दिव्यम चतुर्वेदी को हाइब्रिड इंडिया (Hybrid India) में कंट्री हेड (Country Head) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह Syncmedia and Adtech में वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड पार्टनरशिप्स थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिव्यम चतुर्वेदी (Divyam Chaturvedi) ने हाइब्रिड इंडिया (Hybrid India) में कंट्री हेड (Country Head) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
अपनी पोस्ट में चतुर्वेदी ने कहा कि वह अपने प्रोफेशनल सफर के नए अध्याय को लेकर उत्साहित हैं और हाइब्रिड इंडिया की टीम के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं।
हाइब्रिड इंडिया में शामिल होने से पहले चतुर्वेदी सिंकमीडिया एंड एडटेक (Syncmedia and Adtech) के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड पार्टनरशिप्स (Vice President-Sales and Partnerships) की जिम्मेदारी संभाली।
चतुर्वेदी को डिजिटल मीडिया और एडटेक इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव है। अपने पिछले कार्यकाल में उन्होंने सेल्स और पार्टनरशिप से जुड़े क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभाईं। हाइब्रिड इंडिया में उनकी नई भूमिका में कंपनी के भारत में कारोबार और रणनीतिक पहलों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।
सिंकमीडिया एंड एडटेक से पहले चतुर्वेदी वसर्व (Vserv) और रिपब्लिक वर्ल्ड (Republic World) के साथ भी काम कर चुके हैं। इन संस्थानों में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मीडिया, डिजिटल और विज्ञापन से जुड़े क्षेत्रों में अनुभव हासिल किया।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार और आजतक व गुड न्यूज टुडे की सीनियर मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह का आज जन्मदिन है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार और आजतक व गुड न्यूज टुडे की सीनियर मैनेजिंग एडिटर श्वेता सिंह का आज जन्मदिन है। भारतीय मीडिया जगत में श्वेता सिंह एक जाना-पहचाना नाम हैं। बेबाक अंदाज़, गहरी समझ और पेशेवर दक्षता ने उन्हें लाखों दर्शकों की पहली पसंद बना दिया है। जटिल मुद्दों को सहज भाषा में समझाने की उनकी क्षमता और प्रभावशाली एंकरिंग शैली ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।
लगातार मेहनत और समर्पण के दम पर उन्होंने पत्रकारिता में नए मानक स्थापित किए हैं। करीब दो दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय श्वेता पिछले करीब दो दशक से ‘आजतक’ परिवार का हिस्सा हैं। उनके लंबे अनुभव और संतुलित प्रस्तुति ने उन्हें न्यूज रूम से लेकर दर्शकों तक हर जगह विशेष स्थान दिलाया है।
टीवी न्यूज़ की लगभग हर विधा में दक्ष श्वेता सिंह को अब तक सर्वश्रेष्ठ एंकर, सर्वश्रेष्ठ प्रड्यूसर और सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टर जैसे सम्मान मिल चुके हैं। साल 2016 में उन्होंने अलग-अलग आयोजनों में एक ही वर्ष में 12 अवॉर्ड हासिल कर इतिहास रच दिया था। यह उपलब्धि अब तक पत्रकारिता जगत में मिसाल मानी जाती है।
न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्पेस में उनके अनुकरणीय योगदान और निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए श्वेता सिंह को प्रतिष्ठित ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (enba) 2023 में ‘बेस्ट एंकर–हिंदी’ कैटेगरी में गोल्ड मेडल से नवाजा जा चुका है।
वर्तमान में श्वेता सिंह आजतक पर रात 8 बजे प्रसारित होने वाले प्रमुख शो ‘ख़बरदार’ (Khabardar) की एंकरिंग करती हैं। यह शो उनकी संवाद क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और दर्शकों से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है।
राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीति, बिज़नेस, खेल और मनोरंजन—हर विषय पर उनकी पकड़ समान रूप से मजबूत है। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग हो या एंकरिंग, दर्शक उन्हें भरोसे के साथ देखते हैं। मशहूर टॉक शो ‘सीधी बात’ की मेजबानी से लेकर स्पेशल प्रोग्राम्स तक, उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से हर मंच पर अपनी छाप छोड़ी है।
श्वेता सिंह ने हमेशा पत्रकारिता को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की तरह निभाया है। उनकी निर्भीकता और सटीक विश्लेषण ने उन्हें अलग पहचान दी है। यही वजह है कि वह देश की चुनिंदा पत्रकारों में गिनी जाती हैं, जिनकी बात दर्शक न केवल सुनते हैं, बल्कि उस पर भरोसा भी करते हैं।
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाना या उसकी पहुंच सीमित करना सरकार की नीति से जुड़ा मामला है।
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बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाना या उसकी पहुंच सीमित करना सरकार की नीति से जुड़ा मामला है। ऐसे में इस पर फैसला लेना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर उठाई गई चिंताओं और सुझावों पर विचार करे। इसके लिए सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर सकती है। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को इस मुद्दे पर फैसला लेने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है।
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर दायर हुई थी PIL
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए कोर्ट पहुंचा था। याचिका तीन साल के बच्चे की मां कीर्ति दुआ और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता ने दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने बच्चों की सोशल मीडिया तक खुली पहुंच पर चिंता जताते हुए इसमें प्रतिबंध लगाने और बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण से जुड़ी सामग्री यानी Child Sexual Abuse Material (CSAM) से बचाने के लिए ज्यादा मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बच्चों का इंटरनेट पर अश्लील और उम्र के लिहाज से अनुचित सामग्री के संपर्क में आना उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर असर डाल सकता है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से भी जोड़ते हुए दलील दी।
संविधान के अनुच्छेद 39(f) का भी दिया हवाला
