाने और उसको कायम रखने में बहुत संघर्ष किया। तानसेन की साधना को 'संगीत के हर स्वरूप के आराध्य और भारत की आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक' बताया और ऐसी परंपराओं को जीवित रखने व समृद्ध बनाने की दिशा में अनवरत प्रयत्न करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, तानसेन पर पांच सौ वर्षों बाद भी लेखन जारी है, यह इस बात का प्रमाण है कि उनका योगदान आज भी प्रासंगिक है। इतिहास उठा कर देखें तो अनेक ऐसे लोग हुए हैं जो तमाम तरह की विपरीत परिस्थितियों के होते हुए भी अपने कर्तव्य के आधार पर, व्यक्तित्व के आधार पर उनका जीवन कालजयी हो गया।

उन्होने कहा कि भारतीय सभ्यता पश्चिम की तरह नहीं है जहां पीछे देखने और गर्व करने को कुछ नहीं है, अपितु भारत हमेशा न सिर्फ अपने इतिहास से सीख लेता है, बल्कि सतयुग, त्रेतायुग या द्वापर युग के महान मूल्यों को आत्मसात् करने की प्रवृत्ति भी रखता है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में भारत ने वर्ष 2047 में विकसित भारत बनाने का संकल्प ले रखा है, और विकसित भारत की ये यात्रा हमारी महान विरासत के बिना अधूरी होगी।

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए कहा, यह किताब तानसेन के जीवन को समझने और शोध में संदर्भ के रूप में कार्य करने वाली ऐतिहासिक दस्तावेज़ है। आगे भविष्य में यह पुस्तक रेफरेंस के रूप में प्रयोग की जायेगी ऐसे पूरी उम्मीद है। पुस्तक के लेखक श्री राकेश शुक्ला ने बताया कि तानसेन की यात्रा सिर्फ अकबर के दरबार तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह सतना के छोटे से गांव बांधा से चली थी, और इसके साथ बहुत कुछ है जो इतिहास से छुपा रह गया है।

कार्यक्रम के दौरान सुरुचि प्रकाशन के प्रतिनिधि श्री राजीव तुली ने बताया कि हमारी संस्कृति में साहित्य की अनंत महिमा बताई गई है। शास्त्र की ऐसी शक्ति है की वह अनेक संशयों को दूर करती है। एक अच्छी पुस्तक उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने में हमने भी गति पकड़ी है। हमने पिछले 50 वर्षों में उन पुस्तकों को छापा जिन्हें कोई नहीं छापता था।

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NDTV इंडिया से रिटायर हुए प्रियदर्शन, सहयोगियों ने दी शानदार फेयरवेल

दिसंबर 2003 में चैनल से जुड़ने वाले प्रियदर्शन ने यहां 23 साल से अधिक समय तक अपनी सेवाएं दीं और संपादकीय टीम के अहम स्तंभ के रूप में पहचान बनाई।

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
Priyadarshan Ji

हिंदी पत्रकारिता के प्रतिष्ठित नाम, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और संपादक प्रियदर्शन मंगलवार (23 जून) को ‘एनडीटीवी इंडिया’ (NDTV India) से सेवानिवृत्त हो गए। दिसंबर 2003 में चैनल से जुड़ने वाले प्रियदर्शन ने यहां 23 साल से अधिक समय तक अपनी सेवाएं दीं और संपादकीय टीम के अहम स्तंभ के रूप में पहचान बनाई। उनके रिटायरमेंट पर सहयोगियों ने उन्हें शानदार विदाई दी और पत्रकारिता में उनके योगदान को याद किया।

प्रियदर्शन की पहचान केवल एक टीवी पत्रकार के रूप में नहीं, बल्कि एक गंभीर लेखक, स्तंभकार और सांस्कृतिक विश्लेषक के रूप में भी है। साहित्य, सिनेमा, राजनीति, समाज और मीडिया जैसे विषयों पर उनकी गहरी पकड़ है। उनकी लेखन शैली में तथ्यपरकता, भाषा की सादगी और विषय की गहराई का संतुलित मेल देखने को मिलता है।

यह भी पढ़ें: NDTV से प्रियदर्शन के रिटायरमेंट पर भावुक हुए रवीश रंजन शुक्ला, साझा कीं यादें

मूल रूप से झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले प्रियदर्शन ने रांची विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एमए किया। छात्र जीवन के दौरान ही उन्होंने अखबारों के लिए लिखना शुरू कर दिया था। पढ़ाई के दिनों में वे कुछ समय तक आकाशवाणी, रांची से कैजुअल आधार पर भी जुड़े रहे।

