मीडिया की निष्पक्षता पर बहस नई नहीं, हर दौर में उठे विश्वसनीयता के सवाल: वाशिंद्र मिश्र

न्यूज इंडिया 24X7 के डायरेक्टर (न्यूज) वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि मीडिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पत्रकारिता के तौर-तरीकों पर जो बहस आज हो रही है, वह नई नहीं है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 05 August, 2026
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Wednesday, 05 August, 2026
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समाचार4मीडिया के 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में न्यूज इंडिया 24X7 के डायरेक्टर (न्यूज) वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि मीडिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और पत्रकारिता के तौर-तरीकों पर जो बहस आज हो रही है, वह नई नहीं है। उनके मुताबिक, पत्रकारिता के लगभग हर दौर में ऐसे सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज जंतर-मंतर की घटना को लेकर जिस तरह की चर्चा हो रही है, वैसी ही बहसें पहले भी कई बड़े घटनाक्रमों के बाद होती रही हैं, लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है और पत्रकारिता फिर आगे बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम में थोड़ी देर से पहुंचे क्योंकि बारिश की वजह से रास्ते में देर हो गई थी। सुबह से लगातार जंतर-मंतर की घटना पर चर्चा हो रही थी और कई वरिष्ठ पत्रकार इस विषय पर अपनी बात रख चुके थे। इसी वजह से उन्होंने अपनी बात वर्तमान से नहीं, बल्कि अतीत से शुरू करने का फैसला किया।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि वह सभी को वर्ष 1989 में ले जाना चाहते हैं, जब अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान गोलीबारी हुई थी। उस घटना में कई लोगों की जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे। उन्होंने बताया कि उस समय देश में प्रिंट मीडिया का दौर था। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अंग्रेजी अखबारों से की थी और करीब 18 वर्षों तक टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और अमर उजाला जैसे संस्थानों में काम किया। इसलिए उन्होंने उस दौर की पत्रकारिता को बहुत करीब से देखा है।

उन्होंने कहा कि उस समय न सोशल मीडिया था और न ही आज जैसी डिजिटल तकनीक। मौके पर मौजूद पत्रकार ही घटनाओं की रिपोर्टिंग करते थे और पूरी दुनिया की नजर उन्हीं की खबरों पर होती थी। इसी दौरान कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों ने अयोध्या गोलीकांड की रिपोर्टिंग करते हुए यह खबर प्रकाशित की कि इतने लोग मारे गए कि सरयू नदी का पानी खून से लाल हो गया। यह खबर बड़े-बड़े बैनर हेडलाइन के रूप में प्रकाशित हुई।

वाशिंद्र मिश्र ने बताया कि उस समय प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया काफी प्रभावशाली संस्था मानी जाती थी। सरकार और कई अन्य संगठनों ने प्रेस काउंसिल में शिकायत की कि इस तरह की रिपोर्टिंग से समाज में गलत संदेश जा रहा है और तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। इसके बाद इस पूरे मामले की लंबे समय तक जांच हुई। एडिटर्स गिल्ड सहित कई पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी और इस मुद्दे पर वर्षों तक बहस चलती रही।

उन्होंने कहा कि आखिरकार उस बहस का भी वही हुआ जो आज जंतर-मंतर की घटना को लेकर हो रही चर्चा का भविष्य हो सकता है। कुछ समय बाद लोग उस घटना को भी भूल गए और पत्रकारिता आगे बढ़ गई।

अपने संबोधन में वाशिंद्र मिश्र ने वर्ष 1992 की अयोध्या घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब बाबरी मस्जिद या विवादित ढांचा गिराया गया, तब वहां रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को भीड़ ने पकड़-पकड़कर पीटा। कई पत्रकार गंभीर रूप से घायल हुए। इस घटना की पूरे देश और दुनिया में निंदा हुई। इस पर भी कई वर्षों तक सेमिनार, संगोष्ठियां और बहसें होती रहीं, लेकिन धीरे-धीरे लोग इस घटना को भी भूल गए और पत्रकारिता का सफर आगे बढ़ता रहा।

उन्होंने कहा कि इसके बाद पत्रकारिता में पेड न्यूज का दौर आया। चुनावों के दौरान पैसे लेकर खबरें प्रकाशित करने और उम्मीदवारों या राजनीतिक दलों के पक्ष में सामग्री छापने को लेकर देशभर में बड़ी बहस छिड़ गई। इस मुद्दे को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी गंभीरता से लिया। इसके लिए अलग-अलग समितियां बनाई गईं और कई संस्थाओं ने इस विषय पर चर्चा और सेमिनार आयोजित किए।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि जिन मीडिया संस्थानों के मालिकों और संपादकों पर पेड न्यूज के आरोप लगे या जो इस मामले में पकड़े गए, उनके प्रभाव या स्थिति पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा। वे उस समय भी प्रभावशाली थे और आज भी अपनी जगह बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इसके बाद जब टीवी पत्रकारिता का दौर तेजी से आगे बढ़ा तो वह खुद 1999 में अखबार छोड़कर टीवी मीडिया में आ गए। कुछ वर्षों बाद टीवी पत्रकारिता को लेकर शिकायतें आने लगीं कि कई चैनल जिम्मेदार पत्रकारिता के मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग से माहौल खराब हो रहा है।

