भारत में साइबर ठगी के खिलाफ सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने Google से उसके Firebase प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइट्स और डेटाबेस को हटाने का आदेश दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत में साइबर ठगी के खिलाफ सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने Google से उसके Firebase प्लेटफॉर्म पर होस्ट की गई कम से कम 57 वेबसाइट्स और डेटाबेस को हटाने का आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि इनका इस्तेमाल लोगों को बड़े बैंकों के नाम पर ठगने, मोबाइल से संवेदनशील जानकारी चुराने और मैलवेयर फैलाने के लिए किया जा रहा था।
Reuters की ओर से देखे गए तीन सरकारी नोटिस के मुताबिक, Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने सिर्फ अगस्त महीने में Firebase पर मौजूद कम से कम 57 वेबसाइट्स और डेटाबेस को हटाने के निर्देश दिए।
बड़े बैंकों की फर्जी वेबसाइट बनाकर हो रही थी ठगी
जिन वेबसाइट्स की पहचान की गई, उनमें से कम से कम सात वेबसाइट्स प्रमुख भारतीय बैंकों की नकल करती थीं। इनमें State Bank of India (SBI), ICICI Bank और Axis Bank जैसे बैंकों के नाम का इस्तेमाल किया गया था।
इन फर्जी वेबसाइट्स के जरिए लोगों से बैंकिंग और दूसरी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ वेबसाइट्स का इस्तेमाल चोरी किए गए क्रेडिट कार्ड डिटेल्स, OTP और दूसरी निजी जानकारी इकट्ठा करने के लिए भी किया जा रहा था।
ऑफर का लालच देकर डाउनलोड करवाए जा रहे थे ऐप
जालसाज Android यूजर्स को अलग-अलग तरह के ऑफर देकर अपने जाल में फंसा रहे थे। इनमें नए क्रेडिट कार्ड, रिवॉर्ड रिडीम करने और क्रेडिट लिमिट बढ़ाने जैसे ऑफर शामिल थे। इन ऑफर्स के जरिए यूजर्स को ऐसे मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता था, जो देखने में बैंकिंग ऐप जैसे लगते थे। लेकिन आरोप है कि ये ऐप असल में मैलिशियस सॉफ्टवेयर थे।
ऐप फोन में इंस्टॉल होने के बाद यूजर की संवेदनशील जानकारी को जालसाजों तक पहुंचा सकता था।
PM-KISAN के नाम पर भी बनाया गया ठगी का जाल
एक मामले में जालसाजों ने केंद्र सरकार की PM-KISAN योजना का भी इस्तेमाल किया। लोगों को योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक मदद का लालच देकर एक ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा गया। ऐप को भुगतान का दावा करने के लिए जरूरी बताया गया था।
आरोप है कि ऐप इंस्टॉल होने के बाद वह यूजर के मोबाइल से जानकारी लेकर उसे जालसाजों द्वारा नियंत्रित Firebase डेटाबेस तक भेज सकता था।
Google को लगातार भेजे जा रहे नोटिस
Reuters के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में सरकार ने Firebase से जुड़े मामलों को लेकर Google को दर्जनों नोटिस भेजे हैं।
Google ने कहा है कि उसकी पॉलिसीज फिशिंग, मैलवेयर और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाती हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि वह I4C समेत कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है और उनके भेजे गए कंटेंट हटाने के अनुरोधों पर कार्रवाई करती है।
Firebase की लोकप्रियता का फायदा उठा रहे जालसाज
Firebase एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसका इस्तेमाल डेवलपर्स ऐप्स और वेबसाइट्स बनाने और उन्हें होस्ट करने के लिए करते हैं। इसमें डेटाबेस जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
भारतीय अधिकारियों का मानना है कि साइबर ठगी करने वाले लोग दूसरे मुफ्त डेवलपमेंट टूल्स से Firebase की तरफ तेजी से बढ़े हैं। इसकी एक वजह प्लेटफॉर्म की मुफ्त सुविधाएं और डेटाबेस क्षमता बताई जा रही है। हालांकि, Firebase का इस्तेमाल सामान्य तौर पर वैध ऐप्स और वेबसाइट्स बनाने के लिए भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। कार्रवाई उन वेबसाइट्स और डेटाबेस के खिलाफ है, जिनके बारे में अधिकारियों ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने की पहचान की है।
भारत में बढ़ रही है ऑनलाइन ठगी की चिंता
सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भारत में ऑनलाइन फ्रॉड लगातार बड़ी चिंता बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में भारत में लोगों को कथित ऑनलाइन ठगी के कारण करीब 2.4 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
बैंकों और सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट और ऐप बनाकर लोगों को निशाना बनाना साइबर ठगों के तरीकों में शामिल है। ऐसे में सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियां फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहचान कर उन्हें हटाने पर जोर दे रही हैं। Firebase से जुड़ी यह कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा है, जिसमें सरकार ने Google से ऐसे प्लेटफॉर्म और लिंक हटाने को कहा है जिनका इस्तेमाल लोगों की वित्तीय और निजी जानकारी हासिल करने के लिए किया जा रहा था।
बैंकों और सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी वेबसाइट और ऐप बनाकर लोगों को निशाना बनाना साइबर ठगों के तरीकों में शामिल है। ऐसे में सरकार और साइबर सुरक्षा एजेंसियां फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहचान कर उन्हें हटाने पर जोर दे रही हैं।
Firebase से जुड़ी यह कार्रवाई भी इसी अभियान का हिस्सा है, जिसमें सरकार ने Google से ऐसे प्लेटफॉर्म और लिंक हटाने को कहा है जिनका इस्तेमाल लोगों की वित्तीय और निजी जानकारी हासिल करने के लिए किया जा रहा था।
क्विंट डिजिटल ने करीब ₹90.88 करोड़ का राइट्स इश्यू लाने की घोषणा की है। कंपनी ने 21 अगस्त 2026 को BSE को दी जानकारी में बताया कि उसकी राइट्स इश्यू कमेटी ने 19 अगस्त को Letter of Offer को मंजूरी दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्विंट डिजिटल (Quint Digital Limited) ने करीब ₹90.88 करोड़ का राइट्स इश्यू लाने की घोषणा की है। कंपनी ने 21 अगस्त 2026 को BSE को दी जानकारी में बताया कि उसकी राइट्स इश्यू कमेटी ने 19 अगस्त को Letter of Offer को मंजूरी दी है। कंपनी ने यह Letter of Offer BSE के समक्ष जमा किया है।
इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कहां होगा?
