याकारिनो का कार्यकाल ऐसे समय में समाप्त हुआ है जब X (ट्विटर) नई दिशा में अग्रसर हो रहा है और XAI जैसे नए इनिशिएटिव्स पर कंपनी का फोकस बढ़ रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक्स (पहले ट्विटर) की CEO लिंडा याकारिनो ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी में दो वर्षों तक नेतृत्व संभालने के बाद उन्होंने अपने विदाई संदेश में इसे ‘जिंदगी का सबसे बड़ा अवसर’ बताया।
लिंडा याकारिनो ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए लिखा, “हमने उस शुरुआती अहम काम से शुरुआत की, जो यूजर्स- खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए जरूरी था और साथ ही विज्ञापनदाताओं का भरोसा फिर से बहाल करने की दिशा में कदम उठाए।”
उन्होंने आगे कहा, “इस टीम ने लगातार मेहनत की, फिर चाहे वो ग्राउंडब्रेकिंग इनोवेशन Community Notes हो या जल्द आने वाला X Money... हम सबसे प्रभावशाली आवाजों और कंटेंट को इस प्लेटफॉर्म पर लेकर आए। अब, जब @xai के साथ X एक नए अध्याय में प्रवेश कर रहा है, तो सबसे अच्छा अभी आना बाकी है।”
After two incredible years, I’ve decided to step down as CEO of ?.
— Linda Yaccarino (@lindayaX) July 9, 2025
When @elonmusk and I first spoke of his vision for X, I knew it would be the opportunity of a lifetime to carry out the extraordinary mission of this company. I’m immensely grateful to him for entrusting me…
याकारिनो का कार्यकाल ऐसे समय में समाप्त हुआ है जब X (ट्विटर) नई दिशा में अग्रसर हो रहा है और XAI जैसे नए इनिशिएटिव्स पर कंपनी का फोकस बढ़ रहा है। उनकी विदाई को एक युग के समापन के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें X ने कंटेंट, विज्ञापन और सुरक्षा को लेकर कई बड़े बदलावों की शुरुआत की थी।
अमेरिकी सांसदों ने एक द्विदलीय समझौते के तहत सोशल मीडिया कंपनियों के लिए बच्चों और अभिभावकों को सुरक्षा टूल उपलब्ध कराना अनिवार्य करने पर सहमति बनाई है।
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अमेरिका में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अमेरिकी हाउस एनर्जी एंड कॉमर्स कमेटी के रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं ने एक द्विदलीय (Bipartisan) समझौता किया है, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों और अभिभावकों के लिए सुरक्षा सुविधाएं और नियंत्रण संबंधी टूल उपलब्ध कराने होंगे।
कमेटी के चेयरमैन ब्रेट गुथ्री और वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य फ्रैंक पैलोन ने सोमवार को इस समझौते की घोषणा की। हालांकि उन्होंने प्रस्ताव के विस्तृत प्रावधानों का खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा कि यह कदम “बिग टेक कंपनियों को जवाबदेह बनाने” की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि कई महीनों तक दोनों दलों ने मिलकर काम किया और अब बच्चों के लिए डिजिटल माहौल को बेहतर बनाने वाली नीतियों पर सहमति बन गई है।
अमेरिका में टेक कंपनियां लंबे समय से युवाओं और किशोरों पर उनके प्रभाव को लेकर जांच के दायरे में हैं। कई अभिभावक और राज्य सरकारें स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने जैसी पहल कर रही हैं ताकि बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच सीमित की जा सके।
इस समझौते में सोशल मीडिया नियमन से जुड़े कई विवादास्पद मुद्दों को भी संबोधित किया गया है। हालांकि इसमें “ड्यूटी ऑफ केयर” (Duty of Care) का प्रावधान शामिल नहीं किया गया है। यह प्रावधान सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपने प्लेटफॉर्म डिजाइन करने के लिए बाध्य करता।
डेमोक्रेट सांसदों और कुछ प्रमुख रिपब्लिकन नेताओं, विशेष रूप से टेनेसी की सीनेटर मार्शा ब्लैकबर्न, लंबे समय से इस प्रावधान को कानून का हिस्सा बनाने की मांग करते रहे हैं। इसी वजह से अब तक इस तरह के विधेयकों को आगे बढ़ाने में कठिनाई आती रही है।