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 39(f) का भी हवाला दिया गया। इसमें राज्य से बच्चों को शोषण से बचाने और उन्हें स्वस्थ तरीके से विकास का अवसर देने की अपेक्षा की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने Economic Survey 2025-26 का भी जिक्र किया। इसमें युवाओं के बीच सोशल मीडिया की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को सामने रखा गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सोशल मीडिया कंपनियों की ओर से अपनाए गए स्वैच्छिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं। उनका कहना था कि बच्चों की सुरक्षा के लिए बाध्यकारी यानी कानूनी तौर पर लागू होने वाले नियमों की जरूरत है।
Meta से भी मजबूत तकनीकी व्यवस्था की मांग
याचिका में Meta को भी निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह ऐसी तकनीकी व्यवस्था और ऑडिट सिस्टम लागू करे, जिससे बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री की पहचान कर उसे जल्द से जल्द हटाया जा सके।
Meta की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कोर्ट को बताया कि Facebook और Instagram पर CSAM की पहचान और उसे हटाने के लिए पहले से ही कई तकनीकी व्यवस्थाएं लागू हैं।
उनके मुताबिक, Facebook पर CSAM की सक्रिय पहचान की दर 99.5 फीसदी और Instagram पर 95.2 फीसदी है। उन्होंने बताया कि प्लेटफॉर्म ऐसी सामग्री की पहचान के लिए कई तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ हानिकारक सामग्री सिस्टम की नजर से बच सकती है।
कोर्ट ने प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया
याचिकाकर्ताओं ने इसके बावजूद ज्यादा मजबूत तकनीकी व्यवस्था और नियमित ऑडिट की मांग की। लेकिन हाईकोर्ट ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सीधे प्रतिबंध लगाने या कोई खास पाबंदी तय करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने या उनकी पहुंच सीमित करने जैसे व्यापक फैसले सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी के तहत आते हैं।कोर्ट ने केंद्र सरकार को याचिकाकर्ताओं की चिंताओं और सुझावों पर विचार करने को कहा है। इसके लिए सरकार सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज और दूसरे संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा कर सकती है।
अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब इस मुद्दे पर अगली बड़ी कार्रवाई केंद्र सरकार के स्तर पर होगी। सरकार को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को लेकर नियमों पर विचार करना होगा।
हालांकि, कोर्ट ने सरकार को कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है। यानी अभी यह साफ नहीं है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कब तक कोई अंतिम नीति या फैसला लेकर आएगी।
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध या अन्य व्यापक पाबंदियां तय करना अदालत का नहीं, बल्कि सरकार के नीति-निर्धारण का विषय है। ऐसे में अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बहस का अगला दौर कोर्ट के बजाय नीति के स्तर पर होगा।
यह सोनी के साथ पांडे की दूसरी पारी है। इससे पहले वह जनवरी 2021 से मई 2023 तक कंपनी के साथ जुड़े रहे थे। अब दोबारा सोनी से जुड़ने के बाद वह स्पोर्ट्स एड सेल्स से जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अंकित पांडे ने सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India) में Group Head- Ad Sales (Sports) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने LinkedIn अपडेट के जरिए अपनी नियुक्ति की जानकारी साझा की। यह सोनी के साथ उनकी दूसरी पारी है।
सोनी से जुड़ने से पहले पांडे जियोस्टार (JioStar) के साथ काम कर रहे थे, जहां वह Associate Director- Sports (TV & Digital) के पद पर थे। उन्होंने जियोस्टार में करीब दो साल बिताए और स्पोर्ट्स से जुड़े टीवी व डिजिटल बिजनेस में जिम्मेदारी संभाली।
अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा करते हुए पांडे ने कहा कि यह उनके लिए पूरी तरह नई शुरुआत की बजाय घर वापसी जैसा अनुभव है। उन्होंने जियोस्टार स्पोर्ट्स ऐड्स के साथ बिताए समय के दौरान मिली सीख, साझेदारियों और दोस्तियों के लिए आभार भी जताया।
यह सोनी के साथ पांडे की दूसरी पारी है। इससे पहले वह जनवरी 2021 से मई 2023 तक कंपनी के साथ जुड़े रहे थे। अब दोबारा सोनी से जुड़ने के बाद वह स्पोर्ट्स एड सेल्स से जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अंकित पांडे के करियर में वायकॉम18 (Viacom18) के साथ भी काम करने का अनुभव शामिल है। मीडिया और स्पोर्ट्स एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में उनका अनुभव नई भूमिका में अहम माना जा रहा है।
इस प्रदर्शनी में दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों के करीब 40 फोटो जर्नलिस्ट द्वारा अपने कैमरों से खींची गईं सुंदर, जीवंत और मनमोहक तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
विश्व फोटोग्राफी दिवस (19 अगस्त) के अवसर पर नोएडा मीडिया क्लब द्वारा पांचवीं वार्षिक फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। नोएडा मीडिया क्लब की फोटो गैलरी में आयोजित इस प्रदर्शनी में दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों के करीब 40 फोटो जर्नलिस्ट द्वारा अपने कैमरों से खींची गईं सुंदर, जीवंत और मनमोहक तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में फोटो पत्रकारिता, डॉक्यूमेंट्री और स्ट्रीट फोटोग्राफी से जुड़ी तस्वीरों के माध्यम से समाज और जीवन के अलग-अलग रंगों को प्रस्तुत किया गया।
प्रदर्शनी का उद्देश्य फोटो जर्नलिस्टों की मेहनत, रचनात्मकता और उनके कैमरे के माध्यम से समाज को देखने के नजरिए को सामने लाना रहा। फोटो पत्रकार के कैमरे में कैद एक तस्वीर कई बार उस पल की पूरी कहानी, भावनाओं और सच्चाई को शब्दों से कहीं अधिक प्रभावशाली ढंग से सामने रख देती है। नोएडा मीडिया क्लब द्वारा प्रत्येक वर्ष विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में इस वर्ष पांचवीं फोटो प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े फोटो जर्नलिस्टों की चुनिंदा तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में प्राकृतिक सौंदर्य, सामाजिक सरोकार, जनजीवन, संस्कृति, शहर की बदलती तस्वीर और घटनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं को कैमरे की नजर से प्रस्तुत किया गया।
नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष आलोक द्विवेदी, महासचिव जयप्रकाश सिंह एवं कोषाध्यक्ष मनोज वत्स के नेतृत्व में आयोजित इस फोटो प्रदर्शनी को शहर के गणमान्य लोगों और मीडिया जगत से जुड़े लोगों का भी उत्साहपूर्ण समर्थन मिला। इस अवसर पर गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा के प्रतिनिधि संजय बाली, नोएडा एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन (NEA) के अध्यक्ष विपिन मल्हन, फोनरवा के अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा, सपा प्रवक्ता राघवेन्द्र दुबे, युवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष विकास जैन, आर्या फैशन्स की संस्थापक एवं सीईओ डॉ. खुशबू सिंह, किसान नेता अशोक चौहान सहित दिल्ली-एनसीआर के अनेक फोटो जर्नलिस्ट, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, उद्यमी और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस दौरान वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट कमल किशोर, अमित मेहरा, अम्लान पालीवाल, प्रदीप गौर, नीरज कुमार, इंदरनील सेन, संजय रावत, विजय पांडे, चंद्र प्रकाश मिश्रा, प्रेम सिंह, मो. जाकिर, ध्रुव कुमार, के. आसिफ और बनी स्मिथ, राजेश कुमार सहित अनेक फोटो पत्रकार मौजूद रहे। वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्टों की मौजूदगी ने प्रदर्शनी को और विशेष बना दिया। उन्होंने युवा और साथी फोटो पत्रकारों के कार्यों को देखा तथा फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा की।
नोएडा मीडिया क्लब के अध्यक्ष आलोक द्विवेदी ने कहा कि फोटो जर्नलिस्ट दिन-रात मेहनत करके समाज, देश और दुनिया में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को अपने कैमरे में कैद करते हैं। उनकी तस्वीरें न केवल खबरों को प्रभावशाली बनाती हैं, बल्कि इतिहास के महत्वपूर्ण पलों को भी सुरक्षित रखने का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि नोएडा मीडिया क्लब भविष्य में भी फोटो पत्रकारों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने और उनकी कला एवं प्रतिभा को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इस तरह के आयोजन करता रहेगा।
इस फोटो प्रदर्शनी की कुछ खास झलकियां आप यहां देख सकते हैं।




डीएसपी एसेट मैनेजर्स (DSP Asset Managers) ने कोमल नारंग (Komal Narang) को हेड ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन नियुक्त किया है। वह उषा नायर (Usha Nair) की जगह लेंगी, जो DSP से रिटायर हो रही हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डीएसपी एसेट मैनेजर्स प्राइवेट लिमिटेड (DSP Asset Managers Private Limited) ने कोमल नारंग (Komal Narang) को हेड ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन (Head of Distribution) नियुक्त किया है। वह उषा नायर (Usha Nair) की जगह जिम्मेदारी संभालेंगी, जो डीएसपी (DSP) से रिटायर हो रही हैं।
नई भूमिका में कोमल नारंग कंपनी की डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करेंगी। उनका फोकस डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स के साथ रिश्तों को मजबूत करने और देशभर के निवेशकों तक DSPAM के इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशंस की पहुंच बढ़ाने पर होगा।
कोमल नारंग के पास फाइनेंशियल सर्विसेज इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने डिस्ट्रीब्यूशन, सेल्स लीडरशिप, कस्टमर एंगेजमेंट और बिजनेस डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में काम किया है।
DSPAM में शामिल होने से पहले वह जियोब्लैकरॉक म्यूचुअल फंड (JioBlackRock Mutual Fund) में चीफ क्लाइंट ऑफिसर (Chief Client Officer) थीं। वहां वह सेल्स, मार्केटिंग और डिजिटल पहलों की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
इससे पहले कोमल ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट (ICICI Prudential Asset Management) में एक दशक से ज्यादा समय बिताया। वहां उन्होंने कस्टमर एंगेजमेंट और बिजनेस डेवलपमेंट से जुड़ी कई वरिष्ठ जिम्मेदारियां निभाईं। अपनी पिछली भूमिका में वह हेड–कस्टमर एंगेजमेंट थीं, जहां उन्होंने AMC के B2C बिजनेस को तैयार किया और उसका नेतृत्व किया। इससे पहले उन्होंने हेड–बिजनेस डेवलपमेंट के तौर पर ऑर्गनाइज्ड डिस्ट्रीब्यूशन चैनल्स की जिम्मेदारी संभाली।
करियर के शुरुआती दौर में कोमल ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस (ICICI Prudential Life Insurance) में सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नेतृत्व पदों पर काम किया। वह कोटक लाइफ इंश्योरेंस (Kotak Life Insurance) और इंडियाबुल्स (Indiabulls) के साथ भी काम कर चुकी हैं।
SEBI ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहे ‘Live Trading’ या ‘Real-Time Trading’ से जुड़े सेशन और उनके आधार पर दिए जा रहे निवेश सुझावों को देखकर तुरंत निवेश का फैसला न लें।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए सेबी (SEBI) ने एक अहम चेतावनी जारी की है। बाजार नियामक ने निवेशकों से कहा है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे ‘Live Trading’ या ‘Real-Time Trading’ से जुड़े सेशन और उनके आधार पर दिए जा रहे निवेश सुझावों को देखकर तुरंत निवेश का फैसला न लें।
सेबी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुछ लोग खुद को शेयर बाजार का एक्सपर्ट बताकर लाइव ट्रेडिंग सेशन करते हैं। इन सेशन में वे लोगों को बताते हैं कि किस शेयर या इंडेक्स में कब खरीदारी करनी है, कब बेचने का समय है, कौन सी ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी अपनानी है और किस तरह की पोजीशन लेनी चाहिए।
नियामक को आशंका है कि ऐसे मामलों में बिना रजिस्ट्रेशन के Investment Advisory Services भी दी जा सकती हैं।
लाइव ट्रेडिंग में दिखाते हैं अपनी ‘परफॉर्मेंस’
सेबी ने कहा है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर लाइव सेशन के दौरान खुद भी ट्रेडिंग करने का दावा करते हैं। इस दौरान वे अपनी ट्रेडिंग परफॉर्मेंस, लाइव मार्केट डेटा, मार्केट पैटर्न और संभावित टारगेट दिखाते हैं। ऐसे सेशन को बड़ी संख्या में लोग देखते हैं। लाइव वीडियो के साथ चैट भी चलती रहती है, जहां दर्शक सवाल पूछते हैं और ट्रेडिंग से जुड़े सुझाव मांगते हैं।
सेबी के मुताबिक, इन्हीं चैट्स के जरिए अनरजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी सर्विस देने या उसका लेन-देन करने की संभावना भी रहती है।
30 दिन पुराने डेटा को लेकर क्या है नियम?
