टीवी विज्ञापनों पर खत्म हुई 10+2 की बंदिश, MIB ने ब्रॉडकास्टर्स को दी कमाई की खुली छूट

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने Cable Television Networks Rules, 1994 में बदलाव करते हुए वह प्रावधान हटा दिया है, जिसके तहत टीवी चैनलों को एक घंटे में अधिकतम 12 मिनट ही विज्ञापन दिखाने की अनुमति थी।

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Saturday, 22 August, 2026
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टीवी चैनलों पर विज्ञापन दिखाने को लेकर लंबे समय से लागू 10+2 का नियम अब खत्म हो गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने Cable Television Networks Rules, 1994 में बदलाव करते हुए वह प्रावधान हटा दिया है, जिसके तहत टीवी चैनलों को एक घंटे में अधिकतम 12 मिनट ही विज्ञापन दिखाने की अनुमति थी।

सरकार ने यह बदलाव 21 अगस्त 2026 को गजट नोटिफिकेशन के जरिए किया है और यह उसी दिन से लागू हो गया है। नए नोटिफिकेशन का नाम Cable Television Networks (Amendment) Rules, 2026 है और इसे G.S.R. 751(E) के तहत जारी किया गया है।

क्या था 10+2 का नियम?

जिस प्रावधान को अब हटाया गया है, वह Cable Television Networks Rules, 1994 के Rule 7(11) में था। इसी के आधार पर टीवी पर 10+2 विज्ञापन व्यवस्था लागू थी। इसके तहत किसी कार्यक्रम में एक घंटे के दौरान अधिकतम 12 मिनट का विज्ञापन दिखाया जा सकता था। इसमें 10 मिनट तक कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट तक चैनल के अपने प्रमोशनल कंटेंट के लिए रखे गए थे।

अब सरकार ने Rule 7(11) को ही हटा दिया है। इसका मतलब है कि टीवी चैनलों के लिए सरकार की ओर से तय 12 मिनट प्रति घंटे की वैधानिक सीमा अब नहीं रही।

सरकार ने क्यों हटाया नियम?

सरकार ने इससे पहले 14 अगस्त को ही 12 मिनट प्रति घंटे की विज्ञापन सीमा खत्म करने के फैसले की जानकारी दी थी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने News Broadcasters Federation (NBF) के एक प्रतिनिधिमंडल को इस फैसले की जानकारी दी थी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व NBF के संस्थापक अध्यक्ष अर्नब गोस्वामी ने किया था।

टीवी ब्रॉडकास्टर्स लंबे समय से विज्ञापनों के मामले में ज्यादा आजादी की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि टीवी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग सेवाओं से सीधे मुकाबला कर रहा है। ऐसे में टीवी पर विज्ञापन की तय सरकारी सीमा ब्रॉडकास्टर्स की कमाई के रास्ते को सीमित करती है।

इस मुद्दे पर दूसरे इंडस्ट्री संगठनों ने भी मंत्रालय के साथ चर्चा की थी। इनमें News Broadcasters & Digital Association (NBDA) और Indian Broadcasting and Digital Foundation (IBDF) जैसे संगठन शामिल थे।

पहले बढ़ाने की बात थी, अब पूरी सीमा ही खत्म

विज्ञापन नियमों में बदलाव को लेकर इंडस्ट्री में कई तरह के विकल्पों पर चर्चा हुई थी। इनमें विज्ञापन की मौजूदा सीमा बढ़ाने से लेकर अलग-अलग तरह के चैनलों के लिए अलग नियम बनाने और अंत में पूरी तरह सरकारी सीमा हटाने तक के विकल्प शामिल थे।

अब सरकार ने इनमें सबसे बड़ा बदलाव करते हुए Rule 7(11) को ही हटा दिया है। यानी 12 मिनट की सीमा को बढ़ाकर कोई नई निश्चित सीमा तय नहीं की गई है, बल्कि पुरानी वैधानिक सीमा को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

2006 से लागू था 10+2 सिस्टम

टीवी पर 10+2 विज्ञापन व्यवस्था साल 2006 से लागू थी। इस नियम को लेकर ब्रॉडकास्टर्स ने अदालत का भी रुख किया था। मई 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने Rule 7(11) और विज्ञापन अवधि से जुड़े संबंधित TRAI नियमों की वैधता को बरकरार रखा था। कोर्ट ने कहा था कि इन नियमों का उद्देश्य दर्शकों को बहुत ज्यादा कमर्शियल ब्रेक से बचाना है।

कोर्ट ने यह भी माना था कि किसी ब्रॉडकास्टर को असीमित तरीके से विज्ञापन से कमाई करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। लेकिन अब सरकार ने Rule 7(11) को ही हटा दिया है। इसके साथ ही टीवी विज्ञापन की वैधानिक स्थिति में बदलाव हो गया है।

टीवी चैनलों की संख्या में भी आया बड़ा बदलाव

सरकार ने विज्ञापन सीमा हटाने के फैसले के पीछे बदलते टीवी बाजार को भी एक वजह बताया है।

MIB के मुताबिक, जब 2006 में यह विज्ञापन प्रतिबंध लागू किया गया था, तब देश में केवल 62 टीवी चैनल थे। आज इनकी संख्या 900 से ज्यादा है।

इसके अलावा आज टीवी को डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन की अवधि को लेकर टीवी जैसा कोई समान वैधानिक प्रतिबंध नहीं है।

ब्रॉडकास्टर्स का कहना रहा है कि दर्शकों और विज्ञापनदाताओं के पास अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के कई विकल्प हैं। ऐसे में टीवी चैनलों को भी अपने विज्ञापन इन्वेंट्री को बाजार की जरूरत के हिसाब से मैनेज करने की ज्यादा आजादी मिलनी चाहिए।

ब्रॉडकास्टर्स ने की थी पूरी आजादी की मांग

ब्रॉडकास्टर्स और उनके संगठनों का लगातार तर्क रहा है कि विज्ञापन की अवधि सरकार द्वारा तय करने के बजाय बाजार की मांग और दर्शकों के व्यवहार पर निर्भर होनी चाहिए।

उनका कहना है कि अगर किसी चैनल पर बहुत ज्यादा विज्ञापन दिखाए जाएंगे तो दर्शक चैनल बदल सकते हैं या उसे देखना कम कर सकते हैं। ऐसे में बाजार खुद यह तय करेगा कि किसी चैनल के लिए विज्ञापन की कितनी मात्रा व्यावहारिक है।

खासकर न्यूज चैनलों ने लगातार बढ़ती लागत का मुद्दा भी उठाया है। न्यूज जुटाने, लाइव कवरेज, टेक्नोलॉजी, डिस्ट्रीब्यूशन और दूसरी व्यवस्थाओं पर लगातार खर्च बढ़ता है। ऐसे में विज्ञापन से होने वाली कमाई ब्रॉडकास्टर्स के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

विज्ञापनदाताओं की राय थोड़ी अलग थी

विज्ञापन की सीमा हटाने को लेकर एडवर्टाइजर्स और एजेंसियों के बीच भी अलग-अलग राय थी। इंडियन सोसायटी ऑफ ऐडवर्टाइजर्स (ISA) ने विज्ञापन की सीमा बढ़ाकर एक घंटे में 25% तक करने का समर्थन किया था। इसका मतलब एक घंटे में 15 मिनट तक विज्ञापन की अनुमति देना होता।

वहीं Advertising Agencies Association of India (AAAI) ने सरकारी स्तर पर विज्ञापन की कोई निश्चित अवधि तय करने के बजाय बाजार आधारित व्यवस्था की बात कही थी।

ब्रॉडकास्टर्स से जुड़े संगठनों, जिनमें IBDF और NBDA शामिल हैं, ने पूरी तरह सरकारी सीमा हटाने की मांग की थी। अब सरकार का फैसला उन लोगों के पक्ष में गया है जो पूरी तरह मार्केट-ड्रिवन व्यवस्था की मांग कर रहे थे।

क्या अब टीवी पर ज्यादा विज्ञापन दिखेंगे?

इस बदलाव के बाद टीवी चैनलों के पास विज्ञापन इन्वेंट्री को लेकर पहले से ज्यादा लचीलापन जरूर होगा। वे बाजार की मांग, दर्शकों के व्यवहार और विज्ञापनदाताओं की जरूरत के हिसाब से अपनी रणनीति तय कर सकेंगे।

लेकिन इसका यह मतलब जरूरी नहीं है कि हर चैनल अब हर घंटे पहले से ज्यादा विज्ञापन दिखाएगा।

चैनलों को दर्शकों की पसंद और टीआरपी जैसी व्यावसायिक जरूरतों का भी ध्यान रखना होगा। अगर विज्ञापनों के कारण दर्शक ज्यादा संख्या में चैनल बदलने लगते हैं, तो इसका असर चैनल की कमर्शियल वैल्यू पर भी पड़ सकता है। इसलिए आगे चलकर यह काफी हद तक बाजार पर निर्भर करेगा कि चैनल वास्तव में कितने विज्ञापन दिखाते हैं।

दर्शकों के अनुभव पर भी रहेगी नजर

विज्ञापन की सीमा हटने के बाद दर्शकों के टीवी देखने के अनुभव को लेकर भी चर्चा बढ़ सकती है। अब तक 10+2 नियम का एक उद्देश्य यह भी था कि कार्यक्रमों के बीच बहुत ज्यादा कमर्शियल ब्रेक न हों। अब वैधानिक सीमा हटने के बाद ब्रॉडकास्टर्स को ज्यादा आजादी मिलेगी, लेकिन यह भी देखना होगा कि इस आजादी का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।

