यूरोपीय यूनियन (EU) की सर्वोच्च अदालत ने Google को बड़ा कानूनी झटका दिया है।
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यूरोपीय यूनियन (EU) की सर्वोच्च अदालत ने Google को बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने कहा है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हर मामले में खुद को सिर्फ "मध्यस्थ" (Intermediary) बताकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। यह फैसला इटली में YouTube पर जुए (Gambling) से जुड़े विज्ञापनों के मामले में Google पर लगाए गए 7.5 लाख यूरो (€750,000) के जुर्माने को चुनौती देने वाली याचिका पर आया है।
यूरोपीय संघ की सर्वोच्च अदालत कोर्ट ऑफ जस्टिस ऑफ द यूरोपियन यूनियन (CJEU) ने Google की दलीलों को खारिज कर दिया। अब यह मामला दोबारा इटली की अदालत में जाएगा, जो EU अदालत की कानूनी व्याख्या के आधार पर तय करेगी कि Google पर लगाया गया जुर्माना बरकरार रहेगा या नहीं।
यह मामला YouTube पर एक कंटेंट क्रिएटर द्वारा अपलोड किए गए जुए से जुड़े वीडियो से जुड़ा है। यह क्रिएटर Google के साथ एक कमर्शियल पार्टनरशिप प्रोग्राम का हिस्सा था। Google का कहना था कि वीडियो किसी तीसरे पक्ष ने अपलोड किए थे, इसलिए यूरोपीय कानून के तहत उसे उनकी सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
लेकिन अदालत ने इस दलील से सहमति नहीं जताई। कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत "इंटरमीडियरी प्रोटेक्शन" केवल उन प्लेटफॉर्म्स को मिलता है जो सिर्फ तकनीकी और निष्पक्ष होस्टिंग की भूमिका निभाते हैं तथा कंटेंट पर उनका कोई नियंत्रण या जानकारी नहीं होती।
अदालत ने यह भी कहा कि अगर कोई प्लेटफॉर्म किसी क्रिएटर के चैनल, वीडियो और अन्य जानकारियों की समीक्षा करने के बाद उसके साथ व्यावसायिक साझेदारी करता है, तो उसकी भूमिका केवल कंटेंट होस्ट करने तक सीमित नहीं रहती। ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म पर अधिक जिम्मेदारी भी आ सकती है।
इसी आधार पर अदालत ने कहा कि इस मामले में Google अपने आप इंटरमीडियरी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता। अब इटली की प्रशासनिक अदालत यह तय करेगी कि Google पर लगाया गया 7.5 लाख यूरो का जुर्माना सही है या नहीं।
इस फैसले को सिर्फ Google तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसका असर उन सभी बड़ी टेक कंपनियों पर पड़ सकता है, जो क्रिएटर्स के साथ पार्टनरशिप प्रोग्राम चलाकर उनके कंटेंट से कमाई करती हैं। अदालत के इस फैसले से संकेत मिलता है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म क्रिएटर्स के साथ व्यावसायिक रूप से अधिक जुड़ा हुआ है, तो उसे राष्ट्रीय विज्ञापन नियमों के तहत ज्यादा जवाबदेही भी उठानी पड़ सकती है।
फैसले के सार्वजनिक होने तक Google की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई थी।
यूरोपीय न्यायालय ने कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने 'OpenAI' नाम को ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत (रजिस्टर) कराने की मांग की थी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
चैटबॉट ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI को यूरोप में बड़ा कानूनी झटका लगा है। यूरोपीय न्यायालय (European Court of Justice) ने कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने 'OpenAI' नाम को ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत (रजिस्टर) कराने की मांग की थी।
दरअसल, OpenAI ने यूरोपियन यूनियन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (EUIPO) के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कंपनी के लोगो को तो ट्रेडमार्क सुरक्षा दी गई थी, लेकिन 'OpenAI' नाम को ट्रेडमार्क के तौर पर मान्यता देने से इनकार कर दिया गया था।
EUIPO का कहना था कि 'Open' और 'AI' दोनों ही अंग्रेजी के सामान्य शब्द हैं। इन दोनों को मिलाकर बना 'OpenAI' नाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कई तरह के उत्पादों और सेवाओं का सामान्य वर्णन कर सकता है। इसलिए इसे किसी एक कंपनी के लिए विशेष ट्रेडमार्क नहीं बनाया जा सकता।
यूरोपीय संघ के नियमों के अनुसार, ऐसे शब्द या नाम जो किसी उत्पाद या सेवा का सामान्य विवरण देते हों, उन्हें ट्रेडमार्क नहीं बनाया जा सकता। ऐसा करने से दूसरी कंपनियां उन सामान्य शब्दों का इस्तेमाल अपने उत्पादों या विज्ञापनों में नहीं कर पाएंगी।
हालांकि, नियमों में उन कंपनियों को छूट मिल सकती है, जो यह साबित कर दें कि उन्होंने लंबे समय से उस नाम का इस्तेमाल किया है और वह नाम उनकी पहचान बन चुका है। लेकिन OpenAI इस मामले में अधिकारियों को संतुष्ट नहीं कर सकी।
