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जानिए, नोटबंदी पर कैसी रही इन डिजिटल न्यूज पोर्टल्स की कवरेज
जानिए, नोटबंदी पर कैसी रही इन डिजिटल न्यूज पोर्टल्स की कवरेज
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए और कालेधन को बाहर निकालने के लिए आठ नवंबर को पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद करने की घोषणा करने के साथ ही देश में अफरातफरी का माहौल है। ऐसे में उन लोगों को ज्यादा पर
समाचार4मीडिया ब्यूरो
9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए और कालेधन को बाहर निकालने के लिए आठ नवंबर को पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद करने की घोषणा करने के साथ ही देश में अफरातफरी का माहौल है। ऐसे में उन लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिनका रोजाना का काम नकद होता है क्योंकि उनके पास पैसा नहीं है और पुराने पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट चल नहीं रहे हैं। हाल यह है कि इस घोषणा के बाद से बैंकों के बाहर रोजाना नोट बदलवाने अथवा निकालने और जमा करने के लिए लंबी लाइन लग रही है। इस बीच घंटों लाइन में लगने के बावजूद कुछ लोगों को सफलता हाथ नहीं लगती है।
इन सबके बीच बड़े बैंकों के प्रमुख जैसे आईसीआईसीआई (ICICI Bank) बैंक की सीईओ चंदा कोचर और ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ (SBI) की चेयरपर्सन अरुंधति भट्टाचार्य ने प्रधानमंत्री के इस कदम को काफी साहसिक और क्रांतिकारी (bold and revolutionary) बताते हुए इसका स्वागत किया है और लोगों को लेन-देन में किसी तरह की परेशानी न होने देने के अपने संकल्प को दोहराया है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि मीडिया ने प्रधानमंत्री के इस कदम को किस रूप में लिया है। इसके लिए हमें यह देखना होगा कि प्रमुख डिजिटल न्यूज पोर्टल ने नोटबंदी को किस तरह रिपोर्ट किया है। आइए देखते हैं इन न्यूज पोर्टल ने नोटबंदी की कवरेज किस तरह की है।
फर्स्टपोस्ट (Firstpost)
दूसरों की तरह न्यूज पोर्टल ‘फर्स्टपोस्ट’ भी सरकार की इस घोषणा के बाद हुए असर पर नजर रखे हुए है। वहीं महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों व शहरी क्षेत्रों में अपनी इन्वेस्टीगेशन के अनुसार इसका प्रभाव जानने की कोशिश कर रहा है। ‘फर्स्टपोस्ट’ के अनुसार ग्रेटर मुंबई के लोगों ने प्रधानमंत्री के इस कदम का स्वागत किया है और भविष्य बेहतर होने की उम्मीद जताई है। वहीं अन्य जिलों के लोगों के हवाले से इसमें बताया है कि इस तरह इस निर्णय से उनकी दिनचर्या बदल गई है। इसमें यह भी दिखाया गया है कि नोटबंदी के फैसले का तमिल फिल्म इंडस्ट्री और शराब की बिक्री समेत अन्य सेक्टरों पर कितना असर पड़ा है। वहीं संसद में विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रिया को भी दिखाया गया है। इसमें इस तरह के आर्टिकल भी दिए गए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में किस तरह की समस्या हो रही है और सरकार वहां के लिए क्या कर रही है। इस न्यूज पोर्टल में यह भी दिखाया गया है कि नोटबंदी का क्या फायदा होगा आर किस तरह जमीनों के रेट कम हो जाएंगे। कुल मिलाकर इस न्यूज पोर्टल ने सरकार के इस कदम पर दोनों तरफ की स्टोरी दी हैं और अपना रवैया तटस्थ (neutral) रखा है।
द वॉयर (The Wire)
Thewire.in ने नोटबंदी से आम आदमी जैसे प्लंबर्स, घरेलू सहायक आदि पर पड़ने वाले नेगेटिव प्रभाव की कवरेज दी है। इसमें यह भी बताया गया है कि इस कदम से गरीब और कमजोर लोगों के सामने नई समस्या पैदा हो गई है। इस पोर्टल की कवरेज में दिखाया गया है कि कैसे मणिपुर में इस वजह से अखबार बंद हो गए और बार्डर के लोगों के लिए भूटानी करेंसी सहारा बनी हुई है। इसके अलावा मशहूर अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक के साक्षात्कार द्वारा बताया गया है कि सरकार की इस घोषणा का क्या प्रभाव पड़ेगा। इसमें यह भी कवरेज दी गई है कि नोटबंदी के इस फैसले का आने वाले महीनों में काफी प्रभव पड़ेगा और इससे अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। कुल मिलाकर अपने कवरेज में इसने स्पष्ट किया है कि इस कदम का कोई फायदा नहीं होगा और इससे कुछ भी बदलने वाला नहीं है।
स्क्रॉल (Scroll)
इस न्यूज पोर्टल की कवरेज में दिखाया गया है कि महाराष्ट्र के आदिवासी गांवों में ग्रामीणों के पास चावल खाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। इसमें यह भी रिपोर्ट दी गई है कि कैसे ‘माइक्रोसॉफ्ट’ के संस्थापक बिल गेट्स ने कहा था इसे शैडो इकॉनमी से बाहर निकलने की दिशा में महत्वपूर्ण और साहसी कदम करार दिया था। इसके अलावा इसमें नोटबंदी से किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव के साथ ही मार्केट की स्थिति और शादियों में हो रही दिक्कतों को भी कवर किया गया है। अपने हाल ही में लिखे आर्टिकल में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध का जिक्र किया गया है। कुल मिलाकर इसकी कवरेज में एक दो उदाहरणों को छोड़कर सरकार की मुहिम से पड़ने वाले नकरात्मक प्रभावों को ही ज्यादा दिखाया गया है।
