Channel Factory ने भारत में की तीन वरिष्ठ नियुक्तियां, देशभर में विस्तार को मिलेगा बल

ग्लोबल कॉन्टेक्चुअल ऐडवर्टाइजिंग कंपनी Channel Factory ने भारत में अपने विस्तार और बाजार पर फोकस को मजबूत करने के तहत तीन वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की है।

Last Modified:
Tuesday, 07 October, 2025
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ग्लोबल कॉन्टेक्चुअल ऐडवर्टाइजिंग कंपनी Channel Factory ने भारत में अपने विस्तार और बाजार पर फोकस को मजबूत करने के तहत तीन वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की है। ये नियुक्तियां कंपनी की लगातार बढ़ती ग्रोथ और भारतीय बाजार में उसके रणनीतिक फोकस को दर्शाती हैं।

पिछले दो वर्षों में Channel Factory ने भारत में अपनी मौजूदगी को काफी मजबूत किया है। कंपनी अब उन ब्रैंड्स और एजेंसियों की पसंदीदा पार्टनर बन चुकी है, जो AI आधारित प्रीसिशन, कॉन्टेक्स्ट और ब्रैंड सुइटेबिलिटी के जरिए बेहतर ROI हासिल करना चाहते हैं। कंपनी का यह विस्तार मजबूत क्लाइंट साझेदारियों, तकनीकी इनोवेशन और स्थानीय दृष्टिकोण पर आधारित रहा है, जिसने लगातार बेहतर नतीजे दिए हैं।

Channel Factory के एशिया हेड और चीफ बिजनेस ऑफिसर कार्तिक मेहता ने कहा, “भारत Channel Factory के लिए एशिया का सबसे गतिशील और तेजी से बढ़ने वाला बाजार बना हुआ है। हमारे क्षेत्रीय नेतृत्व और स्थानीय उपस्थिति में निवेश यह दर्शाता है कि हम ब्रैंड्स को ऐसी टेक्नोलॉजी से सशक्त करना चाहते हैं जो परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए। जैसे-जैसे हम 2026 की तैयारी कर रहे हैं, हम नए प्लेटफॉर्म्स पर विस्तार कर रहे हैं और अगली पीढ़ी के AI टूल्स ला रहे हैं जो ऐडवर्टाइजर्स के लिए सुइटेबिलिटी और कॉन्टेक्चुअल इंटेलिजेंस को नए स्तर पर परिभाषित करेंगे।”

भारत में Channel Factory के उभार को उद्योग जगत ने भी सराहा है। कंपनी को Auto Awards सहित कई मंचों पर सम्मान मिला है। इसके अलावा Tata Motors, William Grant & Sons, Kohler, MG Motor, Kia और LG जैसे ब्रैंड्स के लिए इसके कैपेंस ने AI आधारित कॉन्टेक्चुअल टार्गेटिंग और परफॉर्मेंस मापदंडों में नए मानक स्थापित किए हैं।

बाजार में अपनी स्थिति और क्लाइंट संबंधों को और मजबूत करने के लिए, कंपनी ने गिरजेश चौहान, इशिका शर्मा और विवेक सिंह को क्रमशः उत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के लिए सेल्स डायरेक्टर नियुक्त किया है।

गुरुग्राम स्थित गिरजेश चौहान के पास AdTech, MarTech और कस्टम इन्वेंटरी सॉल्यूशंस में 12 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने ऑटो, FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ई-कॉमर्स सेक्टर्स में कई प्रमुख क्लाइंट्स के साथ काम किया है।

मुंबई में स्थित इशिका शर्मा डिजिटल सेल्स की विशेषज्ञ हैं और उनके पास Blis, Viacom18, Sony Pictures Networks India और GroupM में 12 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह पश्चिम भारत में कंपनी की ग्रोथ और पार्टनरशिप को आगे बढ़ाएंगी।

वहीं बेंगलुरु में स्थित विवेक सिंह डिजिटल और प्रोग्रामेटिक ऐडवर्टाइजिंग में दस वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। Channel Factory से पहले वह Mediasmart (Affle group) के साथ जुड़े थे, जहां उन्होंने दक्षिण भारत में ब्रैंड्स और एजेंसियों के लिए Omnichannel, OTT और CTV आधारित प्रोग्रामेटिक सॉल्यूशंस का नेतृत्व किया।

