अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां Fox Corporation ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Roku को 22 अरब डॉलर की नकद और शेयरों की डील में खरीदने पर सहमति जताई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका की मीडिया इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां Fox Corporation ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Roku को 22 अरब डॉलर की नकद और शेयरों की डील में खरीदने पर सहमति जताई है। इस सौदे के तहत Roku के शेयरों का मूल्य 160 डॉलर प्रति शेयर तय किया गया है। इस डील के बाद बनने वाली नई इकाई अमेरिका में टीवी व्युअरशिप के लिहाज से तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी।
इस समझौते के बाद Fox के पास मौजूद स्पोर्ट्स, न्यूज और एंटरटेनमेंट कंटेंट के साथ-साथ उसकी ऐड-समर्थित स्ट्रीमिंग सर्विस Tubi और Roku के हार्डवेयर, स्मार्ट टीवी प्लेटफॉर्म और बढ़ते विज्ञापन बिजनेस का एक बड़ा इकोसिस्टम एक साथ आ जाएगा। हालांकि Roku अपना ओपन प्लेटफॉर्म बनाए रखेगा, यानी उस पर Netflix, Amazon Prime Video और YouTube जैसे ऐप्स पहले की तरह चलते रहेंगे।
इस डील के पीछे अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री में दो बड़े दबाव बताए जा रहे हैं। पहला, कंटेंट बनाने वाली कंपनियां अब यह नहीं चाहतीं कि वे किसी और के डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहें और वहां पहुंच व डेटा के लिए “किराया” देती रहें। अब कंपनियां सीधे दर्शकों से रिश्ता बनाना चाहती हैं ताकि विज्ञापन और डेटा दोनों पर उनका नियंत्रण रहे।
दूसरा बड़ा कारण पारंपरिक टीवी यानी लाइनर टीवी का तेजी से गिरना है। इसके चलते ब्रॉडकास्ट कंपनियां अब स्ट्रीमिंग और कनेक्टेड टीवी (CTV) की ओर तेजी से शिफ्ट हो रही हैं, जहां लाइव स्पोर्ट्स, न्यूज और विज्ञापन का भविष्य देखा जा रहा है। Fox के लिए यह कदम उसकी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह स्पोर्ट्स, न्यूज और लाइव इवेंट्स पर फोकस करते हुए घरों के टीवी स्क्रीन तक सीधे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के जरिए पहुंच बनाना चाहती है।
भारत में इसका एक सीधा उदाहरण Reliance Industries Limited और Disney Star के विलय से बना JioStar मॉडल माना जा सकता है, जहां कंटेंट और डिस्ट्रीब्यूशन दोनों एक ही छत के नीचे आ गए हैं। इसी तरह Viacom18 और JioCinema जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए Reliance ने कंटेंट, डेटा और एडवरटाइजिंग को एकीकृत करने की कोशिश की है।
इसके अलावा भारत में भी स्मार्ट टीवी और प्लेटफॉर्म इकोसिस्टम को कंट्रोल करने की दिशा में तेजी देखी गई है, जहां Tata Play और Jio के इंटीग्रेटेड स्मार्ट टीवी अनुभव जैसे मॉडल दर्शकों के पहले स्क्रीन यानी टीवी होम पेज पर पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर यह डील एक बड़े वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है, जहां मीडिया कंपनियां अब अलग-अलग स्ट्रीमिंग ऐप्स की बजाय एकीकृत इकोसिस्टम बना रही हैं, जिसमें कंटेंट, प्लेटफॉर्म, हार्डवेयर और विज्ञापन सब एक ही नियंत्रण में आ रहे हैं। इसी दिशा में Omnicom Group और Interpublic Group जैसे एडवरटाइजिंग दिग्गजों के विलय और Paramount Global तथा Warner Bros Discovery जैसी कंपनियों में चल रहे बदलाव भी इसी बड़ी मीडिया कंसोलिडेशन की ओर इशारा करते हैं।
आज के समय में मीडिया इंडस्ट्री में ताकत उन कंपनियों के हाथ में जा रही है जो कंटेंट के साथ-साथ प्लेटफॉर्म और डेटा दोनों को नियंत्रित कर रही हैं, जिससे विज्ञापन, पहुंच और दर्शक व्यवहार पर उनका असर और भी ज्यादा मजबूत हो रहा है।
पैरामाउंट स्काईडांस कॉर्पोरेशन ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की प्रस्तावित डील को लेकर सिनेमाघरों को बड़ा भरोसा देने की तैयारी की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पैरामाउंट स्काईडांस कॉर्पोरेशन ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की प्रस्तावित डील को लेकर सिनेमाघरों को बड़ा भरोसा देने की तैयारी की है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पैरामाउंट बड़े थिएटर ऑपरेटर्स के साथ तीन साल का समझौता करने की पेशकश कर रही है। इसके तहत कंपनी हर साल कम से कम 30 फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज करने का वादा करेगी।
प्रस्तावित समझौते AMC Entertainment Holdings और Cineworld Group की Regal Cinemas के साथ किए जाने हैं। इसके मुताबिक पैरामाउंट की फिल्में रिलीज के बाद कम से कम 45 दिनों तक सिर्फ सिनेमाघरों में उपलब्ध रहेंगी। इस दौरान उन्हें स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर नहीं लाया जाएगा। इसके अलावा फिल्मों को कम से कम 90 दिनों तक स्ट्रीमिंग सर्विस से दूर रखने की शर्त भी शामिल होगी।
वादे को कानूनी रूप देने की तैयारी
पैरामाउंट के सीईओ डेविड एलिसन पहले ही सार्वजनिक तौर पर सिनेमाघरों में फिल्मों की रिलीज जारी रखने का वादा कर चुके हैं। अब कंपनी इसी वादे को औपचारिक समझौते के जरिए लिखित रूप देने की तैयारी कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पैरामाउंट अपने वादे पूरे नहीं करती है तो प्रस्तावित समझौते में जुर्माने या अन्य पेनल्टी का प्रावधान भी हो सकता है।
$110 अरब की डील को लेकर विवाद
Paramount का यह कदम ऐसे समय आया है, जब Warner Bros. Discovery को करीब 110 अरब डॉलर में खरीदने की उसकी योजना को लेकर अमेरिका में कानूनी चुनौती चल रही है।
अमेरिका के 12 राज्यों ने इस डील को रोकने के लिए एंटीट्रस्ट केस दायर किया है। राज्यों का आरोप है कि इस विलय से David Ellison को फिल्म इंडस्ट्री पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण मिल सकता है। उनका यह भी कहना है कि इससे फिल्मों का प्रोडक्शन कम हो सकता है, जिसका असर इंडस्ट्री में नौकरियों पर भी पड़ सकता है।
पैरामाउंट ने इस मामले में कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोन्टा (Rob Bonta) से बातचीत की मांग की है। इसी मामले की सुनवाई मार्च में होने वाली है।
AMC और Regal डील के समर्थन में
प्रस्तावित फिल्म रिलीज समझौते ऐसे समय में सामने आए हैं, जब फिल्म एग्जिबिशन इंडस्ट्री में पैरामाउंट-वार्नर ब्रदर्स की इस डील के समर्थन में लेख लिखा है। वहीं Regal के सीईओ Eduardo Acuna ने कहा है कि लंबे समय तक चलने वाली कानूनी लड़ाई से फिल्म बिजनेस को नुकसान हो सकता है।
हालांकि, थिएटर ऑपरेटर्स का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था Cinema United अभी भी इस डील का विरोध कर रही है।
Ellison लगातार बना रहे हैं इंडस्ट्री में समर्थन
पैरामाउंट के सीईओ डेविड एलिसन पिछले कई महीनों से थिएटर चेन और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ बातचीत कर रहे हैं, ताकि वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के साथ प्रस्तावित डील के लिए समर्थन जुटाया जा सके।
डेविड एलिसन का लगातार कहना है कि Paramount और Warner Bros. के एक साथ आने से फिल्मों का प्रोडक्शन कम नहीं, बल्कि बढ़ सकता है। उन्होंने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखे एक लेख में भी कहा था कि फिल्मों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इस डील के केंद्र में है।
हॉलीवुड के एक हिस्से को भरोसा नहीं
हालांकि, हॉलीवुड के कुछ हिस्सों में पैरामाउंट के इस दावे को लेकर अभी भी संदेह है। यूनियनों, प्रोड्यूसर्स, टेक्निकल वर्कर्स और वकीलों ने सवाल उठाया है कि क्या दोनों कंपनियों के विलय के बाद भी फिल्म प्रोडक्शन का स्तर बना रहेगा।
इसके लिए वॉल्ट डिज्नी और 20th Century Fox की डील का उदाहरण भी दिया जा रहा है। उस समय प्रोडक्शन बनाए रखने के वादे किए गए थे, लेकिन बाद में दोनों कंपनियों के एक साथ आने के बाद फिल्मों का आउटपुट कम हो गया था।
करीब $50 अरब का कर्ज लेने की तैयारी
Warner Bros. Discovery को खरीदने के लिए पैरामाउंट को भारी कर्ज भी लेना पड़ेगा। कंपनी करीब 50 अरब डॉलर का कर्ज लेने की तैयारी में है। इतने बड़े कर्ज को संभालने के लिए कंपनी को बड़े स्तर पर कॉस्ट कटिंग और खर्च में बचत करनी पड़ सकती है। इसी वजह से फिल्म इंडस्ट्री में यह चिंता भी है कि क्या कंपनी लंबे समय तक हर साल 30 फिल्मों की रिलीज का वादा निभा पाएगी।
डील में पहले ही हो चुकी है देरी
पैरामाउंट व वार्नर की डील को पहले ही कई अड़चनों का सामना करना पड़ा है। एक तरफ अमेरिकी राज्यों का एंटीट्रस्ट केस है, वहीं राइटर्स गिल्ड ऑफ अमेरिका (WGA) की ओर से अलग मुकदमा भी किया गया है।
पैरामाउंट को पहले उम्मीद थी कि यह डील सितंबर के अंत तक पूरी हो जाएगी। लेकिन देरी के कारण Warner Bros. को 1 अरब डॉलर से ज्यादा की लेट फीस देनी पड़ सकती है।
डेविड एलिसन इस डील के लिए हॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। हॉलीवुड एजेंट Ari Emanuel भी सार्वजनिक तौर पर इस सौदे का समर्थन कर चुके हैं।
कुल मिलाकर, सिनेमाघरों के साथ 30 फिल्मों और 45 दिनों की एक्सक्लूसिव थिएट्रिकल रिलीज का प्रस्ताव पैरामाउंट के लिए सिर्फ बिजनेस डील नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री और थिएटर मालिकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश भी है कि वार्नर ब्रदर्स के साथ विलय के बाद भी बड़े पर्दे पर फिल्मों की सप्लाई कम नहीं होगी।
पाकिस्तान सरकार ने देश में काम कर रहे विदेशी मीडिया संगठनों और उनसे जुड़े पत्रकारों के लिए नए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पाकिस्तान सरकार ने देश में काम कर रहे विदेशी मीडिया संगठनों और उनसे जुड़े पत्रकारों के लिए नए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद विदेशी मीडिया के कामकाज को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है, लेकिन प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों ने इसे स्वतंत्र पत्रकारिता पर नई पाबंदी करार दिया है।
नई गाइडलाइंस के मुताबिक, विदेशी मीडिया के लिए काम करने वाले पाकिस्तानी पत्रकार, फ्रीलांसर, स्ट्रिंगर, फिक्सर और अन्य सहयोगियों को सूचना मंत्रालय के एक्सटर्नल पब्लिसिटी विंग में पंजीकरण और मान्यता (Accreditation) करानी होगी। इसके अलावा, इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर किसी भी रिपोर्टिंग असाइनमेंट पर जाने से पहले सरकारी मंजूरी भी लेनी होगी।
हाल ही में सूचना मंत्रालय ने इस्लामाबाद में मौजूद विदेशी पत्रकारों को व्हाट्सएप संदेश भेजकर याद दिलाया था कि इन तीन शहरों से बाहर रिपोर्टिंग, शूटिंग या कंटेंट तैयार करने के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना अनिवार्य है। पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में काम कर रहे पत्रकारों से भी आवश्यक मंजूरी लेने के बाद ही रिपोर्टिंग करने को कहा गया।
हालांकि, सूचना मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा कि इन नियमों का उद्देश्य मीडिया की आजादी पर रोक लगाना नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, यह केवल पंजीकरण और रिपोर्टिंग प्रक्रिया को स्पष्ट और जवाबदेह बनाने के लिए है तथा यह किसी भी पत्रकार की आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं है।
दूसरी ओर, ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP), कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) और पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (PFUJ) समेत कई पत्रकार संगठनों ने इन नियमों की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे सरकारी नियंत्रण बढ़ेगा, स्वतंत्र रिपोर्टिंग प्रभावित होगी और विदेशी मीडिया के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से निष्पक्ष खबरें जुटाना और मुश्किल हो जाएगा।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं और हाल के दिनों में वहां की घटनाओं की विदेशी मीडिया कवरेज को लेकर सरकार और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के बीच मतभेद भी देखने को मिले हैं।
पैरामाउंट-स्काईडांस और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के प्रस्तावित विलय (Merger) को लेकर अब एक नया विवाद सामने आया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पैरामाउंट-स्काईडांस और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के प्रस्तावित विलय (Merger) को लेकर अब एक नया विवाद सामने आया है। इस बार मामला इतिहास से जुड़े दुर्लभ टीवी न्यूज आर्काइव तक पहुंच का है। डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले प्रड्यूसर्स का कहना है कि यदि यह डील मंजूर हो जाती है, तो दुनिया के दो सबसे बड़े टीवी न्यूज आर्काइव एक ही कंपनी के नियंत्रण में आ जाएंगे। इससे ऐतिहासिक फुटेज तक पहुंच सीमित होने का खतरा पैदा हो सकता है।
'आर्काइवल प्रड्यूसर्स अलायंस' (Archival Producers Alliance), जो अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के 650 से अधिक आर्काइव विशेषज्ञों का प्रतिनिधित्व करता है, ने ब्रिटेन की संस्कृति मंत्री लीजा नैंडी से इस प्रस्तावित विलय की औपचारिक जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर सरकार इस डील पर ऐसी शर्तें भी लगाए, जिससे ऐतिहासिक न्यूज फुटेज तक सभी की पहुंच बनी रहे।
दरअसल, इस विलय के बाद CNN और CBS News के विशाल न्यूज आर्काइव एक ही कंपनी के पास आ जाएंगे। CNN के पास पिछले 45 वर्षों की वैश्विक खबरों से जुड़ी 40 लाख से अधिक वीडियो और अन्य सामग्री मौजूद है। वहीं, CBS News के पास करीब 85 वर्षों का ब्रॉडकास्ट फुटेज है, जिसमें कई ऐसे वीडियो भी शामिल हैं जो कभी प्रसारित नहीं हुए, साथ ही बड़ी मात्रा में बी-रोल (B-roll) फुटेज भी मौजूद है। दोनों को मिलाकर यह दुनिया के सबसे बड़े निजी टीवी न्यूज आर्काइव में शामिल होंगे।
डॉक्यूमेंट्री प्रड्यूसर्स का कहना है कि युद्ध, चुनाव, नागरिक अधिकार आंदोलनों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं जैसे विषयों पर फिल्में बनाने के लिए वे अक्सर इन आर्काइव से लाइसेंस लेकर फुटेज का इस्तेमाल करते हैं। उनका कहना है कि अगर इन दोनों आर्काइव का नियंत्रण एक ही कंपनी के हाथ में चला गया, तो वही तय करेगी कि किसे ऐतिहासिक फुटेज मिलेगी और किसे नहीं। ऐसे में कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी फिल्मों का निर्माण प्रभावित हो सकता है, क्योंकि इन फुटेज के विकल्प बहुत कम हैं।
यह चिंता ऐसे समय सामने आई है, जब ब्रिटेन सरकार पहले ही इस प्रस्तावित डील के मीडिया क्षेत्र पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठा चुकी है। जून में सरकार ने दोनों कंपनियों को भेजे गए पत्र में कहा था कि इस विलय के बाद पहली बार CNN और CBS News के आर्काइव एक ही मालिक के नियंत्रण में आ जाएंगे। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समाचार, बच्चों के टीवी कार्यक्रमों और स्ट्रीमिंग सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का भी उल्लेख किया था।
आर्काइवल प्रड्यूसर्स अलायंस ने यह भी दावा किया कि पहले भी कई बार फिल्म प्रड्यूसर्स को कुछ ऐतिहासिक फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई, क्योंकि आशंका थी कि उनका इस्तेमाल सैन्य अभियानों या सार्वजनिक हस्तियों को अलग नजरिए से दिखाने के लिए किया जा सकता है। संगठन का कहना है कि यदि मीडिया क्षेत्र में इस तरह का एकीकरण बढ़ता है, तो भविष्य में इस तरह की पाबंदियां और बढ़ सकती हैं। इससे उन डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के निर्माण पर असर पड़ेगा, जो दुर्लभ और ऐतिहासिक न्यूज फुटेज पर आधारित होती हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पैरामाउंट के एक प्रवक्ता ने डॉक्यूमेंट्री प्रड्यूसर्स की इस मांग पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
उधर, ब्रिटेन सरकार Enterprise Act 2002 के तहत इस प्रस्तावित विलय की शुरुआती समीक्षा कर रही है, जिसके 7 अगस्त तक पूरी होने की उम्मीद है। फिलहाल नियामक संस्थाएं प्रतिस्पर्धा (Competition) और मीडिया विविधता (Media Plurality) से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं। वहीं, डॉक्यूमेंट्री प्रड्यूसर्स का कहना है कि इस डील के व्यावसायिक प्रभावों के साथ-साथ ऐतिहासिक न्यूज आर्काइव तक खुली और निष्पक्ष पहुंच बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
Paramount Skydance और Warner Bros Discovery के बीच प्रस्तावित 110 अरब डॉलर के मर्जर (विलय) को फिलहाल जून 2027 तक के लिए टाल दिया गया है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Paramount Skydance और Warner Bros Discovery के बीच प्रस्तावित 110 अरब डॉलर के मर्जर (विलय) को फिलहाल जून 2027 तक के लिए टाल दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की एक अदालत में इस सौदे के खिलाफ चल रही कानूनी चुनौती के चलते दोनों कंपनियों ने आपसी सहमति से इस प्रक्रिया को फिलहाल रोकने का फैसला किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मर्जर के खिलाफ अमेरिका के 12 राज्यों और Writers Guild of America (WGA) ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि अगर यह सौदा पूरा होता है तो मीडिया इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा कम हो जाएगी। इससे उपभोक्ताओं को कम विकल्प मिलेंगे और मनोरंजन सेवाओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हाल ही में यूरोपीय नियामकों (European Regulators) ने कुछ शर्तों के साथ इस मर्जर को मंजूरी दे दी थी। मंजूरी की शर्तों के तहत Paramount को यूरोप में Universal Pictures के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही फिल्म वितरण (Distribution) व्यवस्था खत्म करनी होगी।
मर्जर पर रोक लगने के बाद इस मामले से जुड़े आपातकालीन न्यायिक (Emergency Court) मामले भी फिलहाल वापस ले लिए गए हैं।
हालांकि, कानूनी अड़चनों के बावजूद Paramount Skydance और Warner Bros Discovery का मानना है कि यह मर्जर भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। कंपनियों का कहना है कि इस सौदे से वे वैश्विक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स और बड़ी टेक कंपनियों के साथ बेहतर तरीके से मुकाबला कर सकेंगी, जो आज मनोरंजन उद्योग में तेजी से अपना दबदबा बढ़ा रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Paramount ने इस समझौते को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा है कि अब मामले की पूरी सुनवाई (Full Trial) का रास्ता साफ हो गया है। कंपनी को भरोसा है कि अदालत में पेश किए जाने वाले सबूत यह साबित करेंगे कि यह मर्जर प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स—तीनों के हित में है।
कंपनी का यह भी कहना है कि मामले का अंतिम समाधान निकालने का सबसे तेज रास्ता अदालत में पूरी सुनवाई ही है।
गौरतलब है कि अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने इस मर्जर को जून में मंजूरी दे दी थी। लेकिन राज्यों और राइटर्स गिल्ड की कानूनी चुनौती के चलते अब इस बहुचर्चित सौदे पर अंतिम फैसला आने में अभी समय लगेगा।
दुनिया की दिग्गज एंटरटेनमेंट कंपनी Disney की हालिया छंटनी का असर उसके स्पोर्ट्स नेटवर्क ESPN पर भी पड़ा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की दिग्गज एंटरटेनमेंट कंपनी Disney की हालिया छंटनी का असर उसके स्पोर्ट्स नेटवर्क ESPN पर भी पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने एडिटोरियल और ऑन-एयर दोनों तरह की नौकरियों में कटौती की है।
नौकरी गंवाने वालों में SportsCenter के लंबे समय से जुड़े एंकर और Baseball Tonight के होस्ट कार्ल रावेच (Karl Ravech) भी शामिल हैं, जो 1993 से ESPN के साथ काम कर रहे थे। इसके अलावा पूर्व NFL खिलाड़ी और फुटबॉल विश्लेषक रायन क्लार्क (Ryan Clark) भी कंपनी छोड़ रहे हैं। वह पिछले दस साल से अधिक समय से ESPN से जुड़े हुए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स केअनुसार, ESPN में सबसे ज्यादा असर पर्दे के पीछे काम करने वाले एम्प्लॉयीज (Behind-the-scenes Staff) पर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह छंटनी मुख्य रूप से इस साल NFL Network के अधिग्रहण के बाद हुए पुनर्गठन से जुड़ी है।
ESPN के चेयरमैन जिमी पिटारो (Jimmy Pitaro) ने एम्प्लॉयीज को भेजे गए एक संदेश में कहा कि पिछले कुछ महीनों में NFL Network की संपत्तियों को ESPN में सफलतापूर्वक शामिल करने की दिशा में काफी प्रगति हुई है। इस दौरान कंपनी ने अपनी टीमों, संसाधनों और संगठनात्मक ढांचे की विस्तार से समीक्षा की, ताकि भविष्य के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार की जा सके।
उन्होंने कहा कि इसी प्रक्रिया के चलते कंपनी को कुछ कठिन फैसले लेने पड़े और कई पदों पर असर पड़ा है। पिटारो ने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रभावित एम्प्लॉयीज के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाएगा और इस बदलाव के दौरान उन्हें हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि हालांकि अधिकांश छंटनी NFL Network के एकीकरण से जुड़ी है, लेकिन कंपनी के अन्य विभागों में भी कुछ एम्प्लॉयीज की नौकरियां प्रभावित हुई हैं।
दरअसल, Disney ने इस साल की शुरुआत से ही अपने कारोबार का पुनर्गठन शुरू कर दिया था। जनवरी में कंपनी ने अपने सभी मार्केटिंग विभागों को चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) असद अयाज के नेतृत्व में एकीकृत किया था। उस समय भी कई एम्प्लॉयीज की छंटनी हुई थी।
वहीं, Pixar में भी एम्प्लॉयीज की नौकरी गई है। खास बात यह है कि यह छंटनी ऐसे समय हुई है, जब स्टूडियो के लिए 2026 बॉक्स ऑफिस के लिहाज से काफी सफल रहा। 'Hoppers' और 'Toy Story 5' जैसी फिल्मों की बदौलत Pixar की फिल्मों ने दुनियाभर में करीब 1.4 अरब डॉलर की टिकट बिक्री दर्ज की।
इसके बावजूद Disney लागत कम करने और अपने नए कारोबारी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए एम्प्लॉयीज की संख्या घटाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
यूरोपीय संघ (EU) ने टेक दिग्गज Google पर बड़ा शिकंजा कसते हुए उस पर 890 मिलियन यूरो (करीब 1 अरब डॉलर) का जुर्माना लगाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यूरोपीय यूनियन (EU) ने टेक दिग्गज Google पर बड़ा शिकंजा कसते हुए उस पर 890 मिलियन यूरो (करीब 1 अरब डॉलर) का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई डिजिटल मार्केट्स एक्ट (Digital Markets Act-DMA) के तहत की गई है। इसी के साथ Google इस नए कानून के तहत जुर्माना झेलने वाली पहली बड़ी टेक कंपनियों में शामिल हो गई है।
यूरोपीय कमिशन (European Commission) ने Google पर दो अलग-अलग मामलों में जुर्माना लगाया है। यूरोपीय कमिशन का आरोप है कि कंपनी ने अपने सर्च इंजन और Play Store के जरिए प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन किया।
सर्च रिजल्ट में अपने ही प्रोडक्ट्स को दिया फायदा
कुल जुर्माने में से 460 मिलियन यूरो Google के सर्च बिजनेस से जुड़ा है। यूरोपीय कमिशन का कहना है कि Google ने अपने Shopping, Hotels, Travel और Sports जैसे प्रोडक्ट्स और सेवाओं को सर्च रिजल्ट में प्राथमिकता दी, जबकि प्रतिस्पर्धी कंपनियों की सेवाओं को कम महत्व दिया गया।
यूरोपीय कमिशन के मुताबिक, इस तरह का व्यवहार निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के खिलाफ है।
Play Store को लेकर भी लगा जुर्माना
दूसरे मामले में Google पर 430 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया गया। यूरोपीय कमिशन का आरोप है कि Google ने ऐप डेवलपर्स को यह खुलकर बताने की अनुमति नहीं दी कि यूजर्स Play Store के बाहर दूसरी वेबसाइटों या ऐप स्टोर्स से कम कीमत पर सेवाएं या ऐप खरीद सकते हैं।
यूरोपीय कमिशन का मानना है कि इससे ऐप डेवलपर्स और उपभोक्ताओं, दोनों के विकल्प सीमित हुए।
60 दिन में नियम मानने का आदेश
यूरोपीय कमिशन ने Google को निर्देश दिया है कि वह 60 दिनों के भीतर अपने सिस्टम में जरूरी बदलाव करे और DMA के नियमों का पालन सुनिश्चित करे। अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है तो उस पर आगे भी अतिरिक्त आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
Google ने फैसले का किया विरोध
Google ने इस फैसले पर असहमति जताई है और संकेत दिए हैं कि वह इसे अदालत में चुनौती दे सकती है।
Google के ग्लोबल अफेयर्स के प्रेजिडेंट केंट वॉकर ने कहा कि यूरोपीय संघ की शर्तें लागू होने से कंपनी को अपने कुछ लोकप्रिय फीचर्स हटाने पड़ सकते हैं। उनका दावा है कि इससे Google Search की रियल-टाइम क्षमताएं प्रभावित होंगी और Google Play की सुरक्षा व्यवस्था भी कमजोर हो सकती है।
कंपनी का कहना है कि यह फैसला यूरोप के उपभोक्ताओं और कारोबारों के हित में नहीं है।
EU बोला- सभी को मिलना चाहिए बराबर मौका
यूरोपीय कमिशन की कार्यकारी उपाध्यक्ष टेरेसा रिबेरा ने कहा कि डिजिटल बाजार में सफलता किसी कंपनी की गुणवत्ता के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि इस आधार पर कि वह किसी बड़े सर्च इंजन की मालिक है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को हमेशा यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनके पास खरीदारी के अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं, चाहे वे Google के प्लेटफॉर्म के बाहर ही क्यों न हों।
Google पर पहले भी लग चुके हैं भारी जुर्माने
यह Google के खिलाफ यूरोपीय संघ की पहली कार्रवाई नहीं है। पिछले करीब 20 वर्षों में EU, Google पर 10 अरब यूरो से अधिक का जुर्माना लगा चुका है। नया फैसला यह संकेत देता है कि यूरोपीय संघ Digital Markets Act को सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर पूरे यूरोप में सर्च इंजन और ऐप स्टोर के काम करने के तरीके पर पड़ सकता है। इससे प्रतिस्पर्धी कंपनियों और ऐप डेवलपर्स को ज्यादा अवसर मिल सकते हैं, जबकि Google को अपने कारोबार के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है।
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google में एक बार फिर कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Google में एक बार फिर कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कंपनी के 4,500 से अधिक कर्मचारियों ने एक याचिका (पिटीशन) पर हस्ताक्षर कर प्रबंधन से मांग की है कि भविष्य में अगर छंटनी होती है तो कर्मचारियों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
द जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान के तहत कर्मचारियों ने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित माउंटेन व्यू मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के CEO सुंदर पिचाई और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को यह याचिका सौंपी। इस दौरान कर्मचारियों ने ऐसे पोस्टर भी उठाए जिनमें नौकरी की सुरक्षा बढ़ाने और छंटनी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की गई।
छंटनी पर पूरी रोक नहीं, बल्कि स्पष्ट नियमों की मांग
कर्मचारियों ने भविष्य में छंटनी पूरी तरह रोकने की मांग नहीं की है। उनका कहना है कि अगर कर्मचारियों की संख्या कम करनी ही पड़े, तो उसके लिए पहले से तय और पारदर्शी नियम होने चाहिए।
याचिका में मांग की गई है कि छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को कम से कम वही सेवरेंस पैकेज (मुआवजा) मिले, जैसा कंपनी ने जनवरी 2023 में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी के दौरान दिया था।
इसके अलावा कर्मचारियों ने सुझाव दिया है कि किसी भी अनिवार्य छंटनी से पहले कंपनी स्वैच्छिक निकास (Voluntary Exit) का विकल्प दे, ताकि इच्छुक कर्मचारी पहले खुद आगे आ सकें।
परफॉर्मेंस रेटिंग सिस्टम में बदलाव की भी मांग
कर्मचारियों ने Google के GRAD Performance Evaluation System पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों की रेटिंग तयशुदा कोटे के आधार पर नहीं, बल्कि उनके वास्तविक काम और प्रदर्शन के आधार पर होनी चाहिए।
सेवरेंस भुगतान का तरीका बदलने की मांग
याचिका में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों को एकमुश्त सेवरेंस राशि देने के बजाय उन्हें कुछ समय तक कंपनी के पेरोल पर बने रहने का विकल्प दिया जाए। इससे उन्हें कंपनी की स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं मिलती रहेंगी और खासकर अमेरिका में वर्क वीजा पर काम कर रहे कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
AI में निवेश के बीच जारी है छंटनी
गौरतलब है कि Google ने 2023 में करीब 12,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसके बाद भी Google Cloud समेत कई विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम की गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर लगातार कर्मचारियों की छंटनी हो रही है। इससे कर्मचारियों के बीच भविष्य को लेकर असमंजस बढ़ रहा है।
Alphabet Workers Union का मिला समर्थन
इस अभियान को Alphabet Workers Union का भी समर्थन मिला है। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों में भविष्य को लेकर अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है और ऐसे समय में मजबूत सुरक्षा उपाय जरूरी हैं, ताकि संगठन में बदलाव के दौरान कर्मचारियों को स्थिरता मिल सके।
यूनियन के मुताबिक, यह याचिका कंपनी प्रबंधन को सौंप दी गई है और Google नेतृत्व को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। खबर लिखे जाने तक कंपनी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
गेमिंग और मनोरंजन क्षेत्र की कंपनी Accel Entertainment ने अमेरिका के नेवादा राज्य में अपने कारोबार का विस्तार किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
गेमिंग और मनोरंजन क्षेत्र की कंपनी Accel Entertainment ने अमेरिका के नेवादा राज्य में अपने कारोबार का विस्तार किया है। कंपनी की सहायक इकाई Century Gaming Technologies Nevada ने Green Valley Grocery Convenience Stores के साथ नया रूट एग्रीमेंट (Route Agreement) किया है। इस समझौते के तहत दक्षिणी नेवादा में करीब 600 नए इलेक्ट्रॉनिक गेमिंग टर्मिनल लगाए जाएंगे।
हालांकि, कंपनी ने इस सौदे की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।
यह समझौता Anabi Oil के स्वामित्व और संचालन वाले सभी सक्रिय Green Valley Grocery स्टोर्स को कवर करेगा। वर्ष 2026 में Accel Entertainment और Anabi Oil के बीच यह दूसरा बड़ा समझौता है।
इससे पहले जनवरी 2026 में दोनों कंपनियों के बीच हुए एक समझौते के तहत Accel Entertainment को Anabi Oil के Rebel Convenience Store नेटवर्क के लिए गेमिंग पार्टनर बनाया गया था।
कंपनी का कहना है कि नए समझौते के जरिए वह अपने गेमिंग संचालन, गेम्स की बेहतर रेंज, डेटा एनालिटिक्स और प्रमोशनल सिस्टम का इस्तेमाल कर ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाएगी और स्टोर्स की परिचालन क्षमता भी बढ़ाएगी।
कंपनी के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 तक नेवादा में उसके नेटवर्क में 525 से अधिक स्थान शामिल हैं, जहां 4,000 से ज्यादा गेमिंग टर्मिनल संचालित किए जा रहे हैं। नए समझौते के बाद इसमें करीब 600 और टर्मिनल जुड़ जाएंगे, जिससे कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होगी।
Accel Entertainment के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एंडी रुबिनस्टीन ने कहा कि यह समझौता नेवादा में कंपनी के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि अब कंपनी दक्षिणी नेवादा में Anabi Oil से जुड़े सभी प्रमुख स्थानों पर अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रही है। उनके मुताबिक, यह नेटवर्क कंपनी की भविष्य की विकास रणनीति का अहम हिस्सा है और इसमें आगे भी निवेश किया जाएगा।
वहीं, Anabi Oil के CEO सैम अनाबी ने कहा कि Rebel Convenience Store में Accel Entertainment के प्लेटफॉर्म और टीम का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। इसी अनुभव के आधार पर कंपनी ने अब Green Valley Grocery स्टोर्स के लिए भी इस साझेदारी का विस्तार करने का फैसला किया है।
इस नए समझौते से Accel Entertainment को नेवादा के गेमिंग बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य में कारोबार बढ़ाने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
हॉलीवुड की दो बड़ी मीडिया कंपनियों Warner Bros. Discovery और Paramount Skydance के बीच प्रस्तावित 110 अरब डॉलर के विलय पर कानूनी विवाद गहरा गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हॉलीवुड की दो बड़ी मीडिया कंपनियों Warner Bros. Discovery और Paramount Skydance के बीच प्रस्तावित 110 अरब डॉलर के विलय पर कानूनी विवाद गहरा गया है। अमेरिका की एक संघीय अदालत अब यह तय करेगी कि इस डील पर फिलहाल अस्थायी रोक लगाई जाए या नहीं। इस मामले में अदालत 22 जुलाई तक अपना फैसला सुना सकती है।
कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित अमेरिकी जिला अदालत में सुनवाई के बाद जज अरासेली मार्टिनेज-ओल्गुइन ने कहा कि वह जल्द ही यह फैसला देंगी कि कंपनियों के विलय की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक (Temporary Restraining Order-TRO) लगाई जाए या नहीं। यदि अदालत रोक लगाने का आदेश देती है, तो मुख्य मामले का फैसला आने तक दोनों कंपनियां विलय की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पाएंगी।
इस डील के खिलाफ कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बॉन्टा की अगुवाई में 12 राज्यों के अटॉर्नी जनरल अदालत पहुंचे हैं। उनका कहना है कि इस विलय से हॉलीवुड में प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी और इसका सीधा असर फिल्म निर्माण, टीवी इंडस्ट्री, केबल ऑपरेटरों और दर्शकों पर पड़ेगा।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि यह सौदा पूरा हो जाता है तो हॉलीवुड के पांच प्रमुख फिल्म स्टूडियो में से दो एक ही कंपनी के नियंत्रण में आ जाएंगे। इसके अलावा 50 से अधिक केबल टीवी चैनल भी एक ही समूह के अधीन होंगे। उनका कहना है कि इससे नई कंपनी का बाजार पर दबदबा काफी बढ़ जाएगा, जिससे कंटेंट की कीमतें बढ़ सकती हैं, विकल्प कम हो सकते हैं और प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
वहीं, दोनों कंपनियों का कहना है कि मीडिया इंडस्ट्री तेजी से बदल रही है और Netflix जैसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स से मुकाबला करने के लिए यह विलय जरूरी है। उनका तर्क है कि पारंपरिक केबल टीवी कारोबार लगातार दबाव में है और ऐसे माहौल में मजबूत और प्रतिस्पर्धी मीडिया समूह बनाना समय की जरूरत है।
Warner Bros. Discovery के पास CNN, TNT, Turner Classic Movies और HBO Max जैसे बड़े ब्रांड हैं, जबकि Paramount Skydance के पास CBS और Paramount+ जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। दोनों का मानना है कि एक साथ आने से वे वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
इस डील का विरोध सिर्फ राज्य सरकारें ही नहीं कर रही हैं। Writers Guild of America (WGA) की पूर्वी और पश्चिमी शाखाओं ने भी अलग मुकदमा दायर कर विलय पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे मनोरंजन उद्योग में प्रतिस्पर्धा और रचनात्मक माहौल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
हालांकि अदालत का आगामी फैसला इस विलय पर अंतिम निर्णय नहीं होगा, लेकिन यह जरूर तय करेगा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक दोनों कंपनियां इस सौदे को आगे बढ़ा सकती हैं या नहीं। यदि अदालत अस्थायी रोक लगा देती है, तो यह हॉलीवुड के हाल के वर्षों की सबसे बड़ी मीडिया डील के लिए पहली बड़ी कानूनी बाधा मानी जाएगी।
यूरोपीय न्यायालय ने कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने 'OpenAI' नाम को ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत (रजिस्टर) कराने की मांग की थी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
चैटबॉट ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI को यूरोप में बड़ा कानूनी झटका लगा है। यूरोपीय न्यायालय (European Court of Justice) ने कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने 'OpenAI' नाम को ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत (रजिस्टर) कराने की मांग की थी।
दरअसल, OpenAI ने यूरोपियन यूनियन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (EUIPO) के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी के लोगो को तो ट्रेडमार्क सुरक्षा दी गई थी, लेकिन 'OpenAI' नाम को ट्रेडमार्क के तौर पर मान्यता देने से इनकार कर दिया गया था।
EUIPO का कहना था कि 'Open' और 'AI' दोनों ही अंग्रेजी के सामान्य शब्द हैं। इन दोनों को मिलाकर बना 'OpenAI' नाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कई तरह के उत्पादों और सेवाओं का सामान्य वर्णन कर सकता है। इसलिए इसे किसी एक कंपनी के लिए विशेष ट्रेडमार्क नहीं बनाया जा सकता।
यूरोपीय संघ के नियमों के अनुसार, ऐसे शब्द या नाम जो किसी उत्पाद या सेवा का सामान्य विवरण देते हों, उन्हें ट्रेडमार्क नहीं बनाया जा सकता। ऐसा करने से दूसरी कंपनियां उन सामान्य शब्दों का इस्तेमाल अपने उत्पादों या विज्ञापनों में नहीं कर पाएंगी।
हालांकि, नियमों में उन कंपनियों को छूट मिल सकती है, जो यह साबित कर दें कि उन्होंने लंबे समय से उस नाम का इस्तेमाल किया है और वह नाम उनकी पहचान बन चुका है। लेकिन OpenAI इस मामले में अधिकारियों को संतुष्ट नहीं कर सकी।
इससे पहले भी OpenAI की अपील EUIPO ने खारिज कर दी थी। अब यूरोपीय न्यायालय ने भी उसी फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि 'OpenAI' नाम इतना विशिष्ट (Distinctive) नहीं है कि उसे ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत किया जा सके।