इससे पहले भी OpenAI की अपील EUIPO ने खारिज कर दी थी। अब यूरोपीय न्यायालय ने भी उसी फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि 'OpenAI' नाम इतना विशिष्ट (Distinctive) नहीं है कि उसे ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत किया जा सके।
हॉलीवुड की चर्चित फिल्म फ्रेंचाइजी 'The Hunger Games', 'John Wick' और 'Twilight' के लिए मशहूर Lionsgate Studios को खरीदने में यूरोप की दो बड़ी मीडिया कंपनियों Banijay और Mediawan ने दिलचस्पी दिखाई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हॉलीवुड की चर्चित फिल्म फ्रेंचाइजी 'The Hunger Games', 'John Wick' और 'Twilight' के लिए मशहूर Lionsgate Studios को खरीदने में यूरोप की दो बड़ी मीडिया कंपनियों Banijay और Mediawan ने दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन कहा जा रहा है कि कंपनी स्वतंत्र (Independent) बने रहने का विकल्प भी चुन सकती है।
रॉयटर्स और वैरायटी (Variety) की रिपोर्ट के मुताबिक, Lionsgate Studios ने संभावित खरीद प्रस्तावों की समीक्षा के लिए एक निवेश बैंक को नियुक्त किया है। फिलहाल बातचीत शुरुआती दौर में है और किसी भी सौदे की कोई गारंटी नहीं है।
पहले ऐसी खबरें थीं कि फ्रांस का Bolloré Group, जिसके पास Canal+ में नियंत्रण हिस्सेदारी है, भी इस दौड़ में शामिल है। लेकिन Variety की रिपोर्ट के मुताबिक, Bolloré फिलहाल Lionsgate के लिए कोई बोली नहीं लगा रहा है।
Banijay की क्यों है दिलचस्पी?
Banijay, जिसने 'Big Brother' और 'Survivor' जैसे लोकप्रिय टीवी शो बनाए हैं, Lionsgate को खरीदने पर विचार कर रही है। हालांकि कंपनी ने हाल ही में All3Media के साथ विलय किया है, इसलिए माना जा रहा है कि वह औपचारिक प्रस्ताव देने में कुछ समय ले सकती है।
अगर यह सौदा होता है तो Banijay को पहली बार बड़े पैमाने पर हॉलीवुड फिल्मों और टीवी कंटेंट की मजबूत लाइब्रेरी मिल जाएगी। फिलहाल कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से रियलिटी और नॉन-स्क्रिप्टेड शो पर आधारित है।
Mediawan भी बना रही रणनीति
फ्रांस की मीडिया कंपनी Mediawan भी Lionsgate में रुचि दिखा रही है। पिछले कुछ वर्षों में Mediawan ने अंग्रेजी भाषा के बाजार में तेजी से विस्तार किया है। कंपनी पहले ही Plan B, See-Saw Films और हाल ही में North Road का अधिग्रहण कर चुकी है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि Lionsgate की खरीद Mediawan के लिए हॉलीवुड में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
Lionsgate की सबसे बड़ी ताकत उसकी लाइब्रेरी
Lionsgate के पास करीब 20,000 फिल्मों और टीवी कंटेंट की लाइब्रेरी है।
कंपनी की सबसे बड़ी पहचान 'John Wick', 'The Hunger Games' और 'Twilight' जैसी सफल फ्रेंचाइजी हैं। इसके अलावा हाल ही में रिलीज हुई माइकल जैक्सन की बायोपिक 'Michael' का वितरण भी Lionsgate ने किया था। इस फिल्म ने दुनियाभर में 1 अरब डॉलर से अधिक की कमाई की है।
कीमत बनी सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि Lionsgate की ऊंची वैल्यूएशन संभावित खरीदारों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के शेयर फिलहाल अनुमानित प्री-टैक्स मुनाफे के मुकाबले करीब 26 गुना वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं, जो दूसरे स्टूडियो की तुलना में काफी ज्यादा है। बताया जा रहा है कि पहले भी कुछ संभावित खरीदार सिर्फ ऊंची कीमत की वजह से पीछे हट चुके हैं।
बड़े शेयरधारक ने बदली हिस्सेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, Lionsgate के निदेशक और बड़े शेयरधारक मार्क राचेस्की ने इस महीने अपनी करीब 10% हिस्सेदारी को एक नए निवेश फंड में स्थानांतरित कर दिया है। इस फंड को RenWave Kore का समर्थन प्राप्त है, जिसकी स्थापना 2024 में कोडी किटल ने की थी। कोडी पहले Elliott Investment Management में पोर्टफोलियो मैनेजर रह चुके हैं।
हालांकि इस कदम का संभावित अधिग्रहण से सीधा संबंध है या नहीं, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
किसी कंपनी ने नहीं की टिप्पणी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Lionsgate और Banijay ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं Mediawan ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि Lionsgate का अधिग्रहण किस कंपनी के हाथों होगा या कंपनी स्वतंत्र रूप से अपना कारोबार जारी रखेगी। लेकिन यूरोप की बड़ी मीडिया कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी यह जरूर दिखाती है कि हॉलीवुड के मजबूत कंटेंट और लोकप्रिय फ्रेंचाइजी आज भी वैश्विक मीडिया कंपनियों के लिए बड़ी रणनीतिक संपत्ति बने हुए हैं।
