'प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशन लिमिटेड' का बदलेगा नाम, जल्द इस नाम से जानी जाएगी कंपनी

प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशन लिमिटेड (Pritish Nandy Communications Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी का नाम बदलने के प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 07 August, 2026
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Friday, 07 August, 2026
Pritish Nandy Communications Limited


प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशन लिमिटेड (Pritish Nandy Communications Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी का नाम बदलने के प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। अब कंपनी का नया नाम PNC Media and Entertainment Limited होगा। 5 अगस्त 2026 को इस फैसले पर मुहर लगने के साथ ही कंपनी ने अपनी नई पहचान की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। कंपनी का कहना है कि नया नाम उसके मीडिया और मनोरंजन कारोबार को पहले से बेहतर तरीके से दर्शाएगा।

कंपनी के अनुसार, नाम बदलने के प्रस्ताव के पक्ष में 99.98 फीसदी वैध वोट पड़े। इस भारी समर्थन को निवेशकों के कंपनी की नई रणनीति और भविष्य की योजनाओं पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।

यह मतदान SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015 के तहत पोस्टल बैलेट और रिमोट ई-वोटिंग के जरिए कराया गया। ई-वोटिंग प्रक्रिया 7 जुलाई 2026 से शुरू हुई थी और 5 अगस्त 2026 को समाप्त हुई। पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रैक्टिसिंग कंपनी सेक्रेटरी विनायक एन. देवधर ने स्क्रूटिनाइजर के रूप में की।

इस दौरान शेयरधारकों के सामने तीन विशेष प्रस्ताव रखे गए। इनमें कंपनी का नाम बदलकर PNC Media and Entertainment Limited करना, मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में नाम से जुड़े क्लॉज में संशोधन करना और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AOA) में भी नए नाम को शामिल करना शामिल था। तीनों प्रस्ताव लगभग समान समर्थन के साथ पारित हो गए।

कंपनी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, कट-ऑफ तारीख तक उसके कुल 10,730 शेयरधारक थे। इनमें से 76 शेयरधारकों ने मतदान में हिस्सा लिया। वोटिंग करने वाले निवेशकों के पास कुल 96.73 लाख शेयर थे, जिनमें से 99.98 फीसदी यानी 96,71,518 शेयर नाम बदलने के पक्ष में रहे। केवल 1,685 शेयर, यानी 0.02 फीसदी, प्रस्ताव के विरोध में पड़े। कोई भी वोट अमान्य घोषित नहीं हुआ।

कंपनी के प्रमोटर और प्रमोटर समूह, जिनके पास 86.39 लाख शेयर हैं, ने भी सर्वसम्मति से नाम बदलने के प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं, सार्वजनिक निवेशकों का भी लगभग पूरा समर्थन कंपनी को मिला।

स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि सभी प्रस्ताव आवश्यक बहुमत से पारित हो चुके हैं। इसके बाद कंपनी ने इस फैसले की जानकारी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भी दे दी है, जहां कंपनी PNC सिंबल के तहत सूचीबद्ध है।

अब शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद कंपनी नाम परिवर्तन से जुड़ी सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करेगी। इसके तहत वैधानिक रिकॉर्ड में संशोधन किया जाएगा और संबंधित नियामक संस्थाओं को इसकी जानकारी दी जाएगी।

कंपनी का मानना है कि PNC Media and Entertainment Limited नाम अपनाने से उसकी ब्रैंड पहचान और मजबूत होगी तथा मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में उसकी मौजूदगी को नई पहचान मिलेगी। साथ ही, इससे कंपनी की कारोबारी दिशा और सार्वजनिक छवि उसके मुख्य व्यवसाय के अनुरूप और स्पष्ट दिखाई देगी।

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पिछले एक साल में प्रसार भारती की संपादकीय स्वतंत्रता को लेकर नहीं मिली कोई शिकायत: सरकार

यह जानकारी लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने सांसद अधिवक्ता प्रिया सरोज और पुष्पेंद्र सरोज के सवाल के लिखित जवाब में दी।

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Published - Friday, 07 August, 2026
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Friday, 07 August, 2026
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केंद्र सरकार ने कहा है कि पिछले एक वर्ष के दौरान प्रसार भारती की संपादकीय स्वतंत्रता (Editorial Autonomy), नियुक्तियों या सार्वजनिक प्रसारण सेवाओं के कामकाज को लेकर पत्रकारों, कर्मचारियों या किसी मीडिया संगठन की ओर से कोई शिकायत या औपचारिक प्रस्तुति (Representation) प्राप्त नहीं हुई है।

यह जानकारी लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने सांसद अधिवक्ता प्रिया सरोज और पुष्पेंद्र सरोज के सवाल के लिखित जवाब में दी।

BIND योजना को 2027 तक बढ़ाया गया

सरकार ने बताया कि देश में प्रसार भारती के प्रसारण ढांचे के विकास, आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए Broadcasting Infrastructure and Network Development (BIND) योजना चलाई जा रही है। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना वर्ष 2021-26 के लिए मंजूर की गई थी, जिसे अब 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है।

सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत आवंटित बजट, वास्तविक खर्च और राजस्व से जुड़ी जानकारी प्रसार भारती की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

संपादकीय मामलों की नियमित समीक्षा

सरकार ने कहा कि समाचारों की गुणवत्ता, सटीकता, निष्पक्षता और प्रस्तुति सुनिश्चित करने के लिए संपादकीय मामलों की नियमित समीक्षा Editor-in-Chief और वरिष्ठ संपादकीय टीम करती है। जरूरत पड़ने पर समाचारों की गुणवत्ता सुधारने और प्रसार भारती की संपादकीय नीति तथा प्रोग्राम कोड का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और सुधारात्मक कदम भी उठाए जाते हैं।

सरकार ने बताया कि दर्शकों की ओर से मिलने वाली शिकायतों और सुझावों, जिनमें संपादकीय सामग्री से जुड़ी शिकायतें भी शामिल होती हैं, उन्हें संबंधित संपादकीय टीम के पास भेजा जाता है, जहां निर्धारित नीति के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