पत्रकारिता में उनका पेशेवर सफर फ्रीलांस लेखन से शुरू हुआ। वर्ष 1993 से 1996 तक उन्होंने दिल्ली में स्वतंत्र पत्रकार के रूप में काम किया। इसके बाद 1996 में वे हिंदी के प्रतिष्ठित समाचारपत्र ‘जनसत्ता’ से जुड़े, जहां उन्होंने करीब सात वर्षों तक सेवाएं दीं। वर्ष 2003 में उन्होंने एनडीटीवी इंडिया का रुख किया और फिर चैनल के साथ उनकी लंबी और उल्लेखनीय पारी चली।

एनडीटीवी इंडिया में अपने कार्यकाल के दौरान प्रियदर्शन ने संपादकीय संचालन, कंटेंट निर्माण और भाषा की शुद्धता को लेकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। न्यूजरूम में उन्हें ऐसे संपादक के रूप में जाना जाता रहा, जो तथ्यों से समझौता किए बिना संवाद, बहस और नए विचारों को प्रोत्साहित करते थे। कई पीढ़ियों के पत्रकारों ने उनके साथ काम करते हुए भाषा, संपादन और पत्रकारिता की बारीकियां सीखीं।

पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य में भी प्रियदर्शन का योगदान उल्लेखनीय रहा है। अब तक उनकी 20 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि उन्होंने सात पुस्तकों का अनुवाद भी किया है।

NDTV इंडिया से उनके रिटायरमेंट को हिंदी पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण अध्याय के समापन के रूप में देखा जा रहा है। मीडिया जगत के अनेक पत्रकारों, सहयोगियों और शुभचिंतकों ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें नई पारी के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

एनडीटीवी इंडिया से प्रियदर्शन के फेयरवेल की कुछ तस्वीरें आप यहां देख सकते हैं-

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हैप्पी बर्थडे के. माधवन: भारतीय टीवी क्रांति के सूत्रधार हैं आप

बदलते दौर में बहुत कम लोग होते हैं जो हर बदलाव के साथ खुद को ढालते हुए लगातार प्रासंगिक बने रहते हैं। के. माधवन ऐसे ही चुनिंदा मीडिया नेताओं में शामिल हैं।

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Friday, 19 June, 2026
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मीडिया इंडस्ट्री में बदलाव हमेशा तेजी से होते रहे हैं। नई तकनीकें आती हैं, दर्शकों की पसंद बदलती है और बिजनेस मॉडल भी लगातार बदलते रहते हैं। लेकिन ऐसे दौर में बहुत कम लोग होते हैं जो हर बदलाव के साथ खुद को ढालते हुए लगातार प्रासंगिक बने रहते हैं। के. माधवन ऐसे ही चुनिंदा मीडिया नेताओं में शामिल हैं।

उनके जन्मदिन के मौके पर मीडिया जगत एक ऐसे पेशेवर को याद कर रहा है, जिनका प्रभाव सिर्फ कॉर्पोरेट बोर्डरूम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछले दो दशकों में करोड़ों भारतीय दर्शकों तक पहुंचा है, जिन्होंने टीवी मनोरंजन की दुनिया को करीब से देखा और जिया है।

के. माधवन ने अपने करियर की शुरुआत फाइनेंस और बैंकिंग सेक्टर से की थी। इसके बाद 1999 में उन्होंने एशियानेट कम्युनिकेशंस का रुख किया। यहां उन्होंने क्षेत्रीय प्रसारण नेटवर्क को दक्षिण भारत के सबसे प्रभावशाली मीडिया नेटवर्क्स में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जब स्टार ने एशियानेट का अधिग्रहण किया, तब माधवन ने आसानी से स्टार नेटवर्क के बड़े इकोसिस्टम में खुद को स्थापित किया। रीजनल मार्केट्स की उनकी गहरी समझ आगे चलकर स्टार नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बनी।

वर्षों के दौरान वह स्टार नेटवर्क के विस्तार की रणनीति तैयार करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने यह साबित किया कि क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय कहानियों पर आधारित कंटेंट भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। स्थानीय सोच और वैश्विक मीडिया रणनीतियों के संतुलन ने भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री के विकास का नया मॉडल तैयार किया।

बाद में डिज्नी स्टार के कंट्री मैनेजर और प्रेसिडेंट के रूप में उन्होंने देश के सबसे बड़े मीडिया संगठनों में से एक का नेतृत्व किया। यह वह दौर था जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का तेजी से विस्तार हो रहा था, प्रतिस्पर्धा बढ़ रही थी और दर्शकों की आदतों में बड़ा बदलाव आ रहा था।

मनोरंजन, खेल प्रसारण, स्ट्रीमिंग सेवाओं और स्टूडियो कारोबार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उनके नेतृत्व ने यह दिखाया कि कंटेंट, तकनीक और वितरण व्यवस्था को साथ-साथ विकसित करना ही भविष्य की सफलता की कुंजी है।

