मान लीजिए आपने गूगल पर सवाल सर्च किया और AI बॉक्स में तुरंत जवाब मिल गया, बिना किसी लिंक पर जाए आपने पढ़ा और पेज बंद कर दिया—यही बदलाव अब पब्लिशर्स के लिए बड़ी चुनौती है।
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Vikas Saxena
गूगल ने मई 2024 में अमेरिका में AI Overview (AIO) लॉन्च किया था। मई 2025 तक यह फीचर 200 से ज्यादा देशों और 40 भाषाओं तक पहुंच गया। इसमें भारत की हिंदी, तमिल और तेलुगू जैसी भाषाएं भी शामिल हैं। नतीजा? मीडिया इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका।
प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) ने मार्च 2025 में अमेरिका के 900 लोगों की इंटरनेट इस्तेमाल करने की आदतों को ट्रैक किया और गूगल पर की गई 68 हजार से ज्यादा सर्च का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में सामने आया कि जब AI Overview दिखाई देता है, तो लोग सिर्फ 8 फीसदी मामलों में ही किसी लिंक पर क्लिक करते हैं। जबकि बिना AI Overview के यह आंकड़ा 15 फीसदी था। यानी क्लिक में करीब 47 फीसदी की गिरावट आई। सबसे बड़ी बात यह कि AI Overview में दिए गए स्रोतों पर सिर्फ 1 फीसदी लोगों ने क्लिक किया।
Similarweb के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2024 से मई 2025 के बीच खबरों से जुड़ी सर्च में “जीरो-क्लिक” सर्च का हिस्सा 56 फीसदी से बढ़कर 69 फीसदी हो गया। आसान शब्दों में कहें तो खबरों से जुड़ी 10 में से करीब 7 सर्च ऐसी रहीं, जिनमें लोग किसी भी वेबसाइट पर नहीं पहुंचे।
वहीं, रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ जर्नलिज्म (Reuters Institute for the Study of Journalism) की जनवरी 2026 की रिपोर्ट और ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है। दुनिया के 51 देशों के 280 मीडिया लीडर्स का सर्वे किया गया, जिनमें 64 एडिटर-इन-चीफ और 64 चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर्स (CEO) शामिल थे। उनका मानना है कि अगले तीन साल में सर्च इंजन से आने वाला ट्रैफिक औसतन 43 फीसदी तक गिर सकता है।
चार्टबीट ने 2,500 से ज्यादा न्यूज वेबसाइट्स के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि नवंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच गूगल सर्च से आने वाले विजिटर्स में 33 फीसदी की गिरावट आई। वहीं, गूगल डिस्कवर से आने वाला ट्रैफिक 21 फीसदी घट गया। अमेरिका में यह गिरावट और ज्यादा, यानी 38 फीसदी रही।
छोटे पब्लिशर्स का हाल सबसे बुरा
इस नुकसान का असर सभी पर एक जैसा नहीं पड़ा। बड़े पब्लिशर्स- जैसे The New York Times, जिसके 2025 के आखिर तक 1.278 करोड़ सब्सक्राइबर्स थे, अभी भी किसी तरह टिके हुए हैं। लेकिन छोटे पब्लिशर्स को सबसे बड़ा झटका लगा। 2025 में छोटे पब्लिशर्स का गूगल रेफरल ट्रैफिक करीब 60 फीसदी तक गिर गया, जबकि बड़े पब्लिशर्स में यह गिरावट 22 फीसदी रही।
Business Insider का ऑर्गेनिक सर्च ट्रैफिक अप्रैल 2022 से अप्रैल 2025 के बीच 55 फीसदी तक गिर गया। हालत ऐसी हुई कि कंपनी को मई 2025 में अपने 21 फीसदी एम्प्लॉयीज की छंटनी करनी पड़ी।
वहीं HuffPost की डेस्कटॉप और मोबाइल साइट्स पर सर्च से आने वाले विजिटर्स की संख्या आधी रह गई। यहां तक कि The New York Times का सर्च ट्रैफिक शेयर भी 2022 के 44 फीसदी से घटकर 2025 में 37 फीसदी पर आ गया।
DMG Media , जो MailOnline और Metro जैसे बड़े ब्रिटिश प्रकाशन चलाती है, ने सितंबर 2025 में बताया कि कुछ खास सर्च में क्लिक-थ्रू रेट 89 फीसदी तक गिर गई।
शिक्षा प्लेटफॉर्म Chegg को तो और बड़ा नुकसान हुआ। जनवरी 2024 से जनवरी 2025 के बीच कंपनी का गैर-सब्सक्राइबर ट्रैफिक 49 फीसदी तक गिर गया। इसके बाद कंपनी ने गूगल के खिलाफ प्रतिस्पर्धा विरोधी कानून (एंटीट्रस्ट) का मुकदमा भी दायर कर दिया।
Google की AI और SEO का बदलता मॉडल
कभी SEO यानी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन का सीधा मतलब होता था- सही कीवर्ड ढूंढो, अच्छा कंटेंट लिखो, गूगल पर ऊपर जगह बनाओ, ट्रैफिक आएगा और विज्ञापनों से कमाई होगी। यह मॉडल कई सालों तक चलता रहा। लेकिन 2026 तक आते-आते यह मॉडल बुरी तरह बदल चुका है।
Seer Interactive ने जून 2024 से सितंबर 2025 के बीच 42 संस्थाओं की 3,119 जानकारी आधारित सर्च को ट्रैक किया। रिपोर्ट में पाया गया कि जिन सर्च में AI Overview दिखाई देता था, वहां ऑर्गेनिक क्लिक-थ्रू रेट 1.76 फीसदी से गिरकर सिर्फ 0.61 फीसदी रह गई। यानी करीब 61 फीसदी की गिरावट। वहीं पेड क्लिक-थ्रू रेट 19.7 फीसदी से टूटकर 6.34 फीसदी पर आ गई, यानी 68 फीसदी की भारी गिरावट।