समझौते के तहत राज्यों को ऐसे कानून बनाने की अनुमति होगी जो इस प्रस्तावित कानून से भी अधिक सुरक्षा प्रदान करें। इसे डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत माना जा रहा है क्योंकि वे राज्यों के मौजूदा कानूनों को बनाए रखना चाहते थे।
हालांकि यह समझौता अभी कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले अमेरिकी सीनेट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी हासिल करनी होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हाउस के स्पीकर माइक जॉनसन इस समझौते का समर्थन करते हैं।
राज्यों ने पहले ही बनाए हैं अपने कानून
अमेरिका में लंबे समय से सोशल मीडिया को लेकर व्यापक राष्ट्रीय कानून नहीं बन पाया है। इसके चलते कई राज्यों ने अपने स्तर पर कानून लागू किए हैं। गैर-पक्षपाती संस्था नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स के अनुसार, पिछले वर्ष कम से कम 20 राज्यों ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने से जुड़े कानून पारित किए थे।
युवाओं में सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म
प्यू रिसर्च सेंटर की दिसंबर में जारी रिपोर्ट के अनुसार, 13 से 17 वर्ष के अमेरिकी किशोरों के बीच Snapchat, Instagram, YouTube और TikTok सबसे लोकप्रिय डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं।
इसी बीच Meta, TikTok, YouTube और Snapchat जैसी कंपनियां हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए हैं, जो युवाओं के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
विशेष रूप से Meta पर यह आरोप भी लग चुका है कि उसने सोशल मीडिया से बच्चों को होने वाले नुकसान से जुड़े मामलों में कानूनी सुरक्षा हासिल करने के लिए अमेरिकी सांसदों के बीच लॉबिंग की थी। हालांकि Meta का कहना है कि प्रस्तावित कानूनी भाषा मौजूदा मुकदमों को खत्म नहीं करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून पारित हो जाता है, तो अमेरिका में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगी।
दुनिया की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में शामिल Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद करने का फैसला किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में शामिल Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद करने का फैसला किया है। यह निर्णय उस विवाद के बाद लिया गया है, जिसमें इस साल के एक विजेता लेखक पर अपनी कहानी लिखने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।
Granta ने कहा है कि अब वह ऐसे बाहरी प्रकाशन साझेदारियों का हिस्सा नहीं बनेगी, जहां उसके पास संपादकीय नियंत्रण नहीं होता। हालांकि, पत्रिका ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉमनवेल्थ प्राइज के लिए शॉर्टलिस्ट हुई कहानियां सार्वजनिक हित में उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगी।
विवाद की शुरुआत कैरेबियाई क्षेत्र की विजेता कहानी ‘The Serpent in the Grove’ से हुई, जिसे लेखक जमीर नजीर ने लिखा है। मई के मध्य में सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया कि कहानी में ऐसे कई संकेत दिखाई देते हैं जो AI द्वारा लिखी गई सामग्री में आमतौर पर देखने को मिलते हैं।
आलोचकों ने कहानी की कुछ खास लेखन शैलियों और वाक्यों को उदाहरण के तौर पर पेश किया और कहा कि इनमें AI की छाप नजर आती है। हालांकि, लेखक जमीर नजीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
मई के आखिर में एक बयान में नजीर ने कहा कि उनकी लेखन प्रक्रिया सामान्य लेखकों से अलग है। उन्होंने बताया कि वह पूरी कहानी अपने एंड्रॉयड फोन पर लिखते हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उनके लिए लंबे समय तक बैठकर टाइप करना मुश्किल है, इसलिए वे स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और बाद में बहुत कम संपादन करते हैं।