कॉर्पोरेट नेतृत्व के अलावा भी उनकी भूमिका काफी अहम रही है। इंडस्ट्री से जुड़े लोग उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो सुर्खियां बटोरने के बजाय टीम को साथ लेकर चलने और संस्थानों को मजबूत बनाने में विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों, कारोबारी साझेदारों और नीति निर्माताओं के बीच भी उन्हें समान रूप से सम्मान मिलता है।

आज जब टेलीविजन, स्ट्रीमिंग और डिजिटल मीडिया के बीच की सीमाएं लगातार धुंधली होती जा रही हैं, तब के. माधवन का करियर इस बात का उदाहरण बनकर सामने आता है कि स्थायी नेतृत्व केवल बदलावों के अनुसार खुद को ढालने से नहीं, बल्कि आने वाले बदलावों को पहले से पहचानने से बनता है।

उनकी प्रोफेशनल जर्नी भारतीय प्रसारण इंडस्ट्री के विकास की कहानी भी है। सैटेलाइट टेलीविजन से लेकर कनेक्टेड स्क्रीन तक और क्षेत्रीय नेटवर्क्स से लेकर वैश्विक मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक, उन्होंने इस बदलाव को न सिर्फ देखा बल्कि उसे दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एक और नए वर्ष की शुरुआत के साथ के. माधवन की विरासत मीडिया जगत की नई पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी। उनका करियर यह बताता है कि दूरदृष्टि, अनुशासन और शांत लेकिन प्रभावी नेतृत्व किसी भी इंडस्ट्री की दिशा बदल सकता है।

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22 भाषाओं में तैयार होंगी 22 हजार से ज्यादा किताबें, मातृभाषा में पढ़ाई को मिलेगा बढ़ावा

इस पहल का उद्देश्य छात्रों तक ज्ञान को उनकी अपनी भाषा में पहुंचाना है, ताकि वे पढ़ाई को बेहतर ढंग से समझ सकें और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर सीख सकें।

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Friday, 19 June, 2026
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देश में मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। भारतीय भाषा पुस्तक योजना (Bharatiya Bhasha Pustak Yojana) और अस्मिता (ASMITA) पहल के तहत 22 भारतीय भाषाओं में 22,000 से अधिक पाठ्यपुस्तकों का विकास किया जा रहा है।

इस पहल का उद्देश्य छात्रों तक ज्ञान को उनकी अपनी भाषा में पहुंचाना है, ताकि वे पढ़ाई को बेहतर ढंग से समझ सकें और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर सीख सकें। सरकार का मानना है कि जब शिक्षा मातृभाषा या परिचित भाषा में उपलब्ध होती है, तो छात्रों के लिए विषयों को समझना आसान हो जाता है और सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।

इस योजना के जरिए न केवल शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया जा रहा है, बल्कि भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को भी नई ताकत मिल रही है। इससे देश के विभिन्न हिस्सों के विद्यार्थियों को अपनी भाषा में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।

सरकार का कहना है कि यह पहल शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ज्ञान की पहुंच बढ़ेगी और अधिक से अधिक छात्र अपनी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के साथ आगे बढ़ सकेंगे।

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INjoy Entertainment के फाउंडर और चीफ कंटेंट ऑफिसर गौतम तलवार का निधन

गौतम तलवार की स्मृति में 19 जून को शाम 4:30 बजे मुंबई के सांताक्रूज वेस्ट स्थित आर्य समाज मंदिर में प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी।

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
Gautam Talwar

INjoy Entertainment के फाउंडर और चीफ कंटेंट ऑफिसर (CCO) गौतम तलवार का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से एंटरटेनमेंट और मीडिया जगत में शोक की लहर है।

गौतम तलवार लगभग सात वर्षों तक MX Player में चीफ कंटेंट ऑफिसर के पद पर रहे। अपने लंबे और सफल करियर के दौरान उन्होंने विज्ञापन और कंटेंट इंडस्ट्री दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत विज्ञापन जगत से की थी और Lowe Lintas India, Grey Group तथा Rediffusion Y&R जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया। उन्होंने कंटेंट क्रिएशन और एंटरटेनमेंट क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

गौतम तलवार को ‘Times of Music’ के लिए Filmfare पुरस्कार भी मिला था। वे ‘Ashram’, ‘Queen’, ‘High’, ‘Samantar’ और ‘Dharavi Bank’ जैसे लोकप्रिय शोज के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर रहे और इनके रचनात्मक नेतृत्व में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इसके अलावा, उन्होंने Kaleidoscope Entertainment में फीचर फिल्मों के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया था। परिवार की ओर से शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, गौतम तलवार की स्मृति में 19 जून को शाम 4:30 बजे मुंबई के सांताक्रूज वेस्ट स्थित आर्य समाज मंदिर में प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी। 