अमेरिका के कैलिफोर्निया समेत 12 राज्यों ने 'पैरामाउंट' (Paramount) की 110 अरब डॉलर में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के अधिग्रहण को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका के कैलिफोर्निया समेत 12 राज्यों ने 'पैरामाउंट' (Paramount) की 110 अरब डॉलर में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) के अधिग्रहण (Acquisition) को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। राज्यों का आरोप है कि यह सौदा फिल्म वितरण और केबल टीवी बाजार में प्रतिस्पर्धा को कम करेगा, जिससे सिनेमाघरों, पे-टीवी कंपनियों और उपभोक्ताओं को नुकसान होगा।
यह मुकदमा Paramount के सीईओ डेविड एलिसन की उस बड़ी योजना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसके तहत वह कंपनी को Netflix और Disney जैसी दिग्गज कंपनियों की मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनाना चाहते हैं।
कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बॉन्टा ने कहा कि यह मुकदमा निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी बाजार को बचाने के लिए दायर किया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था में किसी एक कंपनी का दबदबा नहीं होना चाहिए।
मुकदमे में दावा किया गया है कि यदि यह सौदा पूरा हो जाता है, तो Paramount अमेरिका में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों के वितरण बाजार का करीब 27 प्रतिशत हिस्सा अपने नियंत्रण में ले लेगी। इसके अलावा, ब्लॉकबस्टर फिल्मों के वितरण में उसकी हिस्सेदारी 30 प्रतिशत और बेसिक केबल चैनलों के बाजार में लगभग 27 प्रतिशत हो जाएगी।
मामले पर अदालत का फैसला आने में कई महीने लग सकते हैं। इससे इस डील में देरी होगी और Paramount को करोड़ों डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।
इस प्रस्तावित विलय का विरोध सिर्फ राज्यों ने ही नहीं किया है, बल्कि अभिनेता, लेखक और मनोरंजन उद्योग से जुड़े कई लोगों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस सौदे से नौकरियों पर असर पड़ सकता है। वहीं, थिएटर मालिकों का मानना है कि Warner Bros. और Paramount Pictures के एक साथ आने से फिल्मों की संख्या कम हो सकती है।
हालांकि Paramount का कहना है कि यह अधिग्रहण कंपनी को पहले से ज्यादा फिल्में बनाने में मदद करेगा। कंपनी का दावा है कि अनावश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, मार्केटिंग और कॉर्पोरेट खर्चों में करीब 6 अरब डॉलर की कटौती के बाद वह हर साल 30 फिल्में रिलीज करने की योजना बना रही है।
अमेरिकी न्याय विभाग (U.S. Department of Justice) पहले ही इस सौदे को मंजूरी दे चुका है और उसका कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, Paramount के सीईओ डेविड एलिसन के पिता और Oracle के सह-संस्थापक लैरी एलिसन के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से करीबी संबंध रहे हैं। कंपनी ने ट्रंप प्रशासन के कुछ पूर्व अधिकारियों को भी नियुक्त किया है।
अगर यह डील अक्टूबर से पहले पूरी नहीं हो पाती है, तो Paramount को Warner Bros. Discovery के शेयरधारकों को हर तिमाही करीब 65 करोड़ डॉलर (650 मिलियन डॉलर) का भुगतान करना होगा। कंपनी ने यह भी कहा है कि ज्यादा देरी होने पर डील की फाइनेंसिंग दोबारा तय करनी पड़ सकती है, शेयर कीमतों पर असर पड़ सकता है और सौदा रद्द होने की नौबत भी आ सकती है।
यूरोपीय यूनियन (EU) बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित नुकसान से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यूरोपीय यूनियन (EU) बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित नुकसान से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। यूरोपीय कमीशन (European Commission) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर उम्र के आधार पर प्रतिबंध लगाने वाला नया कानून लाया जाएगा।
यह घोषणा ऑनलाइन बाल सुरक्षा पर विशेषज्ञों की एक रिपोर्ट आने के बाद की गई है। रिपोर्ट में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और इसी तरह के अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यह सवाल नहीं है कि बच्चे सोशल मीडिया तक पहुंच सकते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि सोशल मीडिया बच्चों तक कब और कैसे पहुंचता है। उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म ऐसे एल्गोरिदम का इस्तेमाल करते हैं, जो बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखते हैं और यह उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने बताया कि यूरोपीय कमीशन इस साल शरद ऋतु (Autumn) में इस संबंध में कानून का मसौदा पेश करेगा। हालांकि उन्होंने न्यूनतम उम्र तय नहीं की, लेकिन विशेषज्ञों की उम्र के हिसाब से चरणबद्ध इंटरनेट उपयोग की सिफारिश को काफी प्रभावी बताया।
विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया है कि 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं, बल्कि वीडियो गेम, AI चैटबॉट और ऐसे अन्य प्लेटफॉर्म, जिनमें सोशल मीडिया जैसी सुविधाएं हों, उन पर भी प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही सदस्य देशों को जरूरत पड़ने पर इससे भी सख्त नियम बनाने का अधिकार देने की बात कही गई है।
यूरोप के कम से कम 10 देशों ने पहले ही बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की योजना की घोषणा कर दी है। फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की तैयारी कर रहा है, जबकि स्पेन 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध चाहता है। ग्रीस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
वहीं, ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बन चुका है जिसने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Facebook, Instagram, YouTube, TikTok, Snapchat और X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया है।
यूरोपीय कमीशन का कहना है कि इंटरनेट को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाना सिर्फ माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। जिस तरह कार कंपनियां सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट और एयरबैग देती हैं, उसी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
इसी बीच यूरोपीय कमीशन ने Meta और TikTok के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। आयोग का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स के कुछ फीचर, जैसे इनफिनिट स्क्रॉल, ऑटो-प्ले वीडियो, लगातार आने वाले नोटिफिकेशन और अत्यधिक निजीकरण वाले एल्गोरिदम, बच्चों और किशोरों में लत लगाने जैसी प्रवृत्ति पैदा करते हैं। हालांकि दोनों कंपनियों ने इन आरोपों से इनकार किया है और मामले की जांच जारी है।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट में छोटे बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर भी सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार तीन साल से कम उम्र के बच्चों को वीडियो कॉल या परिवार की तस्वीरें देखने जैसी सीमित परिस्थितियों को छोड़कर स्क्रीन से दूर रखना चाहिए। वहीं, तीन से 12 साल तक के बच्चों को इंटरनेट का इस्तेमाल माता-पिता या शिक्षक की निगरानी में और सीमित समय के लिए करना चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 13 से 15 साल की उम्र मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे संवेदनशील होती है। इस दौरान सोशल मीडिया पर तुलना, लाइक और कमेंट जैसी चीजें बच्चों के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
अब यूरोपीय कमीशन के प्रस्तावित कानून को लागू होने से पहले यूरोपीय संसद और सदस्य देशों की मंजूरी लेनी होगी। अगर यह कानून पारित होता है, तो बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के क्षेत्र में यह दुनिया के सबसे बड़े और सख्त कदमों में से एक माना जाएगा।
मंत्रिपरिषद के 8 जुलाई के फैसले के तहत अर्जुन घिमिरे को नेपाल टेलीकम्युनिकेशंस अथॉरिटी (NTA) का चेयरपर्सन और उमेश श्रेष्ठ को प्रेस काउंसिल नेपाल का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नेपाल सरकार ने सूचना और संचार क्षेत्र में दो अहम नियुक्तियां की हैं। मंत्रिपरिषद के 8 जुलाई के फैसले के तहत अर्जुन घिमिरे को नेपाल टेलीकम्युनिकेशंस अथॉरिटी (NTA) का चेयरपर्सन और उमेश श्रेष्ठ को प्रेस काउंसिल नेपाल का चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
सोमवार को सूचना एवं संचार मंत्री डॉ. बिक्रम तिमिल्सिना ने दोनों अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान उन्होंने दोनों को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी और निष्पक्ष, पारदर्शी तथा परिणाम-आधारित तरीके से काम करने का निर्देश दिया।
डॉ. तिमिल्सिना ने कहा कि दोनों अधिकारियों का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए किया गया है। चयन समिति को भरोसा था कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि सूचना और संचार क्षेत्र के नियामक संस्थानों के प्रमुख के रूप में दोनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
