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हरिवंश जी की पत्रकारिता प्रयोगशाला : विज्ञापन से जनकार्य तक
यह पुस्तक केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि आज के पत्रकारों, विपणन पेशेवरों, विद्यार्थियों और सामाजिक बदलाव के इच्छुक हर व्यक्ति के लिए एक प्रेरणास्पद दस्तावेज़ है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
वरिष्ठ मीडियाकर्मी ए. एस. रघुनाथ जो कि वर्ष 2005 से 2014 तक 'प्रभात खबर 'अख़बार से ब्रांड एसोसिएट के रूप में जुड़े रहे, ने प्रभात खबर की असाधारण यात्रा को आकर्षक कॉफी टेबल पुस्तक में प्रस्तुत किया है। यह आकर्षक कॉफी टेबल पुस्तक प्रभात खबर की असाधारण यात्रा को दर्ज करती है। एक समय अस्तित्व के संकट से जूझ रहा यह अख़बार कैसे जन-मन की आवाज़ बना, यह पुस्तक उसी परिवर्तन की प्रेरक कथा है।
हरिवंश जी के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रभात खबर ने पारंपरिक पत्रकारिता की सीमाओं को लांघते हुए उसे सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बना दिया। सशक्त संपादकीय लेखन को जनसेवा से जुड़े विज्ञापन अभियानों (Ad-Vocacy Campaigns) से जोड़कर शिक्षा, सामाजिक न्याय, सुशासन, लैंगिक समानता और नागरिक सहभागिता जैसे मुद्दों को नए स्वर, संवेदना और विस्तार मिले। यह चित्रों से समृद्ध पुस्तक 35 चयनित अभियानों को प्रस्तुत करती है, जिनमें 400 से अधिक अनूठे विज्ञापनों का समावेश है।
1990 के दशक में संसाधनों की कमी के बावजूद जब अंदरूनी टीम द्वारा साधारण कागज़ों पर डिज़ाइन किए गए पर्चों से अभियान शुरू हुआ, वह 2005 के बाद देश की प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों द्वारा संचालित प्रभावशाली अभियानों तक पहुँचा, वह भी सीमित बजट में, परंतु बड़े असर के साथ। इस दस्तावेज़ को जीवंत बनाते हैं वे अनुभव, जिन्हें उस समय के पत्रकारों, विज्ञापन विशेषज्ञों, प्रतिस्पर्धी अख़बारों के वरिष्ठों और शिक्षाविदों ने साझा किया जो इस यात्रा के साक्षी भी रहे और सहभागी भी।
इस पूरी प्रक्रिया में प्रभात खबर के प्रबंधन की भूमिका भी सराहनीय रही, जिसने हर मोर्चे पर संपादकीय टीम का साथ दिया। चारा घोटाले का भंडाफोड़, बाल अधिकार, मतदाता जागरूकता, लिंग गरिमा, जनजवाबदेही, और व्यवहार परिवर्तन जैसे विषयों को संपादकीय दृष्टिकोण और रणनीतिक संप्रेषण के साथ प्रस्तुत कर प्रभात खबर ने क्षेत्रीय पत्रकारिता में नई मिसालें कायम कीं। दशकों से मीडिया विपणन से जुड़े रघुनाथ जी इस पुस्तक में AD-Vocacy Journalism के नवाचारपूर्ण मॉडल को गहराई से प्रस्तुत करते हैं, जो केवल संपादकीय प्रयोग न होकर भारतीय मीडिया में एक परिवर्तनकारी आंदोलन का प्रमाण है।
यह पुस्तक केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि आज के पत्रकारों, विपणन पेशेवरों, विद्यार्थियों और सामाजिक बदलाव के इच्छुक हर व्यक्ति के लिए एक प्रेरणास्पद दस्तावेज़ है, जो यह दर्शाती है कि जब कोई सच्ची बात जनहित में कही जाती है, तो वह स्थायी बदलाव का आधार बन सकती है। यह कॉफी टेबल पुस्तक Amazon और Flipkart पर हार्डकवर एवं किंडल संस्करण में उपलब्ध है।
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