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Times Now: नए 'सेनापति' की दौड़ में शामिल हैं ये वरिष्ठ पत्रकार...

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।। टाइम्‍स नाउ (Times Now) और ईटी नाउ (ET Now) के एडिटर-इन-चीफ और प्रेजिडेंट-न्यूज पद से इस्‍तीफा देने के बाद अरनब गोस्‍वामी के अगले कदम के बारे में लोग तमाम तरह के कयास लगा रहे हैं। लोग जानने की कोशिश में जु

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

टाइम्‍स नाउ (Times Now) और ईटी नाउ (ET Now) के एडिटर-इन-चीफ और प्रेजिडेंट-न्यूज पद से इस्‍तीफा देने के बाद अरनब गोस्‍वामी के अगले कदम के बारे में लोग तमाम तरह के कयास लगा रहे हैं। लोग जानने की कोशिश में जुटे हैं कि अरनब अब कौन सा कदम उठाने वाले हैं और उनकी जगह मीडिया जगत की कौन सी हस्‍ती टाइम्स नाउ को संभालेगी। लोगों का मानना है कि अरनब के इस्तीफे से चैनल में बड़ी उथलपुथल होगी, जिस कारण डैमेज कट्रोल करना चैनल के लिए काफी बड़ी चुनौती होगी।

शायद ही बहुत कम लोगों को पता होगा कि जब वर्ष 2004 में एनडीटीवी छोड़कर अरनब ने बेनेट कोलमैन (Bennett Coleman) का दामन थामा था तब वे ज्यादा लोकप्रिय नहीं थे, लेकिन इतने वर्षों में अरनब ने चैनल के साथ खुद भी काफी नाम कमाया। इन वर्षों में वह न सिर्फ देश में सबसे ज्‍यादा देखने वाले न्‍यूज एंकर बन गए बल्कि अपनी दमदार एंकरिंग की बदौलत उन्होंने देश के 50 पॉवरफुल शख्सियतों की सूची में भी अपना नाम दर्ज कराया।

गोस्‍वामी के नेतृत्‍व में टाइम्‍स नाउ चैनल ने वर्ष 2006 में अपनी लॉन्चिंग के एक साल से भी कम समय में काफी ख्‍याति बटोर ली थी। वर्ष 2007 से लगातार आठ वर्षों से वह टाइम्‍स नाउ को नंबर एक के पायदान पर संभाले हुए थे और यह चैनल लगातार तरक्‍की कर रहा था। रात नौ बजे प्रसारित होने वाला उनका शो द न्‍यूजआर (The Newshour) आठ वर्षों से दर्शकों की पहली पसंद बना हुआ था और करीब 70 प्रतिशत दर्शक वर्ग पर इसने कब्‍जा जमाया हुआ है। हालांकि अब अरनब ने संकेत दिए हैं कि वह अपना न्‍यूज चैनल शुरू करेंगे। ऐसे में टाइम्‍स ग्रुप को अब किसी को उनका उत्‍तराधिकारी नियुक्‍त करना होगा।

कयास लगाए जा रहे हैं कि इस पद पर टाइम्स नाउ मीडिया जगत की जिस हस्‍ती को नियुक्‍त कर सकता है, उनमें राजदीप सरदेसाई, विक्रम चंद्रा, बरखा दत्‍त और करन थापर जैसे नाम रेस में शामिल है। ये सभी मीडिया जगत के काफी बड़े नाम हैं और सबकी अपनी क्‍वॉलिटी है। ऐसे में यह देखना काफी रोचक होगा कि इनमें से कौन अरनब गोस्‍वामी की जगह लेगा और उनकी कमी को पूरा करेगा।

यह भी बहुत कम लोग जानते हैं कि 42 वर्षीय अरनब गोस्‍वामी ने वर्ष 1994 में अपना करियर द टेलिग्राफ (The Telegraph) में बतौर ट्रेनी सब (trainee-sub) शुरू किया था और आज वह देश की आवाज बन चुके हैं।

अरनब गोस्वामी की कमी पूरा करने की दौड़ में शामिल वरिष्ठ पत्रकारों की प्रोफाइल आप यहीं पढ़ सकते हैं...