विस्तार पर टिप्पणी करते हुए Channel Factory इंडिया के कंट्री डायरेक्टर अमित राठी ने कहा, “भारत में Channel Factory की सफलता मजबूत साझेदारियों, डेटा-आधारित स्टोरीटेलिंग और कॉन्टेक्चुअल इनोवेशन का नतीजा है। गिरजेश, इशिका और विवेक के हमारी लीडरशिप टीम में जुड़ने से हम प्रमुख बाजारों में अपनी भागीदारी को और गहरा कर रहे हैं और क्लाइंट सफलता पर अपना ध्यान और मजबूत कर रहे हैं। हमारा 2026 का लक्ष्य स्पष्ट है- ब्रैंड्स को AI और सुइटेबिलिटी की शक्ति से कॉन्टेक्स्ट, कल्चर और कमर्शियल परिणामों के लिए अनुकूल बनाना।”

भारत में अपने रणनीतिक विस्तार को जारी रखते हुए, Channel Factory अब अपने ViewIQ प्लेटफॉर्म को बड़े पैमाने पर स्केल करने, ग्लोबल टेक पार्टनर्स के साथ सहयोग को गहरा करने और ब्रैंड-सेफ, कॉन्टेक्चुअली प्रासंगिक वातावरण तैयार करने पर केंद्रित है, जिससे विज्ञापनदाता सतत विकास हासिल कर सकें।

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आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल से जुड़े सुचित काकर, संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी

फ्रांस की मशहूर लग्जरी डिपार्टमेंट स्टोर चेन Galeries Lafayette ने हाल ही में भारत में पहली बार एंट्री की है। ऐसे में सुचित काकर की नियुक्ति को कंपनी के लिए अहम माना जा रहा है।

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2026
Suchit Kakar

फैशन और रिटेल सेक्टर की प्रमुख कंपनी आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल (ABFRL) ने सुचित काकर (Suchit Kakar) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। वह कंपनी में Senior Manager, Brand & Customer Experience for Galeries Lafayette India के तौर पर शामिल हुए हैं।

फ्रांस की मशहूर लग्जरी डिपार्टमेंट स्टोर चेन Galeries Lafayette ने हाल ही में भारत में पहली बार एंट्री की है। ऐसे में सुचित काकर की नियुक्ति को कंपनी के लिए अहम माना जा रहा है।

सुचित काकर इससे पहले ब्रैंड कंसल्टिंग कंपनी Landor के साथ जुड़े हुए थे। यहां उन्होंने करीब छह वर्षों तक काम किया और हाल ही में Senior Strategist, Experience Strategy Lead के पद से इस्तीफा दिया।

सुचित काकर ने अपनी नई पारी की जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने बताया कि यह उनके करियर का पहला मौका है, जब वह क्लाइंट साइड की भूमिका में काम करेंगे।

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KFC India में सौरदीप सरकार की एंट्री, Growth & Market Planning की मिली कमान

KFC India जॉइन करने से पहले सौरदीप सरकार करीब चार वर्षों तक ब्लिंकिट से जुड़े रहे। वहां वह एसोसिएट डायरेक्टर और हेड (Growth and Expansion)– New Formats + Bistro के पद पर कार्यरत थे।

Last Modified:
Thursday, 28 May, 2026
Souradip Sarkar

क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट (Blinkit) में लंबे समय तक अहम जिम्मेदारियां निभाने वाले सौरदीप सरकार (Souradip Sarkar) ने अब KFC India जॉइन कर लिया है। उन्हें कंपनी में हेड (Growth & Market Planning) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सौरदीप सरकार ने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए अपनी नई पारी की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि ब्लिंकिट में बेहद संतोषजनक करियर के बाद वह KFC India से जुड़कर काफी उत्साहित हैं और नई जिम्मेदारी को लेकर आगे के सफर का इंतजार कर रहे हैं।

KFC India जॉइन करने से पहले सौरदीप सरकार करीब चार वर्षों तक ब्लिंकिट से जुड़े रहे। वहां वह एसोसिएट डायरेक्टर और हेड (Growth and Expansion)– New Formats + Bistro के पद पर कार्यरत थे। इस भूमिका में उन्होंने कंपनी के ग्रोथ और एक्सपेंशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम संभाले।

ब्लिंकिट से पहले सौरदीप सरकार लगभग दो वर्षों तक Rockwell Automation के साथ भी जुड़े रहे। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड (TCS) में भी काम किया।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो सौरदीप सरकार ने Management Development Institute (MDI), गुरुग्राम से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने मार्केटिंग और स्ट्रैटेजी में विशेषज्ञता हासिल की।

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इस बड़े पद पर Gruner ग्रुप से जुड़े सचिन पालीवाल

