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विनोद दुआ पर लगे आरोपों की जांच कर रही समिति ने लिया बड़ा निर्णय
वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए गठित...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 7 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो।।
वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय बाहरी समिति ने अपने आप ही मामले से पैर खींचते हुए खुद को भंग कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज आफताब आलम की अध्यक्षता वाली इस समिति के सदस्यों में पटना हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश, प्रोफेसर नीरा चंढोक, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह और प्रोफेसर पैट्रिशिया ओबेराय शामिल थे।
‘newslaundry’ वेबसाइट में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, 30 दिसंबर को जारी अपनी रिपोर्ट में कमेटी का कहना था कि वह इस मामले में अपना काम आगे नहीं बढ़ा पा रही है, क्योंकि दोनों पक्ष बिना शर्त सहमति देने के लिए तैयार नहीं हैं।
कमेटी के अनुसार, विनोद दुआ ने एक लिखित बयान जारी कर गुजारिश की थी कि उनके इसी बयान को इस मामले में आखिरी जवाब माना जाए, इसके बाद वह कोई जवाब नहीं देंगे। तय शर्तों पर जांच करने और दोनों पक्षों द्वारा बिना शर्त सहमति न देने के कारण वह अपना काम आगे नहीं बढ़ा पा रही है। ऐसे में समिति का कोई औचित्य नहीं है।
समिति का यह भी कहना है, ‘हमारे लिए इस प्रक्रिया को ज्यादा लंबा खींचने का कोई सार्थक उद्देश्य नजर नहीं आता है और हम मामले को आगे खींचने में असमर्थ हैं, इसलिए इस कमेटी को भंग किया गया है।’
बता दें कि दुआ के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप निष्ठा जैन नाम की एक महिला फिल्म निर्माता ने लगाया था। 14 अक्टूबर को फेसबुक पोस्ट में लगाए गए इन आरोपों में निष्ठा जैन का कहना था कि 1989 में वह विनोद दुआ से जॉब इंटरव्यू के सिलसिले में मिली थीं तो विनोद ने उन पर अश्लील जोक मारे थे। यही नहीं, कहीं और जॉब लग जाने तक वे उनका पीछा करते रहे थे।
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