द क्विंट (The Quint)
TheQuint.com में नोटबंदी के प्रभाव की चर्चा करने के साथ ही विज्ञापनों (ad campaign) पर दस करोड़ रुपये खर्च करने के बारे में भी बताया गया है। इसमें तकनीक विशेषज्ञों के हवाले से बताया गया है कि किस तरह इससे कैशलेस व्यवस्था में सुधार आएगा। जिन लोगों के पास बैंक खाते नहीं है, बैंकों द्वारा जब्त की गई नकदी के साथ ही इससे बुजुर्गों को होने वाली परेशानी की कवरेज भी की गई है। इसमें पत्रकार पी साईनाथ की उस स्टडी का हवाला भी दिया गया है कि सरकार के इस कदम का ग्रामीण इलाकों में क्या प्रभाव पड़ेगा। इसकी कवरेज में यह धारणा भी खत्म करने की कोशिश की गई है कि कैसे इस फैसले से काला धन निकलकर आएगा। The Quint में यह भी कवरेज दी गई है कि सरकार के उस फैसले से काफी लोगों को राहत मिली है, जो परिवार में शादी होने पर ढाई लाख रुपये निकाल सकते हैं। यदि कुछ आर्टिकल्स को छोड़ दें तो राघव बहल के इस न्यूज पोर्टल में सरकार के नोटबंदी के फैसले से आम आदमी पर पड़ने वाले असर को दिखाया गया है।
हफिंगटन पोस्ट इंडिया (Huffington Post India)
इस न्यूज पोर्टल में भी सरकार के नोटबंदी के फैसले के प्रति नकारात्मक पहलू ज्यादा दिखाए गए हैं। विभिन्न आर्टिकल्स के जरिये ये बताया गया है कि कैसे इस फैसले से लोगों को तमाम तरह की परेशानियां हो रही हैं। एक आर्टिकल में यह बताया गया है कि अगले साल होने वाले चुनावों में इसका क्या असर होगा। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि इससे डिजिटल भुगतान होने के काफी फायदे होंगे और पेपरलेस काम को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा एक आर्टिकल के जरिये इसमें यह भी बताया गया है कि काला धन रखने वाले किस तरह चिंतित हैं और अपनी पूंजी को बचाने के लिए किस तरह से तमाम उपायों की तरफ गौर कर रहे हैं। इस न्यूज पोर्टल में वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षाविद जैसे मनु जोसेफ, स्वप्न दास गुप्ता और परीक्षित घोष के नोटबंदी के बाद के बयानों और इस निर्णय के बाद पड़ने वाले प्रभावों को भी हाईलाइट किया गया है।
द न्यूज मिनट (The News Minute)
TheNewsminute.com में इस तरह की स्टोरी प्रकाशित की गई हैं कि कैसे सरकार की इस घोषणा से आम आदमी खासकर जो दूसरे राज्यों से आकर यहां रह रहे हैं, उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई है। इसके अलावा यह भी बताया गया है कि कैसे इससे टूरिज्म सेक्टर काफी प्रभावित हुआ है। जहां दूसरी न्यूज साइट्स बता रही हैं कि नोटबंदी से किस तरह की समस्या हो रही है वहीं इस डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म पर यह भी दिखाया गया है कि कैसे कुछ लोग परेशानियां झेलने के बावजूद सरकार के इस कदम की सराहना कर रहे हैं। कुल मिलाकर नोटबंदी पर कवरेज के मामले में इस न्यूज पोर्टल ने तटस्थ (neutral) रवैया अपनाया है और दोनों तरह की खबरें दी हैं।
ओपीइंडिया (Opindia)
इस न्यूज वेबसाइट पर नोटबंदी की कवरेज अलग तरीके से की गई है। शुरुआत में, इसमें बताया गया है कि किस तरह पहले अफवाह फैलती थी कि एटीएम (ATM) के कारण लोगों में बीमारी में फैल रही है और बाद में तथ्यों के द्वारा इस भ्रम को दूर किया है। इसके अलावा इस तरह की अफवाहों पर भी विराम लगाने की कोशिश की गई है कि कैसे आतंकिी दो हजार रुपये के नोट का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक आर्टिकल में यह भी बताने की कोशिश की गई है कि नोटबंदी का लाइन में लगकर हुई मौत के मामलों से कोई संबंध नहीं है। कुल मिलाकर इस न्यूज वेबसाइट ने नोटबंदी पर सकारात्मक रुख दिखाया है। इसमें एक स्टोरी इस पर भी की गई है कि कैसे दो हजार रुपये के नोट से रंग छूट रहा है।
यदि हम ऊपर दी गई रिपोर्ट्स की मानें तो यह साफ है कि ‘Opindia’ के अलावा किेसी भी डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म में नोटबंदी को लेकर सकारात्मकता नहीं दिखाई गई है। यह स्थित 30 दिसंबर तक इसी तरह चलने की संभावना है यह वह तारीख है जिस दिन तक लोग देश भर में स्थित बैंकों में अपने पुराने नोट जमा करा सकते हैं। हालांकि शुक्रवार से बैंकों में 500 और 1000 के पुराने नोट नहीं बदले जाएंगे। वहीं अस्पतालों, पेट्रोल पंपों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर अब 15 दिसबंर तक केवल 500 के पुराने नोट लिए जाएंगे। 1000 के नोट केवल बैंकों में जमा कराए जा सकेंगे।
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