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मोदी उवाच: बेलगाम लेखनी भारी समस्याएं पैदा कर सकती है लेकिन बाहरी नियंत्रण तो तबाही ला सकता है...
प्रेस की आजादी की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया में सरकार के दखल न होने को बात कही है।उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी अहम है इसलिए मीडिया में सरकार का दखल बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। मोदी ने मीडिया में आत्मनियंत्रण की व्यवस्था को भी सही बताया। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि गलतियों से मीड
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
प्रेस की आजादी की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया में सरकार के दखल न होने को बात कही है।उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी अहम है इसलिए मीडिया में सरकार का दखल बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। मोदी ने मीडिया में आत्मनियंत्रण की व्यवस्था को भी सही बताया। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि गलतियों से मीडिया का मूल्यांकन करना गलत है। उन्होंने कहा कि मीडिया को समय के साथ उचित परिवर्तन और नई पीढ़ी को तैयार करने के लिए भी स्वयं सोचना चाहिए।
मोदी ने हाल में पत्रकारों की हत्या पर दुख प्रकट किया। उन्होंने कहा कि सच को दबाने का यह तरीका बहुत दर्दनाक होने के साथ-साथ खतरनाक भी है। उन्होंने कहा कि इसके प्रति राज्य सरकारें भी संवेदनशील हों। राज्य सरकारों का यह दायित्व है कि वह इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाएं।
मोदी ने आगे कहा कि सरकार के सूचना देने के 30 साल पुराने तरीके अब नहीं चल सकते हैं। भारतीय प्रेस परिषद इस स्थिति में बदलाव लाने में सरकार की मदद कर सकती है और इस सरकार में बैठे लोगों को भी इसमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
मोदी ने कहा कि मीडिया के क्षेत्र में तेज बदलाव और स्पर्धा के बीच खबरों को उसके वास्तविक अभिप्राय के साथ पेश करना बहुत मुश्किल हो गया है। ऐसी स्थिति में मीडिया को स्वनियमन करने के लिए आत्मावलोकन करना चाहिए। उन्होंने इस संदर्भ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कथन का जिक्र किया कि, 'बेलगाम लेखनी भारी समस्याएं पैदा कर सकती है लेकिन मीडिया पर बाहरी नियंत्रण तो तबाही ला सकता है। इसलिए मीडिया को बाहर से नियंत्रित करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।'
प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनियंत्रण कोई आसान काम नहीं है। लेकिन, सरकार को इसके कामकाज में कोई दखल नहीं देना चाहिए। यह प्रेस परिषद की जिम्मेदारी है और जो लोग प्रेस से जुड़े हुए हैं, उन्हें देखना चाहिए कि समय के साथ इसमें किस तरह के बदलाव की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कंधार विमान अपहरण के समय खबरों की रिपोर्टिंग अनियंत्रित हो जाने पर मीडिया ने आत्मावलोकन करने के बाद अपने लिए नियम खुद तय किए थे। इसी तरह अमेरिका में हुए 26/11 के आतंकवादी हमले के दौरान भी मीडिया ने आत्मावलोकन किया था।
उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ सम्बन्धों को मजबूत बनाने में मीडिया की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल में आए भूकम्प के दौरान मीडिया की तत्परता के कारण ही सरकार उसकी तेजी से मदद कर पाई। मानवता के लिए कार्य करने में मीडिया और सरकार को एक-दूसरे का पूरक होना चाहिए।
भारतीय प्रेस परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, 'पत्रकारिता का एक अनिवार्य हिस्सा यह भी है कि जो दिखता है, सुनाई देता है, उसके सिवाय भी कुछ खोजना चाहिए।'
पीएम ने कहा कि अक्सर कई पत्रकार मित्रों की शिकायत होती है कि सूचनाएं मिल ही नहीं पाती हैं। मोदी ने इस समस्या को सरकारों के भीतर पसंदीदा पत्रकारों के लिए सिलेक्टिव लीकेज (खबर देने) जैसी बुराई का नाम दिया। पीएम ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए।
पीएम मोदी ने अभिव्यक्ति की आजादी के संदर्भ में ही बोलते हुए आपातकाल के दौर की भी याद दिलाई। मोदी ने कहा कि हम सभी को याद है कि कैसे आपातकाल के दौर में प्रेस परिषद को बंद कर दिया गया था। उन्होंने इमर्जेंसी में मीडिया की आवाज दबाने का जिक्र करते हुए कहा कि हालात तब सुधरे जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। पीएम ने मीडिया की सकारात्मक भूमिका पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि मीडिया ने राज्यवार विकास की रिपोर्ट प्रकाशित कर राज्यों के बीच सकारात्मक कॉम्पिटिशन का भाव विकसित किया है।
यहां सुने पीएम मोदी का पूरा भाषण:
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