नियुक्तियों से जुड़ी 7 शिकायतें मिलीं

सरकार के अनुसार, पिछले एक वर्ष में संपादकीय स्वतंत्रता या कार्यप्रणाली से जुड़ी कोई शिकायत नहीं मिली, लेकिन नियुक्तियों से संबंधित 7 शिकायतें आवेदकों की ओर से प्राप्त हुई थीं।

आकाशवाणी की पहुंच 98% आबादी तक

सरकार ने बताया कि आकाशवाणी (Akashvani) की पहुंच देश की लगभग 98 प्रतिशत आबादी और 90 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र तक है। वहीं, DD Free Dish देश के किसी भी हिस्से में बिना किसी सब्सक्रिप्शन शुल्क के देखा जा सकता है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया के आधार पर होता है सुधार

सरकार ने कहा कि प्रसार भारती नियमित रूप से दर्शकों की संख्या (Viewership Data), लोगों की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया एनालिटिक्स की समीक्षा करता है। इन आंकड़ों और सुझावों के आधार पर समाचारों की गुणवत्ता, कंटेंट और प्रस्तुति में लगातार सुधार किया जाता है, ताकि दर्शकों को बेहतर और संतुलित समाचार उपलब्ध कराए जा सकें।

 

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बनारस की आध्यात्मिक चेतना को स्वर देता मनोज भावुक का भोजपुरी भक्ति गीत, हुआ वायरल

सावन के पावन महीने में भगवान शिव और काशी की महिमा पर आधारित भोजपुरी भक्ति गीत 'हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs' तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

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Published - Thursday, 06 August, 2026
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Thursday, 06 August, 2026
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सावन के पावन महीने में भगवान शिव और काशी की महिमा पर आधारित भोजपुरी भक्ति गीत 'हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs' तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। Bhojpuri IT Cell के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुए इस गीत को पहले ही दिन पांच लाख से ज्यादा बार देखा गया। यह गीत बनारस को केवल एक शहर नहीं, बल्कि भक्ति, आध्यात्मिक चेतना और मुक्ति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है।

इस गीत के बोल भोजपुरी के प्रसिद्ध साहित्यकार और गीतकार मनोज भावुक ने लिखे हैं। इसे सुरभि कश्यप और अर्जुन पांडेय ने अपनी आवाज दी है। संगीत भोजपुरी फिल्म जगत के चर्चित संगीतकार रजनीश मिश्रा का है। गीत की परिकल्पना आस्था द्विवेदी ने की है। वीडियो का निर्देशन सुमित तिवारी ने किया है, जबकि छायांकन सुधांशु सिंह ने किया है। वीडियो का निर्माण वन शॉट फिल्म्स के बैनर तले हुआ है और इसके निर्माता शैलेंद्र द्विवेदी हैं।

गीत के बारे में बात करते हुए मनोज भावुक ने कहा कि यह सिर्फ एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि बनारस की उस जीवन-दृष्टि को समर्पित रचना है, जहां शिवत्व, करुणा, वैराग्य और जीवन का उत्सव एक साथ दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि इस गीत के माध्यम से महादेव से प्रार्थना की गई है कि हर व्यक्ति के भीतर भी ऐसा 'बनारस' बस जाए, जहां मन को शांति, संतुलन और आत्मिक आनंद मिल सके।

गीत का मुखड़ा है—

"हे भोले बाबा, हे शंभु बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs,
दुख हो या सुख हो, मस्ती में राखs, जिनगी के नइया पार लगा दs..."

गीत के अंतरों में काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे भारतीय दर्शन के मूल तत्वों का उल्लेख किया गया है। साथ ही लंका चौराहे के प्रतीक के जरिए जीवन के संघर्ष और आध्यात्मिक मार्ग को सरल भोजपुरी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

मनोज भावुक का कहना है कि बनारस केवल एक शहर नहीं, बल्कि मनुष्य की आंतरिक चेतना की वह अवस्था है, जहां भक्ति और वैराग्य का संतुलन मिलता है। उनका मानना है कि भोजपुरी में बनारस की आध्यात्मिक परंपरा पर अपेक्षाकृत कम गीत लिखे गए हैं और यह रचना उसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है।

मनोज भावुक और संगीतकार रजनीश मिश्रा की जोड़ी इससे पहले 'तोर बउरहवा रे माई', 'आपन कहाये वाला के बा', 'दुलहिनिया नाच नचावे' और 'मेरे राम' जैसे कई चर्चित गीत दे चुकी है।

मनोज भावुक ने कहा कि भोजपुरी संगीत की पहचान सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नए गीतों के जरिए सामने लाना समय की जरूरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह गीत शिवभक्तों के साथ-साथ साहित्य और संगीत के गंभीर श्रोताओं के दिलों को भी जरूर छुएगा।

 

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विक्रम सोलर ने हंसवीन कौर को बनाया हेड ऑफ मार्केटिंग

विक्रम सोलर (Vikram Solar) ने हंसवीन कौर (Hansveen Kaur) को Head of Marketing नियुक्त किया है। वह लगभग दो दशक का मार्केटिंग अनुभव लेकर कंपनी से जुड़ी हैं।

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Published - Thursday, 06 August, 2026
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Thursday, 06 August, 2026
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विक्रम सोलर (Vikram Solar) ने हंसवीन कौर (Hansveen Kaur) को हेड ऑफ मार्केटिंग (Head of Marketing) नियुक्त किया है। वह ईजीनोम.एआई (eGenome.ai) और बी'स्पोक वेलनेस (B'spoke Wellness) में वाइस प्रेसिडेंट–ब्रांड मार्केटिंग (Vice President – Brand Marketing) के पद से नई भूमिका में पहुंची हैं।

अपने पिछले कार्यकाल में हंसवीन कौर ने एआई आधारित प्रिवेंटिव हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म (AI-driven Preventive Healthcare Platform) eGenome.ai और इसकी पर्सनलाइज्ड न्यूट्रिशन शाखा B'spoke Wellness के लिए ब्रांड रणनीति का नेतृत्व किया।