Semrush के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की तीसरी तिमाही तक गूगल की करीब 20 से 25 फीसदी सर्च में AI Overview दिखने लगा था। वहीं Gartner का अनुमान है कि 2026 के आखिर तक ऑर्गेनिक सर्च ट्रैफिक का 25 फीसदी हिस्सा AI चैटबॉट्स और वॉइस असिस्टेंट्स की तरफ चला जाएगा।
भारत में भी तेजी से बदलाव दिख रहा है। AI सर्च इंजन Perplexity ने 2024-25 के दौरान 640 फीसदी की बढ़त दर्ज की, खासकर Airtel के साथ साझेदारी के बाद। वहीं ChatGPT अब भारत में प्रोफेशनल्स के बीच दूसरा सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला प्लेटफॉर्म बन चुका है।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में 58 फीसदी सर्च अब आवाज के जरिए हो रही हैं। लोग हिंदी, तमिल, तेलुगू और बंगाली जैसी भाषाओं में सवाल पूछ रहे हैं।
इस बदलाव ने SEO इंडस्ट्री की दिशा ही बदल दी है। पहले कीवर्ड रैंकिंग सबसे ज्यादा मायने रखती थी, लेकिन अब “जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन” यानी GEO का दौर शुरू हो गया है। इसका मतलब है कि AI के जवाबों में आपके ब्रैंड या कंटेंट का जिक्र हो, चाहे यूजर आपकी वेबसाइट पर आए या नहीं।
अहरेफ्स की दिसंबर 2025 की स्टडी के मुताबिक, जिन कीवर्ड्स पर AI Overview दिखती है, वहां पहले नंबर पर आने वाली वेबसाइट की क्लिक-थ्रू रेट में 34.5 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई।
Ad Revenue की तस्वीर: पब्लिशर्स का दर्द
पब्लिशर्स भी चुप नहीं बैठे हैं। वे इस संकट से निपटने के लिए कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहे हैं।
बड़े पब्लिशर्स अब AI कंपनियों के साथ समझौते कर रहे हैं। मतलब- AI कंपनियां उनका कंटेंट इस्तेमाल करें और बदले में उन्हें पैसा दें।
News Corp ने OpenAI के साथ 5 साल की 25 करोड़ डॉलर से ज्यादा की डील की है। वहीं The New York Times को Amazon की एलेक्सा और रूफस शॉपिंग असिस्टेंट सेवाओं से हर साल करीब 2 से 2.5 करोड़ डॉलर मिल रहे हैं।
इसके अलावा Associated Press, Time, Fortune, CNN, The Washington Post और Condé Nast जैसी कई बड़ी मीडिया कंपनियां किसी न किसी AI कंपनी के साथ समझौते कर चुकी हैं।
लेकिन यह मॉडल फिलहाल सिर्फ बड़े खिलाड़ियों के लिए फायदेमंद दिख रहा है। मिड-साइज पब्लिशर्स को 10 लाख से 50 लाख डॉलर तक की डील मिल सकती है, जो उनके ट्रैफिक नुकसान की भरपाई के लिए काफी नहीं है। वहीं छोटे पब्लिशर्स और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अभी ऐसे समझौतों के दरवाजे लगभग बंद हैं।
इसी बीच Cloudflare ने “पे पर क्रॉल” नाम का एक मार्केटप्लेस शुरू किया है। इसमें पब्लिशर्स तय कर सकते हैं कि AI कंपनियां उनके कंटेंट को स्कैन करने के बदले कितना पैसा देंगी।
जून 2025 में Cloudflare के आंकड़ों ने एक चौंकाने वाली तस्वीर दिखाई। गूगल हर 9 से 14 पेज स्कैन करने पर एक विजिटर वेबसाइट को भेजता है। लेकिन OpenAI करीब 1,700 पेज स्कैन करने के बाद सिर्फ एक विजिटर भेजता है। वहीं Anthropic का अनुपात तो 73,000 पेज पर सिर्फ एक विजिटर का रहा।
यही वजह है कि दुनिया की 79 फीसदी बड़ी न्यूज वेबसाइट्स ने कम से कम एक AI ट्रेनिंग बॉट को ब्लॉक कर दिया है।
जो पब्लिशर्स AI की मार से बचे हैं, उनका एक कॉमन सिक्रेट है- उन्होंने गूगल पर निर्भरता कम की।
The New Yorker ने 2025 में रिकॉर्ड कमाई, रिकॉर्ड मुनाफा और रिकॉर्ड सब्सक्राइबर्स हासिल किए। वहीं The New York Times के 2025 के आखिर तक 1.278 करोड़ सब्सक्राइबर्स हो चुके थे। कंपनी का लक्ष्य 2027 तक इसे बढ़ाकर 1.5 करोड़ तक पहुंचाने का है।
Time मैगजीन का अनुमान है कि 2026 में उसकी कुल कमाई का 50 फीसदी हिस्सा इवेंट्स से आएगा, जबकि 2023 में यह हिस्सा 28 फीसदी था। वहीं Bloomberg Media के ग्लोबल फोरम्स से 2025 में स्पॉन्सरशिप कमाई में 30 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 76 फीसदी मीडिया लीडर्स का कहना है कि अब वे चाहते हैं कि उनके कर्मचारी “क्रिएटर्स” की तरह काम करें। यानी सिर्फ खबर लिखना नहीं, बल्कि ऑडियंस के साथ सीधा जुड़ाव बनाना भी जरूरी हो गया है।
इसके अलावा 50 फीसदी पब्लिशर्स अब क्रिएटर पार्टनरशिप्स पर काम कर रहे हैं, ताकि नए दर्शकों तक पहुंच बनाई जा सके।
ChatGPT से Traffic: उम्मीद कम, हकीकत और कम
कुछ लोगों को लगता है कि अगर गूगल से ट्रैफिक कम हो रहा है, तो उसकी भरपाई ChatGPT जैसे AI प्लेटफॉर्म्स से हो जाएगी।
सितंबर से नवंबर 2025 के बीच ChatGPT ने पब्लिशर्स को करीब 1.2 अरब आउटगोइंग रेफरल्स भेजे, जो पिछले साल के मुकाबले 52 फीसदी ज्यादा थे। सुनने में यह आंकड़ा अच्छा लगता है, लेकिन असली तस्वीर अलग है।
कंडक्टर की रिसर्च के मुताबिक, सभी AI प्लेटफॉर्म्स मिलकर भी पब्लिशर्स के कुल ट्रैफिक का सिर्फ 1 फीसदी हिस्सा ही भेज पा रहे हैं।