सेबी की यह चेतावनी उसके मई में जारी किए गए एक सर्कुलर के बाद आई है। इस सर्कुलर में इन्वेस्टर एजुकेशन और अवेयरनेस के लिए मार्केट प्राइस डेटा शेयर करने को लेकर नियम तय किए गए थे।
नियमों के तहत निवेशकों को शिक्षित करने के उद्देश्य से मार्केट प्राइस डेटा साझा किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कम से कम 30 दिन का अंतर होना चाहिए। इसके अलावा इस तरह की जानकारी देने के बदले किसी तरह का Monetary Incentive भी नहीं दिया जा सकता।
यानी किसी व्यक्ति को निवेश शिक्षा के नाम पर बिल्कुल ताजा या लाइव शेयर भाव दिखाकर उसके आधार पर भविष्य की कीमत का अनुमान लगाने या निवेश की सलाह देने की अनुमति नहीं है।
सिर्फ एजुकेशन के नाम पर भी नहीं दी जा सकती सलाह
सेबी ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ Investor Education का काम करता है, तो वह किसी सिक्योरिटी के पिछले 30 दिनों के मार्केट प्राइस डेटा का इस्तेमाल करके उसके भविष्य के भाव का संकेत नहीं दे सकता। वह इस आधार पर किसी शेयर या सिक्योरिटी को खरीदने, बेचने या उसमें निवेश करने की सलाह या सुझाव भी नहीं दे सकता।
Live Market Data शेयर करने पर भी रोक
नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि Live Market Data को सामान्य तौर पर कोई भी संस्था अपनी मर्जी से शेयर नहीं कर सकती।
ऐसा डेटा सिर्फ उन परिस्थितियों में साझा किया जा सकता है, जब यह Securities Market के व्यवस्थित संचालन से जुड़ा हो या किसी Regulatory Requirement को पूरा करने के लिए जरूरी हो।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
सेबी ने निवेशकों से सोशल मीडिया पर लाइव या रियल-टाइम ट्रेडिंग की रणनीति बताने वाले लोगों के दावों से सावधान रहने को कहा है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की ओर से दिखाए जा रहे लाइव मुनाफे, ट्रेडिंग स्क्रीन या बाजार के संभावित लक्ष्य देखकर निवेश का फैसला न लें।
नियामक ने कहा है कि निवेशकों को अपने निवेश के फैसले खुद सोच-समझकर और पूरी जानकारी हासिल करने के बाद लेने चाहिए। निवेश से जुड़ी सेवाओं के लिए केवल सेबी में पंजीकृत संस्थाओं और मध्यस्थों से ही संपर्क करना चाहिए।
सेबी ने यह भी कहा है कि शेयर बाजार में लेन-देन करते समय निवेशकों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसे बिना रजिस्ट्रेशन वाले लोगों या संस्थाओं से निवेश संबंधी सलाह लेने से बचना चाहिए।
सोशल मीडिया पर ट्रेडिंग कंटेंट को लेकर बढ़ी चिंता
आज यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग लाइव ट्रेडिंग और शेयर बाजार से जुड़े कंटेंट शेयर करते हैं। कई लोग लाइव मार्केट मूवमेंट के दौरान अपने ट्रेड भी दिखाते हैं और दर्शकों को खरीद-बिक्री के संकेत देते हैं।
सेबी की ताजा चेतावनी का मकसद निवेशकों को ऐसे कंटेंट से जुड़े जोखिमों के प्रति जागरूक करना है। नियामक का संदेश साफ है- सिर्फ किसी व्यक्ति की लाइव ट्रेडिंग या कथित मुनाफे की स्क्रीन देखकर उसके बताए ट्रेड पर पैसा न लगाएं।
शेयर बाजार में निवेश हमेशा जोखिम के साथ आता है और निवेशकों को किसी भी सलाह या दावे पर भरोसा करने से पहले यह जरूर देखना चाहिए कि सलाह देने वाला व्यक्ति या संस्था सेबी के साथ रजिस्टर्ड है या नहीं।
फिल्म और मीडिया कंपनी Eros International Media की वित्तीय मुश्किलें अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फिल्म और मीडिया कंपनी Eros International Media की वित्तीय मुश्किलें अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं। कंपनी ने 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में कंसोलिडेटेड स्तर पर ₹10.43 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा दर्ज किया है। वहीं, कंपनी के ऑडिटर ने उसकी कारोबार जारी रखने की क्षमता को लेकर Material Uncertainty जताई है।
कंपनी के मुताबिक, कारोबार को आगे जारी रखने के लिए उसे अपनी फिल्म और म्यूजिक लाइब्रेरी के अधिकारों से कमाई करने, गैर-जरूरी संपत्तियां बेचने और दूसरे रणनीतिक कदमों के जरिए फंड जुटाने की जरूरत है। Eros International Media के बोर्ड ने 14 अगस्त को जून तिमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी।
ऑडिटर ने Going Concern को लेकर जताई चिंता: कंपनी के ऑडिटर Haribhakti & Co. LLP ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी के सामने ऐसी महत्वपूर्ण अनिश्चितताएं हैं, जो उसके कारोबार को आगे जारी रखने की क्षमता पर सवाल खड़े करती हैं। हालांकि, कंपनी ने अपने वित्तीय नतीजे Going Concern Basis यानी कारोबार के आगे भी जारी रहने की धारणा पर तैयार किए हैं।
ऑडिटर के मुताबिक, कंपनी का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपनी फिल्म और म्यूजिक लाइब्रेरी के अधिकारों से कितनी जल्दी कमाई कर पाती है, गैर-जरूरी संपत्तियों का इस्तेमाल कर फंड जुटा पाती है और ग्रुप कंपनियों से बकाया रकम वसूल पाती है।