इससे पहले वह दो वर्षों तक वोल्टास बेको (Voltas Beko) में हेड ऑफ ब्रांड मैनेजमेंट एंड डिजिटल मार्केटिंग (Head of Brand Management & Digital Marketing) के रूप में कार्यरत रहीं। उनके पास मार्केटिंग क्षेत्र में लगभग दो दशक का अनुभव है।

अपने करियर के दौरान हंसवीन कौर ने एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (LG Electronics), वीडियोकॉन (Videocon), इंगरसोल रैंड (Ingersoll Rand) और मॉम्सप्रेसो (Momspresso) जैसी कंपनियों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। विक्रम सोलर के साथ उनकी यह नियुक्ति स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) क्षेत्र में उनकी पहली पेशेवर पारी होगी।

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संसद में MIB का जवाब : प्रसार भारती की स्वायत्तता पर कोई शिकायत नहीं

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि पिछले एक वर्ष में प्रसार भारती की स्वायत्तता या संपादकीय कार्यप्रणाली को लेकर कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली।

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Published - Wednesday, 05 August, 2026
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Wednesday, 05 August, 2026
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने संसद को बताया है कि पिछले एक वर्ष के दौरान सार्वजनिक प्रसारकों की स्वायत्तता, नियुक्तियों या संपादकीय कार्यप्रणाली को लेकर किसी पत्रकार, कर्मचारी या मीडिया संगठन की ओर से कोई औपचारिक शिकायत या प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं हुआ। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि प्रसार भारती में संपादकीय निर्णयों की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है, ताकि वे संपादकीय नीतियों और प्रोग्राम कोड के अनुरूप रहें।

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क डेवलपमेंट (BIND) योजना को 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य देशभर में प्रसार भारती के प्रसारण ढांचे का आधुनिकीकरण और विस्तार करना है।

मंत्रालय के अनुसार, दर्शकों की शिकायतों और सुझावों को संबंधित संपादकीय टीमों के पास कार्रवाई के लिए भेजा जाता है तथा समाचारों की गुणवत्ता, सटीकता, संतुलन और प्रस्तुति में सुधार के लिए नियमित समीक्षा की जाती है। हालांकि, सरकार ने संपादकीय पक्षपात या स्वतंत्रता से जुड़ी शिकायतों की संख्या या आंतरिक जांच के निष्कर्ष साझा नहीं किए।

मंत्रालय ने बताया कि नियुक्तियों से संबंधित केवल सात शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि स्वायत्तता या संपादकीय स्वतंत्रता से जुड़ी कोई शिकायत नहीं आई। सरकार के अनुसार, आकाशवाणी देश की लगभग 98% आबादी और 90% भौगोलिक क्षेत्र तक पहुंच रखती है, जबकि डीडी फ्री डिश देश का सबसे बड़ा मुफ्त डीटीएच प्लेटफॉर्म बना हुआ है।

मंत्रालय ने कहा कि प्रसार भारती नियमित रूप से दर्शकों के फीडबैक, व्यूअरशिप डेटा और सोशल मीडिया विश्लेषण के आधार पर अपने कार्यक्रमों में सुधार करता है। हालांकि, सरकार ने सार्वजनिक प्रसारकों की विश्वसनीयता, दर्शक हिस्सेदारी या प्रदर्शन से जुड़े किसी स्वतंत्र सर्वेक्षण या ऑडिट का विवरण संसद में उपलब्ध नहीं कराया।

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मीडिया की निष्पक्षता पर बहस नई नहीं, हर दौर में उठे विश्वसनीयता के सवाल: वाशिंद्र मिश्र

न्यूज इंडिया 24X7 के डायरेक्टर (न्यूज) वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि मीडिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पत्रकारिता के तौर-तरीकों पर जो बहस आज हो रही है, वह नई नहीं है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
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Wednesday, 05 August, 2026
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समाचार4मीडिया के 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में न्यूज इंडिया 24X7 के डायरेक्टर (न्यूज) वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि मीडिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पत्रकारिता के तौर-तरीकों पर जो बहस आज हो रही है, वह नई नहीं है। उनके मुताबिक, पत्रकारिता के लगभग हर दौर में ऐसे सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज जंतर-मंतर की घटना को लेकर जिस तरह की चर्चा हो रही है, वैसी ही बहसें पहले भी कई बड़े घटनाक्रमों के बाद होती रही हैं, लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है और पत्रकारिता फिर आगे बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम में थोड़ी देर से पहुंचे क्योंकि बारिश की वजह से रास्ते में देर हो गई थी। सुबह से लगातार जंतर-मंतर की घटना पर चर्चा हो रही थी और कई वरिष्ठ पत्रकार इस विषय पर अपनी बात रख चुके थे। इसी वजह से उन्होंने अपनी बात वर्तमान से नहीं, बल्कि अतीत से शुरू करने का फैसला किया।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि वह सभी को वर्ष 1989 में ले जाना चाहते हैं, जब अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान गोलीबारी हुई थी। उस घटना में कई लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे। उन्होंने बताया कि उस समय देश में प्रिंट मीडिया का दौर था। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अंग्रेजी अखबारों से की थी और करीब 18 वर्षों तक टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और अमर उजाला जैसे संस्थानों में काम किया। इसलिए उन्होंने उस दौर की पत्रकारिता को बहुत करीब से देखा है।

उन्होंने कहा कि उस समय न सोशल मीडिया था और न ही आज जैसी डिजिटल तकनीक। मौके पर मौजूद पत्रकार ही घटनाओं की रिपोर्टिंग करते थे और पूरी दुनिया की नजर उन्हीं की खबरों पर होती थी। इसी दौरान कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों ने अयोध्या गोलीकांड की रिपोर्टिंग करते हुए यह खबर प्रकाशित की कि इतने लोग मारे गए कि सरयू नदी का पानी खून से लाल हो गया। यह खबर बड़े-बड़े बैनर हेडलाइन के रूप में प्रकाशित हुई।