उन्होंने बताया कि इन्हीं शिकायतों को देखते हुए टीवी समाचार चैनलों के लिए एनबीएसए (News Broadcasting Standards Authority) जैसी नियामक संस्था बनाई गई। बाद में इसके स्वरूप में बदलाव हुआ और यह एनबीडीए (News Broadcasters & Digital Association) के रूप में सामने आई।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि इन संस्थाओं में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को अध्यक्ष बनाया जाता था। समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ और वरिष्ठ संपादक भी इन समितियों का हिस्सा होते थे। हर बैठक में उन समाचार चैनलों और संपादकों की शिकायतों पर सुनवाई होती थी जिन्होंने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन किया होता था।

उन्होंने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले चैनलों और संपादकों को फटकार लगाई जाती थी और उन पर प्रतीकात्मक जुर्माना भी लगाया जाता था। लेकिन बैठक खत्म होने के बाद कई बार वही संस्थान फिर पहले जैसी गलतियां दोहराने लगते थे और अगली बैठक में फिर उन्हें नोटिस और फटकार का सामना करना पड़ता था।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि बाद में जब डिजिटल मीडिया तेजी से बढ़ा तो यह मांग उठी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जाए। इसके बाद नियामक व्यवस्था का विस्तार किया गया और डिजिटल मीडिया को भी उसके दायरे में लाया गया।

उन्होंने कहा कि वह खुद को इस मामले में सौभाग्यशाली मानते हैं क्योंकि उन्हें प्रिंट, टीवी और डिजिटल- तीनों दौर की पत्रकारिता को करीब से देखने और इन नियामक समितियों में संपादक के रूप में सदस्य रहने का अवसर मिला। उनके मुताबिक, आज टीवी और सोशल मीडिया में कितनी जिम्मेदार पत्रकारिता हो रही है, इस पर चर्चा लगातार हो रही है, लेकिन पत्रकारिता की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर सवाल कोई नई बात नहीं है। यह बहस दशकों से चलती आ रही है और समय के साथ सिर्फ उसका स्वरूप बदलता रहा है।

वाशिंद्र मिश्र ने आगे कहा कि मीडिया की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और किसी सरकार के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने को लेकर जो बहस आज हो रही है, वह कोई नई बात नहीं है। उनके मुताबिक, पत्रकारिता में आने के बाद से ही वह इस तरह की चर्चाएं सुनते और देखते आए हैं। समय के साथ केवल बहस का स्वरूप बदला है, लेकिन सवाल वही बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आज 'गोदी मीडिया' और 'दरबारी मीडिया' जैसे शब्दों का इस्तेमाल खूब होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने न्यूजरूम या अपनी लेखनी में कभी 'गोदी मीडिया' जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते। हालांकि कार्यक्रम में इस विषय का जिक्र हुआ, इसलिए उन्होंने उसी संदर्भ में अपनी बात रखी।

वाशिंद्र मिश्र ने पूरे सम्मान के साथ कहा कि आज जिन वरिष्ठ पत्रकारों की चर्चा होती है, उनमें से कई ऐसे भी रहे हैं जिन्होंने पहले की सरकारों के दौर में सत्ता के पक्ष में लगातार लिखा। उस समय प्रिंट मीडिया का प्रभाव सबसे ज्यादा था और अनेक पत्रकार सरकारों के समर्थन में लेख लिखते थे। उन्होंने कहा कि वह पूरे देश के ऐसे दर्जनों उदाहरण दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उस दौर में भी सत्ता के करीब रहने वाले पत्रकारों को पद्मश्री, पद्म विभूषण जैसे सम्मान दिए गए। इतना ही नहीं, उन्हें विभिन्न सरकारी नियामक संस्थाओं में नामित किया गया और कई पत्रकारों को विधान परिषद (एमएलसी) तथा राज्यसभा का सदस्य भी बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला सिर्फ पहले नहीं था, बल्कि 2014 के बाद भी कई संपादकों और मीडिया मालिकों को राज्यसभा सहित विभिन्न जिम्मेदारियां मिली हैं।

वाशिंद्र मिश्र ने बिहार और झारखंड में सामने आए चारा घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि उस मामले को उजागर करने वाले कुछ पत्रकार बाद में राज्यसभा भी पहुंचे। उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार किया, लेकिन कहा कि ऐसे लोग आज भी राज्यसभा में मौजूद हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें केवल निष्पक्ष पत्रकारिता के कारण यह जिम्मेदारी मिली या उसके पीछे अन्य कारण भी थे। उनका कहना था कि यह सवाल हर दौर में पूछा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर ऐसे भी अनेक पत्रकार हैं जिन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से पत्रकारिता की, लेकिन आज उनके सामने सबसे बड़ा संकट अपने अस्तित्व और रोजगार का है। उन्हें नौकरी तक नहीं मिल रही है। अगर वे पूरी ईमानदारी से काम करना चाहें तो कई संस्थानों में उन्हें काम करने ही नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि आज नैतिकता, पत्रकारिता के मूल्यों और मीडिया को सही दिशा देने की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लोगों का भी रिकॉर्ड देखा जाना चाहिए। यह देखना जरूरी है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कैसे की थी और बाद में वे राज्यसभा या अन्य बड़े पदों तक कैसे पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि क्या वे पूरी तरह निष्पक्ष पत्रकारिता के दम पर वहां पहुंचे या उसके पीछे अन्य कारण भी रहे।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि वह ऐसे कई नेताओं और अधिकारियों को जानते हैं जो वास्तव में निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों से दूरी बनाकर रखते हैं। ऐसे पत्रकारों को कई बार उनके दफ्तरों और घरों तक में प्रवेश नहीं मिलता। राजनीतिक दल भी ऐसे पत्रकारों से दूरी बनाए रखते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यदि कोई पत्रकार पहले भ्रष्टाचार के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा चुका है तो वह भविष्य में भी किसी के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

