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मीडिया और समाज में सद्भाव पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: नैतिक पत्रकारिता और साझा विरासत पर जोर
मीडिया, शिक्षा और समाज में अंतरधार्मिक नैतिकता, सद्भाव और संवाद की जरूरत पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने साझा संस्कृति, जिम्मेदार पत्रकारिता और सामाजिक एकता को मजबूत करने की अपील की।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 days ago
नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में इंटर फेथ हार्मनी फाउंडेशन ऑफ इंडिया और शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज के संयुक्त तत्वावधान में “मीडिया और पब्लिक डिस्कोर्स में इंटरफेथ एथिक्स” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देश भर के शिक्षाविदों, मीडिया विशेषज्ञों और सामाजिक नेताओं ने भाग लिया।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि गांधी स्मृति और दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल ने कहा कि धर्म का संबंध शिक्षा और नैतिकता से है। उन्होंने कहा कि धर्म सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाता है और समाज में शांति और सद्भाव को मजबूत करता है। नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज के निदेशक डॉ. शम्स इकबाल ने कहा कि उर्दू भाषा और साहित्य ने भारत की साझा संस्कृति को मजबूत किया है।
उन्होंने बताया कि उर्दू शायरी और साहित्य समाज में मेलजोल और आपसी समझ को बढ़ावा देते हैं। इंटर फेथ हार्मनी फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद ने कहा कि आज के समय में सद्भाव सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत विविधता में एकता का प्रतीक है और यहां सभी धर्मों और समुदायों को समान सम्मान प्राप्त है।
संगोष्ठी में न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी, डॉ. दिनेश दुबे, एम. वदूद साजिद, मोहम्मद वजीहुद्दीन और डॉ. आमना मिर्जा सहित कई वक्ताओं ने मीडिया की जिम्मेदारी और नैतिक पत्रकारिता की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया समाज में संतुलन और सकारात्मक संवाद को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि जामिया हमदर्द के कुलपति प्रो. एम. अफशार आलम ने कहा कि भारत की पहचान उसकी साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से है। उन्होंने समाज में आपसी सम्मान और सद्भाव को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि अंतरधार्मिक संवाद, नैतिकता और जिम्मेदार मीडिया समाज में शांति और एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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