वाशिंद्र मिश्र ने बताया कि उस समय प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया काफी प्रभावशाली संस्था मानी जाती थी। सरकार और कई अन्य संगठनों ने प्रेस काउंसिल में शिकायत की कि इस तरह की रिपोर्टिंग से समाज में गलत संदेश जा रहा है और तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। इसके बाद इस पूरे मामले की लंबे समय तक जांच हुई। एडिटर्स गिल्ड सहित कई पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी और इस मुद्दे पर वर्षों तक बहस चलती रही।

उन्होंने कहा कि आखिरकार उस बहस का भी वही हुआ जो आज जंतर-मंतर की घटना को लेकर हो रही चर्चा का भविष्य हो सकता है। कुछ समय बाद लोग उस घटना को भी भूल गए और पत्रकारिता आगे बढ़ गई।

अपने संबोधन में वाशिंद्र मिश्र ने वर्ष 1992 की अयोध्या घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद या विवादित ढांचा गिराया गया, तब वहां रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को भीड़ ने पकड़-पकड़कर पीटा। कई पत्रकार गंभीर रूप से घायल हुए। इस घटना की पूरे देश और दुनिया में निंदा हुई। इस पर भी कई वर्षों तक सेमिनार, संगोष्ठियां और बहसें होती रहीं, लेकिन धीरे-धीरे लोग इस घटना को भी भूल गए और पत्रकारिता का सफर आगे बढ़ता रहा।

उन्होंने कहा कि इसके बाद पत्रकारिता में पेड न्यूज का दौर आया। चुनावों के दौरान पैसे लेकर खबरें प्रकाशित करने और उम्मीदवारों या राजनीतिक दलों के पक्ष में सामग्री छापने को लेकर देशभर में बड़ी बहस छिड़ गई। इस मुद्दे को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी गंभीरता से लिया। इसके लिए अलग-अलग समितियां बनाई गईं और कई संस्थाओं ने इस विषय पर चर्चा और सेमिनार आयोजित किए।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि जिन मीडिया संस्थानों के मालिकों और संपादकों पर पेड न्यूज के आरोप लगे या जो इस मामले में पकड़े गए, उनके प्रभाव या स्थिति पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा। वे उस समय भी प्रभावशाली थे और आज भी अपनी जगह बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इसके बाद जब टीवी पत्रकारिता का दौर तेजी से आगे बढ़ा तो वह खुद 1999 में अखबार छोड़कर टीवी मीडिया में आ गए। कुछ वर्षों बाद टीवी पत्रकारिता को लेकर शिकायतें आने लगीं कि कई चैनल जिम्मेदार पत्रकारिता के मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग से माहौल खराब हो रहा है।

उन्होंने बताया कि इन्हीं शिकायतों को देखते हुए टीवी समाचार चैनलों के लिए एनबीएसए (News Broadcasting Standards Authority) जैसी नियामक संस्था बनाई गई। बाद में इसके स्वरूप में बदलाव हुआ और यह एनबीडीए (News Broadcasters & Digital Association) के रूप में सामने आई।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि इन संस्थाओं में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को अध्यक्ष बनाया जाता था। समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और वरिष्ठ संपादक भी इन समितियों का हिस्सा होते थे। हर बैठक में उन समाचार चैनलों और संपादकों की शिकायतों पर सुनवाई होती थी जिन्होंने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन किया होता था।

उन्होंने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले चैनलों और संपादकों को फटकार लगाई जाती थी और उन पर प्रतीकात्मक जुर्माना भी लगाया जाता था। लेकिन बैठक खत्म होने के बाद कई बार वही संस्थान फिर पहले जैसी गलतियां दोहराने लगते थे और अगली बैठक में फिर उन्हें नोटिस और फटकार का सामना करना पड़ता था।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि बाद में जब डिजिटल मीडिया तेजी से बढ़ा तो यह मांग उठी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जाए। इसके बाद नियामक व्यवस्था का विस्तार किया गया और डिजिटल मीडिया को भी उसके दायरे में लाया गया।

उन्होंने कहा कि वह खुद को इस मामले में सौभाग्यशाली मानते हैं क्योंकि उन्हें प्रिंट, टीवी और डिजिटल- तीनों दौर की पत्रकारिता को करीब से देखने और इन नियामक समितियों में संपादक के रूप में सदस्य रहने का अवसर मिला। उनके मुताबिक, आज टीवी और सोशल मीडिया में कितनी जिम्मेदार पत्रकारिता हो रही है, इस पर चर्चा लगातार हो रही है, लेकिन पत्रकारिता की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर सवाल कोई नई बात नहीं है। यह बहस दशकों से चलती आ रही है और समय के साथ सिर्फ उसका स्वरूप बदलता रहा है।

वाशिंद्र मिश्र ने आगे कहा कि मीडिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और किसी सरकार के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने को लेकर जो बहस आज हो रही है, वह कोई नई बात नहीं है। उनके मुताबिक, पत्रकारिता में आने के बाद से ही वह इस तरह की चर्चाएं सुनते और देखते आए हैं। समय के साथ केवल बहस का स्वरूप बदला है, लेकिन सवाल वही बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आज 'गोदी मीडिया' और 'दरबारी मीडिया' जैसे शब्दों का इस्तेमाल खूब होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने न्यूजरूम या अपनी लेखनी में कभी 'गोदी मीडिया' जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते। हालांकि कार्यक्रम में इस विषय का जिक्र हुआ, इसलिए उन्होंने उसी संदर्भ में अपनी बात रखी।