उन्होंने बताया कि वह कई ऐसे पत्रकारों को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं जिन्होंने नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जनहित याचिकाएं (PIL) दायर कीं। बाद में सरकारें बदल गईं, लेकिन नए सत्ता पक्ष ने भी अपने लोगों से कहा कि ऐसे पत्रकारों से दूरी बनाए रखें क्योंकि वे किसी के भी खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि वास्तव में निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता से केवल नेता या अधिकारी ही नहीं, बल्कि पूरा सिस्टम असहज हो जाता है। व्यवस्था को अक्सर ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो किसी न किसी पक्ष के साथ खड़े हों। लेकिन जो पत्रकार बीच का रास्ता अपनाकर सच को सच और गलत को गलत कहने की कोशिश करता है, वह न पहले पसंद किया जाता था और न आज पसंद किया जाता है।

वाशिंद्र मिश्र ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 2014 से पहले वह और वरिष्ठ पत्रकार सुधीर एक ही मीडिया समूह में साथ काम करते थे। उस समय वह समूह के सभी क्षेत्रीय चैनलों के संपादक थे, जबकि सुधीर उसी समूह के राष्ट्रीय चैनल के संपादक थे। उन्होंने संस्थान का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि उस दौर को उन्होंने बहुत करीब से देखा है।

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले एक बड़ा नैरेटिव तैयार किया गया था कि असली आजादी तब मिलेगी जब सरकार बदलेगी। यह कहा गया कि 1947 से लेकर 2014 तक देश को गरीबी, बेरोजगारी और अव्यवस्था से वास्तविक मुक्ति नहीं मिली है। मीडिया के एक बड़े हिस्से ने भी इसी नैरेटिव को आगे बढ़ाया और उसे मजबूत करने का काम किया।

उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि 2014 के बाद जिस बदलाव की बात कही गई थी, उसका रिपोर्ट कार्ड कौन तैयार करेगा। यह भी पूछा जाना चाहिए कि जिन वादों और अभियानों को आगे बढ़ाया गया था, उनमें से कितना पूरा हुआ, कितना बाकी है और जिन लक्ष्यों की बात की गई थी, उन्हें हासिल करने में अभी कितना समय लगेगा। उनके मुताबिक, यदि पहले की सरकारों का मूल्यांकन हो सकता है तो बाद की सरकारों का भी उसी पैमाने पर आकलन होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज का दौर अवसरों का अधिकतम लाभ उठाकर अपना-अपना एजेंडा आगे बढ़ाने का दौर बन गया है। 2014 से पहले विपक्ष में रही पार्टियों ने जो बड़े-बड़े वादे किए थे, उनका भी रिपोर्ट कार्ड आज जनता के सामने है। उसी तरह 1947 से 2014 तक सत्ता में रही सरकारों का मूल्यांकन भी लोगों के सामने है। उनका मानना है कि यही स्थिति मीडिया पर भी लागू होती है।

वाशिंद्र मिश्र ने कहा कि उन्हें निकट भविष्य में कोई बहुत बड़ा क्रांतिकारी बदलाव दिखाई नहीं देता। जब तक समाज रहेगा और उसकी जरूरतें बनी रहेंगी, तब तक मीडिया भी इसी तरह चलता रहेगा। इसलिए 'दरबारी मीडिया' या 'गोदी मीडिया' की बहस को केवल वर्तमान तक सीमित नहीं देखना चाहिए। यह हर दौर में अलग-अलग रूप में मौजूद रही है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि पहले के समय में कई बड़े संपादक सत्ता के करीब रहे और उन्हें विधान परिषद या राज्यसभा जैसी जिम्मेदारियां मिलीं। उस समय यह जानकारी आसानी से लोगों तक नहीं पहुंचती थी क्योंकि सोशल मीडिया नहीं था। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। अब सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए युवा किसी भी पत्रकार या सार्वजनिक व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड आसानी से देख सकते हैं और यह पता लगा सकते हैं कि वह किस दौर में किस भूमिका में रहा। इसी वजह से अब हर व्यक्ति के काम और उसके इतिहास की जांच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गई है।

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रुचिका मेहता को इंडिया टुडे ग्रुप में मिली नई एडिटोरियल जिम्मेदारी

इंडिया टुडे ग्रुप ने रुचिका मेहता की जिम्मेदारियां बढ़ाते हुए उन्हें इंडिया टुडे स्पाइस की एडिटर नियुक्त किया है। वह हेलो! इंडिया और ब्राइड्स टुडे की एडिटर भी हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 19 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2026
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इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) ने रुचिका मेहता (Ruchika Mehta) की जिम्मेदारियां बढ़ाते हुए उन्हें इंडिया टुडे स्पाइस (India Today Spice) की एडिटर नियुक्त किया है। वह अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के तहत हेलो! इंडिया (Hello! India) और ब्राइड्स टुडे (Brides Today) की एडिटर भी हैं।