राजदीप सरदेसाई

प्रिंट और टीवी इंडस्ट्री में राजदीप सरदेसाई को 26 साल का अनुभव है। 24 मई 1965 को जन्में राजदीप सरदेसाई ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत 1988 में की थी। शुरुआत में ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुंबई एडिशन में बतौर सिटी एडिटर उन्होंने 6 वर्षों तक काम किया। 26 साल की उम्र में वे ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुंबई एडिशन के सिटी एडिटर बन गए थे। टेलिविजन क्षेत्र में उन्होंने 1994 में एनडीटीवी से बतौर पॉलिटिकल एडिटर शुरुआत की। यहां उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए बखूबी अपनी जिम्मेदारी संभाली और अंत में मैनेजिंग एडिटर के पद तक पहुंच गए थे और इसके बाद उन्होंने यहां से इस्तीफा देकर उन्होंने आईबीएन18 (IBN 18) नेटवर्क की स्थापना की और CNN-IBN के फाउंडर एडिटर बन गए। वर्तमान में वह इंडिया टुडे ग्रुप के कंसल्टिंग एडिटर हैं और चैनल के प्राइम टाइम शो की एंकरिंग करते हैं।

पत्रकारिता करियर में वे कई अवॉर्ड से सम्मानित भी किए जा चुके हैं। पिछले 26 सालों से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों को कवर करते आ रहे हैं, वैसे राष्ट्रीय राजनीति के बारे में उन्हें महारथ हासिल है। पत्रकारिता के लिए सबसे बड़ा सम्मान उन्हें साल 2008 में पद्मश्री के रूप में मिला। राजदीप सरदेसाई को 2002 के गुजरात दंगा को कवर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रसारण पुरस्कार मिला हुआ है, वहीं साल 2007 में उन्हें पत्रकारिता में बेहतर करने के लिए रामनाथ गोयनका एक्सलेंस पुरस्कार दिया जा चुका है। अपने टॉक शो के लिए वे एशियन टेलिविजन अवॉर्ड भी जीत चुके हैं। उन्हें पिछले 10 सालों में आठ बार सर्वश्रेष्ठ न्यूज एंकर का अवॉर्ड भी मिल चुका है। राजदीप सरदेसाई एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके साथ ही वे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा ‘कल के वैश्विक नेता’ (ग्लोबल लीडर फॉर टुमॉरो) चुने जा चुके हैं। सरदेसाई हिन्दुस्तान टाइम्स जैसे कई अखबारों में एक पाक्षिक स्तंभ  भी लिखते हैं।

उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया और इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक और फिर एलएलबी किया।

बरखा दत्त:

पद्मश्री से सम्मानित बरखा दत्त वर्तमान में एनडीटीवी की कंसल्टिंग एडिटर हैं और लोकप्रिय टेलिविज शो ‘वी द पीपल’ (We the People) को होस्ट करती हैं। उनका “The Buck Stops Here” शो Emmy अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हो चुका है।

हाल ही में बरखा अमेरिका के लोकप्रिय दैनिक अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ से कंट्रीब्यूटिंग कॉलमनिस्ट के तौर पर जुड़ गईं हैं और अब उनका कॉलम ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के ग्लोबल ओपिनियंस पेज पर प्रकाशित होता है।

बता दें कि बरखा दत्त ने इस साल की शुरुआत में वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता के साथ मिलकर एक नया न्यूज मीडिया वेंचर ‘द प्रिंट’ भी लॉन्च किया है। बरखा इस वेंचर की को-फाउंडर हैं।

बरखा का जन्म 18 दिसबंर 1971 में नई दिल्ली में हुआ। उनके पिता एस.पी. दत्त एयर इंडिया में काम करते थे और मां एक मशहूर पत्रकार थीं- प्रभा दत्त। वह हिन्दुस्तान टाइम्स में काम करती थीं। बरखा ने दिल्ली के मशहूर कॉलेज सेंट स्टीफंस से अंग्रेजी लिटरेचर की पढ़ाई की और इसके बाद मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया पहुंच गईं।

