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...जब पुलिस के जवानों ने फूंके पत्रकारों के पुतले
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। छत्तीसगढ के बस्तर में नक्सलियों से लोहा लेने वाले डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप (डीआरजी) के जवानों ने सोमवार को नेताओं और पत्रकारों के पुतला फूंके। उनका आरोप था कि वे नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, जानें गंवा रहे हैं, लेकिन नेता इनका राजन
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
छत्तीसगढ के बस्तर में नक्सलियों से लोहा लेने वाले डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप (डीआरजी) के जवानों ने सोमवार को नेताओं और पत्रकारों के पुतला फूंके। उनका आरोप था कि वे नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, जानें गंवा रहे हैं, लेकिन नेता इनका राजनीतिकरण कर रहे हैं और कुछ पत्रकार बेवजह इन्हें तूल दे रहे हैं।
जवानों का कहना है कि वे लड़ रहे हैं और उन्हीं पर फर्जी मुठभेड़, फर्जी आत्मसमर्पण, आदिवासियों का घर जलाने का आरोप लग रहा है।
संभाग मुख्यालय जगदलपुर में पुलिस जवानों ने सोमवार को एक साथ आठ पुतले फूंके। इनमें सीपीआई नेता मनीष कुंजाम, आम आदमी पार्टी की सोनी सोरी, पत्रकार मालिनी सुब्रह्मण्यम, समाजसेवी हिमांशु कुमार, नंदिनी सुंदरम, बेला भाटिया समेत अन्य लोगों के पुतले थे।
पुलिस जवानों ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के पुतले जलाए गए, उनकी नक्सलियों से मिलीभगत है। नक्सलियों द्वारा जो लेवी वसूली होती है, उसमें से इन्हें भी हिस्सा दिया जाता है और इसके बाद ये सुरक्षा बलों को बदनाम करते हैं। जवानों ने आरोप लगाया कि इसके लिए ये लोग सुप्रीम कोर्ट में भी झूठी जानकारी उपलब्ध करवाते हैं।
पुतला जला रहे सहायक आरक्षक नरेश कुमार नाग ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वह आदिवासी हैं। सात साल से नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन मनीष कुंजाम, बेला भाटिया, सोनी सोरी गांव-गांव में पुलिस के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। आरक्षक से जब यह पूछा गया कि क्या इस तरह से पुतला जलाना पुलिस नियमावली के खिलाफ नहीं है, तो उसने कहा कि नक्सलियों का हर तरह से विरोध जरूरी है।
जगदलपुर के अलावा कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा सहित अन्य जिला मुख्यालयों में भी जवानों द्वारा पुतले फूंके जाने की खबरें हैं। सुकमा में जवानों ने रैली भी निकाली।
अब तक आपने पुलिस के जवानों को हमेशा राजनीतिक दलों या अन्य संगठनों की तरफ से किए जाने वाले पुतला दहन कार्यक्रम को रोकते हुए देखा होगा, लेकिन ये स्वतंत्र भारत के इतिहास में संभवत: पहला मौका होगा जब छत्तीसगढ़ पुलिस के सहायक आरक्षकों ने बस्तर संभाग में रैली निकालकर नक्सलियों का समर्थन करने के आरोप में सामाजिक कार्यकर्ताओं, नेताओं और पत्रकारों के पुतले जलाए और अपना विरोध जताया।
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