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DD की DG बोलीं- संसाधनों की काफी कमी है,बड़े बदलाव के लिए बहुत पैसा चाहिए...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। दूरदर्शन की नई डायरेक्टर जनरल सुप्रिया साहू को पदभार संभाले अभी आठ महीने ही हुए हैं। जून 2016 में पदभार संभालने के बाद से वह लगातार दूरदर्शन को आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं। इसी कवायद के तहत दूरदर्शन ने निजी एंटरटेनमेंट चैनलों से टक्कर लेने क
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दूरदर्शन की नई डायरेक्टर जनरल सुप्रिया साहू को पदभार संभाले अभी आठ महीने ही हुए हैं। जून 2016 में पदभार संभालने के बाद से वह लगातार दूरदर्शन को आगे बढ़ाने में जुटी हुई हैं। इसी कवायद के तहत दूरदर्शन ने निजी एंटरटेनमेंट चैनलों से टक्कर लेने के लिए विभिन्न प्रॉडक्शन हाउस को अपनी प्राइम टाइम प्रोग्रामिंग स्लॉट की नीलामी की है। दर्शक संख्या बढ़ाने के लिए अब वह डीडी नेशनल पर 1980 के दशक के लोकप्रिय शो जैसे ‘हमलोग’, ‘मालगुड़ी डेज’ और ‘सर्कस’ को दोबारा से लाने की योजना बना रही हैं।
आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है ?
दूरदर्शन वास्तव में काफी चुनौती वाला आर्गनाइजेशन है। दुनिया के बड़े ब्रॉडकास्टिंग आर्गनाइजेशन में इसकी गिनती होती है। 1959 में शुरुआत के बाद से अब देश भर में इसके पास 67 प्रोग्रामिंग जेनरेटिंग फैसिलिटी है। ऐसे में इतने बड़े आर्गनाइजेशन के आउटपुट और प्रॉडक्टिविटी को संभालना काफी चुनौतीपूर्ण काम है।
दूसरी बात यह है कि निजी चैनल तो अपने प्रोग्रामिंग कंटेंट में बदलाव कर सकते हैं, लेकिन हमें इसके लिए एक निश्चित प्रक्रिया का पालन करता है ताकि लोगों को बेहतर कंटेंट उपलब्ध कराया जा सके।
आपको इस आर्गनाइजेशन में किस तरह की समस्याएं देखने को मिली हैं?
1959 में डीडी का इस क्षेत्र में एकाधिकार था लेकिन आज के समय में 800 से ज्यादा निजी चैनल हो गए हैं और यह विभिन्न जॉनर (genres) में काम कर रहे हैं। ऐसे में तो पूरा परिदृश्य ही बदल गया है।
हालांकि हमारे पास भी काफी चैनल हैं लेकिन अभी हम इन्हें लगातार नया करने (continuously revamp) की स्थिति में नहीं आ पाए हैं। हमारे अधिकांश चैनल के पास कंटेंट की कमी है। इसके अलावा हमारे पास संसाधनों की भी काफी कमी है क्योंकि चैनल में बड़े पैमाने पर बदलाव (overhaul) करने के लिए काफी धन की आवश्यकता होती है।
आप इन चुनौतियों से कैसे निबटेंगी?
हमें नए टैलेंट को आगे लाना होगा और नई सोच को इसमें शामिल करना होगा। अब तक क्या होता रहा है, यह छोड़कर हमें ऑडियंस को इसमें शामिल करना होगा। पब्लिक ब्रॉडकास्टर होने के नाते इसके सामने हमेशा यह चुनौती रहती है कि वह महत्वपूर्ण मामलों को सामने लेकर आए। लेकिन दर्शकों को इससे जोड़े रखना हमेशा चुनौती बनी रहती है। अब हम ऐसा कंटेंट तलाश रहे हैं जो लोगों को आकर्षित कर सके। हम अपने कंटेंट को पेश करने का तरीका बदलना चाहते हैं।
अपने चैनलों में जरूरी फेरबदल करने के अलावा हम विभिन्न कैटेगरी जैसे किड्स, म्यूजिक और यूथ के नए चैनल लाने की भी सोच रहे हैं। हमारे पास इन जॉनर में फिलहाल कोई ऐसा चैनल नहीं है। प्रसार भारती बोर्ड ने हमारे प्लान को काफी सपोर्ट किया है और उसने माना है कि इन चैनलों को लाने की बहुत जरूरत है।
दूरदर्शन की कंटेंट लाइब्रेरी को डिजिटाइज किया जा रहा है। आपकी इस बारे में क्या प्लानिंग है?
हमने महसूस किया है कि न सिर्फ हमारी वह पीढ़ी जो इन आइकॉनिक शोज (iconic shows) को देखकर बड़ी हुई है बल्कि नई पीढ़ी भी इनकी काफी शौकीन है। ऐसे में हमने निर्णय लिया है कि एक निश्चित समय में हमें इन शो को दोबारा प्रसारित करना चाहिए। हालांकि इनमें से कुछ प्रोग्रामों के हमारे पास फिलहाल अधिकार नहीं है। हम अभी पुराने सभी लोकप्रिय शो की लिस्ट देख रहे हैं। इनमें ‘हम लोग’ जैसे शो भी शामिल हैं और हमारी योजना डीडी नेशनल पर इनका दोबारा प्रसारण करने की है। हम इन प्रोग्राम की डिजिटल क्वालिटी को चेक कर रहे हैं और इन्हें दोबारा प्रसारित करने के लिए इनकी क्वालिटी को इंप्रूव करने में जुटे हुए हैं।
हमने हाल ही में ऐसे ही एक शो ‘सर्कस’ का पुन: प्रसारण शुरू किया है और दो महीने में हम अपना यह काम पूरा कर लेंगे। डीडी का पुराना कंटेंट ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध होगा। इसके लिए हमारी ‘Amazon’ से बातचीत चल रही है और ‘Flipkart’ पर तो हम पहले से ही मौजूद हैं।
दूरदर्शन का कहना है कि वह अपना डिजिटल प्लेटफार्म भी तैयार कर रहा है, आप इसे कब लेकर आ रही हैं?
हमने एक छोटी टीम तैयार की है जो दूरदर्शन के डिजिटल की दिशा में काम कर रही है। दूरदर्शन का कंटेंट उसके डिजिटल प्लेटफार्म पर भी मौजूद होगा, हालांकि इसमें तीन-चार महीने लगेंगे। कुछ कंटेंट को हम आम लोगों के लिए मुफ्त में रखेंगे जबकि कुछ को देखने के लिए लोगों को पैसे चुकाने पड़ेंगे।
दूरदर्शन को डिजिटल करने की दिशा में पैसा सबसे बड़ी चुनौती है, इस चुनौती से निबटने की क्या योजना है?
हमें सरकार से पूरा सपोर्ट मिल रहा है। 2018 तक हमने 44 ट्रांसमीटर्स इंस्टॉल करने की योजना बनाई है। हम आईआईएम अहमदाबाद के साथ मिलकर एक ऐसा बिजनेस मॉडल विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं जिससे हमें बहुत मदद मिलेगी। फिलहाल, हमें अपने टार्गेट हासिल करने में किसी तरह की परेशानी नहीं है।
इस साल आपका रेवेन्यू टार्गेट क्या है ?
इस साल हमने 800 करोड़ रुपये हासिल करने की योजना बनाई है। 2015-16 में हम 750 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गए थे।
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