सचिन पालीवाल इससे पहले ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ में असिस्टेंट वाइस प्रेजिडेंट (AVP) के पद पर कार्यरत थे।

Last Modified:
Thursday, 21 May, 2026
Sachin Paliwal

मीडिया, डिजिटल और ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री में लंबा अनुभव रखने वाले सचिन पालीवाल ने ग्रुनर ग्रुप (Gruner Group) में GM-मार्केटिंग एंड ब्रैंडिंग के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए अपनी नई पारी की जानकारी साझा की।

सचिन पालीवाल इससे पहले ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ में असिस्टेंट वाइस प्रेजिडेंट (AVP) के पद पर कार्यरत थे। मार्केटिंग, ब्रैंड स्ट्रैटेजी और ब्रैंड पोजिशनिंग के क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। माना जा रहा है कि उनकी नियुक्ति से ग्रुनर ग्रुप की ब्रैंड मौजूदगी और मार्केटिंग रणनीतियों को नई मजबूती मिलेगी।

नई जिम्मेदारी को लेकर उत्साह जाहिर करते हुए सचिन पालीवाल ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में कहा कि वह ग्रुनर ग्रुप में नई शुरुआत को लेकर बेहद उत्साहित हैं और आने वाले समय को लेकर सकारात्मक महसूस कर रहे हैं।

सचिन पालीवाल के पास 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मीडिया, डिजिटल और ब्रॉडकास्ट सेक्टर में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। अपने करियर के दौरान वह हिंदी न्यूज, हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC), इंग्लिश न्यूज, हिंदी मूवीज, हिंदी म्यूजिक, रीजनल GEC और होम शॉपिंग जैसे कई सेगमेंट्स में काम कर चुके हैं।

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'सैमसंग' में शिरीष अग्रवाल को मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

सैमसंग ने अपनी मोबाइल एक्सपीरियंस बिजनेस टीम में बड़ा बदलाव किया है।

Last Modified:
Monday, 18 May, 2026
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सैमसंग ने अपनी मोबाइल एक्सपीरियंस बिजनेस टीम में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने शिरीष अग्रवाल को पूरे मोबाइल एक्सपीरियंस बिजनेस के मार्केटिंग का हेड बना दिया है। इससे पहले वह भारत में सैमसंग के प्रीमियम और फ्लैगशिप स्मार्टफोन पोर्टफोलियो की मार्केटिंग संभाल रहे थे।

नई जिम्मेदारी के साथ अब शिरीष अग्रवाल सैमसंग के स्मार्टफोन्स, वियरेबल्स और दूसरे इकोसिस्टम प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग रणनीति पर काम करेंगे। बताया जा रहा है कि कंपनी प्रीमियम स्मार्टफोन और कनेक्टेड डिवाइसेज के बढ़ते मुकाबले को देखते हुए अपने मोबाइल एक्सपीरियंस बिजनेस पर ज्यादा फोकस कर रही है।

शिरीष अग्रवाल पिछले दो साल से ज्यादा समय से सैमसंग इंडिया की मार्केटिंग टीम में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ब्रैंड मैनेजमेंट, मार्केटिंग स्ट्रेटजी और बड़े कैंपेन संभाले, जिनका सीधा असर कंपनी के बिजनेस पर देखने को मिला।

 सैमसंग से पहले वह पैनासोनिक इंडिया  के साथ भी काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने मार्केटिंग कम्युनिकेशन और ब्रैंड पोजिशनिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स संभाले थे।

मार्केटिंग क्षेत्र में एक दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाले शिरीष अग्रवाल को भारत में सैमसंग की ब्रैंड पहचान मजबूत करने और उपभोक्ताओं से जुड़ी कैंपेन तैयार करने के लिए जाना जाता है।

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FAST और ALTD सेवाओं पर सख्त नियमों के खिलाफ बड़े ब्रॉडकास्टर्स

दोनों कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि इंटरनेट आधारित ऑडियो-विजुअल कंटेंट संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।

Last Modified:
Thursday, 14 May, 2026
Digital Streaming

भारत में इंटरनेट आधारित टीवी सेवाओं को रेगुलेट करने को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स कल्वर मैक्स एंटरटेनमेंट (Culver Max Entertainment) और जियोस्टार (JioStar) ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) और Application-based Linear Television Distribution (ALTD) सेवाओं के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने की बात कही गई है।

दोनों कंपनियों ने TRAI को दिए अपने विस्तृत जवाब में कहा कि इंटरनेट आधारित टीवी प्लेटफॉर्म पारंपरिक केबल, DTH या IPTV सेवाओं से पूरी तरह अलग हैं और उन्हें टेलीकॉम या ब्रॉडकास्टिंग डिस्ट्रीब्यूशन नियमों के तहत नहीं लाया जा सकता।