वाशिंद्र मिश्र ने पूरे सम्मान के साथ कहा कि आज जिन वरिष्ठ पत्रकारों की चर्चा होती है, उनमें से कई ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने पहले की सरकारों के दौर में सत्ता के पक्ष में लगातार लिखा। उस समय प्रिंट मीडिया का प्रभाव सबसे ज्यादा था और अनेक पत्रकार सरकारों के समर्थन में लेख लिखते थे। उन्होंने कहा कि वह पूरे देश के ऐसे दर्जनों उदाहरण दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उस दौर में भी सत्ता के करीब रहने वाले पत्रकारों को पद्मश्री, पद्म विभूषण जैसे सम्मान दिए गए। इतना ही नहीं, उन्हें विभिन्न सरकारी नियामक संस्थाओं में नामित किया गया और कई पत्रकारों को विधान परिषद (एमएलसी) तथा राज्यसभा का सदस्य भी बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला सिर्फ पहले नहीं था, बल्कि 2014 के बाद भी कई संपादकों और मीडिया मालिकों को राज्यसभा सहित विभिन्न जिम्मेदारियां मिली हैं।

वाशिंद्र मिश्र ने बिहार और झारखंड में सामने आए चारा घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि उस मामले को उजागर करने वाले कुछ पत्रकार बाद में राज्यसभा भी पहुंचे। उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार किया, लेकिन कहा कि ऐसे लोग आज भी राज्यसभा में मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें केवल निष्पक्ष पत्रकारिता के कारण यह जिम्मेदारी मिली या उसके पीछे अन्य कारण भी थे। उनका कहना था कि यह सवाल हर दौर में पूछा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर ऐसे भी अनेक पत्रकार हैं जिन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से पत्रकारिता की, लेकिन आज उनके सामने सबसे बड़ा संकट अपने अस्तित्व और रोजगार का है। उन्हें नौकरी तक नहीं मिल रही है। अगर वे पूरी ईमानदारी से काम करना चाहें तो कई संस्थानों में उन्हें काम करने ही नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि आज नैतिकता, पत्रकारिता के मूल्यों और मीडिया को सही दिशा देने की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लोगों का भी रिकॉर्ड देखा जाना चाहिए। यह देखना जरूरी है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कैसे की थी और बाद में वे राज्यसभा या अन्य बड़े पदों तक कैसे पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि क्या वे पूरी तरह निष्पक्ष पत्रकारिता के दम पर वहां पहुंचे या उसके पीछे अन्य कारण भी रहे।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि वह ऐसे कई नेताओं और अधिकारियों को जानते हैं जो वास्तव में निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों से दूरी बनाकर रखते हैं। ऐसे पत्रकारों को कई बार उनके दफ्तरों और घरों तक में प्रवेश नहीं मिलता। राजनीतिक दल भी ऐसे पत्रकारों से दूरी बनाए रखते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यदि कोई पत्रकार पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा चुका है तो वह भविष्य में भी किसी के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

उन्होंने बताया कि वह कई ऐसे पत्रकारों को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं जिन्होंने नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जनहित याचिकाएं (PIL) दायर कीं। बाद में सरकारें बदल गईं, लेकिन नए सत्ता पक्ष ने भी अपने लोगों से कहा कि ऐसे पत्रकारों से दूरी बनाए रखें क्योंकि वे किसी के भी खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वास्तव में निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता से केवल नेता या अधिकारी ही नहीं, बल्कि पूरा सिस्टम असहज हो जाता है। व्यवस्था को अक्सर ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो किसी न किसी पक्ष के साथ खड़े हों। लेकिन जो पत्रकार बीच का रास्ता अपनाकर सच को सच और गलत को गलत कहने की कोशिश करता है, वह न पहले पसंद किया जाता था और न आज पसंद किया जाता है।

वाशिंद्र मिश्र ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 2014 से पहले वह और वरिष्ठ पत्रकार सुधीर एक ही मीडिया समूह में साथ काम करते थे। उस समय वह समूह के सभी क्षेत्रीय चैनलों के संपादक थे, जबकि सुधीर उसी समूह के राष्ट्रीय चैनल के संपादक थे। उन्होंने संस्थान का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि उस दौर को उन्होंने बहुत करीब से देखा है।

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले एक बड़ा नैरेटिव तैयार किया गया था कि असली आजादी तब मिलेगी जब सरकार बदलेगी। यह कहा गया कि 1947 से लेकर 2014 तक देश को गरीबी, बेरोजगारी और अव्यवस्था से वास्तविक मुक्ति नहीं मिली है। मीडिया के एक बड़े हिस्से ने भी इसी नैरेटिव को आगे बढ़ाया और उसे मजबूत करने का काम किया।

उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि 2014 के बाद जिस बदलाव की बात कही गई थी, उसका रिपोर्ट कार्ड कौन तैयार करेगा। यह भी पूछा जाना चाहिए कि जिन वादों और अभियानों को आगे बढ़ाया गया था, उनमें से कितना पूरा हुआ, कितना बाकी है और जिन लक्ष्यों की बात की गई थी, उन्हें हासिल करने में अभी कितना समय लगेगा। उनके मुताबिक, यदि पहले की सरकारों का मूल्यांकन हो सकता है तो बाद की सरकारों का भी उसी पैमाने पर आकलन होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज का दौर अवसरों का अधिकतम लाभ उठाकर अपना-अपना एजेंडा आगे बढ़ाने का दौर बन गया है। 2014 से पहले विपक्ष में रही पार्टियों ने जो बड़े-बड़े वादे किए थे, उनका भी रिपोर्ट कार्ड आज जनता के सामने है। उसी तरह 1947 से 2014 तक सत्ता में रही सरकारों का मूल्यांकन भी लोगों के सामने है। उनका मानना है कि यही स्थिति मीडिया पर भी लागू होती है।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि उन्हें निकट भविष्य में कोई बहुत बड़ा क्रांतिकारी बदलाव दिखाई नहीं देता। जब तक समाज रहेगा और उसकी जरूरतें बनी रहेंगी, तब तक मीडिया भी इसी तरह चलता रहेगा। इसलिए 'दरबारी मीडिया' या 'गोदी मीडिया' की बहस को केवल वर्तमान तक सीमित नहीं देखना चाहिए। यह हर दौर में अलग-अलग रूप में मौजूद रही है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि पहले के समय में कई बड़े संपादक सत्ता के करीब रहे और उन्हें विधान परिषद या राज्यसभा जैसी जिम्मेदारियां मिलीं। उस समय यह जानकारी आसानी से लोगों तक नहीं पहुंचती थी क्योंकि सोशल मीडिया नहीं था। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। अब सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए युवा किसी भी पत्रकार या सार्वजनिक व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड आसानी से देख सकते हैं और यह पता लगा सकते हैं कि वह किस दौर में किस भूमिका में रहा। इसी वजह से अब हर व्यक्ति के काम और उसके इतिहास की जांच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गई है।

