खेल प्रसारण में बड़ा बदलाव: 'दूरदर्शन' व 'आकाशवाणी' पर खेलों का दायरा हुआ और बड़ा

केंद्र सरकार ने सरकार ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य साझाकरण) अधिनियम, 2007 के तहत "राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों" की सूची का काफी विस्तार कर दिया है।

Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
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केंद्र सरकार ने खेल प्रेमियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स (प्रसार भारती के साथ अनिवार्य साझाकरण) अधिनियम, 2007 के तहत "राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों" की सूची का काफी विस्तार कर दिया है। इसके बाद अब कई और अंतरराष्ट्रीय और घरेलू खेल प्रतियोगितियों के लाइव प्रसारण सिग्नल प्रसार भारती के साथ साझा करना अनिवार्य होगा।

दूरदर्शन और आकाशवाणी पर बढ़ेगी खेलों की पहुंच

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 11 जून को जारी एक राजपत्र (गजट) अधिसूचना के जरिए मई 2022 के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है। नए आदेश के तहत उन खेल आयोजनों की सूची को संशोधित किया गया है, जिनके लाइव प्रसारण सिग्नल सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती के साथ साझा करना जरूरी होगा।

2007 के कानून के अनुसार, जिन प्रसारकों के पास किसी अधिसूचित खेल आयोजन के विशेष प्रसारण अधिकार (एक्सक्लूसिव मीडिया राइट्स) होते हैं, उन्हें उसके लाइव सिग्नल प्रसार भारती को उपलब्ध कराने होते हैं। इससे आम दर्शक दूरदर्शन और आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के माध्यम से इन मुकाबलों का आनंद ले सकते हैं।

ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेल बने रहेंगे सूची में

नई अधिसूचना में ओलंपिक खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों को राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों की सूची में बरकरार रखा गया है। इसके अलावा क्रिकेट, टेनिस, हॉकी, फुटबॉल, बैडमिंटन, कबड्डी और जमीनी स्तर की खेल प्रतियोगितियों को भी बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है।

क्रिकेट को मिली खास जगह

संशोधित सूची में क्रिकेट को प्रमुखता दी गई है। इसमें भारतीय पुरुष और महिला टीमों के सभी आधिकारिक वनडे, टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट मैच शामिल किए गए हैं। इसके अलावा भारत से जुड़े ICC टेस्ट मैच भी इस सूची का हिस्सा होंगे।

इसके साथ ही निम्नलिखित टूर्नामेंटों के अहम मुकाबले भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजन माने जाएंगे—

  • पुरुष और महिला ICC वनडे व टी20 विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले
  • ICC चैंपियंस ट्रॉफी
  • ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप
  • एशिया कप के सुपर-4 चरण से आगे के मुकाबले
  • अंडर-19 विश्व कप में भारत के सभी मैच
  • अंडर-19 विश्व कप के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले

टेनिस प्रशंसकों को भी मिला बड़ा तोहफा

टेनिस में भारत से जुड़े सभी डेविस कप मुकाबलों को सूची में शामिल किया गया है।

इसके अलावा—

  • सभी ग्रैंड स्लैम सिंगल्स फाइनल
  • भारतीय खिलाड़ियों वाले सिंगल्स, डबल्स और मिक्स्ड डबल्स मुकाबले (क्वार्टर फाइनल से आगे)

भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजन माने जाएंगे।

हॉकी के लिए बड़ा विस्तार

हॉकी के क्षेत्र में भी सूची का काफी विस्तार किया गया है। इसमें शामिल हैं—

  • भारत से जुड़े हॉकी विश्व कप मुकाबले
  • हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल और फाइनल
  • चैंपियंस ट्रॉफी मुकाबले
  • FIH हॉकी प्रो लीग मैच
  • भारत वाले सुल्तान अजलन शाह कप मुकाबले
  • हॉकी इंडिया सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप
  • हॉकी इंडिया अकादमी राष्ट्रीय चैंपियनशिप

इसके अलावा, जब पुरुष जूनियर हॉकी विश्व कप का आयोजन भारत में होगा, तब उसे भी राष्ट्रीय महत्व का आयोजन माना जाएगा।

फुटबॉल को भी मिली बड़ी जगह

फुटबॉल के कई बड़े टूर्नामेंट भी अब इस सूची में शामिल किए गए हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • फीफा विश्व कप का उद्घाटन मैच
  • फीफा विश्व कप के क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल
  • भारत से जुड़े सभी एशिया कप मुकाबले
  • एशिया कप के सेमीफाइनल और फाइनल
  • संतोष ट्रॉफी के सेमीफाइनल और फाइनल