TRAI ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के संदर्भ के बाद यह कंसल्टेशन पेपर जारी किया था। इसमें पूछा गया है कि क्या इंटरनेट के जरिए टीवी जैसी सेवाएं देने वाले प्लेटफॉर्म्स पर भी DTH और केबल ऑपरेटर्स जैसी लाइसेंसिंग और रेगुलेशन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

जियोस्टार और कल्वर मैक्स ने अपने जवाब में “एप्लिकेशन लेयर” और “नेटवर्क लेयर” के बीच अंतर पर जोर दिया। कंपनियों का कहना है कि FAST और ALTD प्लेटफॉर्म केवल इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करते हैं, जबकि वास्तविक नेटवर्क और डेटा ट्रांसमिशन टेलीकॉम कंपनियां करती हैं। इसलिए OTT सेवाओं को टेलीकॉम सेवा प्रदाता नहीं माना जा सकता।

दोनों कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि इंटरनेट आधारित ऑडियो-विजुअल कंटेंट संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। ऐसे में OTT प्लेटफॉर्म्स पर टेलीकॉम जैसी लाइसेंसिंग शर्तें लागू करना संवैधानिक रूप से गलत होगा।

कंपनियों ने चेतावनी दी कि अगर FAST प्लेटफॉर्म्स पर लाइसेंस फीस, बैंक गारंटी और अनिवार्य नियम लागू किए गए तो इससे भारत के डिजिटल टीवी इकोसिस्टम पर नकारात्मक असर पड़ेगा। जियोस्टार ने कहा कि FAST सेवाएं अभी शुरुआती और प्रयोगात्मक चरण में हैं, ऐसे में अत्यधिक रेगुलेशन निवेश और इनोवेशन दोनों को प्रभावित कर सकता है।

दोनों कंपनियों ने प्रसार भारती के साथ स्पोर्ट्स सिग्नल शेयरिंग और अनिवार्य चैनल कैरिज जैसे नियमों का भी विरोध किया। उनका कहना है कि ये नियम पारंपरिक प्रसारण व्यवस्था के लिए बने थे और इन्हें इंटरनेट आधारित सेवाओं पर लागू नहीं किया जा सकता। मामले को भारत में तेजी से बदलते टीवी और डिजिटल स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम के बीच पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूटर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स की बड़ी टकराहट के रूप में देखा जा रहा है।

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AI से बने विज्ञापनों के लिए ASCI ने जारी किए नए ड्राफ्ट नियम

एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने AI आधारित विज्ञापनों के लिए नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी किए हैं। विज्ञापनों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटने की बात कही गई है।

Last Modified:
Wednesday, 13 May, 2026
AI Advertising

एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (Advertising Standards Council of India - ASCI) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार विज्ञापनों को लेकर नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी किए हैं। मंगलवार को जारी इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य विज्ञापनों में पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों को भ्रमित होने से बचाना है।

ASCI ने इन नियमों को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम 2026 के अनुरूप तैयार किया है। फिलहाल यह ड्राफ्ट सुझावों के लिए सार्वजनिक किया गया है और लोग 13 जून तक अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

प्रस्तावित गाइडलाइंस के तहत AI आधारित विज्ञापनों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी “हाई रिस्क” विज्ञापनों की है, जिन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित करने का सुझाव दिया गया है। दूसरी श्रेणी “मीडियम रिस्क” विज्ञापनों की है, जिनमें यह स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य होगा कि कंटेंट AI की मदद से तैयार किया गया है। तीसरी श्रेणी “लो रिस्क” विज्ञापनों की है, जहां किसी लेबल की आवश्यकता नहीं होगी।

ASCI के अनुसार, AI का इस्तेमाल तब भ्रामक माना जाएगा जब वह लोगों को अवास्तविक उम्मीदें दिखाए, कमजोर वर्गों का शोषण करे या बिना अनुमति किसी व्यक्ति की पहचान, आवाज या चेहरे का उपयोग करे।

हालांकि केवल बैकग्राउंड म्यूजिक, सजावटी विजुअल्स या सामान्य डिजिटल इफेक्ट्स के लिए लेबल जरूरी नहीं होगा। ASCI का कहना है कि इन नियमों का मकसद संतुलन बनाना है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और उपभोक्ताओं पर अनावश्यक चेतावनियों का बोझ भी न पड़े।