Granta की प्रकाशक सिग्रिड रॉसिंग ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह संभव है कि कहीं AI से जुड़ी साहित्यिक चोरी का मामला हो, लेकिन फिलहाल इसके पक्ष में कोई ठोस सबूत नहीं है।
वहीं, कॉमनवेल्थ फाउंडेशन के महानिदेशक रजमी फारूक ने स्पष्ट किया कि शॉर्टलिस्ट किए गए सभी लेखकों ने व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की है कि उन्होंने अपनी रचनाओं में AI का इस्तेमाल नहीं किया है। फाउंडेशन ने अतिरिक्त जांच और बातचीत के बाद भी यही निष्कर्ष निकाला।
कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज के तहत कुल विजेता को 5,000 पाउंड और क्षेत्रीय विजेताओं को 2,500 पाउंड की पुरस्कार राशि दी जाती है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच यह विवाद साहित्य जगत में नई बहस छेड़ रहा है कि रचनात्मक लेखन में तकनीक की भूमिका क्या होनी चाहिए और इसकी निगरानी कैसे की जाए।
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां Fox Corporation ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Roku को 22 अरब डॉलर की नकद और शेयरों की डील में खरीदने पर सहमति जताई है।
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अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां Fox Corporation ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Roku को 22 अरब डॉलर की नकद और शेयरों की डील में खरीदने पर सहमति जताई है। इस सौदे के तहत Roku के शेयरों का मूल्य 160 डॉलर प्रति शेयर तय किया गया है। इस डील के बाद बनने वाली नई इकाई अमेरिका में टीवी व्युअरशिप के लिहाज से तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी।
इस समझौते के बाद Fox के पास मौजूद स्पोर्ट्स, न्यूज और एंटरटेनमेंट कंटेंट के साथ-साथ उसकी ऐड-समर्थित स्ट्रीमिंग सर्विस Tubi और Roku के हार्डवेयर, स्मार्ट टीवी प्लेटफॉर्म और बढ़ते विज्ञापन बिजनेस का एक बड़ा इकोसिस्टम एक साथ आ जाएगा। हालांकि Roku अपना ओपन प्लेटफॉर्म बनाए रखेगा, यानी उस पर Netflix, Amazon Prime Video और YouTube जैसे ऐप्स पहले की तरह चलते रहेंगे।
इस डील के पीछे अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री में दो बड़े दबाव बताए जा रहे हैं। पहला, कंटेंट बनाने वाली कंपनियां अब यह नहीं चाहतीं कि वे किसी और के डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहें और वहां पहुंच व डेटा के लिए “किराया” देती रहें। अब कंपनियां सीधे दर्शकों से रिश्ता बनाना चाहती हैं ताकि विज्ञापन और डेटा दोनों पर उनका नियंत्रण रहे।
दूसरा बड़ा कारण पारंपरिक टीवी यानी लाइनर टीवी का तेजी से गिरना है। इसके चलते ब्रॉडकास्ट कंपनियां अब स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी (CTV) की ओर तेजी से शिफ्ट हो रही हैं, जहां लाइव स्पोर्ट्स, न्यूज और विज्ञापन का भविष्य देखा जा रहा है। Fox के लिए यह कदम उसकी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह स्पोर्ट्स, न्यूज और लाइव इवेंट्स पर फोकस करते हुए घरों के टीवी स्क्रीन तक सीधे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के जरिए पहुंच बनाना चाहती है।
भारत में इसका एक सीधा उदाहरण Reliance Industries Limited और Disney Star के विलय से बना JioStar मॉडल माना जा सकता है, जहां कंटेंट और डिस्ट्रीब्यूशन दोनों एक ही छत के नीचे आ गए हैं। इसी तरह Viacom18 और JioCinema जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए Reliance ने कंटेंट, डेटा और एडवरटाइजिंग को एकीकृत करने की कोशिश की है।
इसके अलावा भारत में भी स्मार्ट टीवी और प्लेटफॉर्म इकोसिस्टम को कंट्रोल करने की दिशा में तेजी देखी गई है, जहां Tata Play और Jio के इंटीग्रेटेड स्मार्ट टीवी अनुभव जैसे मॉडल दर्शकों के पहले स्क्रीन यानी टीवी होम पेज पर पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर यह डील एक बड़े वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है, जहां मीडिया कंपनियां अब अलग-अलग स्ट्रीमिंग ऐप्स की बजाय एकीकृत इकोसिस्टम बना रही हैं, जिसमें कंटेंट, प्लेटफॉर्म, हार्डवेयर और विज्ञापन सब एक ही नियंत्रण में आ रहे हैं। इसी दिशा में Omnicom Group और Interpublic Group जैसे एडवरटाइजिंग दिग्गजों के विलय और Paramount Global तथा Warner Bros Discovery जैसी कंपनियों में चल रहे बदलाव भी इसी बड़ी मीडिया कंसोलिडेशन की ओर इशारा करते हैं।