इसके अलावा, भारत में आयोजित होने पर—

  • एशियन महिला फुटबॉल कप
  • फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप

को भी राष्ट्रीय महत्व का आयोजन माना जाएगा।

वहीं, फीफा अंडर-17 विश्व कप के उद्घाटन मुकाबले और नॉकआउट चरण के मैच भी इस सूची में शामिल कर लिए गए हैं।

बैडमिंटन और कबड्डी को भी मिला स्थान

बैडमिंटन में अब—

  • ऑल इंग्लैंड ओपन
  • BWF विश्व चैंपियनशिप

के सभी भारतीय खिलाड़ियों वाले मुकाबले, साथ ही सेमीफाइनल और फाइनल मैच भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में शामिल होंगे।

कबड्डी में—

  • कबड्डी विश्व कप के सभी भारत वाले मुकाबले
  • सेमीफाइनल और फाइनल

को भी इस सूची में जगह दी गई है।

खेलो इंडिया प्रतियोगितियां भी शामिल

सरकार ने खेलो इंडिया मिशन के तहत आयोजित होने वाली सभी प्रतियोगितियों और लीगों को भी राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों की सूची में शामिल कर लिया है।

इस फैसले के बाद देशभर के करोड़ों खेल प्रेमियों को दूरदर्शन और आकाशवाणी के जरिए पहले से कहीं अधिक खेल प्रतियोगितियां देखने और सुनने का मौका मिलेगा। साथ ही, विभिन्न खेलों को देश के दूरदराज इलाकों तक पहुंचाने में भी यह कदम अहम भूमिका निभाएगा।

 

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मालती जोशी की कहानियों और कविताओं से सजा ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम

इंदौर में आयोजित ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम में पद्मश्री सम्मानित कथाकार मालती जोशी को याद किया गया। कई प्रमुख हस्तियों ने उनकी रचनाओं का पाठ कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
maltijoshi

पद्मश्री सम्मानित और मालवा की मीरा के रूप में प्रसिद्ध कथाकार मालती जोशी की स्मृति में इंदौर के प्रीतम लाल दुआ सभागार में ‘स्मृति कल्प’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से साहित्य, रंगमंच और सिनेमा जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हुईं और मालती जोशी की रचनाओं को याद किया।

कार्यक्रम में दिल्ली से लक्ष्मी शंकर बाजपेयी और मुंबई से अभिनेता एवं पटकथा लेखक अतुल तिवारी ने मालती जोशी की कहानियों का पाठ किया। वक्ताओं ने कहा कि मालती जोशी अपनी सहज, पारिवारिक और संवेदनशील कहानियों के कारण पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहीं और अपने समय की श्रेष्ठ कथाकारों में उनका विशेष स्थान था।

अतुल तिवारी ने कहा कि मालती जोशी ने महिला कथाकारों के लिए नए मानदंड स्थापित किए। उन्होंने बताया कि उनकी कहानियां फिल्मों और टेलीफिल्मों के लिए बेहद उपयुक्त थीं, जिसके चलते गुलजार और जया बच्चन जैसे फिल्मकारों ने भी उनकी रचनाओं पर काम किया।

लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने कहा कि मालती जोशी की कहानियों को युवाओं तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि वे भारतीय पारिवारिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें। उन्होंने उनकी चर्चित कहानी ‘इतिश्री’ का वाचन भी किया। कार्यक्रम में मंजूषा राजस जौहरी, अनीता सक्सेना, ज्योति जैन, मधुरा फड़के और रंजना चितले सहित कई वक्ताओं ने मालती जोशी के साहित्य, व्यक्तित्व और जीवन दृष्टि पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की शुरुआत मालती जोशी के बड़े पुत्र ऋषिकेश जोशी के स्वागत वक्तव्य से हुई, जबकि समापन उनके छोटे पुत्र सच्चिदानंद जोशी के संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने मालती जोशी की रचनाओं के कॉपीराइट संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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संसद टीवी में इंटर्नशिप पूरी करने वाले IIMC छात्रों को मिला सम्मान

भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के 20 छात्रों के लिए उपराष्ट्रपति आवास में समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश शामिल हुए।