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जी एंटरटेनमेंट ने प्रशांत शेट्टी को सौंपी विज्ञापन कारोबार की कमान

जी एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment) ने प्रशांत शेट्टी को Head – Advertisement Revenue, Broadcast & Digital नियुक्त किया है। वह प्रसारण और Zee5 के विज्ञापन कारोबार को नई दिशा देंगे।

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Published - Tuesday, 04 August, 2026
Last Modified:
Tuesday, 04 August, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd-ZEEL) ने प्रशांत शेट्टी (Prashant Shetty) को हेड–एडवर्टाइजमेंट रेवेन्यू, ब्रॉडकास्ट एंड डिजिटल (Head – Advertisement Revenue, Broadcast & Digital) नियुक्त किया है। वह मुंबई स्थित कंपनी मुख्यालय से कार्य करेंगे और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर–एडवर्टाइजमेंट रेवेन्यू (Chief Operating Officer – Advertisement Revenue) संदीप मेहरोत्रा (Sandeep Mehrotra) को रिपोर्ट करेंगे।

नई भूमिका में प्रशांत शेट्टी कंपनी के लीनियर टेलीविजन (Linear Television) और जी5 (Zee5) के विज्ञापन कारोबार को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनका फोकस विज्ञापन राजस्व बढ़ाने, रणनीतिक क्लाइंट साझेदारियों को मजबूत करने, बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर नए मुद्रीकरण (Monetisation) अवसर विकसित करने पर रहेगा।

प्रशांत शेट्टी कंपनी की एकीकृत बिक्री रणनीति (Integrated Sales Strategy) को भी आगे बढ़ाएंगे। इसके तहत ब्रॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बेहतर समन्वय के जरिए विज्ञापनदाताओं और ब्रांड्स को व्यापक समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे। यह रणनीति कंपनी की ओम्नी-चैनल (Omni-channel) कारोबारी योजना के अनुरूप होगी।

प्रशांत शेट्टी मीडिया और विज्ञापन उद्योग में लंबे अनुभव के साथ Zee Entertainment से जुड़े हैं। उनसे कंपनी को अपने प्रसारण और डिजिटल विज्ञापन कारोबार को नई गति देने तथा विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर राजस्व वृद्धि को मजबूत करने की उम्मीद है।

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डब्ल्यूपीपी प्रोडक्शन इंडिया के नए CEO बने सतीश नायर

डब्ल्यूपीपी प्रोडक्शन (WPP Production) इंडिया ने सतीश नायर (Satish Nair) को नया CEO नियुक्त किया है। वह कार्तिक नागराजन (Karthik Nagarajan) की जगह कंपनी का नेतृत्व संभालेंगे।

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Published - Tuesday, 04 August, 2026
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Tuesday, 04 August, 2026
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डब्ल्यूपीपी प्रोडक्शन (WPP Production) इंडिया ने सतीश नायर (Satish Nair) को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) नियुक्त किया है। वह कार्तिक नागराजन (Karthik Nagarajan) का स्थान लेंगे, जिन्होंने लगभग चार वर्षों के कार्यकाल के बाद कंपनी छोड़ने का फैसला किया है।

सतीश नायर (Satish Nair) के पास 25 वर्षों का पेशेवर अनुभव है, जिसमें से 15 वर्ष उन्होंने WPP Production (पूर्व में हॉगार्थ-Hogarth) के साथ बिताए हैं। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom), वैश्विक बाजारों और भारत में कंपनी के लिए उत्पादन मॉडल (Production Models) को विकसित करने और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन (Business Transformation) को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अपने करियर के दौरान सतीश नायर ने द कोका-कोला कंपनी (The Coca-Cola Company-TCCC), फोर्ड (Ford) और डियाजियो (Diageo) जैसे वैश्विक ग्राहकों के साथ प्रमुख साझेदारियों का नेतृत्व किया। हाल ही में वह लंदन (London) में ग्लोबल चीफ ग्रोथ ऑफिसर (Global Chief Growth Officer) के रूप में कार्यरत थे। इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के लिए चीफ क्लाइंट ऑफिसर (Chief Client Officer) की जिम्मेदारी संभाली।

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जन्मदिन विशेष: डॉ. राजी एम. शिंदे की दूरदृष्टि ने बदली पंजाबी मीडिया की तस्वीर

डॉ. शिंदे ने उस समय पंजाबी टेलीविजन की संभावनाओं को पहचाना, जब राष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर्स का फोकस मुख्य रूप से हिंदी कार्यक्रमों पर था।

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Published - Monday, 03 August, 2026
Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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‘पीटीसी एंटरटेनमेंट चैनल्स’ (PTC Entertainment Channels) की चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित डॉ. राजी एम. शिंदे का आज जन्मदिन है। क्षेत्रीय भाषा के कंटेंट को वैश्विक पहचान दिलाने वाले चुनिंदा मीडिया प्रोफेशनल्स में शामिल डॉ. शिंदे ने उस समय पंजाबी टेलीविजन की संभावनाओं को पहचाना, जब राष्ट्रीय ब्रॉडकास्टर्स का फोकस मुख्य रूप से हिंदी कार्यक्रमों पर था। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने पंजाबी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डॉ. राजी एम. शिंदे को आधुनिक पंजाबी ब्रॉडकास्टिंग जगत की प्रमुख हस्तियों में गिना जाता है। उन्होंने अपने लंबे करियर में कई टेलीविजन नेटवर्क की स्थापना और विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। साथ ही ऐसे एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म्स तैयार किए, जिनकी बदौलत पंजाबी संगीत, फिल्म और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।