आज के समय में मीडिया इंडस्ट्री में ताकत उन कंपनियों के हाथ में जा रही है जो कंटेंट के साथ-साथ प्लेटफॉर्म और डेटा दोनों को नियंत्रित कर रही हैं, जिससे विज्ञापन, पहुंच और दर्शक व्यवहार पर उनका असर और भी ज्यादा मजबूत हो रहा है।
दुनिया के बड़े अरबपतियों में शामिल Jeff Bezos ने ‘The Washington Post’ में हुई बड़ी छंटनी का बचाव किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया के बड़े अरबपतियों में शामिल Jeff Bezos ने ‘The Washington Post’ में हुई बड़ी छंटनी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अखबार को लंबे समय तक टिके रहने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत और पाठकों के लिए प्रासंगिक बने रहना जरूरी है, चाहे उनके पास कितनी भी निजी संपत्ति क्यों न हो।
CNBC को दिए इंटरव्यू में बेजोस से पूछा गया कि आखिर उन्होंने अपनी दौलत का इस्तेमाल अखबार को बचाने के लिए क्यों नहीं किया, जबकि हाल ही में ‘Washington Post’ में करीब 30 फीसदी एम्प्लॉयीज की छंटनी की गई है। इस पर बेजोस ने साफ कहा कि अखबार को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए और खुद कमाई करने वाला संस्थान बनना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “The Post को एक ऐसा बिजनेस बनना होगा जो अपने दम पर चल सके और मुनाफा कमा सके।”
बेजोस ने बताया कि उन्होंने मैनेजमेंट से कहा था कि छंटनी का फैसला डेटा और प्रदर्शन के आधार पर लिया जाए। हालांकि उन्होंने एक अहम अपवाद भी रखा। उन्होंने कहा कि खोजी पत्रकारिता यानी Investigative Reporting के मामले में सिर्फ डेटा को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
बेजोस के मुताबिक, खोजी पत्रकारिता ही ‘Washington Post’ की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि छंटनी के बाद भी अखबार का न्यूजरूम उतना छोटा नहीं हुआ है जितना लोग मान रहे हैं।
उन्होंने कहा, “आज छंटनी के बाद भी हमारा न्यूजरूम उतना बड़ा है, जितना Watergate और Pentagon Papers के दौर से भी बड़ा था।”
बेजोस का मानना है कि आर्थिक अनुशासन अखबार को और मजबूत बनाएगा और भविष्य में उसकी प्रासंगिकता बनाए रखने में मदद करेगा। उन्होंने हाल ही में ‘Washington Post’ को ट्रंप प्रशासन से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए मिले Pulitzer Prize का भी जिक्र किया और कहा कि अखबार अब भी असरदार पत्रकारिता कर रहा है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अब भी अखबार का मालिक बने रहना चाहते हैं, जबकि उनके दूसरे बिजनेस हितों के कारण हितों के टकराव की आशंका रहती है, तो बेजोस ने साफ कहा कि वह अखबार के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि जब उन्होंने 2013 में ‘Washington Post’ खरीदा था, तब यह घाटे में चल रहा था और न्यूजरूम भी काफी छोटा था। बाद में अखबार को दो साल में मुनाफे में लाया गया और फिर उस कमाई को संपादकीय टीम को मजबूत करने में लगाया गया।
बेजोस ने कहा, “अब हमने न्यूजरूम को थोड़ा छोटा जरूर किया है, लेकिन यह उतना छोटा नहीं हुआ है जितना उस समय था जब मैंने इसे खरीदा था।”
ब्रिटेन के चर्चित रियलिटी शो ‘Married at First Sight UK’ एक बड़े विवाद में घिर गया है। शो में हिस्सा लेने वाली कुछ महिला प्रतिभागियों ने रेप और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ब्रिटेन के चर्चित रियलिटी शो ‘Married at First Sight UK’ एक बड़े विवाद में घिर गया है। शो में हिस्सा लेने वाली कुछ महिला प्रतिभागियों ने रेप और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। अब इस मामले पर Channel 4 की चीफ एग्जिक्यूटिव प्रिया डोगरा ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने महिलाओं की पीड़ा पर दुख जताते हुए कहा कि वह “गहराई से माफी” मांगती हैं।
