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IRS में देरी की घोषणा पर प्रिंट मीडिया के दिग्गजों ने दी ये प्रतिक्रिया
IRS में देरी की घोषणा पर प्रिंट मीडिया के दिग्गजों ने दी ये प्रतिक्रिया
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) 2016 के आंकड़े (data) जो अगले साल जनवरी तक जारी किए जाने थे,अब लेट हो गए हैं। कैलेंडर वर्ष के मुताबिक ये आंकड़े अब वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही (Q3 of 2017) में जारी किए जाएंगे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो
9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) 2016 के आंकड़े (data) जो अगले साल जनवरी तक जारी किए जाने थे,अब लेट हो गए हैं। कैलेंडर वर्ष के मुताबिक ये आंकड़े अब वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही (Q3 of 2017) में जारी किए जाएंगे।
यह भी पढ़ें: IRS को लेकर हुई बड़ी घोषणा, नहीं होगा जनवरी में जारी
हालांकि मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल’ (MRUC) की एन सत्यमूर्ति टेक्निकल कमेटी का कहना है कि इस देरी के पीछे टेक्नोलॉजी और सिक्योरिटी मुख्य कारण हैं।
उल्लेखनीय है कि मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल’ (MRUC) और ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) को मिलाकर बनाए गए ‘द रीडरशिप स्टटडीज काउंसिल ऑफ इंडिया’ (RSCI) ने इस साल मार्च के शुरुआत में जारी एक बयान में घोषणा की थी कि IRS 2016 के आंकड़े अगले साल जनवरी में जारी किए जाएंगे।
इस बीच हमने प्रिंट मीडिया के उन दिग्गजों से बात कर इस देरी पर उनके विचार जाने। इन परिणामें में देरी को लेकर उन्होंने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है।
एक बेहतर और फुलप्रूफ सर्वे की जरूरत पर बल देते हुए ‘मलयालम मनोरमा’ के वाइस प्रेजिडेंट वर्गीस चंडी का कहना है, ‘सच्ची बात तो यह है कि पिछले चार वर्षों से हमें रीडरशिप के डाटा नहीं मिले हैं।IRS 2012 Q4, IRS 2013 और 2014 के डाटा को लेकर काफी विवाद हुआ था और इन्हें जारी नहीं किया जा सकता है। ऐसे में तो देरी ही भली है, नहीं तो हमें फिर इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसलिए आईआरएस का निर्णय सही है और कम से कम देरी ही तो होगी लेकिन डाटा को सही और विश्विसनीय मिलेंगे। इन सब बातों को देखते हुए हमें एक बेहतर और फुलप्रूफ सर्वे की जरूरत है। अब सही दिशा में काम हो रहा है और इससे शेयरधारकों का कॉन्फिडेंस लेवल भी बढ़ेगा।’
‘‘कारवां’ मैगजीन के मैनेजिंग एडिटर और ‘दिल्ली प्रेस’ के डायरेक्टर अमर नाथ ने बताया कि कैसे डाटा जारी होने में हो रही देरी से इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा, ‘यह देरी इस वजह से हुई है कि इसमें सैंपल साइज काफी बड़ा रखा गया है और टीयर टू (tier 2) व टीयर थ्री (tier 3) शहरों को भी इसमें शामिल किया गया है। सर्वे में इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि डाटा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए कोई भी पहलू छूट न जाए। मेरा मानना है कि डाटा जल्दी जारी हो जाएं और गलत हों तो कोई फायदा नहीं है। इससे तो देरी ही भली है, कम से कम डाटा तो सही होंगे। इसके अलावा यह बात भी ध्यान में रखनी होगी कि पूर्व में आईआरएस की काफी आलोचना भी होती रही है, ऐसे में आलोचना से बेहतर है कि इसमें देरी हो जाए लेकिन कम से कम डाटा सही प्राप्त हों।’
आईआरएस सर्वे में देरी होने की घोषणा के बारे में ‘एचटी मीडिया लिमिटेड’ के एग्जीक्यू्टिव डायरेक्टर बिनॉय रॉय चौधरी का कहना है, ‘वे अपना काम अच्छे से कर रहे हैं और उम्मीद है कि परिणाम भी बेहतर आएंगे।’
‘साकाल मीडिया ग्रुप’ के सीईओ प्रदीप द्विवेदी का कहना है कि सर्वे के परिणाम को समय पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘दूसरी इंडस्ट्री की तरह हमें भी आईआरएस 2016 के डाटा समय से न मिल पाने के कारण निराशा हो रही है। हालांकि इसमें देरी बेहतरी के लिए हो रही है ताकि सही और विश्वसनीय डाटा उपलब्ध कराए जा सकें। उम्मीद है कि ‘Media Research Users Council’ (MRUC) जल्दा काम पूरा करेगी और एक बेहतरीन प्रिंट रीडरशिप मीजरमेंट सिस्टम को तैयार करेगी।’
‘चित्रलेखा’ ग्रुप के प्रेजिडेंट और पब्लिशर मित्रजीत भट्टाचार्य ने कहा, ‘रीडरशिप डाटा उपलब्ध कराने में काफी देर हो रही है, जिससे प्रिंट इंडस्ट्री को इसके नतीजे नहीं मिल पा रहे हैं। उम्मीद है कि आईआरएस डाटा जल्दी से जल्दी जारी कर दिए जाएंगे।’
‘एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन’ के प्रेजिडेंट आर राजमोहन का कहना है, ‘हालांकि इसमें देरी हो रही है लेकिन आरआरएस विश्वरसनीय डाटा देने के लिए काफी विस्तृत काम कर रहा है। इस परिप्रेक्ष्य से देखा जाए तो इसमें देरी होने का फायदा ही होगा। जब हमने चार साल तक इंतजार किया है तो कुछ और महीने इंतजार करने में कोई बुराई नहीं है और इसे मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। आईआरएस को इससे और विश्वोसनीय डाटा तैयार करने के लिए और समय मिल सकेगा।’
‘प्रभात खबर’ के चीफ एडिटर हरिवंश का कहना है, ‘आईआरएस के डाटा में देरी होने का मीडिया मार्केट पर काफी असर पड़ेगा। यहां तक कि इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है। मुझे उम्मीद है कि अब यह और ज्यादा लेट नहीं होंगे। इसके अलावा इसके परिणाम भी उम्मीद से और बेहतर आने की उम्मीद है।’
‘दैनिक भास्कर’ की चीफ कॉरपोरेट मार्केटिंग ऑफिसर काकून सेठी का कहना है, ‘आईआरएस के डाटा इस वजह से लेट हुए हैं क्योंकि अभी भी काफी फील्ड वर्क किए जाने की जरूरत है।’
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