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इस देश में सिर्फ चिल्लाने पर ही आपकी बात सुनते हैं लोग: अरनब गोस्वामी
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी का मानना है कि इस देश में जब तक आप हो-हल्ला नहीं करते हैं अर्थात चिल्लाते नहीं है, तब तक कोई आपकी बात नहीं सुनता है। हाल ही में नई दिल्ली में हुई CII Big Picture Summit 2016 की पांचवी समिट में अरनब गोस्वा
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ पत्रकार अरनब गोस्वामी का मानना है कि इस देश में जब तक आप हो-हल्ला नहीं करते हैं अर्थात चिल्लाते नहीं है, तब तक कोई आपकी बात नहीं सुनता है। हाल ही में नई दिल्ली में हुई CII Big Picture Summit 2016 की पांचवी समिट में अरनब गोस्वामी ने ऐसे लोगों पर हमला बोला जो सोचते हैं कि पत्रकारिता अब भावना विहीन हो गई है। उन्होंने कई उदाहरणों के द्वारा यह भी बताया कि आज के समय में किस तरह न्यूज की दुनिया की परिभाषा ही बदल गई है।
पत्रकारिता करने की अपनी स्टाइल के बारे में अरनब का कहना था, ‘आप आज से दस साल पहले और अब की स्थिति देखें तो आपको अंतर अपने आप समझ में आ जाएगा। हमने न्यूज इंडस्ट्री को काफी बदलकर रख दिया है। हमने कई खबर ब्रेक की हैं और दुनिया को असलियत से रूबरू कराया। इसके अलावा इस तरह की रिपोर्टिंग की है, जैसी पिछले 40-50 वर्षों में नहीं हुई। यह बदलाव तभी दिखे जब हमने किए। इससे पहले न्यूज इंडस्ट्री में इस तरह के बदलाव देखने को नहीं मिले।’
कार्यक्रम में युवा पत्रकारों का आह्वान करते हुए अरनब गोस्वामी ने कहा, ‘किसी भी न्यूज को दर्शकों के नजरिये से देखें और उनके निजी विचारों को भी इसमें शामिल करें। जब आप किसी काम को करने में विश्वास रखते हैं तो आपको इसे अभियान के रूप में मानकर करना चाहिए और ऐसा करने में घबराना नहीं चाहिए।’
अरनब ने कहा, ‘इस देश में मैंने देखा है कि जब तक आप चिल्लाते नहीं हैं, कोई भी आपकी बात नहीं सुनता है और मुझे लगता है कि विनम्र (polite) एंकरिंग का दौर अब खत्म हो चुका है। यदि टीवी न्यूज को एक बदलाव करने के एजेंट के रूप में बनना है तो उसे तथ्यों के साथ लोगों के विचारों पर आधारित (opinion based) बनाना होगा। टीवी पर होने वाले डिबेट (debates) का मतलब विकीपीडिया (Wikipedia) की तरह काम करना नहीं है। टीवी न्यूज में काफी बदलाव हो रहे हैं और लोकतंत्र के लिए यह अच्छे संकेत हैं।’
भारतीय न्यूज मीडिया में तेजी से हो रहे परिवर्तन के बारे में गोस्वामी ने उन महत्वूपर्ण बातों को दोहराया जो टीवी न्यूज इंडस्ट्री में आने वाले तीन-चार सालों में होंगी। इस मौके पर उन्होंने टाइम्स नाउ (Times Now) का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे दस वषों में इसने टीवी न्यूज इंडस्ट्री को बदलकर रख दिया।
गोस्वामी के अनुसार, ‘सबसे पहला काम तो यह होगा कि न्यूज सिर्फ नई दिल्ली पर ही केंद्रित नहीं रख जाएगी और आने वाले समय में यह नेशनल न्यूज का सिर्फ इकलौता केंद्र नहीं रह जाएगी। इसके अलावा आने वाले समय में न्यूज की राजनेताओं पर अनिवार्यता खत्म हो जाएगी। लंबे समय से देश में राजनेता इसका इस्तेमाल बैसाखी के तौर पर करते रहे हैं। मैं स्वतंत्र मीडिया करना चाहता हूं जिसके अपने नियम-शर्तें हैं और इसे किसी अन्य से डरने और जवाबदेह होने की जरूरत नहीं है।’
इसके अलावा अरनब गोस्वामी ने बात को भी प्रमुखता से उठाया कि सिर्फ अच्छे वित्तीय संसाधनों से किसी भी न्यूज मीडिया की लोकप्रियता को बरकरार नहीं रखा जा सकता है। सिर्फ पैसे से आप न्यूज मीडिया में बदलाव नहीं ला सकते हैं। आपको अपनी पत्रकारिता के दम पर ही लोकप्रियता मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और डिजिटल की बढ़ती लोकप्रियता ने लोगों को एक और प्लेटफार्म उपलब्ध कराया है और इस बात में कोई शक नहीं है कि भविष्य में पत्रकारिता में भी काफी बड़े बदलाव होने वाले हैं। वास्तव में आज का समय काफी अच्छा है, जहां पर कंटेंट ही सर्वोवरि है।
गोस्वामी ने कहा कि टीवी न्यूज को लेकर इंडिया से एक ग्लोब अपील जारी की जाएगी और पत्रकारिता को उन एकाधिकार प्राप्त शक्तियों (monopolistic powers) पर काबू पाना होगा, जो आज की मीडिया को कंट्रोल करती हैं।
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