हालांकि प्रिया डोगरा ने यह भी कहा कि चैनल ने उस समय शिकायतों को सही तरीके से संभाला था, लेकिन अब पूरे मामले की दोबारा जांच के लिए बाहरी रिव्यू शुरू कराया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शो प्रतिभागियों के लिए सुरक्षित है।
दरअसल, ‘Married at First Sight UK’ में एक्सपर्ट्स सिंगल लोगों की जोड़ी बनाते हैं और उन्हें शादी करवाते हैं। शो में कपल्स पहली बार अपनी शादी के दिन मिलते हैं। यह शो ब्रिटेन में काफी लोकप्रिय है।
मामला तब गरमा गया जब BBC के चर्चित कार्यक्रम ‘Panorama’ में दो महिलाओं ने आरोप लगाया कि शो में उनके ऑन-स्क्रीन पति ने उनके साथ रेप किया। दोनों महिलाओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं एक अन्य महिला प्रतिभागी शोना मेंडरसन ने आरोप लगाया कि उनके ऑन-स्क्रीन पति ने उनकी सहमति के बिना सेक्सुअल एक्ट किया। हालांकि जिन पुरुषों पर आरोप लगे हैं, उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है।
BBC की रिपोर्ट के बाद कई पूर्व प्रतिभागियों ने भी शो को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। वहीं लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने भी लोगों से आगे आकर शिकायत करने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे हर शिकायत सुनने और जांच करने के लिए तैयार हैं।
बताया जा रहा है कि पुलिस पहले से ही Channel 4 और शो बनाने वाली प्रोडक्शन कंपनी CPL Productions के संपर्क में है।
Channel 4 की वार्षिक रिपोर्ट के दौरान प्रिया डोगरा ने कहा कि उन्होंने महिलाओं की बातें सुनी हैं और उनकी तकलीफ बेहद परेशान करने वाली है। उन्होंने कहा कि चैनल के लिए सभी कार्यक्रमों में प्रतिभागियों की सुरक्षा सबसे अहम है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि चैनल खुद इन आरोपों की जांच नहीं कर सकता, क्योंकि यह काम पुलिस और दूसरी जांच एजेंसियों का है।
Channel 4 के चीफ कंटेंट ऑफिसर इयान कैट्ज ने भी कहा कि चैनल ने उस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर सही फैसले लिए थे और महिलाओं को जरूरी सहायता दी गई थी। लेकिन आरोप बेहद गंभीर हैं, इसलिए अब दोबारा समीक्षा करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे शो और सुरक्षित बनाए जा सकें।
इस पूरे मामले ने ब्रिटेन में रियलिटी शोज की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ब्रिटिश संसद की संस्कृति समिति के सांसदों ने भी Channel 4 और मीडिया रेगुलेटर Ofcom से जवाब मांगा है।
समिति की चेयरपर्सन कैरोलिन डिनेनाज ने कहा कि ‘Married at First Sight’ से जुड़े ये आरोप बेहद डराने वाले हैं और यह चिंता बढ़ाते हैं कि क्या रियलिटी शोज में प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं या नहीं।
अमेरिका के मशहूर मीडिया कारोबारी टेड टर्नर का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। CNN नेटवर्क ने खुद इस खबर की पुष्टि की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका के मशहूर मीडिया कारोबारी टेड टर्नर का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। CNN नेटवर्क ने खुद इस खबर की पुष्टि की है। टर्नर वही शख्स थे जिन्होंने दुनिया को 24 घंटे चलने वाले न्यूज चैनल का कॉन्सेप्ट दिया और मीडिया इंडस्ट्री को पूरी तरह बदलकर रख दिया।
टेड टर्नर ने साल 1980 में CNN (केबल न्यूज नेटवर्क) की शुरुआत की थी। यह दुनिया का पहला ऐसा चैनल था जो 24 घंटे लगातार खबरें दिखाता था। उस समय कई लोगों को यह आइडिया अजीब लगा और चैनल का मजाक भी उड़ाया गया, लेकिन धीरे-धीरे CNN दुनिया का सबसे भरोसेमंद न्यूज प्लेटफॉर्म बन गया।