कंपनी के मुताबिक, इश्यू से जुड़े खर्च निकालने के बाद उसे करीब ₹8,936.12 लाख यानी ₹89.36 करोड़ की शुद्ध प्राप्ति होने का अनुमान है। सकल इश्यू से करीब ₹151.43 लाख यानी ₹1.51 करोड़ इश्यू से जुड़े खर्चों में जाने का अनुमान है।
शुद्ध प्राप्ति का इस्तेमाल तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए प्रस्तावित है:
RB Diversified का ₹40.50 करोड़ का कर्ज चुकाएगी कंपनी
Letter of Offer के मुताबिक, Quint Digital ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कारोबार और निवेश से जुड़ी जरूरतों के लिए RB Diversified Private Limited से असुरक्षित ऋण लिया था। 31 जुलाई 2026 तक इस ऋण के तहत बकाया रकम ₹4,050 लाख यानी ₹40.50 करोड़ थी। इस ऋण पर 11.50% सालाना ब्याज लगता है।
कंपनी ने इस ऋण की पूरी रकम को राइट्स इश्यू से मिलने वाली शुद्ध प्राप्ति से चुकाने का प्रस्ताव रखा है। दस्तावेज के मुताबिक, इस भुगतान से कंपनी की बकाया देनदारी और ऋण चुकाने से जुड़ी लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि RB Diversified Private Limited, Quint Digital की प्रमोट ग्रुप कंपनी है। Letter of Offer में कहा गया है कि इश्यू से मिलने वाली रकम में से ₹40.50 करोड़ तक की राशि सीधे RB Diversified Private Limited को चुकाई जाएगी।
360 One Prime का ₹18 करोड़ का कर्ज भी चुकाएगी कंपनी
कंपनी ने 360 One Prime Limited से भी सुरक्षित ऋण (Secured Loan) लिया हुआ है। 31 जुलाई 2026 तक इन ऋणों के तहत कुल बकाया रकम ₹2,310.15 लाख यानी ₹23.10 करोड़ थी। कंपनी ने इसमें से ₹1,800 लाख यानी ₹18 करोड़ राइट्स इश्यू से मिलने वाली रकम से चुकाने का प्रस्ताव रखा है।
इस ऋण पर 11% सालाना ब्याज है और दस्तावेज में इसकी अदायगी की तारीख 26 अक्टूबर 2028 बताई गई है। कंपनी के मुताबिक, इस प्रस्तावित अदायगी से कंपनी की बकाया देनदारियां और कर्ज चुकाने से जुड़ी लागत कम करने में मदद मिलेगी।
भविष्य के अधिग्रहण के लिए ₹30.86 करोड़
कंपनी करीब ₹30.86 करोड़ का इस्तेमाल अभी तय नहीं किए गए अधिग्रहण और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए करना चाहती है। दस्तावेज के मुताबिक, अधिग्रहण के लिए रखी गई यह रकम भविष्य में अधिग्रहण, निवेश या अन्य रणनीतिक अवसरों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है, जिन्हें कंपनी का बोर्ड समय-समय पर पहचानकर मंजूरी देगा।
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि Letter of Offer जारी होने की तारीख तक ऐसे किसी अधिग्रहण या निवेश के संबंध में कोई बाध्यकारी समझौता (Binding Arrangement) या अंतिम समझौता (Definitive Agreement) नहीं किया गया है।
दस्तावेज के मुताबिक, इस मद के तहत इस्तेमाल की जाने वाली रकम सकल प्राप्ति (Gross Proceeds) के 35% से ज्यादा नहीं होगी। वहीं किसी एक उद्देश्य के लिए खर्च की जाने वाली रकम सकल प्राप्ति के 25% से अधिक नहीं होगी।
रकम के इस्तेमाल का प्रस्तावित समय
कंपनी ने शुद्ध प्राप्ति (Net Proceeds) के इस्तेमाल का अनुमानित कार्यक्रम भी दिया है। इसके तहत ₹40.50 करोड़ के असुरक्षित ऋण की अदायगी वित्त वर्ष 2026-27 में प्रस्तावित है। वहीं 360 One Prime के ₹18 करोड़ के सुरक्षित ऋण की अदायगी वित्त वर्ष 2031-32 में प्रस्तावित है।
इसके अलावा, अभी तय नहीं किए गए अधिग्रहण और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए रखे गए ₹30.86 करोड़ में से ₹4.94 करोड़ वित्त वर्ष 2026-27, ₹4.13 करोड़ वित्त वर्ष 2027-28 और ₹21.79 करोड़ वित्त वर्ष 2031-32 में इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव है।
कंपनी ने साथ ही कहा है कि धन की यह जरूरत और रकम के इस्तेमाल की योजना उसके प्रबंधन के अनुमान (Management Estimates), मौजूदा बिजनेस प्लान और अन्य कारोबारी व तकनीकी परिस्थितियों पर आधारित है। इनका किसी बैंक या वित्तीय संस्था ने स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन (Appraisal) नहीं किया है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति
Letter of Offer में दिए गए ऑडिटेड कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरण के अनुसार, 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में Quint Digital का कारोबार से कुल राजस्व (Total Revenue from Operations) ₹8,12,255 हजार रहा। 31 मार्च 2025 को यह ₹3,18,114 हजार था।
वित्त वर्ष 2025-26 में टैक्स और असाधारण मदों (Extraordinary Items) के बाद कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) ₹4,15,489 हजार रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी को ₹3,32,931 हजार का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ था।
वहीं, 30 जून 2026 को समाप्त तीन महीने की अवधि के सीमित समीक्षा किए गए कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरण (Limited Reviewed Consolidated Financial Statements) के मुताबिक, कारोबार से कुल राजस्व ₹3,47,973 हजार और टैक्स व असाधारण मदों के बाद शुद्ध घाटा (Net Loss) ₹29,685 हजार रहा।
कंपनी के प्रमुख शेयरधारक
30 जून 2026 तक कंपनी के 1% से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले प्रमुख शेयरधारकों में Raghav Bahl के पास 1,38,60,426 शेयर (29.36%) थे। वहीं Ritu Kapur के पास 78,71,171 शेयर (16.67%) की हिस्सेदारी थी।
इसके अलावा Mohan Lal Jain के पास 8.28%, RB Diversified Private Limited के पास 8.26%, Unico Global Opportunities Fund Limited के पास 7.44%, Genesis Grand General Trading L.L.C के पास 4.33%, Madhu Sudan Goyal के पास 5.91% और Smita Soni के पास 1.08% हिस्सेदारी थी। इन सभी प्रमुख शेयरधारकों के पास कुल 81.32% हिस्सेदारी थी।
BSE से मिल चुकी है इन-प्रिंसिपल मंजूरी
राइट्स इश्यू के तहत जारी होने वाली राइट्स सिक्योरिटीज (Rights Securities) की लिस्टिंग के लिए कंपनी को BSE से इन-प्रिंसिपल मंजूरी (In-Principle Approval) मिल चुकी है। यह मंजूरी 14 अगस्त 2026 के पत्र के जरिए दी गई थी।
कंपनी के मुताबिक, राइट्स इश्यू को लेकर बोर्ड ने 22 मई 2026 को प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद राइट्स इश्यू कमेटी ने 19 अगस्त 2026 को Letter of Offer और इश्यू की शर्तों को मंजूरी दी।
इश्यू की अहम तारीखें
Letter of Offer में दिए गए कार्यक्रम के मुताबिक, राइट्स इश्यू 2 सितंबर 2026 को खुलेगा और 10 सितंबर 2026 को बंद होगा। रिकॉर्ड डेट 25 अगस्त 2026 तय की गई है। वहीं राइट्स एंटाइटलमेंट (Rights Entitlements) को डीमैट खातों (Demat Accounts) में 26 अगस्त 2026 तक क्रेडिट किए जाने का कार्यक्रम है।
टैक्स मामले का भी खुलासा
Letter of Offer में कंपनी से जुड़े एक कर मामले (Tax Proceeding) का भी खुलासा किया गया है। दस्तावेज के मुताबिक, 28 मार्च 2026 को आकलन वर्ष (Assessment Year) 2024-25 के लिए एक आकलन आदेश (Assessment Order) पारित किया गया था, जिसमें ₹27,44,649 के ब्याज खर्च (Interest Expense) को कर कटौती (Deduction) के तौर पर स्वीकार नहीं किया गया।
इसके बाद ₹10,70,427 की कर मांग (Tax Demand) उठाई गई, जिसे कंपनी ने तय समय के भीतर जमा कर दिया। दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि 15 मई 2026 के आदेश के जरिए जुर्माने (Penalty) से राहत (Immunity) मांगने वाली कंपनी की अर्जी (Application) स्वीकार कर ली गई।
कंपनी ने निवेशकों को क्या सलाह दी?