Last Modified:
Friday, 12 June, 2026
C P Radhakrishnan

भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के 20 चयनित छात्रों द्वारा संसद टीवी में सफलतापूर्वक इंटर्नशिप पूरी करने के उपलक्ष्य में उपराष्ट्रपति आवास में एक विशेष समापन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन (C.P. Radhakrishnan) तथा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) मौजूद रहे।

इस अवसर पर हरिवंश नारायण सिंह ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि मीडिया और जनसंचार के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने संसद टीवी में इंटर्नशिप पूरी करने वाले छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यक्रम में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल (Dr. Pragya Paliwal), संसद टीवी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित खरे (Amit Khare) सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। संसद टीवी में आयोजित इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत IIMC के 20 चयनित छात्रों को संसदीय पत्रकारिता, प्रसारण, कंटेंट निर्माण और मीडिया संचालन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

समारोह के दौरान छात्रों के अनुभवों को भी साझा किया गया और उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। वक्ताओं ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों को मीडिया उद्योग की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने में मदद करते हैं और उनके पेशेवर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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MIFF 2026 के लिए मीडिया रजिस्ट्रेशन का आज है आखिरी मौका

देशभर के पत्रकारों, मीडिया प्रोफेशनल्स और फिल्म समीक्षकों की भारी मांग को देखते हुए 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF 2026) के लिए मीडिया एक्रिडिटेशन पोर्टल को दोबारा खोला गया है।

Last Modified:
Wednesday, 10 June, 2026
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देशभर के पत्रकारों, मीडिया प्रोफेशनल्स और फिल्म समीक्षकों की भारी मांग को देखते हुए 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF 2026) के लिए मीडिया एक्रिडिटेशन पोर्टल को दोबारा खोला गया है, जोकि 10 जून  और 11 जून 2026 तक वैलिड है, यानी इस हिसाब से मीडिया प्रतिनिधि के सिर्फ आज ही अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।

आयोजकों के अनुसार, यह विशेष व्यवस्था उन मीडिया कर्मियों को ध्यान में रखकर की गई है जो पहले निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए थे। यह मीडिया प्रतिनिधियों के लिए MIFF 2026 में भाग लेने का अंतिम अवसर होगा। 11 जून 2026 के बाद रजिस्ट्रेशन की समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

19वां मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 15 से 21 जून 2026 तक मुंबई के गोपालराव देशमुख मार्ग स्थित NFDC परिसर में आयोजित किया जाएगा। एक सप्ताह तक चलने वाले इस प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव में फिल्म स्क्रीनिंग, चर्चाएं, मास्टरक्लास, इंडस्ट्री इंटरैक्शन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

आयोजकों ने मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे दोबारा खोले गए रजिस्ट्रेशन विंडो के दौरान अपना पंजीकरण पूरा कर लें। एक्रिडिटेशन मिलने पर उन्हें फिल्म फेस्टिवल की स्क्रीनिंग, प्रेस इंटरैक्शन, विशेष मीडिया कार्यक्रमों और नेटवर्किंग के अवसरों तक पहुंच मिलेगी।

मीडिया एक्रिडिटेशन पोर्टल केवल 11 जून 2026 तक ही खुला रहेगा। इसके बाद रजिस्ट्रेशन का कोई और मौका नहीं दिया जाएगा।

मीडिया प्रतिनिधि ऐसे करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन

मीडिया प्रतिनिधि आधिकारिक पोर्टल पर जाकर Media Delegate के रूप में अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए वे एक्रिडिटेशन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं या जारी किए गए QR कोड को स्कैन कर सकते हैं।

दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा नॉन-फीचर फिल्म फेस्टिवल

मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) को दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नॉन-फीचर सिनेमा फिल्म महोत्सव माना जाता है। यह फिल्म फेस्टिवल मुख्य रूप से डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिक्शन और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है।

साल 1990 में शुरू हुए इस महोत्सव का आयोजन भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत किया जाता है। पिछले तीन दशकों में MIFF दुनिया भर के फिल्म निर्माताओं, कलाकारों और सिनेमा प्रेमियों के लिए एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुका है।

47 देशों से आईं 1,459 फिल्में

MIFF 2026 का 19वां संस्करण दर्शकों को एक समृद्ध और यादगार सिनेमाई अनुभव देने का वादा करता है। इस बार प्रतियोगिता खंड के लिए भारत समेत 47 देशों से कुल 1,459 फिल्म प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं।

फेस्टिवल में भारत की 42 से अधिक भाषाओं और दुनिया के अन्य देशों की 30 से ज्यादा भाषाओं में बनी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह इसकी वैश्विक पहुंच और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।