मंत्री ने कहा कि मीडिया क्षेत्र को अधिक जिम्मेदार, गरिमापूर्ण और प्रभावी बनाने में प्रेस काउंसिल की अहम भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में गलत सूचना (Misinformation) और भ्रामक सूचना (Disinformation) मीडिया के सामने बड़ी चुनौती हैं, जिनकी पहचान कर उनसे प्रभावी ढंग से निपटने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी बताया कि नेपाल सरकार पुराने मीडिया कानूनों में बदलाव की दिशा में काम कर रही है। मीडिया काउंसिल विधेयक और मास मीडिया विधेयक के मसौदों पर चर्चा भी आगे बढ़ चुकी है।
दूरसंचार क्षेत्र को लेकर डॉ. तिमिल्सिना ने कहा कि नागरिकों के हित और बेहतर सेवाओं को केंद्र में रखते हुए अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार आवश्यक नीतिगत और संस्थागत सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
नवनियुक्त प्रेस काउंसिल चेयरमैन उमेश श्रेष्ठ ने कहा कि मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल चुका है, लेकिन प्रेस काउंसिल से जुड़े कानून पुराने हो गए हैं। ऐसे में समय के अनुसार उनमें संशोधन किया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता पत्रकार आचार संहिता को प्रभावी ढंग से लागू करना और पत्रकारिता में स्व-नियमन (Self-Regulation) की व्यवस्था को और मजबूत बनाना होगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए प्रेस काउंसिल सक्रिय भूमिका निभाएगी और सरकार तथा मीडिया के बीच भरोसे का मजबूत सेतु बनेगी।
वहीं, नेपाल टेलीकम्युनिकेशंस अथॉरिटी के नए चेयरपर्सन अर्जुन घिमिरे ने दूरसंचार क्षेत्र की मौजूदा कमियों को दूर करने और समस्याओं का समाधान करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य नागरिक-केंद्रित, जवाबदेह और प्रभावी दूरसंचार व्यवस्था विकसित करना है।
घिमिरे ने कहा कि वे संचार मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर बेहतर गुणवत्ता वाली और उपभोक्ता-अनुकूल दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेंगे।
अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स', 'न्यूयॉर्क डेली न्यूज' समेत कई समाचार संस्थानों ने OpenAI के खिलाफ संघीय अदालत में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (The New York Times), 'न्यूयॉर्क डेली न्यूज' (New York Daily News) समेत कई समाचार संस्थानों ने OpenAI के खिलाफ संघीय अदालत में सख्त कार्रवाई की मांग की है। अखबारों का आरोप है कि OpenAI ने अदालत को यह कहकर गुमराह किया कि वह अपने AI सिस्टम में मौजूद कॉपीराइट वाले समाचारों को खोज नहीं सकता, जबकि कंपनी पहले ही ऐसा कर चुकी थी।
मैनहैटन की संघीय अदालत में गुरुवार को दाखिल याचिका में समाचार संस्थानों ने कहा कि OpenAI ने गलत दावा किया था कि वह अपने बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) और ट्रेनिंग डेटासेट में उनके लेखों की प्रतियां खोजने में सक्षम नहीं है। जबकि पहला मुकदमा दायर होने से पहले ही कंपनी कई बार ऐसी खोज कर चुकी थी।
अखबारों ने यह भी आरोप लगाया कि OpenAI ने ChatGPT की अरबों बातचीत (Chat Logs) को या तो हटा दिया या फिर उन्हें इस तरह बदल दिया कि उनकी खोज संभव न रहे। उनका कहना है कि इससे मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत प्रभावित हुए हैं। उन्होंने अदालत से OpenAI पर जुर्माना लगाने, कानूनी खर्च दिलाने और यह मानने की मांग की है कि ChatGPT के रिकॉर्ड इस बात का प्रमाण हैं कि कंपनी ने उनके कॉपीराइट वाले समाचारों का इस्तेमाल किया।
याचिका में कहा गया है कि यह पूरा विवाद कॉपीराइट सामग्री की नकल (Copying) से जुड़ा है। समाचार संस्थानों का दावा है कि उनके लेखों के इस्तेमाल के सबूत OpenAI के ट्रेनिंग डेटासेट और ChatGPT के आउटपुट लॉग में मौजूद हैं।
अखबारों का यह भी आरोप है कि OpenAI के रवैये की वजह से मामले की सुनवाई में देरी हुई और उन्हें यह समझने का पूरा मौका नहीं मिला कि कंपनी किस हद तक उनके समाचारों को स्क्रैप करती है, AI मॉडल को ट्रेन करती है और फिर उसी सामग्री का आउटपुट देती है।
याचिका के मुताबिक, OpenAI ने 2024 में अदालत से कहा था कि उसके पास अपने ट्रेनिंग डेटासेट को प्रभावी ढंग से खोजने का कोई टूल नहीं है। इसके बाद 2025 में कंपनी ने यह भी कहा कि ChatGPT के बड़े पैमाने पर मौजूद आउटपुट लॉग में खोज करने की कोई व्यवस्था उसके सिस्टम में नहीं है और ऐसा सिस्टम बनाना काफी मुश्किल होगा।
हालांकि, अखबारों का कहना है कि बाद में OpenAI के एक कर्मचारी ने गवाही में स्वीकार किया कि कंपनी ने समाचार संस्थानों की सामग्री को लेकर कई बार खोज की थी। उनका कहना है कि यह बयान OpenAI के पहले दिए गए दावों के बिल्कुल विपरीत है।