जामिया के बाद नौकरी के सिलसिले में वह मीडिया मुगल प्रणॉय रॉय से मिली तो उन्होंने बरखा को रिपोर्टर बनने का न्यौता दिया। कुछ महीनों तक रिपोर्टिंग के साथ-साथ बरखा ने प्रडक्शन का काम भी किया। यह ट्रेनिंग उनके लिए अच्छी साबित हुई और वह पूरी तरह पत्रकार बन गईं। वैसे उन्होंने बाद में कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की मास्टर्स डिग्री भी हासिल की। पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के लिए बरखा ने अपनी नौकरी से डेढ़ साल की छुट्टी ली। जब बरखा लौटकर आईं तो उसके आठ महीने बाद ही करगिल युद्ध शुरू हो गया। यह उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। उन्हें वॉर कवर करने के लिए कारगिल भेजा गया। टाइगर हिल पर गोलीबारी के दौरान बरखा बंकर में रही और वहीं से सेटेलाइट फोन के जरिए रिपोर्टिंग की। कारगिल युद्ध के बाद बरखा को कश्मीर, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक में रिपोर्टिंग का मौका भी मिला।

बरखा को तमाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। 2008 में उन्हें मोस्ट इंटेलिजेंट न्यूज शो होस्ट का इंडियन न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड दिया गया। उन्हें कॉमनवेल्थ ब्राडकास्टिंग एसोसिएशन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। ‘वी द पीपुल’ जैसे प्रोग्राम के लिए उन्हें बेस्ट टीवी न्यूज एंकर का सम्मान दिया जा चुका है। अपने साहस और शानदार रिपोर्टिंग के कारण बरखा ने ये सम्मान हासिल किए हैं।

भूपेंद्र चौबे-

एनडीटीवी (NDTV) से अपने करियर की शुरुआत करने वाले भूपेंद्र चौबे 16 वर्षों से अधिक समय से टीवी के लिए पत्रकारिता कर रहे हैं। राजनीतिक पत्रकार के रूप में वह देश के विभिन्‍न हिस्‍सों की यात्रा कर चुके हैं और किसी भी चीज का बारीकी से अध्‍ययन कर उसे विस्‍तार रूप देने में उन्‍हें महारत हासिल है। एनडीटीवी छोड़ने के बाद वे सीएनएन-आईबीएन (CNN-IBN) की लॉन्चिंग टीम के साथ जुड़ गए। भूपेन्द्र सीएनएन-आईबीएन के एग्जिक्यूटिव एडिटर भी रह चुके हैं। फिलहाल वे कंसल्टिंग एडिटर हैं। वे चैनल पर प्राइम टाइम शो ‘India at 9’ भी होस्ट करते थे।

चौबे ने गणित में स्‍नातक (graduate) और फिल्‍म्‍स में परास्‍नातक (post graduate) भूपेंद्र चौबे मंझे हुए राजनीतिक पत्रकार हैं और उन्‍होंने दो आम चुनाव और लगभग प्रत्‍येक राज्‍य में विधानसभा चुनाव भी कवर किए हैं। वह उन पत्रकारों में से एक हैं, जिन्‍हें राजनीति की गहरी समझ है। चौबे ने तीन आम चुनावों और ज्यादातर राज्यों के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। फिलहाल वे वीकेंड इंटरव्यू शो ‘हॉट सीट’ शो होस्ट करते हैं। वे अंग्रेजी-हिंदी अखबार और मैगजीन के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के भी कॉलमनिस्ट हैं।

राहुल शिवशंकर 

राहुल शिवशंकर ने सितंबर, 2013 में मैनेजिंग एडिटर के रूप में न्यूजX  जॉइन किया था और एक साल बाद ही उन्हें एडिटर-इन-चीफ के रूप में पदोन्नत किया गया था। शिवशंकर चैनल के वीकडेज पर प्राइम टाइम शो ‘Nation@9:00pm’ और ‘India Debates’ शो की एंकरिंग भी करते हैं।

20 साल के अपने करियर में, उन्होंने एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में हेडलाइंस टुडे (TV Today Network) और सीनियर एडिटर के रूप में टाइम्स नाउ को अपनी सेवाएं दीं।

इसके अतिरिक्त वे अहम मसलों पर अपनी टिप्पणी करते रहते हैं। शिवशंकर ने मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए नरीमन हाउस पर हमले को लेकर खोजी रिपोर्टिंग कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे बाद में रोली बुक्स ने पब्लिश भी किया था।

श्रीनिवासन जैन

श्रीनिवासन जैन 1995 से एनडीटीवी के साथ जुड़े हुए हैं और वह मौजूदा समय में चैनल के मैनेजिंग एडिटर हैं। वह एनडीटीवी24x7 (NDTV 24x7) पर ‘Truth vs Hype’ शो की एंकरिंग और वीकली ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। जैन साल 2003 से 2008 तक एनडीटीवी के मुंबई ब्यूरो चीफ थे। वह कुछ समय के लिए एनडीटीवी के बिजनेस चैनल प्रॉफिट (Profit) के भी मैनेंजिग एडिटर रह चुके हैं। वे ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ (Business Standard) अखबार के स्तंभकार भी हैं। मीडिया की निगरानी करने वाली साउथ एशिया की स्वतंत्र वेबसाइट ‘द हूट’ अपने संपादकीय कॉलम में मुजफ्फरनगर दंगो को लेकर किए गए टेलिविजन कवरेज पर जैन की प्रशंसा कर चुकी है।

विक्रम चंद्रा

विक्रम चंद्रा एनडीटीवी के पुराने दिग्गज हैं। वे 1991 से इस ऑर्गनाइजेशन से जुड़े हैं। हाल ही में वे पत्रकारिता की ओर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए एनडीटीवी में ग्रुप सीईओ पद से हट गए हैं। इस पद पर रहते हुए उन पर कंपनी के सभी पहलुओं की जिम्मेदारी थी।

देश के शीर्ष न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के बीच इस शिखर तक पहुंचने में उन्होंने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टेलिविजन का चेहरा होने के अतिरिक्त चंद्रा लंबे समय से एनडीटीवी के ऑनलाइन ऑपरेशन को भी संभाल रहे हैं। चंद्रा साल 2011 में तीन साल के लिए ग्रुप सीईओ बनाया गया था, लेकिन इसके बाद इस पद पर उनका कार्यकाल 2 सालों तक और बढ़ा दिया गया था।

वह ग्रुप के ऑनलाइन वेंचर एनडीटीवी कनवर्जेंस (NDTV Convergence) के एग्जिक्यूटिव चेयरपर्सन हैं, और इसे चंद्रा की मदद से ही 1991 में लॉन्च किया गया था। बाद में बतौर सीईओ उन्होंने इस वेबसाइट को एक नई पहचान दी।

टेक्नोलॉजी प्रेमी होने की वजह से वे एनडीटीवी के शो ‘गैजेट गुरु’ और ‘द बिग फाइट’ व 9 o’clock न्यूज शो होस्ट करते हैं। वहीं इसके अतिरिक्त चंद्रा एनडीटीवी के सोशल इनिशिएटिव ‘एनडीटीवी ग्रीनॉथन’ और ‘सेव द टाइगर्स’ प्रोग्राम्स भी होस्ट करते हैं।

सोनिया सिंह

सोनिया सिंह एनडीटीवी 24X7 की एडिटोरियल डायरेक्टर हैं। वह ‘The NDTV Dialogues’ शो भी होस्ट करती हैं। एनडीटीवी एथिक्स कमेटी की प्रेजिडेंट भी हैं।

सोनिया ने अपने करियर की शुरुआत 1992 में एनडीटीवी के साथ ही बतौर रिसर्चर की थी, जब यह एक ही शो प्रड्यूस करता था और वह भी दूरदर्शन के लिए, जिसका नाम था- ‘The World This Week’। उन्होंने कंधार हाइजैक, संसद हमला, 26/11 हमला, करगिल युद्ध, जैसिका लाल मर्डर केस जैसे अन्य महत्वपूर्ण मसलों पर बेहद विस्तृत कवरेज की है।

करण थापर

वरिष्ठ पत्रकार करण थापर इन दिनों इंडिया टुडे के साथ जुड़े हुए हैं और ‘To the Point’ और ‘Nothing But The Truth’ शो को होस्ट करते हैं। इससे पहले थापर सीएनएन-आईबीएन (CNN-IBN) के साथ जुड़े हुए थे और 'डेविल्स एडवोकेट'  (The Devil's Advocate) और ‘द लास्ट वर्ड’ (The Last Word) शो होस्ट करते थे। सीएनबीसी पर थापर ‘Tonight at 10’ प्रोग्राम भी होस्ट कर चुके हैं।

पत्रकारिता जगत में उन्हें तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है और इस बीच उन्होंने कई अवॉर्ड्स भी जीते हैं। उनका 'इनफोटेनमेंट टेलिविजन' नाम से अपना एक प्रोडक्शन हाउस भी है, जहां  बीबीसी, दूरदर्शन और चैनल न्यूज एशिया के लिए प्रोग्राम्स निर्मित होते हैं।

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