फेस्टिवल में दुनिया भर के चर्चित फिल्मकारों की डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिक्शन फिल्में, एनीमेशन फिल्में, डेब्यू डायरेक्टर फिल्मों और छात्र फिल्मों को प्रदर्शित किया जाएगा।

इसके अलावा फेस्टिवल के दौरान Doc Bazaar के दूसरे संस्करण का आयोजन किया जाएगा। साथ ही विभिन्न मास्टरक्लास और IDPA Open Forum भी आयोजित होंगे, जो फिल्मकारों और सिनेमा प्रेमियों के बीच रचनात्मक संवाद और सहयोग को बढ़ावा देंगे।

आयोजकों का कहना है कि MIFF 2026 कहानी कहने की कला, रचनात्मकता और सिनेमा के प्रति जुनून का एक अनोखा उत्सव होगा, जहां डॉक्यूमेंट्री, एनीमेशन और शॉर्ट फिक्शन फिल्म निर्माण से जुड़े प्रतिभाशाली लोगों को एक साझा मंच मिलेगा।

19वें MIFF की मीडिया एक्रिडिटेशन पॉलिसी भी आधिकारिक लिंक के माध्यम से देखी जा सकती है-

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/may/doc2026522874701.pdf

 

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एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन के अध्यक्ष बने वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय

एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगरा में आयोजित आमसभा में की घोषणा, दिल्ली में जल्द आयोजित होगी कार्यशाला

Last Modified:
Tuesday, 09 June, 2026
Anil Pandey NUJI

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएफजे) से संबद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) द्वारा स्थापित एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन के अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल पांडेय को नियुक्त किया गया है। वहीं, जनसत्ता के संवाददाता प्रियरंजन को महासचिव चुना गया है।

यह घोषणा आगरा स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जयप्रकाश नारायण सभागार में आयोजित एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन की आमसभा में की गई, जहां पदाधिकारियों एवं गवर्निंग काउंसिल का गठन किया गया।

एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने आमसभा को संबोधित करते हुए संस्था के नए संविधान की जानकारी दी तथा नवगठित पदाधिकारियों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि गवर्निंग काउंसिल में भीष्म सिंह (जमशेदपुर) एवं अनीता चौधरी (दिल्ली) को उपाध्यक्ष, आलोक मोहन नायक को कोषाध्यक्ष तथा गौरव ललित (दिल्ली), विपुल कुमार (हरियाणा), भंवर सिंह (राजस्थान) और राहुल वर्मा (उत्तराखंड) को सचिव नियुक्त किया गया है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि संस्था का नया संविधान औपचारिक रूप से अंगीकृत कर लिया गया है। यह निर्णय 13 सितंबर 2025 को आयोजित कार्यकारी बैठक में लिया गया था। नए संविधान के निर्माण में हरिद्वार में आयोजित एनयूजे (आई) अधिवेशन के दौरान गठित समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति में अनिल पांडेय, दधिबल यादव, मनोज वर्मा, राकेश थपलियाल और अमलेश राजू सहित अन्य सदस्य शामिल थे, जबकि एनयूजे (आई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पदेन सदस्य के रूप में समिति से जुड़े थे।

नए संविधान के अनुसार संस्था में एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, चार संयुक्त/सह सचिव तथा 11 सदस्यीय कार्यकारिणी का प्रावधान किया गया है। गवर्निंग काउंसिल के अन्य सदस्यों में रास बिहारी, प्रदीप तिवारी, राकेश थपलियाल, उषा पहवा, दधिबल यादव, प्रतिभा शुक्ल, सचिन बुधौलिया, डॉ. उमेश पाठक, डॉ. ऋतु दुबे, प्रमोद गोस्वामी (उत्तर प्रदेश) तथा राकेश कुमार सिंह (बिहार) शामिल हैं।

गौरतलब है कि एनयूजे स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन की स्थापना पत्रकारों को आधुनिक तकनीक, डिजिटल मीडिया और मीडिया जगत में हो रहे निरंतर परिवर्तनों की जानकारी एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है। संस्था देशभर में समय-समय पर कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों और मीडिया उन्नयन कार्यक्रमों का आयोजन करती है। इसी क्रम में शीघ्र ही दिल्ली में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

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NUJI के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया शुरू, सात जुलाई तक भरे जाएंगे नामांकन

मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक किंकर ने बताया कि 8 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 25 जुलाई तक नामांकन वापस लिए जा सकते हैं।