उनकी मीडिया यात्रा 'पंजाबी वर्ल्ड' के शुभारंभ से शुरू हुई। इस पहल ने पंजाबी भाषा, संस्कृति और मनोरंजन को एक समर्पित मंच दिया। इस चैनल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हरमंदिर साहिब से लाइव गुरबाणी का प्रसारण था, जिसके माध्यम से भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और न्यूजीलैंड में रहने वाले लाखों लोग अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़े रहे।

इसके बाद डॉ. शिंदे ने ज़ी पंजाबी (Zee Punjabi) और ईटीसी पंजाबी (ETC Punjabi) जैसे प्रमुख मीडिया ब्रैंड्स को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने पीटीसी नेटवर्क (PTC Network) को स्थापित करने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आज दुनिया के प्रमुख पंजाबी मीडिया समूहों में गिना जाता है।

ईटीसी पंजाबी में बिजनेस हेड के रूप में उन्होंने भारत का पहला पंजाबी म्यूजिक टेलीविजन चैनल लॉन्च किया। उस दौर में पंजाबी संगीत के लिए समर्पित प्रसारण मंच बेहद सीमित थे। इसके बाद उन्होंने जी पंजाबी में कंटेंट स्ट्रैटेजी और क्रिएटिव दिशा का नेतृत्व करते हुए क्षेत्रीय कार्यक्रमों की पहुंच को और व्यापक बनाया।

क्षेत्रीय मीडिया से आगे बढ़ते हुए उन्होंने चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर के रूप में ईपीआईसी ग्रुप (EPIC Group) के तहत शोबॉक्स चैनल (Showbox Channel) की शुरुआत भी की। इस पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर एक म्यूजिक टेलीविजन प्लेटफॉर्म स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।

पीटीसी नेटवर्क में उनके नेतृत्व के दौरान संगठन ने एक वैश्विक मीडिया कंपनी के रूप में अपनी पहचान बनाई। पीटीसी पंजाबी (PTC Punjabi) दुनिया के सबसे चर्चित पंजाबी टेलीविजन चैनलों में शामिल हुआ, जिसने विभिन्न देशों में दर्शकों तक पंजाबी संगीत, सिनेमा, लाइफस्टाइल और संस्कृति को पहुंचाया।

डॉ. राजी एम. शिंदे ने केवल टेलीविजन चैनलों के निर्माण तक ही अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी। उन्होंने पंजाबी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के पहले रियलिटी टीवी शो की शुरुआत की, जिससे उभरते गायकों, कलाकारों और मनोरंजन जगत की नई प्रतिभाओं को अपनी पहचान बनाने का मंच मिला।

इसके अलावा उन्होंने पंजाबी म्यूजिक अवॉर्ड्स और पंजाबी फिल्म अवॉर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित मंचों की भी स्थापना की। इन आयोजनों ने पंजाबी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को नई पेशेवर पहचान देने के साथ-साथ कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान किया।

डॉ. राजी एम. शिंदे का पूरा करियर ऐसे टेलीविजन चैनलों, मनोरंजन प्रारूपों और संस्थागत मंचों के निर्माण का उदाहरण है, जिन्होंने पंजाबी मीडिया की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका योगदान केवल प्रसारण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने क्षेत्रीय कंटेंट को व्यावसायिक रूप से सफल और वैश्विक स्तर पर विस्तार योग्य मॉडल के रूप में स्थापित करने में भी अहम योगदान दिया।

उनके प्रयासों से पंजाबी कलाकारों, फिल्मकारों और कहानीकारों की कई पीढ़ियों को अपनी प्रतिभा दुनिया तक पहुंचाने का मजबूत मंच मिला। समाचार4मीडिया की ओर से डॉ. राजी एम. शिंदे को जन्मदिन की ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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वरिष्ठ पत्रकार भूपेंद्र चौबे की मां सीमा चौबे का निधन

करीब 73 वर्षीय सीमा चौबे कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। नोएडा स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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Published - Monday, 03 August, 2026
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Monday, 03 August, 2026
Seema Chaubey Death

वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'द स्क्विरल्स' (The Squirrels) के को-फाउंडर और एडिटर-इन-चीफ भूपेंद्र चौबे की माताजी सीमा चौबे का निधन हो गया है। करीब 73 वर्षीय सीमा चौबे कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। सीमा चौबे के निधन से परिवार के साथ-साथ मीडिया जगत में भी शोक की लहर है।

परिवार की ओर से जारी शोक संदेश के अनुसार, सीमा चौबे का जन्म 15 नवंबर 1952 को हुआ था और उनका निधन 2 अगस्त 2026 को हुआ। वह स्वर्गीय डॉ. इंद्रजीत चौबे की पत्नी थीं।

जारी सूचना के मुताबिक, अंतिम दर्शन के लिए सीमा चौबे के पार्थिव शरीर को एफ-13, सेक्टर-20, नोएडा-201301 स्थित आवास पर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक रखा गया। इसके बाद दोपहर 1 बजे सेक्टर-94, नोएडा स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

समाचार4मीडिया परिवार दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करता है और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है।

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जन्मदिन विशेष: सिर्फ कॉमेडियन नहीं, विज्ञापनों के भी सुपरस्टार हैं सुनील ग्रोवर

'गुत्थी' जैसे लोकप्रिय किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले सुनील ग्रोवर ने कई ऐसे विज्ञापनों में काम किया है, जिन्हें आज भी दर्शक याद करते हैं।

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Published - Monday, 03 August, 2026
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Monday, 03 August, 2026
Sunil Grover Birthday

अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग और अलग-अलग किरदारों से दर्शकों का दिल जीतने वाले अभिनेता और कॉमेडियन सुनील ग्रोवर का आज जन्मदिन है। सुनील ग्रोवर का नाम सिर्फ टीवी और फिल्मों तक सीमित नहीं है, विज्ञापन जगत में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। जहां ज्यादातर सेलिब्रिटी विज्ञापनों में अपने असली अंदाज में नजर आते हैं, वहीं सुनील ग्रोवर हर बार किसी नए किरदार में दिखाई देते हैं। यही वजह है कि बड़े ब्रैंड्स उन्हें सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि ऐसे कलाकार के रूप में देखते हैं जो अपने अभिनय से विज्ञापन को यादगार बना देते हैं।