वहीं OpenAI ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी के प्रवक्ता ड्रू पुसाटेरी (Drew Pusateri) ने रॉयटर्स से कहा कि जैसे-जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स का मामला कमजोर पड़ रहा है और उसे अपने कुछ दावे वापस लेने पड़े हैं, वैसे-वैसे वह ऐसे झूठे आरोप लगाकर उन लोगों की निजता में दखल देने की कोशिश कर रहा है जिनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
गौरतलब है कि पिछले महीने द न्यूयॉर्क टाइम्स ने संशोधित शिकायत में OpenAI के खिलाफ लगाया गया एक अतिरिक्त कॉपीराइट उल्लंघन का दावा वापस ले लिया था।
यह मुकदमा सबसे पहले वर्ष 2023 में दायर किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया है कि OpenAI और उसके सबसे बड़े वित्तीय साझेदार Microsoft ने ChatGPT के AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए बिना अनुमति लाखों समाचार लेखों का इस्तेमाल किया।
यह मामला उन कई कॉपीराइट मुकदमों में से एक है, जो लेखकों, प्रकाशकों, कलाकारों और संगीत कंपनियों ने OpenAI, Anthropic और Meta जैसी AI कंपनियों के खिलाफ दायर किए हैं। इन सभी मामलों में आरोप है कि AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए कॉपीराइट सामग्री का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया।
द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुख्य वकील इयान क्रॉस्बी (Ian Crosby) ने आरोप लगाया कि OpenAI ने पूरे मामले के दौरान अपनी क्षमताओं के बारे में गलत जानकारी दी। वहीं न्यूयॉर्क डेली न्यूज के वकील स्टीवन लीबरमैन (Steven Lieberman) ने कहा कि अदालत से की गई यह मांग OpenAI को उन सबूतों को छिपाने और नष्ट करने के लिए दंडित करने के उद्देश्य से की गई है, जिनसे यह पता चल सकता है कि ChatGPT को कथित तौर पर चोरी की गई पत्रकारिता सामग्री से प्रशिक्षित किया गया।
OpenAI पहले भी यह दलील दे चुका है कि ChatGPT की बातचीत के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने से उसके उपयोगकर्ताओं की निजता प्रभावित हो सकती है।
दुनिया के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान The New York Times ने अपनी प्रसिद्ध लाइफस्टाइल, फैशन और संस्कृति पर आधारित T Magazine के लिए नई एडिटर-इन-चीफ की घोषणा कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान The New York Times ने अपनी प्रसिद्ध लाइफस्टाइल, फैशन और संस्कृति पर आधारित T Magazine के लिए नई एडिटर-इन-चीफ की घोषणा कर दी है। अब इस जिम्मेदारी को अनुभवी मैगजीन एडिटर और क्रिएटिव लीडर जोडी क्वॉन (Jody Quon) संभालेंगी।
कंपनी ने कहा कि 20 साल से अधिक समय से T Magazine फैशन, कला, साहित्य और संस्कृति की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। ऐसे में मैगजीन के अगले प्रमुख के रूप में ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी, जो इसकी विरासत को आगे बढ़ा सके। कंपनी का मानना है कि जोडी क्वॉन इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त हैं।
न्यूयॉर्क मैगजीन में निभाई अहम भूमिका
जोडी क्वॉन ने करीब दो दशक तक New York Magazine में काम किया। इस दौरान उन्होंने कई चर्चित और पुरस्कार विजेता कवर स्टोरी और विजुअल प्रोजेक्ट तैयार किए। उनकी पहचान ऐसे क्रिएटिव कामों के लिए रही है, जिन्होंने पत्रकारिता में नए मानक स्थापित किए।
पहले भी रह चुकी हैं The New York Times का हिस्सा
यह जोडी क्वॉन की The New York Times में वापसी भी है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने यहीं फैशन सेक्शन में फोटो रिसर्चर के रूप में की थी। बाद में वह The New York Times Magazine में डिप्टी फोटो एडिटर बनीं और एक दशक से ज्यादा समय तक संस्थान के साथ जुड़ी रहीं।
कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुकी हैं
अपने लंबे करियर में जोडी क्वॉन के नेतृत्व में तैयार किए गए विजुअल प्रोजेक्ट्स को कई बड़े सम्मान मिले हैं। इनमें Robert F. Kennedy Journalism Award, George Polk Award और कई National Magazine Awards शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें फोटोग्राफी और मैगजीन डिजाइन के लिए भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
हाल ही में उनके नेतृत्व में प्रकाशित फोटोग्राफी प्रोजेक्ट को 2026 National Magazine Award for Photography भी मिला।
पहली बार विजुअल आर्ट्स बैकग्राउंड वाला एडिटर
The New York Times ने कहा कि T Magazine के इतिहास में यह पहली बार होगा, जब विजुअल आर्ट्स की मजबूत पृष्ठभूमि वाला कोई व्यक्ति एडिटर-इन-चीफ बनेगा। कंपनी को उम्मीद है कि जोडी क्वॉन की रचनात्मक सोच और विजुअल स्टोरीटेलिंग का अनुभव मैगजीन को नई दिशा देगा।