Letter of Offer में कंपनी ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे राइट्स इश्यू से जुड़े दस्तावेज और जोखिम कारकों (Risk Factors) को ध्यान से पढ़ने के बाद ही निवेश का फैसला लें। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इश्यू से जुड़े दस्तावेज में दी गई जानकारी के आधार पर निवेशकों को अपनी स्वतंत्र जांच करनी चाहिए।
Quint Digital ने अधिकतम ₹90.88 करोड़ जुटाने के लिए यह राइट्स इश्यू पेश किया है। कंपनी को इश्यू से जुड़े खर्चों के बाद करीब ₹89.36 करोड़ की शुद्ध प्राप्ति (Net Proceeds) होने का अनुमान है।
प्रस्तावित इस्तेमाल के तहत ₹40.50 करोड़ RB Diversified Private Limited से लिए गए असुरक्षित ऋण की अदायगी, ₹18 करोड़ 360 One Prime Limited से लिए गए सुरक्षित ऋण की अदायगी और ₹30.86 करोड़ भविष्य के अधिग्रहण तथा सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए रखे गए हैं।
गूगल भारत में योग्य कॉलेज स्टूडेंट्स को AI प्लस का 12 महीने का सब्सक्रिप्शन मुफ्त दे रहा है। इसमें जेमिनी के कई स्टडी टूल्स और 400GB स्टोरेज मिलेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गूगल (Google) ने भारत में कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए बड़ा ऑफर पेश किया है। कंपनी योग्य छात्रों को गूगल AI प्लस (Google AI Plus) का 12 महीने का सब्सक्रिप्शन मुफ्त दे रही है। भारत में इस प्लान की सामान्य कीमत 399 रुपये प्रति माह है, यानी सालभर में करीब 4,800 रुपये का खर्च आता है।
इस ऑफर के तहत स्टूडेंट्स को जेमिनी (Gemini) की ज्यादा इस्तेमाल सीमा के साथ 400GB क्लाउड स्टोरेज मिलेगा। इसके अलावा पढ़ाई के लिए डिजाइन किए गए कई AI फीचर्स भी उपलब्ध होंगे, जिनकी मदद से छात्र नोट्स तैयार करने, विषयों को समझने और परीक्षा की तैयारी करने जैसे काम कर सकेंगे।
पढ़ाई के लिए मिलेंगे AI टूल्स
गूगल AI प्लस के साथ छात्रों को जेमिनी में स्टूडेंट हब, स्टडी नोटबुक, फ्लैशकार्ड और प्रैक्टिस क्विज जैसे फीचर्स मिलेंगे। छात्र अपनी पढ़ाई से जुड़ी सामग्री और नोट्स अपलोड करके उनके आधार पर स्टडी प्लान तैयार करवा सकेंगे।
जेमिनी छात्रों की तैयारी के स्तर को समझने के लिए कस्टम क्विज भी तैयार कर सकता है। इससे छात्र अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन विषयों पर ज्यादा अभ्यास कर सकेंगे।
इसके अलावा मुश्किल विषयों को आसान तरीके से समझाने के लिए 3D मॉडल, टेबल और अन्य विजुअल तैयार किए जा सकेंगे। जेमिनी लाइव में डीप रिसर्च फीचर की मदद से छात्र किसी विषय पर विस्तृत जानकारी जुटाकर रिपोर्ट तैयार करने में भी सहायता ले सकेंगे।
ऐसे मिलेगा मुफ्त सब्सक्रिप्शन
भारत में योग्य कॉलेज स्टूडेंट्स इस ऑफर का लाभ लेने के लिए पहले अपनी स्टूडेंट पात्रता का सत्यापन करा सकते हैं। इसके बाद गूगल की ओर से दिए गए साइन-अप निर्देशों को पूरा करना होगा।
ऑफर लेने से पहले छात्रों को पात्रता की शर्तों, सत्यापन प्रक्रिया और मुफ्त अवधि खत्म होने के बाद लागू होने वाली शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
12 महीने की मुफ्त अवधि पूरी होने के बाद सब्सक्रिप्शन सामान्य शुल्क पर जारी हो सकता है। इसलिए छात्रों को यह भी जांच लेना चाहिए कि मुफ्त अवधि समाप्त होने के बाद उनके खाते पर किस तरह की बिलिंग लागू होगी।
एडटेक कंपनी VDO.AI ने NDTV के साथ अपनी पार्टनरशिप को और आगे बढ़ाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल न्यूज की दुनिया में अब सिर्फ ज्यादा विज्ञापन दिखाना ही कमाई बढ़ाने का तरीका नहीं रह गया है। कोशिश यह है कि विज्ञापन ऐसे दिखें, जो यूजर के कंटेंट पढ़ने के अनुभव को खराब न करें और साथ ही पब्लिशर्स के लिए कमाई के नए रास्ते खोलें। इसी दिशा में एडटेक कंपनी VDO.AI ने NDTV के साथ अपनी पार्टनरशिप को और आगे बढ़ाया है।
इस पार्टनरशिप के तहत VDO.AI के दो खास विज्ञापन फॉर्मेट VDO Native Video और VDO Ticker अब NDTV के न्यूज प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल किए जाएंगे। कंपनी का कहना है कि इन फॉर्मेट्स का मकसद वीडियो से होने वाली कमाई बढ़ाने के साथ-साथ यूजर्स की एंगेजमेंट को भी बेहतर करना है।
पढ़ते-पढ़ते दिखेगा Native Video विज्ञापन
VDO Native Video को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह न्यूज आर्टिकल के बीच कंटेंट के माहौल में ही फिट हो जाए। यानी विज्ञापन यूजर के पढ़ने के अनुभव को अचानक रोकने के बजाय उसी के साथ दिखाई देता है।
कंपनी का दावा है कि इससे वीडियो विज्ञापन ज्यादा सहज तरीके से यूजर तक पहुंच सकते हैं और पब्लिशर को वीडियो इन्वेंट्री से अतिरिक्त कमाई का मौका मिलता है।
वहीं VDO Ticker एक स्क्रॉल-सिंक्रोनाइज्ड हेडलाइन फॉर्मेट है। इसका उद्देश्य यूजर्स को वेबसाइट पर मौजूद दूसरे कंटेंट की तरफ ले जाना है। इससे ज्यादा आर्टिकल पढ़े जाने, यूजर के वेबसाइट पर ज्यादा समय बिताने और एक पेज से दूसरे पेज पर जाने की संभावना बढ़ सकती है।
विज्ञापन दिखाने में Context का रखा जाएगा ध्यान
VDO.AI के मुताबिक, इन फॉर्मेट्स में Contextual Delivery, Frequency Controls और Viewability-focused Technology का इस्तेमाल किया जाता है। आसान भाषा में कहें तो विज्ञापन को कंटेंट के संदर्भ के हिसाब से दिखाने, एक ही विज्ञापन को बार-बार दिखाने से बचने और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है कि विज्ञापन यूजर को ठीक से दिखाई दे।
इसका मकसद प्रीमियम न्यूज प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनदाताओं को बेहतर ऑडियंस तक पहुंचाना है, लेकिन इसके साथ ही पाठकों के अनुभव का भी ध्यान रखना है।
डिजिटल पब्लिशर्स के सामने बड़ी चुनौती
दरअसल, डिजिटल पब्लिशर्स के सामने लंबे समय से एक बड़ी चुनौती है। उन्हें विज्ञापन से कमाई बढ़ानी है, लेकिन अगर वेबसाइट पर बहुत ज्यादा या परेशान करने वाले विज्ञापन दिखने लगें तो यूजर का अनुभव खराब हो सकता है।