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Zee5 की बड़ी पहल: फुटबॉल से होने वाली आय का 15% भारतीय प्रतिभाओं के विकास पर होगा खर्च

इस बारे में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के CEO पुनीत गोयनका ने कहा कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही अवसर और मंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

Last Modified:
Thursday, 18 June, 2026
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एंटरटेनमेंट और मीडिया क्षेत्र की प्रमुख कंपनी जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Z) ने भारत में फुटबॉल के विकास को नई गति देने के लिए खास पहल की घोषणा की है। कंपनी ने कहा है कि अब Zee5 पर फुटबॉल देखने वाला हर सब्सक्राइबर देश के कोने-कोने में मौजूद युवा फुटबॉल प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और उनके विकास में योगदान देगा।

कंपनी ने घोषणा की है कि Zee5 की फुटबॉल से संबंधित सब्सक्रिप्शन आय का 15 प्रतिशत हिस्सा भारतीय फुटबॉल के विकास के लिए समर्पित किया जाएगा। इस पहल के जरिए Zee5 के दर्शकों को भी देश में एक मजबूत और समावेशी फुटबॉल इकोसिस्टम तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।

जी एंटरटेनमेंट का कहना है कि पिछले तीन दशकों में कंपनी ने अपने कंटेंट और विभिन्न सामाजिक पहलों के माध्यम से लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने का प्रयास किया है। एक ‘एकेडमी ऑफ टैलेंट’ के रूप में कंपनी ने देशभर से प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने का काम किया है। अब इसी सोच को वह खेल जगत, विशेष रूप से फुटबॉल में और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना चाहती है।

कंपनी का मानना है कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं की बड़ी संख्या मौजूद है, जिसे सही अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य के तहत Zee5 के माध्यम से जुटाए जाने वाले संसाधनों का उपयोग युवा खिलाड़ियों की पहचान और प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा।

कंपनी की FIFA के साथ वर्ष 2034 तक की साझेदारी भी इस दिशा में उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जी एंटरटेनमेंट का मानना है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिभा विकास, लीग इकोसिस्टम निर्माण और खिलाड़ियों व कोचों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की FIFA की पहलें भारत में प्रतिस्पर्धी फुटबॉल ढांचा विकसित करने में मददगार साबित होंगी।

कंपनी के अनुसार, Zee5 सब्सक्राइबर्स के सामूहिक योगदान के आधार पर भविष्य की प्रतिभाओं के लिए एक मजबूत पाइपलाइन तैयार की जाएगी। इसके तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे और शहर, जिला, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार योग्य लीग फॉर्मेट विकसित किए जाएंगे। साथ ही, फुटबॉल के क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि खिलाड़ियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा सके।

इसके अलावा, कंपनी वैश्विक फुटबॉल महासंघों तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खेल संगठनों के साथ सहयोग कर प्रतिभा पहचान और प्रशिक्षण के लिए ठोस कदम तय करेगी। इसका उद्देश्य युवाओं के बीच फुटबॉल को एक संभावनाशील खेल करियर के रूप में स्थापित करना भी है।

इस पहल के तहत शहरों, जिलों और राज्यों के स्तर पर युवा खिलाड़ियों को अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जमीनी स्तर पर लीग और विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे शुरुआती चरण से ही प्रतिभाओं को निखारा जा सके और वे आगे चलकर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

कंपनी का लक्ष्य एक ऐसा समावेशी और मजबूत फुटबॉल इकोसिस्टम तैयार करना है, जो वर्ष 2034 तक भारत की पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों को विभिन्न आयु वर्गों में FIFA World Cup में भागीदारी के योग्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सके।

इस पहल के बारे में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका ने कहा कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही अवसर और मंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कंपनी एक जिम्मेदार इंडस्ट्री पार्टनर और भारत में फुटबॉल के प्रमुख प्लेटफॉर्म के रूप में खेल के समग्र विकास के लिए अनुकूल और टिकाऊ वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, यह पहल फुटबॉल दर्शकों को देश के उन युवा खिलाड़ियों के सपनों में निवेश करने का अवसर देगी, जो वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं।

कंपनी ने कहा कि यह पहल युवाओं को सशक्त बनाने की भावना से प्रेरित है और स्वामी विवेकानंद के उस संदेश से भी प्रेरणा लेती है, जिसमें युवाओं को फुटबॉल के माध्यम से शक्ति, अनुशासन, आत्मविश्वास और कर्मशीलता विकसित करने का आह्वान किया गया था।

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Truecaller Ads ने लॉन्च किया AI आधारित ‘Call-to-Cart’, अब कॉल के दौरान ही हो सकेगी खरीदारी

Truecaller Ads ने आज वैश्विक स्तर पर अपने नए AI-संचालित कॉमर्स समाधान ‘Call-to-Cart’ की शुरुआत की है।

Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
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Truecaller Ads ने आज वैश्विक स्तर पर अपने नए AI-संचालित कॉमर्स समाधान ‘Call-to-Cart’ की शुरुआत की है। कंपनी का दावा है कि यह नया प्लेटफॉर्म रोजमर्रा के कम्युनिकेशन मोमेंट्स को सीधे खरीदारी के अनुभव में बदल देगा और उपभोक्ताओं के लिए प्रोडक्ट खोजने से लेकर खरीदने तक की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा आसान बनाएगा।

कंपनी के अनुसार, किसी विज्ञापन को देखने और खरीदारी पूरी करने के बीच जितने अधिक चरण होते हैं, उतनी ही संभावना बढ़ जाती है कि उपभोक्ता बीच में ही प्रक्रिया छोड़ दे। मौजूदा समय में अधिकांश मोबाइल कॉमर्स अनुभवों में ग्राहकों को कई स्क्रीन के बीच जाना पड़ता है, प्रोडक्ट सर्च करना पड़ता है और अलग-अलग ऐप्स के बीच स्विच करना पड़ता है। यही वजह है कि खरीदारी की प्रक्रिया अक्सर लंबी और जटिल हो जाती है।

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए Truecaller ने Call-to-Cart विकसित किया है। यह समाधान Truecaller की उस विशेष स्थिति का लाभ उठाता है, जहां वह दुनिया के सबसे बड़े कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स में से एक है। यह फीचर ब्रांड्स को उन दो महत्वपूर्ण क्षणों में ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर देता है, जब कोई व्यक्ति कॉल प्राप्त करता है या जब कॉल समाप्त होती है। इन हाई-अटेंशन मोमेंट्स को AI आधारित टार्गेटिंग और कॉमर्स इंटीग्रेशन के साथ जोड़कर कंपनी खरीदारी की प्रक्रिया को सिर्फ दो चरणों तक सीमित करने का दावा कर रही है।

Truecaller Ads के वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल हेड हेमंत अरोड़ा ने कहा कि आज लाखों खरीदारी संबंधी फैसले पारंपरिक शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स के बाहर शुरू होते हैं। उनके मुताबिक कम्युनिकेशन मोमेंट्स भी अब कॉमर्स के लिए एक प्रभावी माध्यम बन चुके हैं और Call-to-Cart इसी अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह उत्पाद खासतौर पर FMCG, D2C ब्यूटी, फार्मा, फिनटेक और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के विज्ञापनदाताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जहां सही समय और सही संदर्भ उपभोक्ता के खरीदारी निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कंपनी का कहना है कि Call-to-Cart की सफलता के पीछे उसकी स्वामित्व वाली तकनीक काम करती है। Truecaller Ads के adVantage प्लेटफॉर्म के इंजीनियरिंग डायरेक्टर लिनिकर सेइक्सास ने बताया कि इस समाधान के पीछे adVantage नाम का इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है, जिसे कंपनी ने खुद विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म एडवांस्ड रिकमेंडेशन इंजन, AI आधारित पर्सनलाइजेशन और फर्स्ट-पार्टी डेटा सिग्नल्स का उपयोग करके ग्राहकों को सही समय पर सही ऑफर दिखाने में मदद करता है। इससे उपभोक्ताओं को अधिक सहज अनुभव मिलता है और विज्ञापनदाताओं को बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद मिलती है।

Call-to-Cart को Truecaller Ads का पहला ऐसा समाधान बताया जा रहा है जिसे वैश्विक स्तर पर सीधे विज्ञापनदाताओं के लिए लॉन्च किया गया है। Truecaller के 150 से अधिक देशों में फैले यूजर बेस और दुनिया भर में 50 करोड़ से ज्यादा सक्रिय उपयोगकर्ताओं के कारण ब्रांड्स को बड़े पैमाने पर ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। कंपनी का कहना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर हर दिन अरबों विज्ञापन अवसर उपलब्ध होते हैं, जिससे कम्युनिकेशन-आधारित मार्केटिंग को नई दिशा मिल सकती है।

कंपनी ने यह भी बताया कि Call-to-Cart को काफी हद तक कस्टमाइज किया जा सकता है। शुरुआती चरण में Truecaller ने विभिन्न प्रमुख बाजारों के चुनिंदा ‘ऑलवेज-ऑन’ डायरेक्ट विज्ञापनदाताओं को इस प्रोग्राम का हिस्सा बनने की अनुमति दी है। इन साझेदारों को विशेष ऑनबोर्डिंग सहायता, कस्टम इंटीग्रेशन, adVantage प्रोग्राम तक सीधी पहुंच और प्लेटफॉर्म की विभिन्न कस्टमाइजेशन सुविधाओं का प्राथमिक लाभ मिलेगा।