वहीं रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट बताती है कि अकेला गूगल, ChatGPT के मुकाबले 500 गुना ज्यादा रेफरल्स भेजता है। अगर गूगल सर्च और गूगल डिस्कवर को साथ जोड़ दें, तो यह अंतर 1,300 गुना तक पहुंच जाता है।
यानी AI सर्च अभी नया ट्रैफिक स्रोत नहीं बन पाया है। उल्टा, उसने पब्लिशर्स का पुराना ट्रैफिक कम कर दिया है।
भारत के पब्लिशर्स के लिए क्या मायने रखता है?
भारत में internet users की संख्या 2025 के अंत तक 1.03 billion यानी एक अरब तीन करोड़ पार कर गई। यहाँ digital news market 2026 के अंत तक $1 billion revenue generate करने का अनुमान है।
लेकिन AI का असर भारत पर भी उतना ही गहरा है। Perplexity अब India में US से भी बड़ा market बन गया है। ChatGPT फरवरी 2026 तक 900 मिलियन वीकली एक्टिव यूजर्स तक पहुंच गया और भारत में भी 10 करोड़ weekly users। Google AI Overviews 40 भाषाओं में हैं जिनमें हिंदी भी शामिल है।
भारत के हिंदी न्यूज़ पोर्टल्स, regional language sites और छोटे digital पब्लिशर्स — जो Google Search से अपना ज़्यादातर traffic पाते थे — अब एक बड़े transition के मुहाने पर खड़े हैं।
असली सवाल: कंटेंट बनाने वाले को पैसा कौन देगा?
यह सिर्फ बिजनेस मॉडल का मामला नहीं है, बल्कि पत्रकारिता के अस्तित्व का सवाल बन चुका है।
अगर पब्लिशर्स कमाई नहीं कर पाएंगे, तो वे रिपोर्टर्स नहीं रख पाएंगे। रिपोर्टर्स नहीं होंगे, तो ग्राउंड रिपोर्टिंग कम हो जाएगी। और जब ग्राउंड रिपोर्टिंग ही नहीं होगी, तो एआई के पास इस्तेमाल करने के लिए ओरिजिनल कंटेंट भी नहीं बचेगा। बिना ओरिजिनल कंटेंट के एआई सिस्टम भी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे।
यानी यह एक खतरनाक चक्र बनता जा रहा है, जो पूरे कंटेंट इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है।
Cloudflare के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Matthew Prince ने जुलाई 2025 में पब्लिशर्स को ऐसे टूल्स दिए, जिनकी मदद से वे एआई बॉट्स को ब्लॉक कर सकते हैं। नए Cloudflare ग्राहकों के लिए यह सुविधा डिफॉल्ट रूप से शुरू की गई।
इसका मतलब है कि अब पब्लिशर्स अपने कंटेंट को एआई कंपनियों के लिए मुफ्त में उपलब्ध नहीं कराना चाहते। वे अपने कंटेंट की अहमियत और कमी दोनों बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन गूगल को पूरी तरह ब्लॉक करना आसान नहीं है, क्योंकि सर्च बाजार में उसकी हिस्सेदारी 90 फीसदी से ज्यादा है। अगर कोई पब्लिशर गूगल को ब्लॉक कर दे, तो उसकी वेबसाइट इंटरनेट पर लगभग गायब जैसी हो सकती है।
आगे का रास्ता
एक युग का अंत, एक नई शुरुआत
जिस क्लिक इकॉनमी पर पिछले 20 साल की डिजिटल पत्रकारिता टिकी हुई थी, वह अब तेजी से बदल रही है। AI ने सामान्य कंटेंट को लगभग एक जैसी चीज बना दिया है। अब साधारण सवालों के जवाब AI खुद देने लगा है।
ऐसे में वही पत्रकारिता टिक पाएगी, जिसमें ओरिजिनल रिपोर्टिंग हो, एक्सक्लूसिव आंकड़े हों, विशेषज्ञों का विश्लेषण हो और ऐसा कंटेंट हो जिसे AI आसानी से कॉपी न कर सके।
2026 की मीडिया दुनिया की सबसे बड़ी चिंता यही है — “इनविजिबल पब्लिशर”। यानी वह पब्लिशर जो कंटेंट तो बना रहा है, जवाब भी उसी के कंटेंट से तैयार हो रहे हैं, लेकिन लोग उसकी वेबसाइट तक पहुंच ही नहीं रहे।
हालांकि इतिहास बताता है कि हर बड़ी तकनीकी क्रांति के समय मीडिया इंडस्ट्री ने खुद को बदला है। जब रेडियो आया तो अखबारों को डर लगा। टीवी आया तो रेडियो को खतरा महसूस हुआ। इंटरनेट आया तो टीवी इंडस्ट्री चिंतित हो गई। लेकिन हर दौर में मीडिया ने खुद को नए तरीके से ढाला।
अब AI सर्च के दौर में भी पब्लिशर्स को खुद को बदलना होगा। सिर्फ गूगल के हिसाब से नहीं, बल्कि अपने पाठकों और दर्शकों की जरूरतों के हिसाब से।
टेकमैग्नेट आज SEO, PPC, कंटेंट मार्केटिंग और वेब डेवलपमेंट जैसी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी को गूगल प्रीमियर पार्टनर (Google Premier Partner) के रूप में भी पहचान मिली है।
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Samachar4media Bureau
डिजिटल मार्केटिंग की दुनिया में करीब दो दशक से सक्रिय सरवेश बागला (Sarvesh Bagla) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने 2006 में टेकमैग्नेट (Techmagnate) की शुरुआत की थी और समय के साथ इसे भारत की जानी-मानी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों में शामिल किया।
टेकमैग्नेट आज SEO, PPC, कंटेंट मार्केटिंग और वेब डेवलपमेंट जैसी सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी को गूगल प्रीमियर पार्टनर (Google Premier Partner) के रूप में भी पहचान मिली है। बागला के नेतृत्व में एजेंसी को विभिन्न इंडस्ट्री ट्रैकर्स ने भारत की प्रमुख SEO और डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों में जगह दी है।
