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आज मीडिया मोदी-मोदी क्यों हो रहा है, इसके पीछे की वजह बताई वरिष्ठ पत्रकार नीरेंद्र नागर ने

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। ‘हैशटैग की पत्रकारिता और खबरों की बदलती दुनिया’ विषय पर बोलते हुए ‘नवभारत टाइम्स’ के डिजिटल विंग के संपादक नीरेंद्र नागर ने कहा मीडिया में हैशटैग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल टाइम्स नाउ करता है। टाइम्स नाउ हर रात को एक विषय को लेकर हैशटैग क्रिएट

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

‘हैशटैग की पत्रकारिता और खबरों की बदलती दुनिया’ विषय पर बोलते हुए ‘नवभारत टाइम्स’ के डिजिटल विंग के संपादक नीरेंद्र नागर ने कहा मीडिया में हैशटैग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल टाइम्स नाउ करता है। टाइम्स नाउ हर रात को एक विषय को लेकर हैशटैग क्रिएट करता है, ताकि उस पर चर्चा की जा सके। यानी किसी विषय को चर्चा में लाना हो तो हैशटैग का इस्तेमाल होता है। मीडिया की दृष्टि से देखें तो किसी विषय को चर्चा में लाने के लिए हैशटैग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने का यह काम अरनब गोस्वामी ने किया, सही किया या फिर गलत किया ये मैं नहीं कह सकता हूं।

एक उदाहरण का हवाला देते हुए वे कहते हैं कि मीडिया ने एनएसजी मुद्दे पर ऐसा माहौल बना दिया था कि पूरी मीडिया दूरदर्शन लग रही थी। पिछले दो साल से जिन हैशटैग के शब्दों से ये भावना निकलती है कि भारतीय श्रेष्ठ हैं, वे ट्रेंड करने लगते हैं। एनएसजी वाले मामले में जहां एक वर्ग #ChinaExposed तो दूसरा वर्ग #Failed Modi Diplomacy चला रहा था और दोनो ही ट्रेंड कर रहे थे। ऐसे हैशटैग का इस्तेमाल ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां करती हैं।

ऑनलाइन पत्रकारिता के क्षेत्र में हैशटैग का ज्यादा प्रभाव नहीं दिखता है, जितना ट्विटर का होता है। लेकिन ये बात सही है कि ट्विटर ने पत्रकारों को बेकार बना दिया है। राजनेता को आज अपनी बात कहने के लिए किसी पास जाने की जरूरत नहीं है उन्होंने एक ट्वीट कर दिया और उनकी बात  मीडिया की खबर बन जाती है। और इससे भी बुरी चीज है Keyword जो ज्यादा खतरनाक है। आज बस आप मोदी कीवर्ड का प्रयोग कर लीजिए तो आपका ऑनलाइन ट्रैफिक खुद बढ़ जाता है। ऐसे कीवर्ड आपको कई खबरों को पाठक के हिसाब से खबर या हेडलाइन देने पर मजबूर करते हैं। आज देश का मिडिल क्लास मोदी के विरोध को सुनना नहीं चाहता है। बस देश प्रेंम, भारत महान जैसे हैशटैग या कीवर्ड हो तो खबर हिट हो जाती है। मोदी की हार या उनके बारे में नेगेटिव न्यूज लोग पढ़ना नहीं चाहते हैं। आजकल पत्रकार और संपादक को ये भी देखना पड़ता है कि सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है क्योंकि आज 60 फीसदी ट्रैफिक सोशल मीडिया से आता है और इस वजह से वो खबरें देनी पड़ती हैं, जो यूजर्स को पसंद हैं, और उसके खिलाफ जाएंगे तो वो हमसे दूर हो जाएगा। आज मीडिया मोदी-मोदी क्यों हो रहा है इसलिए नहीं कि मीडिया उन्हें पसंद करता है बल्कि इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया पर अधिकांश यूजर्स मिडिल क्लास के हैं और ज्यादातर मोदी को पसंद करते हैं और उन्हें उम्मीद है कि देश में जल्द ही कुछ बदलाव होगा। इसलिए मीडिया को भी मोदी के पक्ष में ही बोलना पड़ता है। इसलिए कहना चाहूंगा कि बिना कुछ खर्च किए अगर ट्रैफिक लाना है तो उसका सबसे बेहतरीन तरीका है सोशल मीडिया।

अब तो ग्रौथ हैकर्स की टीम भी सजेस्ट करती है कि कैसे साइट का ट्रैफिक बढ़ाया जाए। उदाहरण के तौर पर एक जोक हमने लगाया जिसे 25 हजार लोगों ने शेयर किया। ऐसे में उस टीम का कहना था कि ऐसे जोक्स साइट के लिए जरूरी है।

पर एक बात मैं जोर देकर कहना चाहूंगा कि पत्रकार या संपादक कई दवाबों और मजबूरियों के बीच भी अच्छा काम कर सकता है और करता है। अगर हम नवभारत टाइम्स डॉट कॉम की ही बात करें तो दो अहम मुद्दे- पहला अखलाक मुद्दा और दूसरा जेएनयू मुद्दा। इन दोनों मुद्दों पर हमने स्टैंड लिया और सही साबित हुए। मानता हूं कि आज की पत्रकारिता भी तमाम घटिया कंटेंट भी चलता है, पर अच्छे कंटेंट के लिए जगह है, बस आपको अपना काम ईमानदारी से करना है।

आज एसपी को याद करता हूं तो एक मींटिंग याद आती है जिसमें कहां गया था कि हमें एंटरटेनमेंट सेक्शन को थोड़ा हल्का करना है। तब मैंने कहा था कि We have to be cheap without Looking cheap.  और बड़ी हद तक आज पत्रकारिता में ऐसा हो रहा है। आज ऑनलाइन पत्रकारिता में कंटेंट के साथ-साथ UV's और PV's की भी चिंता रहती है। पर इन सबके बीच में पत्रकार सामंजस्य बनाकर अच्छी खबरें और रिपोर्ट फाइल करता रहता है।

उक्त बातें भारत में आधुनिक टेलिविजन पत्रकारिता के जनक और ‘आजतक’ के संस्थापक संपादक रहे स्वर्गीय सुरेन्द्र प्रताप सिंह (एसपी सिंह) की याद में दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हाल ही (26 जून) में ‘मीडिया खबर कॉन्क्लेव’ और एसपी सिंह स्मृति व्याख्यान के आयोजन के दौरान कही गई थी।

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