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'ब्राइट आउटडोर मीडिया' का FY26 में मुनाफा बढ़ा, कंपनी की आय 155 करोड़ रुपये के पार

'ब्राइट आउटडोर मीडिया' (Bright Outdoor Media Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है।

Last Modified:
Wednesday, 13 May, 2026
BrightOutdoorMedia8745

'ब्राइट आउटडोर मीडिया' (Bright Outdoor Media Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी ने बताया कि FY26 में उसकी कुल आय बढ़कर 155.43 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 21 फीसदी ज्यादा है।

कंपनी का EBITDA बढ़कर 35.23 करोड़ रुपये रहा, जबकि शुद्ध मुनाफा 24.05 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कंपनी के नेट प्रॉफिट में करीब 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

कंपनी के CMD Yogesh Lakhani ने कहा कि विज्ञापन कारोबार के साथ-साथ रियल एस्टेट और इवेंट बिजनेस में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने मुंबई में “Bright Real Estate Expo 2026” का आयोजन किया, जिसमें 25 से ज्यादा डेवलपर्स और 50 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स शामिल हुए।

कंपनी ने FY26 की दूसरी छमाही में एंटरटेनमेंट, एजुकेशन, रियल एस्टेट और फैशन रिटेल सेक्टर में कई बड़े क्यूरेटेड इवेंट्स भी आयोजित किए। इसके साथ ही कंपनी ने आउट-ऑफ-होम (OOH) विज्ञापन कारोबार को मजबूत करने के लिए लंबी अवधि की रणनीतिक होर्डिंग पार्टनरशिप भी की है।

Bright Outdoor Media ने कहा कि अब उसका फोकस डिजिटल LED और DOOH (Digital Out of Home) पोर्टफोलियो बढ़ाने पर है। कंपनी एयरपोर्ट, मेट्रो और हाईवे जैसे इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

1980 में शुरू हुई यह कंपनी भारत की पहली लिस्टेड आउटडोर मीडिया कंपनी है। कंपनी के पास देशभर में 400 से ज्यादा होर्डिंग्स का नेटवर्क है, जिनमें मुंबई के 50 से ज्यादा बड़े डिजिटल LED बिलबोर्ड शामिल हैं। 

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V360 Group बनी देश की पहली लिस्टेड कम्युनिकेशन फर्म

V360 ग्रुप ने खुद को भारत की पहली लिस्टेड कम्युनिकेशन फर्म बताया है। कंपनी का कहना है कि यह भारतीय PR और इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा पड़ाव है।

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
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V360 ग्रुप ने खुद को भारत की पहली लिस्टेड कम्युनिकेशन फर्म बताया है। कंपनी का कहना है कि यह भारतीय PR और इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा पड़ाव है।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब कंपनी के ₹41.69 करोड़ के IPO से निवेशकों को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग से पहले कंपनी के 1.19 गुना सब्सक्राइब हो गए थे। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भारत में स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन और ब्रैंड स्टोरीटेलिंग सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

कंपनी में ग्रोथ व स्ट्रैटजी की एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट नैना भल्ला ने LinkedIn पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर अपने क्रेडेंशियल्स अपडेट कर दिए हैं।

नैना भल्ला ने इसे टीम के लिए गर्व का पल बताते हुए कहा कि यह रणनीतिक स्टोरीटेलिंग, बड़े विजन और लंबे समय तक मजबूत संस्थान बनाने की सोच का नतीजा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय कंपनी की लीडरशिप टीम को भी दिया, जिसमें कुणाल किशोर, मनीषा चौधरी, गौरव पात्रा और वसुंधरा सिंह समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं।

इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के कम्युनिकेशन सेक्टर के तेजी से प्रोफेशनल और संगठित होने का संकेत है। अब PR और कम्युनिकेशन एजेंसियां सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर नहीं, बल्कि बड़े और संस्थागत बिजनेस मॉडल के रूप में भी उभर रही हैं, जहां ग्रोथ, स्ट्रैटेजी और इंटीग्रेटेड ब्रैंड सॉल्यूशंस पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है।

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InMobi ने भारत में PR की जिम्मेदारी Kommune Brand Communications को सौंपी

पीआर और कम्युनिकेशन एजेंसी Kommune Brand Communications को टेक कंपनी 'इनमोबी' (InMobi) का देश में पब्लिक रिलेशंस और कम्युनिकेशन का नया जिम्मा मिला है।