CNN ने कई बड़े घटनाक्रमों की लाइव और लगातार कवरेज करके अपनी पहचान बनाई। 1981 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पर हमले की खबर हो या 1986 का चैलेंजर स्पेस शटल हादसा- CNN ने तेज और लगातार अपडेट देकर खुद को साबित किया। इसके बाद 1990-91 के गल्फ वॉर की लाइव कवरेज ने चैनल को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेड टर्नर को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें ब्रॉडकास्ट इतिहास के सबसे बड़े नामों में से एक बताया और कहा कि वे उनके अच्छे दोस्त भी थे। वहीं CNN के मौजूदा चेयरमैन और CEO मार्क थॉम्पसन ने कहा कि टर्नर वह शख्स थे जिनके कंधों पर खड़े होकर आज CNN आगे बढ़ रहा है।
टर्नर सिर्फ CNN तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने परिवार के बिजनेस से की थी और बाद में एक रेडियो स्टेशन खरीदा। यही आगे चलकर Turner Broadcasting System (TBS) बना, जिसने उन्हें अमेरिका के बड़े मीडिया टायकून में शामिल कर दिया।
अपनी अलग और बेबाक पर्सनैलिटी के लिए भी टर्नर काफी मशहूर थे। उन्हें “माउथ ऑफ द साउथ” और “कैप्टन आउटरेजियस” जैसे नामों से भी जाना जाता था। कहा जाता है कि वे कई सालों तक CNN के ऑफिस में ही रहते थे और सीधे न्यूजरूम में जाकर बहस करते थे।
मीडिया के अलावा भी टर्नर कई क्षेत्रों में सक्रिय रहे। वे एक बेहतरीन नाविक थे और 1977 में अमेरिका कप जीत चुके थे। उन्होंने कई स्पोर्ट्स टीम्स के मालिकाना हक भी रखे, जिनमें अटलांटा ब्रेव्स (बेसबॉल) और अटलांटा हॉक्स (बास्केटबॉल) शामिल हैं।
टर्नर एक बड़े समाजसेवी भी थे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,000 करोड़ रुपये) दान दिए और पर्यावरण से जुड़े कई कामों में योगदान दिया।
टेड टर्नर की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही। उनकी शादी मशहूर अभिनेत्री जेन फोंडा से हुई थी, जो 2001 तक चली। साल 2018 में उन्होंने बताया था कि उन्हें लेवी बॉडी डिमेंशिया नाम की बीमारी है।
टेड टर्नर का जाना मीडिया इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने जिस 24 घंटे के न्यूज मॉडल की शुरुआत की थी, वही आज दुनिया भर के न्यूज चैनलों की पहचान बन चुका है।
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) के शेयरहोल्डर्स ने कंपनी को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) के शेयरहोल्डर्स ने कंपनी को बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब Paramount Global करीब 110 अरब डॉलर (एंटरप्राइज वैल्यू) की बड़ी डील के जरिए WBD को खरीदने की दिशा में आगे बढ़ गया है।
डील के मुताबिक, Paramount WBD के सभी शेयर 31 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से खरीदेगा। इस सौदे में कंपनी की इक्विटी वैल्यू करीब 81 अरब डॉलर आंकी गई है। अगर यह डील पूरी हो जाती है, तो Paramount के पास Warner Bros की बड़ी-बड़ी फ्रेंचाइजी जैसे Harry Potter और Game of Thrones का कंट्रोल आ जाएगा। साथ ही HBO Max और न्यूज़ नेटवर्क CNN भी इसी के दायरे में आ जाएंगे।
कंपनी के CEO David Zaslav ने कहा कि शेयरहोल्डर्स की मंजूरी इस ऐतिहासिक डील को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं Paramount का कहना है कि आने वाले महीनों में डील को फाइनल करने की उम्मीद है, जिससे एक नई तरह की बड़ी मीडिया कंपनी बनाई जा सकेगी।
हालांकि, यह सौदा अभी पूरी तरह से पक्का नहीं हुआ है। इसे अमेरिका के न्याय विभाग और यूरोप के रेगुलेटर्स से मंजूरी मिलना बाकी है। वहीं, कई एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री के लोग इस डील का विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मीडिया इंडस्ट्री कुछ बड़ी कंपनियों के हाथ में सिमट जाएगी।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
यह डील इतनी आसान नहीं रही। पिछले साल के आखिर में Netflix भी Warner Bros के साथ करीब 72 अरब डॉलर की डील करने की कोशिश में था। लेकिन Paramount ने इससे ज्यादा कीमत की पेशकश कर दी और सीधे शेयरहोल्डर्स के पास पहुंच गया। इसके बाद कई महीनों तक दोनों कंपनियों के बीच टक्कर चली, लेकिन आखिर में Paramount बाजी मार ले गया और Netflix पीछे हट गया।
डील के क्या होंगे असर?