Truecaller का मानना है कि यह नया समाधान डिजिटल विज्ञापन और मोबाइल कॉमर्स के बीच की दूरी को कम करेगा और ब्रांड्स को उपभोक्ताओं तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचने में मदद करेगा। कंपनी को उम्मीद है कि AI और कम्युनिकेशन-आधारित कॉमर्स का यह मॉडल आने वाले समय में डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स उद्योग के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकता है।

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6 साल की देरी पर हाई कोर्ट सख्त, महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज केस व चार्जशीट रद्द

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी आपराधिक मामले की जांच और चार्जशीट दाखिल करने में बिना उचित कारण के कई वर्षों की देरी करना आरोपी के मौलिक अधिकारों पर असर डालता है।

Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी आपराधिक मामले की जांच और चार्जशीट दाखिल करने में बिना उचित कारण के कई वर्षों की देरी करना आरोपी के मौलिक अधिकारों पर असर डालता है। कोर्ट ने माना कि ऐसी स्थिति व्यक्ति के त्वरित न्याय पाने के अधिकार को प्रभावित करती है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। इसी आधार पर कोर्ट ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले और उससे जुड़ी चार्जशीट को निरस्त कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया था। याचिका दायर करने वाली श्रिया पांडेय वर्ष 2018 में एक समाचार चैनल में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थीं। उसी दौरान प्रदेश में पुलिसकर्मियों का आंदोलन चल रहा था और एक मामले में आंदोलनकारी पुलिसकर्मी की पत्नी को महिला थाने में रखे जाने की जानकारी सामने आई थी।

बताया गया कि इस सूचना की पुष्टि करने और मामले की रिपोर्टिंग के उद्देश्य से श्रिया पांडेय अपनी टीम के साथ देर रात महिला थाने पहुंची थीं। वहां उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया। बाद में इस घटना को लेकर विवाद पैदा हुआ और पुलिस की ओर से उनके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, मारपीट करने तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।

पत्रकार ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि घटना वर्ष 2018 की थी, जबकि मामले में चार्जशीट नवंबर 2024 में दाखिल की गई। कोर्ट ने इस लंबे अंतराल को गंभीरता से लिया और पूछा कि जांच में इतनी देरी क्यों हुई। हालांकि, रिकॉर्ड पर ऐसा कोई संतोषजनक कारण सामने नहीं आया जो छह वर्ष से अधिक की देरी को उचित ठहरा सके।

मामले के दस्तावेजों और जांच रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष मुख्य रूप से पुलिसकर्मियों और उनसे जुड़े गवाहों के बयानों पर आधारित था। घटनास्थल पर मौजूद किसी स्वतंत्र गवाह का समर्थन रिकॉर्ड में नहीं था। इसके अलावा उपलब्ध बयानों में भी कई महत्वपूर्ण विसंगतियां दिखाई दीं।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पत्रकार के खिलाफ किसी अपराध की स्पष्ट और ठोस पुष्टि नहीं करती। ऐसे में मामले को आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया का उचित उपयोग नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि इतने लंबे समय तक मामले को लंबित रखना संबंधित व्यक्ति के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और बाद में दाखिल की गई चार्जशीट को रद्द कर दिया। कोर्ट के इस फैसले को त्वरित न्याय और निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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क्या AI है क्रिएटिविटी का भविष्य? MIFF में फिल्मकारों और विशेषज्ञों ने रखी अपनी राय

19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) के दौरान इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IDPA) ने “क्या AI है क्रिएटिविटी का भविष्य?” विषय पर एक ओपन फोरम का आयोजन किया।

Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
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19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) के दौरान इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IDPA) ने “Is AI the Future of Creativity?” (क्या AI है क्रिएटिविटी का भविष्य?) विषय पर एक ओपन फोरम का आयोजन किया। इस चर्चा में Firefly Creative Studio Pvt. Ltd. के को-फाउंडर सनथ पी.सी., SMPTE के चेयरमैन उज्ज्वल निरगुडकर, वकील हेतल देसाई सोलिया और Fanboy Pictures के निदेशक एवं फिल्मकार सुबोध मेनन शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने फिल्म निर्माण और कंटेंट क्रिएशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े अवसरों, चुनौतियों और इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

चर्चा के दौरान रचनात्मक दुनिया में AI की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया। पैनलिस्ट्स ने बताया कि AI किस तरह कहानी कहने की कला, प्रोडक्शन प्रक्रियाओं और फिल्म इंडस्ट्री के भविष्य को प्रभावित कर रहा है। हालांकि सभी ने AI की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार किया, लेकिन इस बात पर भी जोर दिया कि कहानी कहने की कला में मानवीय रचनात्मकता और भावनात्मक समझ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