स्टैंडअलोन स्तर पर भी ₹7.43 करोड़ का घाटा: कंपनी के स्टैंडअलोन नतीजों की बात करें तो Eros International Media को जून तिमाही में ₹7.43 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा हुआ है। फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी की नेटवर्थ पूरी तरह खत्म हो चुकी है। इसके अलावा कुछ मौकों पर कंपनी की ओर से वैधानिक देनदारियों यानी Statutory Dues के भुगतान में भी डिफॉल्ट हुआ है। कंपनी ने कहा है कि उसने अपनी Liquidity स्थिति सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें Borrowing Facilities में बदलाव, खर्चों में कटौती और फिल्म-म्यूजिक लाइब्रेरी से ज्यादा से ज्यादा कमाई करने की कोशिश शामिल है।
ग्रुप कंपनियों से बड़ी रकम वसूलनी बाकी: Eros के सामने एक बड़ी चुनौती ग्रुप कंपनियों से बकाया रकम की वसूली भी है। कंपनी के पास Eros Worldwide FZE से ₹166.58 करोड़ की नेट ट्रेड रिसीवेबल्स हैं। इसमें ₹321.55 करोड़ की ट्रेड पेयेबल्स को एडजस्ट किया गया है। इसके अलावा Eros International Limited UK से ₹81.84 करोड़ और Eros International USA Inc. से ₹35.66 करोड़ की रकम भी कंपनी को लेनी है। इन बकाया रकम को देखते हुए कंपनी ने 30 जून 2026 तक नेट ट्रेड रिसीवेबल्स पर ₹286.46 करोड़ का Expected Credit Loss Provision बनाया है।
RBI से भी मांगी गई अनुमति: Eros ने अपने अधिकृत डीलर्स के जरिए Reserve Bank of India (RBI) से भी संपर्क किया है। कंपनी ने बकाया एक्सपोर्ट इनवॉयस की वसूली में हुई देरी को माफ करने, ट्रेड पेयेबल्स को रिसीवेबल्स के साथ एडजस्ट करने और Eros Worldwide FZE से मिलने वाली ₹166.58 करोड़ की नेट रकम के रेमिटेंस की अनुमति मांगी है। हालांकि, इन मंजूरियों से कंपनी की वित्तीय स्थिति पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
₹1,016 करोड़ के Content Advances पर SEBI की नजर: कंपनी की मुश्किलें सिर्फ वित्तीय दबाव तक सीमित नहीं हैं। उसके खिलाफ SEBI से जुड़े मामले भी चल रहे हैं। ऑडिटर की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक कंपनी की ओर से कुछ पक्षों को दिए गए ₹1,016.01 करोड़ के Content Advances SEBI की जांच और जांच से जुड़े दूसरे मामलों के दायरे में हैं। ये मामले SEBI के Confirmatory Order में भी शामिल हैं। ऑडिटर ने कहा है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन कार्यवाहियों का जून तिमाही के वित्तीय नतीजों पर संभावित असर बताना संभव नहीं है।
कंपनी ने कहा है कि वह SEBI की ओर से जारी Show-Cause Notice से जुड़े मामले में लगातार जानकारी, स्पष्टीकरण और दस्तावेज हासिल करने की कोशिश कर रही है। यह मामला Securities Appellate Tribunal (SAT) के सामने भी चल रहा है और 17 अगस्त 2026 को इसकी आगे की सुनवाई तय थी।
Film और Music Library से कमाई पर बड़ा दांव: मौजूदा वित्तीय दबाव से निकलने के लिए Eros अब अपनी सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक यानी फिल्म और म्यूजिक कंटेंट लाइब्रेरी को कमाई का प्रमुख जरिया बनाने की कोशिश कर रही है। कंपनी ने कहा है कि वह अपनी फिल्म और म्यूजिक लाइब्रेरी को लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट के जरिए Monetise करने की योजना पर काम कर रही है। इसके साथ ही कंपनी ग्रुप कंपनियों से बकाया रकम वसूलने और दूसरे रणनीतिक विकल्पों पर भी काम कर रही है। ऑडिटर ने भी साफ किया है कि कंपनी के कारोबार को आगे जारी रखने की क्षमता इन उपायों की सफलता पर काफी हद तक निर्भर है।
ऑडिटर कंसोलिडेटेड नतीजों पर निष्कर्ष नहीं दे पाए: कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों की समीक्षा के दौरान ऑडिटर को कुछ मामलों में पर्याप्त और उचित सबूत नहीं मिल पाए। इसके कारण ऑडिटर ने कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों पर निष्कर्ष देने में असमर्थता जताई है। इनमें Colour Yellow Production Private Limited से जुड़ा मामला भी शामिल है। यह कंपनी Eros की एक सब्सिडियरी है, लेकिन जून तिमाही के कंसोलिडेटेड नतीजों में इसे शामिल नहीं किया गया। इसका कारण कंपनी के मैनेजमेंट और कंट्रोल को लेकर चल रहा विवाद बताया गया है। यह मामला फिलहाल NCLAT के सामने है।
लागत घटाने और कैश बचाने की कोशिश: कंपनी ने अपनी Liquidity सुधारने के लिए खर्चों में कटौती और कैश बचाने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा Borrowing Facilities को Restructure करने और उपलब्ध फिल्म-म्यूजिक कंटेंट से ज्यादा से ज्यादा Revenue हासिल करने की कोशिश की जा रही है। कंपनी का कहना है कि वह वित्तीय और नियामकीय चुनौतियों के बावजूद सामान्य तरीके से कारोबार जारी रखे हुए है और संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करती रहेगी।
Going Concern Warning बनी सबसे बड़ी चिंता: Eros के लिए सबसे बड़ी चिंता फिलहाल ऑडिटर की Going Concern Warning है। स्टैंडअलोन कंपनी का ₹7.43 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा, पूरी तरह खत्म हो चुकी नेटवर्थ और कुछ मौकों पर Statutory Dues के भुगतान में डिफॉल्ट—इन सभी को ऑडिटर ने महत्वपूर्ण अनिश्चितताओं से जोड़ा है। वहीं, ग्रुप स्तर पर ₹10.43 करोड़ का प्री-टैक्स घाटा भी कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव को दिखाता है। अब Eros की आगे की स्थिति इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि कंपनी फिल्म और म्यूजिक लाइब्रेरी से कितनी तेजी से पैसा जुटाती है, बकाया रकम कितनी वसूल कर पाती है और गैर-जरूरी संपत्तियों से कितनी Liquidity हासिल करती है। फिलहाल कंपनी कारोबार जारी रखे हुए है, लेकिन वित्तीय दबाव, ग्रुप से बकाया रकम, SEBI से जुड़े मामले और ऑडिटर की Going Concern Warning ने Eros के सामने चुनौतियां काफी बढ़ा दी हैं।
