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HC के फैसले के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने इन ब्रॉडकास्ट कंपनियों को दी राहत...
दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने दो ब्रॉडकास्ट कंपनियों के चैनलों के लाइसेंस बहाल कर दिए हैं, जिनमें महुआ मीडिया और एसटीवी एंटरप्राइजेज के चैनलों के लाइसेंस शामिल हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में मंत्रालय से कहा कि अगले आदेश आने तक इनके लाइसेंस बहाल कर दिए
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने दो ब्रॉडकास्ट कंपनियों के चैनलों के लाइसेंस बहाल कर दिए हैं, जिनमें महुआ मीडिया और एसटीवी एंटरप्राइजेज के चैनलों के लाइसेंस शामिल हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में मंत्रालय से कहा कि अगले आदेश आने तक इनके लाइसेंस बहाल कर दिए जाएं। एसटीवी एंटरप्राइजेज के चार नए लाइसेंस बहाल किए गए हैं, जिनमें ‘पंजाब टुडे’, ‘एसटीवी जम्मू-कश्मीर न्यूज’, ‘एसटीवी हरियाणा न्यूज’ और ‘एसटीवी यूपी न्यूज’ शामिल हैं। वहीं महुआ मीडिया के पांच टीवी चैनलों के लाइसेंस बहाल किए गए हैं, इनमें से तीन न्यूज और दो अन्य चैनलों के लाइसेंस हैं। न्यूज चैनलों में ‘महुआ’, ‘महुआ न्यूज’ और ‘फर्स्ट इंडिया’ शामिल हैं, जबकि दो नॉन-न्यूज चैनलों में ‘महुआ म्यूजिक’ और ‘महुआ मूवीज’ का नाम शामिल है।
दरअसल गृह मंत्रालय ने इन ब्रॉडकास्ट कंपनियों को सुरक्षा मंजूरी देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद महुआ मीडिया के चैनलों के लाइसेंस इस साल 3 मार्च को रद्द कर दिए गए थे, जबकि एसटीवी एंटरप्राइजेज के लाइसेंस को 21 जुलाई को रद्द कर दिया गया था।
कंपनियों ने यह दलील देते हुए लाइसेंस रद्द करने के मंत्रालय के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है कि सरकार ने सुरक्षा मंजूरी न देने के लिए कारण स्पष्ट नहीं किए हैं और ऐसा करने की जो वजहें बताई भी गईं हैं, वे कानून के सामने कहीं टिकती नहीं हैं।
एसटीवी के मामले में जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने एक तात्कालिक अंतरिम आदेश जारी किया और याचिकाकर्ता को उसके चैनल अपलिंक व डाउनलिंक करने की इजाजत दे दी। बेंच ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जो मसला उठाया है, कंपनी का प्रथमदृष्टया उससे कोई सीधा वास्ता नहीं है और इस मसले से राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई उल्लंघन नहीं होता।
महुआ की याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कंपनी को उसके टीवी चैनलों को अपलिंक और डाउनलिंक करने की अनुमति दे दी है, लेकिन बेंच ने महुआ को निर्देश दिया है कि वो अदालत की अनुमति के बिना अपने शेयर, लाइसेंस या कोई भी संपत्ति किसी अन्य को ट्रांसफर न करे।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि महुआ के ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा के उल्लंघन का मामला नहीं बनता और उसके ऊपर जो आपराधिक मामले हैं, वे सीबीआई अदालत में विचारधीन चल रहे हैं।
महुआ के प्रवर्तकों के ऊपर आरोप है कि उन्होंने जाली और झूठे दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से भारी मात्रा में उधार लेकर उनके साथ धोखाधड़ी की है।
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