बागला की शैक्षणिक पृष्ठभूमि गणित और टेक्नोलॉजी से जुड़ी रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से गणित में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट से मास्टर्स ऑफ इंफॉर्मेशन सिस्टम्स और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से मास्टर्स ऑफ साइंस इन इंफॉर्मेशन नेटवर्किंग की पढ़ाई की।
उद्यमिता की दुनिया में आने से पहले वह अमेरिका में वेरिजॉन (Verizon) के साथ सॉफ्टवेयर और सिस्टम्स आर्किटेक्ट के तौर पर काम कर चुके हैं। उन्होंने WFM India की सह-स्थापना की और ब्लॉगर्स व कंटेंट क्रिएटर्स के लिए BlogX भी शुरू किया।
उनके करियर की खास उपलब्धियों में बजाज फिनसर्व (Bajaj Finserv) के साथ किया गया काम भी शामिल है। कंपनी के मुताबिक, टेकमैग्नेट की टीम ने कैंपेन शुरू होने के करीब 18 महीनों के भीतर ‘पर्सनल लोन’ जैसे प्रतिस्पर्धी कीवर्ड पर ब्रांड को शीर्ष रैंकिंग तक पहुंचाने में मदद की।
आज टेकमैग्नेट BFSI, हेल्थकेयर, ऑटोमोटिव और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों के लिए डिजिटल मार्केटिंग समाधान उपलब्ध करा रही है। एक सिस्टम आर्किटेक्ट से डिजिटल मार्केटिंग उद्यमी तक बागला का सफर एजेंसी इंडस्ट्री में उनकी अलग पहचान को दर्शाता है।
खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है।
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Samachar4media Bureau
खाद्य सुरक्षा को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। इसके अलावा दमन की SDP Industries Pvt Ltd को अपने घी उत्पादों की बिक्री करने से रोक दिया गया है।
FSSAI ने रविवार को बताया कि Marche Retail के परिसर में निरीक्षण और उसके बाद की जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों से जुड़े कई मामलों में कमियां पाई गईं।
कई स्तरों पर मिली कमियां
नियामक के मुताबिक, Marche Retail के यहां मिली कमियां सिर्फ किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं थीं। जांच में प्रतिष्ठान के डिजाइन और संचालन से जुड़े नियमों, साफ-सफाई, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, फूड हैंडलर्स की ट्रेनिंग और जरूरी रिकॉर्ड रखने से जुड़े नियमों में भी खामियां सामने आईं।
FSSAI ने इन कमियों को खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन से जुड़ी गंभीर चूक के तौर पर देखा और इसके बाद कंपनी के लाइसेंस को 30 दिनों के लिए निलंबित करने की कार्रवाई की।
SDP Industries के घी की बिक्री पर रोक
इसके साथ ही FSSAI ने SDP Industries Pvt Ltd, जो दमन में स्थित है, के घी उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगा दी है। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई प्रवर्तन कार्रवाई का हिस्सा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में SDP Industries के मामले में उल्लंघन की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
FSSAI की ताजा कार्रवाई से साफ है कि खाद्य नियामक अब सिर्फ उत्पादों की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, कर्मचारियों की ट्रेनिंग, व्यक्तिगत स्वच्छता और जरूरी रिकॉर्ड रखने जैसे नियमों के पालन पर भी सख्ती से नजर रख रहा है।
Dream11 अपने पहले वाले Real-Money Gaming (RMG) मॉडल से फोकस हटाकर अब स्पोर्ट्स फैंस के लिए कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले पर ज्यादा ध्यान देगी।
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फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म Dream11 अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करता नजर आ रहा है। कंपनी ने यूजर्स को बताया है कि वह अपने पहले वाले Real-Money Gaming (RMG) मॉडल से फोकस हटाकर अब स्पोर्ट्स फैंस के लिए कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले पर ज्यादा ध्यान देगी। हालांकि, प्लेटफॉर्म पर फ्री कंटेस्ट जारी रहेंगे।
Dream11 ने यूजर्स को भेजे एक नोटिफिकेशन में कहा है कि वह नए फोकस के साथ खुद को स्पोर्ट्स फैंस के लिए 'सिंगल डेस्टिनेशन' के तौर पर तैयार कर रहा है। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि यूजर्स फ्री कंटेस्ट में हिस्सा लेना जारी रख सकते हैं। इसके साथ ही Dream11 ने बताया कि जिन यूजर्स की एक्टिव सब्सक्रिप्शन फीस है, उसे 72 घंटे के भीतर रिफंड कर दिया जाएगा।
क्या Dream11 बंद हो रहा है?
Dream11 के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं कि क्या कंपनी अपना पेड गेमिंग बिजनेस पूरी तरह बंद करने जा रही है या फिर प्लेटफॉर्म का नया वर्जन तैयार किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी के नोटिफिकेशन में प्लेटफॉर्म को बंद करने की बात नहीं कही गई है।