दर्शकों के लिए विज्ञापनों की संख्या और ब्रेक की लंबाई बढ़ती है या नहीं, इस पर आने वाले समय में नजर रहेगी।

टीवी विज्ञापन बाजार में बड़ा बदलाव

सरकार का यह फैसला टीवी ब्रॉडकास्टिंग के लिए एक महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव माना जा रहा है। खास बात यह है कि सरकार ने 12 मिनट की सीमा को बढ़ाकर कोई नई सीमा तय नहीं की है, बल्कि Rule 7(11) को पूरी तरह हटा दिया है।

इससे टीवी चैनलों को विज्ञापन बेचने और अपनी कमर्शियल रणनीति तय करने में ज्यादा आजादी मिलेगी। वहीं विज्ञापनदाताओं और एजेंसियों के लिए टीवी इन्वेंट्री की उपलब्धता, उसकी कीमत और पैकेजिंग में बदलाव देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, 10+2 व्यवस्था का खत्म होना टीवी विज्ञापन बाजार को सरकारी तय सीमा से निकालकर ज्यादा मार्केट-ड्रिवन सिस्टम की तरफ ले जाता है। अब ब्रॉडकास्टर्स के सामने ज्यादा कमाई की संभावना के साथ यह जिम्मेदारी भी होगी कि विज्ञापनों और दर्शकों के अनुभव के बीच सही संतुलन बनाए रखें।

 

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BCCL के एम्प्लॉयीज का THPL में ट्रांसफर, 1 सितंबर से लागू होगा फैसला

टाइम्स ग्रुप की प्रमुख कंपनी Bennett, Coleman & Co. Ltd. (BCCL) में काम कर रहे एम्प्लॉयीज को अब Times Horizon Private Limited (THPL) में ट्रांसफर किया जाएगा। यह बदलाव 1 सितंबर 2026 से लागू होगा।

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Saturday, 22 August, 2026
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टाइम्स ग्रुप की प्रमुख कंपनी Bennett, Coleman & Co. Ltd. (BCCL) में काम कर रहे एम्प्लॉयीज को अब Times Horizon Private Limited (THPL) में ट्रांसफर किया जाएगा। यह बदलाव 1 सितंबर 2026 से लागू होगा। कंपनी ने एम्प्लॉयीज को भेजे गए एक इंटरनल ईमेल के जरिए इसकी जानकारी दी है।

कंपनी ने साफ किया है कि यह कदम एम्प्लॉयीज की नौकरी खत्म करने या नई नौकरी देने से जुड़ा नहीं है। इसे ‘ट्रांसफर ऑफ एम्प्लॉयमेंट’ बताया गया है, यानी एम्प्लॉयीज की सेवा जारी रहेगी और सिर्फ उनका कानूनी नियोक्ता बदलेगा।

पुरानी जॉइनिंग डेट रहेगी बरकरार

एम्प्लॉयीज को भेजे गए ईमेल में कहा गया है कि उनकी कंटिन्यूटी ऑफ सर्विस बरकरार रहेगी। साथ ही, कंपनी में उनकी मूल जॉइनिंग डेट को भी मान्यता मिलती रहेगी। इसका मतलब है कि एम्प्लॉयीज के लिए BCCL में काम करने की अवधि खत्म नहीं मानी जाएगी और THPL में ट्रांसफर के बाद उन्हें नए एम्प्लॉयी के तौर पर नहीं देखा जाएगा।

कंपनी ने यह भी कहा है कि एम्प्लॉयीज की मौजूदा रोजगार शर्तें और मुआवजा (compensation) जारी रहेगा। हालांकि, अगर किसी मामले में अलग से कोई बदलाव होगा तो उसके बारे में एम्प्लॉयीज को अलग से जानकारी दी जाएगी।

डीमर्जर की प्रक्रिया का हिस्सा है ट्रांसफर

एम्प्लॉयीज का यह ट्रांसफर टाइम्स ग्रुप में चल रही बड़ी बिजनेस रिस्ट्रक्चरिंग और डीमर्जर प्रक्रिया का हिस्सा है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच-I ने फरवरी 2026 में BCCL और THPL के बीच स्कीम ऑफ अरेंजमेंट को मंजूरी दी थी। इसके तहत BCCL के EIBME Business Undertaking को THPL में एक चालू कारोबार के तौर पर ट्रांसफर किया जाना है।

अब एम्प्लॉयीज का THPL में ट्रांसफर इसी प्रक्रिया को लागू करने की दिशा में एक और कदम है।

एम्प्लॉयीज की संख्या की जानकारी नहीं

कंपनी की ओर से भेजे गए ईमेल में यह नहीं बताया गया है कि BCCL से THPL में कुल कितने एम्प्लॉयी ट्रांसफर होंगे। साथ ही, किन-किन बिजनेस यूनिट्स या फंक्शंस से जुड़े एम्प्लॉयी इस ट्रांसफर का हिस्सा होंगे, इसकी भी जानकारी नहीं दी गई है।

हालांकि, कंपनी ने एम्प्लॉयीज को यह भरोसा जरूर दिया है कि यह प्रक्रिया किसी तरह की छंटनी या रोजगार खत्म करने से जुड़ी नहीं है।

अलग-अलग बिजनेस पर ज्यादा फोकस की कोशिश

टाइम्स ग्रुप ने पिछले कुछ समय में अपने कारोबार को अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल्स में व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। NCLT के आदेश के मुताबिक BCCL का कारोबार काफी विविध है। इसमें प्रिंट और डिजिटल न्यूज पब्लिशिंग, टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग, डिजिटल प्रोडक्ट्स और सर्विसेज, मैगजीन, इंटरनेट, रेडियो, एंटरटेनमेंट, म्यूजिक, फिल्म, आउट-ऑफ-होम एडवर्टाइजिंग, रियल एस्टेट क्लासीफाइड्स, एजुकेशन और एडटेक, फिनटेक, स्पोर्ट्स, गेमिंग और अलग-अलग तरह के निवेश शामिल हैं।

वहीं, THPL को EIBME Business को संभालने के उद्देश्य से बनाया गया था और यह BCCL की पूरी तरह स्वामित्व वाली सब्सिडियरी है।

कारोबार को दो प्रमुख हिस्सों में बांटने की योजना

डीमर्जर की स्कीम में ग्रुप के कारोबार को broadly दो हिस्सों में बांटा गया है- Publishing Business और EIBME Business। NCLT के आदेश में दर्ज कंपनी की दलील के मुताबिक इन दोनों बिजनेस के काम करने का तरीका, पूंजी की जरूरत, जोखिम, प्रतिस्पर्धी स्थिति, रणनीति और अनुपालन की जरूरतें अलग-अलग हैं।

ऐसे में अलग-अलग बिजनेस को ज्यादा फोकस और स्वतंत्र नेतृत्व देने की कोशिश की जा रही है। कंपनी के मुताबिक इससे अलग-अलग कारोबार को अपनी ग्रोथ और निवेश की रणनीति के हिसाब से आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। इस व्यवस्था से बिजनेस के लिए पूंजी जुटाने और अपने क्षेत्र के हिसाब से पार्टनर्स या निवेशकों के साथ काम करने की गुंजाइश भी बढ़ सकती है।

THPL को मिलेंगे संबंधित बिजनेस के एसेट्स और देनदारियां

NCLT से मंजूर व्यवस्था के तहत EIBME Business Undertaking से जुड़े सभी एसेट्स और देनदारियां, जिनमें टैक्स और अन्य चार्ज भी शामिल हैं, THPL को ट्रांसफर किए जाने हैं। स्कीम में THPL की ओर से Sanmati Properties Limited को कुछ तय शर्तों के तहत अतिरिक्त शेयर जारी करने का भी प्रावधान है।

NCLT के आदेश के मुताबिक BCCL और THPL के बोर्ड ने इस स्कीम को 22 सितंबर 2025 को हुई बैठकों में मंजूरी दी थी। स्कीम के लिए नियुक्त तारीख 1 अप्रैल 2026 तय की गई थी या फिर वह तारीख जब स्कीम प्रभावी होती है, इनमें जो पहले हो।

एम्प्लॉयीज के लिए फिलहाल सबसे बड़ा बदलाव क्या है?

एम्प्लॉयीज के लिहाज से इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा यह है कि 1 सितंबर 2026 से उनका कानूनी नियोक्ता BCCL की जगह THPL होगा, लेकिन कंपनी ने इसे नौकरी खत्म होने या नई नौकरी शुरू होने के रूप में पेश नहीं किया है।

एम्प्लॉयीज की पुरानी जॉइनिंग डेट और सर्विस की निरंतरता बरकरार रहेगी। मौजूदा रोजगार शर्तों और compensation को भी जारी रखने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध ईमेल में पेरोल, बेनिफिट्स, रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर या दूसरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में संभावित बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है।

NCLT के आदेश में भी कहा गया है कि इस स्कीम के तहत एम्प्लॉयीज और क्रेडिटर्स के हितों की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।

टाइम्स ग्रुप के बड़े रिस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा

कुल मिलाकर, BCCL के एम्प्लॉयीज का THPL में ट्रांसफर टाइम्स ग्रुप के बड़े कारोबारी पुनर्गठन का हिस्सा है। ग्रुप अपने अलग-अलग कारोबार को ज्यादा फोकस्ड कॉरपोरेट स्ट्रक्चर में व्यवस्थित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

NCLT के आदेश में Times Internet Limited और Entertainment Network (India) Limited को BCCL की प्रमुख सब्सिडियरीज में शामिल बताया गया है।

कंपनी की ओर से एम्प्लॉयीज को भेजा गया संदेश फिलहाल इस बात पर जोर देता है कि यह रोजगार खत्म होने का मामला नहीं, बल्कि रोजगार इकाई में बदलाव के साथ होने वाला ट्रांसफर है।

वहीं, फरवरी 2026 में NCLT की मंजूरी के बाद 1 सितंबर से होने वाला यह एम्प्लॉयी ट्रांसफर टाइम्स ग्रुप की डीमर्जर प्रक्रिया को जमीन पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

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Network18 ने जारी की BRSR रिपोर्ट, एम्प्लॉयीज के लिए वेलफेयर व सुविधाओं की दी जानकारी

नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (Network18 Media & Investments Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) जारी कर दी है।

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Saturday, 22 August, 2026
Network18

नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (Network18 Media & Investments Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी Business Responsibility and Sustainability Report (BRSR) जारी कर दी है। कंपनी ने यह रिपोर्ट 21 अगस्त 2026 को दाखिल की। रिपोर्ट में कंपनी ने अपने कारोबार, एम्प्लॉयीज, उपभोक्ता शिकायतों, साइबर सिक्योरिटी, डेटा प्राइवेसी, कॉरपोरेट गवर्नेंस और जिम्मेदार कारोबारी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा की है।

रिपोर्ट के मुताबिक यह जानकारी Network18 Media & Investments Limited के standalone आधार पर दी गई है। कंपनी का मुख्य कारोबार ब्रॉडकास्टिंग और डिजिटल मीडिया गतिविधियों से जुड़ा है।

ब्रॉडकास्टिंग और डिजिटल मीडिया कारोबार का बड़ा हिस्सा

कंपनी के मुताबिक उसके कुल टर्नओवर में इनफॉर्मेशन व कम्युनिकेशन से जुड़ी गतिविधियों की हिस्सेदारी 99.94 फीसदी है। इसमें ब्रॉडकास्टिंग और डिजिटल मीडिया गतिविधियां शामिल हैं। वहीं, ऐडवर्टाइजिंग व सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू कंपनी के कुल टर्नओवर में 97.81 फीसदी का योगदान करता है।

Network18 के डिजिटल और ब्रॉडकास्टिंग प्लेटफॉर्म भारत में ग्राहकों तक पहुंचते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी को 20 देशों में मौजूद ग्राहकों से भी रेवेन्यू मिला और वित्त वर्ष 2025-26 में कुल टर्नओवर का 8.2 फीसदी हिस्सा एक्सपोर्ट से आया।

कंपनी में 4,905 एम्प्लॉयी

रिपोर्ट में एम्प्लॉयीज से जुड़ा आंकड़ा भी दिया गया है। वित्त वर्ष के अंत में Network18 में कुल 4,905 एम्प्लॉयी थे। इनमें 3,680 पुरुष और 1,225 महिलाएं शामिल थीं। स्थायी एम्प्लॉयीज की संख्या 4,895 थी।

कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में कुल सात सदस्य हैं, जिनमें दो महिलाएं हैं। यानी बोर्ड में महिलाओं की हिस्सेदारी 28.57 फीसदी है। Key Management Personnel में तीन में से एक महिला है, यानी 33.33 फीसदी।

एम्प्लॉयीज को हेल्थ और स्किल से जुड़ी ट्रेनिंग

कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में उसके सभी 4,905 एम्प्लॉयीज को हेल्थ और सेफ्टी से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई। इनमें 3,680 पुरुष और 1,225 महिलाएं शामिल हैं। इसी दौरान 3,458 एम्प्लॉयीज को स्किल अपग्रेडेशन से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी गई।

कंपनी ने एम्प्लॉयीज के परफॉर्मेंस और करियर डेवलपमेंट रिव्यू का आंकड़ा भी साझा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक कुल 4,494 एम्प्लॉयीज का यह रिव्यू किया गया, जो कुल एम्प्लॉयीज का 91.62 फीसदी है।

डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी पर भी जानकारी

BRSR में Network18 ने साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्राइवेसी से जुड़े अपने सिस्टम की जानकारी दी है। कंपनी के मुताबिक साइबर सिक्योरिटी से जुड़े जोखिमों की पहचान और उन्हें मैनेज करने के लिए उसके पास एक रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क है।

कंपनी ने बताया कि इसके तहत साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी और प्रक्रियाएं, सिक्योरिटी डिफेंस टूल्स, लगातार थ्रेट मॉनिटरिंग और साइबर घटनाओं की पहचान करने की क्षमता जैसे उपाय शामिल हैं। कंपनी साइबर हमलों की स्थिति में अपनी तैयारी और प्रतिक्रिया को परखने के लिए नियमित रूप से ड्रिल भी करती है।

रिपोर्ट के मुताबिक एम्प्लॉयीज को फिशिंग और डेटा के सही वर्गीकरण व इस्तेमाल जैसे विषयों पर भी जागरूक किया जाता है। कंपनी नई और उभरती साइबर चुनौतियों को समझने के लिए सरकार, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और इंडस्ट्री के दूसरे संगठनों के साथ भी जुड़ती है।

उपभोक्ता शिकायतों के लिए अलग व्यवस्था

Network18 ने अपने टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी शिकायतों के लिए अलग-अलग शिकायत निवारण व्यवस्था का भी जिक्र किया है।

रिपोर्ट के अनुसार टीवी चैनलों के कंटेंट से जुड़ी शिकायतें Code of Ethics & Broadcasting Standards और संबंधित News Broadcasting Standards के तहत की जा सकती हैं। वहीं, कंपनी के न्यूज पोर्टल और डिजिटल पब्लिशिंग पर Digital Code of Ethics लागू होता है।

कंपनी ने News18, Forbes India, Overdrive, Firstpost, Moneycontrol और CNBC-TV18 जैसे अपने प्रोडक्ट वेबसाइटों पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की जानकारी उपलब्ध होने की बात भी कही है।

 एम्प्लॉयीज के लिए वेलफेयर और सुविधाओं की जानकारी

BRSR में एम्प्लॉयीज के वेलफेयर से जुड़े खर्च और सुविधाओं का भी विवरण दिया गया है। कंपनी ने एम्प्लॉयीज के लिए हेल्थ इंश्योरेंस, एक्सीडेंट इंश्योरेंस, मैटरनिटी और पैटरनिटी बेनिफिट, डे-केयर सुविधा और मेडिकल खर्च जैसी सुविधाओं की जानकारी रिपोर्ट में दी है।

स्थायी एम्प्लॉयीज के लिए हेल्थ और एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवरेज की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल है।

छोटे शहरों में रोजगार का भी आंकड़ा

रिपोर्ट में एम्प्लॉयीज को दिए गए वेतन के स्थान के आधार पर भी आंकड़े दिए गए हैं। FY2025-26 में कुल वेतन लागत में सेमी-अर्बन लोकेशन की हिस्सेदारी 1.18 फीसदी, अर्बन लोकेशन की 13.05 फीसदी और मेट्रोपॉलिटन लोकेशन की 85.77 फीसदी रही। ग्रामीण क्षेत्र की हिस्सेदारी 0 फीसदी बताई गई है।

रिश्वत और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की स्थिति

कंपनी ने रिपोर्ट में बताया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में रिश्वत या भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर किसी डायरेक्टर, KMP या एम्प्लॉयी के खिलाफ किसी कानून लागू करने वाली एजेंसी की ओर से अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

इसी तरह डायरेक्टर्स और KMPs के Conflict of Interest से जुड़े मामलों में भी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई।

एम्प्लॉयीज की यूनियन को लेकर कंपनी ने क्या कहा

रिपोर्ट के मुताबिक Network18 में कोई मान्यता प्राप्त एम्प्लॉयी एसोसिएशन या यूनियन नहीं है। हालांकि कंपनी ने कहा है कि एम्प्लॉयीज को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत किसी एसोसिएशन या यूनियन से जुड़ने की स्वतंत्रता है।

पूरी रिपोर्ट को देखें तो Network18 के FY2025-26 कारोबार में ब्रॉडकास्टिंग और डिजिटल मीडिया की बड़ी भूमिका रही। कंपनी ने BRSR में अपने एम्प्लॉयीज, उपभोक्ता शिकायतों, साइबर सिक्योरिटी, डेटा प्राइवेसी और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी व्यवस्थाओं का भी विवरण दिया है।

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OTT के बाद अब TV पर नशे के खिलाफ MIB का सख्त संदेश, चैनलों को डिस्क्लेमर दिखाने का निर्देश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी सैटेलाइट टेलीविजन चैनलों से कहा है कि वे अपने कार्यक्रमों के दौरान नशीली दवाओं के दुरुपयोग के हानिकारक प्रभावों को बताने वाला एक प्रमुख डिस्क्लेमर दिखाएं।

Last Modified:
Friday, 21 August, 2026
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी सैटेलाइट टेलीविजन चैनलों से कहा है कि वे अपने कार्यक्रमों के दौरान नशीली दवाओं के दुरुपयोग के हानिकारक प्रभावों को बताने वाला एक प्रमुख डिस्क्लेमर दिखाएं। सरकार के इस कदम के साथ नशे के खिलाफ चलाया जा रहा जागरूकता अभियान अब डिजिटल प्लेटफॉर्म से आगे बढ़कर लीनियर टेलीविजन तक पहुंच गया है।

20 अगस्त को जारी एडवाइजरी में मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को यह संदेश दिखाने का निर्देश दिया है: “Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No to Drugs” यानी “अवैध नशीले पदार्थ स्वास्थ्य को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं। नशे को ना कहें।” मंत्रालय ने कहा है कि डिस्क्लेमर साफ, पढ़ने योग्य और प्रमुख रूप से दिखाई देना चाहिए। साथ ही, ब्रॉडकास्टर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि संदेश स्क्रीन पर पर्याप्त समय तक दिखाई दे, ताकि दर्शक इसे आसानी से देख और समझ सकें।

यह एडवाइजरी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे खास तौर पर निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए जारी किया गया है और इसका दायरा सिर्फ न्यूज कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। मंत्रालय ने कहा है कि यह डिस्क्लेमर सभी तरह के कार्यक्रमों के प्रसारण के दौरान उचित अंतराल पर दिखाया जा सकता है। इसमें जनरल एंटरटेनमेंट और नॉन-न्यूज कार्यक्रम भी शामिल हैं।

हालांकि, MIB पहले भी OTT प्लेटफॉर्म पर नशीली दवाओं और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के चित्रण को लेकर एडवाइजरी जारी कर चुका है, लेकिन 20 अगस्त का यह निर्देश लीनियर टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स को ध्यान में रखकर उठाया गया एक अलग कदम है।

OTT कंटेंट रेगुलेशन से टीवी पर एंटी-ड्रग मैसेजिंग तक

यह कदम नशीली दवाओं और साइकोट्रॉपिक पदार्थों को मीडिया कंटेंट में दिखाने के तरीके को लेकर MIB के लगातार बढ़ते फोकस के बाद आया है।

नवंबर 2024 में मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म्स को एडवाइजरी जारी की थी। मंत्रालय ने देखा था कि कुछ स्ट्रीमिंग कंटेंट में अनजाने में नशीली दवाओं और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा था, उसे ग्लैमराइज किया जा रहा था या उसे आकर्षक तरीके से पेश किया जा रहा था। उस एडवाइजरी में OTT प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट की समीक्षा में सावधानी बरतने और नशीली दवाओं के इस्तेमाल को फैशनेबल या समाज में स्वीकार्य दिखाने से बचने को कहा गया था।

2024 की एडवाइजरी में OTT प्लेटफॉर्म्स से यह भी कहा गया था कि वे दर्शकों को नशे के खतरों के बारे में जागरूक करने वाले पब्लिक-हेल्थ मैसेज और डिस्क्लेमर शामिल करने पर विचार करें, खासकर उन कार्यक्रमों में जहां कहानी के किसी हिस्से में नशीली दवाओं के इस्तेमाल को दिखाया गया हो।

अब नई टेलीविजन एडवाइजरी में पब्लिक-हेल्थ मैसेजिंग को एक कदम और आगे बढ़ाया गया है। इसमें सीधे निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए उनसे कार्यक्रमों के दौरान एक तय एंटी-ड्रग मैसेज दिखाने को कहा गया है।

इस वजह से 20 अगस्त की एडवाइजरी को मंत्रालय की हालिया एंटी-ड्रग मैसेजिंग मुहिम में टीवी के लिए एक खास तरह का पहला निर्देश माना जा रहा है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब MIB ने मीडिया रेगुलेशन के जरिए नशीली दवाओं के मुद्दे को उठाया है।

जनरल एंटरटेनमेंट भी मंत्रालय की नजर में

एडवाइजरी की एक खास बात यह है कि इसका दायरा न्यूज कार्यक्रमों से आगे बढ़ाया गया है।

MIB ने खास तौर पर जनरल एंटरटेनमेंट और नॉन-न्यूज कार्यक्रमों का जिक्र किया है। यानी टीवी पर प्रसारित होने वाले कई तरह के कार्यक्रम इस जन-जागरूकता पहल के दायरे में आ सकते हैं। इसमें ऐसे कार्यक्रम भी शामिल हो सकते हैं, जिनका मुख्य विषय नशे का दुरुपयोग नहीं है, लेकिन मंत्रालय का मानना है कि उनमें समय-समय पर पब्लिक-हेल्थ मैसेज दिखाकर लोगों को जागरूक किया जा सकता है।

तय किया गया डिस्क्लेमर दर्शकों को अवैध नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के नतीजों को लेकर सीधे चेतावनी देने के लिए है।

मंत्रालय का यह कदम टीवी की लगातार बनी हुई अहमियत को भी दिखाता है। खासकर ऐसे दर्शकों के बीच, जो OTT या डिजिटल कंटेंट का नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं करते हैं, टेलीविजन अब भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने वाला माध्यम है।

युवाओं और पब्लिक हेल्थ पर फोकस

नशीली दवाओं को लेकर सरकार की बड़ी चिंता में मीडिया में इनके चित्रण और मैसेजिंग का युवाओं पर पड़ने वाला संभावित असर भी शामिल है।

नवंबर 2024 की OTT एडवाइजरी में MIB ने कहा था कि नशीली दवाओं के इस्तेमाल को दिखाने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इसका प्रभाव कम उम्र और आसानी से प्रभावित होने वाले दर्शकों पर पड़ सकता है।

मंत्रालय की OTT एडवाइजरी में Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 और कंटेंट क्लासिफिकेशन से जुड़े प्रावधानों का भी जिक्र किया गया था। इसमें Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 की ओर भी ध्यान दिलाया गया था और कहा गया था कि कंटेंट के जरिए नशीले पदार्थों को बढ़ावा देना या उनका महिमामंडन करना रेगुलेटरी और कानूनी कार्रवाई से जुड़े मामलों को जन्म दे सकता है।

हालांकि, टेलीविजन को लेकर जारी नई एडवाइजरी किसी खास कार्यक्रम के अंदर नशीली दवाओं के चित्रण को नियंत्रित करने से ज्यादा दर्शकों के सामने एक सकारात्मक पब्लिक-हेल्थ चेतावनी रखने पर केंद्रित है।

ब्रॉडकास्टर्स को डिस्क्लेमर प्रमुखता से दिखाना होगा

मंत्रालय ने इस बात पर खास जोर दिया है कि संदेश किस तरह दिखाया जाता है।

ब्रॉडकास्टर्स से केवल चेतावनी दिखाने के लिए नहीं कहा गया है, बल्कि एडवाइजरी में डिस्क्लेमर को साफ, पढ़ने योग्य और प्रमुख रूप से दिखाने की बात कही गई है। साथ ही, संदेश को स्क्रीन पर पर्याप्त समय तक बनाए रखने को कहा गया है, ताकि वह दर्शकों को प्रभावी तरीके से दिखाई और समझाई दे सके।

ब्रॉडकास्टर्स के लिए इसका मतलब है कि प्रोग्रामिंग और कंप्लायंस टीमों को अपने ट्रांसमिशन शेड्यूल में डिस्क्लेमर के लिए उचित समय तय करना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि संदेश जिस तरीके से दिखाया जा रहा है, वह मंत्रालय की अपेक्षाओं के अनुरूप हो।

मीडिया रेगुलेशन के व्यापक नजरिए का हिस्सा

एंटी-ड्रग यह निर्देश सरकार के मीडिया रेगुलेशन को लेकर बदलते और व्यापक होते नजरिए का भी हिस्सा है।

सरकार सिर्फ कंटेंट पर रोक या पाबंदी लगाने तक सीमित रहने के बजाय अब एडवाइजरी के जरिए ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जिम्मेदार तरीके से कंटेंट पेश करने और जनहित से जुड़े संदेशों को बढ़ावा देने के लिए भी प्रेरित कर रही है।

उदाहरण के लिए, नवंबर 2024 की OTT एडवाइजरी में प्लेटफॉर्म्स से कहा गया था कि जिन कार्यक्रमों में नशीली दवाओं के इस्तेमाल को दिखाया जाता है, उनमें पब्लिक-हेल्थ मैसेज और डिस्क्लेमर शामिल करने पर विचार करें। साथ ही नशे के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को दिखाने वाले कंटेंट को बनाने और बढ़ावा देने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया था।

अब नए निर्देश के साथ निजी टेलीविजन चैनलों को भी इसी मैसेजिंग फ्रेमवर्क में शामिल कर लिया गया है।

टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए इसका तत्काल असर ऑपरेशनल है। चैनलों को अपने कार्यक्रमों के दौरान ऐसे उचित समय और स्थान तय करने होंगे, जहां तय किया गया संदेश दिखाया जा सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि डिस्क्लेमर दर्शकों को पर्याप्त रूप से दिखाई दे।

हालांकि MIB के लिए यह कदम इससे कहीं ज्यादा व्यापक है। मंत्रालय बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंच रखने वाले मास मीडिया का इस्तेमाल करके नशीली दवाओं के खिलाफ सरकार के अभियान को और मजबूत करना चाहता है।

यह MIB की पहली एंटी-ड्रग एडवाइजरी नहीं, लेकिन टीवी के लिए नई पहल

यह अंतर समझना जरूरी है। 20 अगस्त की एडवाइजरी को MIB की नशीली दवाओं को लेकर पहली एडवाइजरी नहीं कहा जाना चाहिए। मंत्रालय इससे पहले नवंबर 2024 में OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए एडवाइजरी जारी कर चुका है, जिसमें नशीली दवाओं और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के चित्रण को लेकर खास तौर पर दिशा-निर्देश दिए गए थे।

नई बात यह है कि एंटी-ड्रग डिस्क्लेमर की जरूरत को सीधे निजी सैटेलाइट टेलीविजन चैनलों और सामान्य टीवी प्रोग्रामिंग तक बढ़ाया गया है।

यानी सरकार अब डिजिटल कंटेंट प्लेटफॉर्म्स से केवल यह कहने से आगे बढ़ रही है कि वे नशीली दवाओं के इस्तेमाल को किस तरह दिखाते हैं, उसमें सावधानी बरतें। अब देश के निजी टेलीविजन ब्रॉडकास्टर्स से भी कहा जा रहा है कि वे दर्शकों के सामने सक्रिय रूप से नशे के खिलाफ संदेश रखें।

इस तरह 20 अगस्त की एडवाइजरी जिम्मेदार मीडिया इस्तेमाल को लेकर MIB के बदलते नजरिए में एक और कदम का संकेत देती है। अब टेलीविजन का इस्तेमाल नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ पब्लिक-हेल्थ मैसेजिंग के एक और अहम माध्यम के तौर पर अधिक स्पष्ट रूप से किया जा रहा है।

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हैप्पी बर्थडे नाविका कुमार: आप हैं सवालों से संवाद तक, पत्रकारिता के बदलते दौर की खास आवाज

नाविका कुमार भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता का एक जाना-पहचाना नाम हैं। तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने प्रिंट से लेकर टेलीविजन तक पत्रकारिता के अलग-अलग दौर देखे हैं।

Last Modified:
Friday, 21 August, 2026
NavikaKumar541

नाविका कुमार भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता का एक जाना-पहचाना नाम हैं। तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने प्रिंट से लेकर टेलीविजन तक पत्रकारिता के अलग-अलग दौर देखे हैं। राजनीतिक इंटरव्यू, प्राइम टाइम डिबेट और देश की कई बड़ी राजनीतिक व नीतिगत खबरों की कवरेज ने उन्हें एक मजबूत पहचान दी। अब उनके करियर का एक नया दौर देखने को मिल रहा है, जहां वह सिर्फ दूसरों से सवाल पूछती हुई नजर नहीं आ रहीं, बल्कि अपनी निजी और मानवीय सोच को भी दर्शकों के सामने रख रही हैं।

नाविका कुमार ने अप्रैल 2026 में टाइम्स ग्रुप में एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभाली। इसके साथ ही वह पॉडकास्ट और सोशल मीडिया के जरिए बातचीत के नए अंदाज को भी आजमा रही हैं। उनका पॉडकास्ट ‘बातें दिल से विद नाविका कुमार’ इसी बदलाव की एक मिसाल है।

प्रिंट से शुरू हुआ था पत्रकारिता का सफर

नाविका कुमार ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी। उन्होंने The Economic Times, The Observer और The Indian Express जैसे प्रकाशनों में काम किया। शुरुआती दौर में उन्होंने बिजनेस और राजनीति से जुड़ी खबरों पर रिपोर्टिंग की।

इसके बाद वर्ष 2005 में उन्होंने Times Network के साथ टेलीविजन पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। आगे चलकर उन्होंने Commonwealth Games विवाद, AugustaWestland हेलिकॉप्टर डील और Aircel-Maxis मामले जैसी बड़ी राजनीतिक और नीतिगत खबरों की कवरेज की।

टेलीविजन पर एंकरिंग के साथ उनकी पहचान और मजबूत हुई। खासकर राजनीतिक इंटरव्यू और डिबेट में उनका अंदाज काफी चर्चित रहा। नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों से तीखे सवाल पूछना और उनसे सीधे जवाब लेने की कोशिश उनकी पत्रकारिता की पहचान बन गई। यानी नाविका कुमार की पहचान लंबे समय तक एक ऐसी पत्रकार के तौर पर रही, जो मुश्किल सवाल पूछने से पीछे नहीं हटतीं। 

जब नाविका खुद बनीं इंटरव्यू की मेहमान

दशकों तक इंटरव्यू लेने के बाद जब खुद इंटरव्यू देने की बारी आई तो उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने आया। 2025 में नाविका कुमार रणवीर इलाहाबादिया के ‘The Ranveer Show’ में नजर आईं। इस बातचीत में सिर्फ उनकी पत्रकारिता या टेलीविजन करियर की बात नहीं हुई, बल्कि पैरेंटिंग, रिश्ते, मानसिक स्वास्थ्य, निजी चुनौतियों और एक पब्लिक फिगर के तौर पर काम करने के दबाव जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई।

इस दौरान उन्होंने अपने काम को लेकर अपनी भावनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि जब चीजें ठीक तरह से नहीं चलतीं या उनकी टीम अपना 100 फीसदी नहीं दे पाती, तो उन्हें इसका काफी असर महसूस होता है। उनके मुताबिक, इसकी वजह काम के प्रति उनका गहरा जुड़ाव और लगाव है।

यह बातचीत इसलिए भी खास थी क्योंकि आमतौर पर नाविका कुमार सवाल पूछने वाली कुर्सी पर होती हैं। इस बार सवाल उनसे पूछे जा रहे थे और दर्शकों को एक एंकर के पीछे मौजूद इंसान को जानने का मौका मिला।

‘बातें दिल से’ में बदला बातचीत का अंदाज

नाविका कुमार ने अप्रैल 2026 में अपना पॉडकास्ट ‘बातें दिल से’ शुरू किया। इस पॉडकास्ट का अंदाज उनके टीवी इंटरव्यू से काफी अलग है। यहां बातचीत का फोकस सिर्फ राजनीति, सत्ता या किसी ताजा विवाद पर नहीं होता। इसमें मेहमानों की जिंदगी, उनके संघर्ष, सपने, रिश्ते, असफलताएं, सोच और निजी अनुभवों पर विस्तार से बातचीत की जाती है।

अब तक शो में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े मेहमान नजर आए हैं। इनमें गायक और कवि सतिंदर सरताज, अभिनेत्री कृति सेनन और वकील रायन करणजावाला जैसे नाम शामिल हैं। कृति सेनन के साथ बातचीत में उनके इंजीनियरिंग से एक्टिंग की तरफ आने और करियर को लेकर उनके सपनों की चर्चा हुई। उनके ‘Diary of Dreams’ जैसे निजी पहलुओं पर भी बातचीत की गई।

इस तरह ‘बातें दिल से’ में नाविका कुमार के सवालों का फोकस बदलता हुआ नजर आता है। टीवी पर जहां सवाल अक्सर राजनीति, सत्ता और जवाबदेही से जुड़े होते थे, वहीं पॉडकास्ट में सवाल ज्यादा व्यक्तिगत हैं- किसी व्यक्ति को क्या प्रेरित करता है, उसने किन मुश्किलों का सामना किया और वह जिंदगी में क्या हासिल करना चाहता है।

सोशल मीडिया पर भी नया अंदाज

नाविका कुमार का बदलाव सिर्फ पॉडकास्ट तक सीमित नहीं है। उनके इंस्टाग्राम पर भी रील्स, बातचीत के छोटे वीडियो और कुछ ज्यादा अनौपचारिक पल देखने को मिल रहे हैं। टेलीविजन के तय कार्यक्रम और स्टूडियो से निकलकर सोशल मीडिया और पॉडकास्ट की दुनिया में आना आज के बदलते मीडिया दौर के हिसाब से भी महत्वपूर्ण है।

टीवी पर एक इंटरव्यू तय समय और कार्यक्रम के हिसाब से चलता है। पॉडकास्ट में बातचीत ज्यादा लंबी और सहज हो सकती है। वहीं इंस्टाग्राम पर उसी बातचीत के किसी खास, भावुक या मजेदार हिस्से को छोटे वीडियो के रूप में दर्शकों तक पहुंचाया जा सकता है। नाविका कुमार अब इन तीनों फॉर्मेट में नजर आ रही हैं।

पत्रकार वही, लेकिन सवालों का अंदाज बदला

नाविका कुमार के इस बदलाव को उनकी पत्रकारिता से अलग होकर देखना जरूरी नहीं है। बल्कि इसे उनकी पत्रकारिता की अगली कड़ी के तौर पर भी देखा जा सकता है। टेलीविजन पर उनके सवालों का मकसद तथ्यों को सामने लाना, राजनीतिक दावों को चुनौती देना और जवाबदेही तय करना रहा है। ‘बातें दिल से’ में वही जिज्ञासा एक अलग तरीके से सामने आती है।

अब सवाल यह नहीं है कि किसी नेता ने कोई फैसला क्यों लिया। सवाल यह है कि किसी व्यक्ति की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ जिसने उसे वह बनाया जो वह आज है। यानी सवाल पूछने की आदत वही है, लेकिन सवालों का मकसद थोड़ा बदल गया है।

Times Group में बड़ी जिम्मेदारी

नाविका कुमार के करियर में यह बदलाव ऐसे समय आया है, जब उन्हें Times Group में बड़ी संपादकीय जिम्मेदारी भी मिली है। अप्रैल 2026 में उन्हें टाइम्स ग्रुप की एडिटर-इन-चीफ बनाया गया। प्रिंट पत्रकार से टेलीविजन एंकर और अब वरिष्ठ संपादकीय नेतृत्व तक का उनका सफर मीडिया के बदलते स्वरूप की कहानी भी बताता है।

आज एक पत्रकार के लिए सिर्फ टीवी स्क्रीन तक सीमित रहना जरूरी नहीं है। पॉडकास्ट, इंस्टाग्राम और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी दर्शकों तक पहुंचने के महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। नाविका कुमार का मौजूदा दौर इसी बदलाव को दिखाता है। उन्होंने पत्रकारिता छोड़ी नहीं है, बल्कि उसके नए फॉर्मेट आजमा रही हैं।

तीन दशक तक नेताओं और ताकतवर लोगों से सत्ता, राजनीति और नीतियों पर सवाल पूछने के बाद अब नाविका कुमार लोगों से उनके सपनों, संघर्षों, रिश्तों और कमजोरियों के बारे में बात कर रही हैं। सवालों का अंदाज जरूर बदला है, लेकिन सवाल पूछने वाली पत्रकार अब भी वही है।

 

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DEN Networks के बकाये पर TDSAT का फैसला, Skyline Cable को चुकाने होंगे ₹15.92 लाख

दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) ने केरल की लोकल केबल ऑपरेटर (LCO) Skyline Cable Network को DEN Networks को करीब 15.92 लाख रुपये देने का आदेश दिया है।

Last Modified:
Thursday, 20 August, 2026
TV78451

दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) ने केरल की लोकल केबल ऑपरेटर (LCO) Skyline Cable Network को DEN Networks को करीब 15.92 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। यह रकम बकाया सब्सक्रिप्शन शुल्क और वापस नहीं किए गए 1,025 सेट-टॉप बॉक्स (STB) की कीमत के तौर पर देनी होगी।

जस्टिस राम कृष्ण गौतम, मेंबर, की अध्यक्षता वाले ट्रिब्यूनल ने DEN Networks की याचिका पर यह फैसला सुनाया। TDSAT ने साफ किया कि Skyline के दूसरे मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (MSO) के पास जाने के बाद भी उसके ऊपर DEN का बकाया और STB लौटाने की जिम्मेदारी बनी रही।

हालांकि, TDSAT ने Kerala Communicators Cable Ltd को इस मामले में किसी भी तरह की आर्थिक जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि DEN Networks और Kerala Communicators Cable के बीच कोई इंटरकनेक्ट एग्रीमेंट नहीं था, इसलिए दूसरे MSO को Skyline की देनदारी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

₹15.92 लाख की रकम में क्या-क्या शामिल है?

TDSAT ने Skyline Cable Network को 30 अप्रैल 2020 तक के बकाया सब्सक्रिप्शन शुल्क के रूप में 54,679 रुपये देने को कहा है। इसके अलावा, DEN Networks के 1,025 सेट-टॉप बॉक्स वापस नहीं करने के मामले में ट्रिब्यूनल ने उनकी घटती कीमत (Depreciated Value) के आधार पर 15.375 लाख रुपये की रकम तय की है। इस तरह मूल रकम कुल 15,92,179 रुपये बैठती है।

इसके साथ ही इस रकम पर 30 अप्रैल 2020 से वास्तविक भुगतान होने तक 9% सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा। Skyline को फैसले की तारीख से दो महीने के भीतर यह रकम ट्रिब्यूनल में जमा करनी होगी।

2016 में हुआ था DEN और Skyline के बीच समझौता

यह विवाद 1 जनवरी 2016 को DEN Networks और Skyline Cable Network के बीच हुए इंटरकनेक्ट एग्रीमेंट से जुड़ा है। DEN Networks उस समय Distributor Platform Operator और केबल टीवी सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर Skyline को एन्क्रिप्टेड टीवी चैनलों के सिग्नल उपलब्ध करा रहा था। Skyline केरल में LCO के तौर पर काम करती थी। इस समझौते के तहत DEN Networks ने Skyline को ग्राहकों के घरों पर लगाने के लिए 1,025 सेट-टॉप बॉक्स दिए थे।

एग्रीमेंट के मुताबिक, इन STB का मालिकाना हक DEN Networks के पास ही रहना था और दोनों कंपनियों के बीच संबंध खत्म होने पर इन्हें वापस करना जरूरी था।

Skyline दूसरे MSO के पास चली गई

बाद में Skyline ने DEN Networks की सेवाएं छोड़कर Kerala Communicators Cable Ltd के साथ काम करना शुरू कर दिया। यहीं से दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।

DEN Networks का कहना था कि Skyline ने बकाया रकम का भुगतान नहीं किया और उसके 1,025 STB भी वापस नहीं किए। कंपनी ने शुरुआत में प्रत्येक STB की मूल कीमत 1,999 रुपये के हिसाब से करीब 20.49 लाख रुपये की मांग की थी।

DEN ने यह भी मांग की थी कि जब तक बकाया रकम और STB का मामला सुलझ नहीं जाता, Skyline को किसी दूसरे MSO से केबल टीवी सिग्नल लेने से रोका जाए।

Skyline ने शुल्क और सर्विस को लेकर उठाए सवाल

Skyline ने DEN के दावों का विरोध किया। LCO का कहना था कि 2016 में समझौता इस भरोसे के साथ किया गया था कि DEN को दिए जाने वाले सर्विस चार्ज प्रतिस्पर्धी MSO के मुकाबले 10% कम होंगे।

Skyline का आरोप था कि बाद में DEN ने इस आश्वासन का पालन नहीं किया। कंपनी ने TRAI के फ्री चैनलों से जुड़े नियमों का पालन नहीं होने का भी आरोप लगाया। Skyline ने यह भी कहा कि केरल में बिना जरूरी 21 दिन का नोटिस दिए सिग्नल बंद कर दिए गए थे। इसके बाद 2019 में राज्य के LCOs ने विरोध प्रदर्शन किया था।

Skyline के मुताबिक, इस मामले में जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और LCOs को DEN Networks के साथ अपना संबंध खत्म कर दूसरे MSO के पास जाने का विकल्प मिला। इसके बाद Skyline ने Kerala Communicators Cable के साथ जुड़ने का फैसला किया।

STB को ग्राहकों को बेचने का Skyline का दावा खारिज

मामले में सबसे अहम विवाद 1,025 सेट-टॉप बॉक्स को लेकर था।Skyline ने माना कि उसे ये STB मिले थे, लेकिन उसका कहना था कि इन्हें ग्राहकों के घरों में लगाया गया था और बाद में ग्राहकों को 1,270 रुपये प्रति STB के हिसाब से बेच दिया गया था। कंपनी का तर्क था कि अब ये STB उसके कब्जे में नहीं हैं, इसलिए उन्हें DEN को वापस करने की जिम्मेदारी उस पर नहीं होनी चाहिए। लेकिन TDSAT ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि इंटरकनेक्ट एग्रीमेंट में साफ तौर पर STB का मालिकाना हक MSO यानी DEN Networks का था और समझौता खत्म होने पर इन्हें वापस करना जरूरी था।

TDSAT ने यह भी कहा कि 1,025 STB Skyline को दिए जाने की बात दस्तावेजों और इन्वेंट्री रिकॉर्ड से साबित होती है। ग्राहकों को बाद में STB बेचने का दावा मूल कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को नहीं बदल सकता।

DEN को 20.49 लाख नहीं, 15.37 लाख रुपये मिलेंगे

हालांकि TDSAT ने DEN Networks की पूरी 20.49 लाख रुपये की मांग को मंजूर नहीं किया। DEN ने STB की मूल कीमत 1,999 रुपये प्रति बॉक्स के हिसाब से रकम मांगी थी। लेकिन ट्रिब्यूनल ने कहा कि ये इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं और इन्हें दिए जाने के बाद काफी समय बीत चुका है। इसलिए उनकी मूल कीमत के आधार पर मुआवजा देना उचित नहीं होगा। TDSAT ने प्रत्येक STB की घटती कीमत 1,500 रुपये तय की।

इस हिसाब से 1,025 STB की कुल कीमत 15.375 लाख रुपये बैठती है। ट्रिब्यूनल ने Skyline को STB अच्छी और काम करने की स्थिति में वापस करने या उनकी तय की गई कीमत चुकाने का विकल्प दिया। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए आदेश में 15.375 लाख रुपये का भुगतान तय किया गया है।

दूसरे MSO को नहीं ठहराया जिम्मेदार

DEN Networks ने Kerala Communicators Cable Ltd को भी Skyline के बकाये और STB की रकम के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराने की मांग की थी। लेकिन TDSAT ने इसे खारिज कर दिया।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि DEN और Skyline के बीच इंटरकनेक्ट एग्रीमेंट था, लेकिन Kerala Communicators Cable इस समझौते का हिस्सा नहीं थी। इसलिए DEN और Kerala Communicators Cable के बीच कोई कॉन्ट्रैक्चुअल संबंध नहीं था। ऐसे में दूसरे MSO को Skyline की पुरानी देनदारी के लिए जिम्मेदार नहीं बनाया जा सकता। इस वजह से TDSAT ने Kerala Communicators Cable को इस मामले में पूरी तरह राहत दी और आर्थिक जिम्मेदारी सिर्फ Skyline Cable Network पर डाली।

9% ब्याज भी देना होगा

₹15.92 लाख की मूल रकम के अलावा Skyline को 30 अप्रैल 2020 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक 9% सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा।

TDSAT ने Skyline को फैसला आने के दो महीने के भीतर रकम जमा करने का निर्देश दिया है। अगर कंपनी आदेश का पालन नहीं करती है, तो DEN Networks कानूनी तरीके से रकम की वसूली के लिए execution proceedings शुरू कर सकती है।

LCO और MSO के लिए क्या मायने रखता है फैसला?

TDSAT का यह फैसला केबल टीवी कारोबार में LCO और MSO के बीच कॉन्ट्रैक्ट की जिम्मेदारियों को लेकर अहम माना जा सकता है।

फैसले से साफ होता है कि अगर कोई LCO एक MSO से दूसरे MSO के पास जाता है, तो पुराने MSO का बकाया चुकाना और उसके उपकरण लौटाना उसकी जिम्मेदारी हो सकती है। वहीं, केवल किसी दूसरे MSO के साथ जुड़ने की वजह से नए MSO को पुराने कॉन्ट्रैक्ट की देनदारी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जब तक उसके साथ कोई संविदात्मक संबंध न हो।

इस तरह TDSAT ने करीब छह साल पुराने इस विवाद में बकाया भुगतान, STB के मालिकाना हक और LCO के दूसरे MSO में माइग्रेशन से जुड़े मुद्दों पर अपना फैसला स्पष्ट कर दिया है।

 

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Zee Entertainment को बड़ी राहत, SAT ने प्रमोटर ग्रुप को वारंट जारी करने की दी मंजूरी

इस फैसले से कंपनी की फंड जुटाने की योजना के सामने आई एक बड़ी नियामकीय अड़चन दूर हो गई है।

Last Modified:
Tuesday, 18 August, 2026
Zee Entertainment...

‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) को Securities Appellate Tribunal (SAT) से बड़ी राहत मिली है। ट्रिब्यूनल ने कंपनी को प्रमोटर ग्रुप के लिए Fully Convertible Warrants का Preferential Issue आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से कंपनी की फंड जुटाने की योजना के सामने आई एक बड़ी नियामकीय अड़चन दूर हो गई है। इसके अलावा SAT ने Zee Entertainment को डिविडेंड बांटने के लिए अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स का इस्तेमाल करने की भी अनुमति दे दी है।

प्रमोटर ग्रुप को वारंट जारी करने का रास्ता साफ: SAT के आदेश के बाद Zee Entertainment अब प्रमोटर ग्रुप को Fully Convertible Warrants जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। Preferential Issue के जरिए कंपनी किसी खास निवेशक या समूह को नए शेयर या कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज जारी करती है। Fully Convertible Warrants आगे चलकर शेयरों में बदले जा सकते हैं। ऐसे में यह कदम कंपनी के लिए पूंजी जुटाने के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

डिविडेंड देने के लिए म्यूचुअल फंड यूनिट्स इस्तेमाल कर सकेगी कंपनी: SAT ने Zee Entertainment को दूसरी बड़ी राहत डिविडेंड से जुड़े मामले में दी है। ट्रिब्यूनल ने कंपनी को अपने पास मौजूद म्यूचुअल फंड यूनिट्स तक पहुंच की अनुमति दी है, ताकि वह उनका इस्तेमाल डिविडेंड वितरण के लिए कर सके। इससे कंपनी के लिए शेयरधारकों को डिविडेंड देने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।

SEBI के रुख पर भी नजर: इस मामले में Securities and Exchange Board of India यानी SEBI की अगली भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बाजार की रिपोर्टों के मुताबिक, SEBI SAT के इस आदेश को चुनौती देने की संभावना कम है। CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, नियामक का पिछला रुख Zee Entertainment, Punit Goenka और Subhash Chandra की फंड जुटाने की योजनाओं को रोकने के उद्देश्य से नहीं था। यानी SEBI की पिछली कार्रवाई को कंपनी की पूरी फंडरेजिंग योजना पर रोक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

Zee के लिए क्यों अहम है यह फैसला?: SAT का यह फैसला Zee Entertainment के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी लंबे समय से कारोबार और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए पूंजी जुटाने के विकल्पों पर काम कर रही है। प्रमोटर ग्रुप को Fully Convertible Warrants जारी करने की मंजूरी मिलने से कंपनी को अपनी पूंजी जुटाने की योजना आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं, म्यूचुअल फंड यूनिट्स के इस्तेमाल की अनुमति मिलने से डिविडेंड वितरण से जुड़ी समस्या भी काफी हद तक दूर हो सकती है।

कुल मिलाकर, SAT के दोनों आदेश Zee Entertainment के लिए बड़ी नियामकीय राहत लेकर आए हैं। एक तरफ कंपनी के लिए प्रमोटर ग्रुप को वारंट जारी करने का रास्ता साफ हुआ है, वहीं दूसरी तरफ डिविडेंड देने के लिए म्यूचुअल फंड यूनिट्स के इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी इन दोनों फैसलों के बाद अपनी आगे की वित्तीय और फंडरेजिंग रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाती है।

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GoodTimes चैनल के अधिग्रहण की दिशा में NDTV का बड़ा कदम

कंपनी के मुताबिक, यह किसी अलग कंपनी या कानूनी इकाई का अधिग्रहण नहीं है, बल्कि GoodTimes चैनल से जुड़े कारोबार और उसके ट्रांसफर्ड एसेट्स को खरीदा जाएगा।

Last Modified:
Tuesday, 18 August, 2026
Good Times

नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) ने लाइफस्टाइल एंड मीडिया ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड के साथ  ‘GoodTimes’ चैनल के कारोबार के अधिग्रहण  के लिए एसेट परचेज एग्रीमेंट किया है। कंपनी ने 17 अगस्त 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि इस सौदे को पूरा करने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) समेत जरूरी नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां लेनी होंगी।

कंपनी के मुताबिक, यह किसी अलग कंपनी या कानूनी इकाई का अधिग्रहण नहीं है, बल्कि GoodTimes चैनल से जुड़े कारोबार और उसके ट्रांसफर्ड एसेट्स को खरीदा जाएगा। इनमें चैनल का लाइसेंस और सरकारी मंजूरियां, ग्राहकों और विज्ञापनदाताओं से जुड़े समझौते, प्रोग्रामिंग और कंटेंट, ब्रांडिंग, बौद्धिक संपदा अधिकार, डिस्ट्रीब्यूशन और मॉनेटाइजेशन राइट्स, डिजिटल एसेट्स, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और चैनल से जुड़ी गुडविल शामिल हैं।

18 करोड़ रुपये तक का सौदा:  NDTV ने बताया कि इस अधिग्रहण के लिए *18 करोड़ रुपये तक की लंपसम राशि* का भुगतान किया जाएगा। यह सौदा कैश-फ्री और डेट-फ्री आधार पर होगा और एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक इसमें कुछ एडजस्टमेंट भी हो सकते हैं। भुगतान के रूप में कैश के साथ ‘टेलीविजन एडवर्टाइजिंग इन्वेंट्री’ का भी इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी के अनुसार, यह ट्रांजैक्शन करीब *तीन महीने में पूरा होने की उम्मीद* है। हालांकि, इसकी अंतिम समयसीमा जरूरी मंजूरियां मिलने और एग्रीमेंट में तय अन्य शर्तों के पूरा होने पर निर्भर करेगी।

MIB की मंजूरी जरूरी:  गुड टाइम्स चैनल से जुड़े टेलीविजन लाइसेंस के ट्रांसफर के लिए *सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB)* की मंजूरी जरूरी होगी। इसके अलावा जरूरत के मुताबिक अन्य नियामकीय या वैधानिक मंजूरियां भी लेनी होंगी।

NDTV की रणनीति में क्या होगा असर?: NDTV का कहना है कि GoodTimes के कारोबार को अपने साथ जोड़ने से कंपनी की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी। इससे कंपनी को अपने ऑपरेशनल दायरे को बढ़ाने और कारोबार में विविधता लाने में मदद मिलेगी। कंपनी ने उम्मीद जताई है कि इस अधिग्रहण से लंबे समय में उसके शेयरधारकों और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के लिए वैल्यू बढ़ेगी।

गुड टाइम्स मुख्य रूप से ‘लाइफस्टाइल-केंद्रित ब्रॉडकास्टिंग और मीडिया कंटेंट’ से जुड़ा चैनल है। NDTV का यह कदम उसके मौजूदा मीडिया कारोबार के साथ लाइफस्टाइल कंटेंट की मौजूदगी को मजबूत करने की दिशा में देखा जा सकता है।

संबंधित पक्ष के बीच सौदा: इस सौदे की एक खास बात यह है कि GoodTimes के विक्रेता *Lifestyle & Media Broadcasting Limited, NDTV का जॉइंट वेंचर है*। इसलिए यह ट्रांजैक्शन संबंधित पक्ष (Related Party Transaction) के दायरे में आता है।

हालांकि, NDTV ने स्पष्ट किया है कि यह सौदा *आर्म्स लेंथ बेसिस* पर किया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक, इसके लिए एक रजिस्टर्ड वैल्यूअर से वैल्यूएशन रिपोर्ट भी हासिल की गई है। कंपनी ने यह भी कहा है कि उसके प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप और ग्रुप कंपनियों का Seller में कोई प्रत्यक्ष हित नहीं है, सिवाय इसके कि कहीं कोई अप्रत्यक्ष शेयरहोल्डिंग हो सकती है।

NDTV ने इससे पहले 17 जुलाई 2026 को GoodTimes से जुड़े इस प्रस्तावित अधिग्रहण के बारे में जानकारी दी थी। अब कंपनी ने एसेट परचेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को दी है। सौदा पूरा होने के लिए अब जरूरी नियामकीय मंजूरियों और एग्रीमेंट में तय क्लोजिंग कंडीशंस के पूरा होने का इंतजार है।

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मुख्यमंत्री विजय ने लॉन्च किया इंडिया टुडे तमिल का यूट्यूब चैनल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ने इंडिया टुडे तमिल (India Today Tamil) का यूट्यूब चैनल लॉन्च किया और कहा कि सच की आवाज सबसे मजबूत होनी चाहिए।

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ने सोमवार को इंडिया टुडे तमिल (India Today Tamil) के नए यूट्यूब चैनल को लॉन्च किया। चेन्नई में आयोजित इंडिया टुडे तमिल राउंडटेबल (India Today Tamil Roundtable) के दौरान उन्होंने प्लेटफॉर्म से अपील की कि वह “सच को और मजबूती से बोलने दे।”

विजय ने राउंडटेबल का उद्घाटन ऐसे समय किया, जब उनकी टीवीके (TVK) सरकार ने सत्ता में 100 दिन पूरे किए हैं। मई में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह उनकी पहली मीडिया मौजूदगी भी रही। विधानसभा चुनाव में नई पार्टी टीवीके ने 234 में से 108 सीटें जीतकर बड़ा प्रदर्शन किया और सत्तारूढ़ डीएमके को पीछे छोड़ दिया।

इंडिया टुडे तमिल राउंडटेबल में राजनीति, प्रशासन, उद्योग और मनोरंजन जगत से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में सरकार के पहले 100 दिनों के कामकाज के साथ तमिलनाडु से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

पूर्व बीजेपी नेता के. अन्नामलाई (K Annamalai) ‘अन्नामलाई बियॉन्ड बीजेपी’ (Annamalai Beyond BJP) सत्र में अपने राजनीतिक सफर और भविष्य की योजनाओं पर बात करेंगे। वहीं खेल मंत्री आधव अर्जुन (Aadhav Arjuna) सरकार के पहले 100 दिनों की उपलब्धियों और प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे।

परिसीमन के मुद्दे पर एमडीएमके सांसद दुरई वाइको (Durai Vaiko), कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती (Praveen Chakravarty), बीजेपी नेता तमिलिसाई सौंदरराजन (Tamilisai Soundararajan) और डीएमके प्रवक्ता सलेम धरनीधरन (Salem Dharanidharan) चर्चा करेंगे।

कावेरी जल विवाद पर पीएमके सांसद अंबुमणि रामदॉस (Anbumani Ramadoss) के साथ विशेष सत्र होगा। डीएमके सांसद दयानिधि मारन (Dayanidhi Maran) भी राजनीतिक चर्चा में हिस्सा लेंगे। अभिनेता ध्रुव विक्रम (Dhruv Vikram) एक विशेष सत्र में नजर आएंगे।

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ZEE के कार्तिक महादेव अब संदीप मेहरोत्रा की टीम में संभालेंगे सीनियर लीडरशिप की जिम्मेदारी

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) में ZEE और ZEE5 के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) कार्तिक महादेव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
Kartik8745

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) में ZEE और ZEE5 के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) कार्तिक महादेव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही कंपनी के साथ उनका साढ़े सात साल से ज्यादा लंबा जुड़ाव खत्म हो गया है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, वह अब संदीप मेहरोत्रा की टीम में एक नई सीनियर लीडरशिप भूमिका संभालेंगे।

महादेव सितंबर 2021 से ZEE के CMO की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान वह कंपनी के पे-टीवी और डिजिटल स्ट्रीमिंग कारोबार के मार्केटिंग और ग्रोथ फंक्शन का नेतृत्व कर रहे थे। उनकी जिम्मेदारी में ऑडियंस बढ़ाना, कंटेंट की खोज और पहुंच को मजबूत करना और टीवी, ZEE5 समेत दूसरे डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म्स के लिए कंज्यूमर-केंद्रित रणनीति तैयार करना शामिल था।

CMO की जिम्मेदारी के साथ-साथ महादेव जून 2019 से ZEE Network के डिजिटल ग्रोथ का काम भी देख रहे थे। इस भूमिका में उन्होंने ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मार्केटिंग रणनीतियों को एक साथ लाने पर काम किया, खासकर ऐसे समय में जब दर्शकों के देखने का तरीका तेजी से बदल रहा था।

कार्तिक महादेव ने 2019 की शुरुआत में ZEEL जॉइन किया था। उन्होंने कंपनी में इंग्लिश एंटरटेनमेंट क्लस्टर के मैनेजिंग व कम्युनिकेशंस के हेड के तौर पर शुरुआत की थी। इस क्लस्टर में Zee Café, &flix और &PriveHD जैसे चैनल शामिल थे।

कुछ ही महीनों में उन्हें इंग्लिश प्रीमियम चैनल क्लस्टर के बिजनेस हेड की जिम्मेदारी दे दी गई। सितंबर 2021 तक उन्होंने इस भूमिका को संभाला और इसके बाद ZEE के बड़े मार्केटिंग फंक्शन की कमान उनके हाथ में आ गई।

अपने कार्यकाल के दौरान महादेव कंटेंट मार्केटिंग और ऑडियंस एंगेजमेंट में प्लेटफॉर्म-एग्नोस्टिक अप्रोच पर जोर देते रहे। उनका मानना रहा कि दर्शकों तक पहुंचने के लिए टीवी और डिजिटल दोनों प्लेटफॉर्म्स को साथ लेकर चलना जरूरी है।

2024 में एक्सचेंज4मीडिया के बिजनेस लीडर रीट्रीट में भी उन्होंने टीवी की पहुंच और उसकी प्रासंगिकता पर बात की थी। साथ ही उन्होंने बदलती दर्शकों के बदलते व्यवहार के साथ ब्रॉडकास्टर्स को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत बताई थी।

ZEE से पहले महादेव Star India के साथ दो साल से ज्यादा समय तक जुड़े रहे। यहां उन्होंने स्टार स्पोर्ट्स में मार्केटिंग वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर काम किया। इस दौरान वह स्पोर्ट्स नेटवर्क की ब्रैंड रणनीति, कम्युनिकेशन और मीडिया प्लानिंग संभालते थे।

उन्होंने Khelo India School Games और Khelo India Youth Games जैसी पहलों पर भी काम किया। इससे पहले वह स्टार इंडिया में चैनल मार्केटिंग के वाइस प्रेजिडेंट के पद पर थे और Star Gold SELECT के लॉन्च से भी जुड़े रहे।

कार्तिक महादेव ने अपने करियर की शुरुआत 2005 में Cadbury India से मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर की थी। इसके बाद करीब एक दशक तक उन्होंने Cadbury और Mondelēz International में सेल्स, ब्रैंड और कैटेगरी से जुड़ी कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं।

वह भारत में Cadbury Bournvita Biscuits की ग्रोथ और उसकी लॉन्चिंग का अहम हिस्सा भी रहे।

अब ZEE और ZEE5 से उनके अलग होने के बाद उनकी अगली सीनियर लीडरशिप भूमिका को लेकर इंडस्ट्री की नजरें बनी हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक, वह संदीप मेहरोत्रा की टीम में नई जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

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MIB ने BCCL से THPL को 14 टीवी चैनल्स के परमिशन ट्रांसफर को दी मंजूरी

टाइम्स ग्रुप (Times Group) से जुड़ी कंपनियों के प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है।

Last Modified:
Monday, 17 August, 2026
BennettColeman+652

टाइम्स ग्रुप (Times Group) से जुड़ी कंपनियों के प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने Bennett, Coleman & Company Limited (BCCL) से उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Times Horizon Private Limited (THPL) को 14 टीवी चैनल्स, 4 DSNG और 1 टेलीपोर्ट के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग परमिशन ट्रांसफर करने को मंजूरी दे दी है।

यह जानकारी 13 अगस्त 2026 को Entertainment Network (India) Limited (ENIL) की ओर से स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई सूचना के जरिए सामने आई। ENIL ने बताया कि उसे अपने प्रमोटर BCCL से यह अपडेट मिला है। BCCL के मुताबिक, MIB ने 12 अगस्त 2026 के पत्र के जरिए इन परमिशन के ट्रांसफर को मंजूरी दी है।

यह कदम BCCL और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी Times Horizon Private Limited के बीच प्रस्तावित Scheme of Arrangement के तहत होने वाले पुनर्गठन का हिस्सा है। ENIL ने इस प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर इससे पहले भी 26 सितंबर 2025, 5 फरवरी 2026, 19 फरवरी 2026 और 19 जून 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को जानकारी दी थी।

ENIL ने अपनी फाइलिंग में कहा कि BCCL की ओर से मिले इस नए अपडेट को SEBI के Listing Regulations के Regulation 30 और 30A के तहत रिकॉर्ड में लिया गया है।

इस मंजूरी के तहत 14 टीवी चैनल्स, 4 DSNG और एक टेलीपोर्ट से जुड़े अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग परमिशन BCCL से Times Horizon Private Limited को ट्रांसफर किए जाएंगे। हालांकि, उपलब्ध फाइलिंग में इन 14 चैनल्स के नाम नहीं बताए गए हैं।

यह भी स्पष्ट है कि यह अपडेट ENIL के सीधे कारोबार या मालिकाना हक में बदलाव की घोषणा नहीं है। ENIL ने केवल अपने प्रमोटर BCCL और उसकी सहायक कंपनी Times Horizon के बीच प्रस्तावित पुनर्गठन से जुड़ा अपडेट एक्सचेंजों के साथ साझा किया है।

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