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सुमाया ग्रुप केस में ED की बड़ी कार्रवाई, 35.22 करोड़ की संपत्तियां फ्रीज
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुमाया ग्रुप (Suumaya Group) से जुड़े मामले में करीब 35.22 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज कर दी हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुमाया ग्रुप (Suumaya Group) से जुड़े मामले में करीब 35.22 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज कर दी हैं। ED का आरोप है कि ‘Need to Feed’ नाम की योजना के नाम पर जुटाया गया पैसा गलत तरीके से दूसरी जगह भेजा गया, उसे घुमाया गया और कंपनी का टर्नओवर व शेयर कीमतें बढ़ाने में इस्तेमाल किया गया।
ED ने 14 जनवरी 2025 को जारी बयान में बताया कि जिन संपत्तियों को फ्रीज किया गया है, उनमें बैंक बैलेंस, डीमैट अकाउंट, म्यूचुअल फंड निवेश और दो अचल संपत्तियां शामिल हैं। एजेंसी इस मामले में करीब 137 करोड़ रुपये के गबन की जांच कर रही है, जो कथित तौर पर भविष्य में फायदे का लालच देकर ‘Need to Feed’ कार्यक्रम के नाम पर जुटाए गए थे।
यह जांच मुंबई के वर्ली पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। एफआईआर में Suumaya Industries Ltd और उसके प्रमोटर्स पर धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। ED का कहना है कि आरोपियों ने एक वेलफेयर प्रोग्राम के नाम पर फायदे का वादा किया, लेकिन वह कभी पूरा नहीं किया गया।
जांच में सामने आया है कि सुमाया ग्रुप और उससे जुड़े लोगों ने हरियाणा सरकार के एक फर्जी कॉन्ट्रैक्ट का हवाला देकर पैसा जुटाया। इस पैसे को बाद में असली बिजनेस टर्नओवर के तौर पर दिखाया गया। ED के मुताबिक, Suumaya के प्रमोटर उशिक गाला ने यह पैसा एजेंट के जरिए दिल्ली और हरियाणा की फर्जी एग्रो ट्रेडर कंपनियों में भेजा। इन कंपनियों के जरिए दिखाया गया कि कृषि खरीद हो रही है, जबकि असल में कोई खरीद नहीं हुई।
ED का आरोप है कि फर्जी बिल और ट्रक की रसीदें बनाकर करीब 5,000 करोड़ रुपये के फर्जी लेन-देन दिखाए गए। जांच एजेंसी का कहना है कि इनमें से सिर्फ करीब 10 फीसदी लेन-देन ही असली था। इन फर्जी सौदों से कंपनी का टर्नओवर और वित्तीय स्थिति जरूरत से ज्यादा बड़ी दिखायी गई।
आंकड़ों के मुताबिक, Suumaya का टर्नओवर 2019-20 में करीब 210 करोड़ रुपये था, जो 2021-22 में बढ़कर लगभग 6,700 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी दौरान कंपनी के शेयरों में भी तेज उछाल आया, जिससे निवेशकों को गुमराह करने का आरोप है।
इससे पहले ED ने मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में 19 जगहों पर छापेमारी की थी, जहां से 3.9 करोड़ रुपये की संपत्तियां और बड़ी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए गए थे। इन्हीं जांचों के बाद 17 नवंबर 2025 को प्रमोटर उशिक गाला को गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
इस पूरे मामले में यह भी सामने आया है कि Dentsu Communications India ने जांच के दौरान अधिकारियों को अहम जानकारियां दी थीं, जिससे पैसों के लेन-देन की कड़ियां जोड़ने में मदद मिली।
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