फिलहाल कंपनी के संदेश से इतना साफ है कि उसके पुराने मॉडल में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। पेड कंटेस्ट और सब्सक्रिप्शन को पीछे किया जा रहा है, जबकि फ्री कंटेस्ट, स्पोर्ट्स कंटेंट, फैन एंगेजमेंट और सोशल गेमप्ले को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
Online Gaming Act के बीच आया बदलाव
Dream11 का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत का ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर रेगुलेटरी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। Online Gaming Act, 2025 के बाद रियल-मनी ऑनलाइन गेमिंग को लेकर देश में नियम काफी सख्त हुए हैं।
इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आगे बढ़ रही है। इन मामलों में यह तय होना है कि स्किल और चांस दोनों तरह के पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स पर लागू प्रतिबंध आगे भी जारी रहेगा या नहीं। ऐसे माहौल में Dream11 का अपने पुराने रियल-मनी मॉडल से फोकस हटाना इंडस्ट्री के लिए अहम माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज
Dream11 के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि कंपनी अपने पुराने बिजनेस मॉडल को छोड़ रही है, जबकि कुछ का कहना है कि Dream11 अब खुद को सोशल गेमिंग और स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म के तौर पर नए सिरे से पेश कर सकता है।
इस बदलाव का असर पूरे फैंटेसी स्पोर्ट्स सेक्टर पर पड़ने को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ लोगों का कहना है कि अगर भारत में रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स का कारोबार काफी कम होता है, तो खिलाड़ी विदेशी या ऑफशोर गेमिंग सेवाओं की तरफ जा सकते हैं। वहीं, कुछ लोग पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय स्पष्ट रेगुलेशन की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एक प्रतिक्रिया में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या यह Dream11 के पुराने मॉडल के अंत की शुरुआत है। फैंटेसी स्पोर्ट्स में मनोरंजन और मुकाबले के साथ पैसे जीतने का मौका भी होता था, लेकिन रेगुलेटरी बहस के दौरान इसे लेकर जुए से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं।
फिलहाल बंद नहीं, लेकिन दिशा जरूर बदली
फिलहाल Dream11 की तरफ से आया संदेश कंपनी के बंद होने के बजाय बिजनेस मॉडल में बदलाव की ओर इशारा करता है। सब्सक्रिप्शन फीस को 72 घंटे के भीतर रिफंड करने और फ्री कंटेस्ट जारी रखने की बात के साथ कंपनी अब स्पोर्ट्स फैंस को जोड़ने, कंटेंट और सोशल गेमिंग पर ज्यादा ध्यान देती नजर आ रही है। यानी Dream11 के अगले दौर में फोकस रियल-मनी दांव के बजाय स्पोर्ट्स फैनडम और एंगेजमेंट पर रहने वाला है।
एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के जाने-माने नाम बॉबी पवार ने अपने रचनात्मक सफर का एक नया अध्याय शुरू किया है। कविता संग्रह का लॉन्च 21 अगस्त को हुआ, जिसमें एडवर्टाइजिंग व मार्केटिंग जगत के दिग्गज मौजूद रहे।
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एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री के जाने-माने नाम बॉबी पवार ने अपने रचनात्मक सफर का एक नया अध्याय शुरू किया है। उन्होंने अपना पहला कविता संग्रह ‘An Empty Heart Is a Loaded Gun’ लॉन्च किया है।
पुस्तक का लॉन्च 21 अगस्त को हुआ, जिसमें एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग जगत के प्रमुख लोग मौजूद रहे। यह पुस्तक कविता के जरिए भावनाओं, रिश्तों, पहचान और मानवीय अनुभवों जैसे विषयों को सामने लाती है।
भारत और अमेरिका में एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में काम कर चुके बॉबी पवार ने अपने करियर की शुरुआत Ogilvy India से की थी। इसके बाद उन्होंने DDB Mudra, JWT और Publicis जैसी प्रमुख एजेंसियों में वरिष्ठ क्रिएटिव लीडरशिप भूमिकाएं निभाईं।
बॉबी पवार ने नवंबर 2023 तक हवास (Havas) में चेयरमैन और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद उन्होंने एक स्वतंत्र क्रिएटिव के तौर पर अपनी नई पारी शुरू की और अब अपना कविता संग्रह लॉन्च किया है।
एनडीटीवी के सीईओ राहुल कंवल ने बताया कि मजबूत मीडिया संस्थान बनाने के लिए लीडर को दूसरे पत्रकारों को आगे बढ़ने और चमकने की जगह देनी चाहिए।
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एनडीटीवी (NDTV) के सीईओ और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल (Rahul Kanwal) ने मीडिया संस्थान खड़ा करने की अपनी नेतृत्व सोच साझा की है। एक्सचेंज4मीडिया के साथ हालिया बातचीत में उन्होंने प्रणय रॉय (Prannoy Roy), अरुण पुरी (Aroon Purie) और राघव बहल (Raghav Bahl) जैसे मीडिया उद्यमियों का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे समय तक टिकने वाले संस्थान वही बना पाते हैं, जहां नेतृत्व दूसरे पत्रकारों और एडिटोरियल ब्रांड्स को उभरने का अवसर देता है।