Last Modified:
Tuesday, 09 June, 2026
NUJI India

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से संबद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एनयूजेआई के मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक किंकर ने बताया कि एक अध्यक्ष, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, सात उपाध्यक्ष, सात सचिव और 31 कार्यकारिणी के सदस्य पदों के लिए नामांकन 7 जुलाई 2026 को शाम 5 बजे तक भरे जा सकते हैं।

मुख्य चुनाव अधिकारी अशोक किंकर ने जारी बयान में बताया कि चुनाव के पूरे कार्यक्रम की घोषणा आगरा के डा.भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के जयप्रकाश नारायण सभागार में आयोजित एनयूजेआई के राष्ट्रीय अधिवेशन में की गई। उन्होंने बताया कि 8 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 25 जुलाई तक नामांकन वापस लिए जा सकते हैं। सभी पदों के लिए मतदान जयपुर में होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले दिन होगा।

मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि एनयूजेआई की देश के 25 राज्यों में इकाइयां हैं। चुनाव में यूनियन काउंसिल सदस्य और डेलिगेट मतदाता होते हैं। सदस्यता सूची, काउंसिल सदस्य सूची, डेलिगेट सूची और कोटामनी का भुगतान करने वाली राज्य इकाइयों के सदस्य ही चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले पाएंगे।

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BW CFO World Finance Summit 2026: आशीष शेलार होंगे मुख्य अतिथि

नौ जून को मुंबई में होने वाले फाइनेंस लीडरशिप एंड स्ट्रैटेजी समिट में देश के प्रमुख वित्तीय विशेषज्ञ और CFO होंगे शामिल

Last Modified:
Monday, 08 June, 2026
Ashish Shelar

BW CFO World की ओर से 9 जून को मुंबई में ‘9वें फाइनेंस लीडरशिप एंड स्ट्रैटेजी समिट 2026’ और ‘BW CFO World Best CFO & Finance Strategy Excellence Awards 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं सांस्कृतिक मामलों के कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

कार्यक्रम के दौरान आशीष शेलार विभिन्न श्रेणियों में देश के प्रमुख मुख्य वित्तीय अधिकारियों (CFOs) को सम्मानित करेंगे। यह आयोजन भारत के वित्तीय नेतृत्व और रणनीतिक प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ प्रोफेशनल्स के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

BW CFO World Best CFO & Finance Strategy Excellence Awards 2026 के विजेताओं का चयन वित्त, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और नियामकीय क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की जूरी द्वारा किया जाएगा।

आशीष शेलार महाराष्ट्र सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक मामलों के कैबिनेट मंत्री हैं। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता भी हैं और मुंबई भाजपा इकाई के अध्यक्ष होने के साथ-साथ बांद्रा पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। राष्ट्रीय राजनीति और नीतिगत विषयों पर उनकी सक्रिय भागीदारी के अलावा खेलों, विशेष रूप से क्रिकेट प्रशासन, में भी उनकी रुचि है।

समिट में देश के कई प्रमुख वित्तीय विशेषज्ञ, CFO और कॉर्पोरेट रणनीतिकार हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में हो रहे बदलावों, व्यापारिक अनिश्चितताओं, टिकाऊ विकास के लिए CFO की रणनीतियों तथा वर्ष 2026 में CFO से जुड़ी बोर्डरूम अपेक्षाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।

आयोजकों के अनुसार, आज के दौर में CFO की भूमिका केवल वित्तीय अनुशासन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वे व्यवसायिक रणनीति तैयार करने, विकास को गति देने और संस्थानों के लिए दीर्घकालिक मूल्य निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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लोकतंत्र के लिए मीडिया की निष्पक्षता जरूरी: केशव प्रसाद मौर्य

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया का दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक आगरा में संपन्न

Last Modified:
Monday, 08 June, 2026
Keshav Prasad Maurya..

मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। देश में लोकतंत्र के लिए मीडिया की निष्पक्षता होनी जरूरी है। तभी पत्रकारिता एवं पत्रकार समाज मजबूत हो सकेंगे। यह विचार रविवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया’ (NUJI) के दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के दूसरे दिन के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वर्तमान में पत्रकारिता का स्वरूप बदला है। नई पीढ़ी के लोग मोबाइल लेकर मैदान में आ रहे हैं। इनमें से तमाम लोग सिर्फ अपना एजेंडा चलाते हैं। उन्हें वास्तविक पत्रकारिता से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसी पत्रकारिता करने वाले लोगों से बचना होगा।

उन्होंने इस बात की भी चिंता जताई कि अनेक मीडिया हाउस व्यापारिक घरानों के अधीन हैं। ऐसे में पत्रकारिता एवं पत्रकारों पर कई तरह की बंदिशें होने लगी हैं। फिर भी देश में पत्रकारिता सकारात्मक दिशा में है। पत्रकार के हितों एवं मीडिया की मजबूती के लिए सरकार हर संभव मदद करेगी।

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने भी फर्जी पत्रकारों एवं फर्जी पत्रकार संगठनों को लेकर जो चिंता जताई है, उस पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। पत्रकार समाज की मांगों का समाधान करवाया जाएगा। मौर्य ने कहा कि आज दुनिया वैश्विक ऊर्जा के संकट से जूझ रही है लेकिन हमारा देश इसके सामने मजबूती से खड़ा हुआ है। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एनयूजेआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल की बातें हो रही हैं। मीडिया में आपातकाल ज्यादा दिखाई दे रहा है। पत्रकारों की मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। रास बिहारी ने कहा कि पहले राजनीति पर सवाल उठते थे लेकिन अब पत्रकारों पर सवाल उठ रहे हैं जो चिंता का विषय है। सरकार फर्जी पत्रकार एवं फर्जी संगठनों की जांच करवाए।

इस दौरान एनयूजेआई के राष्ट्रीय महासचिव प्रदीप तिवारी ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी। संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रमोद गोस्वामी, यूपी एनयूजेआई के अध्यक्ष सुरेंद्र दुबे ने दो दिवसीय सम्मेलन के बारे में बताया। राजस्थान, बिहार, दिल्ली, उत्तराखंड समेत देश के सभी राज्यों के पदाधिकारियों ने अपने राज्यों की गतिविधियों की जानकारी दी।

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वरिष्ठ पत्रकार गिरिजेश मिश्रा का निधन, मीडिया जगत में शोक की लहर

तबीयत बिगड़ने के बाद मंगलवार की रात गिरिजेश मिश्रा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के गाजीपुर श्मशान घाट में किया गया।

Last Modified:
Sunday, 07 June, 2026
Girijesh Mishra

वरिष्ठ पत्रकार और हिंदी न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) के एग्जिक्यूटिव प्रोड्यूसर गिरिजेश मिश्रा का सात जून को निधन हो गया है। जानकारी के अनुसार, करीब 49 वर्षीय गिरिजेश मिश्रा की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद मंगलवार की रात उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान रविवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

गिरिजेश मिश्रा का अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के गाजीपुर श्मशान घाट में किया गया। वह अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। गिरिजेश मिश्रा के निधन की खबर से पत्रकारिता जगत, सहयोगियों, मित्रों और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर देशभर के पत्रकार, मीडिया प्रोफेशनल्स और उनके करीबी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

गोरखपुर से संबंध रखने वाले गिरिजेश मिश्रा ने पत्रकारिता की दुनिया में अपनी मेहनत, अध्ययनशीलता और शांत स्वभाव के दम पर अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने अपने करियर में आजतक, जी न्यूज, इंडिया न्यूज और TV9 भारतवर्ष जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सहयोगियों के अनुसार, किसी भी विषय पर उनकी गहरी समझ और तथ्यों पर मजबूत पकड़ उन्हें भीड़ से अलग बनाती थी।

सोशल मीडिया पर उनके साथ काम कर चुके पत्रकारों और मित्रों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि गिरिजेश मिश्रा बेहद सरल, सहज और मददगार इंसान थे। वे हर विषय पर धैर्यपूर्वक चर्चा करते थे और अपने अनुभव से युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन करते रहते थे। कई साथियों ने उन्हें पत्रकारिता का चलता-फिरता ज्ञानकोष बताया।

पूर्व सहयोगियों ने भावुक शब्दों में लिखा कि गिरिजेश मिश्रा के साथ बिताए गए वर्षों की यादें हमेशा साथ रहेंगी। किसी ने उन्हें अपना छोटा भाई बताया तो किसी ने कहा कि उनके जाने से जिंदगी का एक अहम हिस्सा हमेशा के लिए खाली हो गया है। गिरिजेश मिश्रा के करीबी सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने संघर्षों के बीच अपनी पहचान बनाई और हमेशा परिवार तथा बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने देखे।