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब इंडिया टुडे ग्रुप अपने लग्जरी और लाइफस्टाइल पोर्टफोलियो (Luxury and Lifestyle Portfolio) को मजबूत कर रहा है। इसमें इंडिया टुडे स्पाइस के साथ हार्पर्स बाजार इंडिया (Harper’s Bazaar India), कॉस्मोपॉलिटन इंडिया (Cosmopolitan India), हेलो! इंडिया और ब्राइड्स टुडे शामिल हैं।

नई जिम्मेदारी के साथ रुचिका मेहता ग्रुप के लग्जरी और लाइफस्टाइल बिजनेस के तहत तीन पब्लिकेशंस की एडिटोरियल डायरेक्शन (Editorial Direction) संभालेंगी।

यह बदलाव इंडिया टुडे ग्रुप की व्यापक लीडरशिप रिस्ट्रक्चरिंग (Leadership Restructuring) का हिस्सा है। ग्रुप अपने प्रीमियम पब्लिशिंग बिजनेस (Premium Publishing Business) की ग्रोथ को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है, जिसे नए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज (Intellectual Properties), बढ़े हुए कमर्शियल अवसरों और प्रिंट व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से बढ़ते रेवेन्यू योगदान का समर्थन मिल रहा है।

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इंडिया टुडे ग्रुप ने कमलिनी चटर्जी की जिम्मेदारियां बढ़ाईं

इंडिया टुडे ग्रुप ने कमलिनी चटर्जी की जिम्मेदारियां बढ़ाते हुए उन्हें लग्जरी और लाइफस्टाइल पोर्टफोलियो के पांचों ब्रांड्स की सेल्स लीडरशिप की जिम्मेदारी सौंपी है।

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Published - Saturday, 19 September, 2026
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Saturday, 19 September, 2026
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इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) ने वाइस प्रेसिडेंट–सेल्स कमलिनी चटर्जी (Kamalinee Chatterjee) की जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं। अब वह ग्रुप के लग्जरी और लाइफस्टाइल पोर्टफोलियो (Luxury and Lifestyle Portfolio) के सभी पांच ब्रांड्स की सेल्स लीडरशिप संभालेंगी।

नई जिम्मेदारी के तहत कमलिनी चटर्जी अब हार्पर्स बाजार इंडिया (Harper’s Bazaar India), कॉस्मोपॉलिटन इंडिया (Cosmopolitan India), हेलो! इंडिया (Hello! India) और ब्राइड्स टुडे (Brides Today) के साथ इंडिया टुडे स्पाइस (India Today Spice) की सेल्स भी देखेंगी।

इंडिया टुडे स्पाइस के पोर्टफोलियो में शामिल होने के साथ कमलिनी सभी पांचों ब्रांड्स की सेल्स को एक कंसोलिडेटेड सेल्स लीडरशिप स्ट्रक्चर (Consolidated Sales Leadership Structure) के तहत लीड करेंगी।

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब इंडिया टुडे ग्रुप अपने लग्जरी और लाइफस्टाइल बिजनेस को मजबूत कर रहा है। इस बिजनेस में नए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज (Intellectual Properties), व्यापक कमर्शियल अवसरों और प्रिंट व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से बढ़े रेवेन्यू योगदान के जरिए हाल के वर्षों में ग्रोथ देखने को मिली है।

कमलिनी चटर्जी की बढ़ी हुई जिम्मेदारियां इंडिया टुडे ग्रुप की व्यापक लीडरशिप रिस्ट्रक्चरिंग (Leadership Restructuring) का हिस्सा हैं। इसका उद्देश्य ग्रुप के लग्जरी और लाइफस्टाइल बिजनेस की कमर्शियल ग्रोथ को आगे बढ़ाना है।

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शशांक डबराल बने पारस बिल्डटेक में हेड ऑफ सेल्स

शशांक डबराल को पारस बिल्डटेक में हेड ऑफ सेल्स नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट में छह वर्षों से अधिक समय तक रीजन हेड सेल्स रहे।

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Published - Saturday, 19 September, 2026
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Saturday, 19 September, 2026
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रियल एस्टेट कंपनी पारस बिल्डटेक (Paras Buildtech) ने शशांक डबराल (Shashank Dabral) को हेड ऑफ सेल्स (Head of Sales) नियुक्त किया है। अपनी नई जिम्मेदारी में वह कंपनी की ग्रोथ इनिशिएटिव्स (Growth Initiatives) को लीड करेंगे और मार्केट प्रेजेंस (Market Presence) बढ़ाने के साथ रेवेन्यू (Revenue) को आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रियाओं को तैयार और लागू करेंगे।

इससे पहले डबराल आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट (Aditya Birla Real Estate) में नॉर्थ के रीजन हेड - सेल्स (Region Head - Sales, North) के पद पर छह वर्षों से अधिक समय तक कार्यरत रहे। इससे पहले उन्होंने गोदरेज प्रॉपर्टीज (Godrej Properties) के साथ करीब साढ़े तीन साल तक काम किया है।

पारस बिल्डटेक में डबराल की जिम्मेदारी कंपनी की सेल्स ग्रोथ को मजबूत करने, बाजार में मौजूदगी बढ़ाने और रेवेन्यू ग्रोथ के लिए प्रभावी प्रक्रियाएं विकसित करने पर रहेगी।