राहुल कंवल ने बताया कि वह रोजाना प्राइम-टाइम शो की एंकरिंग से जानबूझकर दूर रहते हैं। उनके मुताबिक एडिटर-इन-चीफ को जरूरत पड़ने पर खुद पीछे हटना चाहिए, ताकि न्यूज़रूम में दूसरे लोगों को भी अपनी पहचान बनाने का मौका मिले।
कंवल ने एनडीटीवी (NDTV) में प्रणय रॉय के नेतृत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि वह दूसरे पत्रकारों की लोकप्रियता को लेकर असुरक्षित नहीं थे। उनके दौर में राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai), बरखा दत्त (Barkha Dutt) और अरनब गोस्वामी (Arnab Goswami) जैसे पत्रकारों ने अपनी अलग पहचान बनाई।
इसी तरह उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) के अरुण पुरी का उदाहरण दिया, जिन्होंने प्रभु चावला (Prabhu Chawla) और शेखर गुप्ता (Shekhar Gupta) जैसे संपादकीय चेहरों को आगे बढ़ने की जगह दी। राघव बहल के नेटवर्क18 (Network18) का उल्लेख करते हुए भी उन्होंने मजबूत प्रतिभाओं के साथ संस्थान बनाने की इसी सोच को रेखांकित किया।
कंवल ने कहा कि उनकी अपनी नेतृत्व शैली भी ऐसे लोगों को साथ लाने पर आधारित है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में उनसे ज्यादा सक्षम हों। उनके मुताबिक, “आपसे बेहतर लोग ही किसी मूल्यवान संस्थान के निर्माण में योगदान देते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई लीडर असुरक्षा की भावना से अपने से कम सक्षम लोगों को नियुक्त करता रहेगा, तो वह कभी एक महान संगठन नहीं बना पाएगा।
मोहित चेरियन फरवरी 2020 से डियाजियो इंडिया के साथ जुड़े हुए हैं। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ब्रांड मार्केटिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
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डियाजियो इंडिया (Diageo India) ने मोहित चेरियन को कैटेगरी डायरेक्टर (Category Director) के पद पर प्रमोट किया है। इससे पहले वह कंपनी में सीनियर जनरल मैनेजर, ब्रांड मार्केटिंग के तौर पर कार्यरत थे और BII Scotches के मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
मोहित चेरियन फरवरी 2020 से डियाजियो इंडिया के साथ जुड़े हुए हैं। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ब्रांड मार्केटिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। नई जिम्मेदारी में चेरियन डियाजियो इंडिया के कैटेगरी से जुड़े बिजनेस और ब्रांड मार्केटिंग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
डियाजियो इंडिया में शामिल होने से पहले चेरियन आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल (Aditya Birla Fashion and Retail) के साथ काम कर चुके हैं। वहां उनकी अंतिम भूमिका असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ मार्केटिंग - Allen Solly की थी।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार और आजतक व गुड न्यूज टुडे की सीनियर मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह का आज जन्मदिन है।
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वरिष्ठ टीवी पत्रकार और आजतक व गुड न्यूज टुडे की सीनियर मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह का आज जन्मदिन है। भारतीय मीडिया जगत में श्वेता सिंह एक जाना-पहचाना नाम हैं। बेबाक अंदाज़, गहरी समझ और पेशेवर दक्षता ने उन्हें लाखों दर्शकों की पहली पसंद बना दिया है। जटिल मुद्दों को सहज भाषा में समझाने की उनकी क्षमता और प्रभावशाली एंकरिंग शैली ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।
लगातार मेहनत और समर्पण के दम पर उन्होंने पत्रकारिता में नए मानक स्थापित किए हैं। करीब दो दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय श्वेता पिछले करीब दो दशक से ‘आजतक’ परिवार का हिस्सा हैं। उनके लंबे अनुभव और संतुलित प्रस्तुति ने उन्हें न्यूज रूम से लेकर दर्शकों तक हर जगह विशेष स्थान दिलाया है।
टीवी न्यूज़ की लगभग हर विधा में दक्ष श्वेता सिंह को अब तक सर्वश्रेष्ठ एंकर, सर्वश्रेष्ठ प्रड्यूसर और सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टर जैसे सम्मान मिल चुके हैं। साल 2016 में उन्होंने अलग-अलग आयोजनों में एक ही वर्ष में 12 अवॉर्ड हासिल कर इतिहास रच दिया था। यह उपलब्धि अब तक पत्रकारिता जगत में मिसाल मानी जाती है।