SMPTE के चेयरमैन उज्ज्वल निरगुडकर ने सिनेमा में तकनीकी विकास पर बात करते हुए AI को फिल्म निर्माण का अगला स्वाभाविक चरण बताया। उन्होंने कहा कि पोस्ट-प्रोडक्शन के क्षेत्र में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है। साउंड को बेहतर बनाने, कलर करेक्शन, विजुअल क्वालिटी सुधारने और पुरानी फिल्मों के रेस्टोरेशन जैसे कई कामों में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि AI से जुड़े टूल्स बहुत तेजी से विकसित हो रहे हैं, लेकिन पूरे उद्योग में इनके मानकीकरण और व्यापक उपयोग में अभी कुछ समय लगेगा।

Fanboy Pictures के निदेशक और फिल्मकार सुबोध मेनन ने कहा कि AI कंटेंट तैयार कर सकता है और नए विचारों पर सोचने में मदद कर सकता है, लेकिन कहानी कहने की असली ताकत इंसानों के पास ही रहेगी। उन्होंने AI को आइडिया जनरेशन और आइडिया वैलिडेशन का एक उपयोगी माध्यम बताया। उनके अनुसार, जैसे-जैसे यह तकनीक आम होती जाएगी, फिल्मकारों के लिए AI को समझना और उसका सही इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो जाएगा।

Firefly Creative Studio Pvt. Ltd. के को-फाउंडर सनथ पी.सी. ने कहा कि AI कहानी कहने की प्रक्रिया को और बेहतर बना सकता है। इसके जरिए तस्वीरों की गुणवत्ता, ध्वनि और दर्शकों के अनुभव में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने मौजूदा दौर को प्रयोगों का समय बताते हुए कहा कि रचनाकारों को AI की संभावनाओं को खुलकर तलाशना चाहिए, लेकिन पूरी तरह इस पर निर्भर होने के बजाय इसे एक सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।

AI से तैयार किए गए कंटेंट से जुड़े कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए वकील हेतल देसाई सोलिया ने लाइसेंस प्राप्त डेटा के उपयोग और रचनात्मक कार्यों में पर्याप्त मानवीय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कॉपीराइट का स्वामित्व मानव रचनाकारों के पास ही रहता है। इसलिए फिल्मकारों को AI का उपयोग अपने मूल कंटेंट को बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए, न कि उसे पूरी तरह से बदलने के लिए।

चर्चा के दौरान सभी पैनलिस्ट इस बात पर सहमत नजर आए कि AI को मानव रचनात्मकता का विकल्प नहीं, बल्कि उसका सहयोगी माना जाना चाहिए। उनका मानना था कि AI प्रोडक्शन प्रक्रियाओं को आसान बना सकता है, कार्यक्षमता बढ़ा सकता है और रचनात्मक संभावनाओं का दायरा विस्तृत कर सकता है, लेकिन कहानी कहने की आत्मा आज भी इंसानी कल्पना, भावनाओं और कलात्मक दृष्टि में ही बसती है।

इस सत्र के बाद दर्शकों के साथ भी रोचक संवाद हुआ। प्रतिभागियों ने AI को अपनाने, उससे जुड़े नैतिक सवालों, कॉपीराइट सुरक्षा और रचनात्मक पेशों के भविष्य जैसे विषयों पर कई सवाल पूछे। चर्चा के अंत में सभी विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि फिल्मकारों को तकनीकी बदलावों को अपनाना चाहिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कहानी कहने की प्रक्रिया के केंद्र में हमेशा मानवीय रचनात्मकता ही बनी रहे।

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WAVES Doc Bazaar के लिए 12 डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट्स का चयन, तीन को मिलेगा 3 लाख का अनुदान

मुंबई में होने वाले 19वें Mumbai International Film Festival के मौके पर इस बार डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है।

Last Modified:
Tuesday, 16 June, 2026
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मुंबई में होने वाले 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (Mumbai International Film Festival) के मौके पर इस बार डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) ने ‘WAVES Doc Bazaar Recommends’ कार्यक्रम के तहत चुने गए प्रोजेक्ट्स की सूची जारी कर दी है, जिन्हें WAVES Doc Bazaar 2026 में प्रदर्शित किया जाएगा।

यह डॉक्यूमेंट्री बाजार 16 से 18 जून 2026 तक मुंबई में NFDC मुख्यालय में आयोजित होगा। इसमें दुनिया भर के फिल्ममेकर, प्रोड्यूसर, ब्रॉडकास्टर, डिस्ट्रीब्यूटर और फेस्टिवल से जुड़े लोग शामिल होंगे। इसका मकसद डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और एनिमेशन के क्षेत्र में सहयोग, नेटवर्किंग और नए बाजार के अवसर तैयार करना है।