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PVR INOX ने गुरुग्राम में खोला नया 3-स्क्रीन मल्टीप्लेक्स, अब 1,792 स्क्रीन का नेटवर्क

PVR INOX Limited ने गुरुग्राम के DLF Summit Plaza में अपना नया 3-स्क्रीन मल्टीप्लेक्स शुरू किया है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 18 September, 2026
Last Modified:
Friday, 18 September, 2026
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PVR INOX Limited ने गुरुग्राम के DLF Summit Plaza में अपना नया 3-स्क्रीन मल्टीप्लेक्स शुरू किया है। कंपनी ने 17 सितंबर 2026 को इसकी जानकारी दी। यह नया सिनेमाघर गोल्फ कोर्स रोड पर स्थित है और इसमें दर्शकों के आराम के साथ बेहतर सिनेमा अनुभव पर खास ध्यान दिया गया है।

इस नए मल्टीप्लेक्स के शुरू होने के साथ PVR INOX के पास अब भारत और श्रीलंका के 114 शहरों में 357 जगहों पर कुल 1,792 स्क्रीन हो गई हैं। कंपनी के मुताबिक, यह देश का सबसे बड़ा मल्टीप्लेक्स नेटवर्क है।

352 प्रीमियम सीटों से लैस है मल्टीप्लेक्स

नए मल्टीप्लेक्स में तीन ऑडिटोरियम हैं, जिनमें कुल 352 प्रीमियम Sapphire सीटें लगाई गई हैं। इन सीटों पर लेदर जैसी फिनिश दी गई है। सीटों के बीच 650 मिलीमीटर की दूरी और आगे-पीछे सीटों के बीच 1,500 मिलीमीटर की जगह रखी गई है, जिससे दर्शकों को बैठने के लिए ज्यादा व्यक्तिगत जगह और आराम मिल सके।

तीनों स्क्रीन में 4K डिजिटल लेजर प्रोजेक्शन, Dolby 7.1 सराउंड साउंड और Next-Gen 3D की सुविधा है। कंपनी के अनुसार, इससे दर्शकों को साफ तस्वीर, बेहतर आवाज और ज्यादा वास्तविक सिनेमा अनुभव मिलेगा।

खास डिजाइन पर भी दिया गया ध्यान

मल्टीप्लेक्स के तीनों ऑडिटोरियम को अलग-अलग रंगों की थीम में सजाया गया है, जिससे हर स्क्रीन की अपनी अलग पहचान नजर आती है। घुमावदार दीवारों, बेहतर ऑडियो फैसिलिटी और रोशनी वाले पैनल के जरिए स्क्रीन को अलग पहचान देने की कोशिश की गई है।

मल्टीप्लेक्स की लॉबी भी इसका खास हिस्सा है। इसे सामान्य सिनेमा लॉबी की तरह न बनाकर एक ऐसे सामाजिक स्थान के रूप में तैयार किया गया है, जहां दर्शक फिल्म शुरू होने से पहले या बाद में बैठकर समय बिता सकें।यहां लटकती हुई रोशनी, कैफे जैसी बैठने की व्यवस्था और अलग सामाजिक क्षेत्र बनाए गए हैं। हरियाली और प्राकृतिक तत्वों का भी इस्तेमाल किया गया है। गर्म रोशनी के साथ आरामदायक माहौल तैयार किया गया है।

लॉबी में पुराने दौर के प्रोजेक्टर की क्रोम-प्लेटेड स्थापना भी की गई है, जो यहां आने वाले दर्शकों के लिए एक खास आकर्षण है। मेटल की सजावट, अलग-अलग बनावट और गर्म रंगों के इस्तेमाल से पूरे स्थान को आधुनिक और प्रीमियम रूप देने की कोशिश की गई है।

PVR INOX Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय कुमार बिजली ने कहा कि गुरुग्राम भारत की महत्वाकांक्षा, ऊर्जा और आधुनिक जीवनशैली को दिखाने वाला शहर है। DLF Summit Plaza में नए मल्टीप्लेक्स की शुरुआत आधुनिक दर्शकों की जीवनशैली के अनुरूप बेहतर सिनेमा अनुभव देने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दिखाती है। उन्होंने कहा कि DLF5 और Golf Course Road के बीच स्थित यह मल्टीप्लेक्स आराम, डिजाइन, तकनीक और हॉस्पिटैलिटी को एक साथ लाता है और गुरुग्राम के लिए मनोरंजन का एक नया स्थान तैयार करता है।

PVR INOX के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर संजीव कुमार ने कहा कि भारत में मनोरंजन का माहौल बदल रहा है और दर्शक अब सिर्फ फिल्म देखने की जगह से ज्यादा की उम्मीद कर रहे हैं। वे ऐसे अनुभव चाहते हैं, जहां जुड़ाव, खोज और मनोरंजन के पल मिल सकें। उन्होंने कहा कि DLF Summit Plaza का नया मल्टीप्लेक्स एक पूरी तरह से मनोरंजन और आराम के स्थान के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें बेहतर डिजाइन, प्रीमियम आराम और सामाजिक माहौल को ध्यान में रखा गया है।

PVR INOX Limited भारत की सबसे बड़ी फिल्म प्रदर्शन कंपनियों में से एक है। कंपनी भारत और श्रीलंका के 114 शहरों में 357 जगहों पर 1,792 स्क्रीन संचालित करती है। कंपनी का गठन 2023 में PVR Limited और INOX Leisure Limited के विलय के बाद हुआ था। दोनों कंपनियां देश के स्थापित सिनेमा ब्रैंड्स में शामिल रही हैं।

