मीडिया सेल्स, ब्रैंडेड कंटेंट, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स और बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में मधुर शाही को 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) ने मधुर शाही को एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट–जोनल हेड, टाइम्स इन्फ्लुएंस–रेवेन्यू के पद पर नियुक्त किया है। मधुर शाही स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स, ब्रैंडेड कंटेंट, इंटीग्रेटेड मीडिया सॉल्यूशंस और आईपी-आधारित अवसरों के माध्यम से बिजनेस ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह मुंबई से अपना कामकाज संभालेंगी और राजेश मदामपथ को रिपोर्ट करेंगी। मुंबई की बीसीए टीम तत्काल प्रभाव से उन्हें रिपोर्ट करेगी।
मीडिया सेल्स, ब्रैंडेड कंटेंट, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स और बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में मधुर शाही को 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने टेलीविजन, डिजिटल, प्रिंट, इवेंट्स और इंटीग्रेटेड मीडिया प्लेटफॉर्म्स में काम किया है।
मधुर शाही इससे पहले जून 2024 से एनडीटीवी नेटवर्क (NDTV Network) में ग्रुप लीड-वेस्ट के पद पर कार्यरत थीं। यहां वह पश्चिमी क्षेत्र के लिए कंटेंट स्ट्रैटेजी, इवेंट्स और महत्वपूर्ण ब्रैंड कोलैबोरेशंस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व कर रही थीं। साथ ही ब्रैंडेड कंटेंट, स्पॉन्सरशिप, आईपी मोनेटाइजेशन और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स की जिम्मेदारी भी उनके पास थी।
बता दें कि टाइम्स नेटवर्क में मधुर शाही की यह वापसी भी है। इससे पहले वह करीब नौ वर्षों तक बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (Bennett Coleman & Co. Ltd.) से जुड़ी रही हैं। यहां उन्होंने प्रमुख कैटेगरी और कॉरपोरेट अकाउंट्स को संभाला तथा इंटीग्रेटेड मीडिया बिजनेस और प्रमुख प्रॉपर्टीज को विकसित करने और विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूर्व में वह वर्ल्डवाइड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Worldwide Media Pvt. Ltd.), वीजेएम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (VJM Media Pvt. Ltd.) और टीवी लाइव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (T.V. Live India Pvt. Ltd.) में भी विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।
मधुर शाही की नियुक्ति के बारे में टाइम्स नेटवर्क ने कहा है कि मीडिया इकोसिस्टम की उनकी मजबूत समझ, क्लाइंट्स और एजेंसियों के साथ गहरे संबंधों तथा ब्रैंडेड कंटेंट और इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस के क्षेत्र में उनके अनुभव से नेटवर्क को अपने अगले विकास चरण में लाभ मिलने की उम्मीद है।
गुंतास रंधावा ने Unilever में 17 साल की लंबी पारी के बाद कंपनी छोड़ दी है। वह हाल तक Hindustan Unilever में एक अहम जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गुंतास रंधावा (Guntas Randhawa) ने यूनिलीवर (Unilever) में करीब 17 साल बिताने के बाद कंपनी से विदाई ली है। वह हाल तक हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) में India Head – Vitamins, Minerals and Supplements के पद पर थीं।
रंधावा ने 2009 में कंपनी के साथ Business Leadership Trainee के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। करीब डेढ़ दशक से ज्यादा के कार्यकाल में उन्होंने कई वरिष्ठ पदों पर काम किया और अलग-अलग कारोबारों की जिम्मेदारियां संभालीं।
उनके अनुभव का दायरा हेल्थ और वेलनेस ब्रांड्स, सप्लीमेंट्स, प्रीमियम डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस और P&L मैनेजमेंट तक रहा है। उन्होंने ब्रांड्स की लंबी अवधि की ग्रोथ और बिजनेस विस्तार से जुड़े कामों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कंपनी से विदाई की जानकारी साझा करते हुए रंधावा ने लिंक्डइन पोस्ट में अपने 17 साल के अनुभव को याद किया। उन्होंने लिखा कि यूनिलीवर ने उन्हें यह समझने के लिए 17 साल दिए कि कोई ब्रांड लोगों की यादों में अपनी छोटी-सी जगह कैसे बनाता है और उस जगह को बनाए रखने के लिए लगातार क्या करना पड़ता है।
कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का सफर तय करने वाले कुणाल किशोर का जन्मदिन ऐसे समय आया है, जब Value 360 नए विकास चरण में है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वैल्यू 360 (Value 360) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन कुणाल किशोर (Kunal Kishore) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनके लिए यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि दो दशक से ज्यादा लंबे कम्युनिकेशंस करियर के बाद उनके द्वारा खड़ा किया गया कारोबार अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
कुणाल किशोर की अगुआई में बनी वैल्यू 360 कम्युनिकेशंस (Value 360 Communications) इस साल एनएसई इमर्ज (NSE Emerge) पर सूचीबद्ध हुई है। कंपनी के हालिया वित्तीय आंकड़े भी कारोबार के विस्तार के साथ उसकी बढ़ती लाभप्रदता की तस्वीर पेश करते हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 68.96 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 26.4 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में EBITDA 59.9 फीसदी बढ़कर 19.17 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा पहली बार 10 करोड़ रुपये के आंकड़े से ऊपर गया।
मई में हुई लिस्टिंग ने भी वैल्यू 360 के सफर में एक अहम अध्याय जोड़ा। कंपनी देश की पहली सूचीबद्ध इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस कंसल्टेंसी बनी, जिससे पब्लिक मार्केट में पीआर बिजनेस के प्रदर्शन को मापने का एक नया नजरिया सामने आया।
किशोर का करियर ऐसे समय शुरू हुआ था, जब कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री मुख्य रूप से पत्रकारों, मीडिया रिलेशन और कॉरपोरेट प्रतिष्ठा पर केंद्रित थी। अब डिजिटल, कंटेंट, इन्फ्लुएंसर्स और नए ब्रांड कम्युनिकेशन मॉडल इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। वर्ष 2020 में क्लैनकनेक्ट (ClanConnect) की शुरुआत भी इसी बदलाव की दिशा में एक कदम रही।
कंपनी की मौजूदा संरचना में भी बदलाव आया है। अतुल शर्मा (Atul Sharma) के सीईओ बनने के बाद किशोर की भूमिका अब रोजमर्रा के ऑपरेशनल फैसलों से आगे संगठन की व्यापक दिशा तय करने पर ज्यादा केंद्रित है। इसके साथ ही वह 2025-27 कार्यकाल के लिए पीआरसीएआई (PRCAI) के प्रेसिडेंट के तौर पर इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों में सक्रिय हैं।
ऐसे में कुणाल किशोर का यह जन्मदिन सिर्फ एक व्यक्तिगत पड़ाव नहीं, बल्कि उस कम्युनिकेशंस कारोबार के नए चरण का भी प्रतीक है, जिसे उन्होंने वर्षों की मेहनत से विकसित किया है।
प्रसेनजीत बसु को वोल्टास लिमिटेड में हेड-मार्केटिंग और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह वोल्टास बेको में मार्केटिंग प्रमुख थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वोल्टास लिमिटेड (Voltas Limited) ने प्रसेनजीत बसु (Prasenjit Basu) को हेड-मार्केटिंग और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की मार्केटिंग रणनीति और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगे।
बसु इससे पहले वोल्टास बेको (Voltas Beko) में हेड-मार्केटिंग, प्रोडक्ट एंड ई-कॉमर्स के पद पर कार्यरत थे। वोल्टास बेको से पहले वह वोल्टास लिमिटेड में ही सीनियर जनरल मैनेजर-मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मार्केटिंग और बिजनेस स्ट्रैटेजी के क्षेत्र में बसु को कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रिटेल, एफएमसीजी और मीडिया सहित कई इंडस्ट्रीज का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने अलग-अलग संगठनों में मार्केटिंग, ब्रांड और बिजनेस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व किया है।
बसु के पिछले कार्य अनुभव में टेन स्पोर्ट्स नेटवर्क (TEN Sports Network), वीडियोकॉन कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Videocon Consumer Durables), रिलायंस डिजिटल रिटेल (Reliance Digital Retail) और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (LG Electronics) जैसी कंपनियां शामिल हैं।
इसके अलावा उन्होंने बर्सन-मार्स्टेलर-जेनेसिस पीआर (Burson-Marsteller - Genesis PR), डीएलएफ यूनिवर्सल (DLF Universal) और कोडक (Kodak) के साथ भी काम किया है। वोल्टास में उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय आई है, जब कंपनी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट में अपनी ब्रांड और मार्केटिंग मौजूदगी को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स यानी किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, चेहरा और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल उठाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स यानी किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, चेहरा और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल उठाया है। कोर्ट यह देख रहा है कि क्या इन अधिकारों का इस्तेमाल सटायर, पैरोडी, कैरिकेचर या किसी कथित गलत काम से जुड़ी जानकारी को रोकने के लिए किया जा सकता है, खासकर तब जब मामला किसी व्यक्ति की व्यावसायिक छवि के गलत इस्तेमाल से जुड़ा न हो।
यह मुद्दा 'फिजिक्सवाला' के फाउंडर अलख पांडे की ओर से दायर एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान सामने आया। अलख पांडे ने आरोप लगाया है कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना आपत्तिजनक तरीके से किया जा रहा है और उन्होंने इससे सुरक्षा की मांग की है।
मामले की सुनवाई जस्टिस अनूप जयराम भमभानी कर रहे हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि पांडे की ओर से मांगी गई सुरक्षा का दायरा जरूरत से ज्यादा व्यापक हो सकता है। अदालत अब यह जांचना चाहती है कि पर्सनैलिटी राइट्स कहीं ऐसे कंटेंट को रोकने का जरिया तो नहीं बन रहे, जो किसी व्यक्ति की व्यावसायिक पहचान का गलत इस्तेमाल किए बिना कानूनी तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता हो।
सटायर और पैरोडी पर भी कोर्ट की नजर
अदालत ने पहले के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पर्सनैलिटी राइट्स का इस्तेमाल किसी कथित गलत काम से जुड़ी जानकारी के प्रसार को रोकने या कैरिकेचर, पैरोडी और व्यंग्य जैसे पूरे तरह के अभिव्यक्ति के रूपों को खत्म करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, अगर उनमें किसी व्यक्ति के Personality या Publicity Rights का व्यावसायिक शोषण नहीं हो रहा है।
इसका मतलब यह है कि कोर्ट एक तरफ किसी व्यक्ति की पहचान के अनधिकृत और आपत्तिजनक इस्तेमाल से उसके अधिकारों की रक्षा करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि इन अधिकारों का इस्तेमाल आलोचना, व्यंग्य या पैरोडी को रोकने के लिए न हो।
5 अगस्त के अंतरिम आदेश में क्या कहा था?
यह मुद्दा 5 अगस्त को दिए गए एक अंतरिम आदेश के साथ सामने आया। उस आदेश में कोर्ट ने कंटेंट हटाने के निर्देशों को कथित उल्लंघन की तीन श्रेणियों तक सीमित रखा था। इनमें अश्लील सामग्री, अपमानजनक कंटेंट और पांडे की पहचान या व्यक्तित्व का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल शामिल था।
कोर्ट ने आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के आरोपी पक्षों को समन भी जारी किए और उनसे जवाब मांगा है। इसके अलावा Google, Telegram, X और Automatic Inc को मामले में बताए गए कुछ वेबसाइट्स के पीछे मौजूद लोगों से जुड़ी बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
दूसरी वेबसाइट्स की भी शिकायत कर सकते हैं अलख पांडे
कोर्ट ने अलख पांडे को यह अनुमति भी दी है कि अगर उन्हें लगता है कि दूसरी वेबसाइट्स भी उनके अधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं, तो वह उनके बारे में संबंधित इंटरमीडियरी को जानकारी दे सकते हैं। ऐसे मामलों में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और डोमेन रजिस्ट्रार तकनीकी तौर पर यह जांच करेंगे कि संबंधित वेबसाइट का संबंध उस वेबसाइट से है या नहीं, जिसके खिलाफ कोर्ट पहले ही रोक का आदेश दे चुका है।
हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया कि इस तकनीकी जांच का मतलब यह नहीं है कि ISP या डोमेन रजिस्ट्रार खुद यह तय कर सकते हैं कि किसी वेबसाइट को ब्लॉक किया जाए या नहीं। उनकी भूमिका केवल यह जांचने तक सीमित रहेगी कि अलख पांडे की ओर से बताई गई वेबसाइट पहले से प्रतिबंधित वेबसाइट का मिरर, अल्फान्यूमेरिक या रीडायरेक्ट वर्जन है या नहीं।
अलख पांडे की ओर से क्या आरोप लगाए गए?
अलख पांडे की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट जे. साईं दीपक ने कोर्ट के सामने आरोप रखा कि उनकी तस्वीर और पहचान का इस्तेमाल कई जगहों पर उनकी अनुमति के बिना किया जा रहा है।
उनकी ओर से कहा गया कि टेलीग्राम स्टीकर में अलख पांडे के चेहरे का इस्तेमाल किया जा रहा है और उन्हें व्यावसायिक तौर पर बेचा जा रहा है। इसके अलावा कुछ कंटेंट में कथित तौर पर आपत्तिजनक, अश्लील और यौन रूप से अपमानजनक सामग्री भी दिखाई जा रही है।
अलख पांडे की ओर से यह भी कहा गया कि वह आलोचना के प्रति अत्यधिक संवेदनशील नहीं हैं, लेकिन उनके मुताबिक कुछ सीमाओं का पालन किया जाना चाहिए।
पैरोडी वीडियो हटाने से कोर्ट ने किया इनकार
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पांडे से जुड़ा एक पैरोडी और सटायरिक वीडियो भी पेश किया गया। कोर्ट ने वीडियो देखने के बाद उसे हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। यही पहलू इस मामले को खास बनाता है। कोर्ट अब यह अंतर समझने पर जोर दे रहा है कि किसी व्यक्ति की पहचान का अनधिकृत व्यावसायिक या अश्लील इस्तेमाल एक अलग मामला है, जबकि सटायर, पैरोडी या व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति अलग श्रेणी में आ सकती है।
आगे की सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट यह तय करने की दिशा में आगे बढ़ेगा कि पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की सीमा क्या होनी चाहिए और किस स्थिति में इन अधिकारों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान की रक्षा के लिए किया जा सकता है, तथा किस स्थिति में इसका इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
इंडिया टुडे ग्रुप ने दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए ‘पॉल्यूशन का सॉल्यूशन’ (Pollution Ka Solution) नाम से पांच हफ्ते का एक कैंपेन शुरू किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली के प्रदूषण की समस्या पर लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन अब इसे सिर्फ चर्चा तक सीमित रखने के बजाय समाधान तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। इंडिया टुडे ग्रुप ने दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए ‘पॉल्यूशन का सॉल्यूशन’ (Pollution Ka Solution) नाम से पांच हफ्ते का एक कैंपेन शुरू किया है।
इस पहल का मकसद दिल्ली के प्रदूषण पर बार-बार बात करने और समस्या बताने से आगे बढ़कर ऐसे व्यावहारिक, बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले और नतीजे मापने योग्य समाधान तलाशना है, जिनसे शहर की हवा को वास्तव में बेहतर किया जा सके।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर खास फोकस
इस कैंपेन में वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को दिल्ली की खराब हवा की एक प्रमुख वजह मानते हुए क्लीन मोबिलिटी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े उत्सर्जन पर खास ध्यान दिया जाएगा।
कैंपेन के तहत आम लोग भी अपने सुझाव और आइडिया दे सकेंगे। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए प्रस्ताव जमा किए जा सकते हैं। इसके बाद इन आइडिया की विशेषज्ञों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की मदद से व्यवस्थित तरीके से जांच की जाएगी।
सिर्फ कागज पर अच्छे दिखने वाले सुझावों के बजाय ऐसे समाधानों को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके और जिनके नतीजों को मापा भी जा सके।
विशेषज्ञों की जूरी करेगी आइडिया का मूल्यांकन
कैंपेन में विज्ञान, प्रशासन, स्वास्थ्य, मीडिया और खेल जगत से जुड़े लोगों को जूरी में शामिल किया गया है। जूरी में IIT Kanpur के Director Prof. Manindra Agrawal, इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी, दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के नरेश प्रियदर्शी, Medanta – The Medicity में Pediatrics की सीनियर डायरेक्टर व HOD डॉ. नीलम मोहन और भारत की 1983 क्रिकेट विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव शामिल हैं।
इन विशेषज्ञों की टीम अलग-अलग सुझावों की उपयोगिता और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में लागू किए जाने की संभावना का आकलन करेगी।
जमीन पर भी परखे जा सकते हैं समाधान
इस कैंपेन की खास बात यह है कि सिर्फ आइडिया चुनकर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। चुनिंदा प्रस्तावों को जमीन पर टेस्ट भी किया जा सकता है। इसका मकसद यह देखना होगा कि वास्तविक परिस्थितियों में कोई समाधान कितना प्रभावी है और क्या उससे प्रदूषण कम करने के मापने योग्य नतीजे मिलते हैं। यानी कैंपेन का फोकस केवल ‘अच्छा आइडिया’ खोजने पर नहीं, बल्कि उसे वास्तव में लागू करके उसके नतीजे देखने पर भी रहेगा।
पांच हफ्ते बाद होगा ग्रैंड फिनाले
पांच हफ्ते तक चलने वाला यह कैंपेन ग्रैंड फिनाले के साथ खत्म होगा। इसमें चुने गए समाधान विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों के सामने पेश किए जाएंगे। कैंपेन के तहत चुने गए विजेता आइडिया को दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा बड़े स्तर पर लागू किए जाने के लिए विचार किया जाएगा।
इसके अलावा विजेता प्रस्ताव के लिए 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी रखा गया है। इससे ऐसे लोगों और टीमों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जो दिल्ली के प्रदूषण से निपटने के लिए कोई प्रभावी और व्यावहारिक समाधान लेकर सामने आ सकते हैं।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि प्रदूषण कितना बढ़ा, बल्कि समाधान क्या है
‘Pollution Ka Solution’ कैंपेन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के प्रदूषण को लेकर होने वाली चर्चा का तरीका बदलना है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि दिल्ली की हवा कितनी खराब हो गई है, बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि इसे बेहतर करने के लिए वास्तव में क्या किया जा सकता है।
इंडिया टुडे ग्रुप इस पहल को लोगों की भागीदारी, तथ्यों और जमीन पर समाधान लागू करने की सोच के साथ आगे बढ़ा रहा है। उम्मीद है कि इस कैंपेन के जरिए दिल्ली के प्रदूषण पर होने वाली अगली बहस में सिर्फ समस्या की चर्चा नहीं होगी, बल्कि ऐसा समाधान भी सामने आएगा जिसे वास्तव में लागू किया जा सके।
प्रशांत वी. सिंह इससे पहले ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ के साथ जुड़े थे, जहां वह फरवरी 2026 से अगस्त 2026 तक ‘बिजनेस टुडे’ में डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत रहे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
बिजनेस जर्नलिज्म और डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार प्रशांत वी. सिंह ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) मीडिया समूह के साथ नई पारी शुरू की है। वह ग्रुप के बिजनेस न्यूज प्लेटफॉर्म ‘लाइवमिंट’ (LiveMint) और ‘लाइवमिंट हिंदी’ (LiveMint Hindi) के एडिटर और हेड की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अपनी इस भूमिका में प्रशांत वी. सिंह लाइवमिंट की विश्वसनीय पत्रकारिता को और मजबूत करने के साथ-साथ डिजिटल और उभरते फॉर्मेट्स में इसकी एडिटोरियल स्ट्रैटेजी पर काम करेंगे। उनका फोकस तेजी से डिजिटल होते मीडिया परिवेश में पाठकों तक प्रासंगिक और उपयोगी बिजनेस न्यूज पहुंचाने के साथ-साथ वेब, ऐप, वीडियो और इवेंट्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाइवमिंट के साथ पाठकों की भागीदारी बढ़ाने पर रहेगा।
प्रशांत वी. सिंह इससे पहले ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ के साथ जुड़े थे, जहां वह फरवरी 2026 से अगस्त 2026 तक ‘बिजनेस टुडे’ में डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत रहे। इस दौरान वह बिजनेस टुडे के वेब, टीवी और प्रिंट के बीच तालमेल बनाने, ऑडियंस ग्रोथ, एडिटोरियल स्ट्रैटेजी, डेटा और एनालिटिक्स के साथ-साथ एआई इंटीग्रेशन पर काम कर रहे थे।
इससे पहले वह ‘टाइम्स नेटवर्क’ में सीनियर एडिटर-बिजनेस और ‘ईटी नाउ डिजिटल’ व ‘ईटी नाउ स्वदेश डिजिटल’ के हेड की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने ईटी नाउ और ईटी नाउ स्वदेश के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को लॉन्च करने में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने डिजिटल एक्सक्लूसिव, ग्राउंड रिपोर्टिंग, नई कैटेगरी और विभिन्न आईपी व इवेंट्स पर भी काम किया।
प्रशांत वी. सिंह ‘जी बिजनेस’ में करीब चार साल तक डिप्टी एडिटर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। यहां उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के रिवैंप और लॉन्च/री-लॉन्च के साथ ओरिजिनल वीडियो, एक्सक्लूसिव और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर काम किया।
वह ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इससे पहले उन्होंने ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ में स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट, ‘सीएनएन-आईबीएन’ में चीफ सब एडिटर और ‘डेलीभास्कर डॉट कॉम’ में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम किया है। अपने करियर की शुरुआत में वह ‘दूरदर्शन न्यूज’ में स्क्रिप्ट राइटर और ‘दैनिक जागरण’ में इंटर्न-न्यूज (एडिटोरियल) के तौर पर भी काम कर चुके हैं।
प्रशांत वी. सिंह के पास डिजिटल पत्रकारिता में करीब 19 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो, फोटो और डेटा स्टोरीज के साथ-साथ एडिटोरियल स्ट्रैटेजी, ऑडियंस ग्रोथ, एआई, पैनल डिस्कशन, इवेंट्स, आईपी, शो, सब्सक्रिप्शन, ऐप्स और पॉडकास्ट के क्षेत्र में काम किया है।
शिक्षा की बात करें तो प्रशांत वी. सिंह ने आई. के. गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन/मीडिया स्टडीज में एमएससी की है। उन्होंने आईएमटी गाजियाबाद के दिल्ली स्थित लाजपत नगर सेंटर से इंटरनेशनल बिजनेस में पीजीडीबीएम भी किया है। वर्ष 2024 में उन्होंने बेनेट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ‘जेनेरेटिव एआई फॉर स्किल एन्हांसमेंट’ कार्यक्रम भी पूरा किया।
भारत दौरे पर आए S4Capital और Monks के फाउंडर व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन सर मार्टिन सोरेल ने शुक्रवार, 21 अगस्त को नई दिल्ली में मार्केटिंग, बिजनेस और मीडिया जगत के वरिष्ठ लीडर्स के साथ खास बैठक की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत दौरे पर आए ग्लोबल विज्ञापन और मार्केटिंग इंडस्ट्री के दिग्गज S4Capital और Monks के फाउंडर व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन सर मार्टिन सोरेल ने शुक्रवार, 21 अगस्त को नई दिल्ली में मार्केटिंग, बिजनेस और मीडिया जगत के चुनिंदा सीनियर लीडर्स के साथ एक खास बैठक में हिस्सा लिया। इस शाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), तेजी से बदलते मार्केटिंग इकोसिस्टम और ग्लोबल बिजनेस को नए सिरे से आकार देने वाली ताकतों पर बातचीत हुई।
मार्केटिंग का भविष्य
इस खास कार्यक्रम की मेजबानी BW बिजनेसवर्ल्ड ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ न एक्चेंज4मीडिया के फाउंडर व डॉ. अनुराग बत्रा ने की। यह सीमित और केवल आमंत्रित लोगों के लिए आयोजित शाम नई दिल्ली के The Park में स्थित Tyde में हुई।

इस बैठक में CMOs, फाउंडर्स, बिजनेस एग्जिक्यूटिव्स और मीडिया लीडर्स का चुनिंदा समूह शामिल हुआ। यहां आज बिजनेस के सामने मौजूद महत्वपूर्ण बदलावों पर खुलकर बातचीत हुई। चर्चाओं में AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और क्रिएटिविटी व प्रोडक्टिविटी पर उसके असर से लेकर बदलते कंज्यूमर बिहेवियर, बदलते मीडिया मॉडल और टेक्नोलॉजी आधारित माहौल के हिसाब से संगठनों को खुद को बदलने की जरूरत जैसे मुद्दे शामिल रहे।
शाम की शुरुआत डॉ. अनुराग बत्रा के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद सर मार्टिन सोरेल ने शुरुआती विचार साझा किए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मार्केटिंग, ग्लोबल बिजनेस और अलग-अलग बाजारों में हो रहे बड़े बदलावों पर अपने विचार रखे।
विज्ञापन जगत के सबसे प्रमुख वैश्विक चेहरों में शामिल सर मार्टिन सोरेल लंबे समय से टेक्नोलॉजी, डेटा, क्रिएटिविटी, मीडिया और कंज्यूमर बिहेवियर के बीच के संबंध पर अपनी बात रखते रहे हैं। S4Capital और Monks में अपने नेतृत्व के जरिए वह ग्लोबल विज्ञापन और मार्केटिंग इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों से लगातार जुड़े हुए हैं।
AI, बिजनेस और आगे क्या?
शुरुआती संबोधन के बाद सर मार्टिन सोरेल और डॉ. अनुराग बत्रा के बीच फायरसाइड चैट हुई, जिसे BW Businessworld की Group Editorial Director Noor Fathima Warsia ने मॉडरेट किया।
इस बातचीत में मार्केटिंग और बिजनेस में AI की बदलती भूमिका पर चर्चा हुई। खास तौर पर इस बात पर जोर रहा कि AI के इस्तेमाल में अब सिर्फ प्रयोग करने से आगे बढ़कर इसे वास्तविक कामकाज में शामिल करने का दौर आ गया है। बातचीत में प्रोडक्टिविटी, क्रिएटिव बदलाव, प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त और AI के बिजनेस ऑपरेशंस का हिस्सा बनने के साथ टीमों, टैलेंट और काम करने के तरीकों में संभावित बदलाव पर भी चर्चा हुई।
बातचीत में इंडस्ट्री में हो रहे दूसरे बड़े बदलावों को भी शामिल किया गया। इसमें कंज्यूमर की बदलती उम्मीदें, लगातार बदलते मीडिया और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम और क्रिएटिविटी, डेटा तथा बिजनेस स्ट्रैटेजी के बीच बढ़ता तालमेल शामिल रहा।
भारत के मार्केटिंग इकोसिस्टम की झलक
इस शाम टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर ब्रांड्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, मीडिया और मार्केटिंग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

इनमें Utsav Malhotra, Chief Operating Officer, Noise; Nitin Gupta, Managing Director, Fujifilm Sonosite; Himanshu Khanna, Group CMO, CK Birla Group; Ajay Kaul, Global Head, Growth Marketing, DiDi; Rajeev Jain, Senior Vice President, Corporate Marketing, DS Group; Satinder Juneja, CMO, Birlasoft; और Parag Sawhney, General Manager, The Park New Delhi शामिल रहे।

इस बैठक में Abhinav Iyer, Chief General Manager, Marketing & Strategy, The Muthoot Group; Nikita Malhotra, Head, Digital & Retail Marketing, Woodland; Nidhi Rastogi, Head of Marketing, Uniqlo India; और Ratin Duggal, GM, Marketing, ITC भी मौजूद रहे।

Monks की ओर से Monisha Chowla, Senior Vice President, Operations, APAC Centre of Excellence; Niranjan Singh, Head of Media, India; और Prabhjot Kaur, Senior Director, Operations, India ने हिस्सा लिया।

इस शाम मीडिया और इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इनमें Zee Media के Raktim Das और NDTV के Gaurav Barjatya के साथ-साथ अनुभवी इंडस्ट्री लीडर्स, broadcast media veteran Avinash Pandey और LT Foods के पूर्व Chief Marketing Officer K. Ganapathy Subramaniam भी मौजूद रहे।
गेस्ट लिस्ट में अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों की मौजूदगी ने ब्रांड, एजेंसी, मीडिया, टेक्नोलॉजी और बिजनेस से जुड़े अलग-अलग नजरियों को एक जगह ला दिया। इससे बातचीत केवल किसी एक सेक्टर या फंक्शन तक सीमित नहीं रही।
AI के प्रयोग से बिजनेस में इस्तेमाल तक
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मार्केटिंग से जुड़े कामों में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। AI का असर क्रिएटिव प्रोडक्शन, मीडिया, पर्सनलाइजेशन, कस्टमर एंगेजमेंट और संगठनों के डिजाइन जैसे क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
मार्केटिंग लीडर्स के सामने अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि AI को अपनाया जाए या नहीं, बल्कि यह है कि इसे बिजनेस के कामकाज में प्रभावी तरीके से कैसे शामिल किया जाए। इसमें यह तय करना भी शामिल है कि AI कहां मापने योग्य प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है, इंसानी क्रिएटिविटी और मशीन की क्षमताएं किस तरह साथ काम कर सकती हैं और मार्केटिंग संगठनों को किन नई स्किल्स और स्ट्रक्चर की जरूरत होगी।
इसी माहौल में आयोजित इस शाम ने सीनियर लीडर्स को इन बदलावों के व्यावहारिक और रणनीतिक असर पर अपने विचार साझा करने का मौका दिया। साथ ही इन बदलावों को ग्लोबल बिजनेस में हो रहे बड़े बदलावों के संदर्भ में समझने का अवसर भी मिला।
औपचारिक बातचीत के बाद डिनर और अनौपचारिक नेटवर्किंग का दौर हुआ। इस दौरान मेहमानों को ज्यादा सहज माहौल में बातचीत को आगे बढ़ाने का मौका मिला।
यह शाम ऐसे समय में ग्लोबल इंडस्ट्री के नजरिए और भारत के वरिष्ठ मार्केटिंग लीडर्स को एक साथ लेकर आई, जब टेक्नोलॉजी, डेटा और AI तेजी से उस तरीके को बदल रहे हैं, जिसके जरिए बिजनेस अपनी पहचान बनाते हैं, लोगों तक पहुंचते हैं और प्रतिस्पर्धा करते हैं।
जी एंटरटेनमेंट ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी सनब्राइट मॉरीशस को 20.94 करोड़ कन्वर्टिबल वारंट आवंटित किए हैं, जिसकी कुल वैल्यू करीब 2,640 करोड़ रुपये है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd - ZEEL) ने फंड जुटाने की अपनी योजना के तहत प्रमोटर ग्रुप की इकाई सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (Sunbright Mauritius Investments Ltd) को 20,94,47,805 पूरी तरह कन्वर्टिबल वारंट आवंटित किए हैं। यह आवंटन 21 अगस्त को 126 रुपये प्रति वारंट की कीमत पर किया गया, जिससे इश्यू की कुल राशि करीब 2,640 करोड़ रुपये बैठती है।
वारंट आवंटन से पहले कंपनी को शेयरधारकों और स्टॉक एक्सचेंजों की मंजूरी मिल चुकी थी। इसके अलावा, सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) से भी कंपनी को अनुकूल आदेश मिला था।
इश्यू की शर्तों के मुताबिक, प्रत्येक वारंट को 126 रुपये की कीमत पर 1 रुपये फेस वैल्यू वाले एक इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा। सनब्राइट ने अभी इश्यू प्राइस का 25 फीसदी हिस्सा यानी प्रति वारंट 31.50 रुपये का भुगतान किया है। इस तरह कंपनी को करीब 659.76 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि मिली है।
बाकी 75 फीसदी रकम यानी प्रति वारंट 94.50 रुपये का भुगतान आवंटन की तारीख से 18 महीने के भीतर करना होगा। इसकी अंतिम तारीख 21 फरवरी 2028 तय की गई है। पूरी राशि मिलने के बाद वारंट को इक्विटी शेयरों में बदला जाएगा। तब तक ZEEL की पेड-अप शेयर कैपिटल में कोई बदलाव नहीं होगा।
अगर सभी वारंट शेयरों में परिवर्तित हो जाते हैं, तो पूरी तरह डायल्यूटेड आधार पर सनब्राइट की ZEEL में हिस्सेदारी करीब 17.90 फीसदी हो जाएगी। इससे कंपनी में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी मजबूत होगी।
इससे पहले SAT ने ZEEL को प्रमोटर ग्रुप को वारंट जारी कर फंड जुटाने की अनुमति दी थी। ट्रिब्यूनल ने कंपनी को अपने म्यूचुअल फंड निवेश का इस्तेमाल ऑपरेशनल खर्चों के लिए करने की भी मंजूरी दी थी।
नवीनतम आवंटन ZEEL की अतिरिक्त पूंजी जुटाने की कोशिश में एक अहम कदम माना जा रहा है, वहीं इससे प्रमोटर ग्रुप को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता भी मिला है।
गोएफ लॉरेल को डिजिटास नॉर्थ अमेरिका में वाइस प्रेसिडेंट डायरेक्टर, मीडिया इन्वेस्टमेंट नियुक्त किया गया है। यह पब्लिसिस ग्रुप के साथ उनकी दूसरी पारी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गोएफ लॉरेल (Goeff Laurel) को डिजिटास नॉर्थ अमेरिका (Digitas North America) में वाइस प्रेसिडेंट डायरेक्टर, मीडिया इन्वेस्टमेंट नियुक्त किया गया है। यह पब्लिसिस ग्रुप (Publicis Groupe) के साथ उनकी दूसरी पारी है।
डिजिटास में नई जिम्मेदारी संभालने से पहले लॉरेल पीएचडी (PHD) के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने इंटीग्रेटेड एसोसिएट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इस भूमिका में वह डिजिटल, वीडियो, लीनियर, कंटेंट और एक्सपीरिएंशियल से जुड़े मीडिया कार्यों को संभाल रहे थे।
इससे पहले लॉरेल ने डेंट्सू इंटरनेशनल (dentsu international) में मीडिया सुपरवाइजर के रूप में भी काम किया। वहां उनकी जिम्मेदारियों में डिजिटल कंटेंट, प्रोग्रामेटिक और प्रिंट मीडिया शामिल थे।
लॉरेल के अनुभव में मीडियाकॉम (Mediacom) और जेनिथ (Zenith) में निभाई गई वरिष्ठ भूमिकाएं भी शामिल हैं। मीडिया और इन्वेस्टमेंट से जुड़े क्षेत्रों में उनके अनुभव को देखते हुए नई भूमिका में वह डिजिटास नॉर्थ अमेरिका की मीडिया इन्वेस्टमेंट गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाले सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (CBC) ने मल्टीमीडिया एजेंसियों के अपने मौजूदा पैनल का विस्तार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाले सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन (CBC) ने मल्टीमीडिया एजेंसियों के अपने मौजूदा पैनल का विस्तार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए CBC ने एजेंसियों से टेक्निकल बिड्स आमंत्रित की हैं। यह प्रक्रिया 18 अगस्त 2026 को जारी एडवाइजरी के तहत शुरू की गई है।
इसका मकसद ऐसी एजेंसियों को पैनल में शामिल करना है, जो तकनीकी तौर पर योग्य हैं और सरकारी संचार अभियानों के लिए मल्टीमीडिया से जुड़ा काम कर सकती हैं।
तय नहीं होगा नया रेट
CBC ने साफ किया है कि इस प्रक्रिया में कोई नई वित्तीय बोली या नया रेट तय नहीं किया जाएगा। जो एजेंसियां तकनीकी मूल्यांकन में सफल होंगी, उन्हें CBC की ओर से पहले से तय L-1 रेट को स्वीकार करना होगा।
ये L-1 रेट 1 अक्टूबर 2024 को जारी किए गए पुराने RFP के तहत तय किए गए थे। नई प्रक्रिया के तहत होने वाला पैनलमेंट मौजूदा मुख्य पैनल की अवधि तक ही वैध रहेगा।
CBC का कहना है कि पैनल का विस्तार करने से सरकार के विभिन्न अभियानों को लागू करने के लिए तकनीकी रूप से योग्य एजेंसियों का दायरा बढ़ेगा। इन अभियानों में प्रिंट, टेलीविजन, रेडियो, आउटडोर, डिजिटल मीडिया और मल्टीमीडिया एग्जिबिशन जैसे माध्यम शामिल हैं।
दो पैनल के लिए कर सकते हैं आवेदन
एजेंसियां Executive Multimedia Panel या Base Multimedia Panel के लिए आवेदन कर सकती हैं। बेस पैनल में गैर-स्टार्टअप और स्टार्टअप एजेंसियों के लिए अलग-अलग पात्रता शर्तें रखी गई हैं।
तकनीकी बोली जमा करने की आखिरी तारीख 11 सितंबर 2026 शाम 5 बजे है। टेक्निकल बिड्स कब खोली जाएंगी, इसकी जानकारी CBC की वेबसाइट पर अलग से दी जाएगी।
एग्जिक्यूटिव पैनल के लिए आवेदन की प्रोसेसिंग फीस 25,000 रुपये, जबकि बेस पैनल के लिए 10,000 रुपये है। यह फीस वापस नहीं होगी और आवेदन जमा करते समय ऑनलाइन भुगतान करना होगा।
एग्जिक्यूटिव पैनल के लिए क्या है पात्रता?
एग्जिक्यूटिव पैनल के लिए आवेदन करने वाली एजेंसी के पास मीडिया, एंटरटेनमेंट, मार्केटिंग या विज्ञापन उद्योग में कम से कम 10 साल का संबंधित अनुभव होना चाहिए। इसके साथ टर्नओवर और सरकारी प्रोजेक्ट से जुड़े अनुभव की भी निर्धारित शर्तें हैं।
एजेंसी ने पिछले छह वित्तीय वर्षों के दौरान सरकारी संस्थाओं के लिए कम से कम पांच मल्टीमीडिया प्रोडक्शन वर्क ऑर्डर पूरे किए होने चाहिए। इन सभी कामों की कुल वैल्यू 2 करोड़ रुपये होनी चाहिए।
बेस पैनल की शर्तें अपेक्षाकृत आसान
बेस पैनल के लिए गैर-स्टार्टअप एजेंसियों के पास संबंधित उद्योग में कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए। साथ ही पिछले छह वित्तीय वर्षों में से किसी भी तीन वर्षों में औसत टर्नओवर 3 करोड़ रुपये होना चाहिए।
इसके अलावा एजेंसी ने सरकारी संस्था के लिए कम से कम एक योग्य मल्टीमीडिया प्रोडक्शन वर्क ऑर्डर पूरा किया हो, जिसकी वैल्यू 15 लाख रुपये या उससे अधिक हो।
स्टार्टअप के लिए टर्नओवर की शर्त में छूट
बेस पैनल में आवेदन करने वाले स्टार्टअप को टर्नओवर की पात्रता शर्त से छूट दी गई है। हालांकि, टर्नओवर को तकनीकी मूल्यांकन का हिस्सा माना जाएगा।
स्टार्टअप के पास DPIIT की मान्यता होना जरूरी है। साथ ही उसे अपने प्रोडक्शन अनुभव का प्रमाण भी देना होगा। इसमें पिछले छह वित्तीय वर्षों के दौरान किए गए कम से कम तीन वीडियो प्रोडक्शन असाइनमेंट शामिल हैं।
सरकारी योजनाओं और अभियानों के लिए होगा काम
पैनल में शामिल एजेंसियों को सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों, पहलों और नीतियों से जुड़े कम्युनिकेशन मटीरियल तैयार करने का काम दिया जा सकता है।
काम के दायरे में टेलीविजन कमर्शियल, शॉर्ट और लॉन्ग फॉर्म वीडियो, डॉक्यूमेंट्री, रेडियो स्पॉट और जिंगल, प्रिंट और आउटडोर क्रिएटिव, सोशल मीडिया कंटेंट, एनीमेशन, अलग-अलग भाषाओं में कंटेंट तैयार करना और आउटरीच गतिविधियां शामिल हैं।
एग्जिक्यूटिव पैनल में AR, VR और AI एप्लीकेशन जैसी तकनीकी क्षमताओं के साथ एग्जिबिशन से जुड़े काम भी शामिल हैं। एग्जिबिशन से जुड़ा काम वैकल्पिक आधार पर होगा।
100 अंकों के आधार पर होगा तकनीकी मूल्यांकन
तकनीकी मूल्यांकन (technical evaluation) के दौरान एजेंसियों के पिछले काम और CBC की ओर से दिए गए किसी थीम पर कैंपेन और क्रिएटिव कॉन्सेप्ट तैयार करने की क्षमता को देखा जाएगा। तकनीकी मूल्यांकन कुल 100 अंकों का होगा। इसमें पिछले काम के लिए 30 अंक और कैंपेन डिजाइन व स्क्रैच क्रिएटिव के लिए 40 अंक रखे गए हैं। इसके अलावा अन्य तकनीकी मानकों के आधार पर भी अंक दिए जाएंगे।
तकनीकी मूल्यांकन में 70 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल करने वाली एजेंसियों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।
सफल एजेंसियों को मिलेगा मौजूदा L-1 रेट पर पैनलमेंट
CBC ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि इस RFP के तहत कोई वित्तीय या प्राइस बोली नहीं मांगी जा रही है। तकनीकी मूल्यांकन में योग्य पाई जाने वाली एजेंसियों को संबंधित पैनल के लिए पहले से लागू L-1 रेट कार्ड पर ही पैनल में शामिल किया जाएगा।
टेक्निकल बिड्स CBC पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जमा करनी होंगी। इसके साथ हस्ताक्षर और मुहर लगी हार्ड कॉपी तथा RFP में बताए गए अन्य दस्तावेज भी जमा करने होंगे।
बोली से जुड़े सवाल और अन्य संबंधित जानकारी सत्ती किशोर कुमार, डायरेक्टर, CBC (Satti Kishore Kumar, Director, CBC.) को भेजी जा सकती है।