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विनोद थडानी: भारतीय मार्केटिंग इंडस्ट्री में डिजिटल ग्रोथ के मजबूत स्तंभ
कुछ लोग कमरे में आते ही माहौल को रोशन कर देते हैं। लेकिन विनोद थडानी ऐसे शख्स हैं जो पूरी इंडस्ट्री को रोशन कर देते हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 2 hours ago
कुछ लोग कमरे में आते ही माहौल को रोशन कर देते हैं। लेकिन विनोद थडानी ऐसे शख्स हैं जो पूरी इंडस्ट्री को रोशन कर देते हैं। उनके काम करने के तरीके में कुछ खास है- नई चीजों को जानने की सच्ची जिज्ञासा, डिजिटल दुनिया क्या कर सकती है इसे लेकर जबरदस्त उत्साह और ऐसा गर्मजोशी भरा स्वभाव जो किसी भी काम को सिर्फ एक लेन-देन नहीं बल्कि मिलकर कुछ हासिल करने की कोशिश जैसा बना देता है।
आज उनके जन्मदिन के मौके पर वह इंडस्ट्री, जो उनके साथ-साथ आगे बढ़ी है, सिर्फ उनके प्रोफेशनल सफर ही नहीं बल्कि उनके व्यक्तित्व को भी याद कर रही है।
और सच में, उनका सफर काफी शानदार रहा है। आज वह डेंट्सू मीडिया ग्रुप में चीफ डिजिटल ग्रोथ ऑफिसर और आईप्रॉस्पेक्ट इंडिया के सीईओ हैं। इस भूमिका में वह परफॉर्मेंस, टेक्नोलॉजी और क्रिएटिव सोच- तीनों के बीच अहम कड़ी बन चुके हैं। लेकिन उन्हें सबसे अलग जो चीज बनाती है, वह सिर्फ उनका बड़ा पद नहीं है, बल्कि उस काम को करने का उनका सच्चा और ईमानदार तरीका है। पिछले दो दशकों से ज्यादा समय में मोबाइल क्रांति, नए प्लेटफॉर्म्स और तेजी से बदलती डिजिटल इकोनॉमी के बीच भी उनकी यही ईमानदारी उनकी पहचान बनी रही है।
उनकी कहानी बड़े पदों से पहले ही शुरू हो जाती है। विनोद थडानी ने ग्रुपएम में लीडरशिप रोल निभाए, जहां उन्होंने मोबाइल प्रैक्टिस को सफलतापूर्वक खड़ा किया। इसके बाद माधाउस में सीईओ के रूप में उन्होंने कंपनी को भारत का पहला एंड-टू-एंड मोबाइल सॉल्यूशंस प्रोवाइडर बनाया। उस समय मोबाइल एडवरटाइजिंग पर बहुत कम लोग ध्यान दे रहे थे, लेकिन उन्होंने इसे भविष्य का बड़ा मौका माना। डिजिटल मीडिया में 17 साल से ज्यादा अनुभव के साथ उन्होंने 2009 में ग्रुपएम में सबसे बड़ा मोबाइल प्रैक्टिस खड़ा किया और बाद में WPP की कंपनी माधाउस में तीन साल तक सीईओ रहे। यह सिर्फ छोटे-मोटे कदम नहीं थे, बल्कि इंडस्ट्री के भविष्य पर लगाए गए बड़े दांव थे, उस समय जब ज्यादातर लोग अभी यह तय ही कर रहे थे कि डिजिटल का भविष्य क्या होगा।
माधाउस के बाद विनोद थडानी माइंडशेयर से जुड़े, जहां उन्होंने सात साल तक साउथ एशिया के चीफ डिजिटल ऑफिसर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने माइंडशेयर को पूरी तरह बदल दिया और एजेंसी को देश के लगभग हर बड़े अवॉर्ड फंक्शन में डिजिटल और मोबाइल एजेंसी ऑफ द ईयर का खिताब दिलाया। ऐसा सम्मान जोखिम उठाए बिना नहीं मिलता। उनके कार्यकाल में माइंडशेयर ने कारोबार में जबरदस्त बढ़त हासिल की और इंडस्ट्री के 500 से ज्यादा अवॉर्ड जीते। यह सिर्फ ट्रॉफियों का कलेक्शन नहीं था, बल्कि लगातार बेहतर काम करने की सोच का परिणाम था।
अगस्त 2021 में उन्होंने अपने करियर का एक और अहम कदम उठाया। डेंट्सू इंटरनेशनल ने उन्हें चीफ डिजिटल ग्रोथ ऑफिसर और आईप्रॉस्पेक्ट इंडिया के सीईओ के रूप में नियुक्त किया। उस समय इस नियुक्ति को डेंट्सू के बड़े फैसले के रूप में देखा गया, क्योंकि डिजिटल दौर में ग्रोथ के लिए सिर्फ रणनीति नहीं बल्कि इंडस्ट्री की गहरी समझ भी जरूरी होती है और यह समझ दो दशकों के अनुभव से ही आती है। उनकी जिम्मेदारियों में परफॉर्मेंस मार्केटिंग, डेटा-ड्रिवन मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, मार्केटिंग इफेक्टिवनेस और क्रिएटिव एक्सीलेंस जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल थे।
इसके बाद से उन्होंने इन जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाया भी है। मीडिया के चीफ ग्रोथ ऑफिसर और आईप्रॉस्पेक्ट इंडिया के सीईओ के रूप में वह भारत में डेंट्सू के सभी मीडिया ब्रांड्स की ग्रोथ को लीड कर रहे हैं। उनका फोकस क्लाइंट्स के लिए डेंट्सू के ‘इंटीग्रेटेड बाय डिजाइन’ मॉडल के तहत खास समाधान देकर बिजनेस की ग्रोथ को आगे बढ़ाना है। हाल ही में वह डेंट्सू इंडिया की परफॉर्मेंस मार्केटिंग क्षमताओं को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने और उनकी टीम ने एक साफ विजन रखा है- डिजिटल, मॉडर्न क्रिएटिविटी, टेक्नोलॉजी और एआई के जरिए इनोवेशन को आगे बढ़ाना और आने वाले सालों में भारत की अग्रणी डिजिटल मीडिया कंपनी बने रहना।
विनोद थडानी के सफर को खास बनाती है उसकी निरंतरता। चाहे ग्रुपएम की मोबाइल डिवीजन को शुरू से खड़ा करना हो, माइंडशेयर को अवॉर्ड जीतने वाली एजेंसी बनाना हो या भारत में परफॉर्मेंस मार्केटिंग के जटिल माहौल में एक ग्लोबल एजेंसी को आगे बढ़ाना, हर जगह उनकी सोच एक जैसी रही है। वह लगातार नए प्रयोग और इनोवेशन में विश्वास रखते हैं, और यही उन्हें हमेशा दूसरों से आगे बनाए रखता है। तेजी से बदलती इंडस्ट्री में यह सबसे दुर्लभ गुण है, सिर्फ बदलाव के साथ चलना ही नहीं, बल्कि कभी भी मौजूदा स्थिति से संतुष्ट न होना।
ऐसी इंडस्ट्री में जहां कई बार शोर को समझदारी और तेजी को रणनीति समझ लिया जाता है, वहां विनोद थडानी हमेशा एक अलग मानक पेश करते रहे हैं। आज उनके जन्मदिन पर उस शख्स को सलाम, जिसने भारत में डिजिटल लीडरशिप का मतलब तय करने में बड़ी भूमिका निभाई- सिर्फ एक साल के लिए नहीं, बल्कि पूरे दौर के लिए।
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