ऑनलाइन न्यूज पढ़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ पब्लिशर्स के सामने यह सवाल भी है कि वे अपनी वेबसाइट पर मौजूद ऑडियंस की वैल्यू कैसे बढ़ाएं। ऐसे में अब जोर ज्यादा विज्ञापन लगाने के बजाय बेहतर और ज्यादा उपयोगी विज्ञापन अनुभव तैयार करने पर है।
‘Engagement’ को कमाई का अहम हिस्सा मानती है VDO.AI
VDO.AI के को-फाउंडर अर्जित सचदेवा ने कहा कि कंपनी के लिए मोनेटाइजेशन में एंगेजमेंट सबसे अहम है। उनके मुताबिक, जब यूजर वास्तव में कंटेंट से जुड़ा होता है, तभी लंबे समय तक टिकने वाली वैल्यू तैयार की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि NDTV के साथ लंबे समय से चल रही पार्टनरशिप कंपनी के उस नजरिए को दिखाती है, जिसमें एडटेक को सिर्फ ज्यादा विज्ञापन इन्वेंट्री बनाने के बजाय ऑडियंस के अनुभव को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है।
NDTV के लिए यूजर का भरोसा सबसे अहम
NDTV के VP-Product Monetisation and Analytics दिनेश जोशी ने कहा कि प्लेटफॉर्म पर दिखने वाला कोई भी विज्ञापन ऐसा होना चाहिए, जो यूजर के भरोसे और उसके समय का सम्मान करे।
उन्होंने कहा कि VDO.AI का Native Video और Contextual Delivery पर फोकस NDTV की उस रणनीति के साथ मेल खाता है, जिसमें पाठकों के साथ लंबे समय से बने भरोसे को बनाए रखते हुए मोनेटाइजेशन के नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।
डिजिटल विज्ञापन में बदल रहा है कमाई का तरीका
NDTV और VDO.AI की यह पार्टनरशिप डिजिटल पब्लिशिंग में हो रहे बड़े बदलाव की ओर भी इशारा करती है। अब पब्लिशर्स के लिए कमाई का मतलब सिर्फ वेबसाइट के किसी पेज पर ज्यादा से ज्यादा विज्ञापन लगाना नहीं है।
फोकस इस बात पर है कि विज्ञापन ज्यादा प्रासंगिक, बेहतर तरीके से दिखाई देने वाले और कंटेंट के अनुभव के साथ जुड़े हुए हों। इससे एक तरफ विज्ञापनदाताओं को बेहतर ऑडियंस मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ पब्लिशर्स अपनी डिजिटल कमाई बढ़ा सकते हैं।
NDTV और VDO.AI के बीच पार्टनरशिप का यह विस्तार इसी सोच को आगे बढ़ाता है—यूजर का ध्यान और भरोसा बनाए रखते हुए उसकी एंगेजमेंट को ऐसी वैल्यू में बदलना, जिससे पब्लिशर और विज्ञापनदाता दोनों को फायदा हो और पाठक के अनुभव पर भी नकारात्मक असर न पड़े।
बिहार में सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए कमाई का नया रास्ता खुल सकता है। सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर कंटेंट बनाने वालों को एक लाख रुपये तक भुगतान का प्रावधान किया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हर 1 लाख व्यूज पर मिलेंगे ₹10 हजार
नई व्यवस्था में क्रिएटर्स को हर 1 लाख व्यूज पर 10,000 रुपये दिए जाएंगे। हालांकि, एक वीडियो के लिए अधिकतम भुगतान 1 लाख रुपये तक सीमित रहेगा। इसका मतलब है कि अगर किसी वीडियो को 10 लाख या उससे ज्यादा व्यूज मिलते हैं तो क्रिएटर को उस वीडियो के लिए अधिकतम 1 लाख रुपये का भुगतान मिल सकता है।
सरकार का यह मॉडल सोशल मीडिया पर कंटेंट की पहुंच को सीधे भुगतान से जोड़ता है। यानी जितने ज्यादा लोग वीडियो देखेंगे, क्रिएटर को उतना ज्यादा इंसेंटिव मिलने की संभावना होगी, तय अधिकतम सीमा तक।
हर क्रिएटर को नहीं मिलेगा फायदा
हालांकि, इस योजना का फायदा हर उस व्यक्ति को नहीं मिलेगा जो अपनी तरफ से बिहार सरकार की किसी योजना या विकास कार्य पर वीडियो बना देता है।
इसके लिए सोशल मीडिया क्रिएटर्स, पेज और चैनलों को पहले IPRD के साथ रजिस्टर और एम्पैनल होना जरूरी होगा। यानी सरकारी योजनाओं से जुड़ा कंटेंट बनाने से पहले क्रिएटर को सरकार की तय प्रक्रिया के तहत पैनल में शामिल होना होगा।
30 दिन बाद गिने जाएंगे वीडियो के व्यूज
सरकार ने व्यूज की गिनती को लेकर भी एक महत्वपूर्ण शर्त रखी है। वीडियो के ऑनलाइन होने के तुरंत बाद उसके व्यूज के आधार पर भुगतान तय नहीं किया जाएगा।
नियमों के मुताबिक, वीडियो के प्रदर्शन का आकलन 30 दिनों तक ऑनलाइन रहने के बाद किया जाएगा। यानी सिर्फ शुरुआत में अचानक आए वायरल व्यूज के बजाय वीडियो की लगातार पहुंच को भुगतान का आधार बनाया जाएगा।
फर्जी फॉलोअर्स और व्यूज पर भी नजर
सरकार ने सोशल मीडिया आंकड़ों में हेरफेर रोकने के लिए भी व्यवस्था की है। नियमों के तहत क्रिएटर्स के फॉलोअर्स और एंगेजमेंट के आंकड़ों की समय-समय पर जांच की जाएगी।
इसका मकसद फर्जी फॉलोअर्स, बॉट्स या किसी तरह से बढ़ाए गए या हेरफेर किए गए व्यूज की पहचान करना है। यानी सिर्फ नंबर बढ़ाकर सरकारी इंसेंटिव हासिल करना आसान नहीं होगा।
सरकारी प्रचार में सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका
इस बदलाव के जरिए बिहार सरकार ने सरकारी योजनाओं और विकास से जुड़ी जानकारी को सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है। सरकार की योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी अब पारंपरिक विज्ञापन माध्यमों के साथ-साथ सोशल मीडिया क्रिएटर्स और डिजिटल चैनलों के जरिए भी लोगों तक पहुंचाई जा सकती है।
क्रिएटर्स के लिए यह सरकारी योजनाओं से जुड़े कंटेंट को कमाई के एक नए स्रोत में बदल सकता है। वहीं सरकार के लिए सोशल मीडिया उन लोगों तक पहुंचने का माध्यम बन सकता है जो अपना काफी समय Instagram, YouTube, Facebook और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं।
कैबिनेट ने 13 प्रस्तावों को दी मंजूरी
यह फैसला बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक में कुल 13 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
नई सोशल मीडिया नीति के तहत सरकार का जोर सिर्फ इस बात पर नहीं है कि सरकारी संदेश सोशल मीडिया पर पोस्ट हो जाए, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि उस कंटेंट को वास्तव में कितने लोग देख रहे हैं और उससे कितनी पहुंच बन रही है।
यानी बिहार में अब सरकारी योजनाओं से जुड़े सोशल मीडिया कंटेंट में सिर्फ पोस्ट करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि वीडियो की पहुंच और वास्तविक व्यूज भी कमाई का आधार बन सकते हैं।