इस बार 155 ग्लोबल एंट्रीज में से 19 देशों और 35 भाषाओं से आए प्रोजेक्ट्स में से कुल 12 प्रोजेक्ट्स को चुना गया है। इनमें से 4 प्रोजेक्ट Work-in-Progress (WIP) लैब के लिए चुने गए हैं, जहां फिल्ममेकर्स को अपनी अधूरी फिल्मों के रफ कट अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सामने दिखाने और फीडबैक लेने का मौका मिलेगा।

इसके अलावा 8 प्रोजेक्ट्स ‘WAVES Doc Bazaar Recommends’ श्रेणी में शामिल किए गए हैं, जो या तो पूरी हो चुकी हैं या पोस्ट-प्रोडक्शन के अंतिम चरण में हैं। इन फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, डिस्ट्रीब्यूटरों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बनाने का मौका मिलेगा।

NFDC ने इस बार एक नया कदम भी उठाया है। तीन बेहतरीन प्रोजेक्ट्स को 3-3 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह पुरस्कार उन फिल्मों को मिलेगा जिनमें मजबूत कहानी, बेहतरीन रचनात्मकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों से जुड़ने की क्षमता होगी।

सभी चयनित 12 प्रोजेक्ट्स को 16 जून 2026 को ओपन पिच सेशन में अपना प्रेजेंटेशन देने का मौका मिलेगा, जहां वे अपने विचार और फिल्मों की कहानी इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के सामने रख सकेंगे।

इस आयोजन का एक खास हिस्सा ‘Viewing Room’ भी होगा, जो एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरह काम करेगा। यहां 155 प्रोजेक्ट्स को 19 देशों और 35 भाषाओं में प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे दुनिया भर के खरीदार और प्लेटफॉर्म्स इन फिल्मों को देख और समझ सकेंगे।

WIP लैब के लिए चुनी गई फिल्मों में ‘Adieu Dilli’, ‘It Takes A Village’, ‘Kunchok and His Many Moons’ और ‘On a Good Note’ शामिल हैं।

वहीं ‘WAVES Doc Bazaar Recommends’ श्रेणी में ‘By the Home’, ‘Do Chaar Din’, ‘Eche’, ‘Rasanishpathi’, ‘Rise’, ‘The Girl Beneath The Sun’, ‘Turu’ और ‘Tukro Tukro Prithibi’ जैसी फिल्में चुनी गई हैं।

NFDC का कहना है कि यह पहल उभरते फिल्ममेकर्स को सपोर्ट करने, उनकी कहानियों को वैश्विक मंच देने और डॉक्यूमेंट्री सिनेमा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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मालती जोशी की कहानियों और कविताओं से सजा ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम

इंदौर में आयोजित ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित कथाकार मालती जोशी को याद किया गया। कई प्रमुख हस्तियों ने उनकी रचनाओं का पाठ कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
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पद्मश्री सम्मानित और मालवा की मीरा के रूप में प्रसिद्ध कथाकार मालती जोशी की स्मृति में इंदौर के प्रीतम लाल दुआ सभागार में ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से साहित्य, रंगमंच और सिनेमा जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुईं और मालती जोशी की रचनाओं को याद किया।

कार्यक्रम में दिल्ली से लक्ष्मी शंकर बाजपेयी और मुंबई से अभिनेता एवं पटकथा लेखक अतुल तिवारी ने मालती जोशी की कहानियों का पाठ किया। वक्ताओं ने कहा कि मालती जोशी अपनी सहज, पारिवारिक और संवेदनशील कहानियों के कारण पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहीं और अपने समय की श्रेष्ठ कथाकारों में उनका विशेष स्थान था।

अतुल तिवारी ने कहा कि मालती जोशी ने महिला कथाकारों के लिए नए मानदंड स्थापित किए। उन्होंने बताया कि उनकी कहानियां फिल्मों और टेलीफिल्मों के लिए बेहद उपयुक्त थीं, जिसके चलते गुलजार और जया बच्चन जैसे फिल्मकारों ने भी उनकी रचनाओं पर काम किया।

लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने कहा कि मालती जोशी की कहानियों को युवाओं तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि वे भारतीय पारिवारिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें। उन्होंने उनकी चर्चित कहानी ‘इतिश्री’ का वाचन भी किया। कार्यक्रम में मंजूषा राजस जौहरी, अनीता सक्सेना, ज्योति जैन, मधुरा फड़के और रंजना चितले सहित कई वक्ताओं ने मालती जोशी के साहित्य, व्यक्तित्व और जीवन दृष्टि पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत मालती जोशी के बड़े पुत्र ऋषिकेश जोशी के स्वागत वक्तव्य से हुई, जबकि समापन उनके छोटे पुत्र सच्चिदानंद जोशी के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने मालती जोशी की रचनाओं के कॉपीराइट संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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