न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्पेस में उनके अनुकरणीय योगदान और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए श्वेता सिंह को प्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2023 में ‘बेस्ट एंकर–हिंदी’ कैटेगरी में गोल्ड मेडल से नवाजा जा चुका है।
वर्तमान में श्वेता सिंह आजतक पर रात 8 बजे प्रसारित होने वाले प्रमुख शो ‘ख़बरदार’ (Khabardar) की एंकरिंग करती हैं। यह शो उनकी संवाद क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और दर्शकों से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है।
राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीति, बिज़नेस, खेल और मनोरंजन—हर विषय पर उनकी पकड़ समान रूप से मजबूत है। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग हो या एंकरिंग, दर्शक उन्हें भरोसे के साथ देखते हैं। मशहूर टॉक शो ‘सीधी बात’ की मेजबानी से लेकर स्पेशल प्रोग्राम्स तक, उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से हर मंच पर अपनी छाप छोड़ी है।
श्वेता सिंह ने हमेशा पत्रकारिता को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की तरह निभाया है। उनकी निर्भीकता और सटीक विश्लेषण ने उन्हें अलग पहचान दी है। यही वजह है कि वह देश की चुनिंदा पत्रकारों में गिनी जाती हैं, जिनकी बात दर्शक न केवल सुनते हैं, बल्कि उस पर भरोसा भी करते हैं।
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाना या उसकी पहुंच सीमित करना सरकार की नीति से जुड़ा मामला है।
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बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाना या उसकी पहुंच सीमित करना सरकार की नीति से जुड़ा मामला है। ऐसे में इस पर फैसला लेना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर उठाई गई चिंताओं और सुझावों पर विचार करे। इसके लिए सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर सकती है। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को इस मुद्दे पर फैसला लेने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है।
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर दायर हुई थी PIL
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए कोर्ट पहुंचा था। याचिका तीन साल के बच्चे की मां कीर्ति दुआ और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता ने दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने बच्चों की सोशल मीडिया तक खुली पहुंच पर चिंता जताते हुए इसमें प्रतिबंध लगाने और बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण से जुड़ी सामग्री यानी Child Sexual Abuse Material (CSAM) से बचाने के लिए ज्यादा मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बच्चों का इंटरनेट पर अश्लील और उम्र के लिहाज से अनुचित सामग्री के संपर्क में आना उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल सकता है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से भी जोड़ते हुए दलील दी।
संविधान के अनुच्छेद 39(f) का भी दिया हवाला
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 39(f) का भी हवाला दिया गया। इसमें राज्य से बच्चों को शोषण से बचाने और उन्हें स्वस्थ तरीके से विकास का अवसर देने की अपेक्षा की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने Economic Survey 2025-26 का भी जिक्र किया। इसमें युवाओं के बीच सोशल मीडिया की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को सामने रखा गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सोशल मीडिया कंपनियों की ओर से अपनाए गए स्वैच्छिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा के लिए बाध्यकारी यानी कानूनी तौर पर लागू होने वाले नियमों की जरूरत है।
Meta से भी मजबूत तकनीकी व्यवस्था की मांग
याचिका में Meta को भी निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह ऐसी तकनीकी व्यवस्था और ऑडिट सिस्टम लागू करे, जिससे बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री की पहचान कर उसे जल्द से जल्द हटाया जा सके।
Meta की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कोर्ट को बताया कि Facebook और Instagram पर CSAM की पहचान और उसे हटाने के लिए पहले से ही कई तकनीकी व्यवस्थाएं लागू हैं।
उनके मुताबिक, Facebook पर CSAM की सक्रिय पहचान की दर 99.5 फीसदी और Instagram पर 95.2 फीसदी है। उन्होंने बताया कि प्लेटफॉर्म ऐसी सामग्री की पहचान के लिए कई तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ हानिकारक सामग्री सिस्टम की नजर से बच सकती है।
कोर्ट ने प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया
याचिकाकर्ताओं ने इसके बावजूद ज्यादा मजबूत तकनीकी व्यवस्था और नियमित ऑडिट की मांग की। लेकिन हाईकोर्ट ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सीधे प्रतिबंध लगाने या कोई खास पाबंदी तय करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने या उनकी पहुंच सीमित करने जैसे व्यापक फैसले सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी के तहत आते हैं।कोर्ट ने केंद्र सरकार को याचिकाकर्ताओं की चिंताओं और सुझावों पर विचार करने को कहा है। इसके लिए सरकार सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज और दूसरे संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा कर सकती है।
अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब इस मुद्दे पर अगली बड़ी कार्रवाई केंद्र सरकार के स्तर पर होगी। सरकार को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को लेकर नियमों पर विचार करना होगा।
हालांकि, कोर्ट ने सरकार को कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है। यानी अभी यह साफ नहीं है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कब तक कोई अंतिम नीति या फैसला लेकर आएगी।
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध या अन्य व्यापक पाबंदियां तय करना अदालत का नहीं, बल्कि सरकार के नीति-निर्धारण का विषय है। ऐसे में अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बहस का अगला दौर कोर्ट के बजाय नीति के स्तर पर होगा।
यह सोनी के साथ पांडे की दूसरी पारी है। इससे पहले वह जनवरी 2021 से मई 2023 तक कंपनी के साथ जुड़े रहे थे। अब दोबारा सोनी से जुड़ने के बाद वह स्पोर्ट्स एड सेल्स से जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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अंकित पांडे ने सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India) में Group Head- Ad Sales (Sports) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने LinkedIn अपडेट के जरिए अपनी नियुक्ति की जानकारी साझा की। यह सोनी के साथ उनकी दूसरी पारी है।
सोनी से जुड़ने से पहले पांडे जियोस्टार (JioStar) के साथ काम कर रहे थे, जहां वह Associate Director- Sports (TV & Digital) के पद पर थे। उन्होंने जियोस्टार में करीब दो साल बिताए और स्पोर्ट्स से जुड़े टीवी व डिजिटल बिजनेस में जिम्मेदारी संभाली।
अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा करते हुए पांडे ने कहा कि यह उनके लिए पूरी तरह नई शुरुआत की बजाय घर वापसी जैसा अनुभव है। उन्होंने जियोस्टार स्पोर्ट्स ऐड्स के साथ बिताए समय के दौरान मिली सीख, साझेदारियों और दोस्तियों के लिए आभार भी जताया।
यह सोनी के साथ पांडे की दूसरी पारी है। इससे पहले वह जनवरी 2021 से मई 2023 तक कंपनी के साथ जुड़े रहे थे। अब दोबारा सोनी से जुड़ने के बाद वह स्पोर्ट्स एड सेल्स से जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अंकित पांडे के करियर में वायकॉम18 (Viacom18) के साथ भी काम करने का अनुभव शामिल है। मीडिया और स्पोर्ट्स एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में उनका अनुभव नई भूमिका में अहम माना जा रहा है।
दिव्यम चतुर्वेदी को हाइब्रिड इंडिया (Hybrid India) में कंट्री हेड (Country Head) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह Syncmedia and Adtech में वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड पार्टनरशिप्स थे।
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दिव्यम चतुर्वेदी (Divyam Chaturvedi) ने हाइब्रिड इंडिया (Hybrid India) में कंट्री हेड (Country Head) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
अपनी पोस्ट में चतुर्वेदी ने कहा कि वह अपने प्रोफेशनल सफर के नए अध्याय को लेकर उत्साहित हैं और हाइब्रिड इंडिया की टीम के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं।
हाइब्रिड इंडिया में शामिल होने से पहले चतुर्वेदी सिंकमीडिया एंड एडटेक (Syncmedia and Adtech) के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड पार्टनरशिप्स (Vice President-Sales and Partnerships) की जिम्मेदारी संभाली।
चतुर्वेदी को डिजिटल मीडिया और एडटेक इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव है। अपने पिछले कार्यकाल में उन्होंने सेल्स और पार्टनरशिप से जुड़े क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभाईं। हाइब्रिड इंडिया में उनकी नई भूमिका में कंपनी के भारत में कारोबार और रणनीतिक पहलों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
सिंकमीडिया एंड एडटेक से पहले चतुर्वेदी वसर्व (Vserv) और रिपब्लिक वर्ल्ड (Republic World) के साथ भी काम कर चुके हैं। इन संस्थानों में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मीडिया, डिजिटल और विज्ञापन से जुड़े क्षेत्रों में अनुभव हासिल किया।