डिजिटल मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल (Quint Digital Limited) ने करीब 90.88 करोड़ रुपये तक के प्रस्तावित राइट्स इश्यू की शर्तों को मंजूरी दे दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल (Quint Digital Limited) ने करीब 90.88 करोड़ रुपये तक के प्रस्तावित राइट्स इश्यू की शर्तों को मंजूरी दे दी है। कंपनी के राइट्स इश्यू कमेटी ने 19 अगस्त को हुई बैठक में राइट्स इश्यू के Letter of Offer और इससे जुड़ी प्रमुख शर्तों को मंजूरी दी।
कंपनी ने बताया कि उसे इस प्रस्तावित राइट्स इश्यू के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज से 14 अगस्त 2026 को इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल चुका है। अब कंपनी पात्र मौजूदा शेयरधारकों के जरिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
90.88 करोड़ रुपये तक का होगा इश्यू
क्विंट डिजिटल इस राइट्स इश्यू के तहत अधिकतम 82,61,402 ऐसे कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर जारी करेगी, जिन्हें बाद में इक्विटी शेयरों में बदला जा सकेगा। इन शेयरों पर 10% गैर-संचयी लाभांश मिलेगा। प्रत्येक CCPS का फेस वैल्यू और इश्यू प्राइस 100 रुपये रखा गया है।
CCPS और वारंट को मिलाकर राइट्स इश्यू का अधिकतम आकार 9,087.55 लाख रुपये यानी करीब 90.88 करोड़ रुपये होगा। हालांकि, कंपनी ने कहा है कि अंतिम संख्या और कुल इश्यू राशि Basis of Allotment और लागू नियामकीय जरूरतों के आधार पर तय होगी।
40 शेयरों पर मिलेंगे 7 CCPS और 7 वारंट
कंपनी ने राइट्स एंटाइटलमेंट का अनुपात भी तय कर दिया है। इसके तहत रिकॉर्ड डेट पर रखे गए हर 40 पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयरों पर 7 CCPS और 7 डिटैचेबल वारंट मिलेंगे।
कंपनी ने राइट्स इश्यू में पात्र शेयरधारकों की पहचान के लिए 25 अगस्त 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है।
यानी रिकॉर्ड डेट पर जिन पात्र शेयरधारकों के पास कंपनी के पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर होंगे, वे तय अनुपात के मुताबिक राइट्स सिक्योरिटीज के लिए आवेदन कर सकेंगे।
आवेदन के समय देने होंगे 55 रुपये
राइट्स इश्यू में निवेशकों को पूरी रकम एक साथ नहीं चुकानी होगी। प्रत्येक राइट्स सिक्योरिटी के लिए आवेदन के समय कुल 55 रुपये देने होंगे।
इसमें:
शामिल हैं।
CCPS की बाकी 50 रुपये प्रति CCPS की रकम कंपनी एक या एक से ज्यादा कॉल के जरिए बाद में मांग सकती है। यह भुगतान CCPS के अलॉटमेंट की तारीख से 60 महीने के भीतर किया जा सकता है।
CCPS की पूरी रकम चुकता होने के बाद प्रत्येक CCPS को अलॉटमेंट की तारीख से 60 महीने पूरे होने पर या बोर्ड द्वारा तय किसी पहले की तारीख पर एक इक्विटी शेयर में अनिवार्य रूप से कन्वर्ट किया जाएगा।
वारंट के लिए बाद में देने होंगे 5 रुपये
हर वारंट की कुल कीमत 10 रुपये है। इसमें से 5 रुपये आवेदन के समय देने होंगे, जबकि बाकी 5 रुपये वारंट को इक्विटी शेयर में कन्वर्ट कराने के समय देने होंगे।
वारंट को अलॉटमेंट की तारीख से 18 महीने के भीतर कन्वर्ट कराया जा सकेगा। पूरी रकम मिलने के बाद प्रत्येक वारंट एक इक्विटी शेयर में बदल जाएगा।
26 अगस्त तक डीमैट खाते में आएंगे राइट्स एंटाइटलमेंट
कंपनी के मुताबिक, पात्र शेयरधारकों के डीमैट खातों में राइट्स एंटाइटलमेंट 26 अगस्त 2026 तक क्रेडिट किए जाएंगे।
शेयरधारक अपने राइट्स एंटाइटलमेंट को बाजार में 7 सितंबर 2026 तक Renounce यानी बेच या ट्रांसफर कर सकेंगे।
राइट्स इश्यू 2 सितंबर 2026 को खुलेगा, जबकि आवेदन करने की अंतिम तारीख 10 सितंबर 2026 होगी।
कंपनी के बोर्ड या उसकी ओर से अधिकृत कमेटी को इश्यू की अवधि बढ़ाने का अधिकार भी है। हालांकि, इश्यू की अवधि को ओपनिंग डेट से अधिकतम 30 दिनों तक ही बढ़ाया जा सकता है।
क्विंट डिजिटल के मौजूदा इक्विटी शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं। कंपनी ने बताया कि वह राइट्स सिक्योरिटीज की लिस्टिंग और ट्रेडिंग शुरू कराने के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में जरूरी आवेदन करेगी।
इसके अलावा, CCPS और वारंट के इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट होने के बाद बनने वाले शेयरों की लिस्टिंग के लिए भी लागू नियमों के मुताबिक जरूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कंपनी ने कहा है कि राइट्स इश्यू की विस्तृत शर्तें Letter of Offer और अन्य इश्यू दस्तावेजों में दी जाएंगी।
क्विंट डिजिटल की राइट्स इश्यू कमेटी की बैठक 19 अगस्त को शाम 6 बजे शुरू हुई और रात 8:46 बजे समाप्त हुई। कंपनी की ओर से यह जानकारी कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर तरुण बेलवाल ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को दी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TikTok अब अपने प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट मैसेज के जरिए एक-दूसरे को पैसे भेजने की सुविधा लाने पर विचार कर रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TikTok अब सिर्फ वीडियो और एंटरटेनमेंट तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर डायरेक्ट मैसेज के जरिए एक-दूसरे को पैसे भेजने की सुविधा लाने पर विचार कर रही है। अगर यह फीचर लॉन्च होता है, तो यूजर्स किसी चैट के अंदर ही दूसरे यूजर को पेमेंट भेज सकेंगे।
Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, TikTok के मौजूदा अमेरिकी iPhone ऐप के कोड में इस संभावित फीचर से जुड़े संकेत मिले हैं। कोड से पता चलता है कि यूजर बातचीत के दौरान सीधे पेमेंट भेज सकता है और पैसे पाने वाले व्यक्ति को उन्हें स्वीकार करने के लिए एक विकल्प मिल सकता है।
पेमेंट भेजते समय उसके साथ एक मैसेज जोड़ने का विकल्प भी दिया जा सकता है।
TikTok Pay के जरिए हो सकता है पेमेंट