PVR INOX नई तकनीक, अगली पीढ़ी के सिनेमा फॉर्मेट और बेहतर दर्शक अनुभव में निवेश कर रही है। कंपनी के नेटवर्क में बच्चों के लिए बनाए गए ऑडिटोरियम, आधुनिक प्रोजेक्शन और साउंड तकनीक, अलग-अलग तरह के खाने-पीने के विकल्प, फिल्म और गैर-फिल्म कार्यक्रमों के साथ प्रीमियम बड़ी स्क्रीन भी शामिल हैं।

 

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टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स की सहमति नहीं : सभी विकल्पों पर होगा मंथन

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग के बजाय सभी वैध विकल्पों पर विचार करने को कहा है। नोएल एन टाटा ने पुरानी स्वामित्व व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 18 September, 2026
Last Modified:
Friday, 18 September, 2026
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टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) ने टाटा संस (Tata Sons) को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध (Publicly Listed) करने के अलावा सभी उपलब्ध विकल्पों पर तत्काल विचार करने को कहा है। यह फैसला 11 सितंबर 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) से मिले संचार के बाद हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक (Board Meeting) में चर्चा के दौरान सामने आया।

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा (Noel N Tata) ने बैठक में ट्रस्ट्स के पुराने रुख को दोहराया। उन्होंने टाटा संस और टाटा समूह (Tata Group) की एक सदी से ज्यादा पुरानी स्वामित्व व्यवस्था (Ownership Structure) को बनाए रखने पर जोर दिया।

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की लिस्टिंग (Listing) पर सहमति नहीं दी है। बोर्ड ने तय किया कि केवल सार्वजनिक लिस्टिंग पर निर्भर रहने के बजाय सभी वैध विकल्पों का विस्तार से अध्ययन किया जाए। इसकी रिपोर्ट और सिफारिशें बोर्ड के सामने रखी जाएंगी। इसके बाद अलग बैठक में आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

टाटा संस का बोर्ड मार्च 2024 में दिवंगत रतन टाटा (Ratan Tata) के मार्गदर्शन में सर्वसम्मति से कंपनी को गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) बनाए रखने का फैसला कर चुका था। जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (Sir Dorabji Tata Trust) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) ने भी सर्वसम्मति से कंपनी को गैर-सूचीबद्ध रखने के प्रस्ताव पारित किए थे।

नोएल एन टाटा ने कहा कि टाटा समूह की स्थापना राष्ट्रीय सेवा के उद्देश्य से कारोबार के माध्यम से हुई थी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट आधारित स्वामित्व व्यवस्था से मिलने वाले लाभांश (Dividend) से अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और शोध कार्यों को सहायता मिलती है।

उनके अनुसार, लिस्टिंग से इस व्यवस्था और समूह के मूल चरित्र पर असर पड़ सकता है। टाटा ट्रस्ट्स ने सभी कानूनी और पारदर्शी विकल्पों (Legal and Transparent Options) पर विचार करने की बात कही है।

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पत्रकार का लहजा नरम और सवाल सख्त होना चाहिए : अब्दुल वदूद साजिद

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में अब्दुल वदूद साजिद ने विद्यार्थियों से संवाद किया और पत्रकारिता में सवालों के तेवर, व्यवहार तथा सीखने की जरूरत बताई।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 17 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
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माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication) के जनसंचार विभाग में बुधवार को विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दैनिक ‘इंकलाब’ (Inquilab) के संपादक अब्दुल वदूद साजिद (Abdul Wadud Sajid) ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया और पत्रकारिता में अपने चार दशक के अनुभव साझा किए।

कर्नल गद्दाफी और सद्दाम हुसैन जैसे वैश्विक नेताओं के इंटरव्यू (Interview) का अनुभव साझा करते हुए साजिद ने कहा कि असली पत्रकार वही है जो बिना किसी पूर्वग्रह या पूरी तैयारी के भी परिस्थितियों को संभालने का हुनर रखता हो। पत्रकार को हर घटना से लगातार सीखते रहना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक रहने की सलाह देते हुए कहा कि समय का पहिया घूमता रहता है और अच्छा-बुरा दौर आता-जाता रहता है। मुख्यधारा की मीडिया (Mainstream Media) में किसी स्थिति से लोग खुश या नाराज हो सकते हैं, लेकिन पत्रकार को किसी भी परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए।

साजिद ने आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए विद्यार्थियों से कहा कि अकेले होने पर आईने के सामने खड़े होकर खुद से कहें कि ‘मुझे सब कुछ आता है।’ वहीं दूसरे व्यक्ति से बातचीत के दौरान व्यवहार और भाव हमेशा सीखने वाला होना चाहिए।

इंटरव्यू और प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) में सवालों के लहजे और गरिमा पर उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की एक पत्रकार वार्ता का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आजकल प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार सवाल पूछते नहीं, बल्कि ‘दागते’ हैं। सवाल पूछने और दागने में बहुत फर्क है। सवाल सख्त और तीखे हो सकते हैं, लेकिन पत्रकार का लहजा हमेशा नरम और शालीन होना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस का मतलब बहस या लड़ाई करना नहीं है।

स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Struggle) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के आजादी के आंदोलन में उर्दू पत्रकारिता ने बागी पत्रकारिता की भूमिका निभाई थी।

कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. संजय द्विवेदी, सहायक प्राध्यापक डॉ. लाल बहादुर ओझा, एडजंक्ट प्रोफेसर गिरीश उपाध्याय, डॉ. गरिमा पटेल, डॉ. शलभ श्रीवास्तव, डॉ. बबिता रानी घोष, डॉ. उदित्य सिंह सेंगर सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इस अवसर पर विद्यार्थी विनम्र तिवारी ने विभाग की ओर से पुस्तकें भेंट कर अब्दुल वदूद साजिद का स्वागत किया।

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पंकज कालरा बने जी म्यूजिक कंपनी के डायरेक्टर-मार्केटिंग

पंकज कालरा को जी म्यूजिक कंपनी में डायरेक्टर-मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए नई भूमिका साझा की। इससे पहले वह सारेगामा इंडिया में मार्केटिंग संभाल रहे थे।

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Published - Wednesday, 16 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2026
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जी म्यूजिक कंपनी (Zee Music Company) ने पंकज कालरा को डायरेक्टर-मार्केटिंग (Director - Marketing) नियुक्त किया है। कालरा ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

कालरा ने पोस्ट में लिखा कि वह जी म्यूजिक कंपनी में डायरेक्टर-मार्केटिंग के तौर पर नई जिम्मेदारी शुरू करने को लेकर खुश हैं। जी म्यूजिक कंपनी से पहले कालरा सारेगामा इंडिया (Saregama India) में चीफ मैनेजर-मार्केटिंग (Chief Manager-Marketing) के पद पर कार्यरत थे। वह चार साल से ज्यादा समय तक सारेगामा के साथ जुड़े रहे।

सारेगामा से पहले कालरा ने हंगामा (Hungama) में पांच साल से ज्यादा समय तक काम किया। अपने करियर में वह 9एक्स मीडिया (9X Media) के साथ भी काम कर चुके हैं।

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IPL 2027 मिनी ऑक्शन की भारत में वापसी : BCCI ने लिया बड़ा फैसला

बीसीसीआई ने आईपीएल 2027 के मिनी ऑक्शन को भारत में कराने का फैसला किया है। तीन साल बाद विदेशी आयोजन का सिलसिला खत्म होगा, जबकि इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर फैसला टल गया।

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Published - Wednesday, 16 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2026
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) यानी बीसीसीआई (BCCI) ने आईपीएल 2027 (IPL 2027) के मिनी ऑक्शन (Mini Auction) को भारत में कराने का फैसला किया है। इसके साथ ही तीन साल से चले आ रहे विदेशी वेन्यू (Overseas Venue) के सिलसिले पर भी रोक लगेगी। हालांकि, इम्पैक्ट प्लेयर नियम (Impact Player Rule) के भविष्य पर फैसला फिलहाल टाल दिया गया है।

ये फैसले 15 सितंबर को हुई आईपीएल गवर्निंग काउंसिल (IPL Governing Council) की बैठक में लिए गए। हालांकि, बीसीसीआई ने अभी उस भारतीय शहर का नाम तय नहीं किया है, जहां मिनी ऑक्शन आयोजित किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेन्यू तय करने में होटल की उपलब्धता और दूसरी लॉजिस्टिक जरूरतों (Logistical Requirements) को ध्यान में रखा जाएगा।

फ्रेंचाइजियों (Franchises) की ओर से विदेशी मिनी ऑक्शन के लिए बड़ी टीम डेलिगेशन (Team Delegation) को विदेश ले जाने से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर चिंताएं सामने आती रही हैं। ऑक्शन के लिए सीनियर मैनेजमेंट और कोचिंग स्टाफ के साथ यात्रा, होटल, स्थानीय परिवहन और दूसरी ऑपरेशनल व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं।

भारत में ऑक्शन की वापसी से इन लॉजिस्टिक जरूरतों को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा। आईपीएल का मिनी ऑक्शन आखिरी बार 2023 में भारत के कोच्चि में हुआ था। इसके बाद दुबई, जेद्दा और अबू धाबी में लगातार तीन ऑक्शन आयोजित किए गए।

बीसीसीआई ने अभी ऑक्शन की सटीक तारीख भी घोषित नहीं की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, होटल की उपलब्धता वेन्यू चुनने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसकी एक वजह यह भी है कि ऑक्शन की तैयारी अक्टूबर से दिसंबर के बीच भारत के पीक वेडिंग सीजन (Peak Wedding Season) के साथ हो रही है।

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दूरदर्शन ने मनाया 67वां स्थापना दिवस, संगीत और नृत्य से सजी शाम

समारोह में प्रसिद्ध गायिका ज्योति नूरां ने अपनी दमदार और सुरीली प्रस्तुति से दर्शकों का मनोरंजन किया। वहीं, शिखा खरे और उनकी टीम ने ‘रिद्म विदआउट बॉर्डर्स’ नाम से फ्यूजन डांस प्रस्तुति दी।

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Published - Wednesday, 16 September, 2026
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Wednesday, 16 September, 2026
Doordarshan Foundation Day

देश के पब्लिक ब्रॉडकास्टर दूरदर्शन (Doordarshan) ने मंगलवार को मंडी हाउस स्थित दूरदर्शन भवन में अपना 67वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर संगीत, नृत्य और मनोरंजन से सजे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष समारोह की थीम ‘दूरदर्शन@67– कल भी अपना, आज भी अपना’ रही।