कंपनी ने यह भी कहा कि जोडी फैशन, कला, साहित्य और संगीत जैसी दुनिया को आकर्षक और प्रेरणादायक अंदाज में पाठकों के सामने पेश करने की खास क्षमता रखती हैं। उनके नेतृत्व में T Magazine अपने पाठकों को पहले से अधिक समृद्ध और अलग अनुभव देने का प्रयास करेगी।
The New York Times ने जोडी क्वॉन का स्वागत करते हुए विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में T Magazine अपनी मजबूत पहचान को और आगे बढ़ाएगी।
इस बदलाव के साथ चैनल के कंटेंट में भी बड़ा विस्तार किया जाएगा। अब बच्चों और परिवार के कार्यक्रमों के साथ-साथ वयस्क दर्शकों के लिए भी अधिक शो और सीरीज दिखाई जाएंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
'द वॉल्ट डिज्नी' कंपनी ने जर्मनी, ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड (DACH) में अपने फ्री-टू-एयर Disney Channel का नाम बदलकर Disney TV करने का फैसला किया है। इस बदलाव के साथ चैनल के कंटेंट में भी बड़ा विस्तार किया जाएगा। अब बच्चों और परिवार के कार्यक्रमों के साथ-साथ वयस्क दर्शकों के लिए भी अधिक शो और सीरीज दिखाई जाएंगी।
कंपनी के मुताबिक, नए Disney TV पर एनिमेशन, लाइव-एक्शन सीरीज, फैमिली एंटरटेनमेंट, ड्रामा, डॉक्यूमेंट्री के अलावा FX, Marvel Studios और Star Wars से जुड़े लोकप्रिय कंटेंट भी शामिल किए जाएंगे। हालांकि बच्चों के लिए खास प्रोग्रामिंग ब्लॉक और फैमिली फिल्में पहले की तरह चैनल का अहम हिस्सा बनी रहेंगी।
फिलहाल कंपनी ने यह नहीं बताया है कि यह रीब्रैंडिंग कब से लागू होगी। इससे पहले इस साल Disney Channel को Disney+ प्लेटफॉर्म के साथ भी जोड़ दिया गया था, जिससे दर्शक अब इस फ्री-टू-एयर चैनल को स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी देख सकते हैं। इसके अलावा यह चैनल सैटेलाइट, केबल, IPTV और OTT प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध रहेगा।
द वॉल्ट डिज्नी कंपनी में जर्मनी, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया की कंट्री मैनेजर और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर एंड नेटवर्क्स) यून-क्युंग पार्क ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य अपने सभी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों को बेहतरीन और विविधतापूर्ण मनोरंजन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि Disney TV के जरिए वयस्क दर्शकों के लिए कंटेंट बढ़ाया जाएगा, जबकि बच्चों और परिवार के पसंदीदा कार्यक्रम भी पहले की तरह जारी रहेंगे।
कंपनी का कहना है कि इस नई रणनीति से 16 वर्ष और उससे अधिक उम्र के दर्शकों तक पहुंच बढ़ेगी। इससे विज्ञापनदाताओं को अधिक विज्ञापन स्लॉट मिलेंगे और क्रॉस-मीडिया मार्केटिंग के साथ कमाई के नए अवसर भी बनेंगे।
रीब्रैंडिंग के साथ ही Disney+ ने अपनी नई जर्मन भाषा की Hulu Original सीरीज 'Under the Ice' का भी ऐलान किया है। छह एपिसोड वाली यह थ्रिलर सीरीज स्विट्जरलैंड के मैटरहॉर्न क्षेत्र की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसकी कहानी पर्वतीय रेस्क्यू अधिकारी ईव लेनर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक अमीर कारोबारी पॉल वेल्श के लापता होने की जांच करती है। इस सीरीज की शूटिंग जल्द शुरू होने वाली है।
वहीं, कंपनी ने बताया कि 2026 डिज्नी के लिए विज्ञापन कारोबार के लिहाज से भी अहम साल होगा। इस साल के आखिर तक यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका (EMEA) क्षेत्र में कंपनी अपनी नई एड-टेक तकनीक लागू करेगी। इसके तहत Disney+ में Disney Audience Graph को जोड़ा जाएगा, जिससे डेटा आधारित और ज्यादा सटीक विज्ञापन दिखाए जा सकेंगे।
इसके अलावा Dynamic Ad Insertion जैसी नई तकनीक के जरिए लाइव डिजिटल कंटेंट के दौरान भी अधिक प्रभावी तरीके से विज्ञापन दिखाए जा सकेंगे। कंपनी का मानना है कि इससे ब्रैंड्स को Disney+ पर बड़े खेल आयोजनों, जैसे 2026-27 UEFA Women's Champions League, के दौरान विज्ञापन देने के और बेहतर अवसर मिलेंगे।
अमेरिका की मीडिया व टेलीकॉम कंपनी 'कॉमकास्ट' ने घोषणा की है कि वह अपने मीडिया और एंटरटेनमेंट कारोबार NBCUniversal और Sky को अलग कर दो स्वतंत्र, शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) कंपनियां बनाएगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अमेरिका की दिग्गज मीडिया और टेलीकॉम कंपनी 'कॉमकास्ट' (Comcast) ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपने मीडिया और एंटरटेनमेंट कारोबार NBCUniversal और Sky को अलग कर दो स्वतंत्र, शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टेड) कंपनियां बनाएगी।
इस खबर के बाद सोमवार को प्री-मार्केट ट्रेडिंग में Comcast के शेयरों में 20% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली।
कंपनी के मुताबिक, यह बंटवारा करीब एक साल में पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद एक कंपनी के पास Comcast का केबल ब्रॉडबैंड, वायरलेस और बिजनेस सर्विसेज का कारोबार रहेगा, जबकि दूसरी कंपनी के तहत Universal Theme Parks, फिल्म और टीवी स्टूडियो, NBC, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Peacock और यूरोपीय मीडिया बिजनेस Sky आएंगे।
Comcast के चेयरमैन और सह-CEO ब्रायन रॉबर्ट्स ने कहा कि इस फैसले से दोनों कंपनियों को अलग-अलग रणनीति के साथ काम करने और नए कारोबारी अवसरों का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।
कंपनी ने यह भी बताया कि मौजूदा Co-CEO माइक कैवनॉ नई NBCUniversal कंपनी का नेतृत्व करेंगे। वहीं, कंपनी के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) माइकल एंजेलाकिस दोबारा Comcast में लौटेंगे और अलग होने के बाद मुख्य कंपनी के CEO की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस विभाजन के बाद मौजूदा Comcast के शेयरधारकों को दोनों नई कंपनियों के शेयर मिलेंगे। साथ ही Comcast शुरुआत में नई NBCUniversal कंपनी में 19.9% तक हिस्सेदारी अपने पास रखेगी, जिसे वह समय के साथ बेचने की योजना बना रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पारंपरिक टीवी कारोबार लगातार दबाव में है और Netflix जैसी स्ट्रीमिंग कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। वहीं, अमेरिकी मीडिया इंडस्ट्री में बड़े विलय और पुनर्गठन का दौर भी जारी है, जिससे कंपनियां अपने कारोबार को अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश कर रही हैं।
युगांडा के सेना प्रमुख मुहूजी कैनेरुगाबा (Muhoozi Kainerugaba) ने देश के दो बड़े मीडिया संस्थानों को बंद करने का आदेश देने का दावा किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
युगांडा के सेना प्रमुख मुहूजी कैनेरुगाबा (Muhoozi Kainerugaba) ने देश के दो बड़े मीडिया संस्थानों को बंद करने का आदेश देने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि Daily Monitor और NTV Uganda उनकी अनुमति के बिना दोबारा नहीं खुलेंगे।
मुहूजी कैनेरुगाबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें "फ्री प्रेस" पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब से युगांडा से जुड़ी कोई भी नकारात्मक खबर प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उनके कार्यालय की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से देश के सभी मीडिया संस्थानों को इन नियमों का पालन करना होगा।
Daily Monitor और NTV Uganda दोनों Nation Media Group के स्वामित्व में हैं। Daily Monitor ने बताया कि राजधानी कंपाला के नमुवोंगो स्थित कंपनी के मुख्यालय और सेरेना होटल कार्यालय के बाहर भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। कर्मचारियों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को दफ्तर के अंदर जाने या बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, Nation Media Group के स्वामित्व वाले NTV Uganda, Spark TV और उसके अन्य टीवी एवं रेडियो चैनलों का प्रसारण भी रविवार को बंद हो गया।
मुहूजी कैनेरुगाबा ने दावा किया कि उन्हें मीडिया संस्थानों को बंद करने का अधिकार 2017 में उनके पिता और युगांडा के राष्ट्रपति Yoweri Museveni ने दिया था। मुहूजी को राष्ट्रपति का संभावित उत्तराधिकारी भी माना जाता है और वे अपने विवादित सोशल मीडिया बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं।
युगांडा में मीडिया पर कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2013 में सरकार ने Daily Monitor को 10 दिनों के लिए बंद कर दिया था। वहीं 2007 में सरकार की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के बाद NTV Uganda का प्रसारण शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद रोक दिया गया था।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक Uganda People's Defence Forces>, Uganda Police Force और Uganda Communications Commission की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वहीं, National Association of Broadcasters ने इस कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और इस कदम का देश के मीडिया माहौल तथा संविधान में मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है।