अगर यह सौदा पूरा हो जाता है, तो हॉलीवुड के दो बड़े स्टूडियो एक ही छत के नीचे आ जाएंगे। साथ ही Paramount और HBO Max जैसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी एक साथ आ सकते हैं। इसके अलावा अमेरिका के दो बड़े न्यूज नेटवर्क- CBS और CNN भी एक ही ग्रुप का हिस्सा बन जाएंगे।
लेकिन इस डील को लेकर इंडस्ट्री के कई कलाकार, डायरेक्टर्स और राइटर्स खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे नौकरियां जा सकती हैं और कंटेंट में विविधता कम हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी में कुछ जगहों पर छंटनी और बदलाव भी हो सकते हैं।
वहीं, कंपनियों का दावा है कि इससे यूजर्स को ज्यादा कंटेंट और बेहतर सर्विस मिलेगी। लेकिन आलोचकों को डर है कि आगे चलकर स्ट्रीमिंग की कीमतें बढ़ सकती हैं और कंटेंट के विकल्प कम हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह डील अगर पूरी होती है, तो अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
BBC ने वित्तीय दबाव के चलते लगभग 2000 कर्मचारियों की छंटनी की योजना बनाई है। यह 15 साल में सबसे बड़ा restructuring कदम है, जिससे कंपनी 500 मिलियन पाउंड की बचत करना चाहती है।
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ब्रिटेन के पब्लिक ब्रॉडकास्टर BBC ने वित्तीय दबाव के चलते अपने वर्कफोर्स में बड़े पैमाने पर कटौती करने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1,800 से 2,000 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, जो पिछले 15 वर्षों में सबसे बड़ी छंटनी मानी जा रही है।
यह फैसला BBC के बढ़ते खर्च और घटती आय के बीच लिया गया है। अंतरिम डायरेक्टर जनरल रोड्री टैल्फन डेविस ने कर्मचारियों को बताया कि कंपनी को अगले दो वर्षों में लगभग 500 मिलियन पाउंड की बचत करनी है।
उन्होंने संकेत दिया कि केवल कर्मचारियों की संख्या ही नहीं, बल्कि कुछ चैनल या सेवाएं भी बंद की जा सकती हैं। डेविस ने कहा कि उत्पादन लागत में वृद्धि, लाइसेंस फीस और कमर्शियल इनकम पर दबाव, और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारण इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।
BBC अब भर्ती, यात्रा, कंसल्टेंसी और इवेंट्स जैसे खर्चों में भी कटौती करेगा। इस बीच, ब्रॉडकास्टिंग यूनियन Bectu की प्रमुख फिलिपा चाइल्ड्स ने इस फैसले को कर्मचारियों के लिए “विनाशकारी” बताया है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब मई में पूर्व Google एग्जीक्यूटिव मैट ब्रिटिन BBC की कमान संभालने वाले हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया कंपनी 'ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप' (TMTG) ने ब्रिटिश अखबार 'दि गार्जियन' (The Guardian) के खिलाफ चल रहा मानहानि का केस वापस ले लिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया कंपनी 'ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप' (TMTG) ने ब्रिटिश अखबार 'दि गार्जियन' (The Guardian) के खिलाफ चल रहा मानहानि का केस वापस ले लिया है।
यह मामला उस रिपोर्ट से जुड़ा था जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी जांच एजेंसियां कंपनी को मिले करीब 8 मिलियन डॉलर (करीब 66 करोड़ रुपये) के भुगतान की जांच कर रही हैं, और शक है कि यह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।