समारोह में प्रसिद्ध गायिका ज्योति नूरां ने अपनी दमदार और सुरीली प्रस्तुति से दर्शकों का मनोरंजन किया। वहीं, शिखा खरे और उनकी टीम ने ‘रिद्म विदआउट बॉर्डर्स’ नाम से फ्यूजन डांस प्रस्तुति दी।

यह कार्यक्रम दूरदर्शन की छह दशकों से ज्यादा लंबी यात्रा और दर्शकों की कई पीढ़ियों के साथ उसके जुड़ाव का प्रतीक था। इस कार्यक्रम में दूरदर्शन के आने वाले धारावाहिक ‘संस्कार’ और ‘सुराग 2.0’ के साथ-साथ कुछ पुराने लोकप्रिय शो से जुड़ी हस्तियों के साथ बातचीत भी शामिल थी। इनमें के.सी. बोकाडिया, महेश ठाकुर, अमन वर्मा, दर्शन जरीवाला, पंकज बेरी, सुदेश बेरी, साई केतन राव, जिज्ञासा सिंह और रेहान शाहरुख मिर्जाबेग आदि शामिल थे।

समारोह का संचालन नमिता सचदेवा और अभिनेता-हास्य कलाकार अली असगर ने किया। दोनों ने अपनी प्रस्तुति और संवाद से कार्यक्रम को मनोरंजक बनाए रखा।

छह दशक से अधिक की यात्रा: दूरदर्शन छह दशकों से अधिक समय से भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। बदलते मीडिया परिदृश्य के साथ दूरदर्शन ने नई तकनीकों और डिजिटल मंचों को अपनाया है, लेकिन अपनी विशिष्ट पहचान और सार्वजनिक सेवा की भूमिका को कायम रखा है। 15 सितंबर, 1959 को दिल्ली में दूरदर्शन ने प्रायोगिक टेलीविजन प्रसारण शुरू किया था।

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बेटिंग मनी लॉन्ड्रिंग केस में YouTuber अनुराग द्विवेदी पर ED की जांच

उत्तर प्रदेश के चर्चित यूट्यूबर अनुराग द्विवेदी ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में हैं।

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Published - Wednesday, 16 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2026
Anurag5421

उत्तर प्रदेश के चर्चित यूट्यूबर अनुराग द्विवेदी ऑनलाइन बेटिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के दायरे में हैं। ED की यह जांच पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में 2022 में सामने आए एक कथित अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़ी है। जांच के दौरान एजेंसी को अनुराग द्विवेदी के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़े लोगों के बैंक खातों में पैसों के लेन-देन की जानकारी मिली।

ED के मुताबिक, जांच में सामने आया कि कथित अवैध बेटिंग ऐप्स से मिले पैसों को म्यूल बैंक अकाउंट्स और हवाला नेटवर्क के जरिए आगे भेजा गया। एजेंसी का आरोप है कि इस रकम का कुछ हिस्सा अनुराग द्विवेदी से जुड़ी कंपनियों और उनके परिवार के सदस्यों के खातों में पहुंचा, जिसके पीछे कोई वैध कारोबारी आधार नहीं था।

2022 के बेटिंग मामले से जुड़ा है केस

ED की जांच पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से दर्ज एक FIR से शुरू हुई थी। एजेंसी के मुताबिक, सिलीगुड़ी से एक ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क चलाया जा रहा था, जिसमें म्यूल बैंक अकाउंट्स, Telegram चैनल और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था।

जांच के दौरान ED ने अनुराग द्विवेदी पर अवैध ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म के प्रचार में भूमिका निभाने का आरोप लगाया। एजेंसी का कहना है कि उन्हें कथित बेटिंग से हुई कमाई का हिस्सा अलग-अलग माध्यमों से मिला।

कई शहरों में हुई थी छापेमारी

ED ने दिसंबर 2025 में लखनऊ, उन्नाव और दिल्ली में अनुराग द्विवेदी से जुड़े 10 ठिकानों पर तलाशी ली थी। एजेंसी की प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस दौरान करीब 20 लाख रुपये नकद, दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। चार महंगी गाड़ियां भी जब्त की गईं, जिनमें Lamborghini Urus, Mercedes, Ford Endeavour और Mahindra Thar शामिल थीं।

ED ने यह भी कहा था कि जांच में दुबई में रियल एस्टेट निवेश से जुड़े दस्तावेज मिले और हवाला चैनलों के इस्तेमाल के संकेत मिले। इसके अलावा करीब 3 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस, इंश्योरेंस पॉलिसी और अन्य चल संपत्तियों को फ्रीज किया गया था।

बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने इस मामले में करीब ₹23.7 करोड़ की चल संपत्तियां अटैच/फ्रीज की थीं और कोलकाता की विशेष PMLA अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की जा चुकी है। मामले में जांच अभी जारी है।

सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं अनुराग

अनुराग द्विवेदी क्रिकेट और क्रिकेटर्स से जुड़ा कंटेंट बनाने के लिए जाने जाते हैं। उनकी सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फॉलोइंग है और वह ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स और गेमिंग से जुड़े रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपना 26वां जन्मदिन भी मनाया और सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्नाव और नवाबगंज के कुछ रेस्टोरेंट्स में अपने फॉलोअर्स के लिए खाने का इंतजाम करने की जानकारी दी थी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि ED की ओर से लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं; मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है। 

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