Indian Premier League यानी IPL आज सिर्फ क्रिकेट का टूर्नामेंट नहीं रहा, बल्कि देश का सबसे बड़ा मार्केटिंग प्लेटफॉर्म बन चुका है।
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Vikas Saxena
इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL आज सिर्फ क्रिकेट का टूर्नामेंट नहीं रहा, बल्कि देश का सबसे बड़ा मार्केटिंग प्लेटफॉर्म बन चुका है। हर साल करोड़ों दर्शकों तक पहुंचने वाला यह इवेंट ब्रैंड्स के लिए एक सुनहरा मौका होता है। लेकिन अब इस मंच पर एक नई बहस तेज हो गई है- क्या पारंपरिक टीवी विज्ञापन ज्यादा असरदार हैं या टीम स्पॉन्सरशिप?
IPL 2026 का कमर्शियल दबदबा
IPL 2026 के ओपनिंग वीकेंड में 51.5 करोड़ से ज्यादा दर्शकों ने मैच देखा और 32.6 अरब मिनट की वॉचटाइम दर्ज की गई। Connected TV की पहुंच में 30% और लीनियर टेलीविजन में 24% की बढ़ोतरी देखी गई। IPL 2026 का कुल विज्ञापन राजस्व ₹4,900 से ₹5,200 करोड़ के बीच रहने का अनुमान है, यानी पिछले साल की तुलना में 20-30% की बढ़त।
WPP Media की रिपोर्ट के अनुसार, क्रिकेट भारत के कुल स्पोर्ट्स इंडस्ट्री रेवेन्यू का 89% हिस्सा है और 2025 में इसने ₹16,704 करोड़ का राजस्व जुटाया- सालाना 17.9% की वृद्धि।
टीवी विज्ञापनों की ताकत और सीमा
IPL 2026 में टेलीविजन पर 10 सेकंड के एक लाइव मैच एड स्लॉट की कीमत करीब ₹18 लाख (SD और HD कॉम्बाइंड) है। टीवी विज्ञापनों की सबसे बड़ी ताकत उनकी "मास रीच" रही है- एक ही मैच में करोड़ों दर्शक जुड़े होते हैं। लेकिन इसके साथ क्लटर की समस्या भी है। IPL 2026 के शुरुआती मैचों में विज्ञापन वॉल्यूम में 10% की बढ़त आई, लेकिन विज्ञापनदाताओं की संख्या 26% घट गई- यानी ज्यादा पैसा, लेकिन कम खिलाड़ी।
टीम स्पॉन्सरशिप: नया और मजबूत ट्रेंड
मार्च 2026 की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, IPL फ्रेंचाइज़ी के स्पॉन्सरशिप रेवेन्यू में सालाना 20-30% की वृद्धि हुई है। जर्सी के फ्रंट-ऑफ-शर्ट एसेट की कीमतों में 15-20% का सालाना इजाफा हुआ है। 2026 में टीम स्पॉन्सरशिप ₹1,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गई है।
IPL 2026 में प्रीमियम स्पॉन्सरशिप पैकेज ₹100 करोड़ से ₹260 करोड़ के बीच हैं, जिनमें कई प्लेटफॉर्म्स पर एकसाथ विजिबिलिटी शामिल है। मीडिया पार्टनर्स ने इस सीजन FMCG, ऑटोमोबाइल, BFSI और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर्स से 27 स्पॉन्सर जोड़े हैं।
जिंदल स्टेनलेस की रणनीति: एक्सपर्ट की राय
इस बदलाव को जमीनी स्तर पर समझने के लिए 'समाचार4मीडिया' ने जिंदल स्टेनलेस के कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक विजय शर्मा से संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि "चाहे TV विज्ञापन हों या टीम स्पॉन्सरशिप, दोनों की अपनी-अपनी भूमिका है और ब्रैंड के उद्देश्य के अनुसार दोनों ही प्रभावी साबित होते हैं। माध्यम का चुनाव इस पर निर्भर करता है कि ब्रैंड क्या हासिल करना चाहता है, उसकी रणनीति क्या है और वह किस तरह के दर्शकों तक पहुंचना चाहता है।"
जिंदल स्टेनलेस ने सनराइजर्स हैदराबाद के साथ ऑफिशियल स्टेनलेस पार्टनर के रूप में जुड़ने का फैसला किया। विजय शर्मा बताते हैं कि यह साझेदारी सिर्फ दिखने तक सीमित नहीं है- इसमें उत्पादों के साथ सह-ब्रैंडिंग, स्टेडियम में प्रत्यक्ष सहभागिता, SRH खिलाड़ियों के साथ विशेष वीडियो और लेख, और डिजिटल मंचों पर संयुक्त कंटेंट निर्माण शामिल है।
इंटीग्रेटेड मार्केटिंग की ओर बढ़ते रुझान पर वे कहते हैं, "आज के समय में मार्केटिंग अलग-अलग माध्यमों में बंटा हुआ नहीं है, बल्कि पूरी तरह इंटीग्रेटेड हो चुका है। हम किसी एक माध्यम तक सीमित रहने के बजाय विभिन्न मंचों पर उपस्थित हैं, जिससे हमारी पहचान बढ़ती है और लोग ब्रैंड को ज्यादा याद रखते हैं।"
उन्होंने कहा कि इंटीग्रेटेड दृष्टिकोण ब्रैंड्स को यह अवसर देता है कि वे अलग-अलग माध्यमों के जरिए लगातार और गहराई से लोगों से जुड़ सकें- चाहे वह मैदान पर अनुभव हो, डिजिटल माध्यम हो या सामग्री के जरिए संवाद हो। हमारी सनराइजर्स हैदराबाद के साथ साझेदारी भी इसी सोच पर आधारित है। हम किसी एक माध्यम तक सीमित रहने के बजाय, विभिन्न मंच पर उपस्थित हैं, जिससे हमारी पहचान बढ़ती है और लोग ब्रैंड को ज्यादा याद रखते हैं।
डिजिटल और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का उभरता रोल
IPL 2026 में डिजिटल विज्ञापन खर्च ₹3,800 करोड़ से बढ़कर ₹4,400 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग पर खर्च ₹700 करोड़ तक जाने की संभावना है, जो कुल डिजिटल बजट का 16-18% है। गूगल ने IPL 2026 में को-प्रेजेंटिंग स्पॉन्सर बनकर अपने AI प्रोडक्ट Google Gemini को मुख्यधारा के दर्शकों तक पहुंचाने की रणनीति बनाई है।
हाइब्रिड रणनीति: आज का फॉर्मूला
5 जून को नई दिल्ली में IMPACT 40Under40 के चौथे संस्करण का आयोजन हुआ, जिसमें इंडस्ट्री में उल्लेखनीय योगदान देने वाले युवा ब्रैंड मार्केटर्स को सम्मानित किया गया।
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Samachar4media Bureau
नई दिल्ली में 5 जून को IMPACT 40Under40 के चौथे संस्करण का भव्य आयोजन किया गया। इस मौके पर मार्केटिंग जगत के दिग्गज लीडर्स, बिजनेस हेड्स और एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में उन युवा मार्केटिंग प्रोफेशनल्स को सम्मानित किया गया, जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम है और जो मार्केटिंग इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
यह प्रतिष्ठित सम्मान उन ब्रैंड मार्केटर्स को दिया जाता है जिन्होंने अपने काम के दम पर इंडस्ट्री में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वर्तमान में नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं और भविष्य में मार्केटिंग जगत के प्रमुख चेहरों के रूप में उभरने की क्षमता रखते हैं।
आज के दौर में मार्केटिंग लीडर्स से सिर्फ ब्रैंड प्रमोशन की उम्मीद नहीं की जाती, बल्कि वे संस्कृति को आकार देने, बिजनेस ग्रोथ को आगे बढ़ाने, नई तकनीकों से आने वाली चुनौतियों का सामना करने और बदलती उपभोक्ता जरूरतों के बीच ब्रैंड को प्रासंगिक बनाए रखने की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।
IMPACT CMO 40 Under 40 के 2026 संस्करण में मार्केटिंग नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी साफ दिखाई दी। इस साल अंतिम सूची में 21 महिलाओं और 29 पुरुषों को जगह मिली, जो इस क्षेत्र में महिलाओं के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
इस वर्ष की सूची में कुल 50 ऐसे युवा नेताओं को शामिल किया गया है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इनमें PUMA India की श्रेया सचदेव, Visa की ऋचा बत्रा, Mastercard की लावणी अग्रवाल, Zomato के साहिबजीत सिंह साहनी, ACKO के नितिन खन्ना, Ather Energy के सौरभ शर्मा और Reliance Ajio के अर्पण बिस्वास जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं।
यह सूची आधुनिक मार्केटिंग नेतृत्व की व्यापकता और विविधता को भी दर्शाती है। इसमें शामिल पेशेवर FMCG, ऑटोमोबाइल, फाइनेंशियल सर्विसेज, मीडिया, टेक्नोलॉजी, रिटेल और D2C जैसे विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
विजेताओं का चयन लंबी चर्चा और गहन विचार-विमर्श के बाद किया गया। इन युवा नेताओं ने अपनी रणनीतिक सोच, रचनात्मकता, नवाचार और व्यवसाय पर पड़ने वाले ठोस प्रभाव के जरिए खुद को अलग साबित किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी मिलकर यह तय कर रहे हैं कि आने वाले वर्षों में मार्केटिंग का स्वरूप कैसा होगा।
IMPACT CMO 40 Under 40 2026 की यह सूची उन नई पीढ़ी के मार्केटिंग लीडर्स का सम्मान है, जो तेजी से बदलती दुनिया में ब्रैंड्स को नई दिशा देने और उद्योग के भविष्य को आकार देने का काम कर रहे हैं।
विजेताओं की पूरी सूची नीचे दी गई है। सभी नाम अंग्रेजी वर्णमाला (Alphabetical Order) के अनुसार शामिल किए गए हैं।
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Gen Z केवल प्रॉडक्ट नहीं खरीदती, वे अनुभव, पहचान और मूल्य खरीदती है। इनके लिए ब्रैंड का मतलब सिर्फ एक लोगो नहीं, बल्कि यह है कि वह ब्रैंड किस बात के लिए खड़ा है।
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Vikas Saxena
आज अगर किसी ब्रैंड का करोड़ों रुपये का टीवी विज्ञापन किसी बड़े सेलिब्रिटी के साथ प्रसारित होता है, तो इसकी कोई गारंटी नहीं कि युवा दर्शक उसे देख भी रहे हों। उस समय संभव है कि 20-25 साल का उपभोक्ता इंस्टाग्राम रील्स स्क्रॉल कर रहा हो, किसी इन्फ्लुएंसर की सिफारिश सुन रहा हो, यूट्यूब शॉर्ट्स देख रहा हो या दोस्तों के साथ किसी ट्रेंडिंग कंटेंट पर चर्चा कर रहा हो। यही है Gen Z,एक ऐसी पीढ़ी जो पारंपरिक विज्ञापनों से ज्यादा डिजिटल कंटेंट, इन्फ्लुएंसर्स और वास्तविक अनुभवों पर भरोसा करती है। मार्केटिंग की दुनिया में यह वर्ग आज सबसे चुनौतीपूर्ण भी है और सबसे प्रभावशाली भी, क्योंकि इसके फैसले आने वाले वर्षों में ब्रैंड्स की सफलता और असफलता तय करेंगे।
1997 से 2012 के बीच जन्मे इस वर्ग की उम्र 2026 में 14 से 29 वर्ष के बीच है। भारत में इनकी संख्या 37.7 करोड़ से अधिक है, यानी देश की आबादी का लगभग 27% हिस्सा। वैश्विक स्तर पर Gen Z दुनिया की कुल आबादी का 24.6% है, जो करीब 2 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। BCG और Snapchat की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत में Gen Z पहले से ही कुल उपभोक्ता खर्च के 43% ($860 अरब) को प्रभावित कर रही है। 2035 तक इनका प्रत्यक्ष खर्च (direct spending) $1.8 ट्रिलियन और कुल स्पेंडिंग पावर (खर्च करने की क्षमता) $2 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है, यानी 2035 में भारत में खर्च होने वाला हर दूसरा रुपया Gen Z से आएगा। जो ब्रैंड आज इस पीढ़ी को नहीं समझेगा, वह कल के मार्केट में अप्रासंगिक हो जाएगा।
Gen Z का खरीदारी व्यवहार: पुरानी पीढ़ियों से बिल्कुल अलग
Gen Z केवल प्रॉडक्ट नहीं खरीदती, वे अनुभव, पहचान और मूल्य खरीदती है। इनके लिए ब्रैंड का मतलब सिर्फ एक लोगो नहीं, बल्कि यह है कि वह ब्रैंड किस बात के लिए खड़ा है।
खरीदारी से पहले ये ऑनलाइन रिसर्च को अनिवार्य मानते हैं, BCG-Snap रिपोर्ट बताती है कि Gen Z, Millennials की तुलना में 1.5 गुना अधिक रिसर्च करके खरीदारी करती है। यूजर-जनरेटेड कंटेंट, रिव्यू और दोस्तों की सिफारिशें इनके फैसलों पर गहरा असर डालती हैं। FOMO (Fear of Missing Out) यानी "कहीं मैं पीछे न रह जाऊं" की भावना इनकी खरीदारी को आवेगपूर्ण और तेज बनाती है। शोध बताते हैं कि Gen Z, पुराने पीढ़ियों की तुलना में सोशल मीडिया के जरिए 2.5 गुना अधिक आवेगपूर्ण खरीदारी करती है।
सोशल मीडिया: नया मार्केट, नए नियम
अगर आपको Gen Z तक पहुंचना है तो आपको उनके मैदान में उतरना होगा और वह मैदान है सोशल मीडिया।
2026 में Gen Z प्रतिदिन औसतन 4 घंटे सोशल मीडिया पर बिताती है, जो 2025 के 3 घंटे 18 मिनट से काफी अधिक है। भारत में Gen Z, देश के कुल सोशल मीडिया यूजर्स का 40% हिस्सा है और इनकी अनुमानित सालाना खरीद शक्ति ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक है।
प्लेटफॉर्म की प्राथमिकताओं की बात करें तो:
भारत में YouTube और WhatsApp का दबदबा है, जबकि Instagram Reels ने ब्रैंड कम्युनिकेशन को पूरी तरह बदल दिया है। मीम मार्केटिंग और वायरल कैंपेन अब किसी भी टीवी विज्ञापन से ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं।
सेलिब्रिटी से ज्यादा इन्फ्लुएंसर पर भरोसा
Gen Z की मार्केटिंग में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब माइक्रो और नैनो इन्फ्लुएंसर, करोड़ों के मेहनताने वाले सेलिब्रिटी से ज्यादा असरदार हैं।
आंकड़े बताते हैं कि 87% Gen Z उपभोक्ता इन्फ्लुएंसर की सिफारिश पर प्रॉडक्ट खरीदने को तैयार होते हैं, यह प्रतिशत Millennials (78%) और Gen X (77%) से काफी अधिक है। 77% Gen Z ने वास्तव में किसी इन्फ्लुएंसर की सिफारिश के बाद खरीदारी की है। एक अन्य अध्ययन बताता है कि 82.4% Gen Z उपभोक्ता इन्फ्लुएंसर कंटेंट के जरिए नए प्रॉडक्ट खोजते हैं।
वैश्विक सलाहकार फर्म अर्नस्ट एंड यंग (EY) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का मार्केट 2026 तक ₹3,375 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, 18% की CAGR से बढ़ता हुआ। 47% ब्रैंड्स अब माइक्रो और नैनो इन्फ्लुएंसर को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि ये कम खर्च में दर्शकों के साथ ज्यादा भरोसेमंद और वास्तविक जुड़ाव बनाने में सक्षम होते हैं।
Nykaa ने अपनी रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की जगह 200+ ब्यूटी माइक्रो-इन्फ्लुएंसर से साझेदारी की, हर एक के 10,000 से 50,000 फॉलोअर्स। नतीजा? Q2 FY25 में Nykaa का मार्केटिंग खर्च साल-दर-साल 40% बढ़ा। boAt ने भी युवा कंटेंट क्रिएटर्स के साथ साझेदारी कर अपनी अलग ब्रांड पहचान बनाई है और आज यह भारत के सबसे लोकप्रिय ऑडियो ब्रैंड्स में से एक बन चुका है।
पारंपरिक विज्ञापन से कंटेंट मार्केटिंग की ओर
Gen Z सीधे विज्ञापन से बचती है, लेकिन वही बात अगर मनोरंजक कहानी के रूप में आए तो वे उसे पसंद करते हैं और शेयर करते हैं।
ई-कॉमर्स से सोशल कॉमर्स तक: खरीदारी अब स्क्रॉल में होती है
Instagram Shopping, YouTube Shopping और Live Commerce ने खरीदारी के तरीके को बदल दिया है। 52% Gen Z (18-29 आयु वर्ग) पहले से ही सोशल प्लेटफॉर्म पर सीधे खरीदारी कर चुके हैं। भारत में 97.4% सोशल मीडिया उपयोगकर्ता स्मार्टफोन से प्लेटफॉर्म एक्सेस करते हैं, यानी यहां का मार्केट पूरी तरह मोबाइल-फर्स्ट है।
Quick Commerce, जैसे Zomato Blinkit और Swiggy Instamart, Gen Z की "अभी चाहिए" मानसिकता को पूरी तरह से कैप्चर करता है।
चुनौतियां: Gen Z को जीतना आसान नहीं
इतने अवसरों के बावजूद, Gen Z तक पहुंचना और उन्हें बनाए रखना कठिन है:
चयनात्मक ध्यान (Selective Attention): Gen Z का ध्यान कम नहीं हुआ है, बल्कि वह बहुत चयनात्मक हो गया है। McKinsey की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z का "सिर्फ 8 सेकंड का ध्यान" होने वाली धारणा एक मिथक है। हकीकत यह है कि यह पीढ़ी गैर-जरूरी या उबाऊ कंटेंट को तुरंत छोड़ देती है, लेकिन अगर कोई विषय उसे पसंद आ जाए तो उस पर घंटों समय बिताती है। आंकड़ों के मुताबिक, 59% Gen Z पहले किसी विषय पर शॉर्ट वीडियो देखती है और फिर उसी विषय पर विस्तार से जानकारी पाने के लिए लंबा कंटेंट तलाशती है।
विज्ञापन थकान (Ad Fatigue): Gen Z सोशल मीडिया पर काफी समय बिताती है। 61% युवा देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं, लेकिन 55% ऐसे भी हैं जिन्होंने कभी न कभी सोशल मीडिया से दूरी बनाने के लिए ‘सोशल मीडिया डिटॉक्स’ अपनाया है। इसका मतलब है कि यह पीढ़ी जरूरत से ज्यादा मार्केटिंग और विज्ञापनों को पहचान लेती है और उनसे बचने की कोशिश करती है।
ब्रैंड निष्ठा की कमी (Lack of Brand Loyalty): यह पीढ़ी पारंपरिक और स्थापित ब्रैंड्स के बजाय नए रुझानों और नवाचारों को ज्यादा महत्व देती है। BCG-Snap रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z नए और अलग तरह के उत्पादों को आजमाने में अधिक रुचि रखती है। इसलिए किसी एक ब्रैंड के प्रति लंबे समय तक वफादार बने रहना इस पीढ़ी की खासियत नहीं है।
विश्वसनीयता की कड़ी कसौटी (Authenticity Test): Gen Z किसी भी ब्रैंड या इन्फ्लुएंसर की वास्तविकता को बहुत जल्दी परख लेती है। अगर उसे जरा भी महसूस हो कि कोई प्रचार सिर्फ पैसे लेकर किया गया है या उसमें ईमानदारी की कमी है, तो वह तुरंत उस ब्रैंड या इन्फ्लुएंसर पर से भरोसा खो देती है। इसलिए इस पीढ़ी के साथ जुड़ने के लिए प्रामाणिकता और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण हैं।
भविष्य की दिशा: AI इन्फ्लुएंसर, AR/VR और गेमिंग मार्केटिंग का बढ़ता प्रभाव
2026 के बाद मार्केटिंग की दुनिया और भी तेजी से बदलने वाली है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से संचालित वर्चुअल इन्फ्लुएंसर वैश्विक मार्केट में अपनी जगह बना रहे हैं और कई ब्रैंड्स इन्हें अपने प्रचार अभियानों में शामिल कर रहे हैं। वहीं, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) आधारित सुविधाएं, जैसे Myntra का वर्चुअल फिटिंग रूम, खरीदारी के अनुभव को अधिक वास्तविक और आकर्षक बना रही हैं। इसके अलावा, गेमिंग मार्केटिंग भी तेजी से उभर रहा क्षेत्र है, जहां ब्रैंड्स गेम्स के भीतर विज्ञापनों और प्रायोजित आयोजनों के जरिए Gen Z गेमर्स तक अपनी पहुंच बना रहे हैं।
EY की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की क्रिएटर इकोनॉमी का आकार 2024 में करीब 12,500 करोड़ रुपये था, जिसके 2030 तक बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, BCG की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिएटर इकोनॉमी 2030 तक उपभोक्ता खर्च को 1 ट्रिलियन डॉलर तक प्रभावित कर सकती है, जो इसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
दरअसल, Gen Z ने मार्केटिंग के पुराने नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। अब ब्रैंड्स सिर्फ उत्पाद नहीं बेचते, बल्कि रिश्ते, अनुभव और भरोसा बेचते हैं। जो ब्रैंड इस पीढ़ी से दोस्त की तरह संवाद करना सीखेगा, उनकी भाषा और संस्कृति को समझेगा, सामाजिक मुद्दों पर अपनी जिम्मेदारी दिखाएगा और माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स की ताकत का सही इस्तेमाल करेगा, वही आने वाले वर्षों में मार्केट में बढ़त हासिल कर सकेगा।
भारत में 37.7 करोड़ से अधिक Gen Z उपभोक्ता हैं। 2035 तक उनकी सामूहिक खर्च करने की क्षमता 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और वे रोजाना औसतन चार घंटे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बिताते हैं। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि Gen Z सिर्फ एक उपभोक्ता वर्ग नहीं है, बल्कि वह पीढ़ी है जो आने वाले समय में मार्केट और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगी।
e4m Pitch CMO Summit में हायर एप्लायंसेज इंडिया के प्रेजिडेंट एन. एस. सतीश ने ऐसा संबोधन दिया, जो सिर्फ मार्केटिंग कैंपेन की बात नहीं था, बल्कि भविष्य के बिजनेस लीडर को तैयार करने का एक रोडमैप था।
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Samachar4media Bureau
e4m Pitch CMO Summit में हायर एप्लायंसेज इंडिया के प्रेजिडेंट एन. एस. सतीश ने ऐसा संबोधन दिया, जो सिर्फ मार्केटिंग कैंपेन की बात नहीं था, बल्कि भविष्य के बिजनेस लीडर को तैयार करने का एक रोडमैप था।
उन्होंने साफ कहा कि आने वाले समय का CMO (Chief Marketing Officer) सिर्फ ब्रैंड का रखवाला बनकर नहीं रह सकता। अगर उसे CEO की कुर्सी तक पहुंचना है, तो उसे ग्राहक, प्रॉफिट एंड लॉस (P&L), प्रोडक्ट, सर्विस, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल और तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार को गहराई से समझना होगा।
सतीश का संबोधन काफी व्यक्तिगत, बेबाक और उपभोक्ता कारोबार की वास्तविकताओं से जुड़ा हुआ था। उन्होंने ग्राहक शिकायतों से लेकर क्विक कॉमर्स तक, D2C ब्रैंड्स के बढ़ते प्रभाव से लेकर प्रोडक्ट डिजाइन तक और ग्रामीण बाजारों में अपने अनुभवों से लेकर युवाओं व इंटर्न्स के साथ हुई बातचीत तक कई उदाहरण साझा किए।
उनके पूरे संबोधन का सबसे अहम संदेश यह था कि ब्रैंड्स को खुद को सिर्फ प्रोडक्ट बेचने वाली कंपनियां समझना बंद करना होगा और उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान देने वाली संस्था के रूप में देखना होगा।
उन्होंने कहा, “आप यह नहीं सोच सकते कि आप सिर्फ एक रेफ्रिजरेटर बेच रहे हैं। आपको यह सोचना होगा कि आप लोगों को बेहतर कूलिंग समाधान दे रहे हैं या उनका खाना ताजा रखने में मदद कर रहे हैं। इसी तरह आप सिर्फ एयर कंडीशनर नहीं बेच रहे, बल्कि लोगों के घरों को आरामदायक बना रहे हैं।”
सतीश के मुताबिक, यहीं से आधुनिक CMO की भूमिका सिर्फ कम्युनिकेशन तक सीमित नहीं रहती। आज मार्केटिंग उपभोक्ता की समझ, प्रोडक्ट इनोवेशन, सर्विस डिलीवरी, डिजिटल कॉमर्स और बिजनेस ग्रोथ के बीच का केंद्र बन चुकी है। जो CMO सिर्फ विज्ञापन और कैंपेन समझता है, उसकी भूमिका सीमित रह जाएगी, लेकिन जो पूरे बिजनेस को समझता है, वही आगे चलकर CEO बन सकता है।
उन्होंने कहा कि आज ग्राहक का खरीदारी का सफर पहले जैसा सीधा नहीं रह गया है। पहले ग्राहक किसी डीलर के स्टोर पर जाता था और काफी हद तक सेल्समैन की सलाह पर निर्भर रहता था। लेकिन अब ग्राहक YouTube, सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स रिव्यू, परिवार के WhatsApp ग्रुप और दोस्तों की सलाह जैसी कई जगहों से जानकारी जुटाकर आता है।
सतीश ने कहा, “आज का ग्राहक हर जगह जाता है। आप यह नहीं बता सकते कि वह कहां जाएगा और क्या करेगा। इसलिए आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि हर टचपॉइंट पर आपका ब्रैंड सही तरीके से मौजूद हो।”
उन्होंने यह भी बताया कि हैयर अपने उत्पादों के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी कंपनियों के उत्पादों की नकारात्मक समीक्षाओं का भी गहराई से अध्ययन करता है। इससे कंपनी को यह समझने में मदद मिलती है कि ग्राहक वास्तव में किन समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई बार यही शिकायतें नए इनोवेशन की शुरुआत बन जाती हैं।
उदाहरण देते हुए उन्होंने वॉशर-ड्रायर कैटेगरी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ग्राहक चार घंटे तक चलने वाले वॉश और ड्राई साइकिल से परेशान रहते हैं। इसलिए हैयर ड्राइंग टाइम को काफी कम करने पर काम कर रहा है, क्योंकि असली मुद्दा मशीन नहीं, बल्कि ग्राहक की सुविधा है।
सतीश ने ब्रैंड निर्माण में आफ्टर-सेल्स सर्विस की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किचन एप्लायंसेज जैसी श्रेणियों में यदि कोई उत्पाद खराब हो जाए तो घर का पूरा कामकाज प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि हैयर हर शहर में अपने हब्स (Hobs) नहीं बेचता। कंपनी पहले यह सुनिश्चित करती है कि वहां उत्पाद को सपोर्ट करने के लिए पर्याप्त सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हो।
उन्होंने कहा कि इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा सबक फुर्ती और तेजी (Agility) है। जैसे-जैसे कंपनियां बड़ी होती हैं, उनकी प्रक्रियाएं और नीतियां कई बार उन्हें धीमा बना देती हैं। लेकिन D2C ब्रैंड्स, क्विक कॉमर्स और डिजिटल-फर्स्ट बाजार के दौर में यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
सतीश ने कहा, “अगर आपकी संस्था में फुर्ती नहीं है, तो आप खत्म हो चुके हैं।”
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक ऐसी बात भी कही, जिसने सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा, “अनुभव कई बार बाधा बन जाता है।”
हालांकि उन्होंने इसे नकारात्मक अर्थ में नहीं कहा। उनका मतलब था कि कई बार पुरानी सफलताएं हमें नए बदलावों को देखने से रोक देती हैं। इसलिए आने वाली पीढ़ी के मार्केटिंग लीडर्स को लगातार सीखने, पुरानी चीजों को छोड़ने और ग्राहकों की बात ध्यान से सुनने की आदत विकसित करनी होगी।
अपने संबोधन के अंत में सतीश ने CMO की भूमिका को नए नजरिए से परिभाषित किया। उनके अनुसार भविष्य का CMO सिर्फ ब्रैंड बनाने वाला व्यक्ति नहीं होगा, बल्कि वह ग्राहक को इतनी गहराई से समझेगा कि प्रोडक्ट, सर्विस, कॉमर्स, ग्रोथ और P&L जैसे बिजनेस के अहम फैसलों को भी प्रभावित कर सके।
उन्होंने कहा कि वही CMO आगे चलकर CEO बनने की क्षमता रखता है।
इस भूमिका में वह कंपनी की ग्लोबल मार्केटिंग स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करेंगे और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मार्केट्स में ब्रैंड की मौजूदगी को मजबूत बनाने की दिशा में काम करेंगे।
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Samachar4media Bureau
ऑन्कोलॉजी (कैंसर) पर केंद्रित इमेजिंग कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (CRO) इमेजिंग एंडपॉइंट्स (Imaging Endpoints) ने श्रीकांत अय्यप्पन को एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट (ग्लोबल मार्केटिंग) नियुक्त किया है। इस भूमिका में वह कंपनी की ग्लोबल मार्केटिंग स्ट्रैटेजी का नेतृत्व करेंगे और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मार्केट्स में ब्रैंड की मौजूदगी को मजबूत बनाने की दिशा में काम करेंगे।
कंपनी के अनुसार, श्रीकांत अय्यप्पन का मुख्य फोकस कंपनी की पहचान और पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ प्रायोजकों, साझेदारों तथा इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ जुड़ाव को और मजबूत बनाना होगा।
अपनी नई जिम्मेदारी पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीकांत अय्यप्पन ने कहा कि क्लीनिकल रिसर्च का क्षेत्र इमेजिंग तकनीक, डेटा साइंस और प्रिसिजन मेडिसिन में हो रही प्रगति के कारण एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि इमेजिंग एंडपॉइंट्स कैंसर संबंधी दवाओं के विकास को उन्नत इमेजिंग समाधानों के माध्यम से महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है और वह कंपनी की निरंतर वृद्धि, वैश्विक पहचान तथा लाइफ साइंसेज इकोसिस्टम में इसके प्रभाव को और मजबूत बनाने में योगदान देने के लिए उत्साहित हैं।
बता दें कि इमेजिंग एंडपॉइंट्स कैंसर अनुसंधान और दवा विकास से जुड़े क्लीनिकल ट्रायल्स के लिए इमेजिंग आधारित समाधान उपलब्ध कराती है। कंपनी वैश्विक स्तर पर फार्मास्यूटिकल, बायोटेक और रिसर्च संगठनों के साथ मिलकर काम करती है। ऐसे में श्रीकांत अय्यप्पन की नियुक्ति को कंपनी की वैश्विक विस्तार रणनीति और ब्रैंड सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फ्रांस की मशहूर लग्जरी डिपार्टमेंट स्टोर चेन Galeries Lafayette ने हाल ही में भारत में पहली बार एंट्री की है। ऐसे में सुचित काकर की नियुक्ति को कंपनी के लिए अहम माना जा रहा है।
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Samachar4media Bureau
फैशन और रिटेल सेक्टर की प्रमुख कंपनी आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल (ABFRL) ने सुचित काकर (Suchit Kakar) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। वह कंपनी में Senior Manager, Brand & Customer Experience for Galeries Lafayette India के तौर पर शामिल हुए हैं।
फ्रांस की मशहूर लग्जरी डिपार्टमेंट स्टोर चेन Galeries Lafayette ने हाल ही में भारत में पहली बार एंट्री की है। ऐसे में सुचित काकर की नियुक्ति को कंपनी के लिए अहम माना जा रहा है।
सुचित काकर इससे पहले ब्रैंड कंसल्टिंग कंपनी Landor के साथ जुड़े हुए थे। यहां उन्होंने करीब छह वर्षों तक काम किया और हाल ही में Senior Strategist, Experience Strategy Lead के पद से इस्तीफा दिया।
सुचित काकर ने अपनी नई पारी की जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने बताया कि यह उनके करियर का पहला मौका है, जब वह क्लाइंट साइड की भूमिका में काम करेंगे।
KFC India जॉइन करने से पहले सौरदीप सरकार करीब चार वर्षों तक ब्लिंकिट से जुड़े रहे। वहां वह एसोसिएट डायरेक्टर और हेड (Growth and Expansion)– New Formats + Bistro के पद पर कार्यरत थे।
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क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट (Blinkit) में लंबे समय तक अहम जिम्मेदारियां निभाने वाले सौरदीप सरकार (Souradip Sarkar) ने अब KFC India जॉइन कर लिया है। उन्हें कंपनी में हेड (Growth & Market Planning) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सौरदीप सरकार ने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए अपनी नई पारी की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि ब्लिंकिट में बेहद संतोषजनक करियर के बाद वह KFC India से जुड़कर काफी उत्साहित हैं और नई जिम्मेदारी को लेकर आगे के सफर का इंतजार कर रहे हैं।
KFC India जॉइन करने से पहले सौरदीप सरकार करीब चार वर्षों तक ब्लिंकिट से जुड़े रहे। वहां वह एसोसिएट डायरेक्टर और हेड (Growth and Expansion)– New Formats + Bistro के पद पर कार्यरत थे। इस भूमिका में उन्होंने कंपनी के ग्रोथ और एक्सपेंशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम संभाले।
ब्लिंकिट से पहले सौरदीप सरकार लगभग दो वर्षों तक Rockwell Automation के साथ भी जुड़े रहे। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड (TCS) में भी काम किया।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो सौरदीप सरकार ने Management Development Institute (MDI), गुरुग्राम से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने मार्केटिंग और स्ट्रैटेजी में विशेषज्ञता हासिल की।
सचिन पालीवाल इससे पहले ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ में असिस्टेंट वाइस प्रेजिडेंट (AVP) के पद पर कार्यरत थे।
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मीडिया, डिजिटल और ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री में लंबा अनुभव रखने वाले सचिन पालीवाल ने ग्रुनर ग्रुप (Gruner Group) में GM-मार्केटिंग एंड ब्रैंडिंग के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए अपनी नई पारी की जानकारी साझा की।
सचिन पालीवाल इससे पहले ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ में असिस्टेंट वाइस प्रेजिडेंट (AVP) के पद पर कार्यरत थे। मार्केटिंग, ब्रैंड स्ट्रैटेजी और ब्रैंड पोजिशनिंग के क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। माना जा रहा है कि उनकी नियुक्ति से ग्रुनर ग्रुप की ब्रैंड मौजूदगी और मार्केटिंग रणनीतियों को नई मजबूती मिलेगी।
नई जिम्मेदारी को लेकर उत्साह जाहिर करते हुए सचिन पालीवाल ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में कहा कि वह ग्रुनर ग्रुप में नई शुरुआत को लेकर बेहद उत्साहित हैं और आने वाले समय को लेकर सकारात्मक महसूस कर रहे हैं।
सचिन पालीवाल के पास 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मीडिया, डिजिटल और ब्रॉडकास्ट सेक्टर में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। अपने करियर के दौरान वह हिंदी न्यूज, हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC), इंग्लिश न्यूज, हिंदी मूवीज, हिंदी म्यूजिक, रीजनल GEC और होम शॉपिंग जैसे कई सेगमेंट्स में काम कर चुके हैं।
सैमसंग ने अपनी मोबाइल एक्सपीरियंस बिजनेस टीम में बड़ा बदलाव किया है।
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सैमसंग ने अपनी मोबाइल एक्सपीरियंस बिजनेस टीम में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने शिरीष अग्रवाल को पूरे मोबाइल एक्सपीरियंस बिजनेस के मार्केटिंग का हेड बना दिया है। इससे पहले वह भारत में सैमसंग के प्रीमियम और फ्लैगशिप स्मार्टफोन पोर्टफोलियो की मार्केटिंग संभाल रहे थे।
नई जिम्मेदारी के साथ अब शिरीष अग्रवाल सैमसंग के स्मार्टफोन्स, वियरेबल्स और दूसरे इकोसिस्टम प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग रणनीति पर काम करेंगे। बताया जा रहा है कि कंपनी प्रीमियम स्मार्टफोन और कनेक्टेड डिवाइसेज के बढ़ते मुकाबले को देखते हुए अपने मोबाइल एक्सपीरियंस बिजनेस पर ज्यादा फोकस कर रही है।
शिरीष अग्रवाल पिछले दो साल से ज्यादा समय से सैमसंग इंडिया की मार्केटिंग टीम में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ब्रैंड मैनेजमेंट, मार्केटिंग स्ट्रेटजी और बड़े कैंपेन संभाले, जिनका सीधा असर कंपनी के बिजनेस पर देखने को मिला।
सैमसंग से पहले वह पैनासोनिक इंडिया के साथ भी काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने मार्केटिंग कम्युनिकेशन और ब्रैंड पोजिशनिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स संभाले थे।
मार्केटिंग क्षेत्र में एक दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाले शिरीष अग्रवाल को भारत में सैमसंग की ब्रैंड पहचान मजबूत करने और उपभोक्ताओं से जुड़ी कैंपेन तैयार करने के लिए जाना जाता है।
दोनों कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि इंटरनेट आधारित ऑडियो-विजुअल कंटेंट संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
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भारत में इंटरनेट आधारित टीवी सेवाओं को रेगुलेट करने को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट (Culver Max Entertainment) और जियोस्टार (JioStar) ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) और Application-based Linear Television Distribution (ALTD) सेवाओं के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने की बात कही गई है।
दोनों कंपनियों ने TRAI को दिए अपने विस्तृत जवाब में कहा कि इंटरनेट आधारित टीवी प्लेटफॉर्म पारंपरिक केबल, DTH या IPTV सेवाओं से पूरी तरह अलग हैं और उन्हें टेलीकॉम या ब्रॉडकास्टिंग डिस्ट्रीब्यूशन नियमों के तहत नहीं लाया जा सकता।
TRAI ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के संदर्भ के बाद यह कंसल्टेशन पेपर जारी किया था। इसमें पूछा गया है कि क्या इंटरनेट के जरिए टीवी जैसी सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म्स पर भी DTH और केबल ऑपरेटर्स जैसी लाइसेंसिंग और रेगुलेशन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
जियोस्टार और कल्वर मैक्स ने अपने जवाब में “एप्लिकेशन लेयर” और “नेटवर्क लेयर” के बीच अंतर पर जोर दिया। कंपनियों का कहना है कि FAST और ALTD प्लेटफॉर्म केवल इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करते हैं, जबकि वास्तविक नेटवर्क और डेटा ट्रांसमिशन टेलीकॉम कंपनियां करती हैं। इसलिए OTT सेवाओं को टेलीकॉम सेवा प्रदाता नहीं माना जा सकता।
दोनों कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि इंटरनेट आधारित ऑडियो-विजुअल कंटेंट संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। ऐसे में OTT प्लेटफॉर्म्स पर टेलीकॉम जैसी लाइसेंसिंग शर्तें लागू करना संवैधानिक रूप से गलत होगा।
कंपनियों ने चेतावनी दी कि अगर FAST प्लेटफॉर्म्स पर लाइसेंस फीस, बैंक गारंटी और अनिवार्य नियम लागू किए गए तो इससे भारत के डिजिटल टीवी इकोसिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ेगा। जियोस्टार ने कहा कि FAST सेवाएं अभी शुरुआती और प्रयोगात्मक चरण में हैं, ऐसे में अत्यधिक रेगुलेशन निवेश और इनोवेशन दोनों को प्रभावित कर सकता है।
दोनों कंपनियों ने प्रसार भारती के साथ स्पोर्ट्स सिग्नल शेयरिंग और अनिवार्य चैनल कैरिज जैसे नियमों का भी विरोध किया। उनका कहना है कि ये नियम पारंपरिक प्रसारण व्यवस्था के लिए बने थे और इन्हें इंटरनेट आधारित सेवाओं पर लागू नहीं किया जा सकता। मामले को भारत में तेजी से बदलते टीवी और डिजिटल स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम के बीच पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूटर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स की बड़ी टकराहट के रूप में देखा जा रहा है।
एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने AI आधारित विज्ञापनों के लिए नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी किए हैं। विज्ञापनों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटने की बात कही गई है।
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एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (Advertising Standards Council of India - ASCI) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार विज्ञापनों को लेकर नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी किए हैं। मंगलवार को जारी इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विज्ञापनों में पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों को भ्रमित होने से बचाना है।
ASCI ने इन नियमों को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम 2026 के अनुरूप तैयार किया है। फिलहाल यह ड्राफ्ट सुझावों के लिए सार्वजनिक किया गया है और लोग 13 जून तक अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
प्रस्तावित गाइडलाइंस के तहत AI आधारित विज्ञापनों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी “हाई रिस्क” विज्ञापनों की है, जिन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित करने का सुझाव दिया गया है। दूसरी श्रेणी “मीडियम रिस्क” विज्ञापनों की है, जिनमें यह स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य होगा कि कंटेंट AI की मदद से तैयार किया गया है। तीसरी श्रेणी “लो रिस्क” विज्ञापनों की है, जहां किसी लेबल की आवश्यकता नहीं होगी।
ASCI के अनुसार, AI का इस्तेमाल तब भ्रामक माना जाएगा जब वह लोगों को अवास्तविक उम्मीदें दिखाए, कमजोर वर्गों का शोषण करे या बिना अनुमति किसी व्यक्ति की पहचान, आवाज या चेहरे का उपयोग करे।
हालांकि केवल बैकग्राउंड म्यूजिक, सजावटी विजुअल्स या सामान्य डिजिटल इफेक्ट्स के लिए लेबल जरूरी नहीं होगा। ASCI का कहना है कि इन नियमों का मकसद संतुलन बनाना है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और उपभोक्ताओं पर अनावश्यक चेतावनियों का बोझ भी न पड़े।