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
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पीआर और कम्युनिकेशन एजेंसी Kommune Brand Communications को टेक कंपनी 'इनमोबी' (InMobi) का देश में पब्लिक रिलेशंस और कम्युनिकेशन का नया जिम्मा मिला है। इस मामले से जुड़े लोगों ने 'एक्सचेंज4मीडिया' को इसकी पुष्टि की है।

इस साझेदारी के तहत Kommune, InMobi की भारत में सभी PR और कम्युनिकेशन गतिविधियों को संभालेगी। इसमें मीडिया रिलेशंस, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और ब्रैंड स्टोरीटेलिंग जैसे काम शामिल होंगे।

यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब InMobi विज्ञापन तकनीक, AI आधारित कंज्यूमर एंगेजमेंट और डिजिटल इनोवेशन पर तेजी से फोकस बढ़ा रही है। कंपनी भारतीय टेक और स्टार्टअप इकोसिस्टम में अपनी मजबूत पहचान और लीडरशिप पोजिशन को और मजबूत करना चाहती है।

बताया जा रहा है कि Kommune, InMobi के लिए ऐसी इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी तैयार करेगी, जिससे कंपनी की ब्रैंड विजिबिलिटी बढ़े और उसकी बिजनेस कहानी ज्यादा प्रभावी तरीके से सामने आए।

यह डील इस बात को भी दिखाती है कि भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और टेक बाजार में टेक कंपनियां अब सिर्फ मार्केटिंग ही नहीं, बल्कि अपनी साख और मजबूत ब्रैंड नैरेटिव बनाने पर भी खास ध्यान दे रही हैं।

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रीजनल मार्केटिंग का बड़ा दांव: क्यों छोटे शहरों की तरफ भाग रहे हैं ब्रैंड्स?

टियर-2, टियर-3 शहरों से उठ रही है उपभोक्ता क्रांति- वर्नाकुलर कंटेंट और रीजनल एड स्पेंड में ऐतिहासिक उछाल,

Last Modified:
Monday, 11 May, 2026
Brand Brand

कुछ साल पहले तक अगर कोई बड़ा ब्रैंड अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी बनाता था, तो नक्शे पर सिर्फ मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई के इर्द-गिर्द ही घेरा खिंचता था। बाकी भारत- जयपुर, इंदौर, पटना, सूरत, कोयंबटूर, मेरठ जैसे शहर और कस्बे महज एक 'अगली बड़ी संभावना' बनकर एजेंडे के आखिरी पन्ने पर पड़े रहते थे, लेकिन अप्रैल 2026 में जब हम यह आर्टिकल लिख रहे हैं, तब यह तस्वीर पूरी तरह पलट चुकी है।

टियर-2 और टियर-3 शहर अब केवल 'उभरते बाजार' नहीं रहे- वे भारत की मार्केटिंग, उपभोग और डिजिटल अर्थव्यवस्था की नई धुरी बन चुके हैं। IAMAI-Kantar की 'Internet in India Report 2025' से लेकर ResearchAndMarkets की फरवरी 2026 की डिजिटल एड स्पेंड रिपोर्ट और Nielsen के ताजा विश्लेषण तक- हर बड़ी रिसर्च एजेंसी एक ही बात दोहरा रही है: भारत की ग्रोथ स्टोरी अब मेट्रो में नहीं, 'भारत' में लिखी जा रही है।

IAMAI-Kantar रिपोर्ट: 958 मिलियन इंटरनेट यूजर्स, ग्रामीण भारत की अगुवाई

जनवरी 2026 में जारी IAMAI और Kantar की 'Internet in India Report 2025' ने देश के डिजिटल परिदृश्य की एक नई और बेहद अहम तस्वीर पेश की।

इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 958 मिलियन सक्रिय इंटरनेट यूजर्स (AIU) हैं, जो साल-दर-साल करीब 8% की वृद्धि है। ग्रामीण भारत इस विस्तार में अगुवाई कर रहा है- देश के कुल सक्रिय इंटरनेट यूजर्स में से 57% यानी लगभग 548 मिलियन लोग ग्रामीण इलाकों से हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट अपनाने की दर शहरी भारत से लगभग चार गुना तेज है- जो इस बात का सबूत है कि डिजिटल भारत की नींव अब गांवों और छोटे शहरों में रखी जा रही है।