गिरिजेश मिश्रा सिर्फ एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि लेखन और कहानी कहने की कला में भी माहिर थे। पत्रकारिता के साथ-साथ उनकी रुचि फिल्म और टेलीविजन लेखन में भी थी। उनके साथ काम कर चुके लोगों का कहना है कि वह भविष्य में लेखन और रचनात्मक कार्यों को लेकर कई योजनाएं बना रहे थे, हालांकि, उनके असामयिक निधन ने उनके कई सपनों और योजनाओं को अधूरा छोड़ दिया।

उनके निधन पर मीडिया जगत से जुड़े अनेक वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों और साथियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है।

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हैप्पी बर्थडे शाजिया इल्मी: न्यूज रूम से राजनीति तक, साहस व बदलाव की मिसाल हैं आप

शाजिया इल्मी की सबसे बड़ी विशेषता केवल उनके द्वारा संभाले गए पद नहीं हैं, बल्कि समय के साथ खुद को नए रूप में ढालने की उनकी क्षमता है।

Last Modified:
Sunday, 07 June, 2026
Shazia Ilmi

भारतीय जनता पार्टी की नेता, पूर्व पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार शाजिया इल्मी का आज जन्मदिन है। यह अवसर उस शख्सियत के सफर को याद करने का है, जिसने पत्रकारिता, सामाजिक आंदोलन और राजनीति, तीनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। तीन दशकों से अधिक समय में शाजिया इल्मी ने मीडिया, एक्टिविज्म और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न पड़ावों को दृढ़ता, स्पष्टता और साहस के साथ पार किया है।

शाजिया इल्मी का जन्म देश के सबसे पुराने उर्दू अखबारों में से एक ‘सियासत जदीद’ की विरासत वाले परिवार में हुआ। इस अखबार की स्थापना उनके पिता मौलाना इसहाक इल्मी ने की थी। सार्वजनिक जीवन, संवाद और सामाजिक सरोकारों का वातावरण उन्हें बचपन से मिला, लेकिन उन्होंने केवल पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने के बजाय अपनी अलग राह बनाने का फैसला किया।

शिमला, नई दिल्ली, कार्डिफ और न्यूयॉर्क में शिक्षा प्राप्त करने के दौरान उन्होंने केवल शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल नहीं कीं, बल्कि एक ऐसी सोच विकसित की जो संतुलित होने के साथ-साथ बेबाक भी थी। यही गुण आगे चलकर उनकी पेशेवर पहचान का आधार बने।

शाजिया इल्मी ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की। ऐसे समय में जब टेलीविजन न्यूज देश के जनमत को प्रभावित करने वाली एक मजबूत शक्ति के रूप में उभर रहा था, उन्होंने अपनी स्पष्ट और निर्भीक शैली से अलग पहचान बनाई। उन्होंने सिर्फ समाचार पढ़ने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राउंड रिपोर्टिंग की और कठिन विषयों पर खुलकर चर्चा की।

करीब 15 वर्षों तक उन्होंने राजनीतिक संवाददाता और एंकर के रूप में काम किया। इस दौरान ‘स्टार न्यूज’ के साथ उनका कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। पत्रकारिता के इन वर्षों ने उन्हें शासन, नीतियों और जनभावनाओं को करीब से समझने का अवसर दिया, जिसने उनके सार्वजनिक जीवन की अगली यात्रा की मजबूत नींव रखी।

वर्ष 2011 में जब ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन ने देशभर में भ्रष्टाचार के खिलाफ नई चेतना जगाई, तब शाजिया इल्मी ने एंकर की भूमिका से आगे बढ़कर आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में स्थान लिया। जन लोकपाल आंदोलन की प्रमुख आवाजों में शामिल होकर उन्होंने न केवल आंदोलन को मजबूती दी, बल्कि उसकी सार्वजनिक अभिव्यक्ति को भी प्रभावशाली स्वर प्रदान किया।

इसके बाद 2013 में उन्होंने राजनीति में सक्रिय कदम रखा। वह उस आंदोलन का हिस्सा बनीं, जिससे आगे चलकर आम आदमी पार्टी का गठन हुआ। पार्टी की संस्थापक सदस्यों में शामिल शाजिया इल्मी जल्द ही उसके सबसे चर्चित चेहरों में गिनी जाने लगीं। उन्होंने चुनावी राजनीति में भी भाग लिया और सीधे तौर पर जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित किया।