कंपनी ने फ्लोरिडा की एक अदालत में केस वापस लेने की जानकारी दी। हालांकि, इसे “बिना शर्त” पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है, यानी TMTG चाहे तो भविष्य में फिर से केस दायर कर सकती है।
यह खबर पहली बार मार्च 2023 में ‘द गार्डियन’ ने प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि न्यूयॉर्क के प्रॉसिक्यूटर्स कुछ ऐसे फंड्स की जांच कर रहे हैं, जिनका संबंध रूस के राष्ट्रपति व्लमिदिर पुतिन के करीबी लोगों से हो सकता है।
इस रिपोर्ट के बाद TMTG ने आरोप लगाया था कि अखबार ने पक्षपात और गलत इरादे से खबर छापी है, और इसी आधार पर केस दर्ज किया गया था।
लेकिन बाद में अदालत ने केस के ज्यादातर हिस्से को खारिज कर दिया था और कहा था कि रिपोर्टिंग में “जानबूझकर गलत” (malice) साबित नहीं हुआ। इसके बावजूद कंपनी ने दोबारा शिकायत दाखिल की थी, जिसे अब पूरी तरह वापस ले लिया गया है।
हालांकि केस वापस लेने की वजह नहीं बताई गई है। वहीं, ‘द गार्डियन’ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी रिपोर्टिंग पूरी तरह तथ्यों और ठोस सबूतों पर आधारित थी।
गौरतलब है कि हाल के समय में ट्रंप मीडिया कंपनियों के खिलाफ कई बड़े कानूनी कदम उठा रहे हैं, लेकिन इस मामले में उनका पीछे हटना एक अलग संकेत माना जा रहा है।
इस गिरफ्तारी के बाद नेपाल में विरोध शुरू हो गया था। खासतौर पर युवा वर्ग और Gen Z से जुड़े एक्टिविस्ट्स ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और रोशन पोखरेल की तत्काल रिहाई की मांग की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नेपाल में अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह (Balendra Shah) की आलोचना करने पर गिरफ्तार यूट्यूबर को विरोध के बाद रिहा कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, यूट्यूब चैनल ‘Hades’ चलाने वाले रोशन पोखरेल को 9 अप्रैल 2026 को पूर्वी नेपाल के पंचथर जिले से गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने चैनल पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
पुलिस के मुताबिक, पोखरेल को चार दिनों तक हिरासत में रखा गया। इसके बाद 12 अप्रैल को उन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। रिहाई के साथ यह शर्त भी रखी गई कि जांच में जरूरत पड़ने पर उन्हें पुलिस के सामने उपस्थित होना होगा।
गौरतलब है कि इस गिरफ्तारी के बाद नेपाल में विरोध शुरू हो गया था। खासतौर पर युवा वर्ग और Gen Z से जुड़े एक्टिविस्ट्स ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और रोशन पोखरेल की तत्काल रिहाई की मांग की। उनका कहना था कि केवल विचार व्यक्त करने के आधार पर किसी को गिरफ्तार करना उचित नहीं है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री बालेन शाह खुद भी राजनीति में आने से पहले यूट्यूबर और रैपर के तौर पर लोकप्रिय रहे हैं। उन्होंने अपने गीतों और वीडियो के जरिए नेपाल की व्यवस्था, भ्रष्टाचार और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी थी, जिससे उन्हें युवाओं के बीच खास पहचान मिली।
हाल ही में हुए आम चुनावों के बाद बालेन शाह के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ है। यह चुनाव पिछले वर्ष हुए बड़े युवा आंदोलनों के बाद कराए गए थे, जिनमें भ्रष्टाचार मुक्त शासन और सिस्टम में बदलाव की मांग उठी थी।