शॉर्ट-वीडियो कंटेंट इस बदलाव का सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरा है। 588 मिलियन यूजर्स यानी भारत की कुल इंटरनेट आबादी का 61% अब शॉर्ट-फॉर्म वीडियो कंटेंट देखता है। इसमें ग्रामीण यूजर्स की संख्या शहरी यूजर्स से थोड़ी ज्यादा हो गई है, और यह रुझान युवा दर्शकों में सबसे मजबूत है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी अब ग्रामीण उपभोक्ताओं की दुनिया में दस्तक दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि 44% यूजर्स वॉइस सर्च, इमेज-बेस्ड सर्च, चैटबॉट और AI फिल्टर जैसी AI-एनेबल्ड सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

वर्नाकुलर कंटेंट: भाषा में है असली ताकत

IAMAI-Kantar की यही रिपोर्ट एक और बड़ा सच बताती है- भारत का नया डिजिटल उपभोक्ता अपनी मातृभाषा में सोचता है, समझता है और खरीदता है। अंग्रेजी अब उसकी पहली भाषा नहीं है।

73% से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स अब क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट देखते हैं- यह रुझान टियर-2 और टियर-3 शहरों में सबसे ज्यादा मजबूत है।

ShareChat- जो 15 भारतीय भाषाओं में संचालित होता है- के 350 मिलियन से ज्यादा सक्रिय यूजर्स हैं और इस प्लेटफॉर्म पर स्थानीय भाषाओं में कंटेंट की बेहद मजबूत पकड़ है। Dailyhunt, ShareChat, Moj जैसे वर्नाकुलर कंटेंट प्लेटफॉर्म अब कई इलाकों में उपभोक्ताओं का डिफॉल्ट डिजिटल अनुभव बन चुके हैं।

ब्रैंड्स ने इस बदलाव को पहचाना और तेजी से कदम उठाए। Meesho ने 11 भारतीय भाषाओं में समर्पित कंटेंट बनाकर छोटे शहरों में गहरी पैठ बनाई। Zomato के ऐप को रीजनल भाषाओं में उपलब्ध कराने के बाद टियर-2 शहरों से ऑर्डर फ्रीक्वेंसी में मापनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई- क्योंकि उपभोक्ता अपनी भाषा में मेनू पढ़, रिव्यू देख और आसानी से चेकआउट कर पाए।

 टियर-2, टियर-3 का उपभोक्ता उभार: आंकड़े बोलते हैं

ई-कॉमर्स और उपभोक्ता खर्च के आंकड़े भी इसी बड़े बदलाव की पुष्टि करते हैं। भारत में अभी लगभग 220-230 मिलियन सक्रिय ऑनलाइन शॉपर्स हैं और हर साल 25-30 मिलियन नए खरीदार जुड़ रहे हैं। इनमें से 60% नए ऑनलाइन शॉपर्स टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहे हैं।

Bain के अनुमान के अनुसार, 2020 के बाद से जुड़े नए ऑनलाइन शॉपर्स में से करीब दो-तिहाई टियर-3 या उससे छोटे शहरों से हैं। इन्हीं के दम पर भारत का ई-रिटेल बाजार 2030 तक 170-190 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

विशेषज्ञों ने कहा है कि 'टियर-2 और टियर-3 बाजार अब उभरते नहीं रहे- वे राष्ट्रीय उपभोग के पैटर्न को तेजी से आकार दे रहे हैं।' 

इन उपभोक्ता बदलावों के साथ-साथ विज्ञापन खर्च का तराजू भी तेजी से रीजनल कंटेंट की तरफ झुक रहा है।

ResearchAndMarkets रिपोर्ट (फरवरी 2026)

फरवरी 2026 में जारी ResearchAndMarkets की India Digital Ad Spend रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिजिटल एड स्पेंड बाजार 2025 में 13.22 अरब डॉलर था। 2026 में यह 10.1% सालाना वृद्धि के साथ 14.56 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। 2026-2029 के बीच 12% CAGR की दर से बढ़ते हुए यह बाजार 2029 तक 20.46 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

इसी रिपोर्ट में वर्नाकुलर और रीजनल कंटेंट पर ब्रैंड्स के बढ़ते निवेश को मुख्य ट्रेंड के रूप में चिन्हित किया गया है। ShareChat (और इसका वीडियो प्लेटफॉर्म Moj), Dailyhunt (Josh के जरिए) और InMobi जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म रीजनल कंटेंट स्ट्रैटेजी के दम पर विज्ञापन बाजार में तेजी से हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

Sensor Tower रिपोर्ट 2026

Sensor Tower की 'State of Digital Advertising in India 2026' रिपोर्ट (जो Facebook, Instagram सहित प्रमुख सोशल प्लेटफॉर्म्स पर आधारित है) के मुताबिक, इन प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर 2025 में भारत का डिजिटल विज्ञापन खर्च 4.2 अरब डॉलर के नए मुकाम पर पहुंचा और 2026 में यह 5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

