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चीन ने भारतीय मीडिया को जब दी नसीहत, ताइवान ने दिया करारा जवाब
भारत में चीन के दूतावास की तरफ से एक चिट्ठी भारतीय मीडिया के नाम जारी की गई, जिसमें भारतीय मीडिया को आगामी 10 अक्टूबर को होने वाले ताइवान के राष्ट्रीय दिवस समारोह से बचने की नसीहत दी गई
समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago
भारत में चीन के दूतावास की तरफ से बुधवार को एक चिट्ठी भारतीय मीडिया के नाम जारी की गई, जिसमें भारतीय मीडिया को आगामी 10 अक्टूबर को होने वाले ताइवान के राष्ट्रीय दिवस समारोह से बचने की नसीहत दी गई। साथ ही 'वन चाइना पॉलिसी' (One China Policy) को मानने की भी बात कही गई।
लेकिन इस बात की जानकारी जैसे ही ताइवान को लगी उसने तुरंत ही पलटवार करते हुए करारा जवाब दिया है। ताइवान ने चीन को दो टूक शब्दों में 'भाड़ में जाने' को कह दिया है।
ताइवान के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा गया कि कम्यूनिस्ट चीन भारतीय उपमहाद्वीप में सेंसरशिप लागू करना चाहता है।
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, 'भारत धरती पर सबसे बड़ा लोकतंत्र है जहां जीवंत प्रेस और आजादपसंद लोग हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि कम्यूनिस्ट चीन सेंसरशिप थोपकर उपमहाद्वीप में घुसना चाहता है। ताइवान के भारतीय दोस्तों का एक ही जवाब होगा- भाड़ में जाओ।'
बता दें कि 10 अक्टूबर को ताइवान का राष्ट्रीय दिवस है। लेकिन चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और चाहता है कि पूरी दुनिया उसे उसके ही हिस्से के तौर पर स्वीकार करे। वैसे 'वन चाइना पॉलिसी' की दुहाई देने वाला चीन लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने को 'अवैध' बताता आया है, जो भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता का अपमान है।
चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से भारतीय मीडिया के लिए जारी बयान में कहा गया है, 'ताइवान के आगामी तथाकथित राष्ट्रीय दिवस के बारे में भारत में चीनी दूतावास अपने मीडिया दोस्तों को याद दिलाना चाहता है कि दुनिया में सिर्फ एक ही चीन है और ‘पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ सरकार ही पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करने वाली इकलौती सरकार है। ताइवान चीनी का अभिन्न हिस्सा है।'
चीनी दूतावास ने आगे कहा है, 'चाइना के साथ कूटनीतिक संबंधों वाले सभी देशों को वन-चाइना पॉलिसी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का दृढ़ता से सम्मान करना चाहिए। भारत सरकार का भी लंबे समय से यही आधिकारिक रुख रहा है।'
चीनी दूतावास ने आगे कहा है, 'हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय मीडिया ताइवान को लेकर भारत सरकार के रुख पर चलेगा और वन-चाइना पॉलिसी का उल्लंघन नहीं करेंगे। खासकर ताइवान को एक 'देश (राष्ट्र)' या 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' या चीन के ताइवान क्षेत्र के नेता को 'राष्ट्रपति' के तौर पर संबोधित नहीं किया जाएगा ताकि आम लोगों में गलत संदेश न जाए।'
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