यह भी पढ़ें: 'गुत्थी' बनने से पहले की कहानी, जानिए सुनील ग्रोवर की जिंदगी के 10 अनसुने पहलू

'गुत्थी' जैसे लोकप्रिय किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले सुनील ग्रोवर ने कई ऐसे विज्ञापनों में काम किया है, जिन्हें आज भी दर्शक याद करते हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके पांच ऐसे विज्ञापन कैंपेन के बारे में, जिन्होंने मार्केटिंग की दुनिया में भी अपनी खास छाप छोड़ी।

Figaro Olive Oil: पांच किरदार, एक संदेश: इस साल Figaro Olive Oil ने अपनी नई ब्रैंड आइडेंटिटी के साथ एक विज्ञापन कैंपेन शुरू किया, जिसमें सुनील ग्रोवर एक साथ पांच अलग-अलग किरदार निभाते नजर आए। कहानी एक फिल्म की शूटिंग के दौरान घटती है, जहां उनके लगातार बदलते किरदार सभी को हैरान कर देते हैं।

विज्ञापन का मुख्य संदेश यह है कि जिस तरह सुनील ग्रोवर कई भूमिकाएं आसानी से निभा लेते हैं, उसी तरह Figaro Olive Oil भी कई तरह के उपयोग के लिए उपयुक्त है। कंपनी Deoleo के नए ब्रैंडिंग अभियान का यह हिस्सा था, जिसमें प्रॉडक्ट की खूबियां पारंपरिक तरीके से बताने के बजाय मनोरंजक अंदाज अपनाया गया।

Goibibo की 'Dealpanti' में बने डोनाल्ड ट्रंप: Goibibo के 'Dealpanti' अभियान में सुनील ग्रोवर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मजेदार नकल करते हुए होटल की कीमतों पर बहस करने वाला किरदार निभाया। इसके बाद क्रिकेटर ऋषभ पंत 'Dealpanti' का संदेश लेकर सामने आते हैं। इस डिजिटल अभियान की खासियत यह रही कि इसमें सुनील ग्रोवर और कॉमेडियन किकू शारदा दोनों ने अपने-अपने हास्य किरदारों से मनोरंजन किया, जबकि ब्रैंड का संदेश यात्रा में बचत पर केंद्रित रहा।

Airtel x Adobe Express: डिजाइन को बनाया आसान:  Airtel और Adobe Express के 'झटपट फटाफट' अभियान में सुनील ग्रोवर एक स्वयंभू पारिवारिक ज्योतिषी के किरदार में नजर आते हैं। वह एक शादी के निमंत्रण कार्ड की डिजाइन की आलोचना करते हैं और फिर गर्व से बताते हैं कि उन्होंने अपना कार्ड Adobe Express से तैयार किया है।

इस अभियान का उद्देश्य यह दिखाना था कि डिजाइनिंग सिर्फ पेशेवरों का काम नहीं, बल्कि आम लोग भी रोजमर्रा के कामों के लिए इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। बाद में इस अभियान का विस्तार जन्मदिन की शुभकामनाओं, मीम्स, व्हाट्सऐप क्रिएटिव, पार्टी निमंत्रण और छोटे कारोबारों के प्रचार सामग्री तक किया गया।

Mentos: 'एंग्री चिकन डैड' की आवाज बनी पहचान:  Perfetti Van Melle के Mentos के '#FarakPadega' अभियान में सुनील ग्रोवर ने गुस्सैल मुर्गे (Angry Chicken Dad) की आवाज दी। विज्ञापन में मुर्गा अपने बच्चे को पढ़ाई को लेकर डांटता है। इसी दौरान कोई उसे Mentos ऑफर करता है, लेकिन वह मशहूर संवाद बोलता है— "इनको फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आपको #FarakPadega."

इस विज्ञापन की खास बात यह थी कि इसमें उत्पाद को किसी समस्या का समाधान बताने के बजाय हास्य के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया गया। यही वजह रही कि यह विज्ञापन बाद में सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम रील्स और मीम पेजों पर भी खूब लोकप्रिय हुआ।

Kurkure: जूही चावला के साथ कॉमेडी का तड़का: OTT और रील्स के दौर से पहले ही सुनील ग्रोवर Kurkure के टीवी विज्ञापनों के जरिए दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो चुके थे। इन विज्ञापनों में वह अभिनेत्री जूही चावला के साथ नजर आए और अपने मजेदार हाव-भाव व कॉमिक अंदाज से की चुलबुली पहचान को मजबूत किया।

इन कैंपेन में उन्होंने किसी पारंपरिक ब्रैंड एंबेसडर की तरह नहीं, बल्कि आम लोगों से जुड़े हास्यपूर्ण किरदार निभाए। यही वजह रही कि विज्ञापन मनोरंजक होने के साथ-साथ ब्रैंड का संदेश भी दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचा।

किरदार याद रहते हैं, इसलिए याद रहते हैं ब्रैंड:  आज के दौर में जहां कई विज्ञापन सिर्फ सेलिब्रिटी की लोकप्रियता पर आधारित होते हैं, वहीं सुनील ग्रोवर की खासियत यह है कि वह हर बार एक नया किरदार बनकर सामने आते हैं। यही कारण है कि दर्शकों को उनका किरदार भी याद रहता है और उससे जुड़ा ब्रैंड भी। ऑलिव ऑयल से लेकर ट्रैवल बुकिंग, डिजाइन सॉफ्टवेयर, मिंट कैंडी और स्नैक फूड तक, सुनील ग्रोवर ने हर विज्ञापन में अपनी कॉमिक टाइमिंग और अभिनय से यह साबित किया है कि मजबूत कहानी और दमदार किरदार किसी भी ब्रैंड को लंबे समय तक लोगों की यादों में बनाए रख सकते हैं।

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