हालांकि उनका राजनीतिक सफर हमेशा सीधा और आसान नहीं रहा। आम आदमी पार्टी से अलग होने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों पर पार्टी की प्रमुख प्रवक्ता और टिप्पणीकार के रूप में अपनी भूमिका विकसित की। बदलते राजनीतिक परिदृश्यों और सार्वजनिक आलोचनाओं के बीच भी वह लोकतांत्रिक विमर्श का सक्रिय हिस्सा बनी रहीं।

शाजिया इल्मी की सबसे बड़ी विशेषता केवल उनके द्वारा संभाले गए पद नहीं हैं, बल्कि समय के साथ खुद को नए रूप में ढालने की उनकी क्षमता है। चाहे टेलीविजन स्टूडियो में बहस हो, राजनीतिक मंच से संबोधन हो या किसी राष्ट्रीय मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा, उन्होंने हमेशा अपने विचारों को स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ रखा है। उनके समर्थक उनकी बेबाकी और दृढ़ता की सराहना करते हैं, जबकि आलोचक भी उनके तर्कों को मजबूती से रखने की क्षमता को स्वीकार करते हैं।

उनका करियर उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है, जिन्होंने परंपरागत रूप से पुरुष-प्रधान माने जाने वाले क्षेत्रों में अपनी जगह बनाई है। मीडिया और राजनीति जैसे दो प्रभावशाली क्षेत्रों में समान आत्मविश्वास के साथ काम करके उन्होंने यह दिखाया है कि उद्देश्य, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर पेशेवर सीमाओं को पार किया जा सकता है।

आज जन्मदिन के अवसर पर शाजिया इल्मी का सफर यह याद दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन में सफलता केवल पदों से नहीं, बल्कि निरंतर सीखने, बदलाव को स्वीकार करने और चुनौतियों का सामना करने के साहस से मिलती है। न्यूज रूम से लेकर राष्ट्रीय राजनीति के मंच तक उनकी यात्रा आज भी समकालीन भारत की चर्चित और प्रेरक सार्वजनिक कहानियों में से एक है।

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लोकतंत्र में चौथे स्तंभ का मजबूत और निष्पक्ष होना जरूरी: डॉ. एसपी सिंह बघेल

नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) का दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आगरा में आयोजित

Last Modified:
Saturday, 06 June, 2026
NUJI Seminar

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से संबद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) का दो दिवसीय राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शनिवार को जेपी ऑडिटोरियम, खंदारी परिसर (भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय) में शुरू हुई। प्रथम दिन के सत्र की शुरुआत केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एसपी सिंह बघेल ने की। सम्मेलन के मुख्य वक्ता उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय एवं विशिष्ट अतिथि एनयूजेआई के राष्ट्रीय महासचिव प्रदीप तिवारी थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनयूजेआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. एसपी बघेल ने कहा कि पत्रकारिता में काफी संभावनाएं हैं। लोकतंत्र के हित में चौथे स्तंभ का मजबूत एवं निष्पक्ष होना जरूरी है। हर फील्ड में परिवर्तन हो रहा है। मीडिया भी इससे अछूता नहीं है। परिवर्तन होना भी चाहिए तभी पत्रकारिता मजबूत बनी रह सकती है।

मुख्य वक्ता योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि आज हर जगह नैतिकता में कमी आई है। चाहे वह कार्यपालिका हो या अन्य स्तंभ। चौथे स्तंभ में भी गिरावट आई है। पत्रकारिता की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिता में निष्पक्षता एवं स्वच्छता जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दो दिवसीय बैठक में पत्रकारिता में आ रही गिरावट एवं पत्रकार हितों के संबंध में गंभीर चिंतन होगा। चिंतन में सामने आई बातों के समाधान के लिए सरकार हर संभव मदद करेगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रास बिहारी एवं विशिष्ट अतिथि प्रदीप तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारिता एवं पत्रकार संकट में हैं। पत्रकारों के सामने सुरक्षा, वेतन भत्ते और रोजगार का गंभीर संकट है। संगठन लगातार पत्रकार हितों के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकार को पत्रकारों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रमोद गोस्वामी ने दो दिवसीय सम्मेलन की जानकारी देते हुए कहा कि लोकतंत्र में मीडिया चौथा स्तंभ है लेकिन पत्रकारों के लिए सुविधाएं नहीं हैं। पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं। पेंशन नहीं मिल रही है। सरकार पत्रकार हितों पर ध्यान नहीं दे रही है।

सम्मेलन के प्रथम सत्र में पत्रकार समाज के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में एनयूजेआई की 25 राज्य इकाइयों के 300 से ज्यादा सदस्य हिस्सा ले रहे हैं।

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