सुप्रीम कोर्ट में वकालत से जुड़े सिद्धार्थ यादव को BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी, UCL और SRCC से पढ़ाई के साथ ABVP से भी रहा जुड़ाव
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में सिद्धार्थ यादव को मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी मिली है। राष्ट्रीय मीडिया कन्वेनर अनिल बलूनी के साथ आशीष ऊषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव इस टीम का हिस्सा होंगे।
सिद्धार्थ यादव की पेशेवर पहचान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता के तौर पर है। वह BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर भी सार्वजनिक रूप से सक्रिय रहे हैं और राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं।
सिद्धार्थ यादव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े रहे हैं। वह पूर्व में ABVP के मीडिया इंचार्ज की भूमिका भी निभा चुके हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से LLB और LLM किया है। इसके अलावा उन्हेंने University College London (UCL) और श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से पढ़ाई की है।
कानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत को अपना पेशा बनाया। इसके साथ BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर वह पार्टी के राजनीतिक पक्ष को मीडिया के सामने रखते रहे हैं। अब BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में उन्हें मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी मिली है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में मध्य प्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल को अहम जिम्मेदारी दी है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया को-कन्वेनर बनाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में मध्य प्रदेश के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल को अहम जिम्मेदारी दी है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया को-कन्वेनर बनाया है। राष्ट्रीय मीडिया कन्वेनर अनिल बलूनी के साथ आशीष ऊषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव अब BJP की राष्ट्रीय मीडिया टीम का हिस्सा होंगे। मध्य प्रदेश BJP की मीडिया व्यवस्था में लंबे समय से जिम्मेदारी संभाल रहे आशीष ऊषा अग्रवाल के लिए यह जिम्मेदारी प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाले उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
आशीष ऊषा अग्रवाल मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं। उनका राजनीतिक सफर ग्वालियर से जुड़ा रहा है और 2010 से वह ग्वालियर में पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। पार्टी की मीडिया व्यवस्था में भी उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं। 17 अगस्त 2017 से 13 अगस्त 2021 तक प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट, 14 अगस्त 2021 से 29 अप्रैल 2023 तक प्रदेश प्रवक्ता और 29 अप्रैल 2023 से प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर वह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
ग्वालियर से शुरू हुआ राजनीतिक सफर: आशीष ऊषा अग्रवाल का बीजेपी से जुड़ाव ग्वालियर से रहा है। उपलब्ध प्रोफाइल के मुताबिक, वर्ष 2010 से वह ग्वालियर में पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। छात्र जीवन से ही वह धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे।
राजनीति में सक्रिय होने के साथ उनकी भूमिका धीरे-धीरे पार्टी के मीडिया और राजनीतिक संवाद से जुड़ती गई। 2017 में उन्हें BJP मध्य प्रदेश में प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता बनाया और आगे चलकर प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी। यह क्रम उनके राजनीतिक सफर में लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों को दिखाता है।
मीडिया पैनलिस्ट से प्रदेश मीडिया प्रभारी तक: BJP मध्य प्रदेश की मीडिया व्यवस्था में आशीष ऊषा अग्रवाल की जिम्मेदारियों का क्रम उनके प्रोफाइल में स्पष्ट रूप से दर्ज है। 17 अगस्त 2017 से 13 अगस्त 2021 तक उन्होंने प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर काम किया। इसके बाद 14 अगस्त 2021 से 29 अप्रैल 2023 तक प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाली। 29 अप्रैल 2023 से वह मध्य प्रदेश BJP के प्रदेश मीडिया प्रभारी हैं।
प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर उनकी भूमिका पार्टी के राजनीतिक और सार्वजनिक संवाद से जुड़ी रही है। विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर BJP का पक्ष मीडिया के सामने रखने के साथ-साथ पार्टी की मीडिया गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी भी उनके काम का हिस्सा रही है।
चुनावी दौर में मीडिया प्रबंधन का अनुभव: प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर आशीष ऊषा अग्रवाल की भूमिका चुनावी दौर में भी महत्वपूर्ण रही है। 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान BJP ने सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मीडिया संयोजकों की नियुक्ति की थी।
उस समय प्रदेश मीडिया प्रभारी के तौर पर आशीष अग्रवाल ने विधानसभा स्तर पर मीडिया व्यवस्था से जुड़ी नियुक्तियों की जानकारी साझा की थी। चुनाव के दौरान पार्टी के मीडिया नेटवर्क को विधानसभा स्तर तक मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संवाद को व्यवस्थित करना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा रहा।
शिक्षा और पेशेवर जीवन: राजनीतिक जिम्मेदारियां संभालने से पहले आशीष ऊषा अग्रवाल का पेशेवर अनुभव कॉरपोरेट क्षेत्र से भी जुड़ा रहा है। उनके प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने 2003 से 2010 तक ICICI Bank और उसके समूह में महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। शिक्षा की बात करें तो उन्होंने चेन्नई के Great Lakes Institute of Management से MBA किया है। इसके अलावा जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से MA (Social Work & Extension Education) और B.Com की डिग्री हासिल की है। कॉरपोरेट क्षेत्र के अनुभव के बाद उनका सार्वजनिक जीवन राजनीतिक संगठन और मीडिया प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ा।
सामाजिक और सेवा गतिविधियों से भी जुड़ाव: आशीष ऊषा अग्रवाल छात्र जीवन से ही धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपनी माता जी की स्मृति में मुरार मुक्तिधाम के जीर्णोद्धार का कार्य करवाया। इसके अलावा वंचित वर्गों को वित्तीय सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराने की पहल के साथ वह सामाजिक समरसता, धार्मिक आयोजनों और सेवा कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। उनकी सामाजिक गतिविधियों का जुड़ाव खास तौर पर ग्वालियर से रहा है, जहां से उनका राजनीतिक और सामाजिक सफर आगे बढ़ा।
ग्वालियर के प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं: आशीष ऊषा अग्रवाल ग्वालियर के प्रतिष्ठित HG Group परिवार से आते हैं। छात्र जीवन से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहने के बाद उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया और फिर BJP की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। इस तरह उनके सार्वजनिक जीवन में पेशेवर अनुभव के साथ सामाजिक और राजनीतिक जुड़ाव भी लगातार बना रहा।
अब प्रदेश से राष्ट्रीय मीडिया टीम तक: BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में आशीष ऊषा अग्रवाल को मीडिया को-कन्वेनर बनाए जाने के साथ उनकी जिम्मेदारी का दायरा मध्य प्रदेश से आगे बढ़ गया है। आशीष ऊषा अग्रवाल के अब तक के सफर को देखें तो BJP में उनकी राजनीतिक भूमिका लगातार मीडिया और कम्युनिकेशन के इर्द-गिर्द विकसित हुई है। 2010 से ग्वालियर में पार्टी की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़ने के बाद 2017 में वह प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट बने। इसके बाद प्रदेश प्रवक्ता और फिर 2023 से प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस दौरान उन्हें पार्टी के राजनीतिक संवाद, मीडिया प्रबंधन और चुनावी गतिविधियों से जुड़े काम का अनुभव मिला। अब राष्ट्रीय मीडिया को-कन्वेनर की जिम्मेदारी के साथ उनके इस सफर का दायरा राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है।
जाने-माने चुनाव विश्लेषक, वरिष्ठ टीवी पत्रकार और लेखक प्रदीप भंडारी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक (National Media Co-Convener) नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जाने-माने चुनाव विश्लेषक, वरिष्ठ टीवी पत्रकार और लेखक प्रदीप भंडारी को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में अहम जिम्मेदारी मिली है। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक (National Media Co-Convener) नियुक्त किया है। राष्ट्रीय मीडिया संयोजक अनिल बलूनी के साथ अब वह पार्टी की राष्ट्रीय मीडिया टीम का हिस्सा होंगे। इससे पहले जुलाई 2024 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी थी।
प्रदीप भंडारी ‘जन की बात’ के फाउंडर और CEO हैं और चुनावी विश्लेषण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखते हैं। ग्राउंड सर्वे और चुनावी आंकड़ों के जरिए मतदाताओं का मूड समझने वाले भंडारी टीवी पत्रकारिता और एंकरिंग से लेकर लेखन तक सक्रिय रहे हैं। वह इंडिया न्यूज (India News) में न्यूज डायरेक्टर और रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क (Republic Media Network) में कंसल्टिंग एडिटर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, जबकि जी न्यूज (Zee News) में कंसल्टिंग एडिटर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। चुनावी विश्लेषण के अपने अनुभव को उन्होंने किताबों के जरिए भी सामने रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनकी दो किताबें—‘Modi Vijaygatha 2019’ और ‘Modi 3.0: Bigger, Higher, Stronger’—चर्चा में रही हैं।
चुनावी विश्लेषण से बनी पहचान: प्रदीप भंडारी की पहचान एक चुनाव विश्लेषक के तौर पर मजबूत हुई। ‘जन की बात’ के जरिए उन्होंने चुनावी सर्वे और ग्राउंड रिपोर्टिंग को अपने काम का अहम हिस्सा बनाया। मतदाताओं के बीच जाकर उनके मुद्दों, प्राथमिकताओं और राजनीतिक सोच को समझना उनके चुनावी विश्लेषण की खासियत रही है। उनके चुनावी काम में ग्राउंड रिपोर्टिंग और पब्लिक ओपिनियन को आंकड़ों के साथ जोड़ने पर खास जोर रहा है ।यही अनुभव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पेशेवर पहचान बना। चुनावी नतीजों से पहले मतदाताओं के मूड और राजनीतिक रुझानों को समझने की उनकी कोशिशों ने उन्हें चुनावी विश्लेषण के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम बनाया।
‘जन की बात’ से बनाई अलग पहचान: प्रदीप भंडारी ने ‘जन की बात’ (Jan Ki Baat) को एक स्वतंत्र पब्लिक ओपिनियन और चुनाव विश्लेषण प्लेटफॉर्म के तौर पर खड़ा किया। चुनावों के दौरान ग्राउंड सर्वे, ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल के जरिए मतदाताओं के मूड को समझना इसके काम का अहम हिस्सा रहा है। ‘जन की बात’ के जरिए भंडारी ने चुनावी आंकड़ों को जमीन पर मौजूद राजनीतिक माहौल से जोड़ने की कोशिश की। अलग-अलग राज्यों के चुनावों में ग्राउंड पर जाकर मतदाताओं से बातचीत और उनके राजनीतिक रुझानों को समझने का यह मॉडल उनकी पहचान का अहम हिस्सा बना।
चुनावी विश्लेषण से किताबों तक का सफर: चुनावी राजनीति पर अपने अनुभव और विश्लेषण को प्रदीप भंडारी ने किताबों के जरिए भी सामने रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा और चुनावी सफलता उनके लेखन का प्रमुख विषय रही है। उनकी किताब ‘Modi Vijaygatha 2019’ 2019 के लोकसभा चुनाव और नरेंद्र मोदी की राजनीतिक सफलता के विश्लेषण पर केंद्रित है। इसके बाद उनकी दूसरी किताब ‘Modi 3.0: Bigger, Higher, Stronger’ सामने आई। यह किताब 2024 के लोकसभा चुनाव, भारतीय मतदाताओं के व्यवहार और नरेंद्र मोदी की राजनीतिक लोकप्रियता को चुनावी विश्लेषण के नजरिए से समझने की कोशिश करती है। ‘Modi 3.0’ में भंडारी ने भारतीय मतदाताओं के मूड और चुनावी रुझानों को समझने के अपने अनुभव को पुस्तक के रूप में पेश किया है। इस तरह उनका लेखन भी उनके चुनावी विश्लेषण और ग्राउंड अनुभव से सीधे जुड़ा नजर आता है।
पत्रकारिता से राजनीति तक बदला प्रोफेशनल ट्रैक: प्रदीप भंडारी के करियर में बड़ा बदलाव जुलाई 2024 में आया, जब BJP ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया। पार्टी की ओर से जारी नियुक्ति पत्र में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से उनकी नियुक्ति की जानकारी दी गई थी। राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने के बाद उनकी भूमिका सिर्फ चुनाव विश्लेषक या टीवी पत्रकार तक सीमित नहीं रही। वह BJP के राष्ट्रीय राजनीतिक संचार का औपचारिक हिस्सा बन गए और मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष रखने लगे। यह उनके प्रोफेशनल सफर का महत्वपूर्ण मोड़ था। जिस राजनीतिक परिदृश्य और मतदाता के मूड का वह पत्रकार और चुनाव विश्लेषक के तौर पर विश्लेषण करते रहे थे, अब उसी राजनीतिक व्यवस्था में वह एक राजनीतिक दल के आधिकारिक प्रवक्ता के तौर पर सक्रिय हो गए।
BJP की राष्ट्रीय मीडिया टीम में नई भूमिका: अब BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में उन्हें राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था में अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक, जबकि प्रदीप भंडारी के साथ आशीष उषा अग्रवाल और सिद्धार्थ यादव को मीडिया सह-संयोजक बनाया गया है। इस नई जिम्मेदारी के साथ प्रदीप भंडारी का BJP में संगठनात्मक और राजनीतिक संचार से जुड़ा दायरा और बढ़ गया है। राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर जहां उनकी भूमिका पार्टी का राजनीतिक पक्ष मीडिया के सामने रखने की थी।
चुनावी मैदान से राष्ट्रीय मीडिया रणनीति तक: प्रदीप भंडारी का सफर पत्रकारिता से शुरू होकर चुनावी विश्लेषण, ग्राउंड सर्वे, टीवी पत्रकारिता, एंकरिंग और लेखन से गुजरते हुए राजनीति तक पहुंचा है। ‘जन की बात’ ने उन्हें चुनावी विश्लेषण के क्षेत्र में अलग पहचान दी, जबकि टीवी पत्रकारिता ने उन्हें बड़े राजनीतिक मुद्दों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अनुभव दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखी उनकी किताबों ने उनके चुनावी और राजनीतिक विश्लेषण को एक अलग मंच दिया। जुलाई 2024 में BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने के बाद उनके करियर ने पत्रकारिता से राजनीति की ओर औपचारिक मोड़ लिया और अब राष्ट्रीय मीडिया टीम में सह-संयोजक की जिम्मेदारी उनके इस सफर का नया पड़ाव है। चुनावी मैदान में मतदाताओं की नब्ज पढ़ने से शुरू हुआ प्रदीप भंडारी का सफर अब BJP की राष्ट्रीय मीडिया व्यवस्था तक पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि चुनावी विश्लेषण, ग्राउंड सर्वे, टीवी पत्रकारिता, एंकरिंग और लेखन का अनुभव अब पार्टी की राष्ट्रीय मीडिया रणनीति में उनके काम आएगा।