रिपोर्ट के मुताबिक, यह सुविधा TikTok की मौजूदा पेमेंट सर्विस TikTok Pay पर आधारित हो सकती है। TikTok Pay का इस्तेमाल फिलहाल दक्षिण-पूर्व एशिया में TikTok Shop पर खरीदारी के लिए किया जाता है।
हालांकि, TikTok ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि वह यूजर्स के बीच डायरेक्ट पेमेंट फीचर का टेस्ट कर रहा है।
कंपनी ने Bloomberg को बताया कि इस तरह के फीचर का फिलहाल टेस्ट नहीं किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि ऐप के कोड में दिखाई दे रही यह सुविधा अभी शुरुआती डेवलपमेंट स्टेज में हो सकती है।
कब होगा लॉन्च, अभी साफ नहीं
TikTok के इस संभावित फीचर को लेकर अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनी इसे कब लॉन्च करेगी या आम यूजर्स के लिए उपलब्ध भी कराएगी या नहीं। अगर यह फीचर लॉन्च होता है, तो TikTok के लिए यह सोशल मीडिया से आगे बढ़कर फाइनेंशियल सर्विसेज के क्षेत्र में कदम बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम होगा।
TikTok लगातार बढ़ा रहा है अपनी सर्विसेज
TikTok पिछले कुछ समय से अपने ऐप में सोशल मीडिया के अलावा कई तरह की सुविधाएं जोड़ रहा है। इनमें TikTok Shop, सर्च, लोकल डिस्कवरी, गेम्स और होटल बुकिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं।
इससे कंपनी एक ऐसे प्लेटफॉर्म की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां यूजर्स वीडियो देखने के साथ-साथ खरीदारी, जानकारी हासिल करने और दूसरी रोजमर्रा की सेवाओं का इस्तेमाल भी कर सकें।
दूसरे देशों में भी फाइनेंशियल सर्विसेज पर नजर
TikTok ने दूसरे बाजारों में भी फाइनेंशियल सर्विसेज को लेकर रुचि दिखाई है। Reuters की मार्च में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने ब्राजील के सेंट्रल बैंक से फिनटेक कंपनी के तौर पर काम करने की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। इसके तहत कंपनी लेंडिंग और पेमेंट जैसी सेवाएं देने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
Venmo और Zelle जैसी सेवाओं से हो सकती है टक्कर
अगर TikTok यूजर्स के बीच डायरेक्ट पेमेंट की सुविधा शुरू करता है, तो अमेरिका में उसे Venmo और Zelle जैसी पीयर-टू-पीयर पेमेंट सर्विसेज से मुकाबला करना पड़ सकता है।
हालांकि, फाइनेंशियल सर्विसेज की तरफ बढ़ने वाला TikTok अकेला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं है। X, जिसे पहले Twitter के नाम से जाना जाता था, ने भी अमेरिका में X Money लॉन्च किया है। इसके जरिए यूजर्स एक-दूसरे को पैसे भेज सकते हैं।
ऐसे में TikTok का संभावित डायरेक्ट पेमेंट फीचर सोशल मीडिया कंपनियों के उस बड़े ट्रेंड का हिस्सा माना जा सकता है, जिसमें प्लेटफॉर्म यूजर्स को एक ही ऐप के अंदर ज्यादा से ज्यादा सेवाएं देने की कोशिश कर रहे हैं।
टाटा प्ले (Tata Play) ने स्पॉटिफाई (Spotify) के साथ साझेदारी की है। पात्र सब्सक्राइबर्स को स्पॉटिफाई प्रीमियम स्टैंडर्ड का चार महीने का मुफ्त ट्रायल मिलेगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टाटा प्ले (Tata Play) ने स्पॉटिफाई (Spotify) के साथ साझेदारी की है। इसके तहत पात्र टाटा प्ले सब्सक्राइबर्स को स्पॉटिफाई प्रीमियम स्टैंडर्ड (Spotify Premium Standard) का चार महीने का मुफ्त ट्रायल दिया जाएगा। यह ऑफर 17 अगस्त से टाटा प्ले बिंज (Tata Play Binge) सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है और बाद में टाटा प्ले मोबाइल ऐप (Tata Play Mobile App) पर भी शुरू किया जाएगा।
इस ऑफर का फायदा उन यूजर्स को मिलेगा, जिन्होंने पहले स्पॉटिफाई प्रीमियम का सब्सक्रिप्शन नहीं लिया है। पात्र सब्सक्राइबर्स टाटा प्ले के प्लेटफॉर्म से मिलने वाले प्रमोशनल कोड के जरिए इस ऑफर को एक्टिवेट कर सकेंगे।
स्पॉटिफाई प्रीमियम स्टैंडर्ड के तहत यूजर्स को बिना विज्ञापन के म्यूजिक और पॉडकास्ट सुनने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा गाने और पॉडकास्ट डाउनलोड करके ऑफलाइन सुनने और बिना किसी सीमा के गाने स्किप करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। कंपनियों के मुताबिक, यूजर्स को 10 करोड़ से ज्यादा गानों और 70 लाख से ज्यादा पॉडकास्ट टाइटल्स का एक्सेस मिलेगा।
यह साझेदारी टाटा प्ले के मनोरंजन कारोबार को टेलीविजन और ओटीटी से आगे बढ़ाकर म्यूजिक स्ट्रीमिंग तक ले जाती है। टाटा प्ले पहले से डायरेक्ट-टू-होम (DTH) और कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में काम करता है। उसका बिंज प्लेटफॉर्म कई स्ट्रीमिंग सेवाओं के कंटेंट को एक जगह उपलब्ध कराता है।
स्पॉटिफाई के लिए यह साझेदारी भारत में टाटा प्ले के बड़े सब्सक्राइबर बेस तक पहुंच बनाने का मौका है। वहीं टाटा प्ले को अपने मौजूदा टीवी और स्ट्रीमिंग ऑफर के साथ एक प्रमुख म्यूजिक और पॉडकास्ट सेवा जोड़ने में मदद मिलेगी।
सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी और गलत दावों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली फेक न्यूज, भ्रामक जानकारी और गलत दावों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों को क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRTs) बनाने का निर्देश दिया है।
इन टीमों का काम सोशल मीडिया पर फैल रही गलत या भ्रामक जानकारी पर नजर रखना, उसकी सच्चाई जांचना और जल्द से जल्द आधिकारिक जवाब देना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ मंत्रालयों ने अपनी क्विक रिस्पॉन्स टीम बना भी ली हैं, जबकि बाकी मंत्रालय और विभाग इन्हें तैयार करने की प्रक्रिया में हैं।
दो घंटे के भीतर देना होगा जवाब
सरकार ने मंत्रालयों और विभागों से कहा है कि अगर उनके कामकाज से जुड़ी कोई फेक या भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर सामने आती है, तो उसका जवाब दो घंटे के भीतर देने की कोशिश की जाए।
क्विक रिस्पॉन्स टीम लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी करेंगी। जैसे ही कोई गलत दावा या भ्रामक कंटेंट सामने आएगा, टीम पहले उसकी तथ्यों के आधार पर जांच करेगी और इसके बाद संबंधित मंत्रालय या विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जवाब जारी किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में संबंधित फैक्ट-चेकिंग और इन्फॉर्मेशन यूनिट्स की भी मदद ली जाएगी, ताकि आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से पहले दावे की सही स्थिति स्पष्ट की जा सके।
सिर्फ टेक्स्ट से नहीं, वीडियो से भी होगा जवाब
सरकार ने यह भी कहा है कि गलत जानकारी का जवाब उसी प्लेटफॉर्म और उसी फॉर्मेट में देना चाहिए, जिसमें वह तेजी से फैल रही है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई भ्रामक जानकारी Instagram या YouTube जैसे वीडियो आधारित प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही है, तो उसका जवाब सिर्फ एक टेक्स्ट पोस्ट के जरिए देने के बजाय वीडियो के जरिए दिया जा सकता है।
इसका मकसद यह है कि सरकारी जवाब भी उसी ऑडियंस तक उसी तरीके से पहुंचे, जिस तरीके से गलत जानकारी फैलाई जा रही है।
Meme और Graphics का भी होगा इस्तेमाल
सरकार मंत्रालयों को सिर्फ लंबे-लंबे आधिकारिक बयान जारी करने के बजाय Memes, Graphics, Posters और Short-form Videos जैसे फॉर्मेट का इस्तेमाल करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है।
इससे फैक्ट-बेस्ड जानकारी को ज्यादा आसान और आकर्षक तरीके से लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा और सोशल मीडिया पर उसकी Reach भी बढ़ सकती है। यानी सरकार की कोशिश अब सिर्फ फेक न्यूज को खारिज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि तेज, आसान और सोशल मीडिया के हिसाब से तैयार जवाब देने की है।
सोशल मीडिया की रफ्तार बनी बड़ी चुनौती
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी बहुत तेजी से फैल सकती है। खासकर Short-form Videos और Social Media Platforms पर किसी दावे के कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने की संभावना रहती है।
सरकार का मानना है कि ऐसे माहौल में सरकारी संचार व्यवस्था को भी उतनी ही तेजी से काम करना होगा। अगर किसी गलत दावे का जवाब कई घंटे या दिनों बाद आता है, तब तक वह जानकारी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच चुकी होती है।
इसी वजह से क्विक रिस्पॉन्स टीम को रियल-टाइम मॉनिटरिंग और तेज प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा है।
MIB करेगा मंत्रालयों की मदद
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) भी दूसरे मंत्रालयों और सरकारी विभागों को क्विक रिस्पॉन्स टीम बनाने और उन्हें प्रशिक्षित करने में मदद करेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, MIB की ओर से वर्कशॉप और एक्सपर्ट सेशन आयोजित किए जा सकते हैं। इनका मकसद सरकारी टीमों को सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, फेक न्यूज की पहचान और सही तरीके से डिजिटल प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना होगा।
अब हर मंत्रालय की होगी अपनी जिम्मेदारी
इस पहल के बाद फेक न्यूज और भ्रामक कंटेंट से निपटने की जिम्मेदारी सिर्फ किसी एक केंद्रीय सूचना या फैक्ट-चेकिंग व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहेगी। अब हर मंत्रालय और विभाग से उम्मीद की जा रही है कि वह अपने-अपने क्षेत्र से जुड़ी गलत जानकारी की पहचान और उस पर जवाब देने की जिम्मेदारी खुद संभाले।
उदाहरण के तौर पर स्वास्थ्य से जुड़ी गलत जानकारी पर संबंधित स्वास्थ्य विभाग या मंत्रालय तेजी से प्रतिक्रिया देगा, जबकि किसी अन्य मंत्रालय से जुड़े मामले में वही विभाग तथ्य सामने रखेगा।
सरकार के कम्युनिकेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव
क्विक रिस्पॉन्स टीम बनाने की पहल को सरकार के मिसइन्फॉर्मेशन से निपटने के तरीके में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। अब फोकस सिर्फ गलत जानकारी सामने आने के बाद उसका खंडन करने पर नहीं, बल्कि रियल-टाइम मॉनिटरिंग, तेज फैक्ट-चेकिंग और तुरंत आधिकारिक प्रतिक्रिया देने पर रहेगा।
सोशल मीडिया पर फेक न्यूज की रफ्तार लगातार बढ़ने के बीच सरकार की कोशिश है कि गलत दावे के वायरल होने से पहले या उसके शुरुआती दौर में ही तथ्य सामने रख दिए जाएं। इससे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने और सरकारी संचार को ज्यादा प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) के शेयरहोल्डर्स ने आभा कपूर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर लगातार दूसरी बार नियुक्त किए जाने को मंजूरी दे दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) के शेयरहोल्डर्स ने आभा कपूर को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के तौर पर लगातार दूसरी बार नियुक्त किए जाने को मंजूरी दे दी है। उनका नया कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 30 दिसंबर 2031 तक रहेगा। यानी आभा कपूर अगले पांच साल तक कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक की भूमिका निभाती रहेंगी।
कंपनी ने यह जानकारी 18 अगस्त 2026 को BSE को दी गई सूचना में साझा की। Quint Digital की 41वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) मंगलवार, 18 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों से आयोजित हुई। AGM शाम 4 बजे शुरू हुई और 5:04 बजे समाप्त हुई।
आभा कपूर की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव कंपनी की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (Nomination and Remuneration Committee) और निदेशक मंडल (Board of Directors) की सिफारिश के बाद शेयरहोल्डर्स के सामने रखा गया था। Scrutinizer की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई।
मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में लंबा अनुभव
आभा कपूर को मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में टैलेंट और बिजनेस लीडरशिप से जुड़े काम का लंबा अनुभव है। वह Quint Digital Limited के अलावा Quintype Technologies India Limited समेत कई कंपनियों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर काम कर रही हैं।
कंपनी के मुताबिक, आभा कपूर बोर्ड स्तर पर बिजनेस को मजबूत करने के साथ-साथ बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस पर भी सक्रिय रूप से काम करती हैं। वह बोर्डरूम में जिम्मेदार तरीके से बिजनेस बढ़ाने और बेहतर गवर्नेंस पर जोर देती हैं।
इससे पहले आभा कपूर ने K&J Search की फाउंडिंग पार्टनर के तौर पर काम किया। यह मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में एग्जिक्यूटिव सर्च से जुड़ी विशेषज्ञ फर्म रही है। इससे पहले उन्होंने एक इंटरनेशनल बैंक के साथ भी काम किया था।
K&J Search ने मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर के तेजी से बढ़ते दौर में कई बड़ी कंपनियों के लिए टैलेंट खोजने और उन्हें जोड़ने का काम किया। कंपनी ने सैटेलाइट चैनल, म्यूजिक लेबल, प्रोडक्शन हाउस, फिल्म स्टूडियो, रेडियो, डिजिटल और मोबाइल कंपनियों, टेलीकॉम कंपनियों और मल्टीनेशनल विज्ञापन एजेंसियों के लिए टैलेंट उपलब्ध कराया।
इसके अलावा फर्म ने FMCG और टेलीकॉम सेक्टर में कई CXO स्तर की नियुक्तियों के लिए भी काम किया।
नए स्टार्टअप्स को टीम बनाने में भी मदद
आभा कपूर ने भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर के शुरुआती विकास के दौर से ही इसमें अहम भूमिका निभाई है। कंपनी के अनुसार, अलग-अलग सेक्टर के बिजनेस और बिजनेस मॉडल को जल्दी समझने और सही टैलेंट पहचानने की उनकी क्षमता ने कई नए स्टार्टअप्स को अपनी टीम बनाने और ब्रांड स्थापित करने में मदद की।
उनके अनुभव का फायदा खास तौर पर उन कंपनियों को मिला, जिन्हें तेजी से बढ़ते कारोबार के लिए मजबूत नेतृत्व और प्रोफेशनल टीम तैयार करनी थी।
Sydenham College और NMIMS से पढ़ाई
आभा कपूर ने Sydenham College से पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने NMIMS यानी Narsee Monjee Institute of Management Studies से Master in Management की डिग्री हासिल की।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि आभा कपूर का Quint Digital के किसी भी अन्य निदेशक से कोई पारिवारिक संबंध नहीं है। साथ ही, कंपनी के मुताबिक, आभा कपूर को SEBI या किसी अन्य अथॉरिटी के आदेश के तहत निदेशक का पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
इस तरह शेयरहोल्डर्स की मंजूरी के बाद आभा कपूर का Quint Digital के बोर्ड में दूसरा पांच साल का कार्यकाल तय हो गया है, जो 31 दिसंबर 2026 से 30 दिसंबर 2031 तक चलेगा।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी के Employee Stock Option Plan 2020 (ESOP 2020) में जरूरी बदलावों को मंजूरी दे दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी के Employee Stock Option Plan 2020 (ESOP 2020) में जरूरी बदलावों को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को हुई कंपनी की 41वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में दी गई। AGM शाम 4 बजे शुरू हुई और 5:04 बजे समाप्त हुई। बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों से आयोजित की गई।
कंपनी ने शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि शेयरधारकों ने Employee Stock Option Plan 2020 में संशोधन के प्रस्ताव को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव पर स्क्रूटिनाइजर Devesh Kumar Vasisht, Managing Partner, DPV & Associates LLP की ओर से 18 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट के आधार पर मंजूरी की पुष्टि हुई है।
क्या हुआ है बदलाव?
कंपनी ने ESOP 2020 के एडमिनस्ट्रेशन से जुड़े प्रावधानों में एक नया क्लॉज (n) जोड़ा है। इस बदलाव के बाद कंपनी की Compensation Committee को एम्प्लॉयीज को दिए गए स्टॉक ऑप्शंस की शर्तों में बदलाव करने का अधिकार मिलेगा।
सबसे अहम बात यह है कि जरूरत पड़ने पर Compensation Committee Stock Options की Repricing कर सकेगी। यानी कंपनी के शेयर की बाजार कीमत में बड़ी गिरावट आने या बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए एम्प्लॉयीज को दिए गए Stock Options के Exercise Price को कम या संशोधित किया जा सकेगा।
इसके अलावा समिति के पास Stock Options की Vesting और Exercise Conditions में बदलाव, पुराने ऑप्शंस को रद्द करके दोबारा नए ऑप्शंस जारी करने (Cancellation and Re-grant) और Options की दूसरी शर्तों में बदलाव करने का अधिकार भी होगा।
किन परिस्थितियों में हो सकता है बदलाव?
कंपनी के मुताबिक, इन अधिकारों का इस्तेमाल बाजार की मौजूदा परिस्थितियों, कंपनी के शेयर के बाजार भाव में बड़ी गिरावट या अन्य कारोबारी परिस्थितियों को देखते हुए किया जा सकता है।
हालांकि, यह बदलाव मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकेगा। कंपनी ने साफ किया है कि किसी भी तरह की Repricing या शर्तों में बदलाव SEBI (Share Based Employee Benefits and Sweat Equity) Regulations, 2021 और लागू कानूनों के मुताबिक ही किया जाएगा।
साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह का बदलाव Stock Option पाने वाले एम्प्लॉयीज के हितों के खिलाफ न हो।
बोर्ड ने पहले ही दी थी मंजूरी
Quint Digital के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस संशोधन को अपनी 22 मई 2026 को हुई बैठक में मंजूरी दी थी। इसके बाद अंतिम मंजूरी के लिए इसे कंपनी के शेयरधारकों के सामने रखा गया। अब 18 अगस्त को हुई AGM में शेयरधारकों ने भी इसे जरूरी बहुमत से मंजूरी दे दी है।
इस बदलाव से कंपनी के पास भविष्य में बाजार की स्थिति और शेयर की कीमत में बड़े उतार-चढ़ाव के हिसाब से अपने ESOP को अधिक लचीले तरीके से मैनेज करने का विकल्प रहेगा।
कंपनी के Company Secretary और Compliance Officer Tarun Belwal ने यह जानकारी BSE को दी है। यह सूचना कंपनी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी।