6 साल की देरी पर हाई कोर्ट सख्त, महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज केस व चार्जशीट रद्द

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी आपराधिक मामले की जांच और चार्जशीट दाखिल करने में बिना उचित कारण के कई वर्षों की देरी करना आरोपी के मौलिक अधिकारों पर असर डालता है।

Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी आपराधिक मामले की जांच और चार्जशीट दाखिल करने में बिना उचित कारण के कई वर्षों की देरी करना आरोपी के मौलिक अधिकारों पर असर डालता है। कोर्ट ने माना कि ऐसी स्थिति व्यक्ति के त्वरित न्याय पाने के अधिकार को प्रभावित करती है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। इसी आधार पर कोर्ट ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले और उससे जुड़ी चार्जशीट को निरस्त कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया था। याचिका दायर करने वाली श्रिया पांडेय वर्ष 2018 में एक समाचार चैनल में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थीं। उसी दौरान प्रदेश में पुलिसकर्मियों का आंदोलन चल रहा था और एक मामले में आंदोलनकारी पुलिसकर्मी की पत्नी को महिला थाने में रखे जाने की जानकारी सामने आई थी।

बताया गया कि इस सूचना की पुष्टि करने और मामले की रिपोर्टिंग के उद्देश्य से श्रिया पांडेय अपनी टीम के साथ देर रात महिला थाने पहुंची थीं। वहां उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया। बाद में इस घटना को लेकर विवाद पैदा हुआ और पुलिस की ओर से उनके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, मारपीट करने तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।

पत्रकार ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि घटना वर्ष 2018 की थी, जबकि मामले में चार्जशीट नवंबर 2024 में दाखिल की गई। कोर्ट ने इस लंबे अंतराल को गंभीरता से लिया और पूछा कि जांच में इतनी देरी क्यों हुई। हालांकि, रिकॉर्ड पर ऐसा कोई संतोषजनक कारण सामने नहीं आया जो छह वर्ष से अधिक की देरी को उचित ठहरा सके।

मामले के दस्तावेजों और जांच रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष मुख्य रूप से पुलिसकर्मियों और उनसे जुड़े गवाहों के बयानों पर आधारित था। घटनास्थल पर मौजूद किसी स्वतंत्र गवाह का समर्थन रिकॉर्ड में नहीं था। इसके अलावा उपलब्ध बयानों में भी कई महत्वपूर्ण विसंगतियां दिखाई दीं।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पत्रकार के खिलाफ किसी अपराध की स्पष्ट और ठोस पुष्टि नहीं करती। ऐसे में मामले को आगे बढ़ाना न्यायिक प्रक्रिया का उचित उपयोग नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि इतने लंबे समय तक मामले को लंबित रखना संबंधित व्यक्ति के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने महिला पत्रकार के खिलाफ दर्ज एफआईआर और बाद में दाखिल की गई चार्जशीट को रद्द कर दिया। कोर्ट के इस फैसले को त्वरित न्याय और निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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INjoy Entertainment के फाउंडर और चीफ कंटेंट ऑफिसर गौतम तलवार का निधन

गौतम तलवार की स्मृति में 19 जून को शाम 4:30 बजे मुंबई के सांताक्रूज वेस्ट स्थित आर्य समाज मंदिर में प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी।

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Thursday, 18 June, 2026
Gautam Talwar

INjoy Entertainment के फाउंडर और चीफ कंटेंट ऑफिसर (CCO) गौतम तलवार का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से एंटरटेनमेंट और मीडिया जगत में शोक की लहर है।

गौतम तलवार लगभग सात वर्षों तक MX Player में चीफ कंटेंट ऑफिसर के पद पर रहे। अपने लंबे और सफल करियर के दौरान उन्होंने विज्ञापन और कंटेंट इंडस्ट्री दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत विज्ञापन जगत से की थी और Lowe Lintas India, Grey Group तथा Rediffusion Y&R जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया। उन्होंने कंटेंट क्रिएशन और एंटरटेनमेंट क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

गौतम तलवार को ‘Times of Music’ के लिए Filmfare पुरस्कार भी मिला था। वे ‘Ashram’, ‘Queen’, ‘High’, ‘Samantar’ और ‘Dharavi Bank’ जैसे लोकप्रिय शोज के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर रहे और इनके रचनात्मक नेतृत्व में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इसके अलावा, उन्होंने Kaleidoscope Entertainment में फीचर फिल्मों के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया था। परिवार की ओर से शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, गौतम तलवार की स्मृति में 19 जून को शाम 4:30 बजे मुंबई के सांताक्रूज वेस्ट स्थित आर्य समाज मंदिर में प्रार्थना सभा आयोजित की जाएगी। 

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Zee5 की बड़ी पहल: फुटबॉल से होने वाली आय का 15% भारतीय प्रतिभाओं के विकास पर होगा खर्च

इस बारे में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के CEO पुनीत गोयनका ने कहा कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही अवसर और मंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

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Thursday, 18 June, 2026
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एंटरटेनमेंट और मीडिया क्षेत्र की प्रमुख कंपनी जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Z) ने भारत में फुटबॉल के विकास को नई गति देने के लिए खास पहल की घोषणा की है। कंपनी ने कहा है कि अब Zee5 पर फुटबॉल देखने वाला हर सब्सक्राइबर देश के कोने-कोने में मौजूद युवा फुटबॉल प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और उनके विकास में योगदान देगा।

कंपनी ने घोषणा की है कि Zee5 की फुटबॉल से संबंधित सब्सक्रिप्शन आय का 15 प्रतिशत हिस्सा भारतीय फुटबॉल के विकास के लिए समर्पित किया जाएगा। इस पहल के जरिए Zee5 के दर्शकों को भी देश में एक मजबूत और समावेशी फुटबॉल इकोसिस्टम तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।

जी एंटरटेनमेंट का कहना है कि पिछले तीन दशकों में कंपनी ने अपने कंटेंट और विभिन्न सामाजिक पहलों के माध्यम से लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने का प्रयास किया है। एक ‘एकेडमी ऑफ टैलेंट’ के रूप में कंपनी ने देशभर से प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने का काम किया है। अब इसी सोच को वह खेल जगत, विशेष रूप से फुटबॉल में और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना चाहती है।

कंपनी का मानना है कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं की बड़ी संख्या मौजूद है, जिसे सही अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य के तहत Zee5 के माध्यम से जुटाए जाने वाले संसाधनों का उपयोग युवा खिलाड़ियों की पहचान और प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा।

कंपनी की FIFA के साथ वर्ष 2034 तक की साझेदारी भी इस दिशा में उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जी एंटरटेनमेंट का मानना है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिभा विकास, लीग इकोसिस्टम निर्माण और खिलाड़ियों व कोचों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की FIFA की पहलें भारत में प्रतिस्पर्धी फुटबॉल ढांचा विकसित करने में मददगार साबित होंगी।

कंपनी के अनुसार, Zee5 सब्सक्राइबर्स के सामूहिक योगदान के आधार पर भविष्य की प्रतिभाओं के लिए एक मजबूत पाइपलाइन तैयार की जाएगी। इसके तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे और शहर, जिला, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार योग्य लीग फॉर्मेट विकसित किए जाएंगे। साथ ही, फुटबॉल के क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि खिलाड़ियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा सके।

इसके अलावा, कंपनी वैश्विक फुटबॉल महासंघों तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खेल संगठनों के साथ सहयोग कर प्रतिभा पहचान और प्रशिक्षण के लिए ठोस कदम तय करेगी। इसका उद्देश्य युवाओं के बीच फुटबॉल को एक संभावनाशील खेल करियर के रूप में स्थापित करना भी है।

इस पहल के तहत शहरों, जिलों और राज्यों के स्तर पर युवा खिलाड़ियों को अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जमीनी स्तर पर लीग और विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे शुरुआती चरण से ही प्रतिभाओं को निखारा जा सके और वे आगे चलकर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

कंपनी का लक्ष्य एक ऐसा समावेशी और मजबूत फुटबॉल इकोसिस्टम तैयार करना है, जो वर्ष 2034 तक भारत की पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों को विभिन्न आयु वर्गों में FIFA World Cup में भागीदारी के योग्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सके।

इस पहल के बारे में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर पुनीत गोयनका ने कहा कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही अवसर और मंच उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कंपनी एक जिम्मेदार इंडस्ट्री पार्टनर और भारत में फुटबॉल के प्रमुख प्लेटफॉर्म के रूप में खेल के समग्र विकास के लिए अनुकूल और टिकाऊ वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, यह पहल फुटबॉल दर्शकों को देश के उन युवा खिलाड़ियों के सपनों में निवेश करने का अवसर देगी, जो वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं।

कंपनी ने कहा कि यह पहल युवाओं को सशक्त बनाने की भावना से प्रेरित है और स्वामी विवेकानंद के उस संदेश से भी प्रेरणा लेती है, जिसमें युवाओं को फुटबॉल के माध्यम से शक्ति, अनुशासन, आत्मविश्वास और कर्मशीलता विकसित करने का आह्वान किया गया था।

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Truecaller Ads ने लॉन्च किया AI आधारित ‘Call-to-Cart’, अब कॉल के दौरान ही हो सकेगी खरीदारी

Truecaller Ads ने आज वैश्विक स्तर पर अपने नए AI-संचालित कॉमर्स समाधान ‘Call-to-Cart’ की शुरुआत की है।

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Wednesday, 17 June, 2026
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Truecaller Ads ने आज वैश्विक स्तर पर अपने नए AI-संचालित कॉमर्स समाधान ‘Call-to-Cart’ की शुरुआत की है। कंपनी का दावा है कि यह नया प्लेटफॉर्म रोजमर्रा के कम्युनिकेशन मोमेंट्स को सीधे खरीदारी के अनुभव में बदल देगा और उपभोक्ताओं के लिए प्रोडक्ट खोजने से लेकर खरीदने तक की प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा आसान बनाएगा।

कंपनी के अनुसार, किसी विज्ञापन को देखने और खरीदारी पूरी करने के बीच जितने अधिक चरण होते हैं, उतनी ही संभावना बढ़ जाती है कि उपभोक्ता बीच में ही प्रक्रिया छोड़ दे। मौजूदा समय में अधिकांश मोबाइल कॉमर्स अनुभवों में ग्राहकों को कई स्क्रीन के बीच जाना पड़ता है, प्रोडक्ट सर्च करना पड़ता है और अलग-अलग ऐप्स के बीच स्विच करना पड़ता है। यही वजह है कि खरीदारी की प्रक्रिया अक्सर लंबी और जटिल हो जाती है।

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए Truecaller ने Call-to-Cart विकसित किया है। यह समाधान Truecaller की उस विशेष स्थिति का लाभ उठाता है, जहां वह दुनिया के सबसे बड़े कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स में से एक है। यह फीचर ब्रांड्स को उन दो महत्वपूर्ण क्षणों में ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर देता है, जब कोई व्यक्ति कॉल प्राप्त करता है या जब कॉल समाप्त होती है। इन हाई-अटेंशन मोमेंट्स को AI आधारित टार्गेटिंग और कॉमर्स इंटीग्रेशन के साथ जोड़कर कंपनी खरीदारी की प्रक्रिया को सिर्फ दो चरणों तक सीमित करने का दावा कर रही है।

Truecaller Ads के वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल हेड हेमंत अरोड़ा ने कहा कि आज लाखों खरीदारी संबंधी फैसले पारंपरिक शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स के बाहर शुरू होते हैं। उनके मुताबिक कम्युनिकेशन मोमेंट्स भी अब कॉमर्स के लिए एक प्रभावी माध्यम बन चुके हैं और Call-to-Cart इसी अवसर का लाभ उठाने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह उत्पाद खासतौर पर FMCG, D2C ब्यूटी, फार्मा, फिनटेक और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के विज्ञापनदाताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है, जहां सही समय और सही संदर्भ उपभोक्ता के खरीदारी निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कंपनी का कहना है कि Call-to-Cart की सफलता के पीछे उसकी स्वामित्व वाली तकनीक काम करती है। Truecaller Ads के adVantage प्लेटफॉर्म के इंजीनियरिंग डायरेक्टर लिनिकर सेइक्सास ने बताया कि इस समाधान के पीछे adVantage नाम का इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है, जिसे कंपनी ने खुद विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म एडवांस्ड रिकमेंडेशन इंजन, AI आधारित पर्सनलाइजेशन और फर्स्ट-पार्टी डेटा सिग्नल्स का उपयोग करके ग्राहकों को सही समय पर सही ऑफर दिखाने में मदद करता है। इससे उपभोक्ताओं को अधिक सहज अनुभव मिलता है और विज्ञापनदाताओं को बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद मिलती है।

Call-to-Cart को Truecaller Ads का पहला ऐसा समाधान बताया जा रहा है जिसे वैश्विक स्तर पर सीधे विज्ञापनदाताओं के लिए लॉन्च किया गया है। Truecaller के 150 से अधिक देशों में फैले यूजर बेस और दुनिया भर में 50 करोड़ से ज्यादा सक्रिय उपयोगकर्ताओं के कारण ब्रांड्स को बड़े पैमाने पर ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। कंपनी का कहना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर हर दिन अरबों विज्ञापन अवसर उपलब्ध होते हैं, जिससे कम्युनिकेशन-आधारित मार्केटिंग को नई दिशा मिल सकती है।

कंपनी ने यह भी बताया कि Call-to-Cart को काफी हद तक कस्टमाइज किया जा सकता है। शुरुआती चरण में Truecaller ने विभिन्न प्रमुख बाजारों के चुनिंदा ‘ऑलवेज-ऑन’ डायरेक्ट विज्ञापनदाताओं को इस प्रोग्राम का हिस्सा बनने की अनुमति दी है। इन साझेदारों को विशेष ऑनबोर्डिंग सहायता, कस्टम इंटीग्रेशन, adVantage प्रोग्राम तक सीधी पहुंच और प्लेटफॉर्म की विभिन्न कस्टमाइजेशन सुविधाओं का प्राथमिक लाभ मिलेगा।

Truecaller का मानना है कि यह नया समाधान डिजिटल विज्ञापन और मोबाइल कॉमर्स के बीच की दूरी को कम करेगा और ब्रांड्स को उपभोक्ताओं तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचने में मदद करेगा। कंपनी को उम्मीद है कि AI और कम्युनिकेशन-आधारित कॉमर्स का यह मॉडल आने वाले समय में डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स उद्योग के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकता है।

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क्या AI है क्रिएटिविटी का भविष्य? MIFF में फिल्मकारों और विशेषज्ञों ने रखी अपनी राय

19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) के दौरान इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IDPA) ने “क्या AI है क्रिएटिविटी का भविष्य?” विषय पर एक ओपन फोरम का आयोजन किया।

Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
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19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) के दौरान इंडियन डॉक्यूमेंट्री प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IDPA) ने “Is AI the Future of Creativity?” (क्या AI है क्रिएटिविटी का भविष्य?) विषय पर एक ओपन फोरम का आयोजन किया। इस चर्चा में Firefly Creative Studio Pvt. Ltd. के को-फाउंडर सनथ पी.सी., SMPTE के चेयरमैन उज्ज्वल निरगुडकर, वकील हेतल देसाई सोलिया और Fanboy Pictures के निदेशक एवं फिल्मकार सुबोध मेनन शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने फिल्म निर्माण और कंटेंट क्रिएशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े अवसरों, चुनौतियों और इसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।

चर्चा के दौरान रचनात्मक दुनिया में AI की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया। पैनलिस्ट्स ने बताया कि AI किस तरह कहानी कहने की कला, प्रोडक्शन प्रक्रियाओं और फिल्म इंडस्ट्री के भविष्य को प्रभावित कर रहा है। हालांकि सभी ने AI की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार किया, लेकिन इस बात पर भी जोर दिया कि कहानी कहने की कला में मानवीय रचनात्मकता और भावनात्मक समझ की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

SMPTE के चेयरमैन उज्ज्वल निरगुडकर ने सिनेमा में तकनीकी विकास पर बात करते हुए AI को फिल्म निर्माण का अगला स्वाभाविक चरण बताया। उन्होंने कहा कि पोस्ट-प्रोडक्शन के क्षेत्र में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है। साउंड को बेहतर बनाने, कलर करेक्शन, विजुअल क्वालिटी सुधारने और पुरानी फिल्मों के रेस्टोरेशन जैसे कई कामों में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि AI से जुड़े टूल्स बहुत तेजी से विकसित हो रहे हैं, लेकिन पूरे उद्योग में इनके मानकीकरण और व्यापक उपयोग में अभी कुछ समय लगेगा।

Fanboy Pictures के निदेशक और फिल्मकार सुबोध मेनन ने कहा कि AI कंटेंट तैयार कर सकता है और नए विचारों पर सोचने में मदद कर सकता है, लेकिन कहानी कहने की असली ताकत इंसानों के पास ही रहेगी। उन्होंने AI को आइडिया जनरेशन और आइडिया वैलिडेशन का एक उपयोगी माध्यम बताया। उनके अनुसार, जैसे-जैसे यह तकनीक आम होती जाएगी, फिल्मकारों के लिए AI को समझना और उसका सही इस्तेमाल करना बेहद जरूरी हो जाएगा।

Firefly Creative Studio Pvt. Ltd. के को-फाउंडर सनथ पी.सी. ने कहा कि AI कहानी कहने की प्रक्रिया को और बेहतर बना सकता है। इसके जरिए तस्वीरों की गुणवत्ता, ध्वनि और दर्शकों के अनुभव में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने मौजूदा दौर को प्रयोगों का समय बताते हुए कहा कि रचनाकारों को AI की संभावनाओं को खुलकर तलाशना चाहिए, लेकिन पूरी तरह इस पर निर्भर होने के बजाय इसे एक सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।

AI से तैयार किए गए कंटेंट से जुड़े कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए वकील हेतल देसाई सोलिया ने लाइसेंस प्राप्त डेटा के उपयोग और रचनात्मक कार्यों में पर्याप्त मानवीय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कॉपीराइट का स्वामित्व मानव रचनाकारों के पास ही रहता है। इसलिए फिल्मकारों को AI का उपयोग अपने मूल कंटेंट को बेहतर बनाने के लिए करना चाहिए, न कि उसे पूरी तरह से बदलने के लिए।

चर्चा के दौरान सभी पैनलिस्ट इस बात पर सहमत नजर आए कि AI को मानव रचनात्मकता का विकल्प नहीं, बल्कि उसका सहयोगी माना जाना चाहिए। उनका मानना था कि AI प्रोडक्शन प्रक्रियाओं को आसान बना सकता है, कार्यक्षमता बढ़ा सकता है और रचनात्मक संभावनाओं का दायरा विस्तृत कर सकता है, लेकिन कहानी कहने की आत्मा आज भी इंसानी कल्पना, भावनाओं और कलात्मक दृष्टि में ही बसती है।

इस सत्र के बाद दर्शकों के साथ भी रोचक संवाद हुआ। प्रतिभागियों ने AI को अपनाने, उससे जुड़े नैतिक सवालों, कॉपीराइट सुरक्षा और रचनात्मक पेशों के भविष्य जैसे विषयों पर कई सवाल पूछे। चर्चा के अंत में सभी विशेषज्ञ इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि फिल्मकारों को तकनीकी बदलावों को अपनाना चाहिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कहानी कहने की प्रक्रिया के केंद्र में हमेशा मानवीय रचनात्मकता ही बनी रहे।

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WAVES Doc Bazaar के लिए 12 डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट्स का चयन, तीन को मिलेगा 3 लाख का अनुदान

मुंबई में होने वाले 19वें Mumbai International Film Festival के मौके पर इस बार डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है।

Last Modified:
Tuesday, 16 June, 2026
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मुंबई में होने वाले 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (Mumbai International Film Festival) के मौके पर इस बार डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) ने ‘WAVES Doc Bazaar Recommends’ कार्यक्रम के तहत चुने गए प्रोजेक्ट्स की सूची जारी कर दी है, जिन्हें WAVES Doc Bazaar 2026 में प्रदर्शित किया जाएगा।

यह डॉक्यूमेंट्री बाजार 16 से 18 जून 2026 तक मुंबई में NFDC मुख्यालय में आयोजित होगा। इसमें दुनिया भर के फिल्ममेकर, प्रोड्यूसर, ब्रॉडकास्टर, डिस्ट्रीब्यूटर और फेस्टिवल से जुड़े लोग शामिल होंगे। इसका मकसद डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और एनिमेशन के क्षेत्र में सहयोग, नेटवर्किंग और नए बाजार के अवसर तैयार करना है।

इस बार 155 ग्लोबल एंट्रीज में से 19 देशों और 35 भाषाओं से आए प्रोजेक्ट्स में से कुल 12 प्रोजेक्ट्स को चुना गया है। इनमें से 4 प्रोजेक्ट Work-in-Progress (WIP) लैब के लिए चुने गए हैं, जहां फिल्ममेकर्स को अपनी अधूरी फिल्मों के रफ कट अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सामने दिखाने और फीडबैक लेने का मौका मिलेगा।

इसके अलावा 8 प्रोजेक्ट्स ‘WAVES Doc Bazaar Recommends’ श्रेणी में शामिल किए गए हैं, जो या तो पूरी हो चुकी हैं या पोस्ट-प्रोडक्शन के अंतिम चरण में हैं। इन फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, डिस्ट्रीब्यूटरों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बनाने का मौका मिलेगा।

NFDC ने इस बार एक नया कदम भी उठाया है। तीन बेहतरीन प्रोजेक्ट्स को 3-3 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। यह पुरस्कार उन फिल्मों को मिलेगा जिनमें मजबूत कहानी, बेहतरीन रचनात्मकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों से जुड़ने की क्षमता होगी।

सभी चयनित 12 प्रोजेक्ट्स को 16 जून 2026 को ओपन पिच सेशन में अपना प्रेजेंटेशन देने का मौका मिलेगा, जहां वे अपने विचार और फिल्मों की कहानी इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के सामने रख सकेंगे।

इस आयोजन का एक खास हिस्सा ‘Viewing Room’ भी होगा, जो एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरह काम करेगा। यहां 155 प्रोजेक्ट्स को 19 देशों और 35 भाषाओं में प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे दुनिया भर के खरीदार और प्लेटफॉर्म्स इन फिल्मों को देख और समझ सकेंगे।

WIP लैब के लिए चुनी गई फिल्मों में ‘Adieu Dilli’, ‘It Takes A Village’, ‘Kunchok and His Many Moons’ और ‘On a Good Note’ शामिल हैं।

वहीं ‘WAVES Doc Bazaar Recommends’ श्रेणी में ‘By the Home’, ‘Do Chaar Din’, ‘Eche’, ‘Rasanishpathi’, ‘Rise’, ‘The Girl Beneath The Sun’, ‘Turu’ और ‘Tukro Tukro Prithibi’ जैसी फिल्में चुनी गई हैं।

NFDC का कहना है कि यह पहल उभरते फिल्ममेकर्स को सपोर्ट करने, उनकी कहानियों को वैश्विक मंच देने और डॉक्यूमेंट्री सिनेमा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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मालती जोशी की कहानियों और कविताओं से सजा ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम

इंदौर में आयोजित ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित कथाकार मालती जोशी को याद किया गया। कई प्रमुख हस्तियों ने उनकी रचनाओं का पाठ कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
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पद्मश्री सम्मानित और मालवा की मीरा के रूप में प्रसिद्ध कथाकार मालती जोशी की स्मृति में इंदौर के प्रीतम लाल दुआ सभागार में ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से साहित्य, रंगमंच और सिनेमा जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुईं और मालती जोशी की रचनाओं को याद किया।

कार्यक्रम में दिल्ली से लक्ष्मी शंकर बाजपेयी और मुंबई से अभिनेता एवं पटकथा लेखक अतुल तिवारी ने मालती जोशी की कहानियों का पाठ किया। वक्ताओं ने कहा कि मालती जोशी अपनी सहज, पारिवारिक और संवेदनशील कहानियों के कारण पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहीं और अपने समय की श्रेष्ठ कथाकारों में उनका विशेष स्थान था।

अतुल तिवारी ने कहा कि मालती जोशी ने महिला कथाकारों के लिए नए मानदंड स्थापित किए। उन्होंने बताया कि उनकी कहानियां फिल्मों और टेलीफिल्मों के लिए बेहद उपयुक्त थीं, जिसके चलते गुलजार और जया बच्चन जैसे फिल्मकारों ने भी उनकी रचनाओं पर काम किया।

लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने कहा कि मालती जोशी की कहानियों को युवाओं तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि वे भारतीय पारिवारिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें। उन्होंने उनकी चर्चित कहानी ‘इतिश्री’ का वाचन भी किया। कार्यक्रम में मंजूषा राजस जौहरी, अनीता सक्सेना, ज्योति जैन, मधुरा फड़के और रंजना चितले सहित कई वक्ताओं ने मालती जोशी के साहित्य, व्यक्तित्व और जीवन दृष्टि पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत मालती जोशी के बड़े पुत्र ऋषिकेश जोशी के स्वागत वक्तव्य से हुई, जबकि समापन उनके छोटे पुत्र सच्चिदानंद जोशी के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने मालती जोशी की रचनाओं के कॉपीराइट संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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खेल प्रसारण में बड़ा बदलाव: 'दूरदर्शन' व 'आकाशवाणी' पर खेलों का दायरा हुआ और बड़ा

केंद्र सरकार ने सरकार ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य साझाकरण) अधिनियम, 2007 के तहत "राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों" की सूची का काफी विस्तार कर दिया है।

Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
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केंद्र सरकार ने खेल प्रेमियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य साझाकरण) अधिनियम, 2007 के तहत "राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों" की सूची का काफी विस्तार कर दिया है। इसके बाद अब कई और अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खेल प्रतियोगितियों के लाइव प्रसारण सिग्नल प्रसार भारती के साथ साझा करना अनिवार्य होगा।

दूरदर्शन और आकाशवाणी पर बढ़ेगी खेलों की पहुंच

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 11 जून को जारी एक राजपत्र (गजट) अधिसूचना के जरिए मई 2022 के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है। नए आदेश के तहत उन खेल आयोजनों की सूची को संशोधित किया गया है, जिनके लाइव प्रसारण सिग्नल सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती के साथ साझा करना जरूरी होगा।

2007 के कानून के अनुसार, जिन प्रसारकों के पास किसी अधिसूचित खेल आयोजन के विशेष प्रसारण अधिकार (एक्सक्लूसिव मीडिया राइट्स) होते हैं, उन्हें उसके लाइव सिग्नल प्रसार भारती को उपलब्ध कराने होते हैं। इससे आम दर्शक दूरदर्शन और आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के माध्यम से इन मुकाबलों का आनंद ले सकते हैं।

ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेल बने रहेंगे सूची में

नई अधिसूचना में ओलंपिक खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों को राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों की सूची में बरकरार रखा गया है। इसके अलावा क्रिकेट, टेनिस, हॉकी, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी और जमीनी स्तर की खेल प्रतियोगितियों को भी बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है।

क्रिकेट को मिली खास जगह

संशोधित सूची में क्रिकेट को प्रमुखता दी गई है। इसमें भारतीय पुरुष और महिला टीमों के सभी आधिकारिक वनडे, टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट मैच शामिल किए गए हैं। इसके अलावा भारत से जुड़े ICC टेस्ट मैच भी इस सूची का हिस्सा होंगे।

इसके साथ ही निम्नलिखित टूर्नामेंटों के अहम मुकाबले भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजन माने जाएंगे—

  • पुरुष और महिला ICC वनडे व टी20 विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले
  • ICC चैंपियंस ट्रॉफी
  • ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप
  • एशिया कप के सुपर-4 चरण से आगे के मुकाबले
  • अंडर-19 विश्व कप में भारत के सभी मैच
  • अंडर-19 विश्व कप के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले

टेनिस प्रशंसकों को भी मिला बड़ा तोहफा

टेनिस में भारत से जुड़े सभी डेविस कप मुकाबलों को सूची में शामिल किया गया है।

इसके अलावा—

  • सभी ग्रैंड स्लैम सिंगल्स फाइनल
  • भारतीय खिलाड़ियों वाले सिंगल्स, डबल्स और मिक्स्ड डबल्स मुकाबले (क्वार्टर फाइनल से आगे)

भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजन माने जाएंगे।

हॉकी के लिए बड़ा विस्तार

हॉकी के क्षेत्र में भी सूची का काफी विस्तार किया गया है। इसमें शामिल हैं—

  • भारत से जुड़े हॉकी विश्व कप मुकाबले
  • हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल और फाइनल
  • चैंपियंस ट्रॉफी मुकाबले
  • FIH हॉकी प्रो लीग मैच
  • भारत वाले सुल्तान अजलन शाह कप मुकाबले
  • हॉकी इंडिया सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप
  • हॉकी इंडिया अकादमी राष्ट्रीय चैंपियनशिप

इसके अलावा, जब पुरुष जूनियर हॉकी विश्व कप का आयोजन भारत में होगा, तब उसे भी राष्ट्रीय महत्व का आयोजन माना जाएगा।

फुटबॉल को भी मिली बड़ी जगह

फुटबॉल के कई बड़े टूर्नामेंट भी अब इस सूची में शामिल किए गए हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • फीफा विश्व कप का उद्घाटन मैच
  • फीफा विश्व कप के क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल
  • भारत से जुड़े सभी एशिया कप मुकाबले
  • एशिया कप के सेमीफाइनल और फाइनल
  • संतोष ट्रॉफी के सेमीफाइनल और फाइनल

इसके अलावा, भारत में आयोजित होने पर—

  • एशियन महिला फुटबॉल कप
  • फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप

को भी राष्ट्रीय महत्व का आयोजन माना जाएगा।

वहीं, फीफा अंडर-17 विश्व कप के उद्घाटन मुकाबले और नॉकआउट चरण के मैच भी इस सूची में शामिल कर लिए गए हैं।

बैडमिंटन और कबड्डी को भी मिला स्थान

बैडमिंटन में अब—

  • ऑल इंग्लैंड ओपन
  • BWF विश्व चैंपियनशिप

के सभी भारतीय खिलाड़ियों वाले मुकाबले, साथ ही सेमीफाइनल और फाइनल मैच भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में शामिल होंगे।

कबड्डी में—

  • कबड्डी विश्व कप के सभी भारत वाले मुकाबले
  • सेमीफाइनल और फाइनल

को भी इस सूची में जगह दी गई है।

खेलो इंडिया प्रतियोगितियां भी शामिल

सरकार ने खेलो इंडिया मिशन के तहत आयोजित होने वाली सभी प्रतियोगितियों और लीगों को भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों की सूची में शामिल कर लिया है।

इस फैसले के बाद देशभर के करोड़ों खेल प्रेमियों को दूरदर्शन और आकाशवाणी के जरिए पहले से कहीं अधिक खेल प्रतियोगितियां देखने और सुनने का मौका मिलेगा। साथ ही, विभिन्न खेलों को देश के दूरदराज इलाकों तक पहुंचाने में भी यह कदम अहम भूमिका निभाएगा।

 

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संसद टीवी में इंटर्नशिप पूरी करने वाले IIMC छात्रों को मिला सम्मान

भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के 20 छात्रों के लिए उपराष्ट्रपति आवास में समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश शामिल हुए।

Last Modified:
Friday, 12 June, 2026
C P Radhakrishnan

भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के 20 चयनित छात्रों द्वारा संसद टीवी में सफलतापूर्वक इंटर्नशिप पूरी करने के उपलक्ष्य में उपराष्ट्रपति आवास में एक विशेष समापन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन (C.P. Radhakrishnan) तथा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) मौजूद रहे।

इस अवसर पर हरिवंश नारायण सिंह ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि मीडिया और जनसंचार के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने संसद टीवी में इंटर्नशिप पूरी करने वाले छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल (Dr. Pragya Paliwal), संसद टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित खरे (Amit Khare) सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। संसद टीवी में आयोजित इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत IIMC के 20 चयनित छात्रों को संसदीय पत्रकारिता, प्रसारण, कंटेंट निर्माण और मीडिया संचालन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

समारोह के दौरान छात्रों के अनुभवों को भी साझा किया गया और उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों को मीडिया उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने में मदद करते हैं और उनके पेशेवर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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MIFF 2026 के लिए मीडिया रजिस्ट्रेशन का आज है आखिरी मौका

देशभर के पत्रकारों, मीडिया प्रोफेशनल्स और फिल्म समीक्षकों की भारी मांग को देखते हुए 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF 2026) के लिए मीडिया एक्रिडिटेशन पोर्टल को दोबारा खोला गया है।

Last Modified:
Wednesday, 10 June, 2026
MIFF5421

देशभर के पत्रकारों, मीडिया प्रोफेशनल्स और फिल्म समीक्षकों की भारी मांग को देखते हुए 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF 2026) के लिए मीडिया एक्रिडिटेशन पोर्टल को दोबारा खोला गया है, जोकि 10 जून  और 11 जून 2026 तक वैलिड है, यानी इस हिसाब से मीडिया प्रतिनिधि के सिर्फ आज ही अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।

आयोजकों के अनुसार, यह विशेष व्यवस्था उन मीडिया कर्मियों को ध्यान में रखकर की गई है जो पहले निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए थे। यह मीडिया प्रतिनिधियों के लिए MIFF 2026 में भाग लेने का अंतिम अवसर होगा। 11 जून 2026 के बाद रजिस्ट्रेशन की समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

19वां मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 15 से 21 जून 2026 तक मुंबई के गोपालराव देशमुख मार्ग स्थित NFDC परिसर में आयोजित किया जाएगा। एक सप्ताह तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव में फिल्म स्क्रीनिंग, चर्चाएं, मास्टरक्लास, इंडस्ट्री इंटरैक्शन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

आयोजकों ने मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे दोबारा खोले गए रजिस्ट्रेशन विंडो के दौरान अपना पंजीकरण पूरा कर लें। एक्रिडिटेशन मिलने पर उन्हें फिल्म फेस्टिवल की स्क्रीनिंग, प्रेस इंटरैक्शन, विशेष मीडिया कार्यक्रमों और नेटवर्किंग के अवसरों तक पहुंच मिलेगी।

मीडिया एक्रिडिटेशन पोर्टल केवल 11 जून 2026 तक ही खुला रहेगा। इसके बाद रजिस्ट्रेशन का कोई और मौका नहीं दिया जाएगा।

मीडिया प्रतिनिधि ऐसे करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन

मीडिया प्रतिनिधि आधिकारिक पोर्टल पर जाकर Media Delegate के रूप में अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए वे एक्रिडिटेशन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं या जारी किए गए QR कोड को स्कैन कर सकते हैं।

दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा नॉन-फीचर फिल्म फेस्टिवल

मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) को दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नॉन-फीचर सिनेमा फिल्म महोत्सव माना जाता है। यह फिल्म फेस्टिवल मुख्य रूप से डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिक्शन और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है।

साल 1990 में शुरू हुए इस महोत्सव का आयोजन भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत किया जाता है। पिछले तीन दशकों में MIFF दुनिया भर के फिल्म निर्माताओं, कलाकारों और सिनेमा प्रेमियों के लिए एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुका है।

47 देशों से आईं 1,459 फिल्में

MIFF 2026 का 19वां संस्करण दर्शकों को एक समृद्ध और यादगार सिनेमाई अनुभव देने का वादा करता है। इस बार प्रतियोगिता खंड के लिए भारत समेत 47 देशों से कुल 1,459 फिल्म प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं।

फेस्टिवल में भारत की 42 से अधिक भाषाओं और दुनिया के अन्य देशों की 30 से ज्यादा भाषाओं में बनी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह इसकी वैश्विक पहुंच और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।

फेस्टिवल में दुनिया भर के चर्चित फिल्मकारों की डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिक्शन फिल्में, एनीमेशन फिल्में, डेब्यू डायरेक्टर फिल्मों और छात्र फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा।

इसके अलावा फेस्टिवल के दौरान Doc Bazaar के दूसरे संस्करण का आयोजन किया जाएगा। साथ ही विभिन्न मास्टरक्लास और IDPA Open Forum भी आयोजित होंगे, जो फिल्मकारों और सिनेमा प्रेमियों के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देंगे।

आयोजकों का कहना है कि MIFF 2026 कहानी कहने की कला, रचनात्मकता और सिनेमा के प्रति जुनून का एक अनोखा उत्सव होगा, जहां डॉक्यूमेंट्री, एनीमेशन और शॉर्ट फिक्शन फिल्म निर्माण से जुड़े प्रतिभाशाली लोगों को एक साझा मंच मिलेगा।

19वें MIFF की मीडिया एक्रिडिटेशन पॉलिसी भी आधिकारिक लिंक के माध्यम से देखी जा सकती है-

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/may/doc2026522874701.pdf

 

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एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन के अध्यक्ष बने वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय

एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगरा में आयोजित आमसभा में की घोषणा, दिल्ली में जल्द आयोजित होगी कार्यशाला

Last Modified:
Tuesday, 09 June, 2026
Anil Pandey NUJI

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएफजे) से संबद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) द्वारा स्थापित एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन के अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय को नियुक्त किया गया है। वहीं, जनसत्ता के संवाददाता प्रियरंजन को महासचिव चुना गया है।

यह घोषणा आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जयप्रकाश नारायण सभागार में आयोजित एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन की आमसभा में की गई, जहां पदाधिकारियों एवं गवर्निंग काउंसिल का गठन किया गया।

एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने आमसभा को संबोधित करते हुए संस्था के नए संविधान की जानकारी दी तथा नवगठित पदाधिकारियों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि गवर्निंग काउंसिल में भीष्म सिंह (जमशेदपुर) एवं अनीता चौधरी (दिल्ली) को उपाध्यक्ष, आलोक मोहन नायक को कोषाध्यक्ष तथा गौरव ललित (दिल्ली), विपुल कुमार (हरियाणा), भंवर सिंह (राजस्थान) और राहुल वर्मा (उत्तराखंड) को सचिव नियुक्त किया गया है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि संस्था का नया संविधान औपचारिक रूप से अंगीकृत कर लिया गया है। यह निर्णय 13 सितंबर 2025 को आयोजित कार्यकारी बैठक में लिया गया था। नए संविधान के निर्माण में हरिद्वार में आयोजित एनयूजे (आई) अधिवेशन के दौरान गठित समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति में अनिल पांडेय, दधिबल यादव, मनोज वर्मा, राकेश थपलियाल और अमलेश राजू सहित अन्य सदस्य शामिल थे, जबकि एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पदेन सदस्य के रूप में समिति से जुड़े थे।

नए संविधान के अनुसार संस्था में एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, चार संयुक्त/सह सचिव तथा 11 सदस्यीय कार्यकारिणी का प्रावधान किया गया है। गवर्निंग काउंसिल के अन्य सदस्यों में रास बिहारी, प्रदीप तिवारी, राकेश थपलियाल, उषा पहवा, दधिबल यादव, प्रतिभा शुक्ल, सचिन बुधौलिया, डॉ. उमेश पाठक, डॉ. ऋतु दुबे, प्रमोद गोस्वामी (उत्तर प्रदेश) तथा राकेश कुमार सिंह (बिहार) शामिल हैं।

गौरतलब है कि एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन की स्थापना पत्रकारों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल मीडिया और मीडिया जगत में हो रहे निरंतर परिवर्तनों की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है। संस्था देशभर में समय-समय पर कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों और मीडिया उन्नयन कार्यक्रमों का आयोजन करती है। इसी क्रम में शीघ्र ही दिल्ली में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

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