ई-कॉमर्स, फिनटेक और कंज्यूमर गुड्स कंपनियां अपने क्रिएटिव एसेट और मीडिया प्लान को भाषाई विविधता के हिसाब से ढाल रही हैं। FMCG, रिटेल, ई-कॉमर्स, ऑटोमोबाइल और BFSI (बैंकिंग, वित्त, बीमा) विज्ञापन वॉल्यूम में सबसे बड़े योगदानकर्ता बने हुए हैं।

OOH (आउट-ऑफ-होम) यानी होर्डिंग और आउटडोर विज्ञापन के मोर्चे पर भी टियर-2/3 शहरों की खींचतान दिखती है। इन शहरों में CPM (कॉस्ट पर थाउजेंड इंप्रेशन) महानगरों की तुलना में 30-50% कम है, जिससे ब्रैंड्स अपने विज्ञापन बजट का कहीं बेहतर उपयोग कर पाते हैं।

ब्रैंड्स की रणनीति बदली: रीजनल इन्फ्लुएंसर्स और हाइपरलोकल कैम्पेन

भारत की इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स (10,000-1,00,000 फॉलोअर्स) की एंगेजमेंट रेट 3-5% और नैनो-इन्फ्लुएंसर्स (1,000-10,000 फॉलोअर्स) की एंगेजमेंट रेट 8% तक होती है- जो बड़े मैक्रो-इन्फ्लुएंसर्स की 1.2% एंगेजमेंट रेट से कई गुना ज्यादा है। इसीलिए 47% ब्रैंड्स अब माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

Flipkart ने अपनी 'India Ka Fashion Capital' कैम्पेन में टियर-2/3 शहरों को केंद्र में रखा, जो यूजर्स तक तेजी से पहुंची।

Fortune ब्रैंड ने अक्टूबर 2025 में अपना '17% Less Oil Absorption' कैम्पेन कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए विशेष रूप से स्थानीय भाषाओं में लॉन्च किया और यह ब्रैंड को राष्ट्रीय स्तर पर पुनः स्थापित करने में सफल रहा।

Accenture Strategy के MD आदित्य प्रियदर्शन ने 2025 को 'भारत सर्ज' का साल करार दिया- जहां टियर-2 और टियर-3 शहर विकास में महज भागीदार नहीं थे, बल्कि वे उसका नेतृत्व कर रहे थे।

आगे क्या: 2026 में रीजनल मार्केटिंग का भविष्य

2026 में भारत की विज्ञापन इंडस्ट्री डिजिटल सेगमेंट की अगुवाई में आगे बढ़ेगी। TV और आउटडोर एडवर्टाइजिंग के पारंपरिक माध्यम रीजनल पहुंच और बड़े आयोजनों की वजह से मजबूत बने रहेंगे। E-commerce का विस्तार जारी रहेगा, जबकि क्विक कॉमर्स खोज और रूपांतरण का सबसे तेज इंजन बनेगा।

प्रोग्रामेटिक एडवर्टाइजिंग में भी रीजनल फोकस बढ़ेगा। भारत में प्रोग्रामेटिक खरीद पहले से कुल डिजिटल एड स्पेंड का बड़ा हिस्सा बन चुकी है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है।

भारत में डिजिटल ग्रोथ की अगली लहर महानगरों से नहीं, टियर-2 और टियर-3 बाजारों से आ रही है। ये दर्शक तेजी से ऑनलाइन आ रहे हैं, हर रोज कंटेंट देख रहे हैं और ऑनलाइन जो कुछ देखते हैं उसी के आधार पर खरीदारी के फैसले कर रहे हैं।

ब्रैंड्स के सामने अब एक स्पष्ट सबक है- या तो रीजनल मार्केटिंग को पूरी गंभीरता से अपनाएं, या प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएं। जो ब्रैंड्स स्थानीय भाषा में बात करते हैं, क्षेत्रीय संस्कृति को समझते हैं, माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स के जरिए भरोसा बनाते हैं और अपने कैम्पेन को मेट्रो से परे ले जाते हैं- वही आने वाले वर्षों में भारत के उपभोक्ता बाजार के असली विजेता बनेंगे।

 जैसा कि IAMAI-Kantar, ResearchAndMarkets और Sensor Tower के 2025-26 के आंकड़े एकसुर में कह रहे हैं: भारत की मार्केटिंग क्रांति की भाषा अब हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी और भोजपुरी है- सिर्